स्पिन के सामने ना डगमगाए पैर, इस कारण इन 4 स्पिनरों को बनाया नेट गेंदबाज

कभी भारत की ताकत मानी जाने वाली स्पिन गेंदबाजी टेस्ट क्रिकेट में भारत की कमजोरी बनकर उभरी है। भारत ने अपने घर में पहले न्यूजीलैंड और फिर दक्षिण अफ्रीका से बिना कोई टेस्ट जीते सीरीज गंवानी पड़ी थी। इस सीरीज में 85 प्रतिशत विकेट स्पिन गेंदबाजों के थे।

श्रीलंका में भी भारत को स्पिन के मुफीद पिचें पेश की जाएंगी। हालांकि यह हो सकता है कि पहले ही दिन से पिच टर्न ना ले जैसा भारत में देखते हैं लेकिन भारत इस सीरीज को 2-0 से जीतने के लिए कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि भारत के सभी नेट गेंदबाज स्पिनर हैं और अलग विविधता के हैं।

इनमें से हाल ही में टीम इंडिया में शामिल हुए हर्ष दुबे बाएं हाथ के गेंदबाज है। वहीं तनुष कोटियान दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर है। दिल्ली कैपिटल्स से खेलने वाले विपराज निगम दाएं हाथ की लेग स्पिन करते हैं। सनराइजर्स हैदराबाद के शिवांग कुमार बाएं हाथ के कलाई के गेंदबाज हैं।

यह चारों स्पिन गेंदबाज भारत के बल्लेबाजों को हर तरह की स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास कराएंगे जिससे भारतीय बल्लेबाज टेस्ट मैच में श्रीलंकाई स्पिन गेंदबाजों के सामने धराशाही ना हो।टीम में 4 स्पिनरों को जगह दी है और शीर्ष तेज गेंदबाजी क्रम अनुभवी है।

टीम में कुलदीप यादव, रविंद्र जड़ेजा, अफगानिस्तान के खिलाफ ड्रीम डेब्यू करने वाले मानव सुथार और इस सीरीज में डेब्यू करने वाले स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को मौका मिला है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन।

श्रीलंका जाने से पहले यह बल्लेबाज भी हुआ चोटिल, बढ़ा टेस्ट टीम का सिरदर्द

भारतीय टीम ने आज श्रीलंका के लिए उड़ान भरी क्योंकि टीम को 15 अगस्त से शुरु हो रही 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। लेकिन टीम के दल में जो बल्लेबाज चयनित हुआ था वह टीम के साथ नहीं था। यह बल्लेबाज टेस्ट टीम का शीर्ष क्रम का बल्लेबाज है।

श्रीलंका दौरे पर जाने से पहले सांइ सुदर्शन चोटिल हो गए और टीम बस में नहीं दिखे। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि सांई सुदर्शन भी श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए फिट नहीं है। हालांकि उनकी चोट पर स्पष्टता अभी नहीं आई है। लेकिन अगर यह खबर सच है तो भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि वह बाएं हाथ के बल्लेबाज है और स्पिन गेंदबाजी अच्छा खेलते हैं।

इससे पहले रविवार को जब खबर आई कि जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरे श्रीलंका दौरे से ही बाहर हो गए हैं तो बैंगलूरू स्थित सैंटर ऑफ एक्सिलेंस पर भारतीय क्रिकेट फैंस सवाल उठाने लग गए।

तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी चोटिल होने के कारण श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में नहीं खेल पाएंगे। ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहले टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं जबकि तेज गेंदबाज आकाशदीप अभी तक पीठ की दर्द से नहीं उबर पाए हैं।

श्रीलंका में स्पिन की मुफीद पिचें भारत का इंतजार करेंगी ऐसे में जसप्रीत बुमराह को ऐसी पिच पर आराम देने की सलाह रविचंद्रन अश्विन ने दी थी। लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशित चक्र 2025-27 को देखते हुए अब भारत की टीम ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती। टीम इंडिया के लिए बचे हुए 9 मैचों में से 7 जीतने आवश्यक है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन

गौतम गंभीर के कोचिंग स्टाइल से खुश नहीं BCCI! सीनियर प्लेयर्स ने की शिकायत, अहम होगी श्रीलंका सीरीज

