Asian Games में चोट के बावजूद सिल्वर जीतने वाले श्रीशंकर की हुई सर्जरी (Video)

जापान में एशियाई खेलों के दौरान चोटिल हुए भारतीय लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर के दाहिने टखने की सर्जरी हुई है। अब उनका पूरा ध्यान 2027 के एथलेटिक्स सीज़न में वापसी करने पर है।27 वर्षीय भारतीय एथलीट ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए इस सर्जरी की पुष्टि की। श्रीशंकर ने लिखा, “मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि मुझे इन सब से गुजरना पड़े, लेकिन इस बार मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था। कल लंदन के फोर्टियस क्लिनिक में डॉ. पीटर डी’हूघे की देखरेख में मेरे टखने की एक छोटी सर्जरी हुई।”

पिछले महीने आइची-नागोया में हुए एशियाई खेलों के दौरान, लॉन्ग जंप फाइनल में श्रीशंकर का टखना चोटिल हो गया था। बारिश से भीगे रनवे पर, अपने चौथे प्रयास के लिए तैयार होते समय वे टेक-ऑफ बोर्ड पर फिसल गए, जिससे उनके दाहिने टखने में मोच आ गई। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर इस घटना का एक वीडियो भी पोस्ट किया। इस चोट के कारण उन्हें अपने आखिरी दो जंप छोड़ने पड़े, लेकिन दूसरे राउंड में लगाई गई 8.07 मीटर की छलांग उन्हें सिल्वर मेडल दिलाने के लिए काफी रही।
शुरुआत में श्रीशंकर को लगा कि टखने की चोट गंभीर नहीं है और आराम तथा रिहैबिलिटेशन से ठीक हो जाएगी, लेकिन बाद में स्कैन और डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद सर्जरी की ज़रूरत पड़ी। मंगलवार को स्पोर्ट्स ऑर्थोपेडिक सर्जन पीटर डी’हूघे की देखरेख में लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की गई। मुरली श्रीशंकर, जिनके नाम पहले लॉन्ग जंप का राष्ट्रीय रिकॉर्ड था (जिसे बाद में जेस्विन एल्ड्रिन ने तोड़ दिया), ने कहा कि वह आने वाले सीज़न के लिए तैयार रहेंगे।

श्रीशंकर ने बताया, “सर्जरी ज़रूरी थी ताकि मेरा टखना स्थिर रहे और आने वाले सीज़न के लिए तैयार हो सके। इसमें बीजिंग में होने वाली 2027 वर्ल्ड चैंपियनशिप और सबसे महत्वपूर्ण, 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक शामिल हैं।”

एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले इस भारतीय एथलीट को हाल के दिनों में चोटों के कारण काफी संघर्ष करना पड़ा है। घुटने की चोट के कारण वह पेरिस 2024 ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। लंबे ब्रेक के बाद 2025 में उन्होंने वापसी की और 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीते, लेकिन फिर उन्हें एक और झटका लगा।

लगातार हो रही चोटों के बारे में बात करते हुए, श्रीशंकर ने सकारात्मक नज़रिया अपनाते हुए आगे की ओर देखा।उन्होंने कहा, “आप में से कुछ लोग सोच रहे होंगे कि यह खिलाड़ी बार-बार चोटिल क्यों हो जाता है। सच कहूं तो, मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है। मैं इसके लिए गीले टेकऑफ़ बोर्ड या अपनी किस्मत को दोष दे सकता हूं, लेकिन इससे कोई मदद नहीं मिलेगी। इसके बजाय, जो हुआ है उसे स्वीकार करके, मैं खुद को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना जारी रखूंगा।” बास्केटबॉल के दिग्गज कोबे ब्रायंट के प्रशंसक श्रीशंकर ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “लेकिन एक बात मैं पक्के तौर पर जानता हूं कि मुझमें वापसी करने का एक खास जज़्बा और ‘म्म्बा मेंटालिटी’ है। यही चीज़ मुझे आगे बढ़ने में मदद करेगी।”

मुरली श्रीशंकर के टखने की हुई सर्जरी

जापान में एशियाई खेलों के दौरान चोटिल हुए भारतीय लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर के दाहिने टखने की सर्जरी हुई है। अब उनका पूरा ध्यान 2027 के एथलेटिक्स सीज़न में वापसी करने पर है।

