वतन वापसी पर कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट का हुआ देश में जोरदार स्वागत (Video)

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राष्ट्रमंडल खेल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीट्स की वतन वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। गौरतलब है कि भारत ने इन खेलों में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया जब कई वैश्विक खेल जिनमें भारत दर्जन भर मेडल लाता था इन खेलों से नदारद थे। इस बार हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती नहीं शामिल हुए थे।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। परिजन और समर्थक खिलाड़ियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्साहित नजर आए।भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए, जिसके दम पर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा।

खिलाड़ी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जैसे ही हवाई अड्डे के टर्मिनल से बाहर निकले, ढोल-नगाड़ों की गूंज और देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। परिजनों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौजूद थे।

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह और अस्मिता डे मंगलवार तड़के हवाई अड्डे से बाहर निकलने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनका भी यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हर्ष ने कहा, ‘‘ मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बेहद अच्छा लग रहा है।’’ उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक अस्मिता डे ने कहा, ‘‘मुझे जीवन में पहली बार ऐसा स्वागत मिल रहा है और मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास है।’’

खेल मंत्रालय ने दिए नकद पुरुस्कार

खेल मंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल जीतने वालों को 30 लाख रुपये, सिल्वर मेडल जीतने वालों को 20 लाख रुपये और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वालों को 10 लाख रुपये का नकद इनाम दिया। इन खेलों में भारतीय वेटलिफ्टरों ने देश का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया।

खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पूरे देश ने उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “संसद में भी, हर बार जब आपने मेडल जीते, तो घोषणाएं की गईं। उन पलों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया।”

खेल मंत्री ने कोचों, जिनमें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता विजय शर्मा भी शामिल थे की जमकर तारीफ की और चैंपियन बनाने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी के सफर में गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है। चैंपियन बनाने में कोच के योगदान से बड़ी कोई चीज नहीं है।”

CWG 2026: पीरियड्स के दर्द को हराकर जीता मेडल, घर लौटने के बाद ज्ञानेश्वरी ने बताया कैसा था वो पल

CWG 2026: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव का शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में मेडल जीता है। वहीं मुकाबले के दिन ज्ञानेश्वरी यादव पीरियड्स के दर्द से परेशान थीं। पीरियड्स के पहले दिन असहनीय दर्द के बाद भी ज्ञानेश्वरी ने अपना ध्यान लक्ष्य से नहीं हटने दिया।उन्होंने कहा कि पूरे मुकाबले के दौरान वह खुद को लगातार फोकस बनाए रखने के लिए प्रेरित करती रहीं और आखिरकार ग्लासगो में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहीं। वहीं अब उनका अगला लक्ष्य सितंबर महीने में होने वाले एशियन गेम्स है।  हाल ही में ज्ञानेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पीरियड्स के दर्द के दौरान कैसे गेम पर फोकस बनाए रखा

पीरियड्स के दौरान भी की थी ट्रेनिंग

पीटीआई से बातचीत में ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया, “मैंने पहले भी पीरियड्स के दौरान ट्रेनिंग की थी, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि पीरियड्स के पहले दिन ही मुझे कॉम्पिटिशन में उतरना पड़ा। उस समय मैं खुद से बार-बार कह रही थी कि ध्यान मत भटकने देना। मेरे परिवार और कोच ने भी लगातार मेरा हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि सब ठीक होगा।” उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मुकाबले में शांत रहकर प्रदर्शन किया और पहली लिफ्ट सफल होने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।

ज्ञानेश्वरी ने कहा, “मैंने खुद से कहा कि मेरे लक्ष्य के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं है। इसी सोच ने मुझे अपनी सभी लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी करने की ताकत दी।”

माता-पिता ने दिया साथ

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, परिवार, कोच और राजनांदगांव के लोगों के सहयोग को दिया। ज्ञानेश्वरी ने कहा, “हर सफलता के पीछे लंबा संघर्ष होता है। मेरे माता-पिता ने भी मेरे साथ हर मुश्किल का सामना किया। आज भी मुझे याद है कि मेरे पिताजी रोज साइकिल से मुझे जिम लेकर जाते थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह खुद नेशनल या इंटरनेशनल लेवल तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते थे कि मैं उनका सपना पूरा करूं और देश का नाम रोशन करूं।”

छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया 30 लाख का इनाम

ज्ञानेश्वरी यादव की शानदार उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने उनके लिए 30 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्हें पुलिस विभाग में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के पद पर विशेष प्रमोशन देने को भी मंजूरी दे दी गई।

19 साल की यह साइकलिस्ट बनी ‘Tour De France fame’ में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय

उन्नीस साल की हर्षिता जाखड़ ने रविवार दोपहर स्विट्जरलैंड के एग्ल में ‘Tour De France fame’  का हिस्सा बनने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने इस मुश्किल रेस के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत के दौरान अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया (दो राइडर्स), नामीबिया और युगांडा के आठ प्रतिभाशाली साइक्लिस्टों के ग्रुप का नेतृत्व किया।

यह रेस 1 अगस्त को लॉज़ेन में शुरू हुई थी और 9 अगस्त को नीस में खत्म होगी। UCI Union Cyclist International: World Cycling Federation  की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, UCI द्वारा चुनी गई इस टीम को शायद अब तक की सबसे बड़ी दर्शक संख्या देखने को मिली, जब उन्होंने WCC रोड टीम के कुछ राइडर्स के साथ कोर्स के एक न्यूट्रलाइज़्ड सेक्शन (जहाँ रेस की गति नियंत्रित रहती है) पर 4.5 किलोमीटर तक साइकिल चलाई।

यूसीआई के अध्यक्ष डेविड लैपार्टिएंट स्टेज से पहले स्टार्ट पोडियम पर राइडर्स के साथ शामिल हुए और एक भारतीय को उनके बीच देखकर खुशी जताई। “हम अपने प्रतिष्ठित यूसीआई वर्ल्ड साइक्लिंग टैलेंट प्रोग्राम में भारत की बेहद प्रतिभाशाली हर्षिता जाखड़ को पाकर उत्साहित हैं। मुझे यकीन है कि उन्हें ‘Tour De France fame’ का हिस्सा बनकर अच्छा लगेगा और वह जल्द ही असल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वापस आएंगी।”

प्रोफेशनल पेलेटन (मुख्य राइडर्स का समूह) से आगे शुरू करने वाले इन राइडर्स को अलग-अलग नेशनल फेडरेशन्स से चुना जाता है, जिनके पास अपना कोई हाई-परफॉर्मेंस पाथवे नहीं है और जिन्हें यूरोपियन कोचिंग, ट्रेनिंग सुविधाओं और रेसिंग तक पहुंच नहीं मिलती है।

हर्षिता जाखड़ ने UCI से कहा, “मैं यहां आकर, ‘Tour De France’ को देखकर और उसका हिस्सा बनकर बहुत उत्साहित हूं। मैं यूसीआई की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे महिलाओं की रेस के दूसरे चरण की शुरुआत में अन्य प्रतिभाशाली साइक्लिस्टों के साथ साइकिल चलाने का यह मौका दिया।” राजस्थान की रहने वाली हर्षिता भारतीय साइक्लिंग सर्किट में धूम मचा रही हैं; उन्होंने जूनियर्स के लिए उपलब्ध लगभग सभी मेडल जीते हैं और सीनियर्स कैटेगरी में भी लगातार जीत हासिल कर रही हैं। उनका लक्ष्य 2026 के एशियाई खेलों में टॉप 10 में जगह बनाना और 2030 के खेलों में मेडल जीतना है।

‘Target Asian Games Group’ की एथलीट होने के नाते, वह पटियाला में साई नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में अपने पिता और कोच राकेश जाखड़ के साथ ट्रेनिंग करती हैं। राकेश जाखड़ खुद एक पूर्व साइक्लिस्ट हैं, जिन्होंने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था और वह एनआईएस पटियाला से क्वालिफाइड कोच हैं।

अगला मेजबान होने के कारण भारत को मिला कॉमनवेल्थ ध्वज और मशाल (Video)

राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारत देश को अब खेलों की मशाल भी मिल गई क्योंकि अगला  राष्ट्रमंडल खेल भारत के अहमदाबाद में होने वाला है। भारत की ओर से नीरज चोपड़ा ने इस मशाल और ध्वज को थामा। इससे पहले संगीत और नृत्य के ताने बाने में तैयार किये गए अद्भुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में रखी जहां परंपरा और आधुनिकता साथ में बसते हैं।

किंग चार्ल्स तृतीय के प्रतिनिधि प्रिंस एडवर्ड (ड्यूक आफ एडिनबर्ग) ने खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की।उन्होंने कहा ,‘‘ जिस तरह से आपने प्रतिस्पर्धा की, खेलों का आयोजन किया और समर्थन किया , उसके लिये धन्यवाद। आपने आज एक बार फिर राष्ट्रमंडल की भावना और मूल्यों को जीवंत कर दिया। शुक्रिया ग्लास्गो। ’’उन्होंने कहा ,‘‘ मैं सभी देशों और प्रदेशों के खिलाड़ियों को भारत के अहमदाबाद आने का न्योता देता हूं जहां चार साल बाद 24वें राष्ट्रमंडल खेल होंगे जो इन खेलों का शताब्दी संस्करण भी है।’

