विराट कोहली नहीं ये इंग्लिश बल्लेबाज तोड़ सकता है सचिन का रिकॉर्ड! पूर्व दिग्गज खिलाड़ी ने किया ये बड़ा दावा

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए है। वहीं हाल ही में एक पूर्व दिग्गज खिलाड़ी दिनेश कार्तिक ने बताया कि सचिन का रिकॉर्ड कौन सा खिलाड़ी तोड़ सकता है। दिनेश कार्तिक ने कहा, इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट आने वाले समय में सचिन तेंदुलकर के 15,921 टेस्ट रन के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं। वहीं कार्तिक ने आगे कहा कि विराट कोहली के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक पूरे करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोहली के लिए इस आंकड़े तक पहुंचना काफी मुश्किल नजर आता है।

सचिन के रिकॉर्ड से कितना दूर जो रूट

इंग्लैंड के दिग्गज खिलाड़ी जो रूट टेस्ट क्रिकेट में शानदार बल्लेबाजी कर रहे हैं। जो रूट ने 169 टेस्ट मैचों में 14,278 रन बनाए हैं। वह अब सचिन तेंदुलकर के 15,921 टेस्ट रनों के रिकॉर्ड से 1,643 रन पीछे हैं। अगर रूट आगे भी इसी तरह रन बनाते रहे, तो वह करीब 16 से 20 टेस्ट मैचों में तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। रूट ने 2021 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उन्होंने 15 टेस्ट मैचों में 1,708 रन बनाए थे। जो रूट अभी सिर्फ 35 साल के हैं और इंग्लैंड की टीम हर साल करीब 15 से 20 टेस्ट मैच खेलती है। ऐसे में रूट के पास सचिन का टेस्ट रिकॉर्ड तोड़ने का अच्छा मौका है।

रूट तोड़ सकते हैं सचिन का रिकॉर्ड

क्रिकबज पर जब दिनेश कार्तिक से पूछा गया कि क्या जो रूट सचिन तेंदुलकर का टेस्ट रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि “अच्छा चांस है।”। कार्तिक ने कहा कि “वे इंग्लैंड में बहुत सारा टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं। वह अभी भी काफी स्ट्रेट दिखते हैं। वह हर बार बैटिंग करने के लिए खुशी-खुशी रन बनाते हैं। मुझे लगता है कि उनके लिए यह बहुत पॉसिबल है।”

क्या विराट तोड़ सकते हैं ये रिकॉर्ड

वहीं विराट कोहली के नाम फिलहाल 86 अंतरराष्ट्रीय शतक हैं। वह टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और अब सिर्फ वनडे में खेल रहे हैं। विराट कोहली के 100 अंतरराष्ट्रीय शतक पूरे करने की संभावना पर दिनेश कार्तिक ने कहा कि, वह चाहते हैं कि कोहली यह उपलब्धि हासिल करें, लेकिन ऐसा करना काफी मुश्किल है। कार्तिक ने माना कि कोहली के लिए 100 शतकों के आंकड़े तक पहुंचना आसान नहीं होगा। कोहली वनडे में सचिन तेंदुलकर के सबसे ज्यादा रन के रिकॉर्ड से 3,000 से ज्यादा रन पीछे हैं। वहीं, अगर वह लगातार शानदार बल्लेबाजी करते हुए 1,500 से 1,600 रन और बना लेते हैं, तो इस अंतर को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

न्यूजीलैंड सीरीज में खेलेंगे

आंकड़ों के मुताबिक, विराट कोहली को 101 अंतरराष्ट्रीय शतक तक पहुंचने के लिए करीब 110 और पारियां खेलनी पड़ सकती हैं। अब वह सिर्फ वनडे खेल रहे हैं, जहां वह औसतन हर 5.55 पारियों में एक शतक बनाते हैं। इस हिसाब से उनकी अगली 15 सेंचुरी के लिए करीब 83 पारियां लग सकती हैं। 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक भारत को लगभग 25 से 30 वनडे मैच ही और खेलने हैं, इसलिए कोहली के लिए 100 शतक का आंकड़ा हासिल करना काफी चुनौतीपूर्ण नजर आता है। वह अब 4 नवंबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे सीरीज में खेलते दिखाई देंगे।

इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में श्रीलंका को 223 रनों से हराकर 2-1 से जीती सीरीज

ENGvsSL इंग्लैंड ने श्रीलंका को ओवल में खेले गए तीसरे एकदिवसीय मैच में 223 रनों से हराकर सीरीज अपने नाम कर ली। इंग्लैंड ने पहला मैच 89 रन से जीता था वहीं श्रीलंका ने दूसरा मैच 16 रनों से अपने नाम किया था। 

मेजबान इंग्लैंड ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी। पहली बार सलामी बल्लेबाजी कर रहे टॉम बैंटन ने कमाल कर दिया और 106 गेंदों में शानदार 126 रन जडे़ जिसमें 16 चौके और 5 छक्के शामिल थे। इसके बाद मध्यक्रम में कप्तान हैरी ब्रूक ने 77 रन ( 9 चौके, 2 छक्के) और जॉर्डन कॉक्स 76 रन ( 6 चौके, 2 छक्के) ने टीम को 7 विकेटों के नुकसान पर 355 रनों तक पहुंचा दिया। अशिता फर्नेडों ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए।

