सीजेपी ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया

नई दिल्ली। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर प्रदर्शन करके तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी भी मैदान में उतर गई है। सीजेपी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया। पार्टी ने कहा कि अगर उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो देश भर में आंदोलन किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। उन्होंने एसआईआर के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए। लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है’। दीपके ने कहा, ‘लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं’।

गौरतलब है कि, बुधवार को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसी के हवाले प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर चुनाव चोरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं हो सकता है कि जिन पार्टियों ने एक साथ आकर 2024 में केंद्र में भाजपा को हराया, उन सबको विधानसभा चुनाव में एक एक करके हराया गया।

SRCC में PM मोदी का Gen Z कनेक्ट, ‘OG’ और ‘धुरंधर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को दिया संदेश

PM Modi SRCC Speech: शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के छात्रों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘Gen Z’ (आज की युवा पीढ़ी) की भाषा में ‘OG’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही, 2013 में दिए गए अपने भाषण के 13 साल बाद कॉलेज लौटने पर उन्होंने हाल ही में लोकप्रिय हुई फिल्म ‘धुरंधर’ का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने अपनी बात की शुरुआत अपने पुराने भाषण का जिक्र करते हुए किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनके 2013 के भाषण की काफी चर्चा हुई और लोगों ने उसे दोबारा देखा। उन्होंने छात्रों से कहा, “2013 में मैंने जो कहा था, वह मेरा पक्का विश्वास था।”

‘धुरंधर’ से ‘रीविजिट’ तक

हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते हुए पीएम मोदी ने छात्रों से कहा, “हो सकता है कि आप ‘धुरंधर’ न हों, लेकिन अपनी मौजूदगी का एहसास जरूर कराएं।” अपनी छाप जरूर छोड़ें। उन्होंने ‘रीविजिट’ (फिर से देखना/याद करना) शब्द का इस्तेमाल करते हुए युवा पीढ़ी से कहा कि वे उस समय की स्थिति पर नजर डालें जब उन्होंने 2013 में आखिरी बार SRCC को संबोधित किया था।

पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि वे ऑनलाइन जाकर देखें कि उस समय अखबारों में क्या खबरें छप रही थीं, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार सत्ता में थी और वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

SRCC के जाने-माने पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “SRCC के पूर्व छात्र भी बहुत खास रहे हैं। अगर मैं आपकी भाषा में कहूं, तो यहां के पूर्व छात्र ‘OGs’ (असली दिग्गज) हैं।”

दोनों दौर की तुलना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2013 में भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिनमें आतंकी हमले, महंगाई और भ्रष्टाचार शामिल थे।

उन्होंने कहा, “विकास दर बहुत नीचे थी और महंगाई चरम पर थी,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घोटाले और भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर थे।

उस समय के माहौल को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हर तरफ निराशा और मायूसी ही थी।”

इस दौरान पीएम मोदी ने सुरक्षा चुनौतियों और ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (LoC) पर हालात का भी जिक्र किया और 2014 से पहले की स्थिति की तुलना अपनी सरकार के जवाब से की।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर साधा निशाना

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए, पीएम मोदी ने सीमा पार से होने वाले हमलों पर उस समय और अब के रवैये की तुलना की।

उन्होंने कहा, “आज जब पाकिस्तान कोई हरकत करता है, तो हम उनके घर में घुसकर हमला करते हैं।” उन्होंने अपनी सरकार के दौरान पाकिस्तान के प्रति भारत के रुख का जिक्र करते हुए यह बात कही।

उन्होंने उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि का भी जिक्र किया और बताया कि 2013 में देश को “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक) कहा जाता था। उन्होंने 2013 में भारत की स्थिति और आज की स्थिति की तुलना करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर पहचाना जा रहा है। उन्होंने हाल के GDP आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

क्या Gen Z तक पहुंचने की नई कोशिश है?

