CJI के खिलाफ विवादित पोस्ट को लेकर घिरी केरल कांग्रेस, आलोचना के बाद कर्मचारी को पद से हटाया, बीजेपी ने बताया शर्मनाक

Kerala Congress: कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अकाउंट से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के खिलाफ की गई एक विवादित पोस्ट सोमवार को व्यापक रूप से वायरल हुई। लेकिन सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना होने के बाद इसे हटा दिया गया। पार्टी ने पोस्ट करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी पद से हटा दिया। केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने एक बयान में कहा कि पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट पर प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ विवादित पोस्ट करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है।

जोसेफ ने कहा कि यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की जानकारी, सहमति या परामर्श के बिना की गई थी। उन्होंने कहा, “केपीसीसी इस बात की जांच करेगी कि ऐसी पोस्ट किन परिस्थितियों में की गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस पार्टी को कोई असहमति नहीं है। जोसेफ ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस रुख के विपरीत व्यक्त किए गए विचार केपीसीसी नेतृत्व का आधिकारिक रुख नहीं है।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने हटाई जा चुकी पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि न्यायपालिका पार्टी का अगला निशाना होगी। रीजीजू ने X पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस भारत के सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करना चाहती है। सभी भारत-विरोधी गिरोह एकजुट हो रहे हैं। सभी देशभक्त भारतीय भी एकजुट होंगे।”

BJP ने बताया शर्मनाक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने CJI के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी ने आरोप लगाया कि पार्टी अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है जो बेहद शर्मनाक है। BJP के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दल पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग की माओवादी कांग्रेस में पूरी तरह बदल चुकी और चरम ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता अपना चुकी कांग्रेस अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है, जो शर्मनाक है।”

BJP प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी मानसिकता पूरी तरह अराजकतावादी हो गई है। यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा, “अब कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक हैंडल से CJI के इस्तीफे की मांग की जा रही है।” उन्होंने सवाल किया, “संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने और साथ ही संविधान की दुहाई देने से बड़ी राजनीतिक पाखंड की मिसाल क्या हो सकती है?”

उन्होंने कहा, “अगर चुनाव हारते हैं, तो निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं। अगर फैसला उनके खिलाफ आता है, तो न्यायपालिका को निशाना बनाते हैं।” BJP सांसद निशिकांत दुबे ने भी केरल कांग्रेस की ओर से प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी पर हमला बोला।

दुबे ने X पर कहा, “राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने के बाद ‘महाराजा’ राहुल गांधी ने अब उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की भी मांग कर दी है।” BJP सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “सूत्रों के अनुसार, इन इस्तीफों के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे, शरजील इमाम राष्ट्रपति बनेंगे, अभिजीत दीपके उपराष्ट्रपति बनेंगे, प्रियंका गांधी सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी और खालिस्तानी पन्नून को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “इस बीच, (जॉर्ज) सोरोस भारत के अमेरिका में राजदूत होंगे।” BJP के एक अन्य प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि CJI द्वारा गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किए जाने से यह महत्वपूर्ण संदेश गया है कि न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए।

कब शुरू हुआ विवाद?

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी पाबंदियों के मद्देनजर स्थिति के बारे में पूछे जाने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “ये कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। ये मेरा विषय नहीं है।” CJI राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की स्थापना की 33वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या कानून बनाने वाला कोई व्यक्ति। उनसे पूछा गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार किए जाने के बाद विपक्षी नेता अपनी शिकायतें उनके सामने कैसे रख सकते हैं।

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CJI की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की केरल इकाई ने C पर एक पोस्ट में कहा, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपका स्थान लेने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।” हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया।

CJI Video: कांग्रेस नेताओं से मिलने से इनकार के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का पहला रिएक्शन, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

Delhi Protest Update: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार (12 अक्टूबर) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं। कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी शिकायत लेकर अदालत आ सकता है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर पहला बयान दिया है। CJI ने बताया कि उन्हें रविवार 11 अक्टूबर को मुलाकात के अनुरोध से जुड़ा पत्र मिला था। इसके बाद उन्होंने उसी रात जवाब देकर मुलाकात नहीं कर पाने की वजह बता दी थी।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था। और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा।” उन्होंने यह भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है, और हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।”

CJI सूर्यकांत ने यह बयान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। चीफ जस्टिस के इस बयान को विपक्षी नेताओं के उस अनुरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर CJI से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने और ज्ञापन सौंपने की मांग की थी।

विपक्षी नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं करेंगे CJI?

