मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन...

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Kiren Rijiju on Abhijit Deepke: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर बड़ा बयान दिया है। रिजिजू ने दीपके को 'अपना ही लड़का' बताते हुए उनकी छात्र पहचान पर सवाल खड़े कर दिए और आरोप लगाया कि इस पूरे जेन-जी आंदोलन को राजनीतिक दलों ने हाईजैक कर लिया।

किरेन रिजिजू का राजनीतिक 'ट्विस्ट'

राजनीति में कब कौन 'अपना' हो जाए और कब 'पराया', यह कहना मुश्किल है! कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एएनआई से बातचीत के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवाओं के बीच तेजी से उभरते चेहरे अभिजीत दीपके पर खुलकर अपनी राय रखी। ALSO READ: CJP कार्यकर्ता के पिता की पीट-पीटकर जान ली, बंगाल में सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाना पड़ा भारी, दीपके ने साधा निशाना

 

रिजिजू से जेन-जी आंदोलन और छात्रों की शिक्षा सुधार संबंधी मांगों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। रिजिजू ने कहा कि यह जो अभिजीत दीपके है, वह हमारे अपने ही लड़के हैं, महाराष्ट्र से बौद्ध हैं…' लेकिन रिजिजू का यह प्यार यहीं नहीं रुका, उन्होंने तुरंत ही इस पर एक राजनीतिक 'ट्विस्ट' दे दिया।

वो स्टूडेंट कैसे हो गया?

नरम रुख दिखाने के तुरंत बाद रिजिजू ने दीपके की स्वतंत्र छात्र पहचान पर सीधा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि लेकिन वो तो आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, वो तो आप भी जानते हैं, सब जानते हैं… वो स्टूडेंट कैसे हो गया? रिजिजू ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी पार्टियां छात्रों के पीछे छिपकर अपनी 'राजनीतिक रोटियां' सेकने में जुट जाती हैं। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरी तरह शांति बनाए रखी और किसी को खरोंच तक नहीं आने दी, फिर भी सरकार पर दमन का झूठा नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि रिजिजू ने माना की छात्रों की चिंता जायज है। 

कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों मचा है बवाल?

अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी (Gen-Z) के बीच जबरदस्त पैठ बनाई है। CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद इसका तगड़ा सियासी असर देखने को मिला था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था। यह मूवमेंट NEET-UG 2026 पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद मुखर रहा है। 15 अगस्त 2026 से दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने के लिए देशभर में 'सोशल ऑडिट' अभियान शुरू किया है।

NDA से भी मिल चुका है न्योता!

दिलचस्प बात यह है कि रिजिजू से पहले केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास आठवले भी अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे चुके हैं। आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने और समाज को मजबूत करने के लिए दीपके को RPI (A) यानी NDA के कुनबे में शामिल हो जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 'अपना लड़का' कहे जाने और आप (AAP) का कार्यकर्ता बताए जाने के इस सियासी घेराबंदी पर अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या रुख अपनाती है?

‘देश को आपकी जरूरत है…’, CJP प्रोटेस्ट के बाद PM मोदी का Gen Z को बड़ा संदेश

PM Modi: नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं की क्षमता और ताकत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को युवा पीढ़ी की जरूरत है। बता दें कि पीएम मोदी ने यह बात दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के वार्षिक दीक्षांत समारोह में कही।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा, “हमें आप पर भरोसा है, और देश को आपकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी की देश के प्रति जिम्मेदारी होती है और युवाओं के लक्ष्यों में देश का सर्वांगीण विकास शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हर पीढ़ी को अपने समय की खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है… अगले 30 से 35 सालों में आप जो कुछ भी करेंगे, उसका असर ‘विकसित भारत’ की ओर हमारे सफर पर पड़ेगा। इसलिए, आपके हर फैसले का आधार यह भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा? इससे देश की कौन-सी जरूरतें पूरी होंगी?”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल लेंगे, वे “आखिरकार जीतेंगे”।

