CJP Protest: NEET में ऑल इंडिया रैंक 2 लाने वाले पांशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर

NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा में 99.9999 पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के छात्र पंशुल बंसल इन दिनों अपनी शानदार सफलता के साथ-साथ अपनी सोच को लेकर भी चर्चा में हैं। पेपर रद्द होने के बाद जहां देशभर में कई छात्र विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हुए, वहीं पंशुल ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा और अतिरिक्त मिले समय को खुद को बेहतर बनाने का अवसर माना। शुरुआत में परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने जल्द ही नकारात्मक सोच छोड़कर दोबारा तैयारी शुरू कर दी।

पंशुल का मानना है कि जिन परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, उन पर समय और ऊर्जा खर्च करने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है। उनकी यही सकारात्मक सोच और अनुशासित तैयारी उन्हें देश के शीर्ष रैंक हासिल करने वाले छात्रों में शामिल करने में सफल रही।

प्रदर्शन करने से बेहतर लगा घर पर पढ़ना

परिणाम घोषित होने के बाद पंशुल ने कहा कि उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर प्रदर्शन में जाने से उन्हें क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि, “मैंने सोचा कि विरोध-प्रदर्शन में जाने के बजाय घर पर पढ़ाई करूं, अपनी क्षमता बढ़ाऊं और बेहतर स्कोर हासिल करने की कोशिश करूं।”

पहले 706 अंक, दोबारा परीक्षा में पहुंचे 715 तक

नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल के छात्र पंशुल ने दोबारा हुई परीक्षा में 715 अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने की संभावना थी, लेकिन अतिरिक्त तैयारी के समय का सही उपयोग कर उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार किया।

क्या था पूरा मामला?

NEET UG 2026 की पहली परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन 12 मई को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इस मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित हुई और 16 जुलाई को संशोधित परिणाम घोषित किए गए।

नहीं बदली पढ़ाई की दिनचर्या

कई छात्रों ने दोबारा परीक्षा के लिए अपनी रणनीति बदली, लेकिन पंशुल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी रोज की पढ़ाई का शेड्यूल बिल्कुल नहीं बदला। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं किया। पिछले डेढ़ महीने में सिर्फ अपना बेहतर देने की कोशिश की और बाकी भगवान पर छोड़ दिया।”

नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर रखा फोकस

पंशुल ने स्वीकार किया कि पहली परीक्षा अच्छी होने के बाद उनके मन में यह सवाल जरूर आया कि आखिर परीक्षा रद्द क्यों की गई। लेकिन उन्होंने इस सोच में उलझने के बजाय अपने मुख्य लक्ष्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि अगर वह नकारात्मकता में फंस जाते, तो उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती थी। इसलिए उन्होंने हर तरह की चिंता छोड़कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया।

प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने से किया इनकार

देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। हालांकि, जब पंशुल से इन प्रदर्शनों पर राय मांगी गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, “मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”

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NEET-UG Paper Leak: CBI का बड़ा दावा, लातूर कोचिंग संचालक के मोबाइल से मिले 111 सवाल NTA पेपर से करते हैं मैच

NEET-UG Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक का सबसे मजबूत सबूत दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया है। दरअसल, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अदालत को बताया कि लातूर के कोचिंग ऑपरेटर शिवराज मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से मिले हाथ से लिखे 136 सवालों में से 111 सवाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मास्टर क्वेश्चन पेपर से मेल खाते हैं। जिससे इस दावे को और मजबूती मिलती है कि परीक्षा का पेपर टेस्ट से पहले ही लीक हो गया था।

बता दें कि शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र के लातूर में ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ (RCC) नाम का कोचिंग इंस्टीट्यूट और ‘मोटेगांवकर सर की RCC’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिसके 1.6 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

CBI ने लगाया आरोप

CBI का आरोप है कि मोटेगांवकर को 3 मई को होने वाली NEET-UG परीक्षा से कुछ दिन पहले, 23 अप्रैल को लीक हुए सवाल मिले थे। एजेंसी के मुताबिक, यह सब एक कथित चेन के जरिए हुआ जिसमें लातूर के बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) डॉ. मनोज शिरुरे और केमिस्ट्री के रिटायर्ड लेक्चरर व NTA पैनल के पूर्व सदस्य PV कुलकर्णी शामिल थे।

CBI का दावा है कि कुलकर्णी के पास कथित तौर पर प्रश्न पत्रों तक पहुंच थी और इन्हीं के जरिए सवाल बाहर आए। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पेपर लीक 5 लाख रुपये के बदले किया गया था।

फिलहाल, इस मामले में मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया है और ये आरोप CBI की उन दलीलों का हिस्सा हैं जो कोर्ट में उनकी जमानत का विरोध करते हुए पेश की गई हैं।

CBI ने यह भी कहा है कि लीक हुए प्रश्न पत्र की PDF कॉपी टेलीग्राम के जरिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये में बेची गई थी। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले कुछ अभ्यर्थियों के बीच 150 पेज का “गेस पेपर” भी बांटा गया था, जिसमें 410 सवाल थे। इनमें से लगभग 120 सवाल परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन के सवालों से मेल खाते पाए गए, जिससे पता चलता है कि उम्मीदवारों के पास पेपर का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही मौजूद था।

जांच महाराष्ट्र तक कैसे पहुंची

महाराष्ट्र से जुड़ा मामला तब सामने आया जब जांच करने वालों ने परीक्षा से पहले सामने आए तथाकथित “गेस पेपर” के सर्कुलेशन की जांच शुरू की।

शुरुआती जांच में पता चला था कि सर्कुलेट किए गए मटीरियल में 100 से ज्यादा सवाल असली NEET-UG पेपर से मेल खाते थे, जिसके बाद अधिकारियों ने राजस्थान और उत्तराखंड से आगे बढ़कर जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद जांच महाराष्ट्र तक फैल गई, जहां जांच करने वालों ने लातूर के ट्यूटर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच की।

NEET पेपर लीक विवाद कब शुरू हुआ?

बता दें कि NEET पेपर लीक विवाद तब शुरू हुआ, जब राजस्थान में छात्रों के बीच घूम रहे एक कथित “गेस पेपर” (अनुमानित प्रश्न-पत्र) और असली प्रश्न-पत्र में बहुत ज्यादा समानता पाई गई। बाद में जांचकर्ताओं को पता चला कि 100 से ज्यादा सवाल एक जैसे थे, जिसके बाद राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, जांचकर्ताओं को एक संगठित नेटवर्क का पता चला जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में फैले प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले, बिचौलिए, कोचिंग चलाने वाले और उम्मीदवार शामिल थे। इसके बाद मामला CBI को सौंप दिया गया।

इस कथित लीक के कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को 3 मई की परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को देश भर में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना पड़ा, जिससे 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित हुए।

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