27 वर्षीय भारतीय एथलीट ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए इस सर्जरी की पुष्टि की। श्रीशंकर ने लिखा मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि मुझे इन सब से गुजरना पड़े, लेकिन इस बार मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था। कल लंदन के फोर्टियस क्लिनिक में डॉ. पीटर डी’हूघे की देखरेख में मेरे टखने की एक छोटी सर्जरी हुई।

पिछले महीने आइची-नागोया में हुए एशियाई खेलों के दौरान, लॉन्ग जंप फाइनल में श्रीशंकर का टखना चोटिल हो गया था। बारिश से भीगे रनवे पर, अपने चौथे प्रयास के लिए तैयार होते समय वे टेक-ऑफ बोर्ड पर फिसल गए, जिससे उनके दाहिने टखने में मोच आ गई। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर इस घटना का एक वीडियो भी पोस्ट किया। इस चोट के कारण उन्हें अपने आखिरी दो जंप छोड़ने पड़े, लेकिन दूसरे राउंड में लगाई गई 8.07 मीटर की छलांग उन्हें सिल्वर मेडल दिलाने के लिए काफी रही।

शुरुआत में श्रीशंकर को लगा कि टखने की चोट गंभीर नहीं है और आराम तथा रिहैबिलिटेशन से ठीक हो जाएगी, लेकिन बाद में स्कैन और डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद सर्जरी की ज़रूरत पड़ी। मंगलवार को स्पोर्ट्स ऑर्थोपेडिक सर्जन पीटर डी’हूघे की देखरेख में लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की गई।

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मुरली श्रीशंकर, जिनके नाम पहले लॉन्ग जंप का राष्ट्रीय रिकॉर्ड था (जिसे बाद में जेस्विन एल्ड्रिन ने तोड़ दिया), ने कहा कि वह आने वाले सीज़न के लिए तैयार रहेंगे।

श्रीशंकर ने बताया सर्जरी ज़रूरी थी ताकि मेरा टखना स्थिर रहे और आने वाले सीज़न के लिए तैयार हो सके। इसमें बीजिंग में होने वाली 2027 वर्ल्ड चैंपियनशिप और सबसे महत्वपूर्ण, 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक शामिल हैं।

एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले इस भारतीय एथलीट को हाल के दिनों में चोटों के कारण काफी संघर्ष करना पड़ा है। घुटने की चोट के कारण वह पेरिस 2024 ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। लंबे ब्रेक के बाद 2025 में उन्होंने वापसी की और 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीते, लेकिन फिर उन्हें एक और झटका लगा। लगातार हो रही चोटों के बारे में बात करते हुए, श्रीशंकर ने सकारात्मक नज़रिया अपनाते हुए आगे की ओर देखा।

उन्होंने कहा आप में से कुछ लोग सोच रहे होंगे कि यह खिलाड़ी बार-बार चोटिल क्यों हो जाता है। सच कहूं तो, मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है। मैं इसके लिए गीले टेकऑफ़ बोर्ड या अपनी किस्मत को दोष दे सकता हूं, लेकिन इससे कोई मदद नहीं मिलेगी। इसके बजाय, जो हुआ है उसे स्वीकार करके, मैं खुद को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना जारी रखूंगा।

बास्केटबॉल के दिग्गज कोबे ब्रायंट के प्रशंसक श्रीशंकर ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा लेकिन एक बात मैं पक्के तौर पर जानता हूं कि मुझमें वापसी करने का एक खास जज़्बा और ‘म्म्बा मेंटालिटी’ है। यही चीज़ मुझे आगे बढ़ने में मदद करेगी।

Pic Credit : UNI

नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी, सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी का रिवाइज्ड लेआउट प्लान मंजूर

Noida Sports City: नोएडा के सेक्टर-150 में लंबे समय से चर्चा में रहे स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। नोएडा अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट-02 के संशोधित मास्टर लेआउट प्लान को मंजूरी दे दी है। अथॉरिटी ने इस फैसले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को हलफनामे के जरिए दी है। इस मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट के विकास से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, “नोएडा अथॉरिटी ने हलफनामा दाखिल किया है और संशोधित मास्टर लेआउट प्लान के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दी है। इस प्लान को 6 अप्रैल 2026 को अथॉरिटी की 222वीं बोर्ड बैठक में मंजूरी दी गई थी। इससे पहले आम लोगों की आपत्तियों पर विचार किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार पूरी की गई है। प्रोजेक्ट के डेवलपर, लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन्स ने 2 जनवरी, 2026 को तय फीस के साथ संशोधित मास्टर लेआउट प्लान जमा किया था। अथॉरिटी ने 6 अप्रैल को सैद्धांतिक मंजूरी दी और 6 मई, 2026 को औपचारिक मंजूरी पत्र जारी किया।”

अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, संशोधित योजना को मंजूरी देने से पहले, अथॉरिटी ने दो राष्ट्रीय अखबारों में आपत्तियां मंगाने के लिए नोटिस जारी किए और योजना को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया। उन्होंने कहा कि बाद में मिली आपत्तियों पर कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, संशोधित लेआउट में लगभग 300 एकड़ जमीन शामिल है और कुल क्षेत्र का 70% हिस्सा खेल सुविधाओं के लिए आरक्षित है।

अथॉरिटी ने यह भी बताया कि सेक्टर 150 में प्लॉट SC-02 के लिए बिल्डिंग प्लान को 9 जून को मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने कहा कि संशोधित लेआउट स्काईलाइन आर्किटेक्चरल कंसल्टेंट द्वारा तैयार किया गया था और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा इसकी जांच की गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी 02 में चार हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सशर्त ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किए हैं — जिन्हें ब्रिक राइज डेवलपर्स, ऐस इन्फ्रासिटी, लैंड कार्ट बिल्डर्स और समृद्धि इन्फ्रा स्क्वायर ने विकसित किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने, तीन और डेवलपर्स ने अपने स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए बदले हुए लेआउट प्लान जमा किए। लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स ने सेक्टर 150 के लिए, 3C ग्रीन डेवलपर्स ने सेक्टर 78-79 के लिए और ATS होम्स ने सेक्टर 152 के लिए प्लान जमा किए। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रस्तावों पर आगे कोई कदम उठाने से पहले अथॉरिटी ने जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान फैसला किया कि तीनों स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट मामलों की अलग-अलग सुनवाई की जाएगी, ताकि हर प्रोजेक्ट से जुड़े मुद्दों पर ध्यान से विचार किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इन तीनों मामलों में अगली सुनवाई क्रमशः 9 दिसंबर, 16 दिसंबर और 20 जनवरी को तय की गई है।

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी: 798 एकड़ के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान कैसे रुका

स्पोर्ट्स सिटी का कॉन्सेप्ट 2004 का है, जब नोएडा अथॉरिटी ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान बनाया था। अधिकारियों के मुताबिक, 2010-11 और 2015-16 के बीच चार स्कीम शुरू की गईं, जिनमें 32.3 लाख वर्ग मीटर (798 एकड़) जमीन शामिल थी और इसका 70% हिस्सा स्पोर्ट्स सुविधाओं के लिए तय किया गया था।

हालांकि, CAG की एक रिपोर्ट में गड़बड़ियों का जिक्र किया गया, जिसमें जरूरी मंजूरी के बिना अलॉटमेंट भी शामिल थे। 18 जनवरी 2021 को अथॉरिटी ने डेवलपमेंट से जुड़े काम रोक दिए, जिनमें मैप की मंजूरी और ऑक्यूपेंसी से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल थीं। बाद में, CAG रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के सामने रखी गई, जिसने 29 अगस्त 2024 को स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी CAG की टिप्पणियों का निपटारा कर दिया।

इसके बाद 24 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी को 30-45 दिनों के अंदर बैन हटाने का निर्देश दिया। हालांकि, इस मामले पर जवाब देने के लिए लोटस ग्रीन्स उपलब्ध नहीं था।

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Asian Games में इन 3 मुक्केबाजों ने किए मेडल पक्के, खोलेंगे खाता

भारत के सचिन सिवाच पुरुष 60 किग्रा क्वार्टरफाइनल में जापान के विश्व कांस्य पदक विजेता शुनसुके कितामोटो से 0-5 से हारकर बाहर हो गए जबकि परवीन हुड्डा,अंकुश पंघाल और नरेंद्र बेरवाल ने सेमीफाइनल में पहुंचकर देश के लिए तीन पदक पक्के कर दिए हैं।

परवीन ने रविवार को एशियाई खेलों में महिलाओं के 65 किग्रा भार वर्ग की स्पर्धा के क्वार्टरफाइनल में उज्बेकिस्तान की नवबखोर खमिदोवा को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली है जबकि नरेंद्र बेरवाल ने पुरुष 90 किग्रा क्वार्टरफाइनल में थाईलैंड के अदथापोंग सेंगतेप को रेफरी स्टॉपेज के जरिए पहले राउंड में हराकर अपना पदक पक्का कर लिया।

