SEOC Sachet Portal : आपदा के समय गुजरात की मजबूत सुरक्षा ढाल बना स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर

State Emergency Operations Center served as robust security shield for Gujarat during disaster

State Emergency Operation Center : आपदा कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आती, लेकिन गुजरात सरकार ने आधुनिक तकनीक, रियल-टाइम समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के आधार पर ऐसा मजबूत आपदा प्रबंधन ढांचा विकसित किया है, जो संकट के समय लाखों नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) राज्य के प्रमुख कमांड एंड कंट्रोल हब के रूप में 24 घंटे कार्यरत रहकर भूकंप, चक्रवात, बाढ़ सहित प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान पूरे प्रशासनिक तंत्र का समन्वय करता है।

 

कच्छ भूकंप के बाद विकसित हुआ आधुनिक ढांचा

वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप से मिले अनुभवों के आधार पर गुजरात सरकार ने विश्वस्तरीय आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। आज SEOC राज्य के आपदा प्रबंधन का केंद्रबिंदु बन चुका है, जहां से राज्यभर के सभी जिला एवं तहसील स्तर के कंट्रोल रूम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाता है।

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पूरे राज्य में त्रि-स्तरीय नेटवर्क

गुजरात का आपदा प्रबंधन केवल एक कंट्रोल रूम तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में सुव्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है। इसमें गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के अलावा सभी 33 जिलों में डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (DEOC), 248 तहसील इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (TEOC) तथा पांच क्षेत्रीय इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर (ERC) कार्यरत हैं। ये सभी केंद्र गुजरात स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (GSWAN) की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जुड़े हुए हैं।

 

'सचेत' पोर्टल से करोड़ों लोगों को समय पर चेतावनी

राज्य सरकार ने SEOC Sachet Portal और मास एसएमएस प्रणाली के माध्यम से अब तक प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को 2864 करोड़ से अधिक अलर्ट संदेश भेजे हैं। इसके अलावा 6 करोड़ से अधिक मोबाइल एप उपयोगकर्ताओं और 5.3 लाख से अधिक वेब एक्सेस के जरिए नागरिकों को आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

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आपदा के दौरान यदि सामान्य संचार व्यवस्था बाधित हो जाए, तब भी सैटेलाइट फोन, GSWAN हॉटलाइन, लैंडलाइन, ई-मेल, व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, पुलिस वायरलेस तथा हैम रेडियो जैसी वैकल्पिक संचार व्यवस्थाएं लगातार सक्रिय रहती हैं।

 

विशेषज्ञ संस्थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय

SEOC भारतीय मौसम विभाग (IMD), इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR), ISRO, INCOIS, कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज सहित विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय बनाए रखता है। इससे भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी, सूखा, हीटवेव, महामारी तथा औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेना संभव हो पाता है।

 

NDRF और SDRF की टीमें हमेशा तैयार

राज्य में जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए NDRF की 17 टीमें और SDRF की 32 टीमें तैनात रहती हैं। इसके अलावा आवश्यकता होने पर भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ भी सीधा समन्वय किया जाता है।

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24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन

आपदा के समय नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्तर पर 1070 तथा जिला स्तर पर 1077 हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे संचालित किए जाते हैं।

 

गुजरात की प्रमुख उपलब्धियां

गुजरात देश का पहला राज्य है, जिसने वर्ष 2003 में अलग डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू कर गुजरात स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (GSDMA) की स्थापना की। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए GSDMA को संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित सासाकावा अवॉर्ड भी प्राप्त हो चुका है।

 

'जीरो कैजुअल्टी' नीति की सफलता

हाल के वर्षों में आए बिपरजॉय और ताउते जैसे भीषण चक्रवातों के दौरान गुजरात सरकार ने समय रहते लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर जनहानि को न्यूनतम रखने में सफलता हासिल की। इसके अलावा समुद्री तटों पर आधुनिक साइक्लोन शेल्टर, अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा 'आपदा मित्र' योजना के तहत हजारों स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर सामुदायिक आपदा प्रबंधन को भी मजबूत बनाया गया है।

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गुजरात की सुरक्षा ढाल

आधुनिक तकनीक, त्वरित संचार व्यवस्था, विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय और प्रशिक्षित राहत एवं बचाव दलों के कारण गुजरात का स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) आज देश के लिए आपदा प्रबंधन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। राज्य सरकार की 'जीरो कैजुअल्टी' नीति को सफल बनाने में SEOC महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आपदा के समय लाखों नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहा है।