हाल ही में जंतर-मंतर पर Gen Z के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, BJP और उसके नेता युवा दर्शकों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में PM मोदी ने SRCC में खास तरह की भाषा का इस्तेमाल किया। हाल ही में BJP सांसदों ने संसद में “MIA”, “FOMO” और “Delulu” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जबकि खुद प्रधानमंत्री भी इंस्टाग्राम-स्टाइल वीडियो और युवाओं को ध्यान में रखकर संदेश देने का तरीका अपना रहे हैं।

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से मीम्स, रील्स और इंटरनेट कल्चर से प्रेरित थे। इनसे पता चला कि Gen Z किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों को एकजुट कर सकता है और राजनीतिक चर्चा को दिशा दे सकता है। बता दें कि इस आंदोलन के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

इसलिए, PM मोदी का SRCC का दौरा सिर्फ 2013 में दिए गए भाषण को दोहराना नहीं था। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब राजनीतिक पार्टियां उस पीढ़ी की भाषा को समझने और बोलने की कोशिश कर रही हैं जो रील्स, मीम्स और इंटरनेट स्लैंग के जरिए बातचीत करती है।

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CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

Abhijeet Dipke Cockroach Janta Party

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को अपने संगठन में नए पदाधिकारियों और जोनल कोऑर्डिनेशन कमेटियों के सदस्यों की घोषणा की। यह फैसला संगठन की 14 सदस्यीय नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन के कुछ सप्ताह बाद लिया गया है। पार्टी ने अपने संस्थापक अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। वहीं मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

 

CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर नए संगठनात्मक पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए कहा कि वह देशभर में संगठन को और मजबूत तथा सक्रिय बनाने की दिशा में काम करना चाहती है। संगठन ने इसके साथ ही पांच संगठन संयुक्त सचिवों और दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के नामों का भी ऐलान किया है।

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व्यंग्यात्मक संगठन से युवा आंदोलन तक पहुंचा CJP

 

कॉकroach जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक संगठन के तौर पर हुई थी, लेकिन पिछले महीने हुए सफल प्रदर्शन के बाद यह धीरे-धीरे युवा आंदोलन और दबाव समूह के रूप में उभरा। संगठन का दावा है कि उसके आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

नए पदाधिकारियों की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब CJP ने केंद्र सरकार पर 25 जुलाई को किए गए कथित वादों और प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है।

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5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का ऐलान

 

CJP ने सोमवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने और 5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की थी। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। CJP के मुताबिक, 25 जुलाई को सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद संगठन ने अच्छे विश्वास में अपना राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन वापस लिया था। हालांकि, अब संगठन का आरोप है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरी नहीं उतरी।

 

संगठन ने बताया कि 5 सितंबर को होने वाला मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। मार्च का नेतृत्व कथित तौर पर मृत NEET अभ्यर्थियों के परिवार और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के परिवार करेंगे। CJP ने दावा किया कि देशभर से छात्र, युवा संगठन और युवा नागरिक इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हो सकते हैं।

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FIR वापस लेने के वादे को लेकर सरकार पर आरोप

 

CJP लंबे समय से केंद्र सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाती रही है। संगठन का मुख्य आरोप प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने के कथित आश्वासन से जुड़ा है। इस महीने की शुरुआत में CJP ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था। संगठन ने केंद्र की मोदी सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अड़चन डालने का आरोप लगाया था।

 

संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि 25 जुलाई को किए गए कथित वादों पर ठोस प्रगति नहीं हुई तो देशभर में आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। CJP ने सोमवार को अपने बयान में कहा कि सरकार किसी पूरी पीढ़ी का भरोसा लेकर युवाओं को घर भेजने के बाद अपने ही वादे से पीछे नहीं हट सकती। संगठन ने इसे “विश्वासघात” करार देते हुए कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा।

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आगे क्या?

नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च के ऐलान से CJP ने अपने संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च में कितनी भागीदारी होती है।

‘देश को आपकी जरूरत है…’, CJP प्रोटेस्ट के बाद PM मोदी का Gen Z को बड़ा संदेश

PM Modi: नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं की क्षमता और ताकत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को युवा पीढ़ी की जरूरत है। बता दें कि पीएम मोदी ने यह बात दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के वार्षिक दीक्षांत समारोह में कही।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा, “हमें आप पर भरोसा है, और देश को आपकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी की देश के प्रति जिम्मेदारी होती है और युवाओं के लक्ष्यों में देश का सर्वांगीण विकास शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हर पीढ़ी को अपने समय की खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है… अगले 30 से 35 सालों में आप जो कुछ भी करेंगे, उसका असर ‘विकसित भारत’ की ओर हमारे सफर पर पड़ेगा। इसलिए, आपके हर फैसले का आधार यह भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा? इससे देश की कौन-सी जरूरतें पूरी होंगी?”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल लेंगे, वे “आखिरकार जीतेंगे”।

उन्होंने कहा, “…ग्लोबल स्ट्रैटेजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल पावर बैलेंस हर पल बदल रहा है, और इसकी मुख्य वजह टेक्नोलॉजी में हो रही तेजी से तरक्की है। कोई भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अगले 20 या 30 सालों में दुनिया कैसी दिखेगी… दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन, सभी में बदलाव आएंगे। लेकिन इन सबके बीच एक बात याद रखें: जो लोग सीखते रहेंगे, वे ही सफल होंगे।”

प्रधानमंत्री के संबोधन में Gen Z की झलक

स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने युवाओं को अपना योगदान देने के लिए कई रास्ते खोले हैं।

उन्होंने कहा, “हमने ऐसे कई रास्ते खोले हैं जिनसे हमारे युवा योगदान दे सकते हैं। नए सेक्टर खुले हैं। मैंने पहले भी स्पेस सेक्टर के बारे में बात की थी। आज वही स्पेस सेक्टर हमारे युवाओं के लिए आसमान की ऊंचाइयों को छूने का जरिया बन गया है।”

अपने संबोधन में Gen Z वाली बात जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा: “आज हमारे युवा कह रहे हैं, ‘अपने परिवार में रॉकेट बनाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं’। आज हमारे युवा रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश का ड्रोन सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है। आज ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर दवाइयां पहुंचाने जैसे जरूरी कामों में भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और यह सेक्टर आने वाले समय में देश की तरक्की में अहम भूमिका निभा सकता है।

बता दें कि पीएम मोदी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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एक और पेपर लीक? ओडिशा मेडिकल परीक्षा के दौरान WhatsApp पर शेयर किया गया क्वेश्चन पेपर

Odisha Paper Leak: एक तरफ संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक विधेयक पारित किया गया है, ताकि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। वहीं दूसरी ओर एक और राज्य से कथित पेपर लीक का मामला सामने आया है। देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर जारी आक्रोश के बीच ओडिशा में आयोजित मेडिकल पीजी परीक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ऑल ओडिशा मेडिकल पीजी परीक्षा के 2023–26 बैच की जनरल सर्जरी MD/MS परीक्षा का प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे जाने के आरोप लगे हैं।

परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें

ओडिशा में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल परीक्षा चल रही थी, तभी प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। बताया जा रहा है कि एक छात्र को ये तस्वीरें व्हाट्सएप पर मिली थीं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सोमवार को 2023-26 बैच की एमएस/एमडी जनरल सर्जरी की थ्योरी परीक्षा के दौरान सामने आया। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैल गईं। रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र ने ये तस्वीरें साझा की थीं। छात्र का कहना है कि उसे ये तस्वीरें बेरहामपुर के एक छात्र द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से मिली थीं। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कुछ मोबाइल नंबरों से सवालों के जवाब भी भेजे गए। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

OUHS ने दिए जांच के आदेश

इस घटना के सामने आने के बाद ओडिशा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (OUHS) ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति मानस रंजन साहू ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस दौरान उन्होंने बची हुई परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए। डीन बोले- इसे पेपर लीक नहीं कहा जा सकता