इससे पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। पीटीआई के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेता से याचिका दायर करने को कहा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सीजेआई ने कहा कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके लिए 24 घंटे उपलब्ध है। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे पहले, अपनी मांगों को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च’ का नाम दिया है। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उनके आरोपों पर उचित कार्रवाई हो।

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दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, कई जगह बैरिकेडिंग

विपक्षी नेताओं के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी तैनात हैं। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक कुछ स्टेशनों के गेट बंद रहेंगे।

INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार की लड़ाई, INDIA गठबंधन आज सुप्रीम कोर्ट तक करेगा मार्च

INDIA Bloc Protest: INDIA गठबंधन सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में एक नया विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। यह विरोध चुनाव में कथित गड़बड़ियों, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से हस्तक्षेप करने की मांग करने की योजना बनाई थी। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पहल की अगुवाई करेंगे।

हालांकि, CJI ने विपक्ष के नेताओं की मुलाकात की मांग को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उन्हें याचिका दायर करके अदालत का रुख करना चाहिए।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, नेताओं को ईमेल के जरिए एक विस्तृत जवाब भेजा गया, जिसमें इस फैसले के पीछे की वजहें बताई गई थीं। इस जवाब में कहा गया कि इन आरोपों पर प्रशासनिक स्तर पर बात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए बेहतर ढंग से विचार किया जा सकता है।

बता दें कि यह प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने, भारी सुरक्षा तैनाती और हिंसा के आरोपों के एक दिन बाद हो रहा है।

वहीं, कांग्रेस ने प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए अपने सांसदों से सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने को कहा है।

राहुल गांधी ने केंद्र पर युवाओं को दबाने का आरोप लगाया

INDIA गठबंधन के अगले दौर के विरोध प्रदर्शनों की घोषणा करते हुए, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए पिछले प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं ने छात्रों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की थी।

शनिवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट किए, जिसमें उन्होंने ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली पुलिस पर “गुंडागर्दी” करने और RSS-BJP कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की छूट देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने न केवल खुद गुंडागर्दी की है, बल्कि RSS-BJP के असली गुंडों को महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा करने के लिए खुली छूट और बढ़ावा भी दे रही है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मोगैंबो’ (फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में अमरीश पुरी का निभाया मशहूर विलेन का किरदार) कहकर संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि युवाओं को दबाने की कोशिशों से उनका गुस्सा और बढ़ेगा।

12 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा एक बार फिर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी, यह आवाज पूरे देश में गूंजेगी – पहले से कहीं ज्यादा जोरदार तरीके से।”

गांधी ने प्रधानमंत्री पर चुनावी गड़बड़ियों और असहमति की आवाज को दबाकर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

दिल्ली के हालात के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा, “आज नई दिल्ली में यह नजारा देखने को मिला: पूरा शहर बंद है, इंटरनेट बंद कर दिया गया है, और पुलिस व बीजेपी के गुंडे छात्रों की पिटाई कर रहे हैं।”

राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री को घेर लिया है और कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर कथित तौर पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा, “आज जिन युवाओं और छात्रों पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा और हमलावरों को माकूल जवाब दिया जाएगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

CJI ने INDIA ब्लॉक के नेताओं की मुलाकात की अपील ठुकराई

बता दें कि विपक्षी नेताओं ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से मिलने की योजना बनाई थी। वे उनसे मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसमें कथित ‘वोट चोरी’, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चिंताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दखल देने की अपील की जानी थी।

हालांकि, CJI ने यह कहते हुए मुलाकात की अपील ठुकरा दी कि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि वे याचिका के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाएं।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें चुनावी प्रक्रिया को लेकर ऐसी ही चिंताएं जताई गई थीं।

दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन

यह प्रस्तावित मार्च शनिवार को दिल्ली में की गई कड़ी सुरक्षा कार्रवाई के बाद हो रहा है, जब अधिकारियों ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।

विपक्षी नेताओं और CJP समर्थकों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेना गैर-कानूनी था, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एहतियातन गिरफ्तारियां की गई थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को कई जगहों पर करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और बाद में उन सभी को रिहा कर दिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, CPI(M) नेता पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार शामिल थे।

कार्यकर्ताओं के आरोपों के मुताबिक, CJP के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी विमान से उतारने के बाद हिरासत में लिया गया था।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50,000 रुपये का बेल बॉन्ड और जमानतदार का बॉन्ड जमा करने के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया।