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई से अब गौतम गंभीर को पहले जैसा मजबूत समर्थन नहीं मिल रहा है। पिछले एक साल के मुकाबले उनकी स्थिति बदल गई है और टीम के प्रदर्शन को लेकर उन पर दबाव बढ़ गया है। टीम के हालिया प्रदर्शन के बाद बोर्ड के कुछ अधिकारियों और टीम से जुड़े कुछ लोगों के बीच उनके काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, बोर्ड और टीम से जुड़े कुछ अहम लोगों का भरोसा भी पहले जैसा नहीं रहा।

गंभीर से खुश नहीं बीसीसीआई

cricblogger.com की रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर कभी भी हार की जिम्मेदारी खुद लेते हैं, वह हार का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ते हैं। बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों का मानना है कि टीम की हार के बाद गौतम गंभीर अक्सर खिलाड़ियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) या सपोर्ट स्टाफ को जिम्मेदार ठहराते हैं। वहीं टीम प्रबंधन के फैसलों की जिम्मेदारी कम ही लेते हैं। रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि इस सोच का असर अब भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में भी देखने को मिल रहा है। वहीं टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ियों ने निजी तौर पर पूर्व क्रिकेटरों और बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों के सामने गौतम गंभीर के कोचिंग के तरीके पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

श्रीलंका दौरा होगा अहम

रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई के भीतर गौतम को लेकर माहौल पहले जैसा नहीं रहा है। ऐसे में श्रीलंका दौरा गौतम गंभीर के लिए काफी अहम माना जा रहा है। अगर इस सीरीज में भी टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, तो उनके कामकाज पर सवाल और बढ़ सकते हैं। हाल के टेस्ट मुकाबलों और इंग्लैंड दौरे में खराब प्रदर्शन के बावजूद गंभीर को उनके 2027 तक के कॉन्ट्रैक्ट का सहारा है। माना जा रहा है कि विश्व कप से पहले बीसीसीआई जल्दबाजी में मुख्य कोच को हटाने जैसा बड़ा फैसला नहीं करेगा।

कब उठे थे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार के बाद गौतम गंभीर पर ज्यादा सवाल नहीं उठे थे, क्योंकि उस समय हार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से खिलाड़ियों पर डाली गई थी। बाद में उनकी आलोचना तब बढ़ी जब उन्होंने टीम के खराब प्रदर्शन की वजह बदलाव के दौर (ट्रांजिशन) को बताया। आलोचकों ने इस पर सवाल उठाए, क्योंकि अपने कार्यकाल की शुरुआत में गंभीर खुद कह चुके थे कि टीम में किसी तरह का ट्रांजिशन नहीं चल रहा है।

हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के बिना भी भारत ने Commonwealth Games में जीते 39 मेडल

commonwealth games

कई मुख्य खेल जैसे कि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के ना होने के बावूजद भी भारत ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दम दिखाया और 39 मेडल पाकर अंकतालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। ऐसा माना जा रहा था जहां भारत के सफलतम वैश्विक खेल नदारद है वहां मेडल तालिका में भारत अंकतालिका में शीर्ष दस देशों में आ जाए तो बड़ी बात होगी।

टेबल टेनिस में भी सिर्फ पुरुष और महिला के टीम मैच हुए थे, एकल और युगल नहीं। टेबल टेनिस में भारत ने मलेशिया को हराकर दोनों स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।लेकिन भारोत्तोलन, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फी्लड इवेंट के साथ पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने झंडे गाढे़।


भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है।भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते।

मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते।निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया।

कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई।ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।

मेरे पापा मुझे बहुत सपोर्ट करते थे… गोल्ड जीतकर फूट-फूटकर रोईं अस्मिता डे और ऐसी इमोशनल बात कही कि आंखें हो जाएंगी नम

जुडोका अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने की खबर सबसे पहले उसी इंसान को बताना चाहती थीं, जिसे वे अब कभी नहीं बता सकती थीं। उनके पिता, जो साइकिल ठीक करके महीने में मुश्किल से 300 रुपये कमाते थे और त्रिपुरा के एक छोटे से गाँव में मिट्टी के घर में परिवार का गुजारा करते थे, सात महीने पहले ब्रेन स्ट्रोक से गुजर गए थे।

