पहली बार एशियन गेम्स में दिख रहा इन खिलाड़ियों का दम, पहले ही बना चुके हैं खास पहचान!

जापान के आइची-नगोया में 19 सितंबर से शुरू हुए 2026 एशियन गेम्स में भारत कई खिलाड़ी हिस्सा ले रहे है। इस बार कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ऐसे युवा चेहरे भी मैदान में उतर चुके हैं, जो पहली बार एशियन गेम्स में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। जिसमे कई दिग्गज खिलाडियों के नाम शामिल हैं। जिनने अपने-अपने खेल में पहले ही कई अहम मुकाबलों में पहचान बनाई है और अब एशियन गेम्स में उनका प्रदर्शन देखने लायक होगा।

1. साक्षी चौधरी पर रहेंगी नजरें

  • उम्र: साक्षी चौधरी 26 साल की हैं और एशियन गेम्स में पहली बार हिस्सा लेंगी।
  • अचीवमेंट: उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
  • वर्ल्ड बॉक्सिंग कप: उन्होंने 54 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।
  • एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप: 2021 में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। एशियन गेम्स में उनका डेब्यू उनके करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

2. सुरुचि फोगाट का शूटिंग में जलवा

  • उम्र: सुरुचि फोगाट सिर्फ 20 साल की हैं और कम उम्र में शूटिंग में पहचान बना चुकी हैं।
  • इवेंट: वह 10 मीटर एयर पिस्टल में हिस्सा लेती हैं।
  • वर्ल्ड कप: उन्होंने वर्ल्ड कप में कई गोल्ड मेडल जीते हैं और वर्ल्ड कप फाइनल का खिताब भी अपने नाम किया है।
  • बड़ी जीत: पिछले साल लीमा में उन्होंने ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। एशियन गेम्स में यह उनका पहला मौका होगा।

3. सुजीत कलकल की कुश्ती पर नजर

  • उम्र: हरियाणा के 23 साल के फ्रीस्टाइल पहलवान सुजीत कलकल एशियन गेम्स में डेब्यू करेंगे।
  • वेट कैटेगरी: वह 65 किग्रा वर्ग में मुकाबला करते हैं।
  • एशियन चैंपियनशिप: उन्होंने इस वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
  • अंडर-23 अचीवमेंट: अंडर-23 लेवल पर भी उनके नाम गोल्ड मेडल रहा है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद अब उन्हें सीनियर लेवल पर बड़े स्टेज का एक्सपीरियंस मिलेगा।

4. आयुष शेट्टी का बैडमिंटन मुकाबला

  • उम्र: आयुष शेट्टी 21 साल के हैं और एशियन गेम्स में पहली बार खेलेंगे।
  • थॉमस कप: उन्होंने यहां ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
  • एशियन चैंपियनशिप: उनके नाम सिल्वर मेडल भी रहा है।
  • बड़ी जीत: वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने उस समय के वर्ल्ड नंबर-1 शी युकी को हराया था। एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने कुनलावुत वितिदसर्न और जोनाथन क्रिस्टी के खिलाफ भी जीत दर्ज की है।

5. रोहित यादव की जैवलिन में चुनौती

  • टीम: रोहित यादव नीरज चोपड़ा के साथ भारतीय जैवलिन टीम में शामिल हैं।
  • एशियन गेम्स: जापान में होने वाले एशियन गेम्स में वह पहली बार हिस्सा लेंगे।
  • सीजन परफॉरमेंस: इस सीजन में वह 87 मीटर से ज्यादा के दो थ्रो कर चुके हैं।
  • मेजर अचीवमेंट: अगस्त में भुवनेश्वर में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर लेवल मीट में उन्होंने 87.68 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता था। अब उनका मुकाबला एशिया के मजबूत जैवलिन खिलाड़ियों से होगा।

एशियन गेम्स इन युवा खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक नई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय करियर में आगे बढ़ने का बड़ा मंच भी है। अब उनके डेब्यू को लेकर खेल प्रेमियों की नजरें इन पांचों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी।