उन्होंने कहा, “…ग्लोबल स्ट्रैटेजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल पावर बैलेंस हर पल बदल रहा है, और इसकी मुख्य वजह टेक्नोलॉजी में हो रही तेजी से तरक्की है। कोई भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अगले 20 या 30 सालों में दुनिया कैसी दिखेगी… दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन, सभी में बदलाव आएंगे। लेकिन इन सबके बीच एक बात याद रखें: जो लोग सीखते रहेंगे, वे ही सफल होंगे।”

प्रधानमंत्री के संबोधन में Gen Z की झलक

स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने युवाओं को अपना योगदान देने के लिए कई रास्ते खोले हैं।

उन्होंने कहा, “हमने ऐसे कई रास्ते खोले हैं जिनसे हमारे युवा योगदान दे सकते हैं। नए सेक्टर खुले हैं। मैंने पहले भी स्पेस सेक्टर के बारे में बात की थी। आज वही स्पेस सेक्टर हमारे युवाओं के लिए आसमान की ऊंचाइयों को छूने का जरिया बन गया है।”

अपने संबोधन में Gen Z वाली बात जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा: “आज हमारे युवा कह रहे हैं, ‘अपने परिवार में रॉकेट बनाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं’। आज हमारे युवा रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश का ड्रोन सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है। आज ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर दवाइयां पहुंचाने जैसे जरूरी कामों में भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और यह सेक्टर आने वाले समय में देश की तरक्की में अहम भूमिका निभा सकता है।

बता दें कि पीएम मोदी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों और सुरक्षा बलों से संयम बरतने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि युवा छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा रोकने के लिए अगर हिंसक तरीके अपनाए गए, तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कथित भूमिका को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा नहीं है, युवाओं की बात सुनना जरूरी है। याचिका में दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कथित पत्थरबाजी को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है।

 

 सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी।

 

'अधिकारियों को बहुत सावधानी से कदम उठाना होगा'

CJI सूर्यकांत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सुरक्षा बलों और अधिकारियों को भी संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद सावधानी से काम करना होगा कि युवा हिंसा की ओर न बढ़ें।

कोर्ट ने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से देने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की बात सुनना और यह समझना कि वे किस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, स्थिति को संभालने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के विवेक पर भरोसा जताते हुए कहा कि आगे की कार्रवाई से पहले केंद्र सरकार का पक्ष भी देखा जाएगा।

 

20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई थी हिंसा

 

यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। यह मार्च NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच आयोजित किया गया था। दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस दौरान 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

 

पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी उठा था विवाद

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल को लेकर बाद में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार CRPF की एक आंतरिक जांच में पाया गया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान Rapid Action Force (RAF) के एक जवान ने पैलेट गन से सात राउंड फायर किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से पांच पैलेट प्रदर्शनकारियों को लगे थे।

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और सुरक्षा बलों को संयम से काम लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि युवाओं के विरोध को समझना और उनकी बात सुनना जरूरी है, क्योंकि बल प्रयोग से तनाव कम होने के बजाय स्थिति और बिगड़ सकती है। अब इस मामले के साथ छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं पर भी संयुक्त रूप से सुनवाई की जाएगी।

‘मेरी बेटी को नई जिंदगी मिली’: PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए लड़की की मां क्या बोली?

CJP Protest News Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए पहले माफी मांग चुकी 15 साल की छात्रा ने अब सार्वजनिक रूप से पहली बार खुलकर बात की है। छात्रा ने कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे माफ कर दिया जाएगा। उसने PM मोदी के संदेश को दूसरी जिंदगी मिलने जैसा बताया।

उसने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वह अपने आस-पास के लोगों से प्रभावित थी। आरोप लगाया कि उसे धमकियां मिल रही हैं। उसने कहा कि उसके खिलाफ दर्ज पुलिस केस अभी तक वापस नहीं लिया गया है। छात्रा ने कहा कि उसने अनजाने में वे बातें नहीं कही थीं। बल्कि वह विरोध प्रदर्शन वाली जगह के माहौल और दूसरे लोग जो उसे बता रहे थे, उससे प्रभावित थी।

लड़की की मां ने क्या कहा?