Stock in Focus: डिफेंस कंपनी को HAL से ₹2205 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स को HAL से ₹2,205.23 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर उत्तम रडार (Uttam Radar) प्रोग्राम के लिए है। कंपनी इसे अगले पांच साल में पूरा करेगी। खास बात यह है कि यह ऑर्डर कंपनी के पूरे FY26 के रेवेन्यू से भी करीब दोगुना है। इससे आने वाले वर्षों की कमाई की अच्छी तस्वीर दिखती है।

इस ऑर्डर के तहत कंपनी 122 Anti-Aircraft Auxiliary Units (AAAU) और 121 Interface Frames बनाएगी। ये दोनों इक्विपमेंट उत्तम रडार का अहम हिस्सा हैं। यह रडार भारत में डेवलपकिया गया है और लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा।

पहले भी मिला था HAL से ऑर्डर

HAL ने इससे पहले भी कंपनी पर भरोसा जताया था। 1 अप्रैल 2026 को एस्ट्रा माइक्रोवेव के जॉइंट वेंचर Astra Rafael Comsys को ₹250.58 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसके तहत सेना के लिए Software Defined Radio (SDR) सिस्टम की सप्लाई की जानी है। यह काम 18 महीने में पूरा होगा।

लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत हुई है। इसका मतलब है कि आने वाले कई साल तक कंपनी के पास काम की कमी नहीं रहेगी। इससे रेवेन्यू और मुनाफे को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।

एस्ट्रा माइक्रोवेव के शेयरों का हाल

एस्ट्रा माइक्रोवेव का शेयर गुरुवार को 2.51% गिरकर ₹1,729.20 पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 3 महीने में 53%, इस साल अब तक 76% और पिछले 1 साल में करीब 78% का रिटर्न दे चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 16.42 हजार करोड़ रुपये है।

एस्ट्रा माइक्रोवेव का कारोबार क्या है

एस्ट्रा माइक्रोवेव डिफेंस और स्पेस सेक्टर के लिए रडार, सैन्य संचार सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और माइक्रोवेव उपकरण बनाती है। इसके ग्राहक DRDO, ISRO, HAL और भारतीय रक्षा बल जैसे बड़े सरकारी संस्थान हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

पुण्यतिथि विशेष: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय और महत्वपूर्ण कार्य

A photograph of Dr. A.P.J. Abdul Kalam, a source of inspiration for millions of Indians

APJ Abdul Kalam Memorial Day: प्रतिवर्ष 27 जुलाई भारत के सबसे प्रिय वैज्ञानिक, शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। साल 2015 में इसी दिन वे भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय ह्रदयघात होने से अचानक गिर पड़े और उनका निधन हो गया। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपनी सादगी, दूरदर्शिता और राष्ट्रनिष्ठा से करोड़ों युवाओं के दिलों में सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा जगाई। 

 

उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और उनके विचारों को याद किया जाता है, जो आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

 

संक्षेप में जीवन परिचय

पूरा नाम- अवुल पकीर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम

जन्म- 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम (तमिलनाडु)

शिक्षा- सेंट जोसेफ्स कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिक विज्ञान तथा मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग।

निधन- 27 जुलाई 2015, शिलांग (मेघालय)

प्रसिद्ध पहचान- 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' एवं 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में।

सर्वोच्च सम्मान- भारत रत्न (1997)।

 

डॉ. कलाम का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता एक नाविक थे। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कलाम साहब बचपन में अखबार तक बेचते थे। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे रक्षा अनुसंधान और अंतरिक्ष क्षेत्र में समर्पित हो गए।

 

महत्वपूर्ण कार्य और योगदान

1. अंतरिक्ष और उपग्रह प्रक्षेपण (ISRO)

SLV-III का सफल परीक्षण: इसरो में प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते हुए कलाम साहब के नेतृत्व में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III) बना, जिसने 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया।

 

2. 'मिसाइल मैन' और आईजीएमडीपी (DRDO)

डीआरडीओ (DRDO), जिसका पूरा नाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) है, इसमें रहते हुए डॉ. कलाम ने इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) की नींव रखी। इसी कार्यक्रम के तहत भारत को अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइलें मिलीं, जिससे भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना।

 

3. पोखरण-2 परमाणु परीक्षण (1998)

1998 में पोखरण में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण में डॉ. कलाम ने मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (Scientific Advisor) की भूमिका निभाई। उनके कुशल नेतृत्व में भारत ने खुद को एक परमाणु-संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

