NEET paper leak: सीआईएसएफ के पहरे में रहेगा एनटीए का नई दिल्ली ऑफिस, 2 से 3 महीने में पूरा होगा सुरक्षा का बंदोबस्त

NEET paper leak: नीट यूजी, यूजीसी नेट और महाराष्ट्र टीईटी के प्रश्नपत्र लीक का खुलासा होने के बाद चौरतरफा दबाव झेल रही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। परीक्षा एजेंसी के नई दिल्ली ऑफिस की सुरक्षा व्यवस्था अब केंद्रीय सुरक्षा बलों के हाथ में होगी। एनटीए के उस हिस्से की पहरेदारी अब सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के करेगी, जहां गोपनीय एग्जामिनेशन मटीरियल को स्टोर किया जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि यह तैनाती अगले दो से तीन महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। यह कदम नीट यूजी पेपर लीक विवाद और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई दूसरे मामलों के बाद उठाया गया है। एनटीए ने अपनी सभी संवेदनशील गतिविधियां मिंटो रोड पर भारत सरकार की प्रेस बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दी है।

एनटीए ऑफिस में सुरक्षा के उपाय

मिंटो रोड स्थित एनटीए के नए ऑफिस पर 39 सीआईएसएफ कर्मी होंगे जो प्रवेश नियंत्रण, जांच और तलाशी के लिए जिम्मेदार होंगे। सुरक्षा जांच में एक्स-रे बैगेज स्कैनर और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर भी शामिल होंगे, जबकि कॉन्फिडेंशियल एरिया के अंदर आने-जाने पर कड़ी नजर रखी जाएगी। एनटीए कड़े एक्सेस कंट्रोल, एन्क्रिप्शन, टैम्पर-एविडेंट स्टोरेज और इम्यूटेबल लॉग के जरिए अपनी डिजिटल सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, फेशियल रिकग्निशन, सीसीटीवी और लाइव मॉनिटरिंग को भी मजबूत किया जा रहा है।

प्रश्नपत्रों की सख्त जांच के लिए बनी व्यवस्था

एजेंसी ने एक चीफ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) की पोस्ट बनाई है और इंडिपेंडेंट साइबर-सिक्योरिटी ऑडिट कर रही है। सरकार ने चार-लेवल का क्वेश्चन-पेपर चेकिंग सिस्टम भी शुरू किया है और एनटीए की विशेषज्ञ और प्रशासनिक टीमों को मजबूत किया है।

कई पेपर लीक बने फैसले की वजह

यह फैसला 2026 में नीट यूजी पेपर लीक मामले के बाद आया है। सीबीआई ने 3 मई के परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कथित सर्कुलेशन को लेकर केस दर्ज किया था। एजेंसी ने तब से गिरफ्तारियां की हैं और केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर के कथित लीक की जांच की है। सीबीआई के मुताबिक, प्रश्नपत्र तक पहुंच रखने वाले एक केमिस्ट्री प्रवक्ता ने परीक्षा से पहले कथित तौर पर कोचिंग सेशन किए थे। जांच करने वालों ने कहा कि इन सत्र के दौरान, जिन सवालों और जवाबों पर चर्चा हुई वे परीक्षा में आए नीट यूजी पेपर से मेल खाते थे। यूजीसी नेट और महाराष्ट्र टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) समेत दूसरी परीक्षाओं में भी पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं, जहां हाल ही में दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था।

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Raveena Tandon:’कुछ लोग तो वहां रील्स बनाने आए थे…’, रवीना टंडन बोलीं उपद्रवियों और राजनीतिक पार्टियों ने छात्र विरोध प्रदर्शनों को किया था हाईजैक

Raveena Tandon: एक्ट्रेस रवीना टंडन ने देश भर में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी राय शेयर की है। उन्होंने मिजोरम में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की तारीफ की, लेकिन साथ ही चिंता भी जताई कि दूसरी जगहों पर ऐसे आंदोलनों पर उन लोगों का कब्ज़ा हो गया जिनके अपने राजनीतिक मकसद थे या जो पब्लिसिटी चाहते थे। उनका यह पोस्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के एक दिन बाद आया है। प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हफ़्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दिया था।

इंस्टाग्राम पर रवीना ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि आख़िरकार स्टूडेंट्स की आवाज सुनी जा रही है और ये विरोध प्रदर्शन देश की शिक्षा व्यवस्था में सार्थक बदलाव ला सकते हैं। रवीना ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट (छात्रों के विरोध प्रदर्शन) ने उन्हें उम्मीद दी है।

उन्होंने लिखा, “खुशी और गर्व है कि आखिरकार लोगों की आवाज़ सुनी जा रही है (#studentsprotest #Rishikeshprotest) और उम्मीद जगी है। अब तक पर्यावरण, कम्युनिटी के जानवरों, वाइल्डलाइफ और पेड़ों की कटाई के खिलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे थे और नाकाम हो रहे थे। लोग जागरूक हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह समझना होगा कि हमारे पास यही एक ग्रह है। कोई ‘प्लैनेट B’ नहीं है। बस यही है। उनके भविष्य के लिए हमें इसी को बचाना है।”