वहीं, लड़की की मां ने कहा कि PM मोदी के माफ करने के फैसले की वजह से उनकी बेटी को नई जिंदगी मिली है। न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए लड़की की मां ने कहा कि वे PM मोदी की शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने बदला लेने के बजाय माफ करने का रास्ता चुना। उन्होंने इसे अपनी बेटी के लिए एक दूसरा मौका बताया।

उन्होंने कहा, “PM मोदी ने उस बच्ची को माफ करके अपनी महानता दिखाई है, जिसने इतने गंदे और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया था। आज उसका जन्मदिन है और PM मोदी ने उसे सबसे बड़ा तोहफा दिया है जीवनदान….। आज इस लड़की का पुनर्जन्म हुआ है।” शुक्रवार को PM मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके संयम बरतने की अपील की थी।

यह अपील जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अपशब्दों वाले नारे लगाए जाने के बाद की गई थी। प्रधानमंत्री ने उन्हें अपशब्द कहने वालों को गुमराह बताया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसका समाधान गुस्से या बदले की भावना में है।

‘बहकावे में आ गई थी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। खुद को 15 साल का बताने वाली लड़की ने कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने संबंधी उसका वीडियो सोशल मीडिया पर उसने खुद पोस्ट नहीं किया था। उसने कहा कि वह इस पर बहुत शर्मिंदा है।

पीटीआई द्वारा संबंधित वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन गुमराह बच्चों को माफ किए जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समाज में व्याप्त आक्रोश को समझते हैं। लेकिन यह गुमराह बच्चों को अपनाने और उन्हें सही राह दिखाने का समय है।

जंतर-मंतर कैसे पहुंचीं लड़की?

माफी वाले वीडियो में लड़की ने कहा, “मैं अपने दोस्तों के साथ सीपी (कनॉट प्लेस) गई थी, जहां प्रदर्शन हो रहा था।…वहां लोग बहुत चीजें बोल रहे थे। प्रधानमंत्री जी को बहुत गालियां दे रहे थे। उन लोगों के बहकावे में आकर मैंने वे सब चीजें बोलीं।”

लड़की ने कहा, “मैं अभी मात्र 15 साल की हूं। मैंने जो किया वह माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत गंदी चीजें बोलीं। लेकिन यह मेरी पहली और आखिरी गलती होगी। इसके बाद मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी। न ही वो चीज मैंने कभी पोस्ट की थी।…मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मैं इतनी शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरें भी नहीं उठा पा रही हूं।”

गाजियाबाद में शिकायत दर्ज

लड़की का यह वीडियो गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की ओर से 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर सेक्टर-168 स्थित लोटस जिंग आवासीय सोसाइटी की निवासी लड़की ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची।

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पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज की गई और उसे जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने इस कंटेंट के प्रसार को लेकर साइबर सेल थाने में FIR दर्ज की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को इसे हटाने का नोटिस जारी कर जांच के तहत संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था।

दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान 6 दिन तक पथराव, 244 पुलिसकर्मी और 209 नागरिक घायल, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

cjp jantar mantar protest

कथित NEET-UG पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के सेंट्रल इलाके में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान छह दिनों से अधिक समय तक अलग-अलग स्थानों पर पथराव की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए संयम बरता और संवेदनशीलता को देखते हुए हालात को नियंत्रित किया।

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हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक संसद के आसपास करीब 2 किलोमीटर के दायरे में प्रदर्शन से जुड़े कई स्थानों को संवेदनशील बिंदु यानी फ्लैशपॉइंट के रूप में चिन्हित किया गया था। इन स्थानों में महत्वपूर्ण सड़कें और चौराहे शामिल थे।

