PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में

PM Viksit Bharat Rozgar Yojana PM VBRY: फॉर्मल सेक्टर में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को फॉर्मल रोजगार से जोड़ना और ईपीएफ (EPF) सिस्टम में उनका स्वागत करना है।

वैसे यह ₹15,000 का इंसेंटिव सभी को एकमुश्त या खुद-ब-खुद नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार और ईपीएफओ ने कुछ जरूरी शर्तें, सैलरी सीमा और सर्विस पीरियड तय किया है।

कब से कब तक की नौकरियों पर मिलेगा फायदा?

यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सर्जित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगी। अगर कर्मचारी का मासिक ईपीएफ वेतन ₹1 लाख प्रति माह तक है, तो वह इस योजना के तहत योग्य माना जाएगा। इंसेंटिव की राशि कर्मचारी के 1 महीने के ईपीएफ वेज के बराबर (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) होगी।

कौन है ₹15,000 इंसेंटिव के लिए योग्य?

PM-VBRY के ‘पार्ट-ए’ के तहत इंसेंटिव पाने के लिए कर्मचारी को पहली बार ईपीएफ सदस्य बनना अनिवार्य है। पात्रता की मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:

पात्रता की शर्तइसका क्या मतलब है?
पहली बार EPF मेंबरशिपकर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफ का अंशदान करने वाला सदस्य (छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट समेत) नहीं होना चाहिए।
जॉइनिंग की तारीख नौकरी में कार्यभार संभालने की तिथि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए।
मासिक सैलरी कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए (योजना की परिभाषा के अनुसार)।
सर्विस की अवधिपहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने की निरंतर सेवा आवश्यक है।
एंप्लॉयर कम्प्लायंसजिस कंपनी/संस्था में काम कर रहे हैं, उसने ईपीएफओ में जरूरी रिपोर्टिंग और कंट्रीब्यूशन (ECR) दाखिल किया हो।

 कैसे मिलेगी ₹15,000 की रकम?

यह इंसेंटिव कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में दिया जाएगा:

किस्तजरूरी शर्त  अधिकतम राशि
पहला किस्त निरंतर 6 महीने की योग्य सेवा पूरी होने पर ₹7,500
दूसरी किस्त 12 महीने की सेवा और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने परबाकी बची राशि (कुल ₹15,000 तक)

ध्यान दें: इंसेंटिव की राशि योग्य सैलरी के आधार पर तय होगी, इसलिए हर किसी को फ्लैट ₹15,000 नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, दूसरी किस्त तुरंत कैश में निकालने योग्य नहीं हो सकती है; गाइडलाइंस के मुताबिक इसे किसी उपयुक्त सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट या डिपॉजिट अकाउंट में तय समय के लिए रखा जा सकता है।

फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों है जरूरी?

दूसरी किस्त पाने के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम को पूरा करना अनिवार्य बनाया गया है। 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर पहली किस्त मिल जाएगी, लेकिन पूरे ₹15,000 पाने के लिए कर्मचारी को 12 महीने की नौकरी के साथ-साथ इस कोर्स को भी पूरा करना होगा।

इसके लिए कर्मचारी PM-VBRY के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर पूरी गाइडेंस ले सकते हैं। पोर्टल पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट करने और यूएएन-आधार लिंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।

पैसा बैंक खाते में कैसे आएगा?

सरकार ने साफ किया है कि पार्ट-ए के तहत इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट (DBT) में आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने बैंक खाते और यूएएन को आधार से लिंक रखना जरूरी है।

एंप्लॉयर्स के लिए अलग लाभ

इस योजना में कंपनियों/नियुक्तियों के लिए भी अलग प्रावधान (‘पार्ट-बी’) है, जहां एंप्लॉयर को हर नए योग्य कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव मिल सकता है। इसे कर्मचारियों के ₹15,000 वाले व्यक्तिगत इंसेंटिव से जोड़कर न देखें।

Chintan Shivir: पीएम मोदी आज से शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्रियों का ‘चिंतन शिविर’; ‘विकसित भारत 2047’ और बड़े सुधारों पर होगा मंथन

