85 पदकों के साथ भारत चौथे स्थान पर

नागोया। जापान की संस्कृति और मेहमाननवाजी की शानदार झलक के साथ संगीत और रोशनी से सजे भव्य समारोह में रविवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों का समापन हो गया। भारत 21 स्वर्ण सहित 85 पदकों के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते। कुल 85 पदकों का प्रदर्शन चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों के मुकाबले 21 पदक कम रहा।

चीन लगातार 12वें एशियाई खेलों में पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। उसने 169 स्वर्ण, 89 रजत और 83 कांस्य सहित कुल 341 पदक जीते। विदेश में आयोजित एशियाई खेलों में यह चीन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।मेजबान जापान 83 स्वर्ण, 95 रजत और 91 कांस्य सहित 269 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। दक्षिण कोरिया ने 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य पदक जीते।

दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद एशिया के 45 देशों के खिलाड़ी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में समापन समारोह में शामिल हुए। खेलों के दौरान 350 से अधिक रिकॉर्ड बने, जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। हालांकि आयोजन से पहले खेल लॉजिस्टिक समस्याओं और कुप्रबंधन से प्रभावित रहे थे।

करीब 90 मिनट तक चले समापन समारोह में एशिया ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने खेलों के समापन की घोषणा की। इसके बाद ओसीए का ध्वज 2030 एशियाई खेलों की आयोजन समिति के प्रतिनिधि को सौंपा गया। अगले एशियाई खेल दोहा में होंगे। ओसीए ध्वज दोहा को सौंपने से संबंधित कार्यक्रम में कतर के ओलंपिक और विश्व चैंपियन मुताज बाशिम भी शामिल हुए।

ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा के नेतृत्व में भारतीय दल ने भी उत्सवी माहौल में हिस्सा लिया। दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतने वाली नीरू के साथ सफेद और नीले रंग की पोशाक पहने लगभग 30 भारतीय खिलाड़ियों और अधिकारियों ने एथलीट परेड में हिस्सा लिया और तिरंगा लहराया।समापन समारोह की ‘वन एशिया’ अवधारणा को अभिव्यक्त करने के लिए स्टेडियम के बीचोंबीच षट्भुजाकार मंच बनाया गया था। यह समारोह का मुख्य आकर्षण रहा। भव्य समापन के दौरान इसे लालटेन से सजाया गया, जो जापानी गर्मियों का विशिष्ट प्रतीक है।

ओसीए अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने कहा कि आइची-नागोया एशियाई खेलों ने एशियाड के लिए मानक ऊंचा किया है। उन्होंने कहा, ‘मैं आइची-नागोया एशियाई खेलों को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित करता हूं।’

अल थानी ने कहा, ‘आज रात आइची-नागोया 2026 का ध्वज उतारते हुए हम इन खेलों का समापन करते हैं। लेकिन हम एशियाई खेलों के लिए मानक ऊंचा करते हैं। लौ बुझ सकती है, लेकिन इसने जिन उम्मीदों को प्रज्वलित किया है, वे हमारे महाद्वीप में उज्ज्वल रूप से जलती रहेंगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमने शानदार वापसी, अंतिम सेकेंड में मिली जीत और नाटकीय रूप से मामूली अंतर से मिली हार देखी है। हमने नए किशोर सुपरस्टारों और अनुभवी चैंपियनों के उभरने का जश्न मनाया है, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली विरासत में और उपलब्धियां जोड़ी हैं।’

ओसीए अध्यक्ष ने कहा, ‘हमने खिलाड़ियों को विपरीत परिस्थितियों और चोटों से जूझते हुए जीत हासिल करते देखा है और प्रतिद्वंद्वियों को अविश्वसनीय खेल भावना और सम्मान का प्रदर्शन करते देखा है।’

स्वर्णिम तीरंदाज! भारत की महिला और मिश्रित जोड़ी ने जीते एशियाड गोल्ड मेडल

एशियाई खेल 2026 में बुधवार को भारत के खाते में दो स्वर्ण पदक झोली में गिरे। पहले महिला तो फिर मिश्रित जोड़ी ने कंपाउंड तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतकर भारत की अंक तालिका सुधारी।

पहले भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए स्वर्ण पदक जीता।आज भारत की ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता तनिपार्थी ने महिला कंपाउंड टीम फ़ाइनल में चीन को 238-234 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया और अपना एशियाई खेल का खिताब बरकरार रखा।