शुक्रवार को, जब 23 साल की अस्मिता महिलाओं के 48kg कैटेगरी में कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय जुडोका बनीं, तो उन्हें लगा कि यह मेडल जितना उनका है, उतना ही उनके पिता का भी है। अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद आंसू रोकते हुए अस्मिता ने कहा, “जब मेरे पिता गुजर गए, तो मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है क्योंकि वही मेरा साथ देते थे।”

कुछ पल के लिए, जश्न के बीच उन पिता की यादें ताजा हो गईं जिन्होंने उनके सपने को तब से संजोया था जब वह भारत का सपना भी नहीं बना था। उन्होंने कहा, “मैं त्रिपुरा के एक बहुत छोटे से गांव से हूं। वहां लोग इतने बड़े सपने नहीं देखते। लेकिन पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया।”

पैसे की हमेशा तंगी रहती थी। उनके पिता गुजारे के लिए साइकिल ठीक करते थे और दिन में लगभग 300 रुपये कमाते थे, जिससे बस घर का खर्च चल पाता था। परिवार एक साधारण से मिट्टी के घर में रहता था, लेकिन उन्होंने कभी भी आर्थिक तंगी को अपनी बेटी के पसंदीदा खेल में रुकावट नहीं बनने दिया।

जब घुटने की चोट से उनका करियर खतरे में पड़ गया, तो पिता उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ले गए, दवाइयां खरीदीं और अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव कोशिश की ताकि वे दोबारा मैट पर लौट सकें। उन्होंने याद करते हुए कहा- वह मुझे इलाज के लिए दिल्ली लाए और दवाइयां खरीदीं।

पिछले साल दिसंबर में उनकी अचानक मौत से अस्मिता बुरी तरह टूट गई थीं। जो इंसान उनका सबसे बड़ा सपोर्टर और हमेशा हिम्मत बंधाने वाला था, वह अब नहीं रहा था और उन्हें लगा कि उनके साथ ही सबसे बड़े मंच पर मुकाबला करने का उनका सपना भी खत्म हो गया।

लेकिन जब अस्मिता इस दुख से उबरने की कोशिश कर रही थीं, तब उनकी मां ने चुपचाप अपने पति की जगह ले ली। अंतिम संस्कार के सिर्फ 10 दिन बाद ही उन्होंने अपनी बेटी से ट्रेनिंग पर लौटने के लिए कहा। उन्होंने अस्मिता से कहा, “अगर मैं तुम्हें आज रोकती हूं, तो तुम्हारे पिता को लगेगा कि मैं तुम्हारे सपने तोड़ रही हूं।”

अस्मिता ने अपना सामान बांधा और भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सेंटर लौट गईं। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले वह बहुत घबराई हुई थीं और कई रातें सो नहीं पाई थीं। उन्होंने बताया कि मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है। इस मेडल से पहले, मैं भारत में सो नहीं पाती थी। मैं मुकाबलों के बारे में सोचकर जागती रहती थी। भले ही मेरा शरीर थका होता था, फिर भी मुझे नींद नहीं आती थी। मैं बेचैन महसूस करती थी और फिर सुबह 5:30 बजे ट्रेनिंग के लिए उठ जाती थी।” ग्लासगो पहुंचने के बाद भी घबराहट बनी रही।

“जब मैं यहां पहुंची, तो मुझे बहुत घबराहट हो रही थी कि क्या होगा। मैं बस यही सोचती रहती थी कि मुझे सबको हराना है और जीतना है।” यह पक्का इरादा ट्रेनिंग हॉल से आगे भी बना रहा। छोटी-छोटी खुशियां भी उस लक्ष्य की याद दिलाती थीं जिसे वह हासिल करना चाहती थीं।

उनके भाई की लाई हुई उनकी पसंदीदा मिठाई, ‘लौंग लत्ता’, घर पर फ्रिज में वैसी ही रखी रही। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं उसे फ्रिज में देखती थी और कई बार तो उसे खाने ही वाली थी, लेकिन फिर खुद को रोक लेती थी।” शुक्रवार को, हर त्याग का फल मिल गया। गोल्ड मेडल ने भारतीय जूडो के रिकॉर्ड बुक में नया इतिहास रच दिया।

खिलाड़ियों और प्रसारक की भलाई के लिए बदली गई जर्सी जानिए कैसे (Video)

नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले हॉकी विश्वकप में भारत की जर्सी का रंग बदलने का मामला गर्माता जा रहा है। भारत अमूमन किसी वैश्विक टूर्नामेंट या प्रो लीग में नीली या सफेद जर्सी पहनकर हॉकी स्टेडियम में उतरता था। लेकिन अब आगामी विश्वकप के लिए नारंगी (भगवा) और सफेद जर्सी को चुना गया है।

भारत के कप्तान हरमनप्रीत ने एक डिजिटल चैनल में यह बात स्वीकारी की खिलाड़ियों और कोच की सहमति के बाद ही जर्सी बदलनी पड़ी। जर्सी बदलने का सबसे बड़ा कारण यह था कि टर्फ का रंग नीला होता है जिससे ना केवल अभ्यास सत्र बल्कि मैच के दौरान भी खिलाड़ियों को फॉर्मेशन बनाने में दिक्कत होती थी।

इसके अलावा लंबे समय से बात चर्चा में थी कि स्क्रीन पर टर्फ और जर्सी का रंग एक होने के कारण दर्शकों को हॉकी का मैच देखने में बहुत दिक्कत आती है। यह प्रसारकों के हित का भी निर्णय है लेकिन अब इस पर राजनीति हो रही है।

इन पूर्व खिलाड़ियों ने उठाया सवाल

नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया जिसे लेकर वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन, धनराज पिल्लै जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये हैं। वहीं मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विपक्षी दलों ने इस पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

टिर्की सहित हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों का कल तक कहना था कि खेल के मैदान पर इस्तेमाल होने वाली नीली पिच से रंग की समानता से बचने के लिए यह पूरी तरह से तकनीकी निर्णय था।

अभिषेक शर्मा होंगे ड्रॉप, संजू सैमसन को मिलेगा T20I टीम में मौका

संजू सैमसन के बाद अब अभिषेक शर्मा के ड्रॉप होने की बारी आ गई है। क्रिकेट पंडितों की मानें तो अगली टी-20 सीरीज जो वेस्टइंडीज के खिलाफ होनी है उसमें अभिषेक शर्मा को ड्रॉप करके संजू सैमसन को शामिल किया जाए क्योंकि वैभव सूर्यवंशी बेहतरीन फॉर्म में है।

जिम्बाब्वे दौरे पर वैभव सूर्यवंशी अपने पसंदीदा मैदान हरारे स्पोर्ट्स क्लब में विस्फोटक पारियां खेलकर मैन ऑफ द सीरीज बन गए। लेकिन उनके साथी अभिषेक शर्मा संघर्ष करते हुए नजर आए और तीनों मैचों में ब्लेसिंग मुजरबानी के खिलाफ सस्ते में आउट हो गए।

इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ पहले 2 मैचों में अभिषेक ने जरूर 50 रन बनाए लेकिन अंतिम 3 मैचों में वह फिर सस्ते में आउट हो गए। इस कारण अभिषेक की 6 असफल पारियों के कारण उनको अब वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली टी-20 सीरीज से आराम दिया जाएगा और संजू सैमसन जिन्हें जिम्बाब्वे दौरे पर आराम दिया गया था उन्हें टीम में लाया जाएगा।

वैभव सूर्यवंशी इतने बेहतरीन फॉर्म में है कि उनके कारण टी-20 विश्वकप की सलामी जोड़ने को तोड़ना पड़ा, वह भी दो बार। जिम्बाब्वे दौरे पर उनके साथी अभिषेक शर्मा थे और संभवत वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में उनके साथी अभिषेक शर्मा रहेंगे।

अभिेषेक शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 में 7 गेंदों में 10 रन बनाए। चौथे टी-20 में 14 गेंदों में 16 रन बनाए। पांचवे टी-20 मैच में उन्होंने 5 गेंदों में सिर्फ 3 रन बनाए। उनका खराब फॉर्म जिम्बाब्वे में भी जारी रहा। पहले टी-20 में वह 8 गेंद खेलकर 1 रन बना पाए। वहीं दूसरे टी-20 में 8 गेंदों में 8 रन बना पाए। तीसरे टी-20 में भी वह 4 गेंद खेलकर सिर्फ 2 रन ही बना पाए। इस हिसाब से वह 6 टी-20 पारियों में सिर्फ 40 रन बना पाए हैं।

13 मैचों में 21 कैच ड्रॉप, सुनील गावस्कर ने कहा बाहर करो खराब फील्डर्स को (Video)

