घसियाली पिच पर अभ्यास मैच खिलाने पर भारतीय टीम हुई श्रीलंका पर नाराज (Video)

INDvsSL टेस्ट सीरीज से पहले अमूमन मेजबान टीमें मेहमान टीमों को अभ्यास मैच में वह स्थिति या पिच नहीं देती है जो मुख्य मैच में होती है। यह किसी भी मेजबान टीम की रणनीति का हिस्सा होता है। हालांकि पिच मुख्य मैच से थोड़ी बहुत मिलती जुलती है।

लेकिन श्रीलंका क्रिकेट ने मुख्य मैच से इतर स्पिन मुफीद पिच ना देकर अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ घसियाली पिच देकर एक नया विवाद खड़ा कर लिया है। भारतीय टीम श्रीलंका आते साथ ही इस बात पर नाराज हो गई है। इस विवाद पर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने सफाई दी है कि पिच पर भले ही घास हो लेकिन पिच बल्लेबाजी के लिए मुफीद है।

हाल के दिनों में घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखलाओं में भारतीय बल्लेबाजों की सबसे बड़ी कमजोरी बेहतर स्पिन गेंदबाजी के सामने उजागर हुई थी। श्रीलंका के खिलाफ भी परिस्थितियां कुछ अलग नहीं होंगी।श्रीलंका के पास विशेष रूप से घरेलू परिस्थितियों में प्रभावी स्पिन आक्रमण है। ऐसे में 15 अगस्त से गॉल में खेले जाने वाले पहले टेस्ट से पहले यह अभ्यास मैच भारतीय बल्लेबाजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऐसे में जब टीम को अभ्यास मैच में अलग और पहले टेस्ट मैच में अगल पिच मिलेगी तो टीम के लिए अभ्यास ना के बराबर होगा।कप्तान शुभमन गिल, लोकेश राहुल और यशस्वी जायसवाल जैसे प्रमुख बल्लेबाज श्रीलंका रवाना होने से पहले अपने-अपने घरेलू अभ्यास केंद्रों पर स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ अभ्यास कर चुके हैं, लेकिन श्रीलंकाई पिचों पर मैच जैसी परिस्थितियों में खेलने का अनुभव उससे कहीं अधिक उपयोगी होगा।इस कारण पिच का बर्ताव महत्वपूर्ण हो जाता है।

गुरनूर बराड़ और सारांश जैन ने पिछले महीने गॉल में भारत ‘ए’ की ओर से श्रीलंका ‘ए’ के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था। दोनों खिलाड़ी इस अभ्यास मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर अपनी तैयारी को और मजबूत करना चाहेंगे।

सिर्फ पिच ही नहीं बल्कि मौसम भी भारतीय टीम के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। मौसम  भारत की तैयारियों में बाधा बन सकता है। मौसम विभाग ने शुक्रवार से शहर में रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान जताया है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), साई सुदर्शन, यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन


13 मैचों में 21 कैच ड्रॉप, सुनील गावस्कर ने कहा बाहर करो खराब फील्डर्स को (Video)

भारत का यूरोप दौरा और जिम्बाब्वे दौरे को मिलाकर 13 मैच खेले गए। इसमें से 10 मैच टी-20 के थे और 3 मैच वनडे के थे। कुल 13 मैचों में भारत ने 21 कैच ड्रॉप किए। इसमें से यूरोप (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) भारत ने 11 कैच ड्रॉप किए। वहीं जिम्बाब्वे दौरे पर टीम ने 3 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही 10 कैच ड्रॉप किए। इसमें से 4 कैच अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में आए।

ऐसे में टीम के खराब फील्डिंग मानकों पर सुनील गावस्कर ने कहा है कि औसत फील्डर को टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तान को उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। ना कि यह सोचना चाहिए कि किसी तरह गेंद उन 3 से 4 खिलाड़ियों के पास ना जाए।

भारतीय टीम ने इन 13 मैचों में 47 कैच पकड़े हैं जिससे टीम का कैच प्रतिशत 69.1 है। गौरतलब है कि भारत को आयरलैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 0-2 और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। एकदिवसीय श्रृंखला में भी भारत को इंग्लैंड के हाथों 2-1 की हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद टीम ने हालांकि जिम्बाब्वे को में 3-0 से हराया।

भारतीय टीम की ग्राउंड फील्डिगं भी कई समय से आलोचनाओं के घेरे में है। यूरोप दौरा (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) कई बार यह देखने में आया कि टीम ने ना केवल आसान कैच छोड़े बल्कि आसान चौके भी दे दिए। वहीं इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाड़ियों ने ना केवल शानदार कैच पकड़े बल्कि ग्राउंड फील्डिंग भी उम्दा की।

इसके अलावा सुनील गावस्कर ने एकदिवसीय विश्वकप 2027 को ध्यान में रखकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सलाह भी दी है कि वह मैदान की सीमा को लंबा करें ताकि विदेशी दौरे और खासकर विश्वकप तक भारत बड़े मैदानों पर खेलने का आदि हो जाए। भारत को अब अगली एकदिवसीय श्रृंखला वेस्टइंडीज के खिलाफ अक्टूबर में खेलनी है।

रोहित के संन्यास की खबरों को देख अश्विन को याद आई अपनी बेईज्जती (Video)

रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों और अटकलों को सुनकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन को अपनी बेईज्जती याद आ गई जब चयनकर्ताओं ने बोर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान उनको यह इशारा कर दिया था कि वह अब उनसे आगे बढ़ना चाहते हैं।