भारतीय टीम ने आधे समय तक 119-116 की बढ़त बना रखी थी और दूसरे हाफ में चीन की चुनौती का सामना करते हुए जीत पक्की की। 238 अंक का स्कोर दक्षिण कोरिया द्वारा इंचियोन में एशियाई खेल 2014 में बनाए गए महिला कंपाउंड टीम वर्ल्ड रिकॉर्ड के बराबर भी था।आइची-नागोया 2026 एशियाई खेलों में यह भारत का सातवां स्वर्ण पदक था।भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने 2023 में हांगझोउ एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। पिछले सत्र में भारत ने तीरंदाजी में पांच स्वर्ण पदक जीते थे।

इसके बाद चिकिता तनीपार्थी और साहिल जाधव की भारत की कंपाउंड मिश्रित तीरंदाजी जोड़ी ने रोमांचक शूट ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता और 2028 ओलंपिक कोटा स्थान हासिल किया।

चिकिता और साहिल ने शानदार संयम का परिचय देते हुए रोमांचक फाइनल में दक्षिण कोरिया की जंगयून पार्क और चोई यून ग्यू को शूट ऑफ के बाद 158-157 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।भारतीय मिश्रित टीम ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराकर स्वर्ण पदक के मुकाबले में प्रवेश किया था।

एशियाई खेल में भारत को स्वर्ण का इंतजार

नागोया। एशियाई खेलों में भारत का स्वर्ण पदक जीतने का इंतजार सोमवार को भी जारी रहा। लेकिन निशानेबाजी में भारत ने दो रजत और एक कांस्य सहित तीन पदक जीते, जबकि सुचिका तारियाल ने मिश्रित मार्शल आर्ट्स (एमएमए) में देश को इस खेल का पहला एशियाई खेल पदक दिलाकर इतिहास रचा।

भारत के कुल पदकों की संख्या छह हो गई है। इनमें चार रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। सुचिका महिलाओं के 60 किग्रा एमएमए वर्ग में फाइनल में पहुंचने से महज 700 ग्राम के अंतर से चूक गईं। सिंगापुर की हुई हून तेओ के खिलाफ उनका सेमीफाइनल बराबरी पर रहा था।

सुबह कराए गए वजन में सुचिका अपनी प्रतिद्वंद्वी से 700 ग्राम अधिक वजन की थीं। तकनीकी नियमों के अनुसार मुकाबला ड्रॉ रहने पर कम वजन वाली खिलाड़ी को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। इसलिए सुचिका को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। यह एमएमए में भारत का पहला एशियाई खेल पदक है।

निशानेबाजी में युवा खिलाड़ी हिमांशु ढिल्लों और रुद्रांक्ष पाटिल ने रोमांचक शूटआउट में संयम बनाए रखते हुए क्रमशः व्यक्तिगत रजत और कांस्य पदक जीता। इससे पहले दोनों ने किशोर निशानेबाज पार्थ माने के साथ मिलकर टीम रजत पदक हासिल किया था।

इन तीन पदकों के साथ भारत के निशानेबाजी में कुल पदकों की संख्या पांच हो गई है। इनमें चार रजत और एक कांस्य है। भारत इस स्पर्धा में फिर स्वर्ण से चूक गया। चीन के विश्व नंबर एक शेंग लिहाओ ने शानदार प्रदर्शन किया। शेंग, चांगहोंग झांग और सिहान मा ने 1899 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता और पिछले साल काहिरा में बनाए गए अपने ही 1898.4 अंक के विश्व रिकॉर्ड में सुधार किया।

सुचिका ने महिलाओं के 60 किग्रा वर्ग में एमएमए की पहली भारतीय एशियाई खेल पदक विजेता बनकर इतिहास रचा, लेकिन फाइनल में पहुंचने का मौका इतने कम अंतर से गंवाने के कारण उनकी उपलब्धि के साथ निराशा भी जुड़ी रही। बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस में भी भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा। कबड्डी टीमों ने जीत के साथ शुरुआत की। बैडमिंटन में पुरुष टीम ने बांग्लादेश को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। लक्ष्य सेन, के. श्रीकांत और आयुष शेट्टी ने अपने-अपने एकल मुकाबले आसानी से जीते।

मुक्केबाजी में भी भारत ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की। 70 किग्रा वर्ग में सुमित कुंदू ने आसान जीत दर्ज की।

Asian Games में भारतीय निशानेबाजों का कमाल, जीते दो और सिल्वर मेडल

युवा निशानेबाज हिमांशु ढिल्लों और रुद्रांक्ष पाटिल ने रोमांचक मुकाबले में दबाव के बीच संयम बनाए रखते हुए सोमवार को यहां एशियाई खेलों में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीता जबकि दोनों ने पार्थ माने के साथ मिलकर टीम स्पर्धा का रजत पदक भी अपने नाम किया।