संसद के आसपास इन जगहों पर हुई पथराव की घटनाएं

दस्तावेज के मुताबिक, जिन स्थानों पर पथराव की घटनाएं दर्ज की गईं, उनमें गोल डाक खाना, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रफी मार्ग पर रेल भवन के पास बैरिकेड, जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस स्थित LIC बिल्डिंग के पास आउटर सर्किल, टॉल्स्टॉय-संसद मार्ग कॉरिडोर के कई हिस्से, SBI बिल्डिंग के पास संसद मार्ग, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास रायसीना रोड और संसद मार्ग-टॉल्स्टॉय रोड की ओर रिगल बिल्डिंग क्षेत्र शामिल हैं। रफी मार्ग पर रेल भवन के पास स्थित बैरिकेड को संसद के सबसे नजदीक का घटनास्थल बताया गया है। अन्य स्थान संसद से करीब 0.8 से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित थे।

 

25 जुलाई तक जारी रहा पथराव

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद भी पथराव की घटनाएं जारी रहीं और 25 जुलाई तक स्थिति बनी रही। इसी दिन CJP ने सरकार की ओर से अपनी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की थी। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और इसे और अधिक हिंसक होने से रोकने का प्रयास किया।

सरकारी संपत्ति को भी नुकसान

प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान और कुछ सामान के गायब होने का भी उल्लेख है। इसके अनुसार, 110 बैरिकेड और 171 रस्सियां क्षतिग्रस्त हुईं या गायब मिलीं। इसके अलावा एक वायरलेस सेट, एक बॉडी-वॉर्न कैमरा, 10 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर (HHMD), दो पब्लिक एड्रेस सिस्टम, 15 लाउडहेलर, 10 अग्निशामक यंत्र, चार वायर कटर और एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर के भी क्षतिग्रस्त या गायब होने की जानकारी दी गई है।

355 हेलमेट समेत सुरक्षा उपकरण क्षतिग्रस्त

 

प्रदर्शन के दौरान पुलिस के सुरक्षा उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने की बात दस्तावेज में कही गई है। इसमें 355 हेलमेट, 285 बॉडी प्रोटेक्टर, 54 शील्ड, 10 टॉर्च, 24 फर्स्ट-एड बॉक्स और 12 कंबल क्षतिग्रस्त या गायब होने का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार, 29 सरकारी वाहनों पर भी असर पड़ा। इनमें कार, बस, मोटरसाइकिल और टेंपो शामिल हैं। एक पानी का टैंकर, एक DTC बस और एक सार्वजनिक वाहन के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी दी गई है।

 

244 पुलिसकर्मी और 209 नागरिक घायल

प्रदर्शन के दौरान 244 पुलिसकर्मियों और 209 नागरिकों के घायल होने की बात भी दस्तावेज में कही गई है। इन मामलों को मेडिको-लीगल केस (MLC) के तौर पर दर्ज किया गया। इनमें बार-बार दी गई चेतावनियां, बैरिकेड तोड़ना, वाहनों को नुकसान पहुंचाना और पुलिसकर्मियों तथा प्रेस के साथ कथित तौर पर लगातार अभद्र व्यवहार शामिल था।

Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

लोकसभा में ऐसा क्या बोल गए राहुल गांधी…जिसपर मचा हंगामा, सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति

Rahul Gandhi Speech: संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वहीं लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक शब्द को लेकर सदन में तीखी बहस हो गई। राहुल गांधी ने अपने भाषण में “इडियट्स” (मूर्ख) शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री ने तुरंत आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह शब्द असंसदीय है और इसे रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की लगातार हो रही घटनाओं से देश के युवाओं में गहरी निराशा है। उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए एक 18 साल के छात्र से हुई बातचीत का भी जिक्र किया और बताया कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में भरोसा कम होता जा रहा है।