आज परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल में नवबखोर खमिदोवा पर शानदार 5-0 से जीत हासिल करके एशियन गेम्स में अपनी पिछली निराशा को पीछे छोड़ कर अपना पदक पक्का कर लिया। डोपिंग उल्लंघन के कारण परवीन का 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स का कांस्य पदक छीन लिया गया था, लेकिन उन्होंने एक बार फिर अपने लिए पदक हासिल कर लिया है। खमिदोवा की एकमात्र उम्मीद इस मुक़ाबले को ज़बरदस्त टक्कर वाले मुक़ाबले में बदलने की थी और वह तेज़ी से आगे बढ़ीं, लेकिन परवीन ने एक बार फिर दूरी बनाए रखी और फिर तेजी से हमला करते हुए कुछ बॉडी शॉट्स और चेहरे पर जैब्स मारे, और फिर पीछे हट गईं।

उज्बेकिस्तान की मुक्केबाज ने अपनी रणनीति बदली और कुछ काउंटर-पंच मारने के लिए पीछे रहीं, लेकिन जब परवीन ने खुद हमला किया तो उनकी स्पीड और पहुंच उनके काम आई और उन्होंने आसानी से कुछ हिट्स किए। अंत में काफ़ी हलचल रही, लेकिन परवीन ने मेडल जीतने के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और परवीन 5-0 से जीतीं और सेमीफाइनल में पहुँच गईं।

फाइनल में पहुंचना परवीन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि संभावना है कि उनका मुकाबला चीन की ली शू से होगा जिन्होंने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन कजाकिस्तान की आइदा अबिकेयेवा को क्वार्टरफाइनल में हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया है और अब सेमीफाइनल में परवीन से भिड़ेंगी।

इससे पहले वहीं शानदार फॉर्म में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर एशियाई खेलों में भारत के लिए पहला बॉक्सिंग मेडल पक्का कर लिया। एशियाई खेलों में अपना पहला मुकाबला खेल रहे हरियाणा के 21 वर्षीय बॉक्सर ने क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के नेक्रुज़ सलीमोव को 5-0 से हराकर परिपक्व और नियंत्रित खेल दिखाया।अंकुश ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी; उन्होंने तेज़ फुटवर्क के साथ सटीक सीधे पंच और सही समय पर काउंटर-पंच का इस्तेमाल किया। उन्होंने मुकाबले की दूरी को अपने हिसाब से तय किया और सलीमोव को अपनी लय में नहीं आने दिया।

पहले दो राउंड में स्पष्ट बढ़त बनाने के बाद, अंकुश ने आखिरी राउंड में भी शानदार संयम दिखाया। जल्दबाजी में उलझने के बजाय, उन्होंने समझदारी से मुकाबला खेला, अपने प्रतिद्वंद्वी को दूर रखा और अपनी बढ़त को बचाए रखते हुए सर्वसम्मत निर्णय से जीत हासिल की। इस जीत से अंकुश का कम से कम कांस्य पदक पक्का हो गया है और इससे आइची-नागोया में भारत के बॉक्सिंग अभियान को शुरुआती बढ़त मिली है।

यह युवा बॉक्सर के लिए हाल के शानदार सफर में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अंकुश 80 किग्रा वर्ग में कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीतकर जापान पहुंचे थे और अब उन्होंने उसी आत्मविश्वास को एशियाई मंच पर भी बरकरार रखा है। उन्होंने राउंड ऑफ़ 16 में बहरीन के हम्सा वोगेल पर 5-0 की शानदार जीत के साथ एशियाई खेलों में अपने अभियान की शुरुआत की थी। प्रतियोगिता में दो मुकाबले खेलने के बाद भी अंकुश ने अभी तक एक भी राउंड नहीं गंवाया है, जो उनके अभियान में निरंतरता और नियंत्रण को दर्शाता है।

नरेंद्र बेरवाल ने पुरुष 90 किग्रा क्वार्टरफाइनल में थाईलैंड के अदथापोंग सेंगतेप को रेफरी स्टॉपेज के जरिए पहले राउंड में हराकर अपना पदक पक्का कर लिया। नरेंद्र ने शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। अदथापोंग को दो बार स्टैंडिंग काउंट मिला और तीसरी बार काउंट मिलने के बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। मुकाबला दो मिनट से भी कम समय में खत्म हो गया। इसके साथ ही नरेंद्र, अंकुश पंघाल और परवीन हुड्डा के साथ भारत के लिए दिन का तीसरा बॉक्सिंग पदक पक्का करने वाले मुक्केबाज बन गए।

