केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंत्रिमंडल और राज्यसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा, जानिए कौन हैं ये, क्यों उठाया ऐसा कदम?

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहते हैं।  वहीं ऐसी खबरें है कि, दिवाली से पहले केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कभी भी फेरबदल हो सकता है। सरकारी सूत्रों ने CNN-NEWS18 को बताया कि, इस दौरान कम से कम छह मंत्री पद खाली होने की संभावना है। वहीं मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नियम के चलते उनके मंत्रिपद छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पिछले ढाई साल से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के बीच में होने वाला बड़ा बदलाव होगा।

एल. मुरुगन ने दिया इस्तीफा

केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहते हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद छोड़ चुके हैं। इन इस्तीफों के बाद केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें और तेज हो गई हैं। हाल ही में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा को राज्यसभा के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया, क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। वहीं, केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है।

एल. मुरुगन ने किया पोस्ट 

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और तमिलनाडु की सेवा करना मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे से लेकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जिम्मेदारी निभाने तक का सफर मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। अब मैं दोबारा जमीनी स्तर पर लौटकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहता हूं। मेरा लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में बीजेपी को और मजबूत बनाना है। मेरे लिए सबसे पहले देश, फिर पार्टी और आखिर में मैं खुद हूं।” तमिलनाडु के रहने वाले मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था।

 

केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई बैठकें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने और कामकाज को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। इससे पहले भी मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उस समय सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया था। उन्होंने बताया था कि सरकार की प्राथमिकता संसद के बजट सत्र से जुड़े कामों पर थी।

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‘Gyanesh, it’s done bro…’ का नारा लगाते बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी; अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद डिटेन

Rahul Gandhi-India Bloc EC March: देश की राजधानी में मंगलवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई में दर्जनों विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। सुरक्षा बलों ने इस मार्च को संसद मार्ग पर ही नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, बोले- ‘ज्ञानेश, अब बहुत हुआ!’

सुरक्षा बलों द्वारा रास्ता रोके जाने पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों के बीच लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और हाथों में तिरंगा लहराते हुए सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए लिखा, ‘Gyanesh it’s done bro. Time to resign’ यानी ज्ञानेश, अब बहुत हो गया ब्रो! अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।

इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन के गेट तक पहुंच गए, जहां से पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

सड़क पर ही धरने पर बैठे सांसद, कई बड़े चेहरे हिरासत में

बैरिकेडिंग के पास मार्च रुकने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी व डेरेक ओ’ब्रायन और सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत तमाम सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

सांसदों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे, जिनमें सीईसी ज्ञानेश कुमार को संघ (RSS) की गणवेश में दिखाया गया था। सांसदों ने ‘भाजपा है CEC है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है’ जैसे तीखे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।

पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, संजय राउत ने उठाए सवाल

विपक्ष के मार्च को देखते हुए संसद भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भारी बैरिकेडिंग की गई थी। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस भारी सुरक्षा बल की तैनाती पर तीखा हमला बोला।

संजय राउत ने कहा, ‘हम सांसद हैं, इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। हमें रोकने के लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बल तैनात करने की क्या ज़रूरत थी? हम निहत्थे हैं और शांतिपूर्वक पैदल जा रहे थे।’ राउत ने यह भी दावा किया कि मौके पर बीएसएफ और सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया था और केंद्रीय मंत्रियों के आवासों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

विपक्ष का यह भारी विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया है, जो सोमवार को मतदाता नामांकन से जुड़े ‘फॉर्म 6’ (Form 6) को लेकर की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगी कि क्या नियमों में बदलाव किए गए थे और इसकी अनुमति किसने दी थी।

इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर देश को गुमराह किया है।

TMC के हाथ से फिसले दो पार्लियामेंट्री पैनल से अध्यक्ष का पद, डोला सेन और काकोली घोष को लगा करारा झटका

राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने शनिवार को अलग-अलग विभागों से जुड़ी संसद की स्थायी समितियों को फिर से बनाया। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पर पड़ा है। पार्टी को दो अहम संसदीय समितियों के अध्यक्ष के पदों से हाथ धोना पड़ा है। इस फैसले से टीएमसी सांसद डोला सेन और कीर्ति आजाद को बड़ा झटका लगा है।

वाणिज्य मामलों पर संसद की स्थायी समिति का नया अध्यक्ष बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी को बनाया गया है। उन्होंने डोला सेन की जगह ली है। वहीं टीएमसी के बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार उनकी पुरानी पार्टी के सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह केमिकल्स और फर्टिलाइजर पर पैनल की चेयरपर्सन बनाई गई हैं। डीएमके एमपी तिरुचि शिवा और के कनिमोझी को उद्योग मामलों पर पार्लियामेंट्री कमिटी और फूड, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन पर पैनल का फिर से अध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के कुछ जरूरी सहयोगी दलों, JD-U, शिवसेना और TDP – के नेताओं को भी अलग-अलग पार्लियामेंट्री कमेटियों के हेड बनाए रखा गया है।

