Delhi CJP Protest: दिल्ली में सभी मेट्रो स्टेशन खुले! रेल और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल, बैरिकेडिंग और पुलिस हिरासत पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

Delhi CJP Protest News: राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाएं बंद करने तथा लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार (11 अक्टूबर) को अहम निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने वाले लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा, “ऐसे लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए।” साथ ही शीर्ष अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने, कानून के मुताबिक इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रखने और लोगों एवं ट्रैफिक की आवाजाही की अनुमति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर लगी धारा 163 का बोर्ड हटाने का भी निर्देश दिया, ताकि न्याय तक पहुंच को लेकर कोई आशंका न रहे।

दिल्ली में मेट्रो-ट्रेन और इंटरनेट चालू रहेंगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने उसके निर्देश के उल्लंघन के आरोप में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने में किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचायी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से जुटने वालों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। शीर्ष अदालत ने ट्रैफिक नियमों के अधीन लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही बैरिकेड्स लगाने की जरूरत की समीक्षा करने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने कहा, “कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए।”

केंद्र सरकार को नोटिस जारी

अदालत ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस भी जारी किया, जिसमें दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी न्यायालय के निर्देश के कथित उल्लंघन को लेकर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो अपनी सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों।

पीठ ने कहा, “9 अक्टूबर 2026 के हमारे पिछले आदेश के उल्लंघन और 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के आरोपों वाली तत्काल सुनवाई की याचिकाओं के मद्देनजर न्यायालय ने विशेष सुनवाई की।”

‘निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया। मेट्रो रेल सेवा संचालित नहीं हो रही थी। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद रहे। ट्रैफिक संबंधी कोई एडवाइजरी जारी नहीं किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को अनुचित रूप से परेशान किया गया। लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। जिन स्थानों पर यह सब हुआ, उनमें वे इलाके भी शामिल थे, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा के दायरे में नहीं आते थे।”

पत्रकारों को लेकर पुलिस को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने से न रोका जाए। सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशन में से केवल 45 पर एंट्री और एग्जिट प्रतिबंधित था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के नौ अक्टूबर के आदेश का उल्लेख किया गया है। यह आदेश दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 57 मेट्रो स्टेशन को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार तक सरकार से जवाब मांगा है।

निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP और कुछ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। सरकार ने शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करके और 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को रोक दिया। हिरासत में लिए गए लोगों में CJP नेता अभिजीत दीपके, विपक्ष के कई नेता और यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल थे।

ये भी पढ़ें- CJP Protest News: दिल्ली में इस प्रोटेस्टर को जिन 4 ने पीटा उनकी पहचान हुई और पुलिस ने ट्रेस भी कर लिया! अब होगा ये एक्शन

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की मुख्य बातें

  • दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। पाबंदियां तभी लगाई जा सकती हैं जब वे आर्टिकल 19(2) के तहत सही ठहराई जा सकें।
  • कानूनी पाबंदियां लगाने की वैधानिक शक्तियों पर असर डाले बिना, कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं चालू रहनी चाहिए।
  • दिल्ली में लोगों और गाड़ियों की आवाजाही में बेवजह रुकावट नहीं आनी चाहिए। कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की जरूरतों के आधार पर बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए।
  • किसी को भी गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। किसी भी हिरासत के मामले में कानून द्वारा तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
  • कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जानी चाहिए, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां धारा 163 BNSS के तहत सख्ती लागू है।
  • सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास धारा 163 की पाबंदियों वाला कोई भी नोटिस बोर्ड अगर अभी भी लगा है, तो उसे हटा दिया जाना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस आश्वासन को दर्ज किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने में नहीं रोका जाएगा।
  • शीर्ष अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन के आरोप में अवमानना ​​की कार्यवाही के तहत नोटिस जारी किया गया। अधिकारियों को मंगलवार, 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें मेट्रो पाबंदियों और रेलवे की सलाहों का विवरण शामिल हो।
  • बड़े पैमाने पर हिरासत और उससे जुड़े अन्य मामलों के आरोपों वाली ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिकाओं पर 13 अक्टूबर को मुख्य मामलों के साथ सुनवाई होगी।
  • अदालत ने कहा कि राज्य को कथित हिरासत के हालात, तरीके और कानूनी आधार के बारे में बताना होगा, क्योंकि आर्टिकल 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा और उन्हें लागू करना कोर्ट का कर्तव्य है।

दिल्ली प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, मेट्रो चलने पर नहीं लगाई जाएगी पूरी रोक, कहा- सेवाएं बंद करने के बजाय रेगुलेट करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि 10 अक्टूबर को CJP के विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो और राजधानी आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगे। क्योंकि सब कुछ पूरी तरह से ठप नहीं कर सकते।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस बागची और वी. मोहना की बेंच ने केंद्र से कहा कि यात्रियों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी कारण से सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलने दिया जाए। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि पूरी तरह रोक लगाने और सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलने देने में फर्क है।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की बात पर ध्यान दिया कि वे अधिकारियों से रोक पर फिर से विचार करने और मेट्रो ट्रेनों व अन्य रेलवे सेवाओं को उचित रूप से नियंत्रित तरीके से चलने देने के लिए कहेंगे ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो और आनुपातिकता के सिद्धांत का ध्यान रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि हम यह साफ करते हैं कि मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी।” बेंच ने आगे कहा, “हम निर्देश देते हैं कि मेट्रो ट्रेनों और अन्य रेलवे सेवाओं की उचित रूप से नियंत्रित तरीके से आवाजाही के बारे में अधिकारियों द्वारा लिए गए सोच-समझकर किए गए फैसले का उचित प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि आम जनता को होने वाली असुविधा कम से कम हो।”