सर्वाधिक हॉकी मैच खेलने वाली पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनी गोलकीपर सविता

Savita Punia

गोलकीपर सविता पूनिया सोमवार को भारत की सबसे अधिक मैच खेलने वाली महिला हॉकी खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने भारत की पूर्व स्ट्राइकर वंदना कटारिया के 320 सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सविता पूनिया ने यह उपलब्धि जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में इंडोनेशिया के खिलाफ भारत के पूल बी मैच के दौरान हासिल की।

ओपन प्ले में शॉट रोकने की अपनी काबिलियत और पेनल्टी शूट-आउट में शानदार रिकॉर्ड के कारण हॉकी की दुनिया में ‘द वॉल ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर 36 वर्षीय सविता ने 2009 में अपना सीनियर अंतरराष्ट्रीय में पर्दापण किया था।

तब से, वह तीन ओलंपिक, दो एशियन गेम्स कैंपेन, कॉमनवेल्थ गेम्स और कई एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग सीजन में लगातार खेलती रही हैं। मौजूदा कप्तान सलीमा टेटे के कप्तानी संभालने से पहले वह लंबे समय तक भारतीय महिला टीम की कप्तान भी रही थीं।

सविता ने फरवरी 2025 में एफआईएच प्रो लीग में नीदरलैंड के खिलाफ अपना 300वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। वह यह आंकड़ा पार करने वाली दूसरी भारतीय महिला और अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पीआर श्रीजेश के बाद देश की दूसरी गोलकीपर बनीं। उन्होंने रविवार को एशियन गेम्स 2026 के पहले मैच में उज्बेकस्तान के खिलाफ भारत की 19-0 की शानदार जीत के दौरान वंदना के 320 मैचों के रिकॉर्ड की बराबरी की और सोमवार को उसे पीछे छोड़ दिया।

सविता ने कहा, “मैं सबसे पहले धन्यवाद कहना चाहती हूं – अपने परिवार, अपने कोच, अपनी टीम की साथियों और हर उस व्यक्ति का, जो तब से मेरे साथ खड़ा रहा है जब मैं एक छोटी लड़की थी और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर बचाना सीख रही थी।

सच कहूं तो, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुंचूंगी। जब मैंने शुरुआत की थी, तो मैं बस टीम में अपनी जगह बनाना चाहती थी और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सबसे ज़्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ी कहा जाएगा। यह रिकॉर्ड केवल मेरा नहीं है – यह उन सभी का है जिन्होंने मेरे साथ खेला है, और वंदना का भी, क्योंकि उन्होंने एक स्टैंडर्ड सेट किया और हम सभी को और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।”

उन्होंने कहा, “अब मेरी सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि नई पीढ़ी इसे देखे और विश्वास करे कि उनके लिए भी यह मुमकिन है। मैं चाहती हूँ कि वे आगे बढ़ती रहें, मेहनत करती रहें और भारतीय हॉकी के लिए बड़े सपने देखती रहें। इस खेल ने मुझे सब कुछ दिया है, और जब तक मैं कर सकती हूँ, मैं इसके लिए अपना योगदान देती रहूंगी।

Asian Games 2026: सुचिका तारियाल ने रचा इतिहास, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में भारत को दिलाया पहला मेडल!

एशियन गेम्स में सुचिका तारियाल ने भारत के लिए एक बड़ी जीत हासिल की है। 36 साल की सुचिका ने महिलाओं के ट्रेडिशनल MMA 60 किलो वर्ग में कांस्य पदक जीता है। इसके साथ ही वह एशियन गेम्स में MMA में भारत के लिए मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं। MMA से पहले वह जूडो और जिउ-जित्सु में भी भारत को रिप्रेजेंट कर चुकी हैं।

क्वार्टर फाइनल में मिली शानदार जीत

सोमवार, 21 सितंबर को आइची-नागोया में हुए मैच में सुचिका ने क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराया। इस जीत के बाद उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बनाई। यहां उनका मुकाबला सिंगापुर की टेओ हुई हून से हुआ, जिसमें सुचिका को 3-0 से हार मिली। लेकिन सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक दिया जाता है।

जूडो से शुरू हुआ खेल का सफर

सुचिका ने सिर्फ 12 साल की उम्र में जूडो खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने इस खेल में खूब मेहनत की और आठ बार नेशनल चैंपियन बनीं। इसके अलावा 2019 कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप और 2019 साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने महिलाओं के 57 किलो वर्ग में भारत को रिप्रेजेंट किया।