इन तीन पदक से निशानेबाजी में भारत की पदक संख्या पांच हो गई है जिसमें चार रजत और एक कांस्य शामिल है। हालांकि एक बार फिर चीन के पेरिस ओलंपिक के दोहरे स्वर्ण पदक विजेता लिहाओ शेंग को कोई पीछे नहीं छोड़ सका। विश्व के नंबर एक निशानेबाज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।

शेंग ने 254.2 अंक के खेलों के और एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। सोमवार को अपना 21वां जन्मदिन मना रहे हिमांशु ने 252.4 अंक के साथ रजत जीता। रुद्रांक्ष ने 230.9 अंक हासिल किए। मजबूत शुरुआत के बाद वह स्वर्ण पदक की चुनौती पेश करते दिख रहे थे लेकिन अंततः तीसरे स्थान पर रहे।व्यक्तिगत ढिल्लों, अपने पहले एशियाई खेल में हिस्सा ले रहे रुद्रांक्ष और 18 वर्षीय माने के टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने के महज एक घंटे बाद आए।

चीन ने एक बार फिर मानक स्थापित किया। शेंग, झांग चांगहोंग और मा सिहान की चीन की तिकड़ी ने 1899.0 अंक जुटाकर पिछले साल काहिरा में बनाए अपने 1898.4 अंक के विश्व रिकॉर्ड में सुधार किया। दक्षिण कोरिया ने 1884.2 अंक के साथ कांस्य जीता जबकि भारत के 1890.1 अंक रहे।

व्यक्तिगत फाइनल की कहानी कुछ अलग थी। इसमें ढिल्लों और रुद्रांक्ष के बीच रजत और कांस्य पदकों के लिए कड़ा मुकाबला हुआ जबकि शेंग लगातार बढ़त मजबूत करते गए।

रुद्रांक्ष शुरुआत में चीन के स्टार को चुनौती देने वाले भारतीय निशानेबाज के तौर पर आगे नजर आए। दूसरी सीरीज के बाद 2022 विश्व चैंपियन रुद्रांक्ष के कुल 106.0 अंक थे और वह शेंग से 1.1 अंक आगे थे। हिमांशु के 104.8 अंक थे।

हालांकि एलिमिनेशन सीरीज में स्थिति बदल गई।रुद्रांक्ष ने 9.7 का निशाना लगाया जबकि ढिल्लों ने 10.6 अंक हासिल कर 24 शॉट के फाइनल के 22वें शॉट के बाद दूसरा स्थान हासिल कर लिया। पदार्पण कर रहे ढिल्लों ने अपने काफी अनुभवी साथी पर 0.1 अंक की बढ़त बना ली।

Asian Games 2026: एशियाई खेलों में भारत को दूसरा मेडल, शूटिंग क्वीन इलावेनिल वलारिवान ने जीता सिल्वर

Asian Games 2026: एशियाई खेलों में भारत के खाते में दूसरा मेडल आ गया है। 2019 वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की इलावेनिल वलारिवान (252.4) ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीत लिया है। इससे पहले दिन में उन्होंने टीम इवेंट में भी सिल्वर मेडल जीता था। एशियाई खेलों में भारत का यह दूसरा मेडल है। इलावेनिल वलारिवान ने एशियाई खेलों में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता है। 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली एलावेनिल ने फ़ाइनल में 252.4 पॉइंट हासिल किए।

जापान की हिनाता ने जीता गोल्ड

जापान की हिनाता ताइची (253.0) ने गोल्ड मेडल हासिल किया। जबकि दक्षिण कोरिया की ह्योजिन बान (230.4) ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। वहीं, सोनम उत्तम मस्कर (167.0) फाइनल में छठे स्थान पर रहीं।इससे पहले, भारत की सोनम उत्तम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन और विदरसा विनोद ने रविवार को महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर निशानेबाजी में देश के अभियान की शानदार शुरुआत की।

भारतीय तिकड़ी का शानदार प्रदर्शन

भारतीय तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1898.0 के कुल स्कोर के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। चीन की टीम ने 1904.2 अंकों के साथ क्वालीफाइंग में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। चीन ने पिछले साल अगस्त में शिमकेंट में एशियाई चैंपियनशिप में बनाए गए अपने ही 1902.0 के पिछले रिकॉर्ड को बेहतर किया।

