Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने SCO में उठाया सिंधु जल संधि का केस फिर क्या हुआ?

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। पिछले दिनों भारत ने इस मामले में आर्बिट्रेशन बॉडी को ही गैर कानूनी बताते हुए इसके फैसले को खारिज कर दिया। इससे आहत होकर पाकिस्तान ने अब शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक में इस मामले को उठाया है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत के साथ इस मसले को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि शेयर्ड वॉटर रिसोर्स का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ उठाने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

शहबाज शरीफ ने इसे अपने इलाके की जीवनरेखा से जोड़ते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों के जीवन, खेती और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। शहबाज शरीफ ने यहां तक कहा कि इसके लिए जो संधियां हैं, उन्हें दोनों पक्षों द्वारा माना जाना चाहिए।

‘द हेग’ के फैसले पर भारत ने दिखाया सख्त रुख तो बिलबिलाया पाकिस्तान

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत द्वारा ‘द हेग’ स्थित पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के सिंधु जल संधि से जुड़े फैसले को खारिज करने के ठीक एक दिन बाद आई है। मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 1960 की सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है। भारत को इस समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करना जारी रखना चाहिए। मध्यस्थता फोरम के मुताबिक इसमें पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाले नियम भी शामिल हैं।

इसका तगड़ा जवाब देते हुए भारत ने इस मध्यस्थता निकाय को ही गैर-कानूनी रूप से गठित बता दिया। इस कदम के साथ ही साथ भारत ने साफ और स्पष्ट लहजे में दुनिया को बता दिया कि ऐसे मध्यस्थता निकाय के पास भारत के संप्रभु निर्णयों के ऊपर कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ कहा कि संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अभी भी पूरी तरह से लागू है।

क्यों स्थगित की गई थी सिंधु जल संधि?

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान जाने के बाद भारत ने 1960 की इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत का कहना है कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। पाकिस्तान ने इस हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था।

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यह विवाद तब और तेज हो गया जब भारत ने जम्मू और कश्मीर में अपनी जलविद्युत परियोजनाओं पर काम की रफ्तार बढ़ा दी। पाकिस्तान सिंधु जल संधि का हवाला देकर भारत की इन परियोजनाओं का लगातार विरोध करता रहा है।

PNB की करेंसी चेस्ट से निकले 17 करोड़ के जाली नोट, असली नोट गायब कर ऐसे हुआ खेल

PNB की करेंसी चेस्ट से निकले 17 करोड़ के जाली नोट, असली नोट गायब कर ऐसे हुआ खेल

pnb fake note scam

PNB Fake Note Scam: सहारनपुर के सोफिया मार्केट स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करेंसी चेस्ट में ऑडिट के दौरान 17 करोड़ रुपये के जाली नोट बरामद हुए हैं। 500-500 रुपये के नए नोटों वाले 340 बंडलों में मिले इन नकली नोटों ने बैंक अधिकारियों से लेकर सुरक्षा और जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। ALSO READ: Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

 

प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आई नई करेंसी की फोटोकॉपी या प्रिंट निकालकर असली नोटों को चेस्ट से पार कर दिया गया और उनकी जगह इन नकली नोटों को खपा दिया गया।

 

23 मशीनों से हुई नोटों की गिनती और सीरियल नंबर की जांच

बैंक अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए सभी 340 बंडल 500 रुपये के नए नोटों के हैं। इतनी भारी मात्रा में मिले नकली नोटों की सटीकता से जांच और गिनती के लिए कुल 23 मशीनों को लगाया गया था। हर एक नोट को मशीन से गुजारने के साथ उसके सीरियल नंबर की भी बारीकी से पड़ताल की गई है।

बैंक के एक पार्टटाइम हाउसकीपर से जुड़े चोरी के मामले की जांच के दौरान इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जिसके बाद करेंसी चेस्ट के भीतर रखे नोटों की विस्तृत जांच शुरू की गई। ALSO READ: सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान केस में बड़ा मोड़, बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच की जिम्मेदारी

 

तीन बैंक अधिकारी गिरफ्तार, जल्द खुलेगा राज

इस मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ मंडल प्रबंधक कार्यालय के रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील कुमार और जगाधरी के करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि इन आरोपियों से पूछताछ के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि 17 करोड़ रुपये के असली नोट बैंक से कब और कैसे बाहर निकाले गए और उनकी जगह यह नकली खेप किसने और कैसे पहुंचाई।

भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति, चीन से 127% महंगी बिजली क्यों खरीद रहा बांग्लादेश?