Chintan Shivir: केंद्रीय मंत्रियों की दो दिवसीय चिंतन बैठक आज यानी बुधवार (23 सितंबर) से शुरू होगी। इसमें सुधारों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए शासन और नीति-निर्माण के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 23 और 24 सितंबर को सेवा तीर्थ में मंथन सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें पूरी मंत्रिपरिषद शामिल होगी। सेवा तीर्थ में ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्थित है।

विचार-विमर्श करने के लिए छह समूह गठित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों के कार्यान्वयन, समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और जन-सेवाएं प्रदान करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कार्यक्रमों (योजनाओं) के समयबद्ध कार्यान्वयन और शासन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए छह समूह गठित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में आठ मंत्री होंगे।

ये समूह पहले ही कई बैठकें कर चुके हैं, जिनमें चिंतन बैठक में की जाने वाली मुद्दों पर चर्चा की गई थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सुधार को आगे बढ़ाने के लिए उनके मंत्रालयों द्वारा अपनाई गई नीतियों और उपायों पर प्रस्तुतियां देने की संभावना है।

इन विभिन्न सुधारों पर जोर

प्रधानमंत्री, विभिन्न सुधारों पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने पहले भी अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से कहा था कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और जीवन को आसान बनाना सरकार का मुख्य ध्येय होना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, चिंतन बैठक में होने वाली चर्चाओं में इन मुद्दों को उठाये जाने की उम्मीद है।

मंत्रियों की प्रस्तुतियों में नीति-निर्माण की प्रक्रिया को अधिक असरदार और प्रभावकारी बनाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसी तरह की एक चिंतन बैठक 21 अक्टूबर 2021 को भी हुई थी। उस समय बातचीत का मुख्य विषय शासन और नीति निर्माण था तथा इस कवायद का उद्देश्य मंत्रियों को सरकार के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना है।

क्या है मकसद?

इसे शासन की समीक्षा करने, मंत्रालयों के बीच तालमेल बेहतर बनाने और सरकार का भविष्य का एजेंडा तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइट को अधिक से अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर काम करने के लिए कहा था।

नए सुधारों पर रहेगा जोर

केंद्रीय मंत्रियों के बुधवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय चिंतन शिविर में मुख्य रूप से सरकार के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। साथ ही भविष्य की योजना बनाने और नए विचारों एवं सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस बैठक में पूरी सरकार के कामकाज का जायजा लिया जाएगा। साथ ही भविष्य की योजना, जारी कार्यों की समीक्षा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए विचारों, सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

‘विकसित भारत’ और ‘विजन 2047’

‘विकसित भारत’ की कवायद 2021 से चल रही है। ‘विजन 2047’ और इसके लघु अवधि एवं दीर्घ अवधि के रोडमैप को तैयार करने के लिए सचिवों के 10 क्षेत्र-आधारित समूह बनाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद के लिए हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर परामर्श भी किया गया। तब से, ‘विकसित भारत 2047’ के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के समक्ष आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं।

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मौजूदा चिंतन शिविर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यह सचिवों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग के समूहों द्वारा किए जा रहे काम को एक मंच पर लाता है, जिनमें सुधार, जीवन को आसान बनाना, नियमों के पालन को सहज करना और शासन से जुड़ी अन्य प्राथमिकताएं शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में होने वाली चर्चाओं में इन मुद्दों को उठाये जाने की उम्मीद है।

दिल्ली मास्टर प्लान 2027 के तहत राजधानी का बदलेगा पूरा नक्शा, 40 लाख नए फ्लैट और मेट्रो नेटवर्क का होगा विस्तार

Delhi Master Plan 2047: केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार, 20 अगस्त को ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ (MPD-2047) जारी किया। इस प्लान में लगभग 40 लाख नए घर बनाने, दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क को 695 किलोमीटर तक बढ़ाने और लगभग 383 किलोमीटर का RRTS नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव है।

खट्टर ने इसे दिल्ली के लिए एक “ऐतिहासिक दिन” बताया और कहा कि यह प्लान ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप है। इसका मकसद दिल्ली को एक वर्ल्ड-क्लास शहर बनाना और साथ ही इसके विकास को ज्यादा टिकाऊ बनाना है।