Asian Games के लिए भारत ने 503 खिलाड़ियों पर खर्चे 702 करोड़ रुपए

जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में भारत का 503 सदस्यीय दल हिस्सा लेगा। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जानकारी दी कि मंत्रालय ने एशियाड दल और उनके कोच तथा इक्विपमेंट के लिए 702 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए आयोजित विदाई समारोह में दबाव को अच्छे प्रदर्शन में बदलने, प्रतिद्वंद्वियों को अवसर के रूप में देखने और अवसरों को उपलब्धियों में बदलने का खिलाड़ियों से आग्रह किया।

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल जापान में कई तरह के खेलों में हिस्सा लेगा। 503 सदस्यों वाले इस दल में एथलीट और सपोर्ट स्टाफ़ शामिल हैं, जिनमें से 300 से ज़्यादा एथलीट पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगे, जो भारतीय खेलों की बढ़ती गहराई और बेंच स्ट्रेंथ को दिखाता है।

उन्होंने कहा, “503 सदस्यों वाला हमारा दल एशियाई खेलों के लिए जा रहा है, और मुझे विश्वास है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हमारे 503 खिलाड़ियों में से 300 से अधिक खिलाड़ी पहली बार हिस्सा ले रहे हैं, इसलिए बहुत सारी नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।” ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा, “हमने ओपन ट्रायल के ज़रिए पारदर्शी और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित किया है, जिसमें स्वतंत्र ऑब्ज़र्वर और कैमरे से निगरानी की व्यवस्था है। पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 13 गोल्ड मेडल जीते थे; इस बार हमारा प्रदर्शन 35 प्रतिशत से ज़्यादा बेहतर हुआ है। मैं हमारे सभी एथलीटों और सपोर्ट स्टाफ़ को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ।”

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 2036 है – जब हम ओलंपिक्स की मेज़बानी करेंगे, तब तक हमें ग्लोबल स्टेज पर मज़बूती से स्थापित होना होगा। यह 10 साल का प्लान है, जिसमें स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि आवंटित की गई है।”

Asian Games में नीरज चोपड़ा करेंगे 55 भारतीय एथलीटों की अगुवाई

Neeraj Chopra

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स 2026 में 73 सदस्यों वाली भारतीय एथलेटिक्स दल की अगुवाई करेंगे। भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंकने वाले खिलाड़ी) नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स में दो बार के डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर हिस्सा लेंगे। उन्होंने जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2023 में गोल्ड मेडल जीता था। भारतीय जैवलिन थ्रोअर के साथ रोहित यादव भी होंगे, जिन्होंने शनिवार को भुवनेश्वर में वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर मीट में जीत हासिल करते हुए अपना पर्सनल बेस्ट 87.68 मीटर किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के कांस्य पदक विजेता यश वीर सिंह इसमें शामिल नहीं हो पाए हैं, क्योंकि इस प्रतियोगिता के लिए केवल दो भारतीयों को चुना गया है। आइची-नागोया 2026 के लिए चुनी गई भारत की एथलेटिक्स टीम के 16 खिलाड़ी हांगझोऊ में हुए पिछले एशियन गेम्स में मेडलिस्ट रहे थे।

नीरज के अलावा, अविनाश साबले, तजिंदरपाल सिंह तूर, पारुल चौधरी और अन्नू रानी उन खिताबों को बचाने के लिए वापसी करेंगे जो उन्होंने तीन साल पहले व्यक्तिगत इवेंट्स में जीते थे।राजेश रमेश, जो हांगझोऊ में भारत की गोल्ड मेडल जीतने वाली पुरुषों की 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा थे, वे भी वापसी करने वाले चैंपियंस में शामिल हैं।

साबले ने हांगझोऊ में 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता था। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर साबले को पिछले साल अपने दाहिने घुटने की सर्जरी के बाद चोटों से जूझना पड़ा और वे ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा नहीं ले पाए थे।

वहीं, दो बार के डिफेंडिंग चैंपियन तजिंदरपाल सिंह तूर लगातार तीसरी बार शॉट पुट का खिताब जीतने की कोशिश करेंगे; उन्होंने जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2023, दोनों में टॉप स्थान हासिल किया था। पारुल चौधरी, जिन्होंने तीन साल पहले 5000 मीटर में स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीता था, उन्हें 1500 मीटर, 5000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज़ के लिए चुना गया है।