Bangladesh Story: बांग्लादेश की तारिक रहमान की सरकार एक तरफ जहां भारत के मामूली पावर चार्ज पर आपत्ति जता रही है। वहीं, दूसरी तरफ वह चीनी कंपनी से बेहद महंगी दरों पर बिजली खरीदने की तैयारी कर रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिनों पहले ढाका ने सीमा पार बिजली लेनदेन के निपटान के लिए भारत द्वारा प्रस्तावित 0.01 रुपये प्रति यूनिट (1 पैसा) के चार्ज पर आपत्ति जताई थी। बांग्लादेश की आपत्ति के बाद भारत ने इस प्रस्तावित चार्ज को घटाकर आधा यानी 0.005 रुपये प्रति यूनिट कर दिया था।

अमीनबाजार में चीन का प्रोजेक्ट: वेस्ट मैनेजमेंट है उद्देश्य

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका के अमीनबाजार लैंडफिल में बनने वाले चीनी प्रोजेक्ट की प्लांड कैपिसिटी 42 मेगावाट होगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की राजधानी में बढ़ते वेस्ट मैनेजमेंट क्राइसिल का हल निकालना है। यह प्रोजेक्ट बिजली निर्माण का काम एक्स्ट्रा फायदे के लिए करेगा। आपको बता दें कि इस 42 मेगावाट के प्रोजेक्ट को भारत द्वारा बांग्लादेश को बड़े पैमाने पर की की जाने वाली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई का रिप्लेसमेंट नहीं माना जा सकता।

बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट, गैस सप्लाई में रुकावट और लंबे समय तक होने वाले ब्लैकआउट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती को लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे संवेदनशील समय में चीनी कंपनी को 25 टका प्रति यूनिट देने का फैसला लिया गया है। यहां जानना जरूरी है कि अभी बांग्लादेश का एक टका भारत के 0.77 रुपये के करीब है।

इंपोर्टे़ बिजली के औसत खर्च से दोगुने से भी अधिक रेट

बांग्लादेश के न्यूज पेपर द डेली स्टार के मुताबित वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2024-25 के बीच बांग्लादेश में इंपोर्टेट बिजली की औसत लागत दोगुने से अधिक हो गई है। ये 5.82 टका प्रति यूनिट से बढ़कर 11.72 टका प्रति यूनिट हो गई थी। इस बैकग्राउंड में देखें तो अमीनबाजार वेस्ट-टू-पावर प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित 25 टका प्रति यूनिट का टैरिफ बांग्लादेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में इंपोर्ट की गई बिजली के लिए चुकाई गई औसत कीमत से दोगुने से भी अधिक है।

ढाका शहर से निकलने वाले कचरे के पहाड़ों से बिजली और दूसरे जरूरी प्रोडक्ट्स बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि 25 टका की इस दर ने बांग्लादेश की बिजली रणनीति की कॉस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। वह भी खासकर तब जब बिजली की हर एक अतिरिक्त यूनिट और लागत की जांच की जा रही है।

भारत से बिजली आपूर्ति और 1 पैसे के चार्ज का विवाद समझिए

‘द डेली स्टार’ के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में बांग्लादेश के कुल बिजली खरीद खर्च में भारत से इंपोर्ट बिजली की हिस्सेदारी लगभग 15.8% थी। उस वर्ष बांग्लादेश ने कुल 121420 करोड़ टका के बिजली खरीद बजट में से भारत से इंपोर्ट की गई बिजली के लिए करीब 19225 करोड़ टका का पेमेंट किया था।

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अगर इसकी तुलना करें तो चीन का 42 मेगावाट वाला प्रोजेक्ट बेहद मामूली क्षमता का है। भारत और चीन के बीच यह अंतर तब और अधिक सामने आया है जब बांग्लादेश ने भारत के सेटलमेंट नोडल एजेंसी चार्ज पर आपत्ति उठाई। भारत की केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) द्वारा सीमा पार बिजली व्यापार के लिए एसएनए चार्ज लागू करने के फैसले के बाद 24 अगस्त को भारत ने बांग्लादेश को सप्लाई की जाने वाली बिजली पर 0.005 रुपये (आधा पैसा) प्रति यूनिट का SNA चार्ज प्रस्तावित किया था।