राहुल गांधी की इस शब्द पर आपत्ति

राहुल गांधी ने उस छात्र से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र ने लोगों को तीन हिस्सों में बांटा था। उसके मुताबिक, पहला वर्ग छात्रों का है, दूसरा “मूर्ख” लोगों का और तीसरा उन लोगों का है जो इन मूर्खों का बिना सोचे-समझे समर्थन करते हैं। राहुल गांधी के इतना कहते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में ही आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल संसद की मर्यादा के खिलाफ है और इन्हें नहीं कहा जाना चाहिए। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई। किरेन रिजिजू ने कहा कि ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने “इडियट” (मूर्ख) शब्द का कई बार इस्तेमाल किया, जो असंसदीय है। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

सराकर ने कही ये बात 

जब सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी के बयान का विरोध किया, तब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आपत्ति जताने के बाद भी राहुल गांधी उसी असंसदीय शब्द का बार-बार इस्तेमाल कर रहे हैं। किरेन रिजिजू ने कहा, “वह बार-बार उसी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।” इस पर राहुल गांधी ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी व्यक्ति को उस शब्द से संबोधित करने का नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं किसी को ऐसा नहीं कह रहा हूं।” इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह आगे अपनी बात रखने के लिए कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल करेंगे।

हालांकि, किरेन रिजिजू ने सरकार की आपत्ति दोहराते हुए कहा, “आपने असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया है, इसलिए हमने इसका विरोध किया।” इसके बाद राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा और छात्र की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि छात्र का मानना था कि सच्चा छात्र हमेशा सच के साथ खड़ा रहता है, जबकि कुछ लोग अपनी छवि बनाने में लगे रहते हैं। राहुल गांधी के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन में फिर हंगामा होने लगा। यह पूरा विवाद लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान हुआ। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद यह विधेयक पहले से ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

NEET-UG Paper Leak : CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, आज फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। CBI के मुताबिक, सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) ने दाखिल की है। यह मामला बुधवार को पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

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इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला

CBI के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत दर्ज किया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) तथा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 3, 4, 5, 10 और 11 भी आरोपियों पर लगाई गई हैं।

 देशभर में मचा था बवाल

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NEET-UG पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कई स्तरों पर जांच शुरू की गई थी। इसी विवाद के बीच 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहा अपना 36 दिन का आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी।

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लोकसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा 

लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 मंगलवार को पास नहीं हो सका। दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक लगातार 9 घंटे बिल पर चर्चा हुई। विधेयक में 2024 में बने कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इससे पेपर लीक रोकने में मदद मिलेगी। चर्चा में अभी भी कई सांसदों का बोलना बाकी है। रात 11 बजे स्पीकर ने लोकसभा बुधवार 11 बजे तक स्थगित कर दी। अब बिल पर बुधवार को लोकसभा में फिर चर्चा और वोटिंग होगी। वहीं बिल राज्यसभा में भी पेश किया जाएगा।

NEET Protest: सरकार से बातचीत के बाद CJP का बयान- ‘किसी भी प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा’

NEET Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कहा है कि उसे सरकार के प्रतिनिधियों से नया आश्वासन मिला है। इसके अनुसार, आने वाले समय में बीजेपी/NDA शासित कुछ और राज्य NEET-UG प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं। यह जानकारी उस समय सामने आई, जब इससे कुछ घंटे पहले CJP ने कहा था कि वह प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर हुए “समझौते के उल्लंघन” के विरोध में दोबारा सड़कों पर उतर सकता है।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने रात करीब 1 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक करीब तीन घंटे तक चली।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने बिहार और असम सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन की कॉपी दिखाई, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने केंद्र और बीजेपी/NDA शासित दूसरे राज्यों से भी ऐसे ही नोटिफिकेशन जारी करने के अपने वादे को दोहराया है।

सौरभ दास ने कहा, “उम्मीद है कि जो भाषा और शर्तें तय हुई हैं, उन्हें ही इस्तेमाल किया जाएगा। कोई भी प्रदर्शनकारी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। हम सभी एक साथ हैं।”

