CJP फंडिंग पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके आमने-सामने:मिलबेन बोलीं- फेल हुए तो अमेरिकी डोनर्स छोड़ देंगे, बेहतर है पीएम के साथ बैठो, भारत को आगे बढ़ाओ

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।

CJP फंडिंग पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके आमने-सामने:मिलबेन बोलीं- फेल हुए तो अमेरिकी डोनर्स छोड़ देंगे, बेहतर है पीएम के साथ बैठो, भारत को आगे बढ़ाओ

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।

CJI के खिलाफ विवादित पोस्ट को लेकर घिरी केरल कांग्रेस, आलोचना के बाद कर्मचारी को पद से हटाया, बीजेपी ने बताया शर्मनाक

Kerala Congress: कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अकाउंट से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के खिलाफ की गई एक विवादित पोस्ट सोमवार को व्यापक रूप से वायरल हुई। लेकिन सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना होने के बाद इसे हटा दिया गया। पार्टी ने पोस्ट करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी पद से हटा दिया। केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने एक बयान में कहा कि पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट पर प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ विवादित पोस्ट करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है।

जोसेफ ने कहा कि यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की जानकारी, सहमति या परामर्श के बिना की गई थी। उन्होंने कहा, “केपीसीसी इस बात की जांच करेगी कि ऐसी पोस्ट किन परिस्थितियों में की गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस पार्टी को कोई असहमति नहीं है। जोसेफ ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस रुख के विपरीत व्यक्त किए गए विचार केपीसीसी नेतृत्व का आधिकारिक रुख नहीं है।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने हटाई जा चुकी पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि न्यायपालिका पार्टी का अगला निशाना होगी। रीजीजू ने X पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस भारत के सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करना चाहती है। सभी भारत-विरोधी गिरोह एकजुट हो रहे हैं। सभी देशभक्त भारतीय भी एकजुट होंगे।”

BJP ने बताया शर्मनाक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने CJI के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी ने आरोप लगाया कि पार्टी अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है जो बेहद शर्मनाक है। BJP के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दल पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग की माओवादी कांग्रेस में पूरी तरह बदल चुकी और चरम ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता अपना चुकी कांग्रेस अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है, जो शर्मनाक है।”

BJP प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी मानसिकता पूरी तरह अराजकतावादी हो गई है। यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा, “अब कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक हैंडल से CJI के इस्तीफे की मांग की जा रही है।” उन्होंने सवाल किया, “संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने और साथ ही संविधान की दुहाई देने से बड़ी राजनीतिक पाखंड की मिसाल क्या हो सकती है?”

उन्होंने कहा, “अगर चुनाव हारते हैं, तो निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं। अगर फैसला उनके खिलाफ आता है, तो न्यायपालिका को निशाना बनाते हैं।” BJP सांसद निशिकांत दुबे ने भी केरल कांग्रेस की ओर से प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी पर हमला बोला।

दुबे ने X पर कहा, “राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने के बाद ‘महाराजा’ राहुल गांधी ने अब उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की भी मांग कर दी है।” BJP सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “सूत्रों के अनुसार, इन इस्तीफों के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे, शरजील इमाम राष्ट्रपति बनेंगे, अभिजीत दीपके उपराष्ट्रपति बनेंगे, प्रियंका गांधी सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी और खालिस्तानी पन्नून को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “इस बीच, (जॉर्ज) सोरोस भारत के अमेरिका में राजदूत होंगे।” BJP के एक अन्य प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि CJI द्वारा गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किए जाने से यह महत्वपूर्ण संदेश गया है कि न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए।

कब शुरू हुआ विवाद?

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी पाबंदियों के मद्देनजर स्थिति के बारे में पूछे जाने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “ये कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। ये मेरा विषय नहीं है।” CJI राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की स्थापना की 33वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या कानून बनाने वाला कोई व्यक्ति। उनसे पूछा गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार किए जाने के बाद विपक्षी नेता अपनी शिकायतें उनके सामने कैसे रख सकते हैं।

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CJI की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की केरल इकाई ने C पर एक पोस्ट में कहा, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपका स्थान लेने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।” हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया।

TMC के हाथ से फिसले दो पार्लियामेंट्री पैनल से अध्यक्ष का पद, डोला सेन और काकोली घोष को लगा करारा झटका

राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने शनिवार को अलग-अलग विभागों से जुड़ी संसद की स्थायी समितियों को फिर से बनाया। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पर पड़ा है। पार्टी को दो अहम संसदीय समितियों के अध्यक्ष के पदों से हाथ धोना पड़ा है। इस फैसले से टीएमसी सांसद डोला सेन और कीर्ति आजाद को बड़ा झटका लगा है।

वाणिज्य मामलों पर संसद की स्थायी समिति का नया अध्यक्ष बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी को बनाया गया है। उन्होंने डोला सेन की जगह ली है। वहीं टीएमसी के बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार उनकी पुरानी पार्टी के सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह केमिकल्स और फर्टिलाइजर पर पैनल की चेयरपर्सन बनाई गई हैं। डीएमके एमपी तिरुचि शिवा और के कनिमोझी को उद्योग मामलों पर पार्लियामेंट्री कमिटी और फूड, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन पर पैनल का फिर से अध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के कुछ जरूरी सहयोगी दलों, JD-U, शिवसेना और TDP – के नेताओं को भी अलग-अलग पार्लियामेंट्री कमेटियों के हेड बनाए रखा गया है।