फिलहाल, अभी दिल्ली की आबादी करीब 2.4 करोड़ है। यहां पर करीब 520 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि और 180 वर्ग किलोमीटर रिज व वन क्षेत्र भी हैं। मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली के विकास के साथ इन प्राकृतिक इलाकों को बचाना भी बेहद जरूरी है।

2047 तक बनेंगे करीब 40 लाख नए घर

MPD-2047 में दिल्ली में करीब 40 लाख नए घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें किफायती घरों (Affordable Housing) पर खास फोकस रहेगा। आबादी बढ़ने और परिवारों के आकार में बदलाव को देखते हुए अनुमान है कि 2047 तक दिल्ली को करीब 40 लाख अतिरिक्त घरों की जरूरत होगी।

इस प्लान में दिल्ली के मौजूदा इलाकों को फिर से विकसित (री-डेवलप) करने और ज्यादा घनी आबादी वाले विकास की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इससे ज्यादा लोगों के लिए घर उपलब्ध हो सकेंगे और शहर की बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ के सिद्धांत के तहत झुग्गी बस्तियों और JJ क्लस्टर्स को उसी इलाके में दोबारा बसाया जाएगा। वहीं, अनधिकृत कॉलोनियों के विकास, नियमितीकरण और पुनर्विकास के लिए भी एक अलग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि रिहायशी इलाकों में 30 मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे बनी इमारतों की ग्राउंड फ्लोर पर कमर्शियल गतिविधियों की इजाजत होगी।

695 किमी तक फैलेगा दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क

फिलहाल, दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क करीब 416 किलोमीटर लंबा है। MPD-2047 के तहत इसमें 279 किलोमीटर का और विस्तार करने की योजना है। इसके बाद दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क बढ़कर करीब 695 किलोमीटर हो जाएगा।

इस प्लान में दिल्ली को गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, करनाल और अलवर से जोड़ने वाले लगभग 383 किलोमीटर लंबे RRTS नेटवर्क का भी प्रस्ताव है।

इसके अलावा, दिल्ली के आनंद विहार में मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब भी बनाए जाएंगे, जो ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग साधनों को एक ही जगह पर जोड़ेंगे।

कुल मिलाकर, मास्टर प्लान में बताया गया है कि दिल्ली 2047 तक अपनी हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को कैसे पूरा करेगी, साथ ही शहर की खेती की जमीन, रिज और जंगल वाले इलाकों को भी बचाकर रखेगी।

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Saptadhara Explained: ‘सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी ने बताया विकसित भारत का 7-सूत्रीय रोडमैप

Saptadhara Explained: सात धाराओं के पवित्र हिंदू विचार से लेकर विकसित भारत के लिए सात-सूत्रीय रोडमैप तक: ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर इसका जिक्र क्यों किया? दरअसल, ‘सप्तधारा’ शब्द असल में ‘सप्त’ (यानी सात) और ‘धारा’ (यानी बहाव या प्रवाह) से मिलकर बना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसे विकास के एक फ्रेमवर्क के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से बहुत पहले से ही, सात पवित्र धाराओं का यह विचार हिंदू धार्मिक परंपराओं में मौजूद था।

बता दें कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जो घोषणा की, उसका आधार यही सांस्कृतिक और सभ्यतागत सोच थी। उन्होंने एक नई “सप्तधारा” — यानी ताकत की सात धाराएं — की बात की, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर भारत के सफर को आगे बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की पुरानी अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत अपनी ताकत के लिए सप्त सिंधु के कारण जाना जाता था और तर्क दिया कि अब एक विकसित भारत को ताकत की नई धाराओं की जरूरत है।

तो, सप्तधारा का हिंदू मूल क्या है, और इस शब्द को नीति के संदर्भ में नया अर्थ कैसे मिला है?

हिंदू परंपरा में ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है?

