Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

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Top News 4 September : देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, इसरों ने अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह प्रक्षेपित किया। इंडियन बास्केट में क्रूड फिर 100 डॉलर के करीब पहुंचा। नेपाल भीषण बाढ़ के बाद भूकंप से थर्राया। अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को अनोख चुनौती। 4 सितंबर की बड़ी खबरें :   

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम 

देशभर में जन्माष्‍टमी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन समेत देशभर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे होने वाले कृष्ण जन्मोत्सव की सभी तैयारियां हो चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी। ALSO READ: कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

 

इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा ईओएस-05 उपग्रह

इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित उपग्रह भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट है।

 

क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अमेरिका और ईरान के बीच जंग से तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती नजर आ रही है। इंडियन बास्केट में आज कच्चे तेल के दाम 99.35 डॉलर प्रति बैरल हो गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 91.92 डॉलर प्रति बैरल है। 

 

नेपाल में भूकंप

नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को चुनौती

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। ALSO READ: अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

बाढ़ के बीच में भी नेपाल की क्रिकेट टीम ने मैच जीतकर जनता को ढांढस बंधाई

नेपाल में बाढ़ ने मुश्किल हालत पैदा कर दी है लेकिन इसके बावजूद टीम ने अपने घरवालों की चिंता के बीच मलेशिया से खेले गए अभ्यास मैच में जीत अर्जित कर पूरे देश का मनोबल बढ़ाने का काम किया है। गौरतलब है कि नेपाल में आई बाढ़ के कारण कुल 177 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

मैच की बात करें तो नेपाल ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय अभ्यास मैच में मलेशिया पर 27 रनों से जीत अर्जित की। पहले बल्लेबाजी करने उतरी नेपाल का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और उसने 41.4 ओवरों में 170 रन बनाए। मलेशिया भी नेपाल के खिलाफ बल्ले से औसत खेल भी नहीं खेल पाई और 40.1 ओवर में 143 रन बनाकर आउट हो गई।

यह जीत क्रिकेट से ज्यादा देश के लिए है क्योंकि नेपाल नाजुक हालत से गुजर रहा है।गौरतलब है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित उत्तरी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आए भयंकर सैलाब और लैंडस्लाइड में 1500 से अधिक लोग लापता है। वहीं इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी लापता है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर कई तीर्थ यात्रियों के लापता होने की जानकारी भी सामने आ रही है।

नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने शुरुआती सैटेलाइट आधारित रिसर्च किया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने तबाही के पैमाने का आकलन किया और उन घटनाओं को समझने की कोशिश की, जिनके कारण हाल के सालों में हिमालयी क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक सामने आई।


4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

nepal flood

नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने शुरुआती सैटेलाइट आधारित रिसर्च किया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने तबाही के पैमाने का आकलन किया और उन घटनाओं को समझने की कोशिश की, जिनके कारण हाल के सालों में हिमालयी क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक सामने आई।

वर्तमान में भारत के 56 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में सक्रिय हैं। NRSC के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, इस आपदा की शुरुआत तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि 4.9 तीव्रता के भूकंप ने संभवतः एक सर्क ग्लेशियर (Cirque Glacier) को प्रभावित किया, जिसके बाद उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस घटना से बर्फ और चट्टानों का विशाल हिमस्खलन हुआ, जो तेजी से नीचे घाटी की ओर बढ़ा। जो भारी मात्रा में पानी, मिट्टी, चट्टानें और मलबा लेकर अचानक नीचे की ओर बहा. इससे त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने व्यापक तबाही मचाई। सैटेलाइट इमेज की स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि सर्क ग्लेशियर का ढहना और उसके बाद हुआ आइस-रॉक एवलॉन्च इस आपदा की सबसे संभावित वजह है।

