पहली बार एशियन गेम्स में दिख रहा इन खिलाड़ियों का दम, पहले ही बना चुके हैं खास पहचान!

जापान के आइची-नगोया में 19 सितंबर से शुरू हुए 2026 एशियन गेम्स में भारत कई खिलाड़ी हिस्सा ले रहे है। इस बार कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ऐसे युवा चेहरे भी मैदान में उतर चुके हैं, जो पहली बार एशियन गेम्स में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। जिसमे कई दिग्गज खिलाडियों के नाम शामिल हैं। जिनने अपने-अपने खेल में पहले ही कई अहम मुकाबलों में पहचान बनाई है और अब एशियन गेम्स में उनका प्रदर्शन देखने लायक होगा।

1. साक्षी चौधरी पर रहेंगी नजरें

  • उम्र: साक्षी चौधरी 26 साल की हैं और एशियन गेम्स में पहली बार हिस्सा लेंगी।
  • अचीवमेंट: उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
  • वर्ल्ड बॉक्सिंग कप: उन्होंने 54 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।
  • एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप: 2021 में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। एशियन गेम्स में उनका डेब्यू उनके करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

2. सुरुचि फोगाट का शूटिंग में जलवा

  • उम्र: सुरुचि फोगाट सिर्फ 20 साल की हैं और कम उम्र में शूटिंग में पहचान बना चुकी हैं।
  • इवेंट: वह 10 मीटर एयर पिस्टल में हिस्सा लेती हैं।
  • वर्ल्ड कप: उन्होंने वर्ल्ड कप में कई गोल्ड मेडल जीते हैं और वर्ल्ड कप फाइनल का खिताब भी अपने नाम किया है।
  • बड़ी जीत: पिछले साल लीमा में उन्होंने ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। एशियन गेम्स में यह उनका पहला मौका होगा।

3. सुजीत कलकल की कुश्ती पर नजर

  • उम्र: हरियाणा के 23 साल के फ्रीस्टाइल पहलवान सुजीत कलकल एशियन गेम्स में डेब्यू करेंगे।
  • वेट कैटेगरी: वह 65 किग्रा वर्ग में मुकाबला करते हैं।
  • एशियन चैंपियनशिप: उन्होंने इस वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
  • अंडर-23 अचीवमेंट: अंडर-23 लेवल पर भी उनके नाम गोल्ड मेडल रहा है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद अब उन्हें सीनियर लेवल पर बड़े स्टेज का एक्सपीरियंस मिलेगा।

4. आयुष शेट्टी का बैडमिंटन मुकाबला

  • उम्र: आयुष शेट्टी 21 साल के हैं और एशियन गेम्स में पहली बार खेलेंगे।
  • थॉमस कप: उन्होंने यहां ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
  • एशियन चैंपियनशिप: उनके नाम सिल्वर मेडल भी रहा है।
  • बड़ी जीत: वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने उस समय के वर्ल्ड नंबर-1 शी युकी को हराया था। एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने कुनलावुत वितिदसर्न और जोनाथन क्रिस्टी के खिलाफ भी जीत दर्ज की है।

5. रोहित यादव की जैवलिन में चुनौती

  • टीम: रोहित यादव नीरज चोपड़ा के साथ भारतीय जैवलिन टीम में शामिल हैं।
  • एशियन गेम्स: जापान में होने वाले एशियन गेम्स में वह पहली बार हिस्सा लेंगे।
  • सीजन परफॉरमेंस: इस सीजन में वह 87 मीटर से ज्यादा के दो थ्रो कर चुके हैं।
  • मेजर अचीवमेंट: अगस्त में भुवनेश्वर में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर लेवल मीट में उन्होंने 87.68 मीटर का थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता था। अब उनका मुकाबला एशिया के मजबूत जैवलिन खिलाड़ियों से होगा।

एशियन गेम्स इन युवा खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक नई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय करियर में आगे बढ़ने का बड़ा मंच भी है। अब उनके डेब्यू को लेकर खेल प्रेमियों की नजरें इन पांचों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी।

दोस्त से उधार लिया पोल और तोड़ डाला नेशनल रिकॉर्ड! मृत पिता की पासपोर्ट साइज फोटो हाथों में ले सिंधुश्री ने सुनाई रुला देने वाली कहानी

खेलों की दुनिया से अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो न सिर्फ आपको हैरान करती हैं बल्कि आपकी आंखों में आंसू भी ले आती हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाली सफलता पाई है कर्नाटक की 25 वर्षीय एथलीट जी सिंधुश्री ने। राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप में सिंधुश्री ने न केवल महिलाओं के पोल वॉल्ट में एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया बल्कि गोल्ड मेडल जीतकर एशियाई खेलों का टिकट भी पक्का कर लिया है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे छिपी है बेहद तंगहाली, संघर्ष और एक बेटी के आंसुओं की वह कहानी जिसने वहां मौजूद हर शख्स को रुला दिया।

