‘2047 तक विकसित भारत, हम करके दिखाएंगे’ जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर PM मोदी का बड़ा संकल्प

PM Modi: राजनीति में लंबा सफर तय करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जनसेवा में अपने 25 साल पूरे किए। इस मौके पर उन्होंने पीछे मुड़कर उपलब्धियों को याद करने के बजाय भारत के विकास के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा “2047 तक विकसित भारत, हम इसे करके दिखाएंगे!”

दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने देश के लोगों का लगातार भरोसा और समर्थन देने के लिए आभार भी जताया।

पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा, “2047 तक विकसित भारत, हम इसे करके दिखाएंगे! इसके साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने, ओलंपिक की मेजबानी करने और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने जैसे लक्ष्यों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन लक्ष्यों को लेकर देश में जो ऊर्जा और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है, वह बेहद खास है।

प्रधानमंत्री की ये बातें तब सामने आईं जब उन्होंने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे किए। यह सफर 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद, 2014 में वे प्रधानमंत्री बने और तब से अब तक तीन कार्यकाल पूरे कर चुके हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “जब मैंने 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी इस मुकाम तक पहुंचूंगा।”

उन्होंने कहा, “आज मैंने लगातार 25 वर्षों की सेवा पूरी कर ली है। यह लोगों के निरंतर आशीर्वाद और समर्थन का परिणाम है।”

‘मैं अपने देश के लोगों के सामने सिर झुकाता हूं’

पीएम मोदी ने अपनी 25 साल की यात्रा में लोगों को सबसे अहम माना और कहा कि यह उपलब्धि उनकी अपनी कामयाबी नहीं, बल्कि नागरिकों से मिले भरोसे और आशीर्वाद का नतीजा है।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं देश के सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने देश के लोगों के सामने सिर झुकाता हूं।”

प्रधानमंत्री ने समर्थन के लिए NDA की सभी पार्टियों का भी धन्यवाद किया।

अपने राजनीतिक सफर के दौरान हुए चुनावों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लोगों ने बार-बार उन्हें सेवा करने का मौका दिया।

उन्होंने कहा, “इस दौरान, चाहे विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव, लोगों ने मुझे अपनी सेवा करने के लिए चुना। आज मैं भारत के लोकतंत्र और संविधान को नमन करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने उन लोगों का भी जिक्र किया जिन्होंने उनका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझने में मदद की।

उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने मेरा विरोध किया, उन्होंने मुझे लोकतंत्र की ताकत दिखाई।”

‘मेरी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ, वह बेकार नहीं गया’

अपनी यात्रा को याद करते हुए PM मोदी ने कहा कि हर अनुभव ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है।

उन्होंने कहा, “मेरी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ, वह बेकार नहीं गया। हर अनुभव ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनका मकसद चुनावों के जरिए मशहूर होना होता, तो वे बहुत पहले ही चुनावी राजनीति में आ सकते थे।

PM मोदी ने कहा, “अगर मैं चुनावी राजनीति में चमकना चाहता, तो मैं बहुत पहले ही राजनीति के मैदान में उतर सकता था।”

इसके बजाय, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपने नजरिए को एक मिशन और कर्तव्य के तौर पर बताया।

उन्होंने कहा, “मैं महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि एक मिशन के लिए जीने वाला व्यक्ति हूं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मेरा ध्यान हमेशा कर्म पर रहता है,” और साथ ही यह भी कहा, “मेरा कर्तव्य ही मेरा धर्म है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वे 25 साल पूरे होने को कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते।

पीएम मोदी ने कहा, “मेरे 25 साल पूरे होने का पड़ाव व्यक्तिगत नहीं है।”

श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना

दिन की शुरुआत में, प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह अवसर उनके सरकार के प्रमुख के तौर पर पहली बार कार्यभार संभालने के 25 साल पूरे होने का था।