बेंच ने ये भी कहा कि दिल्ली में ट्रैफिक की आवाजाही के संबंध में भी इसी तरह के विज्ञापन जारी किए जाने चाहिए। बेंच ने कहा कि सड़कों पर बैरिकेडिंग के मामले पर भी फिर से विचार किया जाना चाहिए और वैकल्पिक रास्तों का उचित प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

बता दें कि  दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होने वाला है। प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कई ट्रेनों को रद्द करने का सरकार ने फैसला किया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका को दाखिल किया गया था। CPI(M) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने याचिका दाखिल कर कोर्ट से इस फैसले में दखल देने को कहा गया था। प्रदर्शन मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया (SIR) और चुनाव आयोग के खिलाफ किया जाने वाला है। इसके चलते दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद रखने का ऐलान किया था। यह बंद  9 अक्टूबर की रात 9 बजे से शुरू होकर हालात सामान्य होने तक जारी रखने के लिए कहा गया है।

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर की दवाओं के दाम पर सरकार का बड़ा फैसला, 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसकी चपेट में आने वाले मरीज के साथ-साथ उसका पूरा परिवार जूझता है। यह बीमारी शरीर ही नहीं, आत्मबल और आर्थिक स्थिति को भी चोट पहुंचाती है। बहुत से मरीज और उनके परिजन इसका इलाज तक पूरा नहीं कर पाते हैं। लेकिन सरकार के इस कदम से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार इस जानलेवा बीमारी की दवाओं के दाम 70% तक घटाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30% तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कैंसर की अन्य दवाओं को मूल्य सुरक्षा देना

सरकार ने गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री में लगने वाले मार्जिन को सीमित करने को मंजूरी दे दी है। ये मार्जिन अधिकतम बिक्री मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित होंगे। इस कदम से दवाओं की कीमतें 70% तक कम होने और कैंसर के मरीजों को हर साल ₹2,500 करोड़ बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे उनकी जेब से चुकाने वाली रकम में काफी कमी आएगी।

शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल जरूरी कैंसर की दवाएं पहले से ही सरकार द्वारा तय की गई सख्त सीलिंग प्राइस के तहत हैं। लेकिन इस सूची से बाहर गैर सूचीबद्ध कैंसर दवाओं को सरकार के नए फैसले से मूल्य सुरक्षा मिलेगी। मरीजों तक पहुंचने से पहले दवाओं पर जोड़े जाने वाले मार्जिन को सीमित किया जाएगा।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत एक विशेषज्ञ समिति कवर की जाने वाली दवाओं की सूची को अंतिम रूप देगी। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) फिर फैसला लेगी और अधिसूचना जारी करेगी।

कम होगा कैंसर के इलाज का भारी खर्च

भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, हर एक लाख की आबादी पर लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। इलाज से मरीजों और उनके परिवारों पर पैसे का भारी बोझ पड़ता है। एनपीपीए के मार्केट डेटा के एनालिसिस में पाया गया कि गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की कीमत में औसतन लगभग 170% का मार्क-अप होता है। कुछ मामलों में यह 700% या उससे भी अधिक हो जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, मरीज तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन से गुजरने वाली दवा की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। रिटेल फार्मेसी, हॉस्पिटल फार्मेसी या ऑनलाइन फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं की कीमतें भी काफी अलग-अलग होती हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सहित राज्य अधिकारियों ने, मरीजों और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर दवाओं की बहुत ज्यादा कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन चिंताओं पर सार्वजनिक मंचों पर भी आवाज उठाई गई है। खासकर जिस कीमत पर दवाएं बेचने के लिए खरीदी जाती हैं और कंज्यूमर से ली जाने वाली MRP के बीच बड़े अंतर को लेकर।

महंगी कैंसर की दवाओं पर इतना अधिक मार्जिन मरीजों के इलाज का खर्च काफी बढ़ा देता है। नई लिमिट से बहुत ज्यादा मुनाफाखोरी पर रोक लगेगी, बाजार में गलत कीमत तय करने के तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा और मरीजों के लिए सही कीमतें पक्का करने में मदद मिलेगी।

2019 के फैसले से मिली राहत को आगे बढ़ाना

फरवरी 2019 में, सरकार के निर्देश पर, एनपीपीए ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की लिमिट लगा दी थी। सरकार के इस दखल से पता चलता है कि मार्जिन को सीमित करने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।

उस फैसले से MRP 91% तक कम हो गई, जिससे 526 ब्रांड पर सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई। इससे कैंसर के मरीजों पर पैसे का बोझ काफी कम हुआ और उनकी जिंदगी आसान हुई। इससे सबक लेते हुए और सप्लाई चेन में कीमत की समस्याओं को दूर करते हुए, सरकार ने अब बड़ी लिमिट को मंजूरी दे दी है।

उत्पादन बनाए रखना और लगातार उपलब्धता पक्का करना

कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के मैन्युफैक्चरर्स को अपने मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखना होगा। इस हस्तक्षेप में ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में बनी और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड, सभी श्रेणी की गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाएं शामिल होंगी। इससे मरीजों को कम कीमतों का काफी फायदा होगा। साथ ही, उन्हें जरूरी दवाएं लगातार मिलती रहेंगी।

Delhi Metro News: 10 अक्टूबर को राजीव चौक, मंडी हाउस और कश्मीरी गेट समेत ये 57 मेट्रो रह सकते हैं बंद, पूरी लिस्ट यहां देखिए

दिल्ली में दौड़ेगी भारत की पहली 3-कोच वाली मेट्रो! लाजपत नगर से साकेत तक बनेगा नया रूट, जानें पूरा प्लान

Delhi Metro: दिल्ली में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। जल्द ही लाजपत नगर से साकेत जी ब्लॉक के बीच एक नया मेट्रो कॉरिडोर बनने जा रहा है। इस नए रूट के शुरू होने से दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। खास बात यह है कि इस कॉरिडोर पर तीन कोच वाली छोटी मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना है।