भारत और जापान के बीच रजत पदक के लिए कड़ा मुकाबला हुआ। लेकिन आखिर में भारतीय खिलाड़ियों ने संयम बनाए रखते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। जापान 1897.1 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जो भारत से केवल 0.9 अंक कम रहा। टीम पदक तीनों निशानेबाजों के क्वालीफाइंग स्कोर के आधार पर तय किए जाते हैं और कुल स्कोर अंतिम रैंकिंग निर्धारित करता है।

क्वालीफाइंग राउंड में तीसरे स्थान पर रहीं सोनम ने 634.1 के प्रभावशाली स्कोर के साथ भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। अपने तीसरे एशियाई खेलों में भाग ले रही ओलंपियन एलावेनिल ने 633.5 का स्कोर बनाकर सातवां, जबकि एशियाई खेलों में पदार्पण कर रही विदरसा ने 630.4 का स्कोर बनाकर 12वां स्थान हासिल किया।

विदरसा गोल्ड से चुकीं

विदरसा व्यक्तिगत फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। लेकिन भारत को रजत पदक दिलाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण साबित हुआ। विदरसा ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी उपलब्धि है। यह निराशाजनक है कि मैं फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन टीम स्पर्धा के रजत पदक ने हमें अच्छी शुरुआत दी है।’’

विदरसा का प्रदर्शन इसलिए भी अधिक सराहनीय है क्योंकि उन्होंने केवल दो महीने पहले ही 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भाग लेना शुरू किया था। उनकी मुख्य स्पर्धा 50 मीटर राइफल 3-पोजिशन स्पर्धा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा भरोसा है कि मैं 50 मीटर 3-पोजिशन स्पर्धा में मैं बेहतर प्रदर्शन करूंगी। यह मेरी मुख्य स्पर्धा है।‘‘ सोनम और एलावेनिल ने व्यक्तिगत फाइनल में जगह बनाई। वह दिन में बाद में होने वाले आठ महिलाओं के व्यक्तिगत फाइनल में दोहरी सफलता हासिल करने की कोशिश करेंगी।

चीन का ऐतिहासिक प्रदर्शन

इस बीच चीन ने इस खेल में अपनी मजबूती का परिचय दिया। जूनियर विश्व चैंपियन वांग जिफेई ने शानदार 638.8 अंकों के साथ क्वालीफाइंग राउंड में शीर्ष स्थान हासिल करके नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। हान जियान ने भी 633.8 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाई।

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चीन के तीन निशानेबाज फाइनल के लिए क्वालीफाई करने की स्थिति में थे। लेकिन प्रत्येक देश से केवल दो खिलाड़ी ही व्यक्तिगत पदक दौर में जगह बना सकते हैं। भारतीय महिला तिकड़ी का रजत पदक 20वें एशियाई खेलों में भारत का पहला पुष्ट पदक है।

एमएमए फाइटर सुचिका तारियाल महिलाओं के पारंपरिक एमएमए 60 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थी। भारत के निशानेबाजों ने हांगझोउ एशियाई खेलों में रिकॉर्ड 22 पदक (सात स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य) जीते थे और अब यह रजत पदक भारत के निशानेबाजी अभियान के लिए एक उत्साहजनक शुरुआत है।

पावन दीयों का सियासी शस्त्रीकरण

गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। अब इस परंपरा में नरेंद्र भाई के ‘सेवा-संकल्प’ में पूरे एक महीने उत्सव और जुड़ने का हमें सौभाग्य मिला है।

ज़िंदगी रोशन करने के लिए अपने घर की मुंडेर पर दीया जलाने की हमारी परंपरा ज़्यादा नहीं तो कम-से-कम पांच हज़ार साल पुरानी तो है ही। मेरी दादी, मेरी नानी और फिर मेरी मां भी हर दिन गोधूलि बेला में घर के मंदिर और तुलसी के चौबारे पर घी का दीया जलाती थीं। मां जब तक थीं, उन्होंने इस रीत का अनवरत निर्वाह किया। वे नहीं रहीं तो बहुत अरसे तक मेरी पत्नी भी ऐसा ही करती रही। घर के छोटे-से मंदिर में रोज़ सुबह-शाम दीया-बाती करने का उस का नियम था। दिल्ली के घरों में चौबारा तो कहां से बनाएं, सो, तुलसी गमले में उगती है और मिट्टी का दीया वह हर शाम पूरे श्रद्धा भाव से उस पर रख दिया करती थी।