ज्योति याराजी ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाई थीं, लेकिन वे एशियन गेम्स में 100 मीटर हर्डल्स (बाधा दौड़) में हिस्सा लेंगी। उन्होंने हांगझोऊ में इस स्पर्धा में रजत पदक जीता था। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन्ग जंप में दूसरा रजत पदक जीतने के बाद मुरली श्रीशंकर जापान जा रहे हैं। उन्होंने पिछले एशियन गेम्स में भी रजत पदक जीता था।

तेजस्विन शंकर, गुलवीर सिंह, मोहम्मद अफसल, एंसी सोजन, प्रवीण चित्रवेल और विथ्या रामराज एशियन गेम्स में पदक जीतने वाले वे अन्य खिलाड़ी हैं जिन्हें आइची-नागोया के लिए चुना गया है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान बाएं पैर में दो स्ट्रेस फ्रैक्चर होने के बावजूद तेज शिर्से को 110 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में शामिल किया गया है।

झगझोऊ में हुए एशियन गेम्स में भारत का एथलेटिक्स में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा, जिसमें उसने कुल 29 पदक जीते – छह स्वर्ण, 14 रजत और नौ कांस्य। कुल मेडल की संख्या के हिसाब से 2023 के गेम्स में एथलेटिक्स भारत का सबसे सफल खेल रहा।

एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम इस प्रकार है:-

पुरुषों:-गुरिंदरवीर सिंह (100मी), अनिमेष कुजूर (100 मीटर, 200 मीटर, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), राजेश रमेश (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), विशाल थेनारासु कयालविझी (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), कृष्ण कुमार (800 मी), मोहम्मद अफसल पुलिककलाकथ (800मी), यूनुस शाह (1500 मी), अभिषेक पाल (5000 मी, 10000 मी), गुलवीर सिंह (1500 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर)। सावन बरवाल (मैराथन), कार्तिक कारकेरा (मैराथन), तेजस शिरसे (110 मीटर बाधा दौड़), यशस पलाक्ष (400 मीटर बाधा दौड़), संतोष कुमार तमिलारासन (400 मीटर बाधा दौड़), अविनाश साबले (3000 मीटर स्टीपलचेज), प्रणव प्रमोद गुरव (मिश्रित 4×100 मीटर रिले), मोहम्मद अशफाक (4×400 मीटर रिले), धर्मवीर चौधरी (4×400 मीटर रिले), जय कुमार (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), मनु थेक्किनालिल साजी (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), आदर्श राम ज्योति शंकर (ऊंची कूद), सर्वेश कुशारे (ऊंची कूद) , कुलदीप कुमार (पोल वॉल्ट), देव मीना (पोल वॉल्ट), मुरली श्रीशंकर (लंबी कूद), शाहनवाज खान (लंबी कूद), प्रवीण चित्रवेल (ट्रिपल जंप) कार्तिक उन्नीकृष्णन (ट्रिपल जंप), करणवीर सिंह (गोला फेंक), तजिंदरपाल सिंह तूर (गोला फेंक), दमनीत सिंह (हथौड़ा फेंक), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), रोहित यादव (भाला फेंकने का खेल), तौफीक नौशाद (डेकाथलॉन), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

(Image Source : X/Athletics Federation of India)

महिला:– प्राची चौधरी (400 मी), गौतमी जयारमन (800 मी), पूजा (800मी, 1500मी), पारुल चौधरी (1500 मीटर, 5000 मीटर, 3000 मीटर स्टीपलचेज़), सीमा (5000 मी, 10000 मी), प्रियंका गोस्वामी (मैराथन रेस वॉक), मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक), ज्योति याराजी (100 मीटर बाधा दौड़), नंदिनी कोंगन (100 मीटर बाधा दौड़), उन्नति अयप्पा बोलैंड (200मी), अनु राघवन (400 मीटर बाधा दौड़), विथ्या रामराज (400 मीटर बाधा दौड़), अंकिता ध्यानी (3000 मीटर स्टीपलचेज), तमन्ना (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), नित्या गंधे (4×100 मीटर रिले), सरबानी नंदा (4×100 मीटर रिले), अबिनया राजराजन (4×100 मीटर रिले) स्नेहा सत्यनारायण (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), सुदेशना शिवंकर (4×100 मीटर रिले), रशदीप कौर (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), अनसा बाबू (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले),