पहाड़ी इलाकों को ज्यादा खतरा : इन झीलों से पैदा होने वाला खतरा मुख्य रूप से उन पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में केंद्रित हैं, जो नीचे की ओर बहने वाली नदी घाटियों के रास्ते में स्थित हैं। यदि कोई बड़ा 'ग्लोफ' होता है, तो इन क्षेत्रों के लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पूर्वी और मध्य नेपाल, जिनमें कोशी और बागमती नदी बेसिन शामिल हैं, वहां कुल क्षेत्रीय जोखिम का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है। सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में सोलुखुम्बु शामिल है, जहां दूध कोसी और इमजा बेसिन आते हैं। संखुवासभा जिला बरुण और अरुण नदी घाटियों के किनारे स्थित है। दोलखा जिला तामा कोशी नदी कॉरिडोर में है और त्सो रोल्पा झील से खतरे का सामना कर सकता है।

ISRO Recruitment 2026: अंतरिक्ष विभाग और इसरो ने 746 पदों पर भर्ती शुरू, 92 साइंटिस्ट/इंजीनियर और 410 एप्रेंटिस के पद भी भरे जाएंगे

ISRO Recruitment 2026: अंतरिक्ष विभाग (DoS) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) ने हाल के वर्षों में अपनी सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। अंतरिक्ष विभाग और इसरो ने 746 अलग-अलग पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इनमें से कम से कम 43 बैकलॉग पद हैं। इसरो में नौकरी से जुड़ी सभी डिटेल्स ऑफिशियल वेबसाइट isro.gov.in/careers पर चेक कर सकते हैं।

आवेदन ऑनलाइन मोड में करना होगा। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इसरो के ऑफिशियल रिक्रूटमेंट पोर्टल पर 17 अगस्त 2026 तक फॉर्म भर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए इसरो ने 27 जुलाई से 29 जुलाई के बीच तीन नोटिफिकेशन जारी किए थे। इसके तहत 336 रेगुलर और 410 अप्रेंटिसशिप पद शामिल हैं। इसरो की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से लेकर प्रशासनिक स्टाफ और अप्रेंटिस तक के पद पर भर्तियां की जाएंगी। इसमें 92 पद साइंटिस्ट और इंजीनियर के भी हैं। इसरो साइंटिस्ट की सैलरी पे-मैट्रिक्स लेवल-10 के हिसाब से होती है।

किन पदों पर कितनी वैकेंसी?

इसरो के भर्ती अभियान को अलग-अलग श्रेणी में बांटा गया है, जिससे हर वर्ग और योग्यता वाले अभ्यर्थियों को मौका मिल सके: इस ताजा भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा हिस्सा इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (ICRB) के जरिए 244 लेवल-4 प्रशासनिक पदों पर भर्ती का है। इनमें 113 सहायक, 81 कनिष्ठ निजी सहायक, 22 अपर डिविजन क्लर्क, 10 आशुलिपिक, स्वायत्त संस्थानों के लिए 17 सहायक और एक स्वायत्त संस्थान के लिए एक कनिष्ठ निजी सहायक शामिल हैं।

इस भर्ती में वेतन मैट्रिक्स के लेवल-10 में 92 वैज्ञानिक/इंजीनियर ‘एससी’ पद भी शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में सबसे ज्यादा 34 पद खाली हैं। इसके बाद मैकेनिकल (26), कंप्यूटर साइंस (13), सिविल (10), इलेक्ट्रिकल (4), प्रशीतन और एयर-कंडीशनिंग (2), आर्किटेक्चर (2) और अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) में एक सिविल इंजीनियर का पद हैं।

परमानेंट भर्ती के साथ, URSC, बेंगलुरु ने 2026-27 के लिए 410 अप्रेंटिसशिप पोस्ट की घोषणा की है। इनमें 220 ग्रेजुएट अप्रेंटिस, 120 टेक्नीशियन अप्रेंटिस और 70 डिप्लोमा इन कमर्शियल प्रैक्टिस अप्रेंटिस शामिल हैं।