वहीं, एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य हरेकृष्ण दलाई ने कहा कि इस घटना को सीधे तौर पर पेपर लीक कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने के बाद छात्रों में बांटा जा चुका था और उसके तुरंत बाद उसकी तस्वीरें बाहर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अगर प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले बाहर आ जाता और छात्रों तक पहुंच जाता, तब उसे पेपर लीक कहा जाता। लेकिन इस मामले में प्रश्न पत्र बांटने के तुरंत बाद ही उसकी तस्वीरें परीक्षा हॉल से बाहर पहुंचीं, इसलिए इसे उसी तरह की घटना माना जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर पहले से ही कड़ी निगरानी की जा रही है। इससे पहले नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चला यह आंदोलन 36 दिनों तक जारी रहा। इसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन समाप्त हो गया। इसके साथ ही CJP ने भी अपना विरोध अभियान वापस लेने का ऐलान कर दिया।

पंजाब में ‘प्रश्नपत्र लीक’ के विरोध में दिल्ली भाजपा का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली ईकाई ने बृहस्पतिवार को मंडी हाउस के निकट आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर पंजाब में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी फिरोजशाह रोड स्थित ‘आप’ मुख्यालय के निकट एकत्र हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में साढ़े चार वर्ष पुरानी ‘आप’ सरकार के कार्यकाल में छह परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस सहित अन्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की।

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हाल में ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि पंजाब में उनकी सरकार के कार्यकाल में किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने कहा था कि एक परीक्षा के दौरान दो केंद्रों पर कुछ विद्यार्थियों ने नकल के लिए डिजिटल पेन का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें तत्काल पकड़ लिया गया और प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ।

प्रदर्शन में शामिल भाजपा सांसदों, विधायकों और प्रदेश पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य में छह परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से 30 लाख विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि ‘आप’ ने हाल में जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उस प्रदर्शन का समर्थन किया था, जिसके बाद नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था।

Pic Credit : ANI

NEET-UG Paper Leak : CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, आज फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। CBI के मुताबिक, सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) ने दाखिल की है। यह मामला बुधवार को पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

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इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला

CBI के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत दर्ज किया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) तथा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 3, 4, 5, 10 और 11 भी आरोपियों पर लगाई गई हैं।

 देशभर में मचा था बवाल

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NEET-UG पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कई स्तरों पर जांच शुरू की गई थी। इसी विवाद के बीच 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहा अपना 36 दिन का आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी।

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लोकसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा 

लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 मंगलवार को पास नहीं हो सका। दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक लगातार 9 घंटे बिल पर चर्चा हुई। विधेयक में 2024 में बने कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इससे पेपर लीक रोकने में मदद मिलेगी। चर्चा में अभी भी कई सांसदों का बोलना बाकी है। रात 11 बजे स्पीकर ने लोकसभा बुधवार 11 बजे तक स्थगित कर दी। अब बिल पर बुधवार को लोकसभा में फिर चर्चा और वोटिंग होगी। वहीं बिल राज्यसभा में भी पेश किया जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की हुई थी आखिरी कोशिश! शिक्षा मंत्रालय बदलने का ऑफर ठुकराया, इस्तीफे पर अड़ा रहा CJP

Dharmendra Pradhan Resignation: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन का साफ कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान का सिर्फ मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा ही स्वीकार होगा।

बताया गया है कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले पिछले कई सप्ताह से NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर के अभियान में बदल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान के पद छोड़ने से पहले केंद्र ने एक समझौता करने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को मनाने में नाकाम रही।

सरकार ने निकाला था बीच का रास्ता

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने विवाद को शांत करने के लिए एक समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की थी कि यदि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय लेकर उन्हें किसी अन्य मंत्रालय में भेज दिया जाए तो क्या आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।

हालांकि आंदोलनकारी नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का पूर्ण इस्तीफा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रभावी संवाद समय पर स्थापित नहीं हो सका, जिससे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर और अधिक अड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत का जरिया न बन पाने की वजह से गतिरोध बना रहा। फिर दोनों पक्षों का रुख और कड़ा हो गया।

NEET विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन

यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था। बाद में यह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बल्कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक अभियान बन गया। CJP नेताओं ने इसे केवल एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं। बल्कि परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों और जवाबदेही की कमी के खिलाफ आंदोलन बताया।