क्या है सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का केस जिसकी अब CBI करेगी जांच? 2020 से अबतक ये सब हुआ

Disha Salian Case: दिवंगत बॉलीवुड सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में बुधवार (2 सितंबर) को बड़ा कानूनी मोड़ आ गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (2 सितंबर) को दिवंगत बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच का आदेश दिया। इस दौरान अदालत ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि जांच अधिकारी को उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिल जाएं। कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि जांच के लिए एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति की जाए। साथ ही मामले में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर आगे की जांच की जाएगी।

यह मामला दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका के बाद एक बार फिर बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने आया था। सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाए थे कि परिवार की ओर से संदेह जताए जाने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई?

‘बिना सबूत किसी को भी आरोपी न माना जाए’

हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक जांच में किसी के खिलाफ ठोस सबूत न मिल जाएं, तब तक किसी को भी आरोपी न माना जाए। अदालत ने कहा, “अगर कोई गंभीर अपराध (कॉग्निज़ेबल ऑफ़ेंस) बनता है, तो इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए। अगर कोई गंभीर अपराध नहीं बनता है, तो जजों ने जांच अधिकारी (I.O.) को आदेश दिया है कि वे सक्षम अदालत में मामले को बंद करने की उचित प्रक्रिया शुरू करें।” दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की इजाजत दी गई है।

CBI दर्ज करेगी FIR, वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे जांच

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाएगी। इसके बाद CBI जांच को आगे बढ़ाएगी। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि जांच के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को नियुक्त किया जाए, ताकि मामले की जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो सके।

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में एक बिल्डिंग से गिरने के बाद हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में दर्ज किया था। बाद में मामले को लेकर कई सवाल और आरोप सामने आए तथा दिशा के पिता ने स्वतंत्र जांच की मांग की।

सतीश सालियान का बयान भी दर्ज होगा

CBI जांच के दौरान दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज किया जाएगा। उनके आरोपों और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाएगी। हाईकोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि किसी मामले में कानूनी रूप से उचित जांच और प्रक्रिया का पालन जरूरी है, ताकि परिवार को मामले में उचित निष्कर्ष और न्यायिक रूप से स्वीकार्य क्लोजर मिल सके।

आदित्य ठाकरे को लेकर कोर्ट का अहम रुख

मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम राजनीतिक और कानूनी बहस के दौरान सामने आता रहा है। हालांकि, CBI जांच का आदेश दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी घोषित कर दिया गया है।

Disha Salian Case_

जांच एजेंसी को उपलब्ध सबूतों, बयानों, रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ानी होगी। किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों या राजनीतिक दावों के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता। ठाकरे की ओर से पहले भी उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया गया है। उनके वकील ने अदालत में याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आरोपों का विरोध किया था।

कोर्ट के फैसले के बाद भावुक हुए दिशा के पिता

हाईकोर्ट के फैसले के बाद दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान भावुक हो गए। उन्होंने अदालत के आदेश के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही उम्मीद जताई कि अब उनकी बेटी की मौत से जुड़े सवालों की निष्पक्ष तरीके से जांच होगी। दिशा सालियान की मौत के मामले में पिछले कई वर्षों से अलग-अलग दावे और जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मुंबई पुलिस ने पहले मामले में किसी तरह की आपराधिक साजिश से इनकार किया था। जबकि दिशा के परिवार की ओर से बाद में गंभीर संदेह जताते हुए नए सिरे से जांच की मांग की गई।

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कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, कथित वाल्मीकि घोटाले में भूमिका से किया इनकार

B. Nagendra: कर्नाटक कैबिनेट मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि यह इस्तीफा ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम’ में कथित तौर पर 89 करोड़ रुपये की गड़बड़ी को लेकर बीजेपी की रायचूर से बेल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा से ठीक पहले दिया गया।

योजना और सांख्यिकी विभाग संभालने वाले नागेंद्र ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कथित वाल्मीकि घोटाले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के नेताओं से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरे मुख्यमंत्री का भी मानना ​​है कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है। विकास और मुख्यमंत्री के विजन में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। बीजेपी ने मुझे आरोपी बताकर एक बेगुनाह को आरोपी बना दिया है।”

इससे पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा

बता दें कि यह दूसरी बार है जब नागेंद्र ने सरकार से इस्तीफा दिया है। इससे पहले, 2024 में कर्नाटक अनुसूचित जनजाति विकास बोर्ड से जुड़े ₹94 करोड़ के फंड डायवर्जन घोटाले में नाम आने के बाद उन्होंने सिद्धारमैया की कैबिनेट से ST कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