ग्रेजुएट अप्रेंटिसशिप में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (83 पोस्ट) सबसे ज़्यादा हैं, इसके बाद मैकेनिकल (50), कंप्यूटर साइंस (40), केमिकल (15), इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट (10), एयरोनॉटिकल (10), एयरोस्पेस (10) और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग (2) हैं। टेक्नीशियन अप्रेंटिसशिप में 38 इलेक्ट्रॉनिक्स, 30 कंप्यूटर साइंस, 30 मैकेनिकल, 10 इलेक्ट्रिकल, 5 सिविल, 5 इंस्ट्रूमेंटेशन और 2 ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग पोस्ट शामिल हैं।

अप्रेंटिस और साइंटिस्ट वेतन

इसरो अप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत कानूनी जरूरतों को पूरा करने और नए स्नाताकों को प्रशिक्षित करने के लिए अप्रेंटिस भर्ती करता है। सभी उम्मीदवारों को मासिक स्टाइपेंड मिलता है, जो 10,900 रुपये से 12,300 रुपये है। वहीं, साइंटिस्ट/’SC’ के पद पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों का शुरुआती बेसिक पे 56,100 रुपये प्रति माह होगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार के नियमानुसार डीए, एचआरए और मेडिकल जैसी अन्य तमाम सुविधाएं भी मिलेंगी।

इसरो में नौकरी के लिए जरूरी योग्यता

साइंटिस्ट और इंजीनियर के पदों पर भर्ती के लिए संबंधित ट्रेड में बीई या बीटेक की डिग्री होनी चाहिए, जिसमें कम से कम 65% अंक होने जरूरी हैं। इस बार साइंटिस्ट पदों के लिए GATE (2025 या 2026) स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए युवाओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन में 50% वेटेज गेट स्कोर का और 50% वेटेज इंटरव्यू का रहेगा। वहीं प्रशासनिक और अप्रेंटिस पदों के लिए अलग-अलग लिखित परीक्षा या मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।

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SEOC Sachet Portal : आपदा के समय गुजरात की मजबूत सुरक्षा ढाल बना स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर

State Emergency Operations Center served as robust security shield for Gujarat during disaster

State Emergency Operation Center : आपदा कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आती, लेकिन गुजरात सरकार ने आधुनिक तकनीक, रियल-टाइम समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के आधार पर ऐसा मजबूत आपदा प्रबंधन ढांचा विकसित किया है, जो संकट के समय लाखों नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) राज्य के प्रमुख कमांड एंड कंट्रोल हब के रूप में 24 घंटे कार्यरत रहकर भूकंप, चक्रवात, बाढ़ सहित प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान पूरे प्रशासनिक तंत्र का समन्वय करता है।

 

कच्छ भूकंप के बाद विकसित हुआ आधुनिक ढांचा

वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप से मिले अनुभवों के आधार पर गुजरात सरकार ने विश्वस्तरीय आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। आज SEOC राज्य के आपदा प्रबंधन का केंद्रबिंदु बन चुका है, जहां से राज्यभर के सभी जिला एवं तहसील स्तर के कंट्रोल रूम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाता है।

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पूरे राज्य में त्रि-स्तरीय नेटवर्क

गुजरात का आपदा प्रबंधन केवल एक कंट्रोल रूम तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में सुव्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है। इसमें गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के अलावा सभी 33 जिलों में डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (DEOC), 248 तहसील इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (TEOC) तथा पांच क्षेत्रीय इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर (ERC) कार्यरत हैं। ये सभी केंद्र गुजरात स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (GSWAN) की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जुड़े हुए हैं।

 

'सचेत' पोर्टल से करोड़ों लोगों को समय पर चेतावनी

राज्य सरकार ने SEOC Sachet Portal और मास एसएमएस प्रणाली के माध्यम से अब तक प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को 2864 करोड़ से अधिक अलर्ट संदेश भेजे हैं। इसके अलावा 6 करोड़ से अधिक मोबाइल एप उपयोगकर्ताओं और 5.3 लाख से अधिक वेब एक्सेस के जरिए नागरिकों को आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