Asian Games में इस बार किसी भी हाल में पदक का सूखा खत्म करना चाहती हैं मीराबाई

साइखोम मीराबाई चानू आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियाई खेलों में हिस्सा लेंगी और उस बड़े मेडल को जीतने की कोशिश करेंगी जो उनके शानदार वेटलिफ्टिंग करियर में अभी तक नहीं मिल पाया है। ओलंपिक मेडल विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन को एशियाई खेलों के लिए भारत की पांच सदस्यीय वेटलिफ्टिंग टीम में शामिल किया गया है। ये खेल जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

एशियाई खेल 2026 में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में होगी।मीराबाई चानू, जो महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी, ने अभी तक एशियाई खेलों में कोई मेडल नहीं जीता है। वह हांगझोऊ 2023 में मेडल जीतने के बहुत करीब थीं, लेकिन चौथे स्थान पर रहीं।

मीराबाई ने कहा है, “एशियाई खेलों का मेडल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगी क्योंकि मुझे वहां जीतना है जहां मैंने पहले कभी मेडल नहीं जीता है। इसलिए, एशियाई खेल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।” आइची-नागोया में मेडल जीतने से मीराबाई चानू का तीन बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स – ओलंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स – में मेडल का कलेक्शन पूरा हो जाएगा। मीराबाई चानू ने पिछले महीने लगातार तीसरा गोल्ड और कुल मिलाकर चौथा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीता था।

एशियाई खेलों के लिए भारत की वेटलिफ्टिंग टीम में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं; इनमें से पांच में से चार ने पिछले महीने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीते थे। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की सिल्वर मेडल विजेता ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर क्रमशः महिलाओं के 53 किग्रा और 69 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। सेराम निरुपमा देवी 61किग्रा कैटेगरी में महिला टीम को पूरा करती हैं।

ऋषिकांत सिंह चनमबम एशियाई खेलों में भारत के अकेले पुरुष वेटलिफ्टर होंगे। उन्होंने पिछले महीने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था और वे 60किग्रा कैटेगरी में हिस्सा लेंगे।भारत ने एशियाई खेलों में वेटलिफ़्टिंग में 14 मेडल जीते हैं – पांच सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज़ – लेकिन अभी तक कोई गोल्ड मेडल नहीं जीता है।


Neeraj Chopra: लुसाने डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा ने फेंका सीजन का बेस्ट थ्रो, सिर्फ 9 CM से टूटा दिल, दूसरी पोजीशन पर किया खत्म

Neeraj Chopra: भारतीय स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने लुसाने डायमंड लीग 2026 में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने इस सीजन का अपना सबसे बेहतरीन थ्रो किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा और श्रीलंका के रुमेश पथिरगे के बीच जेवलिन थ्रो में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। रुमेश 88.14 मीटर का थ्रो कर पहला स्थान हासिल किया। वहीं नीरज 88.05 मीटर का थ्रो कर दूसरे स्थान पर रहे। ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 86.69 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

इस सीजन में नीरज का 88.05 मीटर का थ्रो कर अब तक का सबसे लंबा थ्रो रहा, जिसने उनके प्रदर्शन को खास बना दिया। इससे पहले उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 85.83 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज किया था।

कैसा था प्रदर्शन

श्रीलंका के रुमेश थरंगा ने 85.99 मीटर के थ्रो से शुरुआत कर बढ़त बनाई, वहीं नीरज चोपड़ा ने अपनी पहली कोशिश में 83.54 मीटर भाला फेंका। इसके बाद नीरज ने दूसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए 88.05 मीटर का थ्रो किया और कुछ समय के लिए पहले स्थान पर पहुंच गए। हालांकि मुकाबले के अंत में वह दूसरे स्थान पर रहे। पथिरगे ने अपने अगले प्रयास में 88.14 मीटर का थ्रो कर नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ दिया और बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद नीरज ने तीसरे प्रयास में 83.72 मीटर भाला फेंका, लेकिन चौथी कोशिश में उनका थ्रो फाउल हो गया।

नीरज ने पांचवां प्रयास नहीं किया और सीधे अपने छठे व आखिरी थ्रो के लिए मैदान में उतरे। इस दौरान पथिरगे ने अपनी बढ़त बनाए रखी और नीरज को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