बीजेपी के भीतर भी बढ़ी थी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे से करीब 48 घंटे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के भीतर भी यह महसूस किया जाने लगा था कि बढ़ते जनाक्रोश और संसद में लगातार हो रहे हंगामे के बीच धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना राजनीतिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। सरकार ने बैक-चैनल बातचीत के जरिए संकट टालने की कोशिश की। लेकिन जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारी किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हुए।

खबरों के मुताबिक, सरकार ने पर्दे के पीछे से बातचीत करके और प्रधान को कैबिनेट से हटाने के बजाय कुछ रियायतें देकर संकट को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, CJP का कहना था कि आंदोलन की मुख्य मांग तभी पूरी होगी जब वे इस्तीफा देंगे। सोशल मीडिया पर मजबूत लामबंदी और पहली बार वोट देने वालों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बीच अपील के कारण इस विरोध प्रदर्शन को असामान्य राजनीतिक महत्व भी मिला।

आखिरकार देना पड़ा इस्तीफा

करीब पांच सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद CJP ने इसे छात्रों की जीत बताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। ओडिशा के वरिष्ठ BJP नेता प्रधान ने पेट्रोलियम, स्टील और शिक्षा जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले थे। लेकिन लगभग पांच सप्ताह के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

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जंतर-मंतर का नया व्याकरण, क्‍या ‘Gen-Z’ की गालियों से हो रहा संस्‍कारों का पतन, सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

Gen-Z protest

दिल्‍ली का जंतर-मंतर हमेशा से देश की धड़कन रहा है—यहां कभी इंकलाब के नारे गूंजते हैं, तो कभी व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश का सैलाब उमड़ता है। लेकिन हाल ही में, नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जुटे 'Gen-Z' (नई पीढ़ी) के प्रदर्शन ने विरोध प्रदर्शनों के इतिहास में एक नया और तीखा अध्याय जोड़ दिया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी चर्चा सिर्फ इसके मुद्दों को लेकर नहीं, बल्कि उस भाषा को लेकर है जो प्रदर्शनकारियों के मुंह से निकली। सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित करते हुए जिस खुलेपन और बेबाकी से फूहड़ और भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया, उसने सोशल मीडिया से लेकर ड्राइंग रूम तक भूचाल ला दिया है।

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यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।

साहित्यिक बिरादरी में छिड़ा घमासान: अभिव्यक्ति या पतन?
इस पूरी घटना के बाद वैचारिक गलियारों में एक तीखी खींचतान शुरू हो गई है। एक धड़ा ऐसा है जो इन गालियों को युवा पीढ़ी के घुटनभरे गुस्से और निराशा का स्वाभाविक विस्फोट मान रहा है। इनका तर्क है कि जब सिस्टम युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है, जब उनकी डिग्रियां और सपने पेपर लीक की भेंट चढ़ जाते हैं, तब शालीनता और व्याकरण के दायरे टूट जाते हैं। इस वर्ग का मानना है कि गालियां समाज का हिस्सा हैं और जब सत्ता बहरी हो जाती है, तो भाषा अपनी शालीनता छोड़कर आक्रामक हो जाती है। उनके अनुसार, यह Gen-Z का अपने गुस्से को बिना किसी फिल्टर के बयां करने का तरीका है।

दूसरी तरफ, पारंपरिक साहित्यकारों, विचारकों और वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा वर्ग इसे संस्कारों का गंभीर हनन और सभ्यता के पतन की शुरुआत मान रहा है। उनका कहना है कि विरोध दर्ज कराने के लोकतांत्रिक और शालीन तरीके सदियों से मौजूद रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर इस स्तर की भद्दी भाषा का प्रयोग न केवल राजनीतिक बहस के स्तर को गिराता है, बल्कि यह दिखाता है कि नई पीढ़ी के भीतर संवाद की संस्कृति खत्म हो रही है।

ओटीटी, सोशल मीडिया और 'मूक स्क्रीन' की देन : इस वैचारिक मंथन में एक और दिलचस्प पहलू पर बात हो रही है—वह है Gen-Z की भाषा का ताना-बाना। आज की पीढ़ी किताबों की दुनिया से दूर, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेब सीरीज, सोशल मीडिया के मीम्स और रील्स की ऐसी दुनिया में जी रही है जहाँ गालियों को 'कूल' और 'रॉ' (Raw) मानकर सामान्यीकृत कर दिया गया है। फिल्मों और सीरीज में एंटी-हीरो के मुंह से निकलने वाली गालियां अब युवाओं के दैनिक बोलचाल का हिस्सा बन चुकी हैं।