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आपदा के दौरान यदि सामान्य संचार व्यवस्था बाधित हो जाए, तब भी सैटेलाइट फोन, GSWAN हॉटलाइन, लैंडलाइन, ई-मेल, व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, पुलिस वायरलेस तथा हैम रेडियो जैसी वैकल्पिक संचार व्यवस्थाएं लगातार सक्रिय रहती हैं।

 

विशेषज्ञ संस्थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय

SEOC भारतीय मौसम विभाग (IMD), इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR), ISRO, INCOIS, कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज सहित विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय बनाए रखता है। इससे भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी, सूखा, हीटवेव, महामारी तथा औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेना संभव हो पाता है।

 

NDRF और SDRF की टीमें हमेशा तैयार

राज्य में जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए NDRF की 17 टीमें और SDRF की 32 टीमें तैनात रहती हैं। इसके अलावा आवश्यकता होने पर भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ भी सीधा समन्वय किया जाता है।

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24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन

आपदा के समय नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्तर पर 1070 तथा जिला स्तर पर 1077 हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे संचालित किए जाते हैं।

 

गुजरात की प्रमुख उपलब्धियां

गुजरात देश का पहला राज्य है, जिसने वर्ष 2003 में अलग डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू कर गुजरात स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (GSDMA) की स्थापना की। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए GSDMA को संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित सासाकावा अवॉर्ड भी प्राप्त हो चुका है।

 

'जीरो कैजुअल्टी' नीति की सफलता

हाल के वर्षों में आए बिपरजॉय और ताउते जैसे भीषण चक्रवातों के दौरान गुजरात सरकार ने समय रहते लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर जनहानि को न्यूनतम रखने में सफलता हासिल की। इसके अलावा समुद्री तटों पर आधुनिक साइक्लोन शेल्टर, अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा 'आपदा मित्र' योजना के तहत हजारों स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर सामुदायिक आपदा प्रबंधन को भी मजबूत बनाया गया है।

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गुजरात की सुरक्षा ढाल

आधुनिक तकनीक, त्वरित संचार व्यवस्था, विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय और प्रशिक्षित राहत एवं बचाव दलों के कारण गुजरात का स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) आज देश के लिए आपदा प्रबंधन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। राज्य सरकार की 'जीरो कैजुअल्टी' नीति को सफल बनाने में SEOC महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आपदा के समय लाखों नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहा है।

Stock in Focus: डिफेंस कंपनी को HAL से ₹2205 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स को HAL से ₹2,205.23 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर उत्तम रडार (Uttam Radar) प्रोग्राम के लिए है। कंपनी इसे अगले पांच साल में पूरा करेगी। खास बात यह है कि यह ऑर्डर कंपनी के पूरे FY26 के रेवेन्यू से भी करीब दोगुना है। इससे आने वाले वर्षों की कमाई की अच्छी तस्वीर दिखती है।

इस ऑर्डर के तहत कंपनी 122 Anti-Aircraft Auxiliary Units (AAAU) और 121 Interface Frames बनाएगी। ये दोनों इक्विपमेंट उत्तम रडार का अहम हिस्सा हैं। यह रडार भारत में डेवलपकिया गया है और लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा।

पहले भी मिला था HAL से ऑर्डर

HAL ने इससे पहले भी कंपनी पर भरोसा जताया था। 1 अप्रैल 2026 को एस्ट्रा माइक्रोवेव के जॉइंट वेंचर Astra Rafael Comsys को ₹250.58 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसके तहत सेना के लिए Software Defined Radio (SDR) सिस्टम की सप्लाई की जानी है। यह काम 18 महीने में पूरा होगा।

लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत हुई है। इसका मतलब है कि आने वाले कई साल तक कंपनी के पास काम की कमी नहीं रहेगी। इससे रेवेन्यू और मुनाफे को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।