 

4. भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002–2007)

2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जनता और विशेष रूप से बच्चों के लिए खोल दिए, जिसके कारण उन्हें 'पीपुल्स प्रेसिडेंट' (जनता का राष्ट्रपति) कहा गया।

 

5. स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान (कलाम-राजू स्टेंट)

उन्होंने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सोमा राजू के साथ मिलकर एक किफायती कोरोनरी स्टेंट विकसित किया, जिसे 'कलाम-राजू स्टेंट' के नाम से जाना जाता है। इसने भारत में हृदय रोगियों के इलाज को बेहद सस्ता बनाया।

 

उनकी प्रमुख पुस्तकें

* उनकी आत्मकथा- विंग्स ऑफ फायर (Wings of Fire)

* इंडिया 2020 (India 2020)

* इग्नाटेड माइंड्स (Ignited Minds)

 

निधन: 27 जुलाई 2015 को IIM शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अंतिम क्षण तक वह काम करते रहे जो उन्हें सबसे प्रिय था, 'शिक्षा देना और छात्रों से संवाद करना'। 

 

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Minnu PM Joshy UPSC story: 21 में शादी, 23 में बच्चा और 32 में यूपीएससी, आसान नहीं थी पुलिस क्लर्क से आईएएस बनने की कहानी

Minnu PM Joshy UPSC story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से प्रशासनिक सेवा के लिए आयोजित परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की तैयारी करने वाले परीक्षार्थी कई मुश्किलों को पार करते हुए अपनी मंजिल हासिल कर पाते हैं। ये सफर किसी भी प्रतियोगी के लिए आसान बिलकुल नहीं होता है। इसलिए मंजिल पर सिर्फ वही पहुंचते हैं, जो निरंतर प्रयास करते रहते हैं। ऐसा ही एक नाम है मिन्नू पीएम जोशी का।

आईएएस ऑफिसर मिन्नू पीएम जोशी के लिए, इस सफर में परिवार की जिम्मेदारियों, फुल-टाइम सरकारी नौकरी और मां बनने के बीच बैलेंस बनाना शामिल था। 6 असफल कोशिशों के बावजूद वह न रुकीं, न थकीं। अंतत: 32 साल की उम्र में वह यूपीएससी की सीएसई में अपनी सफलता का परचम लहराने सफल रहीं। मिन्नू पीएम जोशी ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 150 हासिल की और अपने स्वर्गीय पिता के साथ शेयर किया हुआ सपना पूरा किया।

केरल के पठानमथिट्टा की रहने वाली मिन्नू की कहानी लगन और पक्के इरादे की एक मिसाल बन गई है। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के बावजूद, वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के अपने लक्ष्य के प्रति डटी रहीं।

पिता के सपने को बनाया अपना लक्ष्य

मिन्नू पीएम जोशी ने अपने पुलिस ऑफिसर पिता को तब खो दिया था जब वह स्कूल में थीं। उनकी मौत का परिवार पर गहरा असर पड़ा। 2012 में, वह डाई-इन-हार्नेस स्कीम के तहत पुलिस डिपार्टमेंट में क्लर्क के तौर पर भर्ती हुईं। इस योजना के तहत मृत सरकारी कर्मचारियों के योग्य आश्रितों को नौकरी दी जाती है। अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने केरल यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री पूरी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता को हमेशा उम्मीद थी कि वह एक सिविल सर्वेंट बनेंगी, एक सपना जो बाद में उनका अपना सपना बन गया।

मिन्नू ने 21 साल की उम्र में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) के एक अधिकारी जोशी डीजे से शादी की। वह 23 साल की उम्र में मां बन गईं, जिससे एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर उनकी भूमिका में परिवार की जिम्मेदारियां भी जुड़ गईं। इस वजह से उनकी यूपीएससी की तैयारी में देरी हुई, लेकिन उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा।

मिन्नू पीएम जोशी का यूपीएससी सफर

उन्होंने 26 साल की उम्र में सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी, उन्होंने ठान लिया था कि वह सिर्फ अपने गुजरे हुए पिता की जगह सरकारी सेवा में जाने के बजाय अपनी उपलब्धियों के आधार पर एक पहचान बनाएंगी।