बॉक्सिंग में भारत की स्वर्ण पदक विजेता महिलाओं की 57 किग्रा बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली जैस्मिन लैंबोरिया को  समापन समारोह के लिए भारत का ध्वजवाहक चुना गया था।भारत कुल 39 पदक -13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य – के साथ मेडल स्टैंडिंग में चौथे स्थान पर काबिज है। इन गेम्स में खेलों की संख्या कम होने के बावजूद यह एक बड़ी उपलब्धि है।

मुकाबले खत्म होने के बाद ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स आधिकारिक तौर पर समापन समारोह के साथ समाप्त हो गया जो 3 अगस्त को तड़के 1:30 बजे (भारतीय समयानुसार) प्रसारित किया गया।

Lovlina Borgohain ने ग्लास्गो के रेस्टोरेंट में पकड़ी बड़ी गलती, भारत के नक्शे पर जताई आपत्ति

Lovlina Borgohain

ग्लासगो के रेस्टोरेंट में भारत के नक्शे से नॉर्थ ईस्ट का हिस्सा गायब, बॉक्सर लवलीना ने जताई नाराजगी

स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 पदक अपने नाम किए। भारत ने स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल किया है। जीत का जश्न मनाने एक रेस्टोरेंट पहुंची मुक्केबाजों की टीम उस समय हैरान रह गई जब उन्हें मिले नैपकिन से पूर्वोत्तर गायब मिला। जम्मू कश्मीर को भी गलत तरीके से दिखाया गया था।

 

रेस्टोरेंट में शनिवार को डिनर के दौरान रजत पदक विजेता बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने बड़ी गलती पकड़ी। उन्होंने भारतीय रेस्टोरेंट में डिनर के दौरान मिले नैपकिन पर बने भारत के नक्शे से नॉर्थ-ईस्ट को गायब करने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। उनके साथ भारतीय दल के अधिकारी भी थे। लवलीना बोरगोहेन की इस आपत्ति को वहां के लोगों ने गंभीरता से लिया। 

ग्लासगो के पॉपुलर भारतीय रेस्टोरेंट मिस्टर सिंग्स इंडिया में भारतीय मुक्केबाजों का दल यहां डिनर के लिए पहुंचा था। टेबल पर रखी नैपकिन पर नजर पड़ते ही खुशियों का माहौल अचानक गर्मा गया। स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने ध्यान दिया कि रेस्टोरेंट के नैपकिन पर भारत का जो नक्शा छपा था, उसमें से नॉर्थ ईस्ट इंडिया का पूरा हिस्सा गायब था। इस गंभीर लापरवाही पर लवलीना ने तुरंत अपनी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट के नैपकिन पर छपे नक्शे से हमारा नॉर्थ ईस्ट इंडिया गायब है। भारत का हर एक हिस्सा बेहद अहम है और हर जगह देश का सही और पूरा नक्शा ही दिखाया जाना चाहिए।

 

BFI अध्यक्ष ने भी किया लवलीना का समर्थन

उनकी आपत्ति का बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने भी तत्काल समर्थन किया। अजय सिंह ने न केवल उत्तर-पूर्व के बारे में बोरगोहेन की बात का समर्थन किया, बल्कि उसी नक्शे में जम्मू-कश्मीर को गलत तरीके से दिखाए जाने की ओर भी इशारा किया।

 

उन्होंने बताया कि इस नक्शे में सिर्फ नार्थ ईस्ट इंडिया ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर को भी सही तरीके से नहीं दिखाया गया था। अजय सिंह ने रेस्टोरेंट प्रबंधन से इन सभी नैपकिन को तुरंत हटाने और सही नक्शे का इस्तेमाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देने वाले किसी भी स्थान पर ऐसी बड़ी गलतियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। ग्लासगो में मेहमाननवाजी के लिए मशहूर 'मिस्टर सिंह्स इंडिया' रेस्टोरेंट ने इस भौगोलिक गलती को सुधारने पर तत्काल ही ध्यान दिया और शीघ्र ही इसको दुरुस्त किया जाएगा।

CWG 2026: ‘न फंड मिला, न विदेशी कोच…’ पाकिस्तान ने छोड़ा ओलंपिक मेडल विनर अरशद नदीम का साथ! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नदीम शीर्ष आठ खिलाड़ियों में भी जगह बनाने में सफल नहीं हुए और नौवें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं ओलंपिक विनर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके खेल और तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मुताबिक, अरशद नदीम के खराब प्रदर्शन की वजह सिर्फ उनका फॉर्म ही नहीं, बल्कि तैयारी के दौरान आई दिक्कतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खेल अधिकारियों ने उन्हें जरूरी सुविधाएं और पूरा सहयोग नहीं दिया, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हुई।

पाकिस्तान ने नहीं दी कोई मदद

रिपोर्टों के अनुसार, वह पूरी तरह फिट नहीं थे और उनकी तैयारियां भी प्रभावित रहीं। PTI की एक रिपोर्ट में, एथलीट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि, पिछले साल लंबे समय से अरशद नदीम के कोच रहे सलमान बट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे दूरी बना ली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद फेडरेशन ने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को अपनी तैयारियां खुद संभालने के लिए छोड़ दिया और उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई मांगों पर भी कोई जवाब नहीं दिया।

नहीं जारी किए फंड

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर रखने के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए। इसके चलते अरशद नदीम को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही प्रैक्टिस करना पड़ा। बताया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार उन्हें दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग के साथ काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बजाय उन्होंने लाहौर और ग्लासगो के अलग-अलग मौसम के बावजूद अपने पुराने कोच सलमान बट की देखरेख में ही तैयारियां पूरी कीं।

अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने भी माना कि वह कॉमनवेल्थ खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब भी नहीं थे और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रतियोगिता में उतरे। बताया गया कि खेलों से पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड में सिर्फ एक तैयारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।

CWG 2026 में भारत पर मेडल की बारिश, इंडियन बॉक्सर्स ने मचाया धमाल, जीत लिए पांच गोल्ड मेडल

भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज भारत की झोली में कई मेडल आए हैं। भारतीय मुक्केबाजों ने फाइनल मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार गोल्ड मेडल अपने नाम किए। जैस्मिन लैम्बोरिया, प्रीति पवार, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर गोल्ड मेडल जीता है। वहीं, पुरुष वर्ग में जदुमणि सिंह फाइनल में हार गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। आइए जानते हैं भारत ने अबतक कुल कितने मेडल जीत चुके हैं।

भारत ने जीते 5 गोल्ड

महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में हराकर गोल्ड जीता। इसके बाद विश्व चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात दी। वहीं, 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को हराकर भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराकर गोल्ड पर कब्जा किया है।

अरुंधति चौधरी का प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की महिला मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की चैंटेल रीड पर शुरू से ही दबाव बनाए रखा और पूरे मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखा। अंत में निर्णायकों ने सर्वसम्मति से 5-0 का फैसला अरुंधति चौधरी के पक्ष में सुनाया। इस शानदार जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग की चैंपियन बन गईं।

प्रिया घनघस ने जीता गोल्ड

महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबला काफी कड़ा रहा, लेकिन प्रिया ने संयम और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। उनकी इस सफलता के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या चार हो गई।

साक्षी ने जीता गोल्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को एकतरफा अंदाज में हराया और उनके लंबे समय से चले आ रहे जीत के सिलसिले को भी रोक दिया। पूरे टूर्नामेंट में साक्षी का प्रदर्शन दमदार रहा और उन्होंने अपने सभी मुकाबले शानदार अंदाज में जीतकर खिताब पर कब्जा जमाया। वहीं, पुरुष वर्ग के मुकाबले में जदुमणि सिंह का सामना ऑस्ट्रेलिया के जे डिक्सन से हुआ। मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंत में जदुमणि को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

आज इन्हें भी मिला गोल्ड मेडल

साक्षी चौधरी की स्वर्णिम जीत से पहले भी भारत की महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया था। महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद 57 किलोग्राम वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मीन लैम्बोरिया ने उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात देकर भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाल दिया। दोनों खिलाड़ियों की जीत ने भारतीय बॉक्सिंग टीम का शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

अब तक भारत ने जीता है 27 मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 33 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 10 गोल्ड, 15 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इन शानदार नतीजों की बदौलत भारत पदक तालिका में 5वें स्थान पर बना हुआ है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया 142 पदकों के साथ शीर्ष पर है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक 59 स्वर्ण, 34 रजत और 49 कांस्य पदक जीतकर पहले स्थान पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

Who is Yash Vir Singh: बांस के भाले से शुरू की थी प्रैक्टिस…आज CWG 2026 जीता ब्रॉन्ज मेडल, जानें कौन है यश वीर सिंह