मगर कुछ बरस से यह नियम ज़रा लड़खड़ा-सा गया है। प्रतिदिन दीया बालने की पत्नी की हुमक अब वैसी नहीं रही है। एक तो कोरोना-काल में डर के मारे दिल्ली छोड़ कर बहुत दिनों मां, मैं और पत्नी अरण्यवास में चले गए तो गमले में लगी तुलसी सूख गई। और, सूखी तो ऐसी सूखी कि कई बार लगाने की कोशिश की, पर नहीं पनपी, तो नहीं पनपी। सो, तुलसी का दीया आजकल मौन है। फिर पत्नी-बेटियों के आग्रह पर अरसे बाद घर के भीतर हल्का-फुल्का नवीनीकरण कराया तो मंदिर के पट कुछ महीनों के लिए पूरी तरह बंद रखने पड़े और सुबह-शाम दीया लगाने का पत्नी का दस्तूर भंग हो गया। उस के बाद पट तो खुले, लेकिन दीये की निरंतरता नैपथ्य में चली गई।

नरेंद्र भाई मोदी के जन्मदिन पर देश भर में जले करोड़ों आशीर्वाद-दीयों ने मुझे दादी-नानी-मां-पत्नी के सहारे प्राणवान रहे अपने घर के परंपरागत दीये की याद दिला दी। वह दीया मेरे गांव, ननिहाल और जंगल-जंगल पदस्थ मेरे पिता के कवेलू-आवासों से ले कर अंततः दिल्ली तक के घर की सुखदायी-संतोषदायी जीवनीशक्ति बना रहा। दीये की यह भीनी टिमटिमाहट ही आज भी, जब-जब मन उदास होता है, हमारा संबल बनती है। सो, जब नरेंद्र भाई के जन्मदिन पर आशीर्वाद-दीये जलाने के आयोजन-प्रयोजन की होड़ में लगे उन के कल्याणाकांक्षियों की सघन उंदुर-दौड़ मैं ने देखी तो मेरे तो होश फ़ाख़्ता हो गए। मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि सनातनी सभ्यता की आधारशिला पावन दीये को भी कभी ऐसे सियासी शस्त्रीकरण का ज़रिया बनाने की हद तक हमारे हुक्मरान उतर सकते हैं।

मेरा जन्म मध्यप्रदेश में हुआ। अगर उसे लालन-पालन कहा जा सके तो लालन-पालन भी मध्यप्रदेश में हुआ। औपचारिक शिक्षा भी मध्यप्रदेश में हुई। पत्रकारिता के संस्कार भी मध्यप्रदेश से मिले। जब राजनीति में कूदने का चस्का लगा तो उस की मैदानी धरती भी मध्यप्रदेश ही रही। तो ज़ाहिर है कि मध्यप्रदेश से अतिरिक्त लगाव मेरी धमनियों में है। इसलिए नरेंद्र भाई के लिए देश भर में बुधवार को रोशन किए गए दीयों में मेरी नज़र सब से पहले मध्यप्रदेश के दीयों पर पड़ी। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस वज़ह से थोड़े परिचित रहे हैं कि वे भी उज्जैन के उसी विक्रम विश्वविद्यालय से पढ़ कर निकले हैं, जहां से मैं। विक्रम की शिक्षण-अध्ययन परंपरा बहुत अर्थपूर्ण और संजीदा मानी जाती रही है। महाकाल के मंदिर से उत्तर दिशा में पांच-छह किलोमीटर दूर आज भी सांदीपनि ऋषि का आश्रम मौजूद है। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण, उन के बड़े भाई बलराम और सुदामा ने एक साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

तो मुझे लगा कि हमारे मोहन यादव में सांदीपनि की धरती की धूल का कुछ तो असर ज़रूर होगा। मगर फिर मैं ने पाया कि नरेंद्र भाई को आशीर्वाद देने के लिए 3 करोड़ 55 लाख दीये तो अकेले मध्यप्रदेश में जलाए गए। मुख्यमंत्री के ख़ुद के गृह-नगर उज्जैन में महाकाल महालोक के आसपास और क्षिप्रा नदी के घाटों पर 33 लाख 27 हज़ार दीये जला कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। अब तक नहीं समझ पा रहा हूं कि इस तिलिस्म की रचना पर गर्व करूं या दूर कहीं जा कर किसी चुल्लू की तलाश में जुटूं? मैं तो अब तक घर-बाहर के मंदिर में आनंद से झूमती दीये की लौ में ही ऐसे शक्तिपुंज के दर्शन करता रहा हूं कि ये लाखों-करोड़ों दीयो की आक्रामक दीपशिखाएं तो मेरे सामने डेढ़ दर्जन परमाणु अस्त्र ढो कर अठारह हज़ार किलोमीटर दूर तक चली जाने वाली सटन-2 मिसाइल का दृश्य पेश कर रही हैं।