इसके बाद रवीना ने मिज़ोरम के छात्रों के प्रदर्शन करने के तरीके की तारीफ़ की। एक्ट्रेस ने कहा कि मिज़ोरम और दूसरे राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने एक मिसाल कायम की है। उन्हें सलाम। अफ़सोस की बात है कि कुछ राज्यों में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को गुंडों और राजनीतिक पार्टियों ने हाईजैक कर लिया, और कुछ लोग तो बस रील्स बनाने और लाइमलाइट पाने के मौके की तलाश में वहाँ मौजूद थे। आख़िरकार, यह जायज़ मांगों की जीत थी।”

एक्ट्रेस ने हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की भी निंदा की और कहा कि ऐसी हरकतें छात्रों के आंदोलन का हिस्सा नहीं थीं। “हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पीछे निश्चित रूप से उपद्रवी तत्व थे। वे गैर-छात्र इस विरोध प्रदर्शन को पटरी से उतार सकते थे। फिर भी, इसके बाद मैं हमारी शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और प्रार्थना कर रही हूं, जिसमें हमारे सरकारी स्कूलों से भी भ्रष्टाचार खत्म हो। सभी के लिए शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो। मैं अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रही हूँ। आपकी राय अलग हो सकती है, लेकिन मैं उसका भी सम्मान करती हूँ। जब पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया। जय हिंद। जय, हिंद की जनता-अवाम #indiafirst।”

NEET-UG 2026 परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। दिल्ली के जंतर-मंतर और कई अन्य राज्यों में हज़ारों छात्र जमा हुए और उन्होंने जवाबदेही, परीक्षा में सुधार और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों का नतीजा 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के रूप में सामने आया।

NEET-UG Paper Leak: CBI का बड़ा दावा, लातूर कोचिंग संचालक के मोबाइल से मिले 111 सवाल NTA पेपर से करते हैं मैच

NEET-UG Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक का सबसे मजबूत सबूत दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया है। दरअसल, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अदालत को बताया कि लातूर के कोचिंग ऑपरेटर शिवराज मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से मिले हाथ से लिखे 136 सवालों में से 111 सवाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मास्टर क्वेश्चन पेपर से मेल खाते हैं। जिससे इस दावे को और मजबूती मिलती है कि परीक्षा का पेपर टेस्ट से पहले ही लीक हो गया था।

बता दें कि शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र के लातूर में ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ (RCC) नाम का कोचिंग इंस्टीट्यूट और ‘मोटेगांवकर सर की RCC’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिसके 1.6 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

CBI ने लगाया आरोप

CBI का आरोप है कि मोटेगांवकर को 3 मई को होने वाली NEET-UG परीक्षा से कुछ दिन पहले, 23 अप्रैल को लीक हुए सवाल मिले थे। एजेंसी के मुताबिक, यह सब एक कथित चेन के जरिए हुआ जिसमें लातूर के बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) डॉ. मनोज शिरुरे और केमिस्ट्री के रिटायर्ड लेक्चरर व NTA पैनल के पूर्व सदस्य PV कुलकर्णी शामिल थे।

CBI का दावा है कि कुलकर्णी के पास कथित तौर पर प्रश्न पत्रों तक पहुंच थी और इन्हीं के जरिए सवाल बाहर आए। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पेपर लीक 5 लाख रुपये के बदले किया गया था।

फिलहाल, इस मामले में मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया है और ये आरोप CBI की उन दलीलों का हिस्सा हैं जो कोर्ट में उनकी जमानत का विरोध करते हुए पेश की गई हैं।

CBI ने यह भी कहा है कि लीक हुए प्रश्न पत्र की PDF कॉपी टेलीग्राम के जरिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये में बेची गई थी। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले कुछ अभ्यर्थियों के बीच 150 पेज का “गेस पेपर” भी बांटा गया था, जिसमें 410 सवाल थे। इनमें से लगभग 120 सवाल परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन के सवालों से मेल खाते पाए गए, जिससे पता चलता है कि उम्मीदवारों के पास पेपर का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही मौजूद था।

जांच महाराष्ट्र तक कैसे पहुंची

महाराष्ट्र से जुड़ा मामला तब सामने आया जब जांच करने वालों ने परीक्षा से पहले सामने आए तथाकथित “गेस पेपर” के सर्कुलेशन की जांच शुरू की।

शुरुआती जांच में पता चला था कि सर्कुलेट किए गए मटीरियल में 100 से ज्यादा सवाल असली NEET-UG पेपर से मेल खाते थे, जिसके बाद अधिकारियों ने राजस्थान और उत्तराखंड से आगे बढ़कर जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद जांच महाराष्ट्र तक फैल गई, जहां जांच करने वालों ने लातूर के ट्यूटर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच की।

NEET पेपर लीक विवाद कब शुरू हुआ?

बता दें कि NEET पेपर लीक विवाद तब शुरू हुआ, जब राजस्थान में छात्रों के बीच घूम रहे एक कथित “गेस पेपर” (अनुमानित प्रश्न-पत्र) और असली प्रश्न-पत्र में बहुत ज्यादा समानता पाई गई। बाद में जांचकर्ताओं को पता चला कि 100 से ज्यादा सवाल एक जैसे थे, जिसके बाद राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, जांचकर्ताओं को एक संगठित नेटवर्क का पता चला जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में फैले प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले, बिचौलिए, कोचिंग चलाने वाले और उम्मीदवार शामिल थे। इसके बाद मामला CBI को सौंप दिया गया।

इस कथित लीक के कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को 3 मई की परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को देश भर में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना पड़ा, जिससे 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित हुए।

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