एस्ट्रा माइक्रोवेव के शेयरों का हाल

एस्ट्रा माइक्रोवेव का शेयर गुरुवार को 2.51% गिरकर ₹1,729.20 पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 3 महीने में 53%, इस साल अब तक 76% और पिछले 1 साल में करीब 78% का रिटर्न दे चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 16.42 हजार करोड़ रुपये है।

एस्ट्रा माइक्रोवेव का कारोबार क्या है

एस्ट्रा माइक्रोवेव डिफेंस और स्पेस सेक्टर के लिए रडार, सैन्य संचार सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और माइक्रोवेव उपकरण बनाती है। इसके ग्राहक DRDO, ISRO, HAL और भारतीय रक्षा बल जैसे बड़े सरकारी संस्थान हैं।

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Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

पुण्यतिथि विशेष: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय और महत्वपूर्ण कार्य

A photograph of Dr. A.P.J. Abdul Kalam, a source of inspiration for millions of Indians

APJ Abdul Kalam Memorial Day: प्रतिवर्ष 27 जुलाई भारत के सबसे प्रिय वैज्ञानिक, शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। साल 2015 में इसी दिन वे भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय ह्रदयघात होने से अचानक गिर पड़े और उनका निधन हो गया। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपनी सादगी, दूरदर्शिता और राष्ट्रनिष्ठा से करोड़ों युवाओं के दिलों में सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा जगाई। 

 

उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और उनके विचारों को याद किया जाता है, जो आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

 

संक्षेप में जीवन परिचय

पूरा नाम- अवुल पकीर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम

जन्म- 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम (तमिलनाडु)

शिक्षा- सेंट जोसेफ्स कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिक विज्ञान तथा मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग।

निधन- 27 जुलाई 2015, शिलांग (मेघालय)

प्रसिद्ध पहचान- 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' एवं 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में।

सर्वोच्च सम्मान- भारत रत्न (1997)।

 

डॉ. कलाम का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता एक नाविक थे। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कलाम साहब बचपन में अखबार तक बेचते थे। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे रक्षा अनुसंधान और अंतरिक्ष क्षेत्र में समर्पित हो गए।

 

महत्वपूर्ण कार्य और योगदान

1. अंतरिक्ष और उपग्रह प्रक्षेपण (ISRO)

SLV-III का सफल परीक्षण: इसरो में प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते हुए कलाम साहब के नेतृत्व में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III) बना, जिसने 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया।

 

2. 'मिसाइल मैन' और आईजीएमडीपी (DRDO)

डीआरडीओ (DRDO), जिसका पूरा नाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) है, इसमें रहते हुए डॉ. कलाम ने इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) की नींव रखी। इसी कार्यक्रम के तहत भारत को अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइलें मिलीं, जिससे भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना।

 

3. पोखरण-2 परमाणु परीक्षण (1998)

1998 में पोखरण में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण में डॉ. कलाम ने मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (Scientific Advisor) की भूमिका निभाई। उनके कुशल नेतृत्व में भारत ने खुद को एक परमाणु-संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

 

4. भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002–2007)

2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जनता और विशेष रूप से बच्चों के लिए खोल दिए, जिसके कारण उन्हें 'पीपुल्स प्रेसिडेंट' (जनता का राष्ट्रपति) कहा गया।

 

5. स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान (कलाम-राजू स्टेंट)

उन्होंने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सोमा राजू के साथ मिलकर एक किफायती कोरोनरी स्टेंट विकसित किया, जिसे 'कलाम-राजू स्टेंट' के नाम से जाना जाता है। इसने भारत में हृदय रोगियों के इलाज को बेहद सस्ता बनाया।

 

उनकी प्रमुख पुस्तकें

* उनकी आत्मकथा- विंग्स ऑफ फायर (Wings of Fire)

* इंडिया 2020 (India 2020)

* इग्नाटेड माइंड्स (Ignited Minds)

 

निधन: 27 जुलाई 2015 को IIM शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अंतिम क्षण तक वह काम करते रहे जो उन्हें सबसे प्रिय था, 'शिक्षा देना और छात्रों से संवाद करना'। 

 

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