वहीं, कर्नाटक विधानसभा का हालिया मॉनसून सत्र हंगामे की वजह से बेकार चला गया, क्योंकि बीजेपी ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की थी।

नागेंद्र ने कहा, “साजिश वाली राजनीति के कारण, हमने कई बार अपील की और विपक्ष से कहा कि वे नोटिस दें और चर्चा के लिए आएं। वे सूखे, KPSC और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए नहीं आए। बिना किसी आधार या मुद्दे के, उन्होंने घोटाले होने का झूठा दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने झूठा दावा किया कि वाल्मीकि घोटाला हुआ और निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी।”

उन्होंने आगे कहा, “SIT और CID ने इस मामले की जांच की। साजिश के तहत CBI जांच शुरू करवाई गई और ED ने मुझे गिरफ्तार कर लिया। मैं तीन महीने जेल में भी रहा और फिर बाहर आया। दूसरी चार्जशीट में, उन्होंने बेवजह मेरा नाम शामिल कर दिया।”

बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) ने कथित वाल्मीकि घोटाले को लेकर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। दोनों पार्टियों ने 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 170 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।

बीजेपी एमएलसी एन. रवि कुमार ने कहा, “नागेंद्र को आज नहीं तो कल इस्तीफा देना ही होगा क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है। 600 खातों में पैसे जमा किए गए। वह सरकारी फंड था… कांग्रेस पार्टी ने तेलंगाना और बेल्लारी लोकसभा चुनावों में और परिवार के लिए सोना खरीदने में सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया।”

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राम मंदिर चंदे में ‘चोरी’ की खबर करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पहुंचे SC, गाजियाबाद में रोड-रेज की FIR का मामला

पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंन गाजियाबाद में ‘रोड-रेज’ (सड़क पर झगड़े) की एक कथित घटना को लेकर अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी है। उपाध्याय ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के प्रबंधन में चोरी और गड़बड़ी के आरोपों की रिपोर्ट सबसे पहले करने वालों में से एक थे।

उपाध्याय का आरोप है कि यह मामला झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है और इसका मकसद उनकी स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें परेशान करना है। उन्होंने FIR को रद्द करने और गिरफ्तारी व अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने अनुरोध किया है कि मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा किसी अन्य एजेंसी, जैसे CBI या दिल्ली पुलिस को सौंपी जाए।

यह FIR 18 अगस्त को इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, शिप्रा मॉल के पास एक बलेनो कार ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ड्राइवर ने उसे गाली दी और धमकी दी और कार के संबंध में उपाध्याय का नाम लिया।

उपाध्याय ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को अपनी बेटी के स्कूल से लौटते समय, शिप्रा मॉल के पास एक मोटरसाइकिल सवार उनकी कार के पास आया और हंगामा किया। उनके अनुसार, कोई टक्कर या हाथापाई नहीं हुई थी और वह उस जगह से चले गए क्योंकि उनकी बेटी उनके साथ थी।

उन्होंने मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। जबकि FIR में ‘स्प्लेंडर’ का जिक्र है। उनका दावा है कि शिकायत में दिया गया नंबर किसी दूसरी मोटरसाइकिल का है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी उस जगह के पास की दुकानों पर गए और दुकानदारों पर CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट करने या न देने का दबाव डाला।

पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें पूरी FIR नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘यूथ बार एसोसिएशन’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार FIR को पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था।

उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया है कि 20 अगस्त की देर रात पुलिसकर्मी उनके गाजियाबाद स्थित घर पर आए थे। उनके अनुसार, रात करीब 10:20 बजे, जब वे दिल्ली में थे, उनकी पत्नी ने उन्हें बताया कि आठ या नौ पुलिसकर्मी घर पर आए हैं। याचिका में यह संख्या लगभग एक दर्जन बताई गई है और कहा गया है कि उस समय उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस टीम में कोई महिला अधिकारी शामिल नहीं थी।