सबसे बुनियादी स्तर पर, सप्तधारा का अर्थ है ‘सात धाराएं’। हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात की संख्या का विशेष महत्व है—चाहे वह सात ऋषि (सप्तर्षि) हों, सात पवित्र नदियां हों या हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित सात लोक हों।

पद्म पुराण में एक विशिष्ट ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का भी वर्णन मिलता है।

संबंधित अध्याय के अनुवाद के अनुसार, सप्तधारा को एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थान माना जाता था और यह ऋषियों से जुड़ा हुआ था। इस ग्रंथ में पवित्र जल की सात धाराओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें गंगा के सात शुभ रूपों से जोड़ा गया है। इस स्थान का संबंध पांडवों से भी बताया गया है।

पद्म पुराण में सप्तधारा का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सात धाराओं में बहने वाले पवित्र जल को गंगा की पवित्रता, तीर्थ यात्रा और पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों से जोड़ा गया है।

सप्तधारा या सप्तसरोवर नामक स्थानों से जुड़ी अन्य हिंदू परंपराएं भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार में एक स्थानीय मान्यता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हो गई थी ताकि सप्तऋषि (सात प्राचीन ऋषि) बिना किसी व्यवधान के अपनी तपस्या कर सकें।

दूसरे शब्दों में, “सात धाराएं” कोई नई गढ़ी गई उपमा नहीं है। लंबे समय से यह पवित्र प्रवाह, समृद्धि, निरंतरता और किसी शक्तिशाली चीज के विभिन्न दिशाओं में फैलने का प्रतीक रही है।

सप्तधारा और सप्त सिंधु: क्या है इनका संबंध?

पीएम मोदी के भाषण को समझने के लिए यह कड़ी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

‘सप्त सिंधु’ का शाब्दिक अर्थ है “सात नदियां” और यह शुरुआती वैदिक काल से जुड़ा एक प्राचीन भौगोलिक और सांस्कृतिक शब्द है।

पीएम मोदी ने अपनी ‘सप्तधारा’ को पौराणिक ‘सप्तधारा-तीर्थ’ की हूबहू नकल के तौर पर पेश नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपने आज के विचार को समझाने के लिए पुरानी ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा का इस्तेमाल एक पुल की तरह किया।

सात ही क्यों?

भारतीय परंपराओं में ‘सात’ का बहुत गहरा महत्व है। सप्तऋषि (सात ऋषि) और सप्तसिंधु (सात नदियां) जैसी अवधारणाएं हैं। साथ ही हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, रीति-रिवाजों और साहित्य में भी सात के समूहों का कई बार जिक्र मिलता है।

इसलिए, यह संख्या पूर्णता और विविधता को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्रतीक है: अलग-अलग धाराएं मिलकर एक बड़ा प्रवाह बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह इस विचार का इस्तेमाल किया। उनकी ‘सप्तधारा’ कोई एक योजना या नया मंत्रालय नहीं है। बल्कि, यह सात हिस्सों वाला एक रणनीतिक ढांचा है। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए जरूरी आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी, सैन्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मजबूती दे सकते हैं।

PM मोदी की सात ‘सप्तधाराएं’ क्या हैं?

  1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। इसमें पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने से लेकर डिजाइन और तैयार उत्पादों तक हर स्तर शामिल है। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद हिस्सा बनना होगा। उन्होंने तीन जरूरतों पर ज़ोर दिया: लागत, क्वालिटी और स्केल।

उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे मेरे भाइयों और बहनों के लिए, यह एक बड़ मौका है। इस मौके को हाथ से न जाने दें। और इसके लिए, हमें लागत, क्वालिटी और स्केल के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। हमारी फैक्ट्रियां कॉम्पिटिटिव होनी चाहिए। हमारे प्रोडक्ट यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।”

इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार न रहे, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बने।

  1. खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग: दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। यहां जोर सिर्फ खेती से होने वाले उत्पादन को बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेत से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने पर है। पीएम मोदी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों, फलों और सब्जियों जैसे उत्पादों का जिक्र किया और कहा कि भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। दुनिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। और अगर हमारे कृषि उत्पाद हर तरह से ग्लोबल मानकों पर खरे उतरते हैं, तो हम आसानी से दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच पाएंगे।”

