CWG 2026: पीरियड्स के दर्द को हराकर जीता मेडल, घर लौटने के बाद ज्ञानेश्वरी ने बताया कैसा था वो पल

CWG 2026: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव का शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में मेडल जीता है। वहीं मुकाबले के दिन ज्ञानेश्वरी यादव पीरियड्स के दर्द से परेशान थीं। पीरियड्स के पहले दिन असहनीय दर्द के बाद भी ज्ञानेश्वरी ने अपना ध्यान लक्ष्य से नहीं हटने दिया।उन्होंने कहा कि पूरे मुकाबले के दौरान वह खुद को लगातार फोकस बनाए रखने के लिए प्रेरित करती रहीं और आखिरकार ग्लासगो में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहीं। वहीं अब उनका अगला लक्ष्य सितंबर महीने में होने वाले एशियन गेम्स है।  हाल ही में ज्ञानेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पीरियड्स के दर्द के दौरान कैसे गेम पर फोकस बनाए रखा

पीरियड्स के दौरान भी की थी ट्रेनिंग

पीटीआई से बातचीत में ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया, “मैंने पहले भी पीरियड्स के दौरान ट्रेनिंग की थी, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि पीरियड्स के पहले दिन ही मुझे कॉम्पिटिशन में उतरना पड़ा। उस समय मैं खुद से बार-बार कह रही थी कि ध्यान मत भटकने देना। मेरे परिवार और कोच ने भी लगातार मेरा हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि सब ठीक होगा।” उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मुकाबले में शांत रहकर प्रदर्शन किया और पहली लिफ्ट सफल होने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।

ज्ञानेश्वरी ने कहा, “मैंने खुद से कहा कि मेरे लक्ष्य के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं है। इसी सोच ने मुझे अपनी सभी लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी करने की ताकत दी।”

माता-पिता ने दिया साथ

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, परिवार, कोच और राजनांदगांव के लोगों के सहयोग को दिया। ज्ञानेश्वरी ने कहा, “हर सफलता के पीछे लंबा संघर्ष होता है। मेरे माता-पिता ने भी मेरे साथ हर मुश्किल का सामना किया। आज भी मुझे याद है कि मेरे पिताजी रोज साइकिल से मुझे जिम लेकर जाते थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह खुद नेशनल या इंटरनेशनल लेवल तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते थे कि मैं उनका सपना पूरा करूं और देश का नाम रोशन करूं।”

छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया 30 लाख का इनाम

ज्ञानेश्वरी यादव की शानदार उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने उनके लिए 30 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्हें पुलिस विभाग में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के पद पर विशेष प्रमोशन देने को भी मंजूरी दे दी गई।

अगला मेजबान होने के कारण भारत को मिला कॉमनवेल्थ ध्वज और मशाल (Video)

राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारत देश को अब खेलों की मशाल भी मिल गई क्योंकि अगला  राष्ट्रमंडल खेल भारत के अहमदाबाद में होने वाला है। भारत की ओर से नीरज चोपड़ा ने इस मशाल और ध्वज को थामा। इससे पहले संगीत और नृत्य के ताने बाने में तैयार किये गए अद्भुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में रखी जहां परंपरा और आधुनिकता साथ में बसते हैं।

किंग चार्ल्स तृतीय के प्रतिनिधि प्रिंस एडवर्ड (ड्यूक आफ एडिनबर्ग) ने खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की।उन्होंने कहा ,‘‘ जिस तरह से आपने प्रतिस्पर्धा की, खेलों का आयोजन किया और समर्थन किया , उसके लिये धन्यवाद। आपने आज एक बार फिर राष्ट्रमंडल की भावना और मूल्यों को जीवंत कर दिया। शुक्रिया ग्लास्गो। ’’उन्होंने कहा ,‘‘ मैं सभी देशों और प्रदेशों के खिलाड़ियों को भारत के अहमदाबाद आने का न्योता देता हूं जहां चार साल बाद 24वें राष्ट्रमंडल खेल होंगे जो इन खेलों का शताब्दी संस्करण भी है।’