उन्होंने एक डिसिप्लिन्ड रूटीन को फॉलो किया। वह सुबह शंकर लाइब्रेरी में अखबार, खासकर द हिंदू, पढ़ती थीं, और बाद में गाइडेंस के लिए शंकर आईएएस एकेडमी में एडमिशन ले लिया। वह दिन में ऑफिस के काम और रात में पढ़ाई के बीच बैलेंस बनाती थीं और साथ ही अपने परिवार का भी ध्यान रखती थीं। छह कोशिशों के बाद, मिन्नू ने 32 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में एआईआर 150 हासिल की।

मिन्नू पीएम जोशी पर एक नजर

होमटाउन : पठानमथिट्टा, केरल

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : बायोकेमिस्ट्री में मास्टर्स, केरल यूनिवर्सिटी

सरकारी नौकरी : केरल पुलिस डिपार्टमेंट में क्लर्क (2012)

शादी हुई : 21 साल में

मां बनीं : 23 साल में

यूपीएससी की तैयारी शुरू की : 26 साल

यूपीएससी की कोशिशें : 6

यूपीएससी रैंक : AIR 150

यूपीएससी पास किया : 32 साल में

मिन्नू पीएम जोशी की मौजूदा पोस्टिंग

खबरों के मुताबिक, IAS मिन्नू पीएम जोशी अभी असिस्टेंट कलेक्टर, भटकुली-तिवसा सब-डिवीजन, अमरावती, महाराष्ट्र में काम कर रही हैं। पुलिस डिपार्टमेंट के क्लर्क से आईएएस अधिकारी बनने का उनका सफर सालों की लगातार कोशिशों को दिखाता है, जिसमें उन्होंने प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ फैमिली लाइफ और एकेडमिक तैयारी को बैलेंस किया है।

आंध्र प्रदेश के कारपेंटर की बेटी दुनिया के पहले ‘All-Girls Lunar Mission’ के लिए चुनी गईं, जानिए कौन हैं 14 साल की कंदुला जेसी

आंध्र प्रदेश के कारपेंटर की बेटी दुनिया के पहले ‘All-Girls Lunar Mission’ के लिए चुनी गईं, जानिए कौन हैं 14 साल की कंदुला जेसी

कहते हैं, ‘सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती’। आंध्र प्रदेश के धवलेश्वरम की कंदुला जेसी पर भी ये बात सही बैठती है। महज 14 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की है, उसकी वजह से हर कहीं उनकी चर्चा की जा रही है। कंदुला को ऐतिहासिक स्पेस मिशन शक्तिसैट के लिए चुना गया है। यह दुनिया का पहला ग्लोबल ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन है।

इस मिशन की ट्रेनिंग 23 अगस्त को नई दिल्ली में शुरू होगी। छात्रों का बनाया हुआ लूनर क्यूबसैट 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा। उन्हें उम्मीद है कि यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) में करियर और भविष्य में लूनर एक्सप्लोरेशन की ओर पहला कदम होगा।

दुनिया का पहला ग्लोबल ऑल-गर्ल्स लूनर मिशन

मिशन शक्तिसैट एक अंतरराष्ट्रीय STEM इनिशिएटिव है। इसका मकसद अधिक से अधिक लड़कियों को स्पेस साइंस और इंजीनियरिंग में आने के लिए प्रेरित करना है। यह प्रतिभागी क्यूबसैट को डिजाइन करने, बनाने और ऑपरेट करने में मदद करेंगे, जो भविष्य के लूनर मिशन के लिए प्लान किया गया एक छोटा सैटेलाइट है। यह प्रोग्राम सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, मिशन प्लानिंग और स्पेस रिसर्च में हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी देता है।

कौन हैं 14 साल की कंदुला जेसी?

जेसी धवलेश्वरम के जिला परिषद गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती हैं। विज्ञान के प्रति उसके जुनून को स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में उसके शिक्षकों ने पहचाना। कंदुला ने लगभग 550 ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र पूरे किए। उन्होंने उपग्रह प्रणाली, प्रणोदन और ऊष्मागतिकी जैसे विषयों को कवर किया। इंटरव्यू के दौरान अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से मिलने की तैयारी में मदद करने के लिए उसने अपनी अंग्रेजी भाषा की क्षमताओं को और बढ़ाया। कंदुला आंध्र प्रदेश धवलेश्वरम के एक बढ़ई की बेटी है। उन्होंने 108 देशों के लगभग 12,000 आवेदकों में से चुने गए 20 भारतीय भगीदारों के बीच ये जगह बनाई है। वह फाइनल लिस्ट में जगह बनाने वाली आंध्र प्रदेश की अकेली स्टूडेंट भी हैं।

कौन कर रहा है इस मिशन का संचालन?