नरेंद्र भाई के स्वयं गृह-प्रदेश गुजरात में साढ़े अठारह हज़ार स्थानों पर 88 लाख दीयों ने अपनी माटी के लाल पर आशीष बरसाया। अहमदाबाद की कांकरिया झील किनारे सवा लाख और अटल-पुल पर 76 हज़ार दीये जलाए गए। सूरत में दस हज़ार स्थानों पर दस लाख दीये जले। अहमदाबाद के विश्व उमियाधाम में नरेंद्र भाई के जीवन के 76 बरस पूरे होने पर 76 हज़ार दीये प्रज्वलित कर आरती की गई। गृह मंत्री अमित भाई शाह नरेंद्र भाई के जन्मस्थान वडनगर पहंुचे और आरती-पूजन समारोह का हिस्सा बने। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने भी दीयों की झड़ी लगा दी। नरेंद्र भाई के निर्वाचन क्षेत्र बनारस में दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और काशी विष्वनाथ धाम क्षेत्र में 5 लाख से अधिक दीये जले। राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों के साथ हज़ारों प्रज्वलित दीयों से बनाई गई नरेंद्र भाई की आकृति की आरती उतारी।

बिहार में 21 लाख आशीर्वाद-दीये जले। छत्तीसगढ़ में 36 लाख दीये जले। पश्चिम बंगाल में एक करोड़ घरों में दीप प्रज्वलन प्रायोजन हुआ। राजस्थान से ले कर महाराष्ट्र तक, आंध्र प्रदेश से ले कर अरुणाचल तक, ओडिशा से ले कर गोवा तक और हरियाणा से ले कर असम, त्रिपुरा, मणिपुर तक हर मतदान केंद्र के क्षेत्र को इकाई मान कर दीप प्रज्वलन के कार्यक्रम आयोजित हुए। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से अपने-अपने घरों के बाहर पांच-पांच, ग्यारह-ग्यारह दीये जलवा कर नरेंद्र भाई मोदी को शुभाशीष दिलवाया गया। भारतीय जनता पाटी की सरकारों वाले 22 राज्यों के बीच इस मामले में एक-दूसरे को पटखनी देने की होड़-सी मच गई।

आजकल देश भर में गणपति विराजे हुए हैं। गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में तेजाजी महाराज का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाता है। हमारे देश में प्रमुख से प्रमुख देवी-देवताओं और लोकदेवताओं तक के जन्मोत्सव कई दिनों तक मनाने की प्राचीन परंपरा है।

सो, भला हुआ कि नरेंद्र भाई 76 के हुए तो अब इस परंपरा में पूरे एक महीने मनाया जाने वाला सालाना ‘सेवा-संकल्प’ उत्सव और जुड़ने का सौभाग्य हमें मिल गया है। भारत एक उत्सवधर्मी देष है। हम हर बात का उत्सव मनाते हैं। जब सात बरस पहले नरेंद्र भाई ने कहा था कि ‘डर होना चाहिए, डर अच्छी चीज़ है’ तो मुझे नहीं मालूम था कि एक दिन आएगा कि वे मेरे मन के दीये को भी सियासी-धमक का डर फैलाने के साधन में तब्दील कर लेंगे। नरेंद्र भाई के लिए एक सद्भावना-दीप मैं भी दीप्तिमान करने का मेरा भी मन था। मगर अब मेरे उंगलियां ही नहीं, टांगें तक थर-थर कांप रही हैं।

शीतल देवी ने विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ में जीते 4 स्वर्ण पदक

शीतल देवी ने महिलाओं की कंपाउंड स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, क्योंकि भारत ने बुधवार को अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ 2026 चरण 3 को 15 पदकों – चार स्वर्ण, तीन रजत और आठ कांस्य – के साथ संपन्न किया।

 

19 वर्षीय विश्व चैंपियन ने स्वर्ण पदक प्रतियोगिता 144-144 के स्तर पर समाप्त होने के बाद शूट-ऑफ में कजाकिस्तान की एज़ादा सेदान को हराया। शीतल ने अपने शूट-ऑफ तीर से 10 का स्कोर किया, जबकि सेडान 9 के स्कोर के साथ भारतीय खिलाड़ी को साबरमती रिवरफ्रंट पर खिताब दिलाने में सफल रही। यह विश्व तीरंदाज़ी पैरा सीरीज़ में शीतल का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक था।