हालांकि, तीनों नेताओं ने अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आशुतोष रंका ने कहा, “हम कोई खतरनाक अपराधी नहीं हैं; हम विरोध करने के लिए नरेंद्र मोदी या अमित शाह के घर नहीं जा रहे हैं। तय जगह पर विरोध करने से शांति भंग नहीं होती।”

सौरव दास ने SIR के मुद्दे पर राजनीतिक एकजुटता की अपील करते हुए कहा: “विचारधारा से परे, सभी राजनीतिक दलों को SIR के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। अगर वोट देने का अधिकार छीन लिया जाता है, तो यह किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को सामान्य सेवाएं जारी रखने का निर्देश दिया

विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। यह नोटिस मेट्रो और ट्रेन सेवाओं के संबंध में कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन पर अवमानना ​​की कार्यवाही की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

बता दें कि दिल्ली मेट्रो ने रविवार को सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर दिया, हालांकि मुख्य रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग अभी भी जारी थी।

प्रदर्शनकारी कई जगहों पर इकट्ठा हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस की बसों में बैठाकर ले जाते हुए भी देखा गया।

जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) जैसे छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल थे। इन सभी को हिरासत में लिया गया।

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Delhi Protest: दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले वकीलों की हिरासत पर बवाल, SCAORA और SCBA ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से की ये अपील

सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जुटे वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर ने न्यायिक व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शन की आजादी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लॉयर एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) और बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर शनिवार (10 अक्टूबर) को दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है।

CJI सूर्यकांत से दखल देने की अपील

10 अक्टूबर को जारी एक प्रेस रिलीज में LAFC ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन ने कहा कि हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उन्हें कानूनी मदद दी जाए और जिन वकीलों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

एसोसिएशन ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का जवाब ताकत, गोपनीयता या अंधाधुंध हिरासत से नहीं दिया जा सकता।” साथ ही, एसोसिएशन ने कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

इसके साथ ही LAFC ने हिरासत में लिए गए हर वकील के नाम, उनके ठिकाने, सुरक्षा और उन्हें हिरासत में लेने के कानूनी आधार की जानकारी मांगी। एसोसिएशन ने उन वकीलों को रिहा करने की मांग की जिन्हें हिरासत में लेने का कोई ठोस और कानूनी आधार नहीं था। इसके अलावा, उन्हें वकील, परिवार के सदस्यों और जरूरी मेडिकल मदद तक पहुंच देने की भी मांग की।

पुलिस कार्रवाई से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग

एसोसिएशन ने विरोध-प्रदर्शन, कथित बल प्रयोग और उसके बाद की हिरासत से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग, पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड, हिरासत रजिस्टर और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की। एसोसिएशन ने बल प्रयोग की खबरों—खासकर महिला वकीलों के खिलाफ—की एक तय समय-सीमा वाली, स्वतंत्र जांच की भी मांग की, और जहां भी गैर-कानूनी कार्रवाई साबित हो, वहां जवाबदेही तय करने और उचित राहत देने की बात कही।

प्रदर्शन करने पर वकीलों को परेशान न किया जाए

LAFC ने यह भी मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी वकील के खिलाफ बदले की भावना से FIR दर्ज न की जाए। वकीलों को डराने-धमकाने या उनके पेशेवर काम पर असर डालने वाली कार्रवाई से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा, एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भविष्य में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने की मांग की है, ताकि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।

इस बीच, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को तुरंत हटाने की मांग की। एसोसिएशन ने मौजूदा हालात को “अघोषित इमरजेंसी” करार देते हुए कहा कि ये हालात इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाते हैं।

प्रस्ताव में कहा गया, “यह तय किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई मौजूदा पाबंदियों को तुरंत हटाया जाए। लोगों की आवाजाही पर लगाई गई सभी पाबंदियां भी फौरन हटाई जाएं, क्योंकि ये मौजूदा सरकार की असंवैधानिक और गैर-कानूनी गतिविधियां हैं।”

एसोसिएशन ने बताया कि यह प्रस्ताव 10 अक्टूबर को हुई एक आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। साथ ही, एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव की एक कॉपी बॉम्बे बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्षों को भेजने का भी फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पुलिस ने वरिष्ठ और युवा वकीलों के साथ-साथ महिला वकीलों को भी हिरासत में लिया। आरोप है कि हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी पर बैज भी नहीं लगा रखे थे।