शक्तिसैट मिशन STEM शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष पेशेवरों के एक समूह द्वारा आयोजित किया जा रहा है।  कार्यक्रम का उद्देश्य उपग्रहों के विकास के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष उद्योग में अधिक लड़कियों को शामिल करना है।

उसके परिवार के लिए गर्व का क्षण!

बढ़ई पिता की बेटी कंदुला के परिवार को कुछ आर्थिक कठिनाइयों की वजह से बाद में उसका दाखिला एक सरकारी स्कूल में करा दिया गया। हालाकि, वह अपने सपने के प्रति दृढ़ थी। उसका चयन उसके माता-पिता, शिक्षकों और समुदाय के लिए गर्व का क्षण बन गया है।

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Union Bank Recruitment 2026: यूनियन बैंक में मैनेजर, सीनियर मैनेजर से लेकर कई पदों पर निकली बंपर भर्ती, 10 अगस्त है आवेदन करने की लास्ट डेट

Union Bank Recruitment 2026: बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए काफी काम की खबर है। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने यूनियन बैंक भर्ती प्रक्रिया 2026-27 के तहत 395 पदों पर पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत डोमेन विशेषज्ञता वाले अधिकार, साधारण बैंकिंग अधिकारी और विशेष अधिकारी के पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों पर भर्ती के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर 10 अगस्त, 2026 तक अपना अवेदन कर सकते हैं। यूनियन बैंक भर्ती प्रक्रिया 2026-27 की शुरुआत 21 जुलाई से हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवेदन शुल्क भी अदा करना होगा।

पदों का विवरण

वैकेंसी में 163 मैनेजर, 153 सीनियर मैनेजर, 52 चीफ मैनेजर, 20 असिस्टेंट जनरल मैनेजर और 7 डिप्टी जनरल मैनेजर के पद शामिल हैं। कैंडिडेट को आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरा करना होगा, बताए गए फॉर्मेट में जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे और आखिरी तारीख से पहले एप्लीकेशन फीस देनी होगी।

यूनियन बैंक रिक्रूटमेंट 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें?

कैंडिडेट यूनियन बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:

  • यूनियन बैंक के भर्ती पोर्टल ibpsreg.ibps.in पर जाएं।
  • ‘Click Here for New Registration’ पर क्लिक करें।
  • अपने नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके रजिस्टर करें।
  • आवेदन फॉर्म ध्यान से भरें और सभी डिटेल्स वेरिफाई करें।
  • जरूरी फोटो, सिग्नेचर, बाएं अंगूठे का निशान और हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन अपलोड करें।
  • ‘कम्प्लीट रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक करने से पहले एप्लीकेशन का प्रीव्यू देखें।
  • आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें।
  • आवेदन सबमिट करें और आगे के लिए कन्फर्मेशन पेज और ई-रसीद डाउनलोड करें।

यूनियन बैंक रिक्रूटमेंट 2026: आवेदन शुल्क

SC/ST/PwBD कैंडिडेट: Rs. 177 (GST के साथ)

UR/EWS/OBC कैंडिडेट: Rs. 1,180 (GST के साथ)

फीस डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, IMPS, कैश कार्ड या मोबाइल वॉलेट/UPI से पे की जा सकती है।

कैंडिडेट को पेमेंट कन्फर्मेशन का इंतजार करना चाहिए और सफल भुगतान के बाद ई-रसीद डाउनलोड करनी चाहिए।

अधूरे आवेदन या शुल्क भुगतान में फेल होने पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

यूनियन बैंक रिक्रूटमेंट 2026: जरूरी डॉक्यूमेंट्स

  • हाल का पासपोर्ट-साइज कलर फोटो (20 KB-50 KB)
  • सफेद कागज पर काली स्याही से सिग्नेचर (10 KB-20 KB)
  • बाएं अंगूठे का निशान (20 KB-50 KB)
  • कैंडिडेट की अपनी हैंडराइटिंग में हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन (50 KB-100 KB)
  • वैलिड फोटो ID जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर ID
  • रजिस्ट्रेशन और कम्युनिकेशन के लिए एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल ID

कैंडिडेट्स को सभी डिटेल्स ध्यान से वेरिफ़ाई कर लेनी चाहिए, बताए गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने चाहिए, फीस भुगतान पूरा करना चाहिए, और लास्ट-मिनट की दिक्कतों से बचने के लिए 10 अगस्त, 2026 से पहले आवेदन जमा कर देनी चाहिए।