इस कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने देश, 140 करोड़ भारतीयों और खुद के लिए प्रार्थना की है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने और साथी नागरिकों की सेवा करने की शक्ति और क्षमता के लिए प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा ज्योति यात्रा’ में भाग लेने वाले नागरिकों को भी बधाई और शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा, “आज मैं जो कुछ भी हूं, जहां भी हूं और जिस भी भूमिका में सेवा कर रहा हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान ‘जनता जनार्दन’ का है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा की, “मेरे लिए जनता ही ईश्वर का रूप है।”

उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिकों का भरोसा और पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

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पीएम मोदी के मंत्रियों का चिंतन शिविर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 23 सितंबर को अपने मंत्रियों के साथ चिंतन शिविर में हिस्सा लिया। दो दिन के इस चिंतन शिविर के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रियों से उनके विभागों के कामकाज के बारे में बात की। बताया जा रहा है कि अलग अलग समूह में मंत्रियों की प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई। यह भी बताया गया है कि हर मंत्री के विभाग का प्रेजेंटेशन प्रधानमंत्री के सामने हुआ। जानकार सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के आधार पर मंत्रिमंडल में फेरबदल का फैसला होगा।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन यानी गुरुवार को मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा होगी। समीक्षा में मंत्रियों को ग्रेडिंग दी जाएगी। बताया जा रहा है कि मंत्रियों के कामकाज के लिए चार श्रेणियां बनाई गई हैं। शानदार, अच्छा, औसत और खराब श्रेणियों में उनके काम को बांटा जाएगा। शानदार से लेकर अच्छा काम करने वाले मंत्री अपने को सुरक्षित मान सकते हैं। औसत और खराब श्रेणी जिनको मिलेगी उनकी सरकार से छुट्टी हो सकती है। यह रिपोर्ट कार्ड मंत्रियों के लिए बहुत अहम साबित होने वाली है। चिंतन शिविर प्रधानमंत्री कार्यालय यानी सेवा तीर्थ में है।

केंद्रीय मंत्रिपरिषद के इस चिंतन शिविर की थीम ‘विकसित भारत 2047’ है। गौरतलब है कि अपनी दूसरी सरकार में 2021 में पूरी केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ पांच चिंतन शिविर किए थे। अभी जो चिंतन शिविर हो रहा है उसमें युवाओं व छात्रों के आंदोलन से लेकर आर्थिक विकास, महंगाई, यूसीसी, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे तमाम समकालीन राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

Chintan Shivir: पीएम मोदी आज से शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्रियों का ‘चिंतन शिविर’; ‘विकसित भारत 2047’ और बड़े सुधारों पर होगा मंथन

Chintan Shivir: केंद्रीय मंत्रियों की दो दिवसीय चिंतन बैठक आज यानी बुधवार (23 सितंबर) से शुरू होगी। इसमें सुधारों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए शासन और नीति-निर्माण के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 23 और 24 सितंबर को सेवा तीर्थ में मंथन सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें पूरी मंत्रिपरिषद शामिल होगी। सेवा तीर्थ में ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्थित है।

विचार-विमर्श करने के लिए छह समूह गठित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों के कार्यान्वयन, समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और जन-सेवाएं प्रदान करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कार्यक्रमों (योजनाओं) के समयबद्ध कार्यान्वयन और शासन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए छह समूह गठित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में आठ मंत्री होंगे।

ये समूह पहले ही कई बैठकें कर चुके हैं, जिनमें चिंतन बैठक में की जाने वाली मुद्दों पर चर्चा की गई थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सुधार को आगे बढ़ाने के लिए उनके मंत्रालयों द्वारा अपनाई गई नीतियों और उपायों पर प्रस्तुतियां देने की संभावना है।

इन विभिन्न सुधारों पर जोर

प्रधानमंत्री, विभिन्न सुधारों पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने पहले भी अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से कहा था कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और जीवन को आसान बनाना सरकार का मुख्य ध्येय होना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, चिंतन बैठक में होने वाली चर्चाओं में इन मुद्दों को उठाये जाने की उम्मीद है।

मंत्रियों की प्रस्तुतियों में नीति-निर्माण की प्रक्रिया को अधिक असरदार और प्रभावकारी बनाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसी तरह की एक चिंतन बैठक 21 अक्टूबर 2021 को भी हुई थी। उस समय बातचीत का मुख्य विषय शासन और नीति निर्माण था तथा इस कवायद का उद्देश्य मंत्रियों को सरकार के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना है।

क्या है मकसद?