इस तरह कॉम्बैट स्पोर्ट्स में बनाया अपना नाम

  • जिउ-जित्सु में मिली सफलता: जूडो के बाद सुचिका ने जिउ-जित्सु में भी हाथ आजमाया। 2024 जिउ-जित्सु वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं की 63 किलो कॉन्टैक्ट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता।
  • MMA में शुरुआत: सुचिका ने 2017 में पहली बार MMA में कदम रखा था। लेकिन इसके बाद वह करीब सात साल तक इस खेल से दूर रहीं।
  • 2024 में फिर की वापसी: लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने 2024 में MMA में वापसी की। बहरीन में वापसी में उन्होंने मैच जीतकर अच्छी शुरुआत की।
  • BRAVE से जुड़ीं: MMA में वापसी के बाद सुचिका ने BRAVE Combat Federation के साथ कॉन्ट्रैक्ट भी साइन किया।

पहले भी खेल चुकी हैं एशियन गेम्स

  • 2023 में पार्टिसिपेट किया: सुचिका ने 2023 के हांग्जो एशियन गेम्स में भारत को रिप्रेजेंट किया था। उस समय उन्होंने कुराश में हिस्सा लिया था।
  • टारगेट ग्रुप से जुड़ी: आइची-नागोया एशियन गेम्स की तैयारी के लिए उन्हें खेल मंत्रालय के टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप में शामिल किया गया।
  • 2026 में भी जीता मेडल: एशियन गेम्स से पहले 2026 की शुरुआत में सुचिका ने एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था।
  • टीवी शो में भी आईं नजर: खेल के अलावा सुचिका MTV Roadies और India’s Ultimate Warrior जैसे टीवी रियलिटी शो में काम कर चुकी हैं।

सुचिका तारियाल की जीत भारतीय खेलों में नया मुकाम बनाती है। जिस तरह कॉम्बैट स्पोर्ट्स में महिला खिलाड़ी लगातार अपनी जगह बना रही हैं, उससे आने वाली जनरेशन को भी इससे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है। सुचिका की जीत इसी बदलती तस्वीर की एक खास मिसाल है।

पहली बार एशियन गेम्स में दिख रहा इन खिलाड़ियों का दम, पहले ही बना चुके हैं खास पहचान!

जापान के आइची-नगोया में 19 सितंबर से शुरू हुए 2026 एशियन गेम्स में भारत कई खिलाड़ी हिस्सा ले रहे है। इस बार कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ऐसे युवा चेहरे भी मैदान में उतर चुके हैं, जो पहली बार एशियन गेम्स में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। जिसमे कई दिग्गज खिलाडियों के नाम शामिल हैं। जिनने अपने-अपने खेल में पहले ही कई अहम मुकाबलों में पहचान बनाई है और अब एशियन गेम्स में उनका प्रदर्शन देखने लायक होगा।

1. साक्षी चौधरी पर रहेंगी नजरें

  • उम्र: साक्षी चौधरी 26 साल की हैं और एशियन गेम्स में पहली बार हिस्सा लेंगी।
  • अचीवमेंट: उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
  • वर्ल्ड बॉक्सिंग कप: उन्होंने 54 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।
  • एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप: 2021 में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। एशियन गेम्स में उनका डेब्यू उनके करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

2. सुरुचि फोगाट का शूटिंग में जलवा

  • उम्र: सुरुचि फोगाट सिर्फ 20 साल की हैं और कम उम्र में शूटिंग में पहचान बना चुकी हैं।
  • इवेंट: वह 10 मीटर एयर पिस्टल में हिस्सा लेती हैं।
  • वर्ल्ड कप: उन्होंने वर्ल्ड कप में कई गोल्ड मेडल जीते हैं और वर्ल्ड कप फाइनल का खिताब भी अपने नाम किया है।
  • बड़ी जीत: पिछले साल लीमा में उन्होंने ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। एशियन गेम्स में यह उनका पहला मौका होगा।

3. सुजीत कलकल की कुश्ती पर नजर

  • उम्र: हरियाणा के 23 साल के फ्रीस्टाइल पहलवान सुजीत कलकल एशियन गेम्स में डेब्यू करेंगे।
  • वेट कैटेगरी: वह 65 किग्रा वर्ग में मुकाबला करते हैं।
  • एशियन चैंपियनशिप: उन्होंने इस वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
  • अंडर-23 अचीवमेंट: अंडर-23 लेवल पर भी उनके नाम गोल्ड मेडल रहा है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद अब उन्हें सीनियर लेवल पर बड़े स्टेज का एक्सपीरियंस मिलेगा।

