हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के विरोध से उपजे विवाद में अब खुद चीफ जस्टिस स्टूडेंट्स के समर्थन में आ गए हैं। हमारी सहयोगी सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हालिया निर्देश पर कड़ा रुख अपनाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने कानून के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को प्रोटेक्शन करते हुए निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
सुनवाई के दौरान BCI के हस्तक्षेप को पूरी तरह से गैरजरूरी बताते हुए CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह उनके और स्टू़डेंट्स के बीच का मामला है। CJI ने कहा कि छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है। BCI बीच में दखल देने वाला कौन होता है?
#CourtCorner | #BarCouncil Order Barring NALSAR 2026 Graduates From Advocate Enrolment Issue Reaches SC
CJI says the issue is between students and me, they have written to me, who is Bar Council to intervene
CJI says Bar Council action is absolutely uncalled for, students… pic.twitter.com/WC1flxBwOK
— CNBC-TV18 (@CNBCTV18Live) August 14, 2026
BCI को नोटिस जारी, सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने BCI द्वारा जारी किए गए (और बाद में वापस लिए गए) उस निर्देश पर स्पष्टीकरण मांगा है जिसमें NALSAR के छात्रों को निशाना बनाया गया था। अदालत ने BCI को नोटिस जारी कर पूछा कि यह निर्देश कैसे जारी किया गया था और क्या यह फैसला लेने से पहले बार काउंसिल ने कोई बैठक बुलाई थी? अदालत में दाखिल याचिका में दावा किया गया था कि BCI के कुछ सदस्यों को तो इस कार्रवाई के बारे में जानकारी तक नहीं थी।
छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए- चीफ जस्टिस
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों के कदम शांतिपूर्ण हैं तब तक उन्हें अपने असंतोष या असहमति को व्यक्त करने का पूरा अधिकार है, भले ही उनके विचारों को गलत ही क्यों न माना जाए। CJI ने कहा कि भले ही वे गलत हों, जब तक वे शांतिपूर्ण हैं, उन्हें विरोध करने का अधिकार है। अपनी स्टूडेंट्स लाइफ को याद करते हुए CJI ने बताया कि वे खुद अपने छात्र दिनों के दौरान इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए और छात्रों को अपनी असहमति व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए, भले ही उनके बयान गलत क्यों न माने जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों और फैकल्टी को दिया संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कॉलेजों के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की है और निर्देश दिया है कि यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में CJI का विरोध करने के सिलसिले में किसी के भी खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए।
कैसे शुरू हुआ था यह पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब NALSAR के छात्रों के एक समूह ने 2026 के कनवोकेशन में CJI सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी का विरोध किया और अपनी आपत्तियां उन तक पहुंचाईं। इसके जवाब में BCI ने 13 अगस्त को एक कड़ा निर्देश जारी कर सभी राज्य बार कौंसिलों से कह दिया था कि वे अगले आदेश तक NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रैजुएट स्टूडेंट को वकील के रूप में इनरॉल न करें। इसके अलावा BCI ने यूनिवर्सिटी से उन छात्रों की पहचान करने वाली एक रिपोर्ट मांगी थी जिन्होंने इस अभियान को शुरू किया या इसमें हिस्सा लिया।
हालांकि BCI ने यह फैसला अंतरिम रखा था लेकिन इसकी वजह से पूरे पास-आउट बैच का प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन एक तरह से रुक जाता। बाद में BCI ने अपने रुख में संशोधन करते हुए NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों को अपनी पसंद के किसी भी राज्य बार काउंसिल में इनरॉल होने की इजाजत दे दी थी, लेकिन जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए जांच रिपोर्ट मांगने की शर्त बरकरार रखी थी।
इसके बाद NALSAR ने इस जांच की संवैधानिकता और अपने शासन नियमों पर सवाल उठाते हुए मामले को अपनी कार्यकारी परिषद के समक्ष रखने का फैसला किया था। वरिष्ठ वकीलों, छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों की चौतरफा आलोचना के बाद, BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि काउंसिल ने अपना आदेश पूरी तरह से वापस ले लिया है और कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।
मनन मिश्रा ने कहा कि BCI इस बात से संतुष्ट है कि पास-आउट बैच की किसी भी उपद्रव या आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी और आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

