पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”

Sonam Wangchuk: 23 दिन से भूख हड़ताल…कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट

राजधानी दिल्ली में सोमवार 20 जुलाई को खूब गहमा-गहमी दिखी। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान में काफी कुछ देखने को मिला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अब अस्पताल में भर्ती हैं। उनके हेल्थ को लेकर अस्पताल से बड़ी जानकारी दी है।

बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या उन्हें खुद अस्पताल से जाकर मुलाकात करने की इजाजत नहीं दी जाती। फिलहाल सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके ब्लड शुगर स्तर को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अस्पताल की ओर से बताया गया है कि उन्हें शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिया जा रहा है।

डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी

सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के अनुसार, उनकी जरूरी स्वास्थ्य जांच के सभी प्रमुख संकेत फिलहाल स्थिर हैं। अस्पताल ने कहा कि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। हालांकि, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिए जाने के बाद खून से जुड़े दूसरे जांच परिणामों में सुधार देखा गया है।

बुलेटिन के मुताबिक, वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से पूरी तरह उबरने और किसी भी संभावित परेशानी का समय रहते पता लगाने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। अस्पताल ने यह भी बताया कि आगे का इलाज उनकी सेहत में होने वाले सुधार और लैब जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।

NEET UG 2026 Result जारी! पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने किया टॉप, लड़कियों का शानदार रहा प्रदर्शन

NEET UG Result 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट), NEET UG 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट और फाइनल आंसर-की जारी कर दी है। एग्जाम में शामिल हुए 20 लाख से अधिक उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट पर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से 715/720 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR 1) प्राप्त की है। कुल 11.21 लाख उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं। क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। एग्जाम 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी।

क्यों जल्दी जारी हुआ रिजल्ट?

NTA द्वारा जारी फाइनल आंसर-की के अनुसार, परीक्षा का एक सवाल ड्रॉप कर दिया गया है। इसी आधार पर अंतिम परिणाम तैयार किए गए हैं। NTA ने कहा कि NEET-UG के नतीजे समय पर घोषित किए गए हैं ताकि मेडिकल कोर्स में एडमिशन और उम्मीदवारों की काउंसलिंग का शेड्यूल योजना के अनुसार आगे बढ़ सके।

सभी क्वालिफ़ाई करने वाले उम्मीदवारों में से 58 प्रतिशत से ज़्यादा महिलाएं हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के क्वालिफ़ाई करने की दर भी अधिक रही। परीक्षा में शामिल होने वाली 56.8 प्रतिशत महिलाएं क्वालिफ़ाई हुईं हैं। जबकि पुरुषों के मामले में यह आँकड़ा 55.1 प्रतिशत था।

लड़कियों का प्रदर्शन रहा बेहतर

इस साल NEET UG 2026 में लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा:-

  • कुल सफल उम्मीदवारों में 58% से अधिक लड़कियां हैं।
  • परीक्षा में शामिल हुई 56.8% छात्राएं सफल रहीं।
  • 55.1% छात्र क्वालिफाई कर सके।

कैटेगरी के अनुसार सफल उम्मीदवार

जनरल (General): 2.91 लाख

OBC-NCL: 5.12 लाख

SC: 1.59 लाख

ST: 63,716

जनरल-EWS: 95,026

PwBD: 3,666

PwD: 303

साथ ही सभी कैटेगरी के कट-ऑफ अंक और पर्सेंटाइल भी जारी कर दिए गए हैं।

कितने छात्रों ने बनाए बड़े स्कोर?

NTA ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की है। इनमें प्रमुख नाम हैं:-

जिगमेट यांगचेन लामो (लद्दाख) – 530 अंक

ध्रुव त्रिपाठी (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) – 606 अंक

फहमीदा अनीस (लक्षद्वीप) – 573 अंक

इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों के टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की गई है। कुल 17 राज्य टॉपर्स ने 700 या उससे अधिक अंक। जबकि 26 राज्य टॉपर्स ने 690 से अधिक अंक हासिल किए हैं।

परीक्षा शुल्क वापसी की प्रक्रिया

NTA ने बताया कि 3 मई को आयोजित परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार परीक्षा शुल्क की वापसी (Refund) के लिए अपनी बैंक खाते की जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। अब तक 11.46 लाख से अधिक उम्मीदवार अपनी बैंक डिटेल्स जमा कर चुके हैं।