बता दें की नया लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो के फेज-4 विस्तार का हिस्सा है। करीब 8 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का पूरा हिस्सा एलिवेटेड होगा और इसमें कुल 8 स्टेशन बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट का मकसद दक्षिण दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करना है, ताकि रिहायशी, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल इलाकों के बीच आने-जाने वाले लोगों को ज्यादा सुविधाजनक सफर मिल सके।

इन 8 स्टेशनों से जुड़ेगा नया मेट्रो रूट

प्रस्तावित कॉरिडोर पर लाजपत नगर, एंड्रयूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्पा भवन, साकेत कोर्ट, पुष्प विहार और साकेत जी ब्लॉक स्टेशन होंगे। इस नए रूट से ग्रेटर कैलाश-1, पुष्प विहार और साकेत जैसे प्रमुख इलाकों को सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

इस कॉरिडोर की सबसे खास बातों में से एक है भारत की पहली तीन-कोच वाली मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना। कई व्यस्त रूटों पर चलने वाली लंबी मेट्रो ट्रेनों के उलट, ये ट्रेनें कम दूरी की शहरी यात्रा के लिए बनाई गई हैं। हर ट्रेन में लगभग 900 यात्रियों के बैठने की जगह होगी, जिसमें हर कोच में करीब 300 यात्री आ सकेंगे। छोटी ट्रेन का यह कॉन्फिगरेशन इस अपेक्षाकृत छोटे कॉरिडोर पर होने वाली संभावित मांग को ध्यान में रखकर तय किया गया है।

नया कॉरिडोर लाजपत नगर में एक और मेट्रो कनेक्शन जोड़ेगा। यह स्टेशन गोल्डन लाइन को मौजूदा वॉयलेट और पिंक लाइनों से जोड़ेगा, जिससे यह एक ट्रिपल इंटरचेंज स्टेशन बन जाएगा। इससे यात्रियों को लाइन बदलने और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

चिराग दिल्ली इस रूट का एक और अहम स्टेशन है। यह मैजेंटा लाइन के साथ इंटरचेंज की सुविधा देगा, जिससे यात्री एक और बड़े मेट्रो कॉरिडोर से जुड़ सकेंगे। उम्मीद है कि इस कनेक्शन से दक्षिण दिल्ली से गुजरकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाने वाले यात्रियों के लिए सफर ज्यादा आसान हो जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कॉरिडोर पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों के आने-जाने की उम्मीद है क्योंकि यह घनी आबादी वाले इलाकों और ज्यादा भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों को जोड़ता है। दिल्ली मेट्रो का अनुमान है कि रोजाना लगभग 60,000 से 80,000 यात्री इस पर सफर करेंगे और ट्रेन की फ्रीक्वेंसी में सुधार के बाद 2041 तक यह संख्या 1.2 लाख से ज्यादा हो सकती है। ये आंकड़े अनुमान हैं, न कि यात्रियों की असल संख्या।

बता दें कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने दिसंबर 2025 में इस कॉरिडोर पर निर्माण कार्य शुरू किया था। साकेत इलाके में पुष्पा भवन के पास पहला टेस्ट पाइल और शिलान्यास समारोह हुआ। यह कॉरिडोर बड़े ‘गोल्डन लाइन’ विस्तार से भी जुड़ा है, जिसमें तुगलकाबाद-एरोसिटी रूट भी शामिल है।

यह भी पढ़ें: Meta Child Sexual Case: मेटा पर सरकार की सख्ती! मार्क जुकरबर्ग की कंपनी ने बच्चों की सुरक्षा पर लिया बड़ा फैसला, जानिए क्या पूरा मामला

BRICS समिट के बीच दिल्ली मेट्रो ने बदला अपना टाइम, जानें कल कितने बजे से चलेगी सभी लाइनें

BRICS समिट के चलते दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और DMRC ने लोगों से पहले से यात्रा की योजना बनाने की अपील की है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS लीडर्स समिट के चलते कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। इसी के साथ कुछ रास्तों पर ट्रैफिक में बदलाव किया गया है। इसी बीच दिल्ली मेट्रो यात्रियों के लिए रविवार को राहत की खबर है। रविवार को यात्रियों को दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सामान्य समय से एक घंटे पहले मिलेंगी। DMRC ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों और BRICS समिट के चलते रविवार को सभी मेट्रो लाइनों पर सेवा सामान्य से पहले शुरू होगी।

कल जल्दी शुरू होगी मेट्रो लाइन

दिल्ली मेट्रो में आम दिनों में पिंक, मैजेंटा और ग्रे लाइन जैसी कुछ मेट्रो लाइनों पर रविवार की सेवा सुबह 7 बजे शुरू होती है, लेकिन परीक्षा को देखते हुए DMRC ने सभी कॉरिडोर पर सुबह 6 बजे से मेट्रो चलाने का फैसला किया है। इससे परीक्षा देने वाले छात्रों को समय पर अपने सेंटर तक पहुंचने में मदद मिलेगी। DMRC ने X पर जानकारी देते हुए बताया कि, ‘BRICS समिट के चलते दिल्ली में ट्रैफिक पाबंदियां लागू रहेंगी। इसे देखते हुए परीक्षा देने वाले छात्रों और आम यात्रियों की सुविधा के लिए रविवार को सभी मेट्रो लाइनों पर सेवा सुबह 6 बजे से शुरू की जाएगी। इससे लोगों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी।’

क्यों लिया गया फैसला

ये फैसला छात्रों और यात्रियों की सुविधा के लिए लिया गया है। DMRC ने लोगों से बदले समय के अनुसार अपनी यात्रा प्लान करने की अपील की है। DMRC का ये फैसला NDA और CDS परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए काफी मददगार रहेगा। रविवार को सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक में बदलाव के कारण दिल्ली के कुछ इलाकों में आने-जाने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में सुबह जल्दी मेट्रो सेवा शुरू होने से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ आम यात्रियों को भी अपने गंतव्य तक समय पर पहुंचने में आसानी होगी।