सोमवार को CJP ने दी थी सख्त चेतावनी

यह देर रात किया गया पोस्ट CJP की ओर से सोमवार को दी गई सख्त चेतावनी के बाद आया। उस समय CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले प्रदर्शन के खत्म होने के बाद सरकार के साथ हुए समझौते के बावजूद कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को अभी भी गिरफ्तारी, निगरानी और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

आशुतोष रांका ने कहा, “हम देख रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने के समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली में वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया जा रहा है या परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने सभी FIR तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने और इस बात की गारंटी देने की मांग की कि कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर आंदोलन फिर से अपना विरोध शुरू कर देगा।

जल्द जारी होंगे अन्य राज्यों में नोटिफिकेशन

वहीं, सौरव दास ने कहा कि CJP के लोगों ने चिंता जताई थी कि बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों को शायद जमीनी स्तर पर लागू न किया जाए। उन्होंने बताया कि सरकारी प्रतिनिधियों ने बिहार के गृह विभाग का नोटिफिकेशन दिखाकर जवाब दिया और भरोसा दिलाया कि जल्द ही दूसरी जगहों पर भी ऐसी ही गारंटी जारी की जाएगी।

सौरव दास ने कहा, “सरकार ने गारंटी दी है कि अलग-अलग राज्यों में हमारी चिंताओं को दूर करने वाले नोटिफिकेशन कल तक जारी कर दिए जाएंगे और प्रदर्शनकारी सुरक्षित रहेंगे। भविष्य में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन को एक अलग आश्वासन मिला है कि राजस्थान में अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।

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धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की हुई थी आखिरी कोशिश! शिक्षा मंत्रालय बदलने का ऑफर ठुकराया, इस्तीफे पर अड़ा रहा CJP

Dharmendra Pradhan Resignation: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन का साफ कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान का सिर्फ मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा ही स्वीकार होगा।

बताया गया है कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले पिछले कई सप्ताह से NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर के अभियान में बदल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान के पद छोड़ने से पहले केंद्र ने एक समझौता करने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को मनाने में नाकाम रही।

सरकार ने निकाला था बीच का रास्ता

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने विवाद को शांत करने के लिए एक समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की थी कि यदि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय लेकर उन्हें किसी अन्य मंत्रालय में भेज दिया जाए तो क्या आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।

हालांकि आंदोलनकारी नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का पूर्ण इस्तीफा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रभावी संवाद समय पर स्थापित नहीं हो सका, जिससे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर और अधिक अड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत का जरिया न बन पाने की वजह से गतिरोध बना रहा। फिर दोनों पक्षों का रुख और कड़ा हो गया।

NEET विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन

यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था। बाद में यह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बल्कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक अभियान बन गया। CJP नेताओं ने इसे केवल एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं। बल्कि परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों और जवाबदेही की कमी के खिलाफ आंदोलन बताया।

बीजेपी के भीतर भी बढ़ी थी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे से करीब 48 घंटे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के भीतर भी यह महसूस किया जाने लगा था कि बढ़ते जनाक्रोश और संसद में लगातार हो रहे हंगामे के बीच धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना राजनीतिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। सरकार ने बैक-चैनल बातचीत के जरिए संकट टालने की कोशिश की। लेकिन जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारी किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हुए।

खबरों के मुताबिक, सरकार ने पर्दे के पीछे से बातचीत करके और प्रधान को कैबिनेट से हटाने के बजाय कुछ रियायतें देकर संकट को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, CJP का कहना था कि आंदोलन की मुख्य मांग तभी पूरी होगी जब वे इस्तीफा देंगे। सोशल मीडिया पर मजबूत लामबंदी और पहली बार वोट देने वालों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बीच अपील के कारण इस विरोध प्रदर्शन को असामान्य राजनीतिक महत्व भी मिला।

आखिरकार देना पड़ा इस्तीफा

करीब पांच सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद CJP ने इसे छात्रों की जीत बताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। ओडिशा के वरिष्ठ BJP नेता प्रधान ने पेट्रोलियम, स्टील और शिक्षा जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले थे। लेकिन लगभग पांच सप्ताह के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

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