Who is Yash Vir Singh: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की जैवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। जैवलिन थ्रो के फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता तो वहीं यश वीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। शुक्रवार को यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पर्सनल बेस्ट) थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। वहीं, स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ 85.83 मीटर थ्रो किया और सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों पदक जीता है। श्रीलंका के रुमेश थरंगा (89.75 मीटर) ने गोल्ड मेडल जीता है। यश वीर सिंह के यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। आइए जानते हैं कौन है यश वीर सिंह

पहली बार लिया हिस्सा

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने वाले 24 वर्षीय यश वीर सिंह ने अपने आखिरी और छठे प्रयास में पर्सनल बेस्ट 85.41 मीटर का शानदार थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इससे पहले उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 83.72 मीटर था। इस जीत के साथ यश वीर उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष जैवलिन थ्रो में पदक जीता है। उनसे पहले नीरज चोपड़ा ने 2018 में गोल्ड और 2026 में सिल्वर मेडल जीता था, जबकि काशीनाथ नाइक ने 2010 में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

कौन है यश वीर सिंह

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले यश वीर सिंह ने अपने खेल करियर की शुरुआत बास्केटबॉल से की थी। लेकिन बाद में उन्होंने भाला फेंक को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दिनों में उन्होंने बांस से बने भाले से प्रैक्टिस किया और धीरे-धीरे प्रोफेशनल इक्विपमेंट के साथ ट्रेनिंग शुरू की। यश वीर सिंह के पिता राय सिंह से जैवलिन थ्रो से बारीकियां सिखी। यश के पिता खुद राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। मेहनत और लगातार प्रैक्टिस का नतीजा यह रहा कि 2022 में यश ने इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में 80 मीटर से ज्यादा भाला फेंककर नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

यश वीर ने किया शानदार प्रदर्शन

यश वीर सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सीनियर स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 2025 में उन्होंने दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां 82.57 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवें स्थान पर रहे। इसी बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें विश्व रैंकिंग के आधार पर 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी चुना गया, जहां उन्होंने जापान की राजधानी टोक्यो में भारत की ओर से हिस्सा लिया। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहे यश ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

पाकिस्तानी नहीं श्रीलंकाई नीरज के हाथों से ले उड़ा गोल्ड पर विजयवीर जीते कांस्य

पेरिस ओलंपिक में पाकिस्तानी अरशद नदीम से गोल्ड मेडल हारने के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा श्रीलंकाई खिलाड़ी से गोल्ड मेडल हार गए। हालांकि अपने बुरे दिन पर भी उन्होंने सुनिश्चित किया कि सिल्वर मेडल कहीं नहीं जाए। इसके अलावा भारत के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि यशवीर को कांस्य पदक मिला।

तोक्यो ओलंपिक चैम्पियन 28 वर्ष के नीरज ने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85 . 83 मीटर थ्रो फेंका जो दूसरे स्थान पर रहने के लिये काफी था।वह 19 जून को दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार उतरे 24 बरस के यशवीर ने छठे और आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया।

इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83 . 72 मीटर था। वह पांचवें दौर के बाद 81.33 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास से सातवें स्थान पर थे लेकिन उनका आखिरी प्रयास जबर्दस्त रहा।

श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे ने अपेक्षा के अनुरूप 89.75 मीटर फेंककर स्वर्ण पदक जीता।बेहद सर्दी और तेज हवाओं के प्रदर्शन उनका यह प्रदर्शन शानदार रहा । उन्होंने जून में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंका था।

चोपड़ा पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट से उबरकर लौटे थे। इस चोट के कारण उनकी वापसी दोहा में आयोजित डायमंड लीग तक टल गई थी। वह दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे थे। इससे पहले उन्होंने 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।उन्होंने संकेत दिया कि वह अभी भी पूरी तरह से फिट नहीं हैं, लेकिन धीरे-धीरे उस ओर बढ़ रहे हैं।

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी रोहित यादव 81.56 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे। दिलचस्प बात यह है कि भाला फेंक में पुरुषों के सभी पदक भारतीय उपमहाद्वीप के एथलीटों ने जीते।पाकिस्तान के गत चैम्पियन और मौजूदा ओलंपिक विजेता अरशद नदीम 77.41 के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ तीन दौर के बाद बाहर हो गए । त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैम्पियन केशोर्न वालकॉट छठे स्थान पर रहे।

अस्मिता और हर्ष के एतिहासिक स्वर्ण पदक, जूडो में 3 पदक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहली बार जूडो कराटे में मेडल दिलवाया वह भी गोल्ड। अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला जूडोका बनी वहीं इसके बाद हर्ष सिंह भी पहले पुरष जूडोका बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स  में गोल्ड जीता। इसके अलावा यामिनी ने भी 48.किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

भारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया । यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।