इसे शासन की समीक्षा करने, मंत्रालयों के बीच तालमेल बेहतर बनाने और सरकार का भविष्य का एजेंडा तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइट को अधिक से अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर काम करने के लिए कहा था।

नए सुधारों पर रहेगा जोर

केंद्रीय मंत्रियों के बुधवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय चिंतन शिविर में मुख्य रूप से सरकार के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। साथ ही भविष्य की योजना बनाने और नए विचारों एवं सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस बैठक में पूरी सरकार के कामकाज का जायजा लिया जाएगा। साथ ही भविष्य की योजना, जारी कार्यों की समीक्षा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए विचारों, सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

‘विकसित भारत’ और ‘विजन 2047’

‘विकसित भारत’ की कवायद 2021 से चल रही है। ‘विजन 2047’ और इसके लघु अवधि एवं दीर्घ अवधि के रोडमैप को तैयार करने के लिए सचिवों के 10 क्षेत्र-आधारित समूह बनाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद के लिए हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर परामर्श भी किया गया। तब से, ‘विकसित भारत 2047’ के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के समक्ष आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं।

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मौजूदा चिंतन शिविर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यह सचिवों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग के समूहों द्वारा किए जा रहे काम को एक मंच पर लाता है, जिनमें सुधार, जीवन को आसान बनाना, नियमों के पालन को सहज करना और शासन से जुड़ी अन्य प्राथमिकताएं शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में होने वाली चर्चाओं में इन मुद्दों को उठाये जाने की उम्मीद है।

पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उज्बेकिस्तान से जुड़ी 5 खास बातें 1. डबल-लैंडलॉक्ड देश
उज्बेकिस्तान समुद्र से पूरी तरह कटा हुआ है। इसके सभी पड़ोसी देश भी लैंडलॉक्ड हैं। दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बहुत कम है। 2. समरकंद का गौरवशाली इतिहास
करीब 2700 साल पुराना समरकंद कभी सिल्क रूट का प्रमुख शहर था। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार करने वाले यहां से गुजरते थे। 3. सोने का बड़ा उत्पादक
उज्बेकिस्तान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोने का उत्पादक देश है। यहां स्थित मुरुंतौ (Muruntau) दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-पिट सोने की खदानों में से एक है। 4. बाबर की जन्मभूमि
मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म 1483 में अंदीजान शहर में हुआ था। बाबर बाद में काबुल होते हुए भारत आया और 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। ———————————-

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गीजस्तानमें SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गीजस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गीजस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। ———————————-

Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के इन इलाकों में बदल जाएगी तस्वीर, 200 वर्ग किमी में नया शहर बसाने की तैयारी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों के विकास को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया गया है। MPD-2047 के तहत दिल्ली के बाहरी इलाकों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। लैंड पूलिंग के जरिए यहां व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इस इलाके में करीब 600 किलोमीटर लंबी नई सड़कें बनाने की योजना है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) विकसित करेगा। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

जानें इस विकास मॉडल के बारे में

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के आसपास घने और मिश्रित तरीके से विकास को बढ़ावा देने की योजना है। यहां सस्ते घरों के साथ दुकानों, दफ्तरों, संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और गोदामों जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। MPD-2047 में अलग-अलग विकास मॉडल रखे गए हैं, जिससे जरूरत के अनुसार इलाकों को विकसित किया जा सकेगा।

MPD-2047 के जरिए होगा विकास

दिल्ली-2047 मास्टर प्लान के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों में विकास को गति देने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर के अर्बन एक्सटेंशन क्षेत्र में लैंड पूलिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास करना है। इसके तहत करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिससे लैंड पूलिंग वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। MPD-2047 में जमीन मालिकों की सुविधा के लिए अलग-अलग विकास मॉडल हैं। इससे जमीन के मालिक अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे और इलाकों में जरूरी सुविधाएं समय पर तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं, DDA सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करेगा।