कांग्रेस के शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कुछ विपक्षी नेताओं को भी क्रमशः एक्सटर्नल अफेयर्स और एग्रीकल्चर कमेटियों के चेयरपर्सन के तौर पर बनाए रखा गया है। कांग्रेस के मुकुल वासनिक को एजुकेशन, महिला, बच्चे और युवा मामलों पर पार्लियामेंट्री पैनल का हेड बनाए रखा गया है, जबकि समाजवादी पार्टी के राम गोपाल वर्मा को हेल्थ और फैमिली वेलफेयर पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है। BJP के राधा मोहन सिंह डिफेंस पर पैनल को हेड करेंगे।

JD-U के संजय कुमार झा को ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि शिवसेना के श्रीरंग बार्ने को एनर्जी पर पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के सुजीत कुमार ने अपनी पार्टी के MP बृज लाल की जगह पर पर्सनेल, पब्लिक ग्रीवांस, लॉ और जस्टिस पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन बनाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को कोल, माइंस और स्टील पर पैनल का हेड फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि BJP के राजीव प्रताप रूडी को वॉटर रिसोर्स पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के भर्तृहरि महताब फाइनेंस पैनल के हेड बने रहेंगे, जबकि उनके पार्टी साथी राधा मोहन दास अग्रवाल को होम अफेयर्स पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के निशिकांत दुबे को भी कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पैनल का हेड फिर से बनाया गया है, जबकि महाराष्ट्र से पार्टी MP मेधा विश्राम कुलकर्णी को साइंस और टेक्नोलॉजी, एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज कमेटी का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के सुधीर गुप्ता ने रेलवे पैनल के चेयरपर्सन के तौर पर पार्टी साथी सी एम रमेश की जगह ली है, जबकि कांग्रेस के सप्तगिरी शंकर उलाका को रूरल डेवलपमेंट और पंचायती राज पैनल का हेड फिर से बनाया गया है।

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Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।

PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta को 3 दिन का अल्टीमेटम, संसदीय समिति ने दी बड़ी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ घंटों के लिए फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसदीय समिति ने Meta को कड़ी चेतावनी दी है। समिति ने कहा है कि अगर कंपनी तीन दिनों के भीतर इस मामले पर उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो भारत में उसे मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) कानूनी सुरक्षा खत्म की जा सकती है।

Firstpost की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चेतावनी तब दी गई जब कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के प्रतिनिधियों से प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने के बारे में सवाल किए। यह वीडियो फेसबुक पर लगभग पांच घंटे तक उपलब्ध नहीं था। पैनल ने इस घटना के लिए मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग से जवाबदेही और व्यक्तिगत माफी की मांग की है।

बता दें कि यह विवाद फेसबुक के एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट’ (NEET) का पेपर लीक होने के विरोध में हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों पर बात की थी और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था।

संसदीय समिति ने जवाबदेही की मांग की

समिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि जब तक इस चूक के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं होगा। उन्होंने जकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को कहा और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 79 के तहत मेटा को मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन की समीक्षा की जा सकती है।

यह सुरक्षा ऑनलाइन मध्यस्थों (intermediaries) को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए जिम्मेदारी से बचाती है, बशर्ते वे जरूरी सावधानी (due diligence) के नियमों का पालन करें।

समिति ने Meta को तीन दिनों के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो समिति भारत में Meta की इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) सुरक्षा खत्म करने की सिफारिश कर सकती है।

Meta से मुश्किल सवाल

बैठक के दौरान, कमेटी के सदस्यों ने Meta से पूछा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने का फ़ैसला किसने लिया और इसे क्यों हटाया गया, जबकि प्लेटफॉर्म पर दूसरे आपत्तिजनक कंटेंट मौजूद थे। सदस्यों ने एल्गोरिदम के पक्षपाती होने और आम यूजर्स की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर प्रधानमंत्री का वीडियो भी हटाया जा सकता है, तो आम लोगों के कंटेंट की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में Meta के प्रतिनिधियों ने इस घटना पर खेद जताया और संसदीय समिति से माफी मांगी। हालांकि, समिति के सदस्यों का कहना था कि केवल माफी काफी नहीं है। इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सरकार की जांच-पड़ताल तेज हुई

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब MeitY ने Meta की ग्लोबल टीम को PM मोदी के वीडियो से जुड़े विवाद, कथित एल्गोरिदम बायस (पक्षपात), प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा के उपायों पर चर्चा के लिए बुलाया है। सरकार सोशल मीडिया कंपनी की जांच-पड़ताल तेज कर रही है, इसलिए ये बैठकें दो दिनों तक चलेंगी।

संसदीय समिति की इस बैठक में Meta, Google, YouTube और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ MeitY और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह पूरी कवायद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, ऑनलाइन सुरक्षा और भारतीय कानूनों के पालन की समीक्षा के तहत की जा रही है।

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