Asian Games में इस बार किसी भी हाल में पदक का सूखा खत्म करना चाहती हैं मीराबाई

साइखोम मीराबाई चानू आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियाई खेलों में हिस्सा लेंगी और उस बड़े मेडल को जीतने की कोशिश करेंगी जो उनके शानदार वेटलिफ्टिंग करियर में अभी तक नहीं मिल पाया है। ओलंपिक मेडल विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन को एशियाई खेलों के लिए भारत की पांच सदस्यीय वेटलिफ्टिंग टीम में शामिल किया गया है। ये खेल जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

एशियाई खेल 2026 में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में होगी।मीराबाई चानू, जो महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी, ने अभी तक एशियाई खेलों में कोई मेडल नहीं जीता है। वह हांगझोऊ 2023 में मेडल जीतने के बहुत करीब थीं, लेकिन चौथे स्थान पर रहीं।

मीराबाई ने कहा है, “एशियाई खेलों का मेडल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगी क्योंकि मुझे वहां जीतना है जहां मैंने पहले कभी मेडल नहीं जीता है। इसलिए, एशियाई खेल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।” आइची-नागोया में मेडल जीतने से मीराबाई चानू का तीन बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स – ओलंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स – में मेडल का कलेक्शन पूरा हो जाएगा। मीराबाई चानू ने पिछले महीने लगातार तीसरा गोल्ड और कुल मिलाकर चौथा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीता था।

एशियाई खेलों के लिए भारत की वेटलिफ्टिंग टीम में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं; इनमें से पांच में से चार ने पिछले महीने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीते थे। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की सिल्वर मेडल विजेता ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर क्रमशः महिलाओं के 53 किग्रा और 69 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। सेराम निरुपमा देवी 61किग्रा कैटेगरी में महिला टीम को पूरा करती हैं।

ऋषिकांत सिंह चनमबम एशियाई खेलों में भारत के अकेले पुरुष वेटलिफ्टर होंगे। उन्होंने पिछले महीने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था और वे 60किग्रा कैटेगरी में हिस्सा लेंगे।भारत ने एशियाई खेलों में वेटलिफ़्टिंग में 14 मेडल जीते हैं – पांच सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज़ – लेकिन अभी तक कोई गोल्ड मेडल नहीं जीता है।


मीराबाई चानू ने PM को बताया, क्यों गोल्ड जीतने के बाद छलक आए थे आंसू (Video)

Mirabai Chanu

Mirabai Chanu

 

जब प्रधानमंत्री ने मीराबाई से उनसे सम्मान समारोह में भावुक होने का कारण पूछा तो मीराबाई ने पेरिस ओलंपिक में खाली हाथ आने को कारण बताया। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान  मीराबाई ने कुल 190 किलोग्राम, स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंव जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाया और स्वर्ण पदक जीता। मीरबाई चानू ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था।

पदक मंच पर सबसे ऊंचे स्थान पर खड़े होकर राष्ट्रगान गाते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उनके बालों में तिरंगे के रंग की रिबन भी सजी हुई थी।मीराबाई ने तब  पत्रकारों से बातचीत में सबसे पहले कहा था, ‘‘जल्दी-जल्दी करो, मैंने दो दिन से कुछ खाया नहीं है। ’’

प्रधानमंत्री मोदी ने जब इसका कारण पूछा तो मीराबाई ने कहा , ‘सर, वह खुशी के आंसू थे। रोने का कारण पेरिस ओलंपिक में विफलता था। इसके बाद चोटों का एक लंबा सिलसिला चला। इस दौरान परिवार में भी काफी कुछ चला लेकिन पदक मंच पर जब राष्ट्रगान बजा तो मेरे आंसू बह निकले।

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई के लिए वह दिन बेहद भावुक रहा। अपनी मां और कोच विजय शर्मा के समर्थन का जिक्र करते हुए वह एक बार फिर भावुक हो गईं थी।