‘द हिंदू’ ने यह भी रिपोर्ट किया कि 19 अगस्त को उपाध्याय ने एक IAS अधिकारी के खिलाफ आरोपों से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। यह मामला 2023 में खरीदे गए करोड़ों रुपये मूल्य के दो कृषि भूखंडों और उन पर स्कूल के निर्माण से संबंधित था। उन्होंने आरोप लगाया कि धमकाने और परेशान करने से संबंधित प्रावधानों के तहत उनके YouTube वीडियो को लगभग आधे घंटे के भीतर हटा दिया गया था, लेकिन कानूनी चुनौती के बाद 20 अगस्त को उसे बहाल कर दिया गया।

उपाध्याय ने पुलिस की इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार पर अपनी रिपोर्टिंग से जोड़ा है। उनके YouTube चैनल पर लोक निर्माण विभाग, अवैध खनन, परीक्षा में अनियमितताओं, राज्य राजस्व विभाग और राम मंदिर दान विवाद से जुड़ी रिपोर्टें दिखाई गई हैं।

‘द वायर’ से बात करते हुए उपाध्याय ने कहा, “मैंने 7 जून को राम मंदिर में चोरी की खबर ब्रेक की थी, तब से मेरे खिलाफ ऐसी शिकायतें और FIR दर्ज होना एक आम बात हो गई है। मैं उनके भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर रहा हूं, यही उनकी समस्या है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया, “हिंदू-मुस्लिम राजनीति की आड़ में उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।”

अपनी याचिका में उपाध्याय ने कहा कि उन्हें “जल्द गिरफ्तारी और शारीरिक नुकसान” की आशंका है और दावा किया कि “राज्य तंत्र द्वारा भेजे गए गुंडों” से उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से वे सुरक्षित रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट नहीं जा पा रहे हैं।

उन्होंने FIR रद्द करने, गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा और इसके विकल्प के तौर पर एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि वे किसी भी कानूनी जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। उपाध्याय को इससे पहले 2024 में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के सिलसिले में पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, जो उनकी रिपोर्टिंग के बाद दर्ज की गई थी। ‘द वायर’ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को आदेश दिया था कि उस मामले में उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

दिल्ली मास्टर प्लान 2027 के तहत राजधानी का बदलेगा पूरा नक्शा, 40 लाख नए फ्लैट और मेट्रो नेटवर्क का होगा विस्तार

Delhi Master Plan 2047: केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार, 20 अगस्त को ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ (MPD-2047) जारी किया। इस प्लान में लगभग 40 लाख नए घर बनाने, दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क को 695 किलोमीटर तक बढ़ाने और लगभग 383 किलोमीटर का RRTS नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव है।

खट्टर ने इसे दिल्ली के लिए एक “ऐतिहासिक दिन” बताया और कहा कि यह प्लान ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप है। इसका मकसद दिल्ली को एक वर्ल्ड-क्लास शहर बनाना और साथ ही इसके विकास को ज्यादा टिकाऊ बनाना है।

फिलहाल, अभी दिल्ली की आबादी करीब 2.4 करोड़ है। यहां पर करीब 520 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि और 180 वर्ग किलोमीटर रिज व वन क्षेत्र भी हैं। मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली के विकास के साथ इन प्राकृतिक इलाकों को बचाना भी बेहद जरूरी है।

2047 तक बनेंगे करीब 40 लाख नए घर

MPD-2047 में दिल्ली में करीब 40 लाख नए घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें किफायती घरों (Affordable Housing) पर खास फोकस रहेगा। आबादी बढ़ने और परिवारों के आकार में बदलाव को देखते हुए अनुमान है कि 2047 तक दिल्ली को करीब 40 लाख अतिरिक्त घरों की जरूरत होगी।

इस प्लान में दिल्ली के मौजूदा इलाकों को फिर से विकसित (री-डेवलप) करने और ज्यादा घनी आबादी वाले विकास की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इससे ज्यादा लोगों के लिए घर उपलब्ध हो सकेंगे और शहर की बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ के सिद्धांत के तहत झुग्गी बस्तियों और JJ क्लस्टर्स को उसी इलाके में दोबारा बसाया जाएगा। वहीं, अनधिकृत कॉलोनियों के विकास, नियमितीकरण और पुनर्विकास के लिए भी एक अलग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि रिहायशी इलाकों में 30 मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे बनी इमारतों की ग्राउंड फ्लोर पर कमर्शियल गतिविधियों की इजाजत होगी।

695 किमी तक फैलेगा दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क

फिलहाल, दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क करीब 416 किलोमीटर लंबा है। MPD-2047 के तहत इसमें 279 किलोमीटर का और विस्तार करने की योजना है। इसके बाद दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क बढ़कर करीब 695 किलोमीटर हो जाएगा।