एसोसिएशन ने हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने का पता बताने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें वकीलों व परिवार के सदस्यों से मिलने की सुविधा देने की मांग की। साथ ही, यह भी कहा कि अगर हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

इसी तरह, SCBA ने भी CJI से अनुरोध किया कि वे अधिकारियों के साथ इस मामले पर बात करें, हिरासत में लिए गए वकीलों का पता लगाएं और हिरासत में लेने की परिस्थितियों व कथित बल प्रयोग की जांच करें। इस प्रस्ताव पर मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने हस्ताक्षर किए।

ये मांगें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सामने आई हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया है, जिन पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया’ (Special Intensive Revision process) से जुड़े आरोप हैं।

मेट्रो पर लगी पाबंदियों को लेकर अवमानना ​​याचिका

इसके अलावा, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

10 अक्टूबर को सुबह 8.17 बजे डायरी नंबर 63801/2026 के तहत दायर इस याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 129 और ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971’ की धारा 12 का हवाला दिया गया है।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कि सेवाओं को रेगुलेट किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, मेट्रो स्टेशन के गेट बंद रखे गए। बता दें कि 9 अक्टूबर को CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा था कि “मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी” और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे ट्रांसपोर्ट से जुड़े नियमों का प्रचार करें और चार दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।

लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया

ANI के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने एहतियाती उपायों के तहत समूहों में आ रहे लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया और आपराधिक बैकग्राउंड वाले करीब 50 लोगों को पकड़ा। बता दें कि नई दिल्ली को 20 जोन में बांटा गया था और स्टेडियमों में डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कनॉट प्लेस में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या लगभग 200 थी।

मुंबई से आने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और तीन अन्य वकीलों को बिना कारण बताए हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने गुरुग्राम स्थित आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की।

सुरक्षा के लिए RAF और CRPF की तैनाती

सुरक्षा व्यवस्था में रैपिड एक्शन फोर्स, दिल्ली पुलिस पिंक फोर्स और CRPF शामिल थे। साथ ही मोहन एस्टेट में ड्रोन, मजबूत बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स भी तैनात किए गए थे। इस दौरान CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए 12-सूत्रीय एडवाइजरी जारी कर हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहों से बचने, आपातकालीन रास्तों को खाली रखने, कानूनी निर्देशों का पालन करने और हिरासत में लिए जाने पर कानूनी सहायता लेने का आग्रह किया है।

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‘8 अरब लोगों के लिए लैपटॉप खरीदने लायक काला धन मौजूद’, ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग पर बोले CJI सूर्यकांत

CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े पैमाने पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि एक साल में दुनिया भर में अवैध तरीके से घुमाया जाने वाला पैसा इतना हो सकता है कि उससे दुनिया के 8 अरब लोगों में से हर एक के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उस पैसे का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा कभी वापस मिल पाता है।

शनिवार को कैम्ब्रिज में ‘इकोनॉमिक क्राइम’ पर 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम के समापन सत्र में बोलते हुए, जस्टिस कांत ने आपराधिक गतिविधियों से कमाए गए पैसे का पता लगाने, उसे जब्त करने और उसे वापस पाने पर वैश्विक स्तर पर ज्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे धोखाधड़ी वाले मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने संसद के कदम उठाने का इंतजार करने के बजाय, ऐसे नए तरह के अपराधों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी है।

‘100 में से एक से भी कम’ पैसा हो पाता है बरामद

जस्टिस कांत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का दायरा इतना बड़ा है कि वैश्विक अनुमानों के आधार पर भी उसे समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “अगर मनी लॉन्ड्रिंग के वैश्विक अनुमान मोटे तौर पर भी सही हैं, तो दुनिया एक साल में इतना पैसा लॉन्डर करती है कि उससे आज धरती पर मौजूद सभी 8 अरब लोगों के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है, और फिर भी खजाने में कुछ पैसे बच जाएंगे।”

इसके बाद उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवैध तरीके से कमाए गए धन का बहुत छोटा हिस्सा ही आखिरकार वापस मिल पाता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अवैध धन की इस विशाल रकम में से सबसे उदार अनुमान के मुताबिक भी 100 में से एक फीसदी से कम ही कभी वापस हासिल किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “हर 100 हिस्सों में से 99 हिस्सों का जिक्र सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में होता है, जबकि वास्तव में सिर्फ एक हिस्से को ही वापस हासिल किया जा पाता है।”