रविचंद्रन अश्विन ने चयनकर्ताओँ और टीम प्रबंधन पर निशाना साधते हुए कहा”अगर चयनकर्ताओँ रोहित शर्मा से आगे बढ़ना चाहते थे, तो उन्हें 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद उनसे यही कहना चाहिए था। अब 2026 में ऐसा करना बहुत गलत है, जबकि  विश्व कप बहुत करीब है, जहाँ रोहित शर्मा ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

अगर इन 2 खिलाड़ियों में से किसी को भी ऐसा नहीं लगता कि उन्हें चुना जा रहा है, तो वे अपना उतकृष्ट प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे और उन्हें वहाँ होने पर बहुत बुरा लगेगा।”वह इस खेल के लेजेंड हैं और संवाद बेहतर हो सकता था। मेरे साथ भी जब संवाद हुआ था तो बहुत बुरा लगा था। लेकिन ठीक है यह जीवन है।”

क्या हुआ था अश्विन के साथ

भारत के लिए 537 टेस्ट विकेट लेने वाले अनुभवी ऑफ स्पिनर अश्विन पर वाशिंगटन सुंदर को पर्थ में पहले टेस्ट के लिए चुना गया था जबकि एडीलेड में गुलाबी गेंद के टेस्ट में उन्हें खेलने का मौका मिला।हालांकि अश्विन को ‘गाबा’ में तीसरे टेस्ट के लिए फिर से एकादश से बाहर किया गया और इस बार रविंद्र जडेजा को खेलने का मौका मिला।

 

रविचंद्रन ने कहा कि परिवार कुछ समय से अश्विन के संन्यास की उम्मीद कर रहा था क्योंकि उनका ‘अपमान हो रहा था’, हालांकि उन्होंने इसकी सटीक प्रकृति का खुलासा नहीं किया।

Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू में टीम इंडिया ने कर दी जल्दबाजी? इंग्लैंड के सीरीज हारने के बाद फूटा इस पूर्व खिलाड़ी का गुस्सा

इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की टी20 सीरीज खत्म हो गई है। इस सीरीज को इंग्लैंड ने 4-0 से अपने नाम किया है। वहीं इस सीरीज के दूसरे मैच में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। इस सीरीज में वैभव कुछ खास कमाल नहीं कर पाए। शुरुआती तीन मैचों में उन्होंने 14, 13 और 15 रन की ही पारी खेल सके। वहीं वैभव के डेब्यू पर पूर्व भारतीय वसीम जाफर ने अपनी राय रखी है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज वसीम जाफर के मुताबिक कि, युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में थोड़ा और समय देकर मौका दिया जाना चाहिए था।

उनके अनुसार टीम मैनेजमेंट ने उनकी लोकप्रियता और पब्लिक हाइप को देखते हुए जल्दबाजी में फैसला लिया, जबकि पहले से टीम का बल्लेबाजी क्रम तय था। जाफर का कहना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी को इंटरनेशनल स्तर पर उतारने से पहले उसे घरेलू और दूसरे स्तर पर पर्याप्त अनुभव हासिल करने का मौका मिलना चाहिए।

जल्द ही करवा दिया डेब्यू

वसीम जाफर ने कहा, “मुझे लगता है कि हमने वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल करने में थोड़ी जल्दबाजी की। उनके आसपास काफी चर्चा और उत्साह था, इसलिए लोग उन्हें जल्द खेलते हुए देखना चाहते थे। लेकिन मेरा मानना है कि भारत को संजू सैमसन के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “वैभव अभी बहुत युवा हैं। अगर वह कुछ समय तक भारतीय टीम के साथ रहते, माहौल को समझते और सही मौके का इंतजार करते, तो उन्हें ज्यादा फायदा होता। इतनी जल्दी उन्हें अंतिम एकादश में जगह देना सही फैसला नहीं था।”

हाइप की वजह से किया गया शामिल

वसीम जाफर ने भारत के टॉप ऑर्डर में लगातार किए जा रहे बदलावों पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि चयनकर्ता और टीम प्रबंधन वैभव सूर्यवंशी को खिलाने की बढ़ती मांग और उनके आसपास बने माहौल से प्रभावित नजर आए। उन्होंने कहा, “ऐसा लगा कि हम मीडिया में बनी चर्चा के साथ बह गए। जब भी वैभव प्लेइंग इलेवन में नहीं होते थे, तो इसे लेकर काफी बातें होती थीं। अगर टीम को लगता था कि संजू सैमसन फॉर्म में नहीं हैं, तो वह अलग बात है। लेकिन आखिर में ऐसा महसूस हुआ कि वैभव को टीम में शामिल करने का फैसला कुछ ज्यादा जल्दी कर लिया गया।”

संजू को लेकर कही ये बात

वसीम जाफर ने संजू सैमसन के साथ हुए व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पांचवें टी20 मैच के लिए उन्हें दोबारा टीम में शामिल किया गया, लेकिन इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। उन्होंने कहा, “संजू सैमसन भारत के लिए सिर्फ टी20 फॉर्मेट खेलते हैं, इसलिए उन्हें लगातार मौके मिलने चाहिए। मुझे लगता है कि वह अगले टी20 वर्ल्ड कप की योजनाओं का हिस्सा होंगे, लेकिन जिस तरह उनके साथ फैसले लिए गए, वह काफी हैरान करने वाला था।”