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₹12 करोड़ से बने ₹700 करोड़, जानिए Myntra के मुकेश बंसल ने 8 साल में कैसे 60 गुना रिटर्न कमाया

18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा से Vikram-1 रॉकेट ने उड़ान भरी। यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं था, बल्कि भारत की पहली निजी कंपनी का सफल ऑर्बिटल लॉन्च था। इसके साथ ही Skyroot Aerospace ने इतिहास रच दिया। लेकिन इस सफलता की कहानी करोड़ों की लैब से नहीं, बल्कि हैदराबाद के एक छोटे से ऑफिस से शुरू हुई थी।

सरकारी नौकरी छोड़कर लगा दिया दांव

साल 2017 में पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ISRO में वैज्ञानिक थे। इसी दौरान उन्होंने Space Activities Bill का ड्राफ्ट पढ़ा। उन्हें लगा कि आने वाले समय में निजी कंपनियों को भी रॉकेट बनाने और लॉन्च करने का मौका मिल सकता है। दोनों ने जोखिम उठाया, सरकारी नौकरी छोड़ी और 2018 में Skyroot Aerospace की शुरुआत कर दी।

उस समय भारत का स्पेस सेक्टर लगभग पूरी तरह सरकार के हाथ में था। इसलिए निवेशकों को भी इस आइडिया पर भरोसा नहीं था। ज्यादातर लोगों को लगता था कि किसी भारतीय स्टार्टअप के लिए रॉकेट लॉन्च करना सिर्फ सपना है।

जब किसी ने भरोसा नहीं किया

ऐसे समय में Myntra और Cult.fit के फाउंडर मुकेश बंसल कंपनी के साथ खड़े हुए। उन्होंने 2018 में Skyroot में पहला निवेश किया। उस समय कोई बड़ा वेंचर कैपिटल फंड कंपनी में पैसा लगाने को तैयार नहीं था।

Tracxn के मुताबिक, मुकेश बंसल ने अलग-अलग फंडिंग राउंड में करीब 13 लाख डॉलर, यानी लगभग ₹12 करोड़ लगाए। लंबे समय तक वही कंपनी के इकलौते एंजेल निवेशक रहे। उन्होंने उस स्टार्टअप पर दांव लगाया, जिसके भविष्य को लेकर किसी के पास भरोसेमंद जवाब नहीं था।

2020 में बदल गई तस्वीर

साल 2020 में सरकार ने स्पेस सेक्टर निजी कंपनियों के लिए खोल दिया। इसके बाद Skyroot की रफ्तार बदल गई। बड़े निवेशक जुड़ने लगे और कंपनी को तेजी से फंडिंग मिलने लगी।

नवंबर 2022 में कंपनी ने Vikram-S लॉन्च किया। यह अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला निजी रॉकेट बना। इसके बाद मई 2026 में Skyroot ने करीब 570 करोड़ रुपये जुटाए और 1.1 अरब डॉलर के वैल्यूएशन के साथ भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बन गई।

₹12 करोड़ से बन गए ₹700 करोड़

मुकेश बंसल का शुरुआती भरोसा अब बड़ी कमाई में बदल चुका है। Tracxn के मुताबिक, उनके पास अभी भी Skyroot में 5.7% हिस्सेदारी है, जिसकी मौजूदा कीमत 600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा वह अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा पहले ही निकाल चुके हैं।

यानी उनकी बची हिस्सेदारी और अब तक की कमाई को जोड़ दें तो उनकी कुल वैल्यू 700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। दूसरे शब्दों में कहें तो करीब ₹12 करोड़ का निवेश लगभग 60 गुना बढ़ गया।

सिर्फ एक कंपनी नहीं, पूरे सेक्टर की कहानी

Skyroot की सफलता सिर्फ एक स्टार्टअप की सफलता नहीं है। यह भारत के स्पेस सेक्टर में आए बड़े बदलाव की भी कहानी है। सरकार के दरवाजे खोलने के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में सिर्फ एक से बढ़कर 2026 में 400 से ज्यादा हो गई है।

सरकार का लक्ष्य 2033 तक भारत की स्पेस इकोनॉमी को 8.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है। Skyroot की उड़ान इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बन चुकी है।

मुकेश बंसल का सबसे बड़ा दांव

मुकेश बंसल पहले Myntra के जरिए फैशन ई-कॉमर्स और फिर Cult.fit के जरिए फिटनेस सेक्टर में अपनी पहचान बना चुके थे। लेकिन Skyroot में किया गया निवेश अलग था।