बेहतर आवास के साथ मिलेगी अच्छी सुविधा

MPD-2047 में शहर के विकास को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाओं पर आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को DDA की ओर से विकसित किया जाएगा। नए शहरी क्षेत्रों में सिर्फ घर ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरित क्षेत्र, बाजार और दूसरी जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवास के साथ अच्छी और सुविधाजनक जीवनशैली देना है।

20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत

दिल्ली के बाहरी इलाकों में निजी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए 2018 में लैंड पूलिंग पॉलिसी शुरू की गई थी। इसमें जमीन मालिक अपनी इच्छा से योजना में शामिल हो सकते हैं और DDA की भूमिका एक मददगार संस्था के तौर पर रहती है। अब MPD-2047 के तहत इस व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी है। जमीन मालिक कंसोर्टियम के जरिए जमीन को एक साथ लाकर विकास कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं, जिसमें कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।

नए इलाकों में घरों को किया जाएगा विकसित

MPD-2047 के तहत नए इलाकों में घरों के साथ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सड़क की चौड़ाई के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दुकान, छोटे कारोबार और दूसरी सेवाओं की अनुमति दी जा सकेगी। वहीं, UER-II के आसपास सस्ते घरों के साथ बाजार, संस्थान, लॉजिस्टिक्स और गोदाम बनाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

जुलाई 2026 तक मिले इतने आवेदन

लैंड पूलिंग पॉलिसी को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट, 1957 में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। यह योजना छह प्लानिंग जोन K-I, L, N, P-II, P-I का हिस्सा और J के 105 गांवों में लागू है, जिन्हें 138 सेक्टर में बांटा गया है। जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 7,615 से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे और 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन पूल की जा चुकी थी। 16 सेक्टर में तय लक्ष्य के 70 फीसदी से ज्यादा जमीन इकट्ठा हो चुकी है, जिसके बाद DDA ने वहां कंसोर्टियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्लानिंग जोन P-II का सेक्टर 8B लैंड पूलिंग योजना में आगे बढ़ने वाला पहला सेक्टर बन गया है। गाड़ी खसरो और इब्राहिम पुर गांवों में आने वाले इस सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एक साथ पूल हो चुकी है, इसलिए अब यहां विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा आठ अन्य सेक्टरों के जमीन मालिकों ने भी DDA को कंसोर्टियम बनाने की जानकारी दी है, जिससे योजना को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

MPD-2047 के तहत लैंड पूलिंग के जरिए दिल्ली के बाहरी इलाकों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ घर, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सुविधाएं और हरित क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे।

Saptadhara Explained: ‘सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी ने बताया विकसित भारत का 7-सूत्रीय रोडमैप

Saptadhara Explained: सात धाराओं के पवित्र हिंदू विचार से लेकर विकसित भारत के लिए सात-सूत्रीय रोडमैप तक: ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर इसका जिक्र क्यों किया? दरअसल, ‘सप्तधारा’ शब्द असल में ‘सप्त’ (यानी सात) और ‘धारा’ (यानी बहाव या प्रवाह) से मिलकर बना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसे विकास के एक फ्रेमवर्क के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से बहुत पहले से ही, सात पवित्र धाराओं का यह विचार हिंदू धार्मिक परंपराओं में मौजूद था।

बता दें कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जो घोषणा की, उसका आधार यही सांस्कृतिक और सभ्यतागत सोच थी। उन्होंने एक नई “सप्तधारा” — यानी ताकत की सात धाराएं — की बात की, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर भारत के सफर को आगे बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की पुरानी अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत अपनी ताकत के लिए सप्त सिंधु के कारण जाना जाता था और तर्क दिया कि अब एक विकसित भारत को ताकत की नई धाराओं की जरूरत है।

तो, सप्तधारा का हिंदू मूल क्या है, और इस शब्द को नीति के संदर्भ में नया अर्थ कैसे मिला है?

हिंदू परंपरा में ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है?