विश्व नंबर 1 भारतीय पैरा तीरंदाज ने क्वालीफिकेशन में 698 अंक हासिल करने के बाद शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी के रूप में एलिमिनेशन में प्रवेश किया था। स्कोर सीज़न का सर्वश्रेष्ठ था और उसने अपने एशियाई रिकॉर्ड में एक अंक का सुधार किया।

शीतल ने राउंड 16 में स्लोवाकिया की लिलियाना लाकोवा को 147-142 से और क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन की जेसिका स्ट्रेटन को 145-142 से हराया और सेमीफाइनल में हमवतन सरिता को 145-143 से हराया। कांस्य पदक मैच में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की वांग हुइटिंग को 141-140 से हराने के बाद सरिता भी पोडियम पर रहीं।

शीतल ने इससे पहले प्रतियोगिता में साथी पेरिस 2024 मिश्रित टीम पैरा तीरंदाजी कांस्य पदक विजेता राकेश कुमार के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया था। भारतीय जोड़ी ने कंपाउंड मिश्रित टीम क्वालीफिकेशन में 1400 अंक हासिल किए, जिससे पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में बनाए गए 1399 के अपने पिछले विश्व रिकॉर्ड में एक अंक का सुधार हुआ। शीतल ने 698 अंक बनाए जबकि राकेश ने रिकॉर्ड कुल स्कोर में 702 का योगदान दिया।

कंपाउंड मिश्रित टीम एलिमिनेशन राउंड के लिए, टोमन कुमार ने राकेश की जगह ली और शीतल के साथ जोड़ी बनाई। भारतीय जोड़ी ने बुधवार को इराक को 157-145 से हराकर कांस्य पदक जीता। सेमीफाइनल में चीन के खिलाफ 156-156 की बराबरी के बाद शूट-ऑफ में हारने के बाद भारत स्वर्ण पदक मैच से चूक गया था।

इस बीच, भावना और हरविंदर सिंह ने रिकर्व मिश्रित टीम प्रतियोगिता में भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक जीता।

भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन के लियांग किउरोंग और ज़िया लेई को 6-0 से हराकर तीन सेट 35-31, 36-33 और 34-32 से जीते। भावना ने हमवतन राजश्री धनराज राठौड़ को 6-0 से हराकर महिला व्यक्तिगत रिकर्व कांस्य पदक भी जीता।

मौजूदा कंपाउंड पुरुष विश्व चैंपियन टोमन कुमार ने इराक के अब्बास कादिम को 143-138 से हराकर कांस्य के साथ अपना व्यक्तिगत अभियान पूरा किया। टॉमन सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के अंतिम चैंपियन केन स्वागुमिलांग से 146-144 से हार गए थे। अंतिम दिन के पदकों ने प्रतियोगिता में भारत की सफलता में इजाफा किया।

टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी ने मंगलवार को इराक को 152-139 से हराकर कंपाउंड पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीता। पेरिस 2024 पैरालंपिक चैंपियन हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने स्लोवाकिया के खिलाफ 6-2 से जीत के साथ रिकर्व पुरुष युगल खिताब जीता।

भावना और पूजा रिकर्व महिला युगल में रजत पदक के साथ समाप्त हुईं, जबकि स्वाति चौधरी और आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी डब्ल्यू 1 मिश्रित टीम स्पर्धा में उपविजेता रहे।

डब्ल्यू1 अधिक गंभीर शारीरिक अक्षमताओं वाले एथलीटों के लिए एक पैरा तीरंदाजी प्रभाग है। तीरंदाज व्हीलचेयर से प्रतिस्पर्धा करते हैं और संशोधित उपकरण नियमों के तहत रिकर्व या कंपाउंड धनुष का उपयोग कर सकते हैं।

भारत ने दोनों डब्ल्यू1 युगल स्पर्धाओं में कांस्य पदक भी जीते। आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी और नवीन दलाल पुरुषों की प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहे, जबकि स्वाति चौधरी और वसुंधरा तेवतिया ने महिलाओं की स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। स्वाति ने व्यक्तिगत डब्ल्यू1 महिला प्रतियोगिता में एक और कांस्य पदक जीता।

इससे पहले, दृष्टिबाधित प्रतियोगिता में तन्वी प्रवीण इंगले ने रजत और युगल गर्ग ने कांस्य पदक जीता था।5 से 9 सितंबर तक आयोजित अहमदाबाद प्रतियोगिता में भारत ने पहली बार विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ कार्यक्रम की मेजबानी की।