यह सिर्फ किसी स्टार्टअप में पैसा लगाना नहीं था, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य पर जताया गया भरोसा था। आज वही भरोसा भारतीय स्पेस सेक्टर की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जा रहा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vikram-1 Launch: Skyroot एयरोस्पेस ने रचा इतिहास, भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट हुआ लॉन्च

शनिवार को भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक अहम उपलब्धि हासिल की, जब हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR) से देश के पहले प्राइवेट तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास लॉन्च व्हीकल, ‘विक्रम-1’ को लॉन्च किया। दोपहर 12:05 बजे पहले लॉन्च पैड से हुआ यह लॉन्च, किसी भारतीय प्राइवेट कंपनी द्वारा भारतीय जमीन से रॉकेट को ऑर्बिट में भेजने की पहली कोशिश है। बता दें कि यह ग्लोबल कमर्शियल लॉन्च मार्केट में देश के प्रवेश का संकेत है।

गौरतलब है कि इस रॉकेट को असल में सुबह 11:30 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन उड़ान भरने से कुछ मिनट पहले इसे थोड़ी देर के लिए रोका गया और आखिरकार यह दोपहर 12:05 बजे लॉन्च हुआ।

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन और ISRO के पूर्व प्रमुख एस. सोमनाथ ने श्रीहरिकोटा से विक्रम-1 की उड़ान देखी।

विक्रम-1 ध्वनी की रफ्तार से 5 गुना तेजी से उड़ान भरेगा

इस ऐतिहासिक लॉन्च के बाद, विक्रम-1 कुछ ही सेकंड में ध्वनि की रफ्तार को पार कर लेगा। उड़ान भरने के कुछ ही पलों बाद, विक्रम-1 तेजी से रफ्तार पकड़ेगा और उड़ान के सिर्फ 25 सेकंड में ध्वनि की रफ्तार (जिसे ‘मैक 1’ कहा जाता है) को पार कर लेगा।

स्काईरूट के मिशन प्रोफाइल के अनुसार, उड़ान शुरू होने के 1 मिनट 30 सेकंड के भीतर रॉकेट मैक-5 यानी ध्वनि की गति से पांच गुना तेज रफ्तार हासिल कर लेगा। इसके बाद इसका पहला चरण (फर्स्ट स्टेज) अलग हो जाएगा।

विक्रम-1 ऐतिहासिक लॉन्च के लिए तैयार

माना जा रहा है कि विक्रम-1 की टेस्ट फ्लाइट से भारत ग्लोबल प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च मार्केट में कदम रखेगा। पूरी तरह से एक प्राइवेट भारतीय कंपनी द्वारा विकसित, विक्रम-1 देश का पहला प्राइवेट तौर पर बनाया गया ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है और यह भारत की कमर्शियल स्पेस क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

लॉन्च से पहले, स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि सभी जरूरी एयरस्पेस और समुद्री मंजूरियां मिल गई हैं। इसके अलावा रॉकेट के फ्लाइट पाथ और उसके प्रभाव वाले क्षेत्रों में हवाई और समुद्री गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया गया है, ताकि लॉन्च को सुरक्षित और सफल तरीके से पूरा किया जा सके।

मिशन आगमन

18 नवंबर 2022 में विक्रम-S के सफल लॉन्च के बाद, ‘मिशन आगमन’ स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा मिशन है। विक्रम-S भारतीय जमीन से अंतरिक्ष में पहुंचने वाला पहला प्राइवेट तौर पर बनाया गया रॉकेट था।

शनिवार को होने वाले लॉन्च से पहले, कंपनी ने लॉन्च पैड पर विक्रम-1 के सभी स्टेज के इंटीग्रेशन और स्टैकिंग का काम पूरा कर लिया था। इसके बाद रॉकेट की फाइनल जांच, टेलीमेट्री इंटरफेस का वेरिफिकेशन और रडार ट्रैकिंग टेस्ट किए गए।

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Skyroot Vikram-1: भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ऐतिहासिक उड़ान को तैयार, जानें कब और कहां से देखें इसकी लॉन्चिंग

Skyroot Vikram-1 Update: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज 18 जुलाई का दिन एक स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। देश की निजी स्पेस एजेंसी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले पूर्ण विकसित और स्वदेशी ऑर्बिटल-क्लास (कक्षीय श्रेणी) रॉकेट विक्रम-1 को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस ऐतिहासिक मिशन को मिशन आगमन नाम दिया गया है। ये वैश्विक लॉन्चिंग कारोबार में भारत के प्राइवेट सेक्टर की धमाकेदार एंट्री का प्रतीक बनने जा रहा है। यह पहली बार होगा जब पूरी तरह से किसी निजी कंपनी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया ऑर्बिटल-श्रेणी का रॉकेट भारतीय धरती से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरेगा।

आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी और आप इसे घर बैठे लाइव कैसे देख सकते हैं।

कब और कहां से होगी लॉन्चिंग?