जब यही पीढ़ी अपने वास्तविक जीवन में किसी बड़े संकट या अन्याय का सामना करती है, तो उनके पास विरोध की अपनी गढ़ी हुई कोई शास्त्रीय शब्दावली नहीं होती। वे अपनी उसी सिनेमैटिक और सोशल मीडिया वाली दुनिया की भाषा में प्रतिक्रिया देते हैं, जहां आक्रोश का मतलब ही तीखा और अमर्यादित होना है।

क्या यह लोकतंत्र की नई भाषा है?
सवाल यह है कि क्या जंतर-मंतर पर सुनाई दी यह भाषा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है या यह एक चेतावनी है? एक तरफ, भाषा की पवित्रता और सार्वजनिक जीवन की गरिमा का सवाल अपनी जगह बिल्कुल सही है। लोकतंत्र में संवाद की एक मर्यादा होती है, और जब वह मर्यादा तार-तार होती है, तो समाज की मूल संरचना खतरे में पड़ जाती है। दूसरी तरफ, यह भी सच है कि यह गुस्सा रातों-रात पैदा नहीं हुआ। युवाओं के भीतर सिस्टम के प्रति जो अविश्वास और लाचारी का भाव है, उसने इस अमर्यादित भाषा को जन्म दिया है।

अंत में, जंतर-मंतर की यह घटना सिर्फ नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है। यह इस बात का आईना है कि हमारी आने वाली पीढ़ी व्यवस्था से कितनी त्रस्त है और उनके गुस्से को व्यक्त करने के साधन कितने बदल चुके हैं। अब यह बहस सिर्फ इस बात की नहीं है कि गालियां दी जानी चाहिए या नहीं, बल्कि इस बात की है कि क्या हम उस समाज का निर्माण कर रहे हैं जहाँ युवाओं का गुस्सा केवल गालियों के शोर में ही दबकर रह जाए?

शिक्षामंत्री का इस्तीफा: किसी की जीत नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित है

A picture of students protesting at Jantar Mantar against the education system and the NEET-UG exam

क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,

कर्तव्य पथ पर जो मिला, यह भी सही वह भी सही। — अटल बिहारी वाजपेयी

 

राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जब बात देश के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों विद्यार्थियों के हित की आती है, तब केवल और केवल राष्ट्र प्रथम का विचार ही सर्वोपरि रहता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में हुआ नेतृत्व परिवर्तन केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह परिपक्व राजनीति, नैतिक उच्चता और देश को अस्थिर करने व अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाली ताकतों को दिया गया मजबूत और करारा संदेश है।

 

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या कुर्सी से कहीं ऊपर देश और युवाओं का भविष्य है, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वयं लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है। जब जंतर-मंतर पर विभिन्न आंदोलनों और उपद्रवों की आड़ में देश को उद्वेलित करने और असंतोष फैलाने की साजिश रची जा रही थी, तब उन्होंने देश की युवाशक्ति के भविष्य को भ्रम और अनिश्चितता से बचाने के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।

 

उन्होंने पहले ही दिन से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सीबीआई जांच सौंपी और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड जैसी व्यवस्थाएं लागू की। जब यह साफ दिखने लगा कि विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में देशविरोधी और असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने का एजेंडा चला रहे हैं, तब उन्होंने पद त्याग कर विरोधियों की पूरी साजिश को एक झटके में नाकाम कर दिया। उनके इस कदम से सिद्ध हुआ कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए पद नहीं, बल्कि देश और विद्यार्थियों का हित ही सर्वोपरि है।

 

यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी पहले भी इस्तीफा दे सकते थे? लेकिन जैसे ही पेपर लीक का विषय सामने आया, उन्होंने जिम्मेदारियों से भागने के बजाय नीट-यूजी की परीक्षा का पुनः आयोजन पूर्ण पारदर्शिता के साथ करवाया।