ऐसे करें रिजल्ट चेक

री-NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड की मदद से अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के साथ ही अब उम्मीदवारों की नजर काउंसलिंग प्रक्रिया पर होगी, जिसके जरिए देशभर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी।

NEET-UG Paper Leak: CBI का बड़ा दावा, लातूर कोचिंग संचालक के मोबाइल से मिले 111 सवाल NTA पेपर से करते हैं मैच

NEET-UG Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक का सबसे मजबूत सबूत दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया है। दरअसल, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अदालत को बताया कि लातूर के कोचिंग ऑपरेटर शिवराज मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से मिले हाथ से लिखे 136 सवालों में से 111 सवाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मास्टर क्वेश्चन पेपर से मेल खाते हैं। जिससे इस दावे को और मजबूती मिलती है कि परीक्षा का पेपर टेस्ट से पहले ही लीक हो गया था।

बता दें कि शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र के लातूर में ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ (RCC) नाम का कोचिंग इंस्टीट्यूट और ‘मोटेगांवकर सर की RCC’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिसके 1.6 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

CBI ने लगाया आरोप

CBI का आरोप है कि मोटेगांवकर को 3 मई को होने वाली NEET-UG परीक्षा से कुछ दिन पहले, 23 अप्रैल को लीक हुए सवाल मिले थे। एजेंसी के मुताबिक, यह सब एक कथित चेन के जरिए हुआ जिसमें लातूर के बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) डॉ. मनोज शिरुरे और केमिस्ट्री के रिटायर्ड लेक्चरर व NTA पैनल के पूर्व सदस्य PV कुलकर्णी शामिल थे।

CBI का दावा है कि कुलकर्णी के पास कथित तौर पर प्रश्न पत्रों तक पहुंच थी और इन्हीं के जरिए सवाल बाहर आए। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पेपर लीक 5 लाख रुपये के बदले किया गया था।

फिलहाल, इस मामले में मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया है और ये आरोप CBI की उन दलीलों का हिस्सा हैं जो कोर्ट में उनकी जमानत का विरोध करते हुए पेश की गई हैं।

CBI ने यह भी कहा है कि लीक हुए प्रश्न पत्र की PDF कॉपी टेलीग्राम के जरिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये में बेची गई थी। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले कुछ अभ्यर्थियों के बीच 150 पेज का “गेस पेपर” भी बांटा गया था, जिसमें 410 सवाल थे। इनमें से लगभग 120 सवाल परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन के सवालों से मेल खाते पाए गए, जिससे पता चलता है कि उम्मीदवारों के पास पेपर का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही मौजूद था।

जांच महाराष्ट्र तक कैसे पहुंची

महाराष्ट्र से जुड़ा मामला तब सामने आया जब जांच करने वालों ने परीक्षा से पहले सामने आए तथाकथित “गेस पेपर” के सर्कुलेशन की जांच शुरू की।

शुरुआती जांच में पता चला था कि सर्कुलेट किए गए मटीरियल में 100 से ज्यादा सवाल असली NEET-UG पेपर से मेल खाते थे, जिसके बाद अधिकारियों ने राजस्थान और उत्तराखंड से आगे बढ़कर जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद जांच महाराष्ट्र तक फैल गई, जहां जांच करने वालों ने लातूर के ट्यूटर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच की।

NEET पेपर लीक विवाद कब शुरू हुआ?

बता दें कि NEET पेपर लीक विवाद तब शुरू हुआ, जब राजस्थान में छात्रों के बीच घूम रहे एक कथित “गेस पेपर” (अनुमानित प्रश्न-पत्र) और असली प्रश्न-पत्र में बहुत ज्यादा समानता पाई गई। बाद में जांचकर्ताओं को पता चला कि 100 से ज्यादा सवाल एक जैसे थे, जिसके बाद राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, जांचकर्ताओं को एक संगठित नेटवर्क का पता चला जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में फैले प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले, बिचौलिए, कोचिंग चलाने वाले और उम्मीदवार शामिल थे। इसके बाद मामला CBI को सौंप दिया गया।

इस कथित लीक के कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को 3 मई की परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को देश भर में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना पड़ा, जिससे 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित हुए।

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