 

उम्मीदवार ने किया था रिक्वेस्ट

दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सुबह जल्दी शुरू करने का फैसला एक CDS उम्मीदवार की मांग के बाद लिया गया। उम्मीदवार ने ट्रैफिक पुलिस से अनुरोध किया था कि परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने के लिए सुबह मेट्रो सेवा शुरू कराई जाए। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने यह अनुरोध DMRC तक पहुंचाया। मामले को देखते हुए DMRC ने रविवार को पूरे मेट्रो नेटवर्क पर सुबह 6 बजे से ट्रेन चलाने का फैसला किया।

मेट्रो से करें सफर

12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS लीडर्स समिट के चलते कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है और कुछ रास्तों पर ट्रैफिक में बदलाव किया गया है। VVIP काफिलों और सड़क पर लगने वाली पाबंदियों के कारण लोगों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि संभव हो तो सड़क की बजाय मेट्रो से सफर करें।

BRICS Summit 2026: ‘कमजोर कड़ी’ से ग्रोथ इंजन तक: 14 साल में कैसे बदली भारत की BRICS कहानी

BRICS Summit 2026: जब भारत ने 2012 में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब देश की अर्थव्यवस्था आज के मुकाबले काफी अलग स्थिति में थी। उस समय BRICS समूह भी काफी नया था। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

गौरतलब है कि भारत पहले से ही इस ऐसे समूह का हिस्सा था, जिसे 21वीं सदी की उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधि माना जाता था। लेकिन उस समय यह सवाल भी उठ रहे थे कि क्या भारत वास्तव में इस उम्मीद पर खरा उतर पाएगा?

14 साल बाद, जब भारत 2026 में एक बार फिर BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तो स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

अब भारत ऐसा देश नहीं है, जो BRICS में अपनी जगह साबित करने की कोशिश कर रहा हो। बल्कि अब भारत को इस समूह की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और BRICS की आर्थिक और रणनीतिक ताकत का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

2012 और 2026 के इन दोनों मौकों के बीच का अंतर यह समझने का अच्छा तरीका है कि इन 14 सालों में भारत कितना बदल गया है।

जब भारत BRICS की ‘कमजोर कड़ी’ था

2012 में सवाल यह नहीं था कि क्या भारत BRICS को आकार दे सकता है, बल्कि यह था कि क्या वह इस समूह का सबसे कमजोर सदस्य बनता जा रहा है।

क्या भारत सच में BRICS में अपनी जगह का हकदार था? क्या BRIC में “I” (इंडिया) की जगह इंडोनेशिया को ले लेना चाहिए था? क्या भारत इस समूह की सबसे कमजोर कड़ी था? ये सवाल उस समय के आर्थिक माहौल को दिखाते थे।

भारत की विकास दर तेजी से धीमी हो गई थी, महंगाई ज्यादा थी, रुपया दबाव में था और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सरकार की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं।

जून 2012 में, Standard & Poor’s (S&P) ने चेतावनी दी थी कि भारत अपनी इन्वेस्टमेंट-ग्रेड सॉवरेन रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है। इसके पीछे धीमी विकास दर और पॉलिसी बनाने में आ रही राजनीतिक रुकावटों का हवाला दिया गया था। उस समय भारत की रेटिंग BBB- थी, जो स्पेक्युलेटिव ग्रेड से बस एक पायदान ऊपर थी।

यह चेतावनी उस समय भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर फैली निराशा का एक अहम संकेत बन गई थी।

Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O’Neill, जिन्होंने BRIC (ब्रिक) शब्द गढ़ा था, भारत के वैल्यूएशन को लेकर भी बहुत उत्साहित नहीं थे। अगस्त 2012 के एक इंटरव्यू में, उन्होंने वैल्यूएशन के मामले में भारत को चार BRIC अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम आकर्षक बताया था; उन्होंने चीन को पहले स्थान पर रखा, जिसके बाद ब्राज़ील, रूस और फिर भारत का नंबर था।

उस समय भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति भी उतनी ही मुश्किल थी। 2012-13 में विकास दर 5 प्रतिशत से नीचे गिर गई थी, जबकि महंगाई का स्तर ऊंचा बना रहा। भारत के बारे में धारणा बदलने लगी थी; अब उसे एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के बजाय ऐसी अर्थव्यवस्था के तौर पर देखा जाने लगा था जो पॉलिसी पैरालिसिस (नीतिगत गतिरोध), महंगाई और धीमी होती विकास दर से जूझ रही थी।

दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत BRICS का हिस्सा तो था, लेकिन इस बात पर संदेह था कि क्या वह दूसरी उभरती हुई ताकतों के साथ कदम मिलाकर चल पाएगा।

2026 की ओर आगे बढ़ते हुए

आज स्थिति काफी अलग है।

भारत 2026 के ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में एक ऐसी अर्थव्यवस्था के साथ शामिल हो रहा है जिसने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर बनाए रखी है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी (GDP) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सरकार ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास की गति बनाए रखी है।

यह 2010 के दशक की शुरुआत में मंदी के दौरान भारत की 5 प्रतिशत से कम विकास दर के मुकाबले एक बड़ा अंतर है।

बता दें कि यह बदलाव सिर्फ एक तिमाही के जीडीपी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। भारत के आर्थिक आधार और वैश्विक संस्थानों द्वारा उनके मूल्यांकन के तरीके में भी बदलाव आया है।

‘फॉलन एंजेल’ (Fallen Angel) के डर से ‘A-‘ रेटिंग तक का सफर

शायद इस बदलाव को समझने का एक सबसे साफ उदाहरण भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग है।

2012 में S&P की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी थी कि भारत इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को लेकर सवाल उठने लगे थे।