विक्रम-1 रॉकेट की यह पहली टेस्ट फ्लाइट आज यानी शनिवार को सुबह 11:30 बजे उड़ान भरेगी। यह 7 मंजिला ऊंचा रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) के ऐतिहासिक ‘प्रथम लॉन्च पैड’ से गरजना भरते हुए अंतरिक्ष की ओर रवाना होगा।

घर बैठे कहां और कैसे देखें लाइव लॉन्चिंग?

यदि आप भारत के इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहते हैं, तो स्काईरूट एयरोस्पेस इस पूरे इवेंट की लाइव स्ट्रीमिंग करने जा रहा है। कंपनी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर जानकारी दी है कि भारत के इस पहले प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च को आज YouTube पर लाइव देखा जा सकता है। आप नीचे दिए गए आधिकारिक लिंक पर जाकर अपना रिमाइंडर सेट कर सकते हैं और सीधे लाइव लॉन्चिंग देख सकते हैं-

स्काईरूट विक्रम-1 लॉन्च लाइव यूट्यूब लिंक (https://www।youtube।com/live/-lLd1cI7v0U)

अंतरिक्ष जाएगा पीएम मोदी का हाथ से लिखा संदेश

इस मिशन की सबसे खास और अनोखी बात यह है कि ‘विक्रम-1’ अपने साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बेहद खास संदेश लेकर अंतरिक्ष जा रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस के मुताबिक, इस टेस्ट फ्लाइट के विशेष पेलोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने हाथों से लिखा गया एक पोस्टकार्ड शामिल है। इस पोस्टकार्ड पर वंदे मातरम लिखा हुआ है जिस पर पीएम मोदी के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। इस हस्तलिखित पोस्टकार्ड पर 26 जून 2026 की तारीख दर्ज है।

कितना शक्तिशाली है ‘विक्रम-1’ और क्या है इसकी खासियत?

इस रॉकेट का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले महान वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। नवंबर 2022 में स्काईरूट द्वारा लॉन्च किए गए विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट की सफलता के बाद यह कंपनी का अगला सबसे बड़ा मील का पत्थर है। विक्रम-एस केवल सबऑर्बिटल फ्लाइट पर गया था (जो कुछ समय के लिए अंतरिक्ष में जाकर वापस आ गया था) लेकिन विक्रम-1 एक ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसका मतलब है कि यह सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की एक निश्चित और स्थिर कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।

इस मिशन के तहत रॉकेट का लक्ष्य 60° झुकाव पर 450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक पहुंचना है। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निचली कक्षा (LEO) में ले जाने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। 7 मंजिला ऊंचे इस बहु-चरणीय रॉकेट का निर्माण पूरी तरह से कार्बन-मिश्रित संरचना से किया गया है। इसे ताकत देने के लिए कंपनी का खुद का प्रोपल्शन सिस्टम लगा है जिसमें 3D-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल रॉकेट बूस्टर शामिल हैं।

इस टेस्ट फ्लाइट का मुख्य उद्देश्य क्या है?

स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, 18 जुलाई की यह उड़ान मुख्य रूप से एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन (तकनीकी प्रदर्शन) फ्लाइट है। इसका मुख्य मकसद यह जांचना है कि स्काईरूट की बनाई गई तकनीक और उसके ऑनबोर्ड सिस्टम असल उड़ान की परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करते हैं। इस मिशन के दौरान जो भी डेटा मिलेगा, उसका इस्तेमाल कंपनी अपनी तकनीक को गहराई से सीखने, उसमें सुधार करने, भविष्य के वर्शन्स को और बेहतर बनाने और नियमित लॉन्च ऑपरेशन्स स्थापित करने की अपनी योजनाओं को सहारा देने के लिए करेगी।

इस ऐतिहासिक मिशन में भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कंपनियों जैसे ग्रेहा स्पेस, डीक्यूब्ड और कॉस्मोसर्व के कई तकनीकी प्रदर्शन पेलोड भी शामिल हैं, जो देश के स्पेस इकोसिस्टम में प्राइवेट प्लेयर्स की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं।

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