दोस्त से उधार लिया पोल और रच दिया इतिहास

सिंधुश्री के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह प्रतियोगिता के लिए एक सही पोल खरीद सकें। वित्तीय संकट के कारण वह अब तक छोटे पोल के साथ प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर थीं। उन्होंने छोटे पोल के साथ ही अभ्यास किया और अपनी तकनीक सीखी, जिसके कारण फेडरेशन कप जैसे पिछले टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था क्योंकि ये पोल ढीले हो चुके थे। राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप से ठीक दो हफ्ते पहले सिंधुश्री को उनके एक दोस्त से उधार में बड़ा पोल मिला। दोस्त से उधार मिले इसी पोल के सहारे कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के भद्रावती की रहने वाली इस अनजान खिलाड़ी ने वह कर दिखाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

सिंधुश्री ने 4.25 मीटर की ऊंचाई पार कर तमिलनाडु की एथलीट बारनिका इलांगोवन के एक महीने पुराने 4.20 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया और इतिहास रच दिया। उन्होंने चेन्नई में मई के महीने में ‘इंडियन एथलेटिक्स सीरीज 6’ के दौरान बनाए गए अपने पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (4 मीटर) में पूरे 25 सेंटीमीटर का सुधार किया।

हाथों में मृत पिता की तस्वीर थामे भावुक हो गईं सिंधुश्री

जीत के बाद जब सिंधुश्री मीडिया के सामने आईं, तो उनके हाथों में उनके दिवंगत पिता आर गणेश की एक तस्वीर थी। भावुक सिंधुश्री ने बताया कि ‘साल 2022 में मेरे पिता का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया था। मैंने आज जो कुछ भी हासिल किया है, वह सब मेरे पिता की बदौलत है। हर सुबह वह मुझे दौड़ने के लिए ले जाते थे और वह चाहते थे कि मैं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए खेलूं। मैं एशियाई खेलों में हिस्सा लेकर उनके इस सपने को पूरा करने जा रही हूं।’ उन्होंने आगे कहा कि मेरा चयन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए भी हुआ था, लेकिन तब मेरे पिता मेरा खेल देखने के लिए वहां नहीं थे। यह सब एक सपने जैसा लग रहा है और यह केवल मेरे पिता की वजह से मुमकिन हो पाया है।

परिवार के खिलाफ जाकर पिता ने दिलाया था दाखिला

सिंधुश्री ने बताया कि उनके परिवार में दूर-दूर तक कोई भी खेलों में नहीं था। परिवार के बाकी सदस्य एक लड़की को खेलों में भेजने के बिल्कुल खिलाफ थे। लेकिन उनके पिता ने समाज और परिवार के सभी लोगों से लड़ाई लड़ी और उन्हीं की जिद के कारण साल 2016 में सिंधुश्री बेंगलुरु के साई हॉस्टल में शामिल हो सकीं, जहां से उनके खेल के सफर की शुरुआत हुई।

 

बेहद तंगहाली में जी रहा है परिवार, नौकरी की तलाश

इस एथलीट का जीवन भारी आर्थिक तंगहाली में बीत रहा है। उनके पिता आर गणेश एक इलेक्ट्रिशियन थे और उनकी मां सिलाई का काम करती हैं। चूंकि मां की कमाई छोटी बहन की पढ़ाई में खर्च हो जाती है इसलिए सिंधुश्री के दादाजी उन्हें वित्तीय रूप से थोड़ा बहुत सहयोग कर रहे हैं। सिंधुश्री ने बताया कि मेरे पास कोई स्पॉन्सर नहीं है, कोई नौकरी नहीं है और गुजारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। मैं नौकरी की तलाश कर रही थी, लेकिन प्रदर्शन अच्छा न होने के कारण नौकरी नहीं मिल पा रही थी। मुझे उम्मीद है कि इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद मुझे नौकरी मिल जाएगी ताकि मैं अपने परिवार की मदद कर सकूं।

इससे पहले सिंधुश्री ने घरेलू स्तर पर सिर्फ एक बड़ा पदक जीता था, जब उन्होंने साल 2023 के नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में इसी मैदान पर 3।80 मीटर के प्रदर्शन के साथ सिल्वर मेडल जीता था।

400 मीटर की रनर से पोल वॉल्टर बनने का सफर

सिंधुश्री ने शुरुआत एक 400 मीटर धावक के रूप में की थी। लेकिन साल 2017 में एक स्थानीय कोच ने उन्हें पोल वॉल्ट में शिफ्ट होने की सलाह दी क्योंकि कोच का मानना था कि वह पोल वॉल्ट में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। सिंधुश्री के कोच विजीश एमएम ने उनकी इस सफलता पर कहा कि धैर्य ही सिंधुश्री की सबसे बड़ी ताकत है। कई सालों तक सही पोल न होने और आर्थिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। कोच को पूरा भरोसा है कि सही पोल और सही पोषण मिलने पर वह एशियाई खेलों में 4.30 मीटर से ऊपर कूदकर देश के लिए पदक ला सकती हैं। गौरतलब है कि साल 2022 के एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल का मार्क 4.30 मीटर था।