NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के  इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वह 'पूर्ण विनम्रता और कर्तव्य भावना' के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताते हुए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनके मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी से काम करेंगे तथा शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

 

63 वर्षीय प्रह्लाद जोशी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले चार से पांच वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

जोशी ने कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और शिक्षा क्षेत्र में कई अहम पहल की गईं। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।”

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वह अपनी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों—उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय—का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।

 

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों के हित और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आंदोलन का दुरुपयोग “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न कर सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है।

 

प्रधान ने अपने पत्र में कहा, “जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो स्थिति बनी है, उसका फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतों को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए। देश की एकता बनी रहनी चाहिए और भारत के प्रत्येक छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है।”

 

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों व आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के आश्वासन के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा 49 दिनों का आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।

 

यह फैसला सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच हुई तीन दौर की वार्ता के बाद लिया गया। इन बैठकों में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त किया है और उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू किया जाएगा।

Pralhad Joshi: शिक्षा मंत्री बनने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, धर्मेंद्र प्रधान के बारे में क्या कहा?

Pralhad Joshi: नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार (25 जुलाई) को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं इसे अपनी पूरी क्षमता से निभाऊंगा।

प्रह्लाद जोशी ने पत्रकारों से कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”

इससे पहले, देशभर में कॉजपा के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।

आंदोलनकारी छात्रों की नए शिक्षा मंत्री से तीन बड़ी मांगें

नीट पेपर लीक को लेकर करीब एक महीने तक जंतर-मंतर पर डटे रहने वाले छात्रों का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनकी एक बड़ी मांग पूरी हुई है। वह उम्मीद कर रहे हैं कि नए शिक्षा मंत्री व्यवस्था में कुछ ठोस बदलाव करेंगे।

प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी मांग पूरी होने का जश्न मना रहे छात्रों से जब पीटीआई ने सवाल किया कि नए शिक्षा मंत्री से उनकी क्या उम्मीदें है तो अलग-अलग राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों की बातों में तीन मांगें बार-बार सामने आईं और वह थीं- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सरकारी स्कूलों एवं प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना।

पिछले करीब एक महीने यानी आंदोलन की शुरुआत से ही धरने में शामिल गाजियाबाद के राज यादव ने कहा कि सरकार को सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना चाहिए। धरना स्थल पर मौजूद छात्रों की अलग-अलग आवाजों में भले ही शब्द अलग थे। लेकिन उनकी अपेक्षाएं लगभग एक जैसी रहीं।

‘शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है’

उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है। असली बदलाव तब माना जाएगा, जब शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी होगी। सरकारी स्कूल में बेहतर शिक्षा दी जाएगी। योग्य शिक्षक उपलब्ध होंगे और मेहनत करने वाले छात्रों को पेपर लीक तथा महंगी शिक्षा जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

दिल्ली के लक्ष्मी नगर की रहने वाली सृष्टि का कहना है कि महंगी शिक्षा ने पढ़ाई को कई छात्रों के लिए संघर्ष बना दिया है। उन्होंने बताया कि अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें खुद काम करना पड़ता है और ऐसे में अगर पेपर लीक हो जाए तो केवल परीक्षा ही नहीं। बल्कि मेहनत, समय और पैसे..तीनों पर पानी फिर जाता है।

सृष्टि ने नए शिक्षा मंत्री से मांग की कि सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए जाएं। शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जाए और सरकारी स्कूलों में बच्चों के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएं। करीब 15 से 20 दिनों से प्रदर्शन में शामिल राजस्थान के विक्रम चौधरी का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत प्राथमिक विद्यालयों से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने, शिक्षा का बजट बढ़ाने और यूपीएससी, नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है। नीट की तैयारी कर रहे 11वीं कक्षा के छात्र शौर्य ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से उनकी उम्मीद जगी है।

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प्रदर्शन में 20 जुलाई से शामिल उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी गौरव तोमर ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने, सरकारी स्कूलों में कौशल विकास को बढ़ावा देने और महंगी शिक्षा पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की। राजस्थान के जैसलमेर निवासी श्रवण कुमार ने कहा कि छात्रों को बार-बार पुनर्परीक्षा की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े। दूर-दराज में परीक्षा केंद्र आवंटित करने जैसी समस्याओं का समाधान किया जाए।