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ समस्या पहचानने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अब ध्यान अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाने और उसे वापस हासिल करने पर होना चाहिए।

पुराने जमाने की धोखाधड़ी से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक

CJI ने कहा कि आर्थिक अपराध कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी बुराई है जो टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सिस्टम में बदलाव के साथ बदलती रही है।

उन्होंने चौथी सदी ईसा पूर्व के एक यूनानी व्यापारी हेगेस्ट्रेटोस का उदाहरण दिया, जिसने कथित तौर पर इंश्योरेंस का क्लेम पाने के लिए अपना माल बेचने के बाद अपना जहाज डुबोने की योजना बनाई थी। जस्टिस कांत ने इस मामले को आर्थिक धोखाधड़ी का शुरुआती उदाहरण बताया।

उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन 40 तरीकों की पहचान की गई थी जिनसे अधिकारी सरकारी राजस्व का गबन कर सकते थे। इस ग्रंथ में ऑडिट, मुखबिर, क्रॉस-वेरिफिकेशन और जब्ती जैसे उपाय भी बताए गए थे।

CJI ने कहा, “अर्थशास्त्र में बताए गए चोरी के 40 तरीकों के साथ-साथ अब पता लगाने, फ्रीज करने और वापस पाने के चालीस बेहतर तरीकों को भी शामिल किया जाए।”

भारत का कानूनी ढांचा

जस्टिस कांत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए भारत के कानूनी ढांचे का जिक्र किया, जिसमें ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’ और ‘फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018’ शामिल हैं।

उन्होंने अपराध से मिली कमाई का पता लगाने, उसे जब्त करने और अपने कब्जे में लेने के लिए इस्तेमाल होने वाले संस्थागत सिस्टम के तहत खास एजेंसियों और स्पेशल कोर्ट का भी जिक्र किया।

CJI ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेजी से जरूरी होता जा रहा है क्योंकि गैर-कानूनी पैसा आसानी से सीमाओं के पार जा सकता है।

उन्होंने कहा, “दूसरे देशों के साथ ‘म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी’ (आपसी कानूनी सहायता समझौते) – भले ही उनका सिस्टम और तौर-तरीके कितने भी अधूरे क्यों न हों – प्रत्यर्पण (extradition) की तुलना में बरामद संपत्ति को कहीं ज्यादा भरोसेमंद तरीके से वापस लाते हैं। आखिरकार, गैर-कानूनी दौलत शायद ही कभी उस जगह रहती है जहां से उसे चुराया गया था।”

उन्होंने गैर-कानूनी फंड का पता लगाने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस शेयरिंग और ‘बेनिफिशियल ओनरशिप रजिस्ट्री’ जैसे टूल्स पर भी जोर दिया, जिन्हें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

चोरी हुई संपत्ति वापस पाने पर ध्यान दें

जस्टिस कांत ने कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने का काम कानून के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का भी जिक्र किया, जिसमें धोखेबाज सरकारी या कानून लागू करने वाले अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों से पैसे ऐंठते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ कोशिशों की कामयाबी को इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि समस्या का वर्णन कितनी अच्छी तरह किया गया है, बल्कि इस आधार पर मापा जाना चाहिए कि चोरी हुई संपत्ति का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और वापस लाने में कितनी कामयाबी मिली है।

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NALSAR छात्रों के समर्थन में उतरे CJI सूर्यकांत, बार काउंसिल को लगाई फटकार और अपनी स्टूडेंट लाइफ को याद कर ये सब कहा

हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के विरोध से उपजे विवाद में अब खुद चीफ जस्टिस स्टूडेंट्स के समर्थन में आ गए हैं। हमारी सहयोगी सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हालिया निर्देश पर कड़ा रुख अपनाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने कानून के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को प्रोटेक्शन करते हुए निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

सुनवाई के दौरान BCI के हस्तक्षेप को पूरी तरह से गैरजरूरी बताते हुए CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह उनके और स्टू़डेंट्स के बीच का मामला है। CJI ने कहा कि छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है। BCI बीच में दखल देने वाला कौन होता है?