ट्रेन बदली, स्टेशन बदले और बन गया रिकॉर्ड! दिल्ली मेट्रो एम्प्लॉई की अनोखी कहानी

दिल्ली मेट्रो के एम्प्लॉई ने सभी मेट्रो स्टेशनों का सफर सबसे कम समय में पूरा करके नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बहुत ही कम टाइम में पूरी जर्नी कर पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले भी वह 2022 में यह कोशिश कर चुके थे, लेकिन इस बार सही रूट और बेहतर प्लानिंग के साथ उन्होंने अपना ही परफॉरमेंस काफी बेहतर किया। दिल्ली मेट्रो के कामकाज और रूट की अच्छी जानकारी ने भी इस रिकॉर्ड को बनाने में उनकी काफी मदद की।

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सिर्फ 15 घंटे में रचा इतिहास

दिल्ली मेट्रो के एम्प्लॉई ने सभी मेट्रो स्टेशनों का सफर सबसे कम समय में पूरा करके नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने यह पूरी जर्नी 14 घंटे, 54 मिनट और 36 सेकंड में पूरी की। सिंह ने 23 मई को सुबह करीब 6 बजे वायलेट लाइन के राजा नाहर सिंह मेट्रो स्टेशन से अपनी जर्नी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग मेट्रो लाइनों और इंटरचेंज का इस्तेमाल करते हुए सफर जारी रखा और रात करीब 9 बजे गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुंचकर इसे पूरा किया। इतने बड़े नेटवर्क में इतने कम समय में सफर पूरा करना आसान नहीं था।

सही रूट ने बचाया समय

प्रफुल्ल सिंह ने इस बार जून 2023 में बनाए गए पुराने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले सुजॉय कुमार मित्रा और शिप्रा गुप्ता ने 15 घंटे, 21 मिनट और 4 सेकंड में दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों का सफर पूरा किया था। सिंह ने इस समय से करीब 26 मिनट कम में अपना सफर पूरा किया। भले ही यह अंतर ज्यादा बड़ा न लगे, लेकिन मेट्रो के इतने बड़े नेटवर्क में कुछ मिनट बचाना भी काफी मुश्किल होता है। एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाने में थोड़ा सा भी समय ज्यादा लग जाए, तो पूरी प्लानिंग बिगड़ सकती है।

पुरानी गलती से मिली सीख

इस रिकॉर्ड को बनाने की कोशिश सिंह ने पहली बार नहीं की थी। वह 2022 में भी दिल्ली मेट्रो के 254 स्टेशनों का सफर कर चुके हैं। उस समय उन्होंने यह जर्नी 16 घंटे, 2 मिनट और 17 सेकंड में पूरी की थी। पहली कोशिश के दौरान गलत रूट लेने की वजह से उनका काफी समय खराब हो गया था। इस एक्सपीरियंस से सीखते हुए उन्होंने इस बार पहले से ज्यादा तैयारी की। ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंह ने बताया कि पिछली बार उन्हें गलत रूट की वजह से करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई थी, लेकिन इस बार उन्हें भरोसा था कि वह अच्छा परफॉर्म करेंगे।

मेट्रो की जानकारी बनी ताकत

प्रफुल्ल सिंह के लिए उनकी नौकरी का एक्सपीरियंस भी इस चुनौती में काफी फायदेमंद रहा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC के ऑपरेशन्स सेक्टर में काम करने की वजह से उन्हें मेट्रो के रूट, ट्रेन के शेड्यूल, इंटरचेंज स्टेशन और अलग-अलग लाइनों की कनेक्टिविटी की अच्छी जानकारी थी। इसी वजह से वह जर्नी में सही रास्ता चुनने और समय बचाने में कामयाब रहे। पूरे मेट्रो नेटवर्क को कम से कम समय में कवर करना एक तरह की स्पीड चैलेंज जैसा है, जिसमें हर मिनट मायने रखता है। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने के साथ-साथ सही समय पर ट्रेन बदलना भी जरूरी होता है।

प्रफुल्ल सिंह को मिला यह अचीवमेंट बताता है कि सही तैयारी, हिम्मत और लगन के साथ मुश्किल से मुश्किल चुनौती भी पूरी की जा सकती है। उनका रिकॉर्ड न सिर्फ उनकी मेहनत को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अपने काम की अच्छी समझ किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में कितनी मददगार हो सकती है।