बॉक्सिंग में भारत की स्वर्ण पदक विजेता महिलाओं की 57 किग्रा बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली जैस्मिन लैंबोरिया को  समापन समारोह के लिए भारत का ध्वजवाहक चुना गया था।भारत कुल 39 पदक -13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य – के साथ मेडल स्टैंडिंग में चौथे स्थान पर काबिज है। इन गेम्स में खेलों की संख्या कम होने के बावजूद यह एक बड़ी उपलब्धि है।

मुकाबले खत्म होने के बाद ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स आधिकारिक तौर पर समापन समारोह के साथ समाप्त हो गया जो 3 अगस्त को तड़के 1:30 बजे (भारतीय समयानुसार) प्रसारित किया गया।

CWG 2026 Medal List: ग्लासगो में भारत ने जीते कितने मेडल? देखें गोल्ड-सिल्वर-ब्रॉन्ज की पूरी लिस्ट और मेडल टैली

Commonwealth Games 2026 Medal List: 11 दिनों तक चले रोमांचक मुकाबलों के बाद ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का शानदार समापन हो गया है। रविवार 2 अगस्त को एक रंगारंग समापन समारोह के साथ राष्ट्रमंडल खेलों का फ्लैग और बेटन अगले मेजबान देश भारत को सौंप दिया गया। भारतीय दल ने ग्लासगो में कई पारंपारिक और पदक दिलाने वाले खेलों (जैसे शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस) को शामिल न किए जाने के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया है।

2030 में अहमदाबाद करेगा शताब्दी संस्करण की मेजबानी

समारोह के दौरान स्कॉटलैंड के अधिकारियों ने राष्ट्रमंडल खेल संघ का ध्वज और बेटन भारतीय प्रतिनिधियों ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सौंपा।

वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन भारत के अहमदाबाद शहर में होगा। ये इन खेलों का 100वां यानी शताब्दी संस्करण होगा। भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन कर चुका है। इसके साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद एक से अधिक बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेल 2026: अंतिम मेडल टैली में टॉप 5 देश

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया कुल 171 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसमें 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य पदक शामिल हैं। इंग्लैंड ने 29 स्वर्ण, 45 रजत और 36 कांस्य पदक जीतकर कुल 110 पदकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि कनाडा 19 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य मिलाकर कुल 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भारत के खाते में आए 39 मेडल

भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 मेडल जीतकर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। मेजबान स्कॉटलैंड ने भी कुल 39 पदक जीते। लेकिन उसके खाते में 13 स्वर्ण, 9 रजत और 17 कांस्य पदक आए। भारत के पास स्कॉटलैंड से अधिक रजत पदक (17) होने के कारण भारतीय दल पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहे स्कॉटलैंड से ऊपर चौथे स्थान पर रहा।

खेलों में भारत का प्रदर्शन: बॉक्सिंग का रहा दबदबा

भारतीय एथलीटों ने मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा स्पोर्ट्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसने कुल 10 पदक दिलाए (7 स्वर्ण और 3 रजत)। ट्रैक एंड फील्ड और पैरा एथलीट्स ने कई ऐतिहासिक पदक जीते। जूडोकाओं ने अहम पदक जोड़े, जबकि वेटलिफ्टरों ने भारत के मेडल खाते को मजबूती दी। हालांकि जुडोका तुलिका मान को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सस्पेंड होने के कारण खेलों से बाहर होना पड़ा, जो भारत के लिए एक शुरुआती झटका था।

CWG 2026: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट

1- बॉक्सिंग (Boxing) – 10 मेडल (7 Gold, 3 Silver)

गोल्ड: प्रीति पवार (महिला 51 किग्रा)

गोल्ड: साक्षी चौधरी (महिला 54 किग्रा)