दूसरे स्थान पर करना पड़ा संतोष

नीरज चोपड़ा ने अपने अंतिम प्रयास में 82.15 मीटर का थ्रो किया, लेकिन यह दूरी उन्हें रुमेश पथिरगे से आगे ले जाने के लिए पर्याप्त नहीं रही। इस तरह नीरज को प्रतियोगिता में दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। पथिरगे ने आखिरी प्रयास में फाउल किया, फिर भी उनका 88.14 मीटर का थ्रो सबसे बेहतर रहा और इसी के दम पर उन्होंने मुकाबला जीत लिया। यह जीत नीरज के खिलाफ उनकी एक और बड़ी सफलता रही, इससे पहले वह दोहा और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारतीय स्टार से आगे रह चुके हैं।

Hockey World Cup 2026: पाकिस्तान को फिर मिली करारी शिकस्त, भारत ने 5-3 से हराया

डायमंड लीग में नहीं होगी नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की भिड़त, पाक खिलाड़ी ने अचानक वापस लिया नाम

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। वहीं खराब प्रदर्शन के बाद नदीम ने इस महीने के अंत में लॉजेन में होने वाली डायमंड लीग प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया है। लुसाने डायमंड लीग का आयोजन 21 अगस्त को होगी। इस लीग से नदीम ने अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं अब डायमंड लीग में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का सामना पाकिस्तान के अरशद नदीम के साथ नहीं होगा।

एशियन गेम के लिए करना चाहते हैं तैयार

नदीम के डायमंड लीग से पीछे हटने की वजह एशियन गेम्स 2026 और विश्व एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप के लिए तैयारी बताया जा रहा है। फिलहाल नदीम लाहौर में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बाद वह अपने कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और स्थानीय प्रशिक्षकों की देखरेख में कुछ हफ्तों की ट्रेनिंग के लिए दक्षिण अफ्रीका जाएंगे। अरशद नदीम के पर्सनल ट्रेनर सलमान बट के अनुसार, नदीम अब सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी फिटनेस और शरीर पर खास ध्यान दे रहे हैं। इसके बाद वह 6 से 14 सितंबर तक बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में नजर आएंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स खराब प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स में अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ग्लासगो की ठंडी और तेज हवाओं वाली परिस्थितियों में वह टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके। इस मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। खराब प्रदर्शन के बाद नदीम को पाकिस्तान में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा था।

PAAF ने नदीम से बनाई दूरी

इस बीच पाकिस्तान के अधिकारियों पर भी सवाल उठे। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, कोच सलमान बट को पद पर बनाए रखने को लेकर विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने अरशद नदीम से दूरी बना ली। इसके चलते ओलंपिक चैंपियन को अपनी ट्रेनिंग और तैयारियों का ज्यादातर काम खुद ही संभालना पड़ा। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोचों के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद भी रोक दी थी। इसके कारण अरशद नदीम को ग्लासगो की अलग मौसम परिस्थितियों के बावजूद लाहौर में सलमान बट की देखरेख में ही ट्रेनिंग करनी पड़ी। इससे उनकी तैयारियों पर भी असर पड़ा।

CWG 2026: पीरियड्स के दर्द को हराकर जीता मेडल, घर लौटने के बाद ज्ञानेश्वरी ने बताया कैसा था वो पल

CWG 2026: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव का शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में मेडल जीता है। वहीं मुकाबले के दिन ज्ञानेश्वरी यादव पीरियड्स के दर्द से परेशान थीं। पीरियड्स के पहले दिन असहनीय दर्द के बाद भी ज्ञानेश्वरी ने अपना ध्यान लक्ष्य से नहीं हटने दिया।उन्होंने कहा कि पूरे मुकाबले के दौरान वह खुद को लगातार फोकस बनाए रखने के लिए प्रेरित करती रहीं और आखिरकार ग्लासगो में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहीं। वहीं अब उनका अगला लक्ष्य सितंबर महीने में होने वाले एशियन गेम्स है।  हाल ही में ज्ञानेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पीरियड्स के दर्द के दौरान कैसे गेम पर फोकस बनाए रखा