उन्होंने कहा था, ‘‘उन्होंने हर अच्छे-बुरे समय में मेरा साथ दिया है। परिवार और दोस्तों की उम्मीदों का मुझ पर काफी दबाव था। भारत के लिए तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर बहुत खुशी  है। मैं इन खेलों में खुद पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहती थी, लेकिन मेरा पहला प्रयास असफल रहा। कोच और मैंने पहले से तय किया था कि मैं दोनों स्पर्धाओं में केवल दो-दो प्रयास ही करूंगी। ’’

मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार जीता गोल्ड

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राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ भारत के लिए गोल्ड मेडल का खाता खोला बल्कि एक नया इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरा गोल्ड मेडल जीतकर अपनी हैट्रिक पूरी की। 

 

मीराबाई ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। उन्होंने स्नैच राउंड में 85 किग्रा वजन उठाया। यह वजन कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी द्वारा उठाया गया सबसे ज्यादा वजन है। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 105 किलो वजन उठाया।  

 

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने रविवार को भारत को दिलाया पहला गोल्ड जीता तो भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांत सिंह भी रजत पदक जीतने में सफल रहे। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया।

 

पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि भारतीय भारोत्तोलन में एक और गौरवशाली अध्याय!

प्रतिभाशाली मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार स्वर्ण पदक जीतने और अपने नाम कुल चार पदक करने वाली मीराबाई हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। उन्हें ढेरों बधाई! आगे के सभी प्रयासों के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

मीरबाई चानू ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत चुकी है।

CWG 2026: ‘इस शख्स ने मेरा साथ हमेशा…’, गले में चमकता गोल्ड मेडल, आंखों में आंसू…इमोशनल हुईं मीरा बाई चानू

भारतीय स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रच दिया है। मीराबाई चानू ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई चानू काफी इमोशल हो गई और पोडियम पर उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं मीराबाई ने अपनी इस उपलब्धि को अपनी मां टॉम्बी देवी और कोच विजय सिंह को समर्पित किया।

ग्लासगो में गोल्ड जीतने के साथ ही मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन बार गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला वेटलिफ्टर बनने का गौरव भी हासिल किया। इससे पहले 2018 और 2022 में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी है। 2026 में मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम, यानी कुल 190 किलोग्राम वजन उठाया।

इमोशनल हुई मीराबाई

मेडल जीतने के बाद मीडिया से बात करते हुए मीराबाई चानू ने कहा, “मुझे हर किसी का भरपूर सहयोग मिला, लेकिन सबसे बड़ा साथ मेरी मां का रहा। वह हमेशा मुझसे कहती थीं कि ‘तुम ये कर सकती हो।’ उनकी यही बातें मुझे हमेशा आगे बढ़ने की हिम्मत देती रहीं।” मीराबाई ने इस जीत के लिए अपने कोच को भी धन्यवाद किया।

 

उन्होंने आगे कहा, “मेरे कोच विजय सर ने भी हर कदम पर मेरा साथ दिया। वेटलिफ्टिंग में चोट लगने का खतरा हमेशा रहता है और बढ़ती उम्र के साथ इस खेल में खुद को फिट रखना आसान नहीं होता। लेकिन उन्होंने मेरी ट्रेनिंग, खान-पान और आराम, हर चीज का पूरा ध्यान रखा।” मीडिया से बात करते हुए मीराबाई चानू अपने आंसू को रोक नहीं पा रही थी। वह काफी इमोशनल हो गई थी।

कैसा रहा मुकाबला

मीराबाई चानू की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और वह स्नैच में 82 किलोग्राम वजन उठाने की पहली कोशिश में सफल नहीं हो सकीं। लेकिन, उन्होंने तुरंत वापसी करते हुए दूसरी कोशिश में 82 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बना दिया। इसके बाद तीसरे प्रयास में 85 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और एक और नया रिकॉर्ड अपने नाम करते हुए मुकाबले में बढ़त मजबूत कर ली। क्लीन एंड जर्क में भी मीराबाई चानू की पहली 105 किलोग्राम की कोशिश सफल नहीं रही, लेकिन उन्होंने दूसरी बार में यही वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बना दिया और स्वर्ण पदक लगभग तय कर लिया।

मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम के साथ कुल 190 किलोग्राम वजन उठाया। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने नाइजीरिया की रूथ असुको न्योंग को 22 किलोग्राम के बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया।