नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी में विकास की नई सुबह, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ग्रामीणों से किया संवाद

नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी में विकास की नई सुबह, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ग्रामीणों से किया संवाद

बालाघाट। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बालाघाट जिले के पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी पहुंचकर ग्रामवासियों से संवाद किया और क्षेत्र के विकास तथा ग्रामीणों की आवश्यकताओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से चर्चा के दौरान पशुपालन को बढ़ावा देने, आवास सुविधा, पोषण आहार के उपयोग की आदत विकसित करने के लिए जन-जागरूकता अभियान, वन विभाग के सहयोग, चिकित्सा एवं शिक्षा सुविधाओं तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन सुविधाओं को क्षेत्र में बेहतर ढंग से स्थापित करने और शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने तथा युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
 

मुख्यमंत्री ने बालाघाट जिले के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से 225 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र में सामाजिक एवं मूलभूत अधोसंरचना को मजबूत किया जाएगा। सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों सहित रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे ग्रामों में विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के आधार पर पशुपालन, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, वन आधारित आजीविका तथा अन्य रोजगारपरक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए।

 

उन्होंने कहा कि बालाघाट अब नक्सल से विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिले तथा प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

बहनों ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी- वहीं रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बालाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बहनों के प्रति स्नेह और आत्मीयता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की कलाई पर राखी बांधकर अपना स्नेह और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने भी बहनों के इस आत्मीय स्नेह को भावपूर्वक स्वीकार करते हुए उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बहनों से आत्मीय संवाद किया और कहा कि बहनों का स्नेह और आशीर्वाद उनके लिए सदैव प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का भी पर्व है।

Saptadhara Explained: ‘सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी ने बताया विकसित भारत का 7-सूत्रीय रोडमैप

Saptadhara Explained: सात धाराओं के पवित्र हिंदू विचार से लेकर विकसित भारत के लिए सात-सूत्रीय रोडमैप तक: ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर इसका जिक्र क्यों किया? दरअसल, ‘सप्तधारा’ शब्द असल में ‘सप्त’ (यानी सात) और ‘धारा’ (यानी बहाव या प्रवाह) से मिलकर बना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसे विकास के एक फ्रेमवर्क के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से बहुत पहले से ही, सात पवित्र धाराओं का यह विचार हिंदू धार्मिक परंपराओं में मौजूद था।

बता दें कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जो घोषणा की, उसका आधार यही सांस्कृतिक और सभ्यतागत सोच थी। उन्होंने एक नई “सप्तधारा” — यानी ताकत की सात धाराएं — की बात की, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर भारत के सफर को आगे बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की पुरानी अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत अपनी ताकत के लिए सप्त सिंधु के कारण जाना जाता था और तर्क दिया कि अब एक विकसित भारत को ताकत की नई धाराओं की जरूरत है।

तो, सप्तधारा का हिंदू मूल क्या है, और इस शब्द को नीति के संदर्भ में नया अर्थ कैसे मिला है?

हिंदू परंपरा में ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है?

सबसे बुनियादी स्तर पर, सप्तधारा का अर्थ है ‘सात धाराएं’। हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात की संख्या का विशेष महत्व है—चाहे वह सात ऋषि (सप्तर्षि) हों, सात पवित्र नदियां हों या हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित सात लोक हों।

पद्म पुराण में एक विशिष्ट ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का भी वर्णन मिलता है।

संबंधित अध्याय के अनुवाद के अनुसार, सप्तधारा को एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थान माना जाता था और यह ऋषियों से जुड़ा हुआ था। इस ग्रंथ में पवित्र जल की सात धाराओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें गंगा के सात शुभ रूपों से जोड़ा गया है। इस स्थान का संबंध पांडवों से भी बताया गया है।

पद्म पुराण में सप्तधारा का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सात धाराओं में बहने वाले पवित्र जल को गंगा की पवित्रता, तीर्थ यात्रा और पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों से जोड़ा गया है।

सप्तधारा या सप्तसरोवर नामक स्थानों से जुड़ी अन्य हिंदू परंपराएं भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार में एक स्थानीय मान्यता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हो गई थी ताकि सप्तऋषि (सात प्राचीन ऋषि) बिना किसी व्यवधान के अपनी तपस्या कर सकें।

दूसरे शब्दों में, “सात धाराएं” कोई नई गढ़ी गई उपमा नहीं है। लंबे समय से यह पवित्र प्रवाह, समृद्धि, निरंतरता और किसी शक्तिशाली चीज के विभिन्न दिशाओं में फैलने का प्रतीक रही है।

सप्तधारा और सप्त सिंधु: क्या है इनका संबंध?

पीएम मोदी के भाषण को समझने के लिए यह कड़ी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

‘सप्त सिंधु’ का शाब्दिक अर्थ है “सात नदियां” और यह शुरुआती वैदिक काल से जुड़ा एक प्राचीन भौगोलिक और सांस्कृतिक शब्द है।

पीएम मोदी ने अपनी ‘सप्तधारा’ को पौराणिक ‘सप्तधारा-तीर्थ’ की हूबहू नकल के तौर पर पेश नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपने आज के विचार को समझाने के लिए पुरानी ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा का इस्तेमाल एक पुल की तरह किया।

सात ही क्यों?

भारतीय परंपराओं में ‘सात’ का बहुत गहरा महत्व है। सप्तऋषि (सात ऋषि) और सप्तसिंधु (सात नदियां) जैसी अवधारणाएं हैं। साथ ही हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, रीति-रिवाजों और साहित्य में भी सात के समूहों का कई बार जिक्र मिलता है।

इसलिए, यह संख्या पूर्णता और विविधता को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्रतीक है: अलग-अलग धाराएं मिलकर एक बड़ा प्रवाह बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह इस विचार का इस्तेमाल किया। उनकी ‘सप्तधारा’ कोई एक योजना या नया मंत्रालय नहीं है। बल्कि, यह सात हिस्सों वाला एक रणनीतिक ढांचा है। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए जरूरी आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी, सैन्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मजबूती दे सकते हैं।

PM मोदी की सात ‘सप्तधाराएं’ क्या हैं?

  1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। इसमें पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने से लेकर डिजाइन और तैयार उत्पादों तक हर स्तर शामिल है। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद हिस्सा बनना होगा। उन्होंने तीन जरूरतों पर ज़ोर दिया: लागत, क्वालिटी और स्केल।

उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे मेरे भाइयों और बहनों के लिए, यह एक बड़ मौका है। इस मौके को हाथ से न जाने दें। और इसके लिए, हमें लागत, क्वालिटी और स्केल के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। हमारी फैक्ट्रियां कॉम्पिटिटिव होनी चाहिए। हमारे प्रोडक्ट यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।”

इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार न रहे, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बने।

  1. खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग: दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। यहां जोर सिर्फ खेती से होने वाले उत्पादन को बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेत से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने पर है। पीएम मोदी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों, फलों और सब्जियों जैसे उत्पादों का जिक्र किया और कहा कि भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। दुनिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। और अगर हमारे कृषि उत्पाद हर तरह से ग्लोबल मानकों पर खरे उतरते हैं, तो हम आसानी से दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच पाएंगे।”

इसका मकसद खेती से होने वाले उत्पादन में प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए वैल्यू जोड़ना है, न कि किसानों को मुख्य रूप से कच्चे माल (रॉ-कमोडिटी) के स्तर पर ही छोड़ देना।

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की है। पीएम मोदी ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के अनुभव का जिक्र किया और कहा कि देश को अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग लगानी चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती हुई टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन (जिसमें ‘मेड-इन-इंडिया 6G’ भी शामिल है) जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। इसका मुख्य संदेश यह है कि भारत उभरती हुई टेक्नोलॉजी का सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। बल्कि उसे इनका डेवलपर और निर्यातक भी बनना होगा।

उन्होंने कहा, “मेड-इन-इंडिया दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज करनी चाहिए। इस दिशा में हमारे प्रयास कम नहीं होने चाहिए।”

  1. गति शक्ति: चौथी धारा है ‘गति शक्ति’ – यानी रफ्तार और कनेक्टिविटी की ताकत। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, अंदरूनी जलमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इसका मकसद पूरे भारत में लोगों और सामान को लाने-ले जाने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ निर्माण का काम नहीं है। यह भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता) का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें एयरपोर्ट्स की जरूरत है। हमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की जरूरत है। हमें अपने बंदरगाहों को सिर्फ सामान चढ़ाने और उतारने की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दुनिया भर से जहाजों का वहां आकर रुकना ही काफी नहीं है। हमें अपने बंदरगाहों को ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह-आधारित विकास) और ग्रोथ की दिशा में आगे ले जाना होगा।”

इसलिए, पीएम मोदी ने बिना रुकावट वाली कनेक्टिविटी को देश के बड़े आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा।

  1. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा: पांचवां क्षेत्र डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।

उन्होंने उस जोखिम का जिक्र किया जो तब पैदा होती है जब जरूरी चीजों – जैसे एनर्जी, फर्टिलाइजर, दवाइयां और टेक्नोलॉजी – की सप्लाई पर जियोपॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है। वहीं, इसका समाधान है घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना और ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी विकसित करना, ताकि भारत को एक ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगली जनरेशन की डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करके, हमें ग्लोबल सप्लायर बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा।”