इस प्लान में दिल्ली को गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, करनाल और अलवर से जोड़ने वाले लगभग 383 किलोमीटर लंबे RRTS नेटवर्क का भी प्रस्ताव है।

इसके अलावा, दिल्ली के आनंद विहार में मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब भी बनाए जाएंगे, जो ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग साधनों को एक ही जगह पर जोड़ेंगे।

कुल मिलाकर, मास्टर प्लान में बताया गया है कि दिल्ली 2047 तक अपनी हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को कैसे पूरा करेगी, साथ ही शहर की खेती की जमीन, रिज और जंगल वाले इलाकों को भी बचाकर रखेगी।

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दिल्ली के रोहिणी में ‘स्पेशल 26’ जैसी घटना, CBI अफसर बनकर कारोबारी के घर पहुंची फर्जी टीम, पत्नी ने ऐसे खोली पोल

Delhi Fake CBI Raid: बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘स्पेशल 26’ शायद सबने देखी होगी, जिसमें एक्टर अक्षय कुमार और अनुपम खेर फर्जी CBI अधिकारी बनकर बिजनेसमैन और नेताओं के घर छापेमारी करते हैं। ऐसी ही एक घटना दिल्ली के रोहिणी के इलाके से भी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, ठीक ‘स्पेशल 26’ की तरह कुछ लोग खुद को CBI अधिकारी बताकर एक कारोबारी के घर पर फर्जी रेड करने पहुंचे। हालांकि, कारोबारी की पत्नी ने जब उनसे पहचान का सबूत और वैध सर्च वारंट मांगा, तो सभी लोग वहां से चले गए।

परिवार की शिकायत के मुताबिक, करीब 8 से 10 लोग CBI अधिकारी बताकर घर पहुंचे और कहा कि वे तलाशी लेने आए हैं। उस समय बिजनेसमैन की पत्नी घर पर थीं और उन्होंने गेट खोलने से मना कर दिया। उन्होंने उन लोगों से कहा कि वे अंदर आने से पहले अपनी पहचान साबित करें और सही सर्च वारंट दिखाएं।

शिकायत करने वाली महिला का आरोप है कि उस ग्रुप ने उन्हें अंदर आने देने के लिए दबाव डाला और मना करने पर धमकी दी। हालांकि, वह उनकी पहचान के सबूत और जरूरी दस्तावेज मांगती रहीं।

CBI की बताई जा रही यह टीम लगभग 90 मिनट तक घर के बाहर खड़ी रही, जिससे शक और बढ़ गया।

CCTV में रिकॉर्ड हुई घटना

इलाके में लगे CCTV कैमरों में उस ग्रुप की हरकतें रिकॉर्ड हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि जांच टीम इस फुटेज की जांच कर रही है ताकि शामिल लोगों की संख्या का पता लगाया जा सके और उनके इस्तेमाल किए गए वाहन की पहचान की जा सके।

जब वे लोग बाहर ही खड़े रहे, तो आस-पास के लोग भी वहां जमा हो गए और उनसे सवाल-जवाब करने लगे। उन्होंने उस ग्रुप से पहचान-पत्र, सर्च वारंट या कथित रेड (छापे) के लिए जारी नोटिस की कॉपी दिखाने को कहा।

बताया जाता है कि उस ग्रुप ने कहा कि कागजात उनकी गाड़ी में हैं। जब उनसे कागजात लाने के लिए कहा गया, तो वे यह कहकर वहां से चले गए कि वे कागजात ले आएंगे, लेकिन वे कभी वापस नहीं लौटे।

परिवार ने पुलिस से किया संपर्क

इसके बाद परिवार ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर 112 के जरिए पुलिस से संपर्क किया। पुलिस की एक टीम घर पहुंची और शिकायत करने वाले का बयान दर्ज किया।

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि आरोपियों ने CBI का लोगो लगा हुआ कपड़ा पहन रखा था और उनके पास ऐसे पहचान पत्र भी थे, जिनमें उन्हें CBI अधिकारी बताया गया था। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि पूरी कार्रवाई असली और आधिकारिक लगे।

शिकायतकर्ता के पिता को WhatsApp पर मिला फर्जी नोटिस

मामले में उस समय एक और नया मोड़ तब आया, जब शिकायतकर्ता के पिता को बाद में WhatsApp पर एक नोटिस मिला। शिकायत के मुताबिक, इस नोटिस पर कथित तौर पर CBI डायरेक्टर का नाम और हस्ताक्षर थे।