इसके जवाब में श्रीलंका की बल्लेबाजी लय में नहीं दिखी और पूरी टीम 29.1 ओवर में 132 रनों पर सिमट गई। सर्वाधिक 35 रन कुसल मेंडिस ने बनाए और लियाम डॉसन ने 3 विकेट चटकाए। शानदार शतक के लिए टॉम बैंटन को मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार मिला। वहीं ऑलराउंडर विल जैक्स को सीरीज में 147 रन और 9 विकेट लेने पर मैन ऑफ द सीरीज का पुरुस्कार मिला।

इंग्लैंड के एक्सप्रेस गेंदबाज मार्क वुड ने चोटों से परेशान होकर कहा क्रिकेट को अलविदा

इंग्लैंड के मार्क वुड ने लंबे समय तक चोटों से जूझने के बाद 36 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के 146 मैचों में उन्होंने कुल 253 विकेट झटके, जिसमें 38 टेस्ट में 30.79 की औसत से लिए 119 विकेट शामिल हैं। वुड की पहचान इंग्लैंड के सबसे तेज़ गेंदबाज़ों में होती है। वह 2015 की ऐशेज़, 2019 के वनडे विश्व कप और 2022 के टी 20 विश्व कप का ख़िताब जीतने वाली इंग्लैंड टीम के अहम सदस्य रहे हैं।

2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी में घुटने की चोट के बाद से वुड ने केवल एक ही मुक़ाबला खेला था, जो पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर ऐशेज़ सीरीज़ का पहला टेस्ट था। मैदान से दूर रहने के दौरान उन्होंने कॉमेंट्री और ब्रॉडकास्टिंग में भी अपनी अलग पहचान बनाई। वुड ने मंगलवार सुबह संन्यास का ऐलान किया और इसके तुरंत बाद वह अपने घरेलू मैदान डरहम (रिवरसाइड) में इंग्लैंड-श्रीलंका वनडे के प्रसारण से जुड़ गए।

वुड डरहम के लिए टी 20 ब्लास्ट और दुनिया भर की टी 20 लीग में खेलना जारी रखेंगे। इसके साथ ही वह मीडिया में काम करेंगे। साथ ही उन्होंने लेवल-3 कोचिंग का कोर्स भी पूरा कर लिया है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने साफ़ कर दिया था कि 2023 में मिला उनका तीन साल का केंद्रीय अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, जिसके बाद उन्होंने संन्यास का यह फ़ैसला लिया।

स्काई स्पोर्ट्स से बात करते हुए वुड ने बताया कि लगातार चोटों से जूझते हुए वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके थे। वुड ने कहा, “पर्थ में नवंबर में खेले गए अपने आख़िरी मैच के बाद लंबा वक़्त बीत गया है। तक़रीबन डेढ़ साल से चोटों से लड़ते हुए मुझे एहसास हुआ कि अब मैं दोबारा उस रफ़्तार और स्तर पर गेंदबाज़ी नहीं कर पाऊंगा। मेरा अनुबंध सितंबर में ख़त्म हो रहा है और मुझे लगा कि हटने का यही सही समय है। मैं कभी इंग्लैंड छोड़ना नहीं चाहता था, लेकिन नए युवा गेंदबाज़ बेहतरीन काम कर रहे हैं। अब चर्चा उन खिलाड़ियों की होनी चाहिए जिन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट मिलना है। अब मैं अपनी ज़िंदगी के अगले पड़ाव पर ध्यान लगा सकता हूं।”

वुड ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और अपनी तेज़ रफ़्तार व मैदान पर मज़ाकिया अंदाज़ के चलते जल्द ही फ़ैंस के चहेते बन गए। उसी साल ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में नाथन लियोन को आउट कर उन्होंने इंग्लैंड की ऐशेज़ जीत पक्की की थी। इसके बाद वह इयोन मॉर्गन की सीमित ओवरों की टीम का मुख्य हथियार बन गए।

लगातार चोटों ने उनके करियर की रफ़्तार रोकी, लेकिन 2019 में रन-अप लंबा करने के बाद उन्होंने दमदार वापसी की। सेंट लूसिया में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ उन्होंने इंग्लैंड के टेस्ट इतिहास के सबसे तेज़ स्पेल में से एक फेंककर पारी में पहली बार पांच विकेट झटके। 

उसी साल घरेलू मैदान पर इंग्लैंड को वनडे विश्व कप जिताने में उनका बड़ा रोल रहा, जहां उन्होंने फ़ाइनल में रॉस टेलर के बड़े विकेट समेत कुल 18 शिकार किए।

वुड ने 2019-20 के साउथ अफ़्रीका दौरे पर कमाल की गेंदबाज़ी की और 2021-22 की ऐशेज़ में 17 विकेट लेकर इंग्लैंड के सबसे कामयाब गेंदबाज़ रहे। 2022 टी 20 विश्व कप में उन्होंने चार मैचों में नौ विकेट लिए, जबकि 2023 ऐशेज़ के हेडिंग्ले टेस्ट में मैच जिताऊ प्रदर्शन कर इंग्लैंड की सीरीज़ में वापसी कराई थी।