सबसे बुनियादी स्तर पर, सप्तधारा का अर्थ है ‘सात धाराएं’। हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात की संख्या का विशेष महत्व है—चाहे वह सात ऋषि (सप्तर्षि) हों, सात पवित्र नदियां हों या हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित सात लोक हों।

पद्म पुराण में एक विशिष्ट ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का भी वर्णन मिलता है।

संबंधित अध्याय के अनुवाद के अनुसार, सप्तधारा को एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थान माना जाता था और यह ऋषियों से जुड़ा हुआ था। इस ग्रंथ में पवित्र जल की सात धाराओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें गंगा के सात शुभ रूपों से जोड़ा गया है। इस स्थान का संबंध पांडवों से भी बताया गया है।

पद्म पुराण में सप्तधारा का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सात धाराओं में बहने वाले पवित्र जल को गंगा की पवित्रता, तीर्थ यात्रा और पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों से जोड़ा गया है।

सप्तधारा या सप्तसरोवर नामक स्थानों से जुड़ी अन्य हिंदू परंपराएं भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार में एक स्थानीय मान्यता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हो गई थी ताकि सप्तऋषि (सात प्राचीन ऋषि) बिना किसी व्यवधान के अपनी तपस्या कर सकें।

दूसरे शब्दों में, “सात धाराएं” कोई नई गढ़ी गई उपमा नहीं है। लंबे समय से यह पवित्र प्रवाह, समृद्धि, निरंतरता और किसी शक्तिशाली चीज के विभिन्न दिशाओं में फैलने का प्रतीक रही है।

सप्तधारा और सप्त सिंधु: क्या है इनका संबंध?

पीएम मोदी के भाषण को समझने के लिए यह कड़ी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

‘सप्त सिंधु’ का शाब्दिक अर्थ है “सात नदियां” और यह शुरुआती वैदिक काल से जुड़ा एक प्राचीन भौगोलिक और सांस्कृतिक शब्द है।

पीएम मोदी ने अपनी ‘सप्तधारा’ को पौराणिक ‘सप्तधारा-तीर्थ’ की हूबहू नकल के तौर पर पेश नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपने आज के विचार को समझाने के लिए पुरानी ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा का इस्तेमाल एक पुल की तरह किया।

सात ही क्यों?

भारतीय परंपराओं में ‘सात’ का बहुत गहरा महत्व है। सप्तऋषि (सात ऋषि) और सप्तसिंधु (सात नदियां) जैसी अवधारणाएं हैं। साथ ही हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, रीति-रिवाजों और साहित्य में भी सात के समूहों का कई बार जिक्र मिलता है।

इसलिए, यह संख्या पूर्णता और विविधता को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्रतीक है: अलग-अलग धाराएं मिलकर एक बड़ा प्रवाह बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह इस विचार का इस्तेमाल किया। उनकी ‘सप्तधारा’ कोई एक योजना या नया मंत्रालय नहीं है। बल्कि, यह सात हिस्सों वाला एक रणनीतिक ढांचा है। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए जरूरी आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी, सैन्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मजबूती दे सकते हैं।

PM मोदी की सात ‘सप्तधाराएं’ क्या हैं?

  1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। इसमें पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने से लेकर डिजाइन और तैयार उत्पादों तक हर स्तर शामिल है। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद हिस्सा बनना होगा। उन्होंने तीन जरूरतों पर ज़ोर दिया: लागत, क्वालिटी और स्केल।

उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे मेरे भाइयों और बहनों के लिए, यह एक बड़ मौका है। इस मौके को हाथ से न जाने दें। और इसके लिए, हमें लागत, क्वालिटी और स्केल के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। हमारी फैक्ट्रियां कॉम्पिटिटिव होनी चाहिए। हमारे प्रोडक्ट यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।”

इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार न रहे, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बने।

  1. खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग: दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। यहां जोर सिर्फ खेती से होने वाले उत्पादन को बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेत से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने पर है। पीएम मोदी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों, फलों और सब्जियों जैसे उत्पादों का जिक्र किया और कहा कि भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। दुनिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। और अगर हमारे कृषि उत्पाद हर तरह से ग्लोबल मानकों पर खरे उतरते हैं, तो हम आसानी से दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच पाएंगे।”

इसका मकसद खेती से होने वाले उत्पादन में प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए वैल्यू जोड़ना है, न कि किसानों को मुख्य रूप से कच्चे माल (रॉ-कमोडिटी) के स्तर पर ही छोड़ देना।