गोल्ड: जैस्मिन लंबोरिया (महिला 57 किग्रा)

गोल्ड: प्रिया घनघस (महिला 60 किग्रा)

गोल्ड: अरुंधति चौधरी (महिला 66 किग्रा)

गोल्ड: सचिन सिवाच (पुरुष 55 किग्रा)

गोल्ड: अंकुश पंघाल (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा)

सिल्वर: जादुमणि सिंह (पुरुष 50 किग्रा)

सिल्वर: नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा)

2- पैरा एथलेटिक्स – 6 मेडल (3 Gold, 2 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: शर्मीला ढाका (महिला शॉट पुट F57)

गोल्ड: दिलीप गावित (पुरुष 100 मीटर T47)

गोल्ड: सोमन राणा (पुरुष शॉट पुट F57)

सिल्वर: मोहम्मद बासिल (पुरुष 100 मीटर T47)

सिल्वर: शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57)

कांस्य: शिल्पा शैला (महिला शॉट पुट F57)

3- जूडो – 4 मेडल (2 Gold, 1 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा)

गोल्ड: हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: यामिनी मौर्या (महिला 57 किग्रा)

कांस्य: उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा)

4- भारोत्तोलन – 8 मेडल (1 Gold, 6 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: सायखोम मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा)

सिल्वर: ऋषिकान्त सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: मुथुपंडी राजा (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा)

सिल्वर: वल्लूरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा)

सिल्वर: हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा)

सिल्वर: लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा)

कांस्य: बिंद्यारानी देवी (महिला 58 किग्रा)

5- एथलेटिक्स – 10 मेडल (5 Silver, 5 Bronze)

सिल्वर: नीरज चोपड़ा (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

सिल्वर: मुरली श्रीशंकर (पुरुष लंबी कूद / Long Jump)

सिल्वर: प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

सिल्वर: सर्वेश अनिल कुशारे (पुरुष ऊंची कूद / High Jump)

सिल्वर: गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर दौड़)

कांस्य: यशवीर सिंह (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

कांस्य: सेल्वा प्रभु थिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

कांस्य: गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर दौड़)

कांस्य: तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलॉन / Decathlon)

कांस्य: सीमा कालीरामना (महिला डिस्क थ्रो / Discus Throw)

6 – पैरा पावरलिफ्टिंग – 1 मेडल (1 Bronze)

कांस्य : झंडू कुमार (पुरुष हैवीवेट)

ग्लासगो 2026 के सफल समापन के बाद अब भारतीय खेल जगत की निगाहें 2030 अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं।

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CWG 2026: ‘न फंड मिला, न विदेशी कोच…’ पाकिस्तान ने छोड़ा ओलंपिक मेडल विनर अरशद नदीम का साथ! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नदीम शीर्ष आठ खिलाड़ियों में भी जगह बनाने में सफल नहीं हुए और नौवें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं ओलंपिक विनर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके खेल और तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मुताबिक, अरशद नदीम के खराब प्रदर्शन की वजह सिर्फ उनका फॉर्म ही नहीं, बल्कि तैयारी के दौरान आई दिक्कतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खेल अधिकारियों ने उन्हें जरूरी सुविधाएं और पूरा सहयोग नहीं दिया, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हुई।

पाकिस्तान ने नहीं दी कोई मदद

रिपोर्टों के अनुसार, वह पूरी तरह फिट नहीं थे और उनकी तैयारियां भी प्रभावित रहीं। PTI की एक रिपोर्ट में, एथलीट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि, पिछले साल लंबे समय से अरशद नदीम के कोच रहे सलमान बट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे दूरी बना ली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद फेडरेशन ने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को अपनी तैयारियां खुद संभालने के लिए छोड़ दिया और उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई मांगों पर भी कोई जवाब नहीं दिया।