लेकिन सितंबर 2026 में Japan Credit Rating Agency (JCR) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर BBB+ से A- कर दिया। रेटिंग के साथ Stable Outlook भी दिया गया। JCR ने इसकी वजह भारत की मजबूत और मुश्किल परिस्थितियों में भी टिके रहने वाली आर्थिक विकास दर, वित्तीय स्थिति में सुधार, मजबूत बैंकिंग सिस्टम और बेहतर बाहरी आर्थिक स्थिति को बताया।

JCR ने भारत की लगातार तेज आर्थिक विकास दर, मजबूत निजी खपत और सरकारी निवेश को भी अहम कारण माना। इसके अलावा GST और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नीतिगत कदमों का भी उल्लेख किया गया।

एजेंसी ने सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार की भी तारीफ की। खास तौर पर पूंजीगत खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते निवेश को भारत की आर्थिक मजबूती का अहम हिस्सा बताया गया।

इस रेटिंग में बढ़ोतरी की अहमियत सिर्फ रेटिंग बढ़ने तक सीमित नहीं है। असली बदलाव यह है कि 2012 के मुकाबले आज भारत की अर्थव्यवस्था और उसके जोखिम को लेकर चर्चा पूरी तरह बदल गई है।

2012 में चिंता इस बात की थी कि क्या भारत अपनी इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग बचा पाएगा? वहीं आज चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या भारत की तेज आर्थिक विकास दर उसे आने वाले समय में दुनिया की एक बहुत बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद कर सकती है।

BRICS में बदलाव आया है और इसमें भारत की जगह भी बदली है

जिस ग्रुप में भारत BRIC के तौर पर शामिल हुआ था, उसमें भी जबरदस्त बदलाव आया है।

BRICS का दायरा इसके शुरुआती चार सदस्यों से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और बाद में हुए विस्तार में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें जुड़ गए।

अब यह ग्रुप दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, यह सिर्फ एक आर्थिक नाम से बदलकर उभरते और विकासशील देशों के लिए एक व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक मंच बन गया है।

इस विस्तार ने BRICS में भारत की स्थिति को और भी अहम बना दिया है।

ध्यान दें कि भारत BRICS की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है। चीन की अर्थव्यवस्था भारत से काफी बड़ी है, लेकिन आर्थिक विकास, बड़ी आबादी, विशाल बाजार, तकनीकी क्षमता और दूसरे देशों के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंधों का मेल भारत को BRICS में काफी महत्वपूर्ण बनाता है।

वहीं, 2012 के BRICS की तुलना में आज स्थिति अलग है। तब भारत को मुख्य रूप से BRICS के दूसरे देशों से तुलना करके देखा जाता था। लेकिन अब भारत सिर्फ समूह के दूसरे सदस्यों के साथ अपनी स्थिति की तुलना नहीं कर रहा है, बल्कि यह भी कोशिश कर रहा है कि बदला हुआ BRICS आगे किस दिशा में जाए और उसका स्वरूप कैसा हो।

आर्थिक कहानी से रणनीतिक अहमियत तक

BRICS में भारत का उभार सिर्फ GDP तक सीमित नहीं है। यह भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दूसरे देशों से संबंध बनाए रखने की भारत की क्षमता के बारे में भी है।

जानकारी के मुताबिक, 2026 का यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया का संकट और व्यापक भू-राजनीतिक बंटवारा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नए सिरे से आकार दे रहे हैं।

रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्राथमिकता और उन देशों के साथ एक ही समय में जुड़ने की उसकी क्षमता—जिनके हित हमेशा एक जैसे नहीं होते—इस माहौल में और भी अहम हो गई है।

चैथम हाउस ने रणनीतिक स्वायत्तता को भारत की विदेश नीति की एक पुरानी विशेषता बताया है। साथ ही, यह भी कहा है कि भारत का यह नजरिया नई दिल्ली को उन देशों के साथ संबंध बनाए रखने में मदद करता है जिनके साथ पश्चिम के संबंध मुश्किल भरे रहे हैं। संस्थान ने अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा से तेजी से बदलती दुनिया में ‘मध्यम शक्तियों’ (middle powers) के लिए ‘रणनीतिक हेजिंग’ (strategic hedging) के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया है।

बता दें कि भारत के लिए, इसका मतलब है कि ब्रिक्स सिर्फ एक आर्थिक ग्रुप नहीं है। यह उन कई मंचों में से एक है जिनके जरिए नई दिल्ली किसी एक बड़े पावर ब्लॉक के साथ औपचारिक रूप से जुड़े बिना अपने हितों को आगे बढ़ा सकती है।

2026 के समिट का महत्व भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य बड़े नेता नई दिल्ली में इकट्ठा हो रहे हैं क्योंकि भारत इस ग्रुप की मेजबानी कर रहा है। भू-राजनीतिक बंटवारे के दौर में इन नेताओं का भारत आना ही नई दिल्ली की बढ़ती ‘इकट्ठा करने की क्षमता’ (convening power) को दिखाता है।

इन देशों के साथ भारत के रिश्ते जटिल हैं और अक्सर उनमें काफी मतभेद भी रहे हैं। चीन भारत का रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी बना हुआ है; रूस भारत के रक्षा और ऊर्जा हितों से गहराई से जुड़ा है; ईरान भारत की कनेक्टिविटी और पश्चिम एशिया से जुड़ी रणनीतियों के लिए अहम है। फिर भी, भारत इन सभी के साथ एक ही कूटनीतिक ढांचे के भीतर काम करने में सक्षम है।

भारत की आर्थिक कहानी में गुणात्मक बदलाव भी आया है।

पहले भारत की BRIC वाली छवि मुख्य रूप से उसके सर्विस सेक्टर, IT इंडस्ट्री, बढ़ते कंज्यूमर मार्केट और डेमोग्राफिक क्षमता से जुड़ी थी। आज, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती हुई टेक्नोलॉजी देश की आर्थिक कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा बन गई हैं।

UPI और आधार जैसे प्लेटफॉर्म के विकास ने भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक खास मॉडल दिया है, जबकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली पहलों का मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक वैकल्पिक जगह के तौर पर स्थापित करना रहा है।