इंग्लैंड के क्रिकेट निदेशक रॉब की ने 2023 के अंत में वुड को फ़्रेंचाइज़ी लीगों में जाने से रोकने के लिए तीन साल का केंद्रीय अनुबंध दिया था, जो उस समय एक बड़ा फ़ैसला था। हालांकि चोटों के चलते वह इस दौरान सिर्फ़ सात टेस्ट खेल पाए और उनके खाते में 15 विकेट ही आए।

2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ दर्द में गेंदबाज़ी करने के बाद उन्हें घुटने की सर्जरी करानी पड़ी थी। इंग्लैंड की मेडिकल टीम ने ऐशेज़ के लिए उन्हें संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन वुड ने बाद में माना कि वह पहले टेस्ट के लिए पूरी तरह फ़िट नहीं थे। पर्थ में बिना विकेट लिए 11 ओवर फेंकने के बाद उनका घुटना फिर जवाब दे गया और वहीं उनका अंतरराष्ट्रीय करियर भी थम गया।

पहले हार अब इंजरी से जूझ रही है टीम इंडिया…वर्ल्ड कप 2027 के लिए कितना तैयार भारत?

इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज हारने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि टीम में खिलाड़ियों का बार-बार चोटिल होना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए सभी खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना होगा। 2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब दो साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में खिलाड़ियों की लगातार बढ़ रही चोटें टीम की लंबी तैयारी के लिए चिंता का विषय हैं। 2027 वनडे वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाएगा।

गिल के मुताबिक, इंग्लैंड दौरे पर कई खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर हो गए, जिससे टीम का कॉम्बिनेशन बार-बार बदलना पड़ा और इसका असर प्रदर्शन पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर भारत को बड़े टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करना है तो खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बहुत जरूरी है।

ये खिलाड़ी हुए थे बाहर

भारत की मुश्किलें वनडे सीरीज शुरू होने से पहले ही बढ़ गई थीं। टीम के अहम ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और नीतीश कुमार रेड्डी चोट की वजह से पूरी सीरीज से बाहर हो गए। इसके बाद टी20 सीरीज के दौरान हर्षित राणा भी हैमस्ट्रिंग की समस्या का शिकार हो गए, जिसके कारण वह वनडे मुकाबलों में नहीं खेल सके। वहीं सीरीज के दौरान भी भारतीय टीम की चोटों की समस्या कम नहीं हुई। दूसरे मुकाबले में वॉशिंगटन सुंदर हैमस्ट्रिंग की परेशानी से जूझते नजर आए, जबकि उसी मैच में जसप्रीत बुमराह भी चोटिल हो गए। इसकी वजह से बुमराह तीसरे और आखिरी वनडे में नहीं खेल सके।

इंग्लैंड सीरीज में चोट की वजह से बाहर हुए कई खिलाड़ी

इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद जब शुभमन गिल से लगातार बढ़ रही चोटों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने माना कि यह टीम के लिए चिंता की बात है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। शुभमन गिल ने आगे कहा, “अगर आप हमारी पहली घोषित टीम को देखें, तो उसमें शामिल कम से कम पांच खिलाड़ी इस मैच में नहीं खेल पाए। जब एक खिलाड़ी चोटिल होता है, तो आपको टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। अगर दो खिलाड़ी बाहर हो जाएं, तो फिर एक अलग संयोजन बनाना पड़ता है। लेकिन मेरा मानना है कि हर मैच के बाद किसी न किसी खिलाड़ी के उपलब्ध नहीं होने से टीम कहीं न कहीं अपनी कुछ अहम ताकत खो देती है।”

दो-तीन मैचों की सीरीज भी नहीं खेला पा रहे

2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंचने वाली टीम को 11 मैच तक खेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ के साथ-साथ खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा, “अगर हम वर्ल्ड कप को ध्यान में रखें, तो वहां हमें लगातार 11 मैच खेलने होंगे। लेकिन यहां खिलाड़ी दो-तीन मैचों की सीरीज भी पूरी नहीं खेल पा रहे हैं। कहीं न कहीं यह हमारे लिए चिंता की बात है कि खिलाड़ी लगातार उपलब्ध नहीं रह पा रहे हैं।”

फिटनेस में सुधार काफी जरूरी

गिल ने कहा, “खिलाड़ी एक या दो मैच खेलते हैं और फिर अगर किसी को हल्की-सी भी दिक्कत हो जाती है, तो हमें मजबूरी में टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। ऐसे में योजना बनाना आसान नहीं होता। कई बार सुबह पता चलता है कि किसी खिलाड़ी को हल्की चोट या परेशानी है, तब फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि उसे खिलाया जाए या नहीं। अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ 80 प्रतिशत फिट है और आप पांच गेंदबाजों के साथ उतर रहे हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है। मुझे लगता है कि एक टीम के तौर पर हमें अपनी फिटनेस और इस पूरे पहलू में सुधार करने की जरूरत है।”