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की है। पीएम मोदी ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के अनुभव का जिक्र किया और कहा कि देश को अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग लगानी चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती हुई टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन (जिसमें ‘मेड-इन-इंडिया 6G’ भी शामिल है) जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। इसका मुख्य संदेश यह है कि भारत उभरती हुई टेक्नोलॉजी का सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। बल्कि उसे इनका डेवलपर और निर्यातक भी बनना होगा।

उन्होंने कहा, “मेड-इन-इंडिया दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज करनी चाहिए। इस दिशा में हमारे प्रयास कम नहीं होने चाहिए।”

  1. गति शक्ति: चौथी धारा है ‘गति शक्ति’ – यानी रफ्तार और कनेक्टिविटी की ताकत। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, अंदरूनी जलमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इसका मकसद पूरे भारत में लोगों और सामान को लाने-ले जाने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ निर्माण का काम नहीं है। यह भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता) का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें एयरपोर्ट्स की जरूरत है। हमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की जरूरत है। हमें अपने बंदरगाहों को सिर्फ सामान चढ़ाने और उतारने की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दुनिया भर से जहाजों का वहां आकर रुकना ही काफी नहीं है। हमें अपने बंदरगाहों को ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह-आधारित विकास) और ग्रोथ की दिशा में आगे ले जाना होगा।”

इसलिए, पीएम मोदी ने बिना रुकावट वाली कनेक्टिविटी को देश के बड़े आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा।

  1. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा: पांचवां क्षेत्र डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।

उन्होंने उस जोखिम का जिक्र किया जो तब पैदा होती है जब जरूरी चीजों – जैसे एनर्जी, फर्टिलाइजर, दवाइयां और टेक्नोलॉजी – की सप्लाई पर जियोपॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है। वहीं, इसका समाधान है घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना और ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी विकसित करना, ताकि भारत को एक ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगली जनरेशन की डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करके, हमें ग्लोबल सप्लायर बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा।”

  1. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी:

छठी धारा दो क्षेत्रों को मिलाती है: ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

ग्रीन हिस्से में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। ब्लू हिस्सा भारत की तटरेखा, महासागरों, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। इसका बड़ा मकसद आर्थिक विकास को एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोड़ना और साथ ही भारत की समुद्री क्षमता का इस्तेमाल करना है।

  1. भारत की सॉफ्ट पावर: सातवीं और आखिरी धारा ‘सॉफ्ट पावर’ है।

यहीं पर मोदी की ‘सप्तधारा’ पारंपरिक आर्थिक पैमानों से आगे निकल जाती है। उन्होंने योग, हस्तशिल्प, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव खुद एक आर्थिक और भू-राजनीतिक संपत्ति बन सकता है।

इसका मकसद भारत के उत्पादों, संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विचारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को दुनिया तक ले जा सकते हैं। चाहे वह हस्तशिल्प हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हों, हमारी क्रिएटिव दुनिया हो, VFX, एनिमेशन, गेमिंग या डिजिटल कंटेंट हो – भारत क्रिएटिव दुनिया में अपनी ताकत दिखा सकता है। हमें इसे एक ग्लोबल क्षमता के तौर पर विकसित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा: “भारत के पास वन संपदा का विशाल भंडार है। हमारे यहां 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। इसमें बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे रहे हैं। हमारे पास अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने का मौका है। हमें दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं को दिखाना होगा।”

सप्तधारा के पीछे की सोच क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ की घोषणा को ‘विकसित भारत 2047’ के बड़े लक्ष्य से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें अब आने वाले पांच से सात सालों में पूरा करना होगा। उन्होंने इस पहल को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार की गति बढ़ाने वाला कदम) भी कहा और सिस्टम, सोच और काम करने की रफ्तार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

इस वजह से ‘सप्तधारा’ सिर्फ सरकार की एक अलग योजना नहीं रह जाती, बल्कि सरकार के विकास के एजेंडे के अगले चरण के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा बन जाती है।

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