हालांकि, बाद में वह मैसेज डिलीट कर दिया गया, लेकिन परिवार ने उसका स्क्रीनशॉट ले लिया था और शिकायत के साथ पुलिस को सौंप दिया था।

परिवार का आरोप है कि नोटिस फर्जी था और इसका मकसद कथित रेड को CBI का अधिकृत ऑपरेशन दिखाना था। वहीं, अधिकारियों ने बताया कि पुलिस नोटिस की असलियत की जांच कर रही है, जबकि घटना की जांच जारी है।

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हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

jharkhand student protest ends

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL परीक्षा को रद्द करने के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन समाप्त हो गया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 15 दिन से जारी अनशन समाप्त कर किया। हालांकि भाजपा का कहना है कि झारखंड सरकार ने आधी बात मानी है। CBI जांच से झारखंड सरकार भाग रही है क्योंकि उन्हें पता है कि CBI जांच होगी तो मुख्यमंत्री तक आंच आएगी।

 

देवेंद्र महतो ने उम्मीदवारों की मांगें मानने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राज्य के मंत्रियों दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी का धन्यवाद किया। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त कानूनों और सुधारों की भी मांग की।
 

सरकार सभी मांगों पर सहमत

राज्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार हमेशा से झारखंड में शुरू हुए बड़े छात्र आंदोलन, खासकर सुधारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री ने आंदोलन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी है और राहुल गांधी ने भी लगातार छात्रों के हितों की बात की है। आज हम आंदोलनकारियों का धन्यवाद करना चाहते हैं। आपने जो आंदोलन शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से, राज्य और छात्रों दोनों के हित में चलाया, वह अब बहुत सम्मानजनक तरीके से समाप्त हो रहा है। सरकार आपकी सभी मांगों पर सहमत हो गई है और हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि जांच निष्पक्ष होगी। किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

 

सीबीआई जांच क्यों नहीं कराना चाहती सरकार?

दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि छात्र आंदोलन से पहले ही, देवेंद्र महतो ने CID जांच का प्रस्ताव दिया था और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। इसके विपरीत, CBI नतीजे देने में विफल रही है, पेपर लीक से जुड़े उसके 17 मामले लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि 2015 से देश भर में पेपर लीक और गड़बड़ी के 152 मामले सामने आए हैं, फिर भी न तो केंद्र सरकार और न ही केंद्रीय एजेंसियों को इन मामलों में कोई ठोस नतीजा मिला है। इसलिए, CID जांच के संबंध में हमने एक समय-सीमा तय की है। 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए और मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए होनी चाहिए ताकि जल्द फैसला आ सके।

 

सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र

छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने कहा कि मंत्री दीपिका पांडे और इरफान अंसारी जी अभी आए थे उन्होंने हमसे अपील की ये आंदोलन और अनशन को खत्म करें। लेकिन जो हमारी मांगे CBI संबंधित हैं उस पर सरकार की अभी तक सहमति नहीं बन पाई है हमारी CBI से संबंधित जो मांगे है उसे हम अभी भी जारी रखें हुए हैं। कल सरकार की तरफ से जो भी नोटिफिकेशन आएगा उसको भी हम अध्ययन करेंगे उसके बाद हम अपने आंदोलन की रणनीति के बारे में बताएंगे। हमारी मांग है कि CBI जांच होनी चाहिए।

झारखंड प्रदर्शन: छात्र नेता देवेंद्र महतो ने खत्म की भूख हड़ताल! JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से TDPL की सभी परीक्षाओं की होगी जांच

Jharkhand students protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड में अहम परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद लिया गया। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया।

सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, “सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।”

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है। सीएम ने कहा कि उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है।

सीएम ने बड़ा आरोप

सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल पास करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।

क्या है मांग?

सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।

अब आगे क्या होगा?

झारखंड सरकार के फैसले के बाद अब JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाएं जांच के घेरे में हैं। सबसे अहम बात यह है कि जांच का दायरा केवल हाल की परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। CID 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं की पड़ताल करेगी। जबकि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली अलग समिति कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

JMM सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य छात्रों की शिकायतों का समाधान करना और झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। अब जांच के नतीजों पर नजर रहेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।