JCR ने खास तौर पर भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और GST का जिक्र उन नीतियों के तौर पर किया है जिन्होंने देश की आर्थिक नींव को मजबूत किया है।

आसान शब्दों में कहें तो, 2012 में जब भारत BRICS समिट में शामिल हुआ, तो सवाल यह था कि क्या वह दूसरी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएगा। 2026 में, भारत एक बड़े हो चुके BRICS की मेजबानी कर रहा है। ऐसे समय में जब वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, उसे JCR से ‘A-‘ सॉवरेन रेटिंग मिली है, और वह उस ग्रुप के एजेंडे को आकार देने की कोशिश कर रहा है जिसका आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।

इस अंतर ने सवाल को ही बदल दिया है। 2012 में बहस यह थी कि—क्या भारत BRICS में शामिल होने के लायक है? 2026 में, ज्यादा अहम सवाल यह है कि: भारत BRICS के भविष्य को किस हद तक आकार दे सकता है?

यह भी पढ़ें: Delhi Metro News: परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी! 13 सितंबर को सुबह 6 बजे से चलेगी दिल्ली मेट्रो

Delhi Metro News: परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी! 13 सितंबर को सुबह 6 बजे से चलेगी दिल्ली मेट्रो

Delhi Metro News: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने शुक्रवार को घोषणा की कि रविवार, 13 सितंबर को दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सुबह 6:00 बजे शुरू होंगी। यह जल्दी शुरुआत इसलिए की गई है ताकि परीक्षा देने वाले छात्र और अन्य यात्री आसानी से और समय पर अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में DMRC ने कहा, “परीक्षा देने वाले छात्रों और आम जनता की आवाजाही को आसान और समय पर बनाने के लिए, रविवार, 13 सितंबर 2026 को सभी लाइनों पर मेट्रो ट्रेन सेवाएं सुबह 06:00 बजे शुरू होंगी।”

यह घोषणा दिल्ली मेट्रो की सभी लाइनों पर लागू होगी, जिसका मतलब है कि पूरे नेटवर्क पर यात्री सुबह 6 बजे से सेवा का लाभ उठा सकेंगे।

DMRC ने जारी की एडवाइजरी

DMRC ने छात्रों और यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनाएं। जो छात्र परीक्षा के लिए यात्रा कर रहे हैं, उन्हें यात्रा के समय का ध्यान रखना चाहिए और तय रिपोर्टिंग समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए।

बता दें कि यह बदला हुआ शेड्यूल उन छात्रों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जिन्हें सुबह के समय पब्लिक ट्रांसपोर्ट के सीमित विकल्प मिल सकते हैं। BRICS समिट के कारण दिल्ली के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक पर लगी पाबंदियों के बीच, सुबह की मेट्रो सेवाएं ट्रांसपोर्ट का एक विकल्प देंगी और छात्रों व अन्य यात्रियों को अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंचने में मदद करेंगी।

इसलिए, जो यात्री 13 सितंबर को सुबह-सुबह यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें यात्रा की योजना बनाते समय सुबह 6 बजे के शुरुआती समय का ध्यान रखना चाहिए।

इस कदम का मकसद परीक्षा के लिए यात्रा करने वालों की आवाजाही को आसान बनाना है, साथ ही उन लोगों को भी फायदा पहुंचाना है जिन्हें रविवार को सुबह जल्दी यात्रा करने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें: भारत में आकर ब्रिक्स के मंच से गरजे पुतिन, बोले- वर्चस्व वापस पाने की नाकाम कोशिश कर रहे पुराने नेता, जानिए उनके निशाने पर कौन

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 11-13 सितंबर के दौरान क्या खुला रहेगा और क्या बंद? जानिए Metro, स्कूल, बैंक और ट्रैफिक का पूरा अपडेट

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS Leaders’ Summit होने जा रहा है। भारत मंडपम में होने वाले इस बड़े सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई इलाकों में ट्रैफिक पर पाबंदियां रहेंगी। सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और दूसरे बड़े मेहमान शामिल होंगे। उनकी आवाजाही को देखते हुए 11 से 13 सितंबर के बीच दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।

यहां बताया गया है कि 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली में क्या खुला रहेगा और क्या बंद रहेगा।

क्या-क्या बंद रहेगा?

स्कूल

BRICS समिट के लिए सुरक्षा और ट्रैफिक इंतजामों के कारण, दिल्ली शिक्षा निदेशालय के तहत आने वाले सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त बिना सहायता वाले प्राइवेट स्कूल शुक्रवार, 11 सितंबर को बंद रहेंगे।

सरकारी दफ्तर

NCT दिल्ली के तहत आने वाले दिल्ली सरकार के सभी दफ्तर, स्वायत्त निकाय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 11 सितंबर को बंद रहेंगे।

बता दें कि उपराज्यपाल ने BRICS समिट को देखते हुए दिल्ली में 11 सितंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

क्या-क्या खुला रहेगा?

बैंक

दिल्ली में 11 सितंबर को बैंक खुले रहेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के छुट्टियों के कैलेंडर में इस तारीख को बैंक की छुट्टी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।

प्राइवेट ऑफिस

प्राइवेट ऑफिस हमेशा की तरह काम करते रहेंगे। हालांकि, जो कर्मचारी सेंट्रल दिल्ली और VVIP मूवमेंट से प्रभावित अन्य इलाकों से गुजरेंगे, उन्हें ट्रैफिक पाबंदियों, डायवर्जन और देरी का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली मेट्रो

समिट के दौरान पूरे नेटवर्क पर दिल्ली मेट्रो की सेवाएं चालू रहेंगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर स्थित दिल्ली मेट्रो म्यूजियम 11 से 13 सितंबर तक बंद रहेगा।

बस, कैब और सड़कों का क्या होगा?