नहीं जारी किए फंड

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर रखने के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए। इसके चलते अरशद नदीम को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही प्रैक्टिस करना पड़ा। बताया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार उन्हें दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग के साथ काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बजाय उन्होंने लाहौर और ग्लासगो के अलग-अलग मौसम के बावजूद अपने पुराने कोच सलमान बट की देखरेख में ही तैयारियां पूरी कीं।

अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने भी माना कि वह कॉमनवेल्थ खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब भी नहीं थे और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रतियोगिता में उतरे। बताया गया कि खेलों से पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड में सिर्फ एक तैयारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।

CWG 2026 में भारत पर मेडल की बारिश, इंडियन बॉक्सर्स ने मचाया धमाल, जीत लिए पांच गोल्ड मेडल

भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज भारत की झोली में कई मेडल आए हैं। भारतीय मुक्केबाजों ने फाइनल मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार गोल्ड मेडल अपने नाम किए। जैस्मिन लैम्बोरिया, प्रीति पवार, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर गोल्ड मेडल जीता है। वहीं, पुरुष वर्ग में जदुमणि सिंह फाइनल में हार गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। आइए जानते हैं भारत ने अबतक कुल कितने मेडल जीत चुके हैं।

भारत ने जीते 5 गोल्ड

महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में हराकर गोल्ड जीता। इसके बाद विश्व चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात दी। वहीं, 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को हराकर भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराकर गोल्ड पर कब्जा किया है।

अरुंधति चौधरी का प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की महिला मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की चैंटेल रीड पर शुरू से ही दबाव बनाए रखा और पूरे मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखा। अंत में निर्णायकों ने सर्वसम्मति से 5-0 का फैसला अरुंधति चौधरी के पक्ष में सुनाया। इस शानदार जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग की चैंपियन बन गईं।

प्रिया घनघस ने जीता गोल्ड

महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबला काफी कड़ा रहा, लेकिन प्रिया ने संयम और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। उनकी इस सफलता के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या चार हो गई।

साक्षी ने जीता गोल्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को एकतरफा अंदाज में हराया और उनके लंबे समय से चले आ रहे जीत के सिलसिले को भी रोक दिया। पूरे टूर्नामेंट में साक्षी का प्रदर्शन दमदार रहा और उन्होंने अपने सभी मुकाबले शानदार अंदाज में जीतकर खिताब पर कब्जा जमाया। वहीं, पुरुष वर्ग के मुकाबले में जदुमणि सिंह का सामना ऑस्ट्रेलिया के जे डिक्सन से हुआ। मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंत में जदुमणि को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

आज इन्हें भी मिला गोल्ड मेडल

साक्षी चौधरी की स्वर्णिम जीत से पहले भी भारत की महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया था। महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद 57 किलोग्राम वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मीन लैम्बोरिया ने उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात देकर भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाल दिया। दोनों खिलाड़ियों की जीत ने भारतीय बॉक्सिंग टीम का शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

अब तक भारत ने जीता है 27 मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 33 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 10 गोल्ड, 15 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इन शानदार नतीजों की बदौलत भारत पदक तालिका में 5वें स्थान पर बना हुआ है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया 142 पदकों के साथ शीर्ष पर है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक 59 स्वर्ण, 34 रजत और 49 कांस्य पदक जीतकर पहले स्थान पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

Rohit Sharma: लंदन में बदले-बदले अंदाज में दिखे रोहित शर्मा, रवि शास्त्री के साथ वायरल हुई फोटो

भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा फिलहाल क्रिकेट से ब्रेक लेकर लंदन में समय बिता रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी और पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री से हुई। रवि शास्त्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर रोहित शर्मा के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर की है। इस फोटो में रोहित का लुक पूरी तरह से बदला हुआ है। रोहित की फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

रवि शास्त्री ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “लंदन की सड़कों पर घूमते हुए बेहद रिलैक्स मूड में रोहित शर्मा से मुलाकात हुई। उनके साथ समय बिताकर अच्छा लगा।”