इसका मकसद खेती से होने वाले उत्पादन में प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए वैल्यू जोड़ना है, न कि किसानों को मुख्य रूप से कच्चे माल (रॉ-कमोडिटी) के स्तर पर ही छोड़ देना।

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की है। पीएम मोदी ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के अनुभव का जिक्र किया और कहा कि देश को अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग लगानी चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती हुई टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन (जिसमें ‘मेड-इन-इंडिया 6G’ भी शामिल है) जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। इसका मुख्य संदेश यह है कि भारत उभरती हुई टेक्नोलॉजी का सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। बल्कि उसे इनका डेवलपर और निर्यातक भी बनना होगा।

उन्होंने कहा, “मेड-इन-इंडिया दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज करनी चाहिए। इस दिशा में हमारे प्रयास कम नहीं होने चाहिए।”

  1. गति शक्ति: चौथी धारा है ‘गति शक्ति’ – यानी रफ्तार और कनेक्टिविटी की ताकत। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, अंदरूनी जलमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इसका मकसद पूरे भारत में लोगों और सामान को लाने-ले जाने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ निर्माण का काम नहीं है। यह भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता) का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें एयरपोर्ट्स की जरूरत है। हमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की जरूरत है। हमें अपने बंदरगाहों को सिर्फ सामान चढ़ाने और उतारने की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दुनिया भर से जहाजों का वहां आकर रुकना ही काफी नहीं है। हमें अपने बंदरगाहों को ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह-आधारित विकास) और ग्रोथ की दिशा में आगे ले जाना होगा।”

इसलिए, पीएम मोदी ने बिना रुकावट वाली कनेक्टिविटी को देश के बड़े आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा।

  1. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा: पांचवां क्षेत्र डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।

उन्होंने उस जोखिम का जिक्र किया जो तब पैदा होती है जब जरूरी चीजों – जैसे एनर्जी, फर्टिलाइजर, दवाइयां और टेक्नोलॉजी – की सप्लाई पर जियोपॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है। वहीं, इसका समाधान है घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना और ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी विकसित करना, ताकि भारत को एक ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगली जनरेशन की डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करके, हमें ग्लोबल सप्लायर बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा।”

  1. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी:

छठी धारा दो क्षेत्रों को मिलाती है: ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

ग्रीन हिस्से में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। ब्लू हिस्सा भारत की तटरेखा, महासागरों, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। इसका बड़ा मकसद आर्थिक विकास को एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोड़ना और साथ ही भारत की समुद्री क्षमता का इस्तेमाल करना है।

  1. भारत की सॉफ्ट पावर: सातवीं और आखिरी धारा ‘सॉफ्ट पावर’ है।

यहीं पर मोदी की ‘सप्तधारा’ पारंपरिक आर्थिक पैमानों से आगे निकल जाती है। उन्होंने योग, हस्तशिल्प, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव खुद एक आर्थिक और भू-राजनीतिक संपत्ति बन सकता है।

इसका मकसद भारत के उत्पादों, संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विचारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को दुनिया तक ले जा सकते हैं। चाहे वह हस्तशिल्प हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हों, हमारी क्रिएटिव दुनिया हो, VFX, एनिमेशन, गेमिंग या डिजिटल कंटेंट हो – भारत क्रिएटिव दुनिया में अपनी ताकत दिखा सकता है। हमें इसे एक ग्लोबल क्षमता के तौर पर विकसित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा: “भारत के पास वन संपदा का विशाल भंडार है। हमारे यहां 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। इसमें बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे रहे हैं। हमारे पास अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने का मौका है। हमें दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं को दिखाना होगा।”

सप्तधारा के पीछे की सोच क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ की घोषणा को ‘विकसित भारत 2047’ के बड़े लक्ष्य से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें अब आने वाले पांच से सात सालों में पूरा करना होगा। उन्होंने इस पहल को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार की गति बढ़ाने वाला कदम) भी कहा और सिस्टम, सोच और काम करने की रफ्तार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

इस वजह से ‘सप्तधारा’ सिर्फ सरकार की एक अलग योजना नहीं रह जाती, बल्कि सरकार के विकास के एजेंडे के अगले चरण के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा बन जाती है।

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