BCI को नोटिस जारी, सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने BCI द्वारा जारी किए गए (और बाद में वापस लिए गए) उस निर्देश पर स्पष्टीकरण मांगा है जिसमें NALSAR के छात्रों को निशाना बनाया गया था। अदालत ने BCI को नोटिस जारी कर पूछा कि यह निर्देश कैसे जारी किया गया था और क्या यह फैसला लेने से पहले बार काउंसिल ने कोई बैठक बुलाई थी? अदालत में दाखिल याचिका में दावा किया गया था कि BCI के कुछ सदस्यों को तो इस कार्रवाई के बारे में जानकारी तक नहीं थी।

छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए- चीफ जस्टिस

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों के कदम शांतिपूर्ण हैं तब तक उन्हें अपने असंतोष या असहमति को व्यक्त करने का पूरा अधिकार है, भले ही उनके विचारों को गलत ही क्यों न माना जाए। CJI ने कहा कि भले ही वे गलत हों, जब तक वे शांतिपूर्ण हैं, उन्हें विरोध करने का अधिकार है। अपनी स्टूडेंट्स लाइफ को याद करते हुए CJI ने बताया कि वे खुद अपने छात्र दिनों के दौरान इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए और छात्रों को अपनी असहमति व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए, भले ही उनके बयान गलत क्यों न माने जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों और फैकल्टी को दिया संरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कॉलेजों के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की है और निर्देश दिया है कि यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में CJI का विरोध करने के सिलसिले में किसी के भी खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए।

कैसे शुरू हुआ था यह पूरा विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब NALSAR के छात्रों के एक समूह ने 2026 के कनवोकेशन में CJI सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी का विरोध किया और अपनी आपत्तियां उन तक पहुंचाईं। इसके जवाब में BCI ने 13 अगस्त को एक कड़ा निर्देश जारी कर सभी राज्य बार कौंसिलों से कह दिया था कि वे अगले आदेश तक NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रैजुएट स्टूडेंट को वकील के रूप में इनरॉल न करें। इसके अलावा BCI ने यूनिवर्सिटी से उन छात्रों की पहचान करने वाली एक रिपोर्ट मांगी थी जिन्होंने इस अभियान को शुरू किया या इसमें हिस्सा लिया।

हालांकि BCI ने यह फैसला अंतरिम रखा था लेकिन इसकी वजह से पूरे पास-आउट बैच का प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन एक तरह से रुक जाता। बाद में BCI ने अपने रुख में संशोधन करते हुए NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों को अपनी पसंद के किसी भी राज्य बार काउंसिल में इनरॉल होने की इजाजत दे दी थी, लेकिन जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए जांच रिपोर्ट मांगने की शर्त बरकरार रखी थी।

इसके बाद NALSAR ने इस जांच की संवैधानिकता और अपने शासन नियमों पर सवाल उठाते हुए मामले को अपनी कार्यकारी परिषद के समक्ष रखने का फैसला किया था। वरिष्ठ वकीलों, छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों की चौतरफा आलोचना के बाद, BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि काउंसिल ने अपना आदेश पूरी तरह से वापस ले लिया है और कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

मनन मिश्रा ने कहा कि BCI इस बात से संतुष्ट है कि पास-आउट बैच की किसी भी उपद्रव या आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी और आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

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‘आप हमारा समय बर्बाद न करें…’; CJP प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

CJP Protest in Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बुधवार (22 जुलाई) को इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता वकील ने CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, “पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी मेरे पास हैं… यदि इस मामले को कल (गुरुवार 23 जुलाई) सूचीबद्ध किया जा सके…।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरता की और याचिका में तीन अनुरोध किए गए हैं। चीफ जस्टिस ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि पीठ इस स्तर पर वीडियो देखने की इच्छुक नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है… हम वीडियो नहीं देखना चाहते।” वकील के दोबारा छात्रों की पिटाई की बात कहने और वीडियो का हवाला देने पर CJP ने कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।”

यह याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित है। उस दिन हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए मध्य दिल्ली में एकत्र हुए थे।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

सरकार नीट पर चर्चा के लिए तैयार

मानसून सत्र शुरू होने के बाद नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में गतिरोध जारी है। सरकार ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि वह नीट पेपर लीक मामले में सदन में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा की कार्यवाही सुबह स्थगित होने के बाद दोबारा 12 बजे शुरू हुई तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सरकार की ओर से बयान देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का नाम पुकारा।

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इसी बीच कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और इस मुद्दे पर विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग भी की। रीजीजू ने कहा, “सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमने पहले दिन से यह बात कही है। लेकिन चर्चा नियम के तहत होती है। चर्चा कब होनी है, कितनी लंबी होनी है और किस नियम के तहत होनी है, इसका निर्णय स्पीकर (बिरला) सभी दलों के नेताओं से बात कर लेंगे।”