लंदन में घूम रहे रोहित शर्मा

भारतीय टीम से दूर चल रहे रोहित शर्मा इन दिनों पूरी तरह आराम के मूड में नजर आ रहे हैं। लंदन में रवि शास्त्री के साथ उनकी मुलाकात के बाद फैंस ने भी उनके बदले हुए लुक पर ध्यान दिया। रोहित पहले के मुकाबले काफी फिट और स्लिम दिख रहे हैं। लंदन में रवि शास्त्री के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर में दोनों मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं। फोटो में शास्त्री ने दोस्ताना अंदाज में रोहित के कंधे पर हाथ रखा हुआ है। माना जा रहा कि हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद वनडे सीरीज के बाद वह काफी सुकून और रिलैक्स महसूस कर रहे हैं।

 

रोहित को लेकर चल रही थी चर्चाएं

लॉर्ड्स में खेले गए आखिरी वनडे से पहले इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद भारतीय मीडिया में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, ऐसी चर्चा थी कि यह मैच रोहित शर्मा का आखिरी वनडे हो सकता है, क्योंकि माना जा रहा था कि साल 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले वनडे विश्व कप की टीम में उन्हें जगह नहीं मिलेगी।

लॉर्ड्स वनडे में रोहित ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 111 गेंदों पर 138 रन की बेहतरीन पारी खेली और अपनी फॉर्म पर उठ रहे सवालों का जोरदार जवाब दिया। भले ही भारत वह मुकाबला 2-1 से हार गया, लेकिन रोहित की इस पारी ने साफ कर दिया कि वह अब भी टीम के लिए अहम खिलाड़ी हैं और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

CWG 2026: बॉक्सिंग में प्रीति और जैस्मिन ने जीता गोल्ड, अब तक भारत ने जीता इतने मेडल

Who is Yash Vir Singh: बांस के भाले से शुरू की थी प्रैक्टिस…आज CWG 2026 जीता ब्रॉन्ज मेडल, जानें कौन है यश वीर सिंह

Who is Yash Vir Singh: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की जैवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। जैवलिन थ्रो के फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता तो वहीं यश वीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। शुक्रवार को यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पर्सनल बेस्ट) थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। वहीं, स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ 85.83 मीटर थ्रो किया और सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों पदक जीता है। श्रीलंका के रुमेश थरंगा (89.75 मीटर) ने गोल्ड मेडल जीता है। यश वीर सिंह के यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। आइए जानते हैं कौन है यश वीर सिंह

पहली बार लिया हिस्सा

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने वाले 24 वर्षीय यश वीर सिंह ने अपने आखिरी और छठे प्रयास में पर्सनल बेस्ट 85.41 मीटर का शानदार थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इससे पहले उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 83.72 मीटर था। इस जीत के साथ यश वीर उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष जैवलिन थ्रो में पदक जीता है। उनसे पहले नीरज चोपड़ा ने 2018 में गोल्ड और 2026 में सिल्वर मेडल जीता था, जबकि काशीनाथ नाइक ने 2010 में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

कौन है यश वीर सिंह

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले यश वीर सिंह ने अपने खेल करियर की शुरुआत बास्केटबॉल से की थी। लेकिन बाद में उन्होंने भाला फेंक को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दिनों में उन्होंने बांस से बने भाले से प्रैक्टिस किया और धीरे-धीरे प्रोफेशनल इक्विपमेंट के साथ ट्रेनिंग शुरू की। यश वीर सिंह के पिता राय सिंह से जैवलिन थ्रो से बारीकियां सिखी। यश के पिता खुद राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। मेहनत और लगातार प्रैक्टिस का नतीजा यह रहा कि 2022 में यश ने इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में 80 मीटर से ज्यादा भाला फेंककर नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

