CJP ने जंतर-मंतर पर धरना खत्म करने का किया ऐलान, सरकार के साथ इन तीन मांगों पर बनी सहमति

छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के 37 दिन बाद भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं इस इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अब अपना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया है। सरकार के साथ बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि पार्टी अच्छे विश्वास के साथ अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ जिन शर्तों पर सहमति बनी है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर लागू किए जाने के भरोसे पर यह फैसला लिया गया है।

धरना खत्म करने का ऐलान

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उनकी दूसरी बड़ी मांग प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि सभी बीजेपी शासित और बीजेपी समर्थित राज्यों में दर्ज मामलों पर लागू होगी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है और भरोसा दिया है कि सभी एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी।

सरकार के साथ तीनों मांगों पर बनी सहमति

सौरव दास ने बताया कि सरकार उन्हें दर्ज सभी एफआईआर की कॉपी भी उपलब्ध कराएगी। उनके अनुसार, अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि तीन से चार दिनों के भीतर सभी कॉपी उन्हें सौंप दी जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि सीजेपी ने सरकार को एक लिखित गारंटी का मसौदा भी दिया है। सरकार ने कहा है कि वह मंगलवार तक इस पर अपनी ओर से जवाब साझा करेगी। सौरव दास ने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक उन्हें एफआईआर वापस लेने और भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को लेकर सरकार की लिखित गारंटी मिल जाएगी।

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दौर की बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगें थीं। हली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। दूसरी मांग प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी मामलों को वापस लेने की थी, साथ ही भविष्य में उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करने की गारंटी देने की थी। तीसरी मांग उन परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की थी, जिन्होंने नीट परीक्षा नहीं होने के बाद अपने परिजनों को खो दिया। आशुतोष रंका ने कहा कि कुछ ही देर पहले धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनकी पहली मांग पूरी हो गई है।

Dharmendra Pradhan Resign: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया

दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।  NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया।

सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे। हम किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होंगे।”

बता दें कि, CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के साथ ही देश के कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थी। वहीं NEET पेपर लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को लिखा ये पत्र 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बने हालात का कोई भी देश-विरोधी तत्व गलत फायदा न उठा सके, देश में एकता बनी रहे और छात्र किसी कानूनी विवाद में न फंसें। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता छात्रों की पढ़ाई और उनका भविष्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया।

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