  1. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी:

छठी धारा दो क्षेत्रों को मिलाती है: ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

ग्रीन हिस्से में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। ब्लू हिस्सा भारत की तटरेखा, महासागरों, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। इसका बड़ा मकसद आर्थिक विकास को एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोड़ना और साथ ही भारत की समुद्री क्षमता का इस्तेमाल करना है।

  1. भारत की सॉफ्ट पावर: सातवीं और आखिरी धारा ‘सॉफ्ट पावर’ है।

यहीं पर मोदी की ‘सप्तधारा’ पारंपरिक आर्थिक पैमानों से आगे निकल जाती है। उन्होंने योग, हस्तशिल्प, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव खुद एक आर्थिक और भू-राजनीतिक संपत्ति बन सकता है।

इसका मकसद भारत के उत्पादों, संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विचारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को दुनिया तक ले जा सकते हैं। चाहे वह हस्तशिल्प हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हों, हमारी क्रिएटिव दुनिया हो, VFX, एनिमेशन, गेमिंग या डिजिटल कंटेंट हो – भारत क्रिएटिव दुनिया में अपनी ताकत दिखा सकता है। हमें इसे एक ग्लोबल क्षमता के तौर पर विकसित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा: “भारत के पास वन संपदा का विशाल भंडार है। हमारे यहां 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। इसमें बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे रहे हैं। हमारे पास अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने का मौका है। हमें दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं को दिखाना होगा।”

सप्तधारा के पीछे की सोच क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ की घोषणा को ‘विकसित भारत 2047’ के बड़े लक्ष्य से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें अब आने वाले पांच से सात सालों में पूरा करना होगा। उन्होंने इस पहल को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार की गति बढ़ाने वाला कदम) भी कहा और सिस्टम, सोच और काम करने की रफ्तार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

इस वजह से ‘सप्तधारा’ सिर्फ सरकार की एक अलग योजना नहीं रह जाती, बल्कि सरकार के विकास के एजेंडे के अगले चरण के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा बन जाती है।

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‘वैचारिक नक्सलवादियों की पहचान कर अलग-थलग करना होगा’ लाल किले से PM मोदी की बड़ी चेतावनी

PM Modi Red Fort Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद को कमजोर करने में बड़ी सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि “वैचारिक नक्सलवाद” या “दिमागी नक्सलवाद” अभी भी हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के मौके तलाश रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने भारत को नक्सली हिंसा से मुक्त करने का अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने कहा कि माओवादी विद्रोहियों में अब उन इलाकों में टिके रहने की ताकत नहीं बची है, जो कभी हथियारबंद संघर्ष से प्रभावित थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने को याद करते हुए कहा, “नक्सलवाद ने धरती को खून से सराबोर कर दिया था।” तब उस समय सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि जो इलाके कभी नक्सली हिंसा के लिए जाने जाते थे, वहां अब विकास हो रहा है और लोगों में भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “जहां कभी नक्सली गोलियां चलती थीं, जहां कभी धरती खून से सनी रहती थी, आज उन्हीं नक्सल प्रभावित इलाकों में… विकास, भरोसे और कोशिशों का तिरंगा लहरा रहा है।”

“वैचारिक नक्सलवाद” को लेकर पीएम मोदी की चेतावनी

हालांकि, पीएम मोदी की सबसे कड़ी चेतावनी उस चीज के लिए थी जिसे उन्होंने “वैचारिक नक्सलवाद” कहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “सालों तक, माओवादी सोच वाले लोग देश में सत्ता के गलियारों में जमे रहे। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के तौर पर भी, इस माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया।”

उन्होंने हथियारबंद माओवादी विद्रोहियों और उन लोगों के बीच फर्क बताया जो माओवादी विचारधारा को मानते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “हम जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने और देश को उस संकट से मुक्त कराने में सफल रहे। हथियारबंद नक्सली तो चले गए हैं, लेकिन वैचारिक नक्सलवाद यानी दिमागी नक्सलवाद अभी भी मौके की तलाश में है।”

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि यह वैचारिक धारा “हिंसा और अराजकता का रास्ता बनाने” की कोशिश कर रही है और उन्होंने इसे मानने वाले लोगों की पहचान करके उन्हें अलग-थलग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “इन वैचारिक नक्सलियों की पहचान की जानी चाहिए। इन वैचारिक नक्सलियों को अलग-थलग किया जाना चाहिए।”

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