4. आयुष शेट्टी का बैडमिंटन मुकाबला

  • उम्र: आयुष शेट्टी 21 साल के हैं और एशियन गेम्स में पहली बार खेलेंगे।
  • थॉमस कप: उन्होंने यहां ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
  • एशियन चैंपियनशिप: उनके नाम सिल्वर मेडल भी रहा है।
  • बड़ी जीत: वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने उस समय के वर्ल्ड नंबर-1 शी युकी को हराया था। एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने कुनलावुत वितिदसर्न और जोनाथन क्रिस्टी के खिलाफ भी जीत दर्ज की है।

5. रोहित यादव की जैवलिन में चुनौती

  • टीम: रोहित यादव नीरज चोपड़ा के साथ भारतीय जैवलिन टीम में शामिल हैं।
  • एशियन गेम्स: जापान में होने वाले एशियन गेम्स में वह पहली बार हिस्सा लेंगे।
  • सीजन परफॉरमेंस: इस सीजन में वह 87 मीटर से ज्यादा के दो थ्रो कर चुके हैं।
  • मेजर अचीवमेंट: अगस्त में भुवनेश्वर में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर लेवल मीट में उन्होंने 87.68 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता था। अब उनका मुकाबला एशिया के मजबूत जैवलिन खिलाड़ियों से होगा।

एशियन गेम्स इन युवा खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक नई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय करियर में आगे बढ़ने का बड़ा मंच भी है। अब उनके डेब्यू को लेकर खेल प्रेमियों की नजरें इन पांचों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी।

भारत की सुचिका तरियाल ने एमएमए में जीता ऐतिहासिक कांस्य पदक

भारत की सुचिका तरियाल ने सोमवार को एशियाई खेल 2026 में महिलाओं की पारंपरिक 60 किलोग्राम भार वर्ग की मिश्रित मार्शल आर्ट्स (एमएमए) में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता। इस के साथ वही इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली भारतीय बन गई। आज यहां 36 साल की भारतीय फाइटर को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में हुए कड़े सेमी-फ़ाइनल मुकाबले में सिंगापुर की टेओ हुई हून से 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस मुकाबले का फैसला करने के लिए एक अतिरिक्त मिनट का समय लेना पड़ा था।

एमएमए में सेमीफाइनल हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को पदक मिलता है, क्योंकि एशियाई खेलों में कांस्य पदक के लिए अलग से कोई प्लेऑफ नहीं होता है।

सुचिका तरियाल ने रविवार को क्वार्टर-फ़ाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर अपना पदक पक्का कर लिया था।

हरियाणा के रोहतक की रहने वाली अनुभवी कॉम्बैट-स्पोर्ट एथलीट सुचिका ने जू-जित्सु और एमएमए में आने से पहले जूडो में अपनी पहचान बनाई थी। वह आठ बार की नेशनल जूडो चैंपियन हैं और उन्होंने 2019 कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। सुचिका ने बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में महिलाओं के 57किग्रा जूडो प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया था। सुचिका ने 2017 में एमएमए में पर्दापण किया था, जिसके बाद उन्होंने इस खेल से सात साल का ब्रेक लिया, लेकिन जूडो और जू-जित्सु में हिस्सा लेती रहीं और 2024 में प्रोफेशनल एमएमए में वापसी की।

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वह इस साल की शुरुआत में एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर एशियन गेम्स में पहुंची थीं।

आइची-नागोया 2026 में एमएमए में भारत के दो खिलाड़ी शामिल थे।

पुरुषों की पारंपरिक 77 किग्रा स्पर्धा में शामिल वरुण सान्याल को क्वार्टर-फ़ाइनल मुकाबले से पहले मेडिकली अनफ़िट घोषित कर दिया गया, जिससे बिना खेले ही उनका सफर खत्म हो गया। वज़न कम करने की कोशिश के दौरान सान्याल को चक्कर आना, सिर घूमना, मांसपेशियों में ऐंठन और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। वज़न कम करने की कोशिश के तहत खाना-पीना कम करने के दौरान, सॉना लेने के लगभग 30 मिनट बाद उन्हें ये लक्षण महसूस हुए। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें अनफिट घोषित कर दिया और वे अपनी तय फाइट में हिस्सा नहीं ले पाए।