तेज प्रताप यादव को पटना पुलिस ने हिरासत में लिया, जानिए क्यों पुलिस में उठाया ये बड़ा कदम

बिहार की राजधानी पटना में हुए 25 जुलाई को हुए छात्रों के प्रदर्शन में जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। तेज प्रताप यादव को राजधानी पटना के सिटी सेंट्रल मॉल से पुलिस ने गिरफ्तार किया और फिर वहीं से उन्हें अपने साथ ले गई।

पटना से लिया गया हिरासत में 

PTI आई की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी पटना में कथित नीट पेपर लीक के विरोध में ‘बिहार बंद’ के दौरान प्रदर्शन किया जा रहा था। इसी बीच पुलिस ने तेज प्रताप यादव को शहर के एक शॉपिंग मॉल से हिरासत में लिया। सिटी एसपी के नेतृत्व में पुलिस टीम उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच सरकारी वाहन से अपने साथ ले गई।

पुलिस ने नहीं दी कोई जानकारी 

हालांकि, पटना पुलिस ने तेज प्रताप यादव को हिरासत में लेने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले दिन में तेज प्रताप गांधी मैदान के पास राम गुलाम चौक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी कथित नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। इस दौरान भी पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कही थी ये बात

इससे पहले  धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद छोड़ देना चाहिए था। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “बीजेपी दफ्तर में मिठाइयां बांटी जानी चाहिए। यह इस्तीफा काफी पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन सिर्फ इस्तीफे से युवाओं की समस्याएं खत्म नहीं होंगी।”

तेज प्रताप यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से अलग होने के बाद अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कॉकरोच पीपल्स पार्टी (सीपीपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके से बिहार आने की अपील की। उन्होंने लिखा, “मैं अभिजीत दीपके से विशेष अनुरोध करता हूं कि वे जल्द से जल्द बिहार आएं।” यह अपील ऐसे समय में आई, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान किया।

कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी? जानिए उनकी पढ़ाई और पूरा राजनीतिक सफर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे कई बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

कितने पढ़े लिखे हैं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की पढ़ाई की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बल्ली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि प्रह्लाद जोशी ने कला (आर्ट्स) विषय से पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक जीवन और संसदीय कामकाज का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब केंद्र सरकार कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है।

इस कॉलेज से की है पढ़ाई

प्रह्लाद जोशी ने अपनी स्कूली शिक्षा कर्नाटक के हुब्बल्ली में पूरी की। इसके बाद उन्होंने के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और यहां से कई प्रमुख राजनेता, अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पढ़ाई कर चुके हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2004 से हैं लगातार सांसद

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब तक पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया है और केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जब कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में है। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग उठाई। छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने उनकी कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर सख्ती बढ़ाने के लिए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ संसद में लाने की तैयारी भी की जा रही है।

Dharmendra Pradhan: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। बता दें कि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने फैसला किया है कि प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वह अभी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे बड़े छात्र आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का लगातार हो रहे सड़क विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ना बेहद कम देखने को मिलता है।

प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। बैठक से पहले सीजेपी नेताओं ने साफ कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं

CJP protest ended: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‍डा और केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) ने शनिवार को प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। 

 

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। मंगलवार तक हमें लिखित गारंटी देगी सरकार। सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस लेगी। साथ पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी तुरंत अपने घर चले जाएं।

 

केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्‍डा ने भी इस दौरान कहा कि सीजेपी की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई है। सरकार ने केस रद्द करने की मांग मान ली है साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की बात भी सरकार ने मांग ली है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। 

धरना स्थल पर जश्न का माहौल

नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जंतर-मंतर स्थित विरोध प्रदर्शन स्थल पर जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारी नाचते-गाते, तिरंगा लहराते और ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते नजर आए। 

CJP ने जंतर-मंतर पर धरना खत्म करने का किया ऐलान, सरकार के साथ इन तीन मांगों पर बनी सहमति

छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के 37 दिन बाद भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं इस इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अब अपना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया है। सरकार के साथ बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि पार्टी अच्छे विश्वास के साथ अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ जिन शर्तों पर सहमति बनी है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर लागू किए जाने के भरोसे पर यह फैसला लिया गया है।

धरना खत्म करने का ऐलान

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उनकी दूसरी बड़ी मांग प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि सभी बीजेपी शासित और बीजेपी समर्थित राज्यों में दर्ज मामलों पर लागू होगी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है और भरोसा दिया है कि सभी एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी।

सरकार के साथ तीनों मांगों पर बनी सहमति

सौरव दास ने बताया कि सरकार उन्हें दर्ज सभी एफआईआर की कॉपी भी उपलब्ध कराएगी। उनके अनुसार, अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि तीन से चार दिनों के भीतर सभी कॉपी उन्हें सौंप दी जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि सीजेपी ने सरकार को एक लिखित गारंटी का मसौदा भी दिया है। सरकार ने कहा है कि वह मंगलवार तक इस पर अपनी ओर से जवाब साझा करेगी। सौरव दास ने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक उन्हें एफआईआर वापस लेने और भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को लेकर सरकार की लिखित गारंटी मिल जाएगी।

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दौर की बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगें थीं। हली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। दूसरी मांग प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी मामलों को वापस लेने की थी, साथ ही भविष्य में उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करने की गारंटी देने की थी। तीसरी मांग उन परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की थी, जिन्होंने नीट परीक्षा नहीं होने के बाद अपने परिजनों को खो दिया। आशुतोष रंका ने कहा कि कुछ ही देर पहले धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनकी पहली मांग पूरी हो गई है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या? सोमवार को बड़ा कदम उठा सकती है सरकार, फुल डिटेल जानिए

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि ये लोकतंत्र की जीत है। वहीं शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने जहां राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। वहीं इस बड़े घटनाक्रम के साथ ही दो एक सवाल तेजी से तैरने लगे हैं कि अब सरकार का अगला कदम क्या होगा। केंद्र सरकार सोमवार 27 जुलाई को एक और बड़े कदम की ओर बढ़ती दिख रही है।

ये विधेयक लाने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ लाने का प्रस्ताव रखा है। इस नए कानून का मकसद संगठित तरीके से पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार यह विधेयक 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है।

विधेयक में कड़ी सजा का प्रवधान 

विधेयक के मसौदे में पेपर लीक कराने या सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा पेपर लीक के मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं, इस कानून के तहत दर्ज मामलों का ट्रायल चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर पूरा करने का भी प्रस्ताव है।

बनाए जाएंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट

प्रस्तावित विधेयक में यह भी कहा गया है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक और परीक्षा में नकल जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके। इसके अलावा, सरकार विशेष जांच इकाइयां (स्पेशलाइज्ड एनफोर्समेंट यूनिट्स) बनाने का भी प्रस्ताव लेकर आई है। इनके तहत केंद्र सरकार पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित कर सकेगी, जो इन मामलों की पूरी जांच की जिम्मेदारी संभालेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर इस कदम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद से पास कराने की कोशिश करेगी। हालांकि, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मंत्रिमंडल को दी गई जानकारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई से जुड़े नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस मसौदे को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मौजूदा नियमों की तुलना में पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए और कड़ी सजा का प्रावधान करना है। इससे पहले गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि सरकार अगले सप्ताह संसद में ऐसा विधेयक पेश करेगी, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान होंगे।

‘अभी खाली नहीं होगा जंतर-मंतर…’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान

पेपर लीक मामले और राजधानी दिल्ली में जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी मैंने पहले दिन ही ले ली थी। इससे पहले CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का पहला रिएक्शन सामने आया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि, ” यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। हम ऐसे ही नहीं मानेंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्हें यह मिलना चाहिए। उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। और दूसरी बात, 20 तारीख को जिन पुलिस वालों ने गुंडागर्दी की, उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

इससे पहले सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे। हम किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होंगे।”

बता दें कि, CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के साथ ही देश के कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थी। वहीं NEET पेपर लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।