यश वीर ने किया शानदार प्रदर्शन

यश वीर सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सीनियर स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 2025 में उन्होंने दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां 82.57 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवें स्थान पर रहे। इसी बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें विश्व रैंकिंग के आधार पर 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी चुना गया, जहां उन्होंने जापान की राजधानी टोक्यो में भारत की ओर से हिस्सा लिया। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहे यश ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

Sharmila Dhankhar: पोलियो, गरीबी और दहेज प्रताड़ना से लड़ी…अब देश के लिए जीता ऐतिहासिक गोल्ड, जानिए शर्मिला धनखड़ की प्रेरक कहानी

CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में सोमवार (27 जुलाई) को भारत को पैरा एथलेटिक्स का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। 40 साल की शर्मिला ने 9.81 मीटर के अपने सीजन के बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। इसी के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा-एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत के 20 साल के इंतजार को खत्म किया। इसी इवेंट में एक विवाद के बाद एक और भारतीय एथलीट शिल्पा शायला को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। शिल्पा ने 7.26 मीटर का अपना पर्सनल बेस्ट थ्रो किया था।

शुरुआत में नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी ब्रॉन्ज मेडल की स्थिति में थीं। लेकिन भारतीय दल की आपत्ति और आधिकारिक समीक्षा के बाद उनके एकमात्र वैध प्रयास को फाउल करार दिया गया। नतीजतन, चौथे स्थान पर रहीं शिल्पा शैला को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। हालांकि, नाइजीरिया के इस फैसले के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की संभावना है।

मेडल स्टैंडिंग में बदलाव की घोषणा के बाद भावुक शिल्पा ने शर्मिला के साथ जश्न मनाया। इस तरह, भारत ने इस इवेंट में दो मेडल जीते। F57 कैटेगरी उन एथलीटों के लिए है जिनके निचले अंगों में अक्षमता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत कम होती है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड मेडल है।

2 साल की उम्र में पोलियो ने बदल दी जिंदगी

शर्मिला धनखड़ का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता छोटे किसान थे। जबकि उनकी मां नेत्रहीन थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने किसी तरह जीवनयापन किया। महज दो साल की उम्र में शर्मिला पोलियो की शिकार हो गईं। गांव में समय पर इलाज न मिलने के कारण उनका बायां पैर हमेशा के लिए प्रभावित हो गया। लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

कम उम्र में शादी, दहेज प्रताड़ना और टूटा परिवार

शर्मिला की जिंदगी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई। लेकिन ससुराल में उन्हें दहेज की मांग को लेकर कथित तौर पर सालों तक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आखिरकार, करीब 25 साल की उम्र में उन्हें अपनी दो बेटियों के साथ ससुराल छोड़कर मायके लौटना पड़ा। बाद में उनकी शादी अजीत सिंह से हुई। परिवार के सहयोग और पति के समर्थन ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी। इसी दौरान उन्होंने खेलों में करियर बनाने का फैसला किया।

34 साल की उम्र में शुरू किया खेल करियर

जहां अधिकांश खिलाड़ी बचपन से ट्रेनिंग शुरू कर देते हैं। वहीं शर्मिला ने 34 वर्ष की उम्र में पैरा एथलेटिक्स में कदम रखा। उन्होंने F57 वर्ग में शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में प्रतिस्पर्धा शुरू की और बहुत कम समय में देश की शीर्ष पैरा एथलीटों में अपनी अलग पहचान बना ली। साल 2021 की पैरा नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने अपने पहले ही टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतते हुए 7.40 मीटर के थ्रो के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।

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अब तक के प्रदर्शन पर एक नजर

  • 2025 इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप (बेंगलुरु) में 9.77 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता।
  • 2026 फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप (दुबई) में शॉट पुट में गोल्ड और डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
  • 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स (बर्मिंघम) में वह पदक से मामूली अंतर से चूक गईं। लेकिन 8.43 मीटर के थ्रो के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
  • 2023 एशियन पैरा गेम्स (हांगझोउ) में चौथे स्थान पर रहीं।