पीरियड्स के दौरान भी की थी ट्रेनिंग

पीटीआई से बातचीत में ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया, “मैंने पहले भी पीरियड्स के दौरान ट्रेनिंग की थी, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि पीरियड्स के पहले दिन ही मुझे कॉम्पिटिशन में उतरना पड़ा। उस समय मैं खुद से बार-बार कह रही थी कि ध्यान मत भटकने देना। मेरे परिवार और कोच ने भी लगातार मेरा हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि सब ठीक होगा।” उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मुकाबले में शांत रहकर प्रदर्शन किया और पहली लिफ्ट सफल होने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।

ज्ञानेश्वरी ने कहा, “मैंने खुद से कहा कि मेरे लक्ष्य के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं है। इसी सोच ने मुझे अपनी सभी लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी करने की ताकत दी।”

माता-पिता ने दिया साथ

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, परिवार, कोच और राजनांदगांव के लोगों के सहयोग को दिया। ज्ञानेश्वरी ने कहा, “हर सफलता के पीछे लंबा संघर्ष होता है। मेरे माता-पिता ने भी मेरे साथ हर मुश्किल का सामना किया। आज भी मुझे याद है कि मेरे पिताजी रोज साइकिल से मुझे जिम लेकर जाते थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह खुद नेशनल या इंटरनेशनल लेवल तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते थे कि मैं उनका सपना पूरा करूं और देश का नाम रोशन करूं।”

छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया 30 लाख का इनाम

ज्ञानेश्वरी यादव की शानदार उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने उनके लिए 30 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्हें पुलिस विभाग में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के पद पर विशेष प्रमोशन देने को भी मंजूरी दे दी गई।

CWG 2026: ‘न फंड मिला, न विदेशी कोच…’ पाकिस्तान ने छोड़ा ओलंपिक मेडल विनर अरशद नदीम का साथ! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नदीम शीर्ष आठ खिलाड़ियों में भी जगह बनाने में सफल नहीं हुए और नौवें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं ओलंपिक विनर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके खेल और तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मुताबिक, अरशद नदीम के खराब प्रदर्शन की वजह सिर्फ उनका फॉर्म ही नहीं, बल्कि तैयारी के दौरान आई दिक्कतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खेल अधिकारियों ने उन्हें जरूरी सुविधाएं और पूरा सहयोग नहीं दिया, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हुई।

पाकिस्तान ने नहीं दी कोई मदद

रिपोर्टों के अनुसार, वह पूरी तरह फिट नहीं थे और उनकी तैयारियां भी प्रभावित रहीं। PTI की एक रिपोर्ट में, एथलीट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि, पिछले साल लंबे समय से अरशद नदीम के कोच रहे सलमान बट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे दूरी बना ली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद फेडरेशन ने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को अपनी तैयारियां खुद संभालने के लिए छोड़ दिया और उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई मांगों पर भी कोई जवाब नहीं दिया।

नहीं जारी किए फंड

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर रखने के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए। इसके चलते अरशद नदीम को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही प्रैक्टिस करना पड़ा। बताया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार उन्हें दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग के साथ काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बजाय उन्होंने लाहौर और ग्लासगो के अलग-अलग मौसम के बावजूद अपने पुराने कोच सलमान बट की देखरेख में ही तैयारियां पूरी कीं।

अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने भी माना कि वह कॉमनवेल्थ खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब भी नहीं थे और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रतियोगिता में उतरे। बताया गया कि खेलों से पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड में सिर्फ एक तैयारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।

CWG 2026 में भारत पर मेडल की बारिश, इंडियन बॉक्सर्स ने मचाया धमाल, जीत लिए पांच गोल्ड मेडल

भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज भारत की झोली में कई मेडल आए हैं। भारतीय मुक्केबाजों ने फाइनल मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार गोल्ड मेडल अपने नाम किए। जैस्मिन लैम्बोरिया, प्रीति पवार, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर गोल्ड मेडल जीता है। वहीं, पुरुष वर्ग में जदुमणि सिंह फाइनल में हार गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। आइए जानते हैं भारत ने अबतक कुल कितने मेडल जीत चुके हैं।

भारत ने जीते 5 गोल्ड

महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में हराकर गोल्ड जीता। इसके बाद विश्व चैंपियन जैस्मिन लैम्बोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात दी। वहीं, 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को हराकर भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराकर गोल्ड पर कब्जा किया है।