भारत का यूरोप दौरा और जिम्बाब्वे दौरे को मिलाकर 13 मैच खेले गए। इसमें से 10 मैच टी-20 के थे और 3 मैच वनडे के थे। कुल 13 मैचों में भारत ने 21 कैच ड्रॉप किए। इसमें से यूरोप (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) भारत ने 11 कैच ड्रॉप किए। वहीं जिम्बाब्वे दौरे पर टीम ने 3 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही 10 कैच ड्रॉप किए। इसमें से 4 कैच अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में आए।

ऐसे में टीम के खराब फील्डिंग मानकों पर सुनील गावस्कर ने कहा है कि औसत फील्डर को टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तान को उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। ना कि यह सोचना चाहिए कि किसी तरह गेंद उन 3 से 4 खिलाड़ियों के पास ना जाए।

भारतीय टीम ने इन 13 मैचों में 47 कैच पकड़े हैं जिससे टीम का कैच प्रतिशत 69.1 है। गौरतलब है कि भारत को आयरलैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 0-2 और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। एकदिवसीय श्रृंखला में भी भारत को इंग्लैंड के हाथों 2-1 की हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद टीम ने हालांकि जिम्बाब्वे को में 3-0 से हराया।

भारतीय टीम की ग्राउंड फील्डिगं भी कई समय से आलोचनाओं के घेरे में है। यूरोप दौरा (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) कई बार यह देखने में आया कि टीम ने ना केवल आसान कैच छोड़े बल्कि आसान चौके भी दे दिए। वहीं इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाड़ियों ने ना केवल शानदार कैच पकड़े बल्कि ग्राउंड फील्डिंग भी उम्दा की।

इसके अलावा सुनील गावस्कर ने एकदिवसीय विश्वकप 2027 को ध्यान में रखकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सलाह भी दी है कि वह मैदान की सीमा को लंबा करें ताकि विदेशी दौरे और खासकर विश्वकप तक भारत बड़े मैदानों पर खेलने का आदि हो जाए। भारत को अब अगली एकदिवसीय श्रृंखला वेस्टइंडीज के खिलाफ अक्टूबर में खेलनी है।

15 दिन के अंदर भारत ने वापस पा ली T-20I अंतरराष्ट्रीय की पहली रैंक

भारत ने जिम्बाब्वे को लगातार 3 मैच हराकर ना केवल सीरीज जीत ली बल्कि इस महीने के शुरुआत में भारत को अपदस्थ कर पहली रैंक पाने वाली इंग्लैंड को फिर दूसरे रैंक पर भेज दिया। भारत ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ शुरुआती 3 टी 20 मैच जीतकर टी 20 रैंकिंग में नंबर 1 की जगह फिर से हासिल कर ली है।

भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछली सीरीज में 0-4 की हार के साथ टी 20 में अपनी नंबर वन रैंकिंग गंवा दी थी, लेकिन ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ शुरुआती 3 मैचों में शानदार जीत ने उन्हें शीर्ष स्थान फिर से हासिल करने में मदद की है।इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का पांचवा मैच भारत ने 11 जुलाई को खेला था और 26 जुलाई को अपनी पहली टी-20 रैंक वापस पा ली।

हालांकि भारत को यह रैंक बरकरार रखने के लिए लय बरकरार रखनी पड़ेगी क्योंकि भारत को अब न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज खेलनी है और पिछले 10 टी-20 मैचों में वह सिर्फ 3 ही जीती है।साथ ही इंग्लैंड और भारत के बराबर अंक 268 हैं। ऐसे में कुछ हार और कुछ जीत एक बार फिर टी-20 अंकतालिका में हेर फेर ला सकती है।

भारत ने इस सीरीज़ में अब तक दोनों मैच आसानी से जीते हैं। पहले टी20 मैच में, वैभव सूर्यवंशी ने 18 गेंदों में अर्धशतक जड़कर भारत को सात विकेट से जीत दिलाई। दूसरे मैच में, ईशान किशन ने 44 गेंदों में 81 रन बनाए और तिलक वर्मा ने 29 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाए, जिससे भारत ने 90 रनों से जीत हासिल कर 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।

इसके अलावा अंतिम मैच भी भारत ने लगभग एकतरफा अंदाज में 35 रनों से जीत लिया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने 5 विकेट खोकर 192 रन बनाए। इस स्कोर को 200 के करीब पहुंचाने का काम वैभव सूर्यवंशी ने किया जिन्होंने 48 गेंदो में 81 रनों की पारी खेली। हालांकि वह शतक चूक गए जवाब में जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 157 रन ही बना सकी।

पहले हार अब इंजरी से जूझ रही है टीम इंडिया…वर्ल्ड कप 2027 के लिए कितना तैयार भारत?

इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज हारने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि टीम में खिलाड़ियों का बार-बार चोटिल होना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए सभी खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना होगा। 2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब दो साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में खिलाड़ियों की लगातार बढ़ रही चोटें टीम की लंबी तैयारी के लिए चिंता का विषय हैं। 2027 वनडे वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाएगा।

गिल के मुताबिक, इंग्लैंड दौरे पर कई खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर हो गए, जिससे टीम का कॉम्बिनेशन बार-बार बदलना पड़ा और इसका असर प्रदर्शन पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर भारत को बड़े टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करना है तो खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बहुत जरूरी है।

ये खिलाड़ी हुए थे बाहर

भारत की मुश्किलें वनडे सीरीज शुरू होने से पहले ही बढ़ गई थीं। टीम के अहम ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और नीतीश कुमार रेड्डी चोट की वजह से पूरी सीरीज से बाहर हो गए। इसके बाद टी20 सीरीज के दौरान हर्षित राणा भी हैमस्ट्रिंग की समस्या का शिकार हो गए, जिसके कारण वह वनडे मुकाबलों में नहीं खेल सके। वहीं सीरीज के दौरान भी भारतीय टीम की चोटों की समस्या कम नहीं हुई। दूसरे मुकाबले में वॉशिंगटन सुंदर हैमस्ट्रिंग की परेशानी से जूझते नजर आए, जबकि उसी मैच में जसप्रीत बुमराह भी चोटिल हो गए। इसकी वजह से बुमराह तीसरे और आखिरी वनडे में नहीं खेल सके।

इंग्लैंड सीरीज में चोट की वजह से बाहर हुए कई खिलाड़ी

इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद जब शुभमन गिल से लगातार बढ़ रही चोटों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने माना कि यह टीम के लिए चिंता की बात है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। शुभमन गिल ने आगे कहा, “अगर आप हमारी पहली घोषित टीम को देखें, तो उसमें शामिल कम से कम पांच खिलाड़ी इस मैच में नहीं खेल पाए। जब एक खिलाड़ी चोटिल होता है, तो आपको टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। अगर दो खिलाड़ी बाहर हो जाएं, तो फिर एक अलग संयोजन बनाना पड़ता है। लेकिन मेरा मानना है कि हर मैच के बाद किसी न किसी खिलाड़ी के उपलब्ध नहीं होने से टीम कहीं न कहीं अपनी कुछ अहम ताकत खो देती है।”

दो-तीन मैचों की सीरीज भी नहीं खेला पा रहे

2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंचने वाली टीम को 11 मैच तक खेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ के साथ-साथ खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा, “अगर हम वर्ल्ड कप को ध्यान में रखें, तो वहां हमें लगातार 11 मैच खेलने होंगे। लेकिन यहां खिलाड़ी दो-तीन मैचों की सीरीज भी पूरी नहीं खेल पा रहे हैं। कहीं न कहीं यह हमारे लिए चिंता की बात है कि खिलाड़ी लगातार उपलब्ध नहीं रह पा रहे हैं।”

फिटनेस में सुधार काफी जरूरी

गिल ने कहा, “खिलाड़ी एक या दो मैच खेलते हैं और फिर अगर किसी को हल्की-सी भी दिक्कत हो जाती है, तो हमें मजबूरी में टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। ऐसे में योजना बनाना आसान नहीं होता। कई बार सुबह पता चलता है कि किसी खिलाड़ी को हल्की चोट या परेशानी है, तब फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि उसे खिलाया जाए या नहीं। अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ 80 प्रतिशत फिट है और आप पांच गेंदबाजों के साथ उतर रहे हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है। मुझे लगता है कि एक टीम के तौर पर हमें अपनी फिटनेस और इस पूरे पहलू में सुधार करने की जरूरत है।”