उन्होंने नीट का परिणाम आने और पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता से संपन्न होने के बाद ही अपना इस्तीफा सौंपा। यदि वे विवाद के शुरुआती दौर में इस्तीफा दे देते, जब पूरा विपक्ष और असामाजिक तत्व चील की तरह नज़रें गड़ाए बैठे थे, तो इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो सकता था। अतः पूरी प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के उपरांत ही इस्तीफा सौंपना अत्यंत व्यावहारिक, रणनीतिक और सही कदम था।

 

राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रहलाद जोशी को सौंपी है। वे एक बहुत ही अनुशासित, दृढ़ और परिणाम-उन्मुख नेता माने जाते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक के हुबली स्थित ईदगाह मैदान में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने के प्रखर राष्ट्रवादी संकल्प से हुई थी।

केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला व खान मंत्री के रूप में उन्होंने कई कठिन विधायकी कार्यों और संकटपूर्ण परिस्थितियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। वे अपने सख्त अनुशासन, प्रशासनिक पकड़ और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों को बिना किसी गतिरोध के आगे बढ़ाने में वे पूरी तरह सक्षम हैं। 

 

एक घोर राष्ट्रवादी और दृढ़ नेतृत्व के हाथों में शिक्षा मंत्रालय आने से देश की शिक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होने की आशा है। फिर भी इन सबके बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुकी है।

आंदोलन के नाम पर अनशन, उग्र और अश्लील नारों तथा सनातन धर्म एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाने पर लेने का प्रयास किया गया। सोनम वांगचुक जैसे चेहरों की भूख हड़ताल को आगे रखकर व्यवस्था पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन देश के जागरूक नागरिकों ने इस विघटनकारी सोच को अच्छी तरह समझ लिया है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने तथाकथित छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों के दोहरे मापदंडों की भी पोल खोल दी है। जो खुद को छात्रों का रहनुमा बताते फिर रहे हैं, वे गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में हुए पेपर लीक मामलों पर पूरी तरह खामोश बैठे हैं और मीडिया के सवालों से कतराते दिख रहे हैं।

लेकिन इन छात्र संगठनों और प्रवक्ताओं द्वारा वहां के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की जा रही? यह चुप्पी साबित करती है कि यह आंदोलन छात्रों के हित में नहीं, बल्कि केवल भाजपा से राजनीतिक द्वेष के तहत विपक्ष द्वारा प्रेरित था।

 

वहीं सरकार ने इस पूरे एजेंडे के जवाब में एक साथ कई बड़े रणनीतिक लक्ष्य साध लिए हैं। आंदोलन की आड़ में संसद का काम रोकने और देश का माहौल खराब करने का लक्ष्य पूरी तरह विफल हो गया है।

विपक्षी पार्टियों की पोल खुली है कि उनके लिए देश से पहले पार्टी है। वहीं हिंसक गतिविधियों और उपद्रव में लिप्त तत्वों की पहचान हो चुकी है, जिससे अब कानून के अनुसार उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, विपक्षी राज्यों में भी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर वहां की सरकारों को घेरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

कहते हैं अधर्म और षड्यंत्र रचने वाली शक्तियों को लगता है कि वे कुछ समय के लिए भ्रम फैला सकती हैं, लेकिन इतिहास साक्षी है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी धर्म की स्थापना के लिए चुनौतियों का सामना किया और अंततः रावण तथा कंस जैसी ताकतों का समूल नाश हुआ।

सनातन संस्कृति और देश को अस्थिर करने वाले अपने ही जाल में उलझकर रह गए हैं। उनका देश को नेपाल और बांग्लादेश बनाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है। सत्य और धर्म की राह में सामयिक चुनौतियां अवश्य आती हैं, किंतु जीत राष्ट्रहित की ही होती है। एक बार फिर सिद्ध हो चुका है कि भारत की नीतियां किसी दबाव या षड्यंत्र से तय नहीं होंगी, वे केवल और केवल राष्ट्रहित से ही संचालित होंगी।