अरुंधति चौधरी का प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की महिला मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की चैंटेल रीड पर शुरू से ही दबाव बनाए रखा और पूरे मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखा। अंत में निर्णायकों ने सर्वसम्मति से 5-0 का फैसला अरुंधति चौधरी के पक्ष में सुनाया। इस शानदार जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग की चैंपियन बन गईं।

प्रिया घनघस ने जीता गोल्ड

महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की मैरी अल-अहमदीह को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबला काफी कड़ा रहा, लेकिन प्रिया ने संयम और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। उनकी इस सफलता के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या चार हो गई।

साक्षी ने जीता गोल्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को एकतरफा अंदाज में हराया और उनके लंबे समय से चले आ रहे जीत के सिलसिले को भी रोक दिया। पूरे टूर्नामेंट में साक्षी का प्रदर्शन दमदार रहा और उन्होंने अपने सभी मुकाबले शानदार अंदाज में जीतकर खिताब पर कब्जा जमाया। वहीं, पुरुष वर्ग के मुकाबले में जदुमणि सिंह का सामना ऑस्ट्रेलिया के जे डिक्सन से हुआ। मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंत में जदुमणि को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

आज इन्हें भी मिला गोल्ड मेडल

साक्षी चौधरी की स्वर्णिम जीत से पहले भी भारत की महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया था। महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद 57 किलोग्राम वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन जैस्मीन लैम्बोरिया ने उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को मात देकर भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाल दिया। दोनों खिलाड़ियों की जीत ने भारतीय बॉक्सिंग टीम का शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

अब तक भारत ने जीता है 27 मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 33 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 10 गोल्ड, 15 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इन शानदार नतीजों की बदौलत भारत पदक तालिका में 5वें स्थान पर बना हुआ है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया 142 पदकों के साथ शीर्ष पर है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक 59 स्वर्ण, 34 रजत और 49 कांस्य पदक जीतकर पहले स्थान पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

Who is Yash Vir Singh: बांस के भाले से शुरू की थी प्रैक्टिस…आज CWG 2026 जीता ब्रॉन्ज मेडल, जानें कौन है यश वीर सिंह

Who is Yash Vir Singh: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की जैवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। जैवलिन थ्रो के फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता तो वहीं यश वीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। शुक्रवार को यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पर्सनल बेस्ट) थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। वहीं, स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ 85.83 मीटर थ्रो किया और सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों पदक जीता है। श्रीलंका के रुमेश थरंगा (89.75 मीटर) ने गोल्ड मेडल जीता है। यश वीर सिंह के यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। आइए जानते हैं कौन है यश वीर सिंह

पहली बार लिया हिस्सा

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने वाले 24 वर्षीय यश वीर सिंह ने अपने आखिरी और छठे प्रयास में पर्सनल बेस्ट 85.41 मीटर का शानदार थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इससे पहले उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 83.72 मीटर था। इस जीत के साथ यश वीर उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष जैवलिन थ्रो में पदक जीता है। उनसे पहले नीरज चोपड़ा ने 2018 में गोल्ड और 2026 में सिल्वर मेडल जीता था, जबकि काशीनाथ नाइक ने 2010 में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

कौन है यश वीर सिंह

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले यश वीर सिंह ने अपने खेल करियर की शुरुआत बास्केटबॉल से की थी। लेकिन बाद में उन्होंने भाला फेंक को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दिनों में उन्होंने बांस से बने भाले से प्रैक्टिस किया और धीरे-धीरे प्रोफेशनल इक्विपमेंट के साथ ट्रेनिंग शुरू की। यश वीर सिंह के पिता राय सिंह से जैवलिन थ्रो से बारीकियां सिखी। यश के पिता खुद राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। मेहनत और लगातार प्रैक्टिस का नतीजा यह रहा कि 2022 में यश ने इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में 80 मीटर से ज्यादा भाला फेंककर नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

यश वीर ने किया शानदार प्रदर्शन

यश वीर सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सीनियर स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 2025 में उन्होंने दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां 82.57 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवें स्थान पर रहे। इसी बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें विश्व रैंकिंग के आधार पर 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी चुना गया, जहां उन्होंने जापान की राजधानी टोक्यो में भारत की ओर से हिस्सा लिया। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहे यश ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।