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Asian Games के लिए भारत ने 503 खिलाड़ियों पर खर्चे 702 करोड़ रुपए

जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में भारत का 503 सदस्यीय दल हिस्सा लेगा। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जानकारी दी कि मंत्रालय ने एशियाड दल और उनके कोच तथा इक्विपमेंट के लिए 702 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए आयोजित विदाई समारोह में दबाव को अच्छे प्रदर्शन में बदलने, प्रतिद्वंद्वियों को अवसर के रूप में देखने और अवसरों को उपलब्धियों में बदलने का खिलाड़ियों से आग्रह किया।

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल जापान में कई तरह के खेलों में हिस्सा लेगा। 503 सदस्यों वाले इस दल में एथलीट और सपोर्ट स्टाफ़ शामिल हैं, जिनमें से 300 से ज़्यादा एथलीट पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगे, जो भारतीय खेलों की बढ़ती गहराई और बेंच स्ट्रेंथ को दिखाता है।

उन्होंने कहा, “503 सदस्यों वाला हमारा दल एशियाई खेलों के लिए जा रहा है, और मुझे विश्वास है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हमारे 503 खिलाड़ियों में से 300 से अधिक खिलाड़ी पहली बार हिस्सा ले रहे हैं, इसलिए बहुत सारी नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।” ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा, “हमने ओपन ट्रायल के ज़रिए पारदर्शी और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित किया है, जिसमें स्वतंत्र ऑब्ज़र्वर और कैमरे से निगरानी की व्यवस्था है। पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 13 गोल्ड मेडल जीते थे; इस बार हमारा प्रदर्शन 35 प्रतिशत से ज़्यादा बेहतर हुआ है। मैं हमारे सभी एथलीटों और सपोर्ट स्टाफ़ को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ।”

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 2036 है – जब हम ओलंपिक्स की मेज़बानी करेंगे, तब तक हमें ग्लोबल स्टेज पर मज़बूती से स्थापित होना होगा। यह 10 साल का प्लान है, जिसमें स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि आवंटित की गई है।”

टेबल टेनिस में मनिका नहीं यह भारतीय खिलाड़ी करेगी महिला टीम की अगुवाई

श्रीजा अकुला और जी. साथियान जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 में भारतीय टेबल टेनिस की 10 सदस्यीय टीम की अगुवाई करेंगे। मनिका बत्रा को रिजर्व खिलाड़ियों में शामिल है।

टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTIFI) ने एशियाई खेलों 2026 के लिए रिजर्व खिलाड़ियों की सूची जारी की, जिसमें पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन मनिका बत्रा का नाम शामिल था। ओलंपियन श्रीजा अकुला और साथियान ज्ञानसेकरन आइची-नागोया 2026 में भारत की 10 सदस्यीय टेबल टेनिस टीम की अगुवाई करेंगे।

भारत ने पुरुष और महिला टीमों में पांच-पांच खिलाड़ियों को शामिल किया है, साथ ही दोनों कैटेगरी में दो-दो रिज़र्व खिलाड़ी भी चुने हैं। यह टीम फेडरेशन की सिलेक्शन पॉलिसी के आधार पर चुनी गई है। इस पॉलिसी में नेशनल रैंकिंग को 50 प्रतिशत, वर्ल्ड रैंकिंग को 40 प्रतिशत और सिलेक्शन कमेटी के फ़ैसले को 10 प्रतिशत महत्व दिया जाता है।

भारत की सबसे कामयाब टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक, 31 वर्षीय मनिका बत्रा मुख्य टीम में जगह नहीं बना पाईं और उन्हें रिजर्व खिलाड़ियों में रखा गया। मुख्य टीम में उनके शामिल न होने की वजह घरेलू टूर्नामेंट में उनकी गैर-मौजूदगी थी।

महिला टीम की कप्तानी श्रीजा अकुला करेंगी, जो वर्ल्ड रैंकिंग में 45वें स्थान पर हैं और भारत की सबसे ऊंची रैंकिंग वाली महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं – वह मनिका से छह स्थान आगे हैं। यशस्वी घोरपड़े, दिया चितले, सुतीर्था मुखर्जी और युवा खिलाड़ी सिंड्रेला दास ने भी टीम में जगह बनाई है।पुरुष टीम की अगुवाई अनुभवी जी. साथियान करेंगे, और उनके साथ हरमीत देसाई, मानव ठक्कर, मानुष शाह और पायस जैन भी टीम का हिस्सा होंगे।