बस के रूट में बदलाव

विदेशी मेहमानों और VVIP के काफिले के आने-जाने के दौरान दिल्ली की बसों के रूट बदले जा सकते हैं या उन्हें कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। यात्रियों को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी देख लेनी चाहिए।

कैब सेवाएं

कैब सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन ड्राइवरों को सलाह दी गई है कि वे VVIP के आने-जाने के दौरान प्रतिबंधित या नियंत्रित इलाकों में पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ पॉइंट न रखें।

ट्रैफिक से जुड़ी पाबंदियां

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राष्ट्राध्यक्षों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के लिए एक विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। समिट की व्यवस्थाओं के लिए लगभग 4,800 ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती की गई है।

मोटरकेड रिहर्सल और VVIP की आवाजाही के दौरान 22 चिन्हित डाइवर्जन पॉइंट्स पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा।

इसके अलावा, अलग-अलग समय पर 35 से ज्यादा सड़कों पर असर पड़ने की उम्मीद है, जिनमें मथुरा रोड, सरदार पटेल मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग और एपीजे अब्दुल कलाम रोड शामिल हैं।

ये पाबंदियां 10 सितंबर से शुरू होकर लगभग 14 सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें VVIP की आवाजाही के आधार पर ट्रैफिक को डाइवर्ट किया जाएगा या कुछ समय के लिए रोका जाएगा।

सबसे ज्यादा परेशानी किसे हो सकती है?

नोएडा और पूर्वी दिल्ली से आने-जाने वाले लोग

नोएडा और पूर्वी दिल्ली से प्रगति मैदान, सेंट्रल दिल्ली और शहर के दूसरे हिस्सों की ओर जाने वाले लोगों को मुख्य कनेक्टिंग सड़कों पर लगी पाबंदियों के कारण देरी का सामना करना पड़ सकता है।

द्वारका और पश्चिमी दिल्ली

द्वारका और पश्चिमी दिल्ली से धौला कुआं, एयरपोर्ट और सेंट्रल दिल्ली की ओर जाने वाले लोगों को भी VVIP मूवमेंट के दौरान डायवर्जन और जाम का सामना करना पड़ सकता है।

दक्षिणी दिल्ली

साकेत में अपने होटल और सेंट्रल दिल्ली के बीच मिस्र के प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही से दक्षिणी दिल्ली की सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, खासकर पीक आवर्स के दौरान।

एयरपोर्ट और रेलवे यात्री

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल जाने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे जल्दी निकलें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलें। जहां भी संभव हो, दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

क्या पार्किंग की अनुमति होगी?

जिन सड़कों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू हैं, वहां 200 मीटर के दायरे में सड़क के किनारे पार्किंग की अनुमति नहीं होगी।

वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे तय पार्किंग सुविधाओं का इस्तेमाल करें और प्रतिबंधित इलाकों में या उनके आस-पास पार्किंग करने से बचें।

क्या गूगल मैप्स और अन्य नेविगेशन ऐप्स प्रतिबंधों को दिखाएंगे?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने समिट से पहले ऑनलाइन मैप सर्विस देने वाली कंपनियों के साथ बैठकें की हैं।

ये प्लेटफॉर्म ट्रैफिक अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाएंगे और प्रतिबंधों, डायवर्जन और वैकल्पिक रास्तों की जानकारी रियल-टाइम में अपडेट करेंगे ताकि यात्रियों को प्रभावित इलाकों से निकलने में मदद मिल सके।

दिल्ली में आने-जाने वालों को क्या करना चाहिए?

ट्रैफिक पर लगी पाबंदियां पूरे दिन लागू नहीं रहेंगी। अधिकारियों ने कहा कि VVIP के काफिले की आवाजाही के आधार पर इन्हें लागू किया जाएगा या इनमें ढील दी जाएगी।

आने-जाने वालों को सलाह दी जाती है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी देख लें, जहां तक ​​हो सके पाबंदी वाले रास्तों से बचें और शहर के प्रभावित इलाकों से गुजरने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करें।

11 सितंबर को स्कूल और दिल्ली सरकार के ऑफिस बंद रहेंगे, जबकि बैंक, प्राइवेट ऑफिस और मेट्रो सेवाएं चालू रहेंगी। ऐसे में BRICS समिट का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग राजधानी में कहां और कैसे सफर करते हैं।

यह भी पढ़ें: BRICS Summit 2026: भारत आ रहे हैं शी जिनपिंग और पुतिन! जानिए क्या है पीएम मोदी का मास्टरप्लान

Delhi Metro: मेट्रो पर फोन चिपकाकर Reel बनाना पड़ेगा मंहगा! DMRC ने दी सख्त चेतावनी

दिल्ली मेट्रो में रील्स और वीडियो बनाने का ट्रेंड इन दिनों काफी बढ़ रहा है। वहीं हाल ही में दिल्ली मेट्रो का एक नया रील सोशल मीडिया पर काफी ट्रेड कर रहा है। इसमें कई यूजर्स चलती मेट्रो की खिड़की पर मोबाइल फोन चिपकाकर वीडियो बना रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इस ट्रेंड को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ यूजर्स इसे मजेदार मान फॉलो कर रहे हैं। वहीं कई लोग चलती ट्रेन में इस तरह वीडियो बनाने को लेकर सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं और इसे जोखिम भरा बता रहे हैं। अब DMRC ने चलती मेट्रो में वीडियो बनाने पर सख्त रुख अपनाया है।

DMRC ने की खास अपील

चलती मेट्रो की खिड़की पर मोबाइल लगाकर वीडियो बनाने के मामले को दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने गंभीरता से लिया है। DMRC ने यात्रियों और कंटेंट क्रिएटर्स से ऐसी रील्स नहीं बनाने की अपील की है। साथ ही, कॉर्पोरेशन ने साफ किया कि नियमों का उल्लंघन करते हुए इस तरह की गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जा सकती है।

