नामीबिया में T20I त्रिकोणीय श्रृंखला खेलेंगें दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे

नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे टी-20 त्रिकोणीय सीरीज की मेजबानी करेगा और उसके बाद वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज खेलेगा। सभी मैच विंडहोक के नामीबिया क्रिकेट ग्राउंड में खेले जाएंगे।

टी-20 त्रिकोणीय 28 अगस्त को शुरू होगी, जिसका फ़ाइनल छह सितंबर को होगा और वनडे सीरीज नौ सितंबर से शुरू होगी। यह त्रिकोणीय सीरीज 2027 में होने वाले अफ्रीका कप की शुरुआत के लिए आधार तैयार करेगी। इस प्रतियोगिता का मक़सद ज़्यादा अफ्रीकी देशों को सबसे उच्च स्तर पर खेलने का मौका देना है।

त्रिकोणीय सीरीज से होने वाला सारा मुनाफ़ा अफ्रीका क्रिकेट एसोसिएशन को दान किया जाएगा ताकि पूरे महाद्वीप में खेल को बढ़ावा दिया जा सके। क्रिकेट नामीबिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोहान मुलर ने कहा, “हम इस सीरीज़ के लिए क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका और ज़िम्बाब्वे क्रिकेट के कमिटमेंट के लिए बहुत आभारी हैं। यह अफ्रीकी महाद्वीप में क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत पार्टनरशिप और साझा सोच को दिखाता है।”

दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे 2027 में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप के संयुक्त मेजबान हैं। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोलेट्सी मोसेकी कहा, “हम इस व्हाइट-बॉल टूर का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हैं। यह न सिर्फ़ हमारे पड़ोसी देशों में खेल को मज़बूत करने के हमारे कमिटमेंट को दिखाता है, बल्कि अगले साल होने वाले आईसीसी पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप से पहले उत्साह भी बढ़ाता है, जिसकी मेजबानी ये तीनों देश मिलकर करेंगे।”

पहले हार अब इंजरी से जूझ रही है टीम इंडिया…वर्ल्ड कप 2027 के लिए कितना तैयार भारत?

इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज हारने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि टीम में खिलाड़ियों का बार-बार चोटिल होना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए सभी खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना होगा। 2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब दो साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में खिलाड़ियों की लगातार बढ़ रही चोटें टीम की लंबी तैयारी के लिए चिंता का विषय हैं। 2027 वनडे वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाएगा।

गिल के मुताबिक, इंग्लैंड दौरे पर कई खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर हो गए, जिससे टीम का कॉम्बिनेशन बार-बार बदलना पड़ा और इसका असर प्रदर्शन पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर भारत को बड़े टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करना है तो खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बहुत जरूरी है।

ये खिलाड़ी हुए थे बाहर

भारत की मुश्किलें वनडे सीरीज शुरू होने से पहले ही बढ़ गई थीं। टीम के अहम ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और नीतीश कुमार रेड्डी चोट की वजह से पूरी सीरीज से बाहर हो गए। इसके बाद टी20 सीरीज के दौरान हर्षित राणा भी हैमस्ट्रिंग की समस्या का शिकार हो गए, जिसके कारण वह वनडे मुकाबलों में नहीं खेल सके। वहीं सीरीज के दौरान भी भारतीय टीम की चोटों की समस्या कम नहीं हुई। दूसरे मुकाबले में वॉशिंगटन सुंदर हैमस्ट्रिंग की परेशानी से जूझते नजर आए, जबकि उसी मैच में जसप्रीत बुमराह भी चोटिल हो गए। इसकी वजह से बुमराह तीसरे और आखिरी वनडे में नहीं खेल सके।

इंग्लैंड सीरीज में चोट की वजह से बाहर हुए कई खिलाड़ी

इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद जब शुभमन गिल से लगातार बढ़ रही चोटों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने माना कि यह टीम के लिए चिंता की बात है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। शुभमन गिल ने आगे कहा, “अगर आप हमारी पहली घोषित टीम को देखें, तो उसमें शामिल कम से कम पांच खिलाड़ी इस मैच में नहीं खेल पाए। जब एक खिलाड़ी चोटिल होता है, तो आपको टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। अगर दो खिलाड़ी बाहर हो जाएं, तो फिर एक अलग संयोजन बनाना पड़ता है। लेकिन मेरा मानना है कि हर मैच के बाद किसी न किसी खिलाड़ी के उपलब्ध नहीं होने से टीम कहीं न कहीं अपनी कुछ अहम ताकत खो देती है।”

दो-तीन मैचों की सीरीज भी नहीं खेला पा रहे

2027 वनडे वर्ल्ड कप शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंचने वाली टीम को 11 मैच तक खेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ के साथ-साथ खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट रहना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा, “अगर हम वर्ल्ड कप को ध्यान में रखें, तो वहां हमें लगातार 11 मैच खेलने होंगे। लेकिन यहां खिलाड़ी दो-तीन मैचों की सीरीज भी पूरी नहीं खेल पा रहे हैं। कहीं न कहीं यह हमारे लिए चिंता की बात है कि खिलाड़ी लगातार उपलब्ध नहीं रह पा रहे हैं।”

फिटनेस में सुधार काफी जरूरी

गिल ने कहा, “खिलाड़ी एक या दो मैच खेलते हैं और फिर अगर किसी को हल्की-सी भी दिक्कत हो जाती है, तो हमें मजबूरी में टीम का कॉम्बिनेशन बदलना पड़ता है। ऐसे में योजना बनाना आसान नहीं होता। कई बार सुबह पता चलता है कि किसी खिलाड़ी को हल्की चोट या परेशानी है, तब फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि उसे खिलाया जाए या नहीं। अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ 80 प्रतिशत फिट है और आप पांच गेंदबाजों के साथ उतर रहे हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है। मुझे लगता है कि एक टीम के तौर पर हमें अपनी फिटनेस और इस पूरे पहलू में सुधार करने की जरूरत है।”