कांग्रेस के शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कुछ विपक्षी नेताओं को भी क्रमशः एक्सटर्नल अफेयर्स और एग्रीकल्चर कमेटियों के चेयरपर्सन के तौर पर बनाए रखा गया है। कांग्रेस के मुकुल वासनिक को एजुकेशन, महिला, बच्चे और युवा मामलों पर पार्लियामेंट्री पैनल का हेड बनाए रखा गया है, जबकि समाजवादी पार्टी के राम गोपाल वर्मा को हेल्थ और फैमिली वेलफेयर पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है। BJP के राधा मोहन सिंह डिफेंस पर पैनल को हेड करेंगे।

JD-U के संजय कुमार झा को ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि शिवसेना के श्रीरंग बार्ने को एनर्जी पर पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के सुजीत कुमार ने अपनी पार्टी के MP बृज लाल की जगह पर पर्सनेल, पब्लिक ग्रीवांस, लॉ और जस्टिस पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन बनाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को कोल, माइंस और स्टील पर पैनल का हेड फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि BJP के राजीव प्रताप रूडी को वॉटर रिसोर्स पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के भर्तृहरि महताब फाइनेंस पैनल के हेड बने रहेंगे, जबकि उनके पार्टी साथी राधा मोहन दास अग्रवाल को होम अफेयर्स पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के निशिकांत दुबे को भी कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पैनल का हेड फिर से बनाया गया है, जबकि महाराष्ट्र से पार्टी MP मेधा विश्राम कुलकर्णी को साइंस और टेक्नोलॉजी, एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज कमेटी का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के सुधीर गुप्ता ने रेलवे पैनल के चेयरपर्सन के तौर पर पार्टी साथी सी एम रमेश की जगह ली है, जबकि कांग्रेस के सप्तगिरी शंकर उलाका को रूरल डेवलपमेंट और पंचायती राज पैनल का हेड फिर से बनाया गया है।

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लोकसभा में ऐसा क्या बोल गए राहुल गांधी…जिसपर मचा हंगामा, सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति

Rahul Gandhi Speech: संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वहीं लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक शब्द को लेकर सदन में तीखी बहस हो गई। राहुल गांधी ने अपने भाषण में “इडियट्स” (मूर्ख) शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री ने तुरंत आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह शब्द असंसदीय है और इसे रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की लगातार हो रही घटनाओं से देश के युवाओं में गहरी निराशा है। उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए एक 18 साल के छात्र से हुई बातचीत का भी जिक्र किया और बताया कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में भरोसा कम होता जा रहा है।

राहुल गांधी की इस शब्द पर आपत्ति

राहुल गांधी ने उस छात्र से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र ने लोगों को तीन हिस्सों में बांटा था। उसके मुताबिक, पहला वर्ग छात्रों का है, दूसरा “मूर्ख” लोगों का और तीसरा उन लोगों का है जो इन मूर्खों का बिना सोचे-समझे समर्थन करते हैं। राहुल गांधी के इतना कहते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में ही आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल संसद की मर्यादा के खिलाफ है और इन्हें नहीं कहा जाना चाहिए। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई। किरेन रिजिजू ने कहा कि ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने “इडियट” (मूर्ख) शब्द का कई बार इस्तेमाल किया, जो असंसदीय है। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

सराकर ने कही ये बात 

जब सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी के बयान का विरोध किया, तब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आपत्ति जताने के बाद भी राहुल गांधी उसी असंसदीय शब्द का बार-बार इस्तेमाल कर रहे हैं। किरेन रिजिजू ने कहा, “वह बार-बार उसी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।” इस पर राहुल गांधी ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी व्यक्ति को उस शब्द से संबोधित करने का नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं किसी को ऐसा नहीं कह रहा हूं।” इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह आगे अपनी बात रखने के लिए कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल करेंगे।

हालांकि, किरेन रिजिजू ने सरकार की आपत्ति दोहराते हुए कहा, “आपने असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया है, इसलिए हमने इसका विरोध किया।” इसके बाद राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा और छात्र की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि छात्र का मानना था कि सच्चा छात्र हमेशा सच के साथ खड़ा रहता है, जबकि कुछ लोग अपनी छवि बनाने में लगे रहते हैं। राहुल गांधी के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन में फिर हंगामा होने लगा। यह पूरा विवाद लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान हुआ। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद यह विधेयक पहले से ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।