वीडियो बनाने से लोगों को हो सकती है परेशानी

DMRC ने इंस्टाग्राम पर दिए अपने बयान में कहा, “दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने देखा कि कुछ सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स मेट्रो ट्रेन की खिड़कियों पर अपने मोबाइल फोन चिपका रहे हैं और चलती ट्रेन के साथ वीडियो शूट कर रहे हैं। इस तरह की हरकत से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है या उन्हें चोट लग सकती है। साथ ही, इससे यूजर्स के मोबाइल फोन भी खराब हो सकते हैं।”

पोस्ट में आगे कहा, “DMRC अधिकारी इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रहे हैं और अगर कोई कंटेंट क्रिएटर इस तरह की शूटिंग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए कंटेंट क्रिएटर्स को दिल्ली मेट्रो परिसर के अंदर इस तरह के वीडियो शूट नहीं करने का निर्देश दिया जाता है।”

 

दिल्ली मेट्रो में बनाते हैं वीडियो

दिल्ली मेट्रो अब सोशल मीडिया वीडियो बनाने की पसंदीदा जगहों में शामिल हो गई है। यहां कई यात्री और कंटेंट क्रिएटर डांस, मीम और दूसरी तरह की वायरल रील्स बनाते नजर आते हैं। हालांकि, DMRC लगातार यात्रियों से अपील करता रहा है कि वे मेट्रो के नियमों का पालन करें और ऐसी कोई वीडियो या गतिविधि न करें, जिससे दूसरे यात्रियों को परेशानी हो या मेट्रो सेवाओं के संचालन में किसी तरह की दिक्कत आए।

ट्रेन बदली, स्टेशन बदले और बन गया रिकॉर्ड! दिल्ली मेट्रो एम्प्लॉई की अनोखी कहानी

दिल्ली मेट्रो के एम्प्लॉई ने सभी मेट्रो स्टेशनों का सफर सबसे कम समय में पूरा करके नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बहुत ही कम टाइम में पूरी जर्नी कर पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले भी वह 2022 में यह कोशिश कर चुके थे, लेकिन इस बार सही रूट और बेहतर प्लानिंग के साथ उन्होंने अपना ही परफॉरमेंस काफी बेहतर किया। दिल्ली मेट्रो के कामकाज और रूट की अच्छी जानकारी ने भी इस रिकॉर्ड को बनाने में उनकी काफी मदद की।

metro

सिर्फ 15 घंटे में रचा इतिहास

दिल्ली मेट्रो के एम्प्लॉई ने सभी मेट्रो स्टेशनों का सफर सबसे कम समय में पूरा करके नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने यह पूरी जर्नी 14 घंटे, 54 मिनट और 36 सेकंड में पूरी की। सिंह ने 23 मई को सुबह करीब 6 बजे वायलेट लाइन के राजा नाहर सिंह मेट्रो स्टेशन से अपनी जर्नी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग मेट्रो लाइनों और इंटरचेंज का इस्तेमाल करते हुए सफर जारी रखा और रात करीब 9 बजे गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुंचकर इसे पूरा किया। इतने बड़े नेटवर्क में इतने कम समय में सफर पूरा करना आसान नहीं था।

सही रूट ने बचाया समय

प्रफुल्ल सिंह ने इस बार जून 2023 में बनाए गए पुराने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले सुजॉय कुमार मित्रा और शिप्रा गुप्ता ने 15 घंटे, 21 मिनट और 4 सेकंड में दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों का सफर पूरा किया था। सिंह ने इस समय से करीब 26 मिनट कम में अपना सफर पूरा किया। भले ही यह अंतर ज्यादा बड़ा न लगे, लेकिन मेट्रो के इतने बड़े नेटवर्क में कुछ मिनट बचाना भी काफी मुश्किल होता है। एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाने में थोड़ा सा भी समय ज्यादा लग जाए, तो पूरी प्लानिंग बिगड़ सकती है।

पुरानी गलती से मिली सीख

इस रिकॉर्ड को बनाने की कोशिश सिंह ने पहली बार नहीं की थी। वह 2022 में भी दिल्ली मेट्रो के 254 स्टेशनों का सफर कर चुके हैं। उस समय उन्होंने यह जर्नी 16 घंटे, 2 मिनट और 17 सेकंड में पूरी की थी। पहली कोशिश के दौरान गलत रूट लेने की वजह से उनका काफी समय खराब हो गया था। इस एक्सपीरियंस से सीखते हुए उन्होंने इस बार पहले से ज्यादा तैयारी की। ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंह ने बताया कि पिछली बार उन्हें गलत रूट की वजह से करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई थी, लेकिन इस बार उन्हें भरोसा था कि वह अच्छा परफॉर्म करेंगे।

मेट्रो की जानकारी बनी ताकत

प्रफुल्ल सिंह के लिए उनकी नौकरी का एक्सपीरियंस भी इस चुनौती में काफी फायदेमंद रहा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC के ऑपरेशन्स सेक्टर में काम करने की वजह से उन्हें मेट्रो के रूट, ट्रेन के शेड्यूल, इंटरचेंज स्टेशन और अलग-अलग लाइनों की कनेक्टिविटी की अच्छी जानकारी थी। इसी वजह से वह जर्नी में सही रास्ता चुनने और समय बचाने में कामयाब रहे। पूरे मेट्रो नेटवर्क को कम से कम समय में कवर करना एक तरह की स्पीड चैलेंज जैसा है, जिसमें हर मिनट मायने रखता है। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने के साथ-साथ सही समय पर ट्रेन बदलना भी जरूरी होता है।

प्रफुल्ल सिंह को मिला यह अचीवमेंट बताता है कि सही तैयारी, हिम्मत और लगन के साथ मुश्किल से मुश्किल चुनौती भी पूरी की जा सकती है। उनका रिकॉर्ड न सिर्फ उनकी मेहनत को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अपने काम की अच्छी समझ किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में कितनी मददगार हो सकती है।