नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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‘बेहद उदार’: नेपाल के राष्ट्रपति पौडेल ने की PM मोदी की तारीफ, बाढ़ में मदद के लिए भारत का जताया आभार

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।

पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया

X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।

उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””

नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।

पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”

नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।

नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।

इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।

बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।

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626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

626 शव बरामद, 2,400 लापता

भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है

नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।

भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।

इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।

विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।

बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।

नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।

वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।

नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया

नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।

अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।

ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।

नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है

बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

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नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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Nepal Flash Flood: नेपाल की भोटकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने काफी तबाही मचाई है। इस आपदा को लेकर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि तिब्बती क्षेत्र में आए भूकंप की वजह से संभवतः हिमस्खलन हुआ, जिसने आगे चलकर इस विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया। शुरुआती जानकारियों के आधार पर माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों की वजह से पहले हिमस्खलन हुआ और उसके बाद भोटकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया।

तिब्बत में आया था 4.4 तीव्रता का भूकंप

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित तिब्बती क्षेत्र में सुबह करीब 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप, हिमस्खलन और नदी में आई अचानक बाढ़ के बीच के संबंधों को लेकर अब एक्सपर्ट अपनी जांच कर रहे हैं।

बर्फ गिरने से रुका था ल्हेन्दे नदी का प्रवाह

काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ के शुरुआती आकलन के मुताबिक एक बड़े हिमस्खलन की वजह से ल्हेन्दे नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे भारी मात्रा में पानी इकट्ठा होता गया और जैसे ही यह रुकावट या प्राकृतिक बांध टूटा, पानी का एक बहुत बड़ा सैलाब नीचे की ओर बहा और भोटकोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। कायस्थ ने बताया कि नेपाल की ओर से गिरे बर्फ के पहाड़ ने ल्हेन्दे नदी को रोक दिया था जबकि उसी समय के आसपास तिब्बत की तरफ भूकंप भी महसूस किया गया था। अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि क्या भूकंप ने ही इस हिमस्खलन को उकसाया था।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

भोटकोशी नदी में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले 8 जुलाई 2025 को भी नदी में इसी तरह का अचानक उफान आया था। उस समय जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने पुष्टि की थी कि रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेन्दे नदी में हिमनद झील के फटने की वजह से बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी।

31 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता और भारी तबाही

बागमती प्रांत की स्थानीय पुलिस के मुताबिक इस भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 31 हो चुकी है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। पानी के अचानक और तेज बहाव ने भोटकोशी नदी के किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

जलविद्युत परियोजनाओं को पहुंचा बड़ा नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ की वजह से इस क्षेत्र की कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जारी राहत और बचाव कार्यों के बीच इस स्तर की तबाही ने नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों और अहम इंन्फ्रा स्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तिब्बत की तरफ से आई इस अचानक बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती गांवों में भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा के बीच नेपाल के एक प्रमुख पत्रकार ने बीजिंग पर समय रहते अर्ली वार्निंग न देने का आरोप लगाते हुए कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर काठमांडू को चीन के साथ अपने संबंधों में इस एकतरफा प्यार का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है।

नेपाली पत्रकार का बीजिंग पर सीधा निशाना

विदेश और सामरिक मामलों के वरिष्ठ नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने बीजिंग द्वारा पूर्व चेतावनी न दिए जाने पर अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना उसे नेपाल का उत्तरी पड़ोसी कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि समय पर अलर्ट न भेजकर उसने नेपाल की स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए काफ्ले ने लिखा कि ‘नेपाल अपने पड़ोसियों की जायज सुरक्षा चिंताओं का लगातार समाधान करता रहा है। हालांकि बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे उत्तरी पड़ोसी ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। इतनी बड़ी आपदा की समय पर पूर्व चेतावनी न देकर उन्होंने हमारे यहां बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि की वजह तैयार की।’

एकतरफा प्यार की कीमत अकेला नेपाल क्यों चुकाए?

अपनी पोस्ट में काफ्ले ने नेपाल और चीन के बीच के इस द्विपक्षीय रिश्ते के स्वरूप पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीनी क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले संकटों का सामना नेपाल को बार-बार करना पड़ता है जबकि काठमांडू बीजिंग की हर छोटी-बड़ी मांग और चिंताओं का ख्याल रखता है। काफ्ले ने आगे लिखा कि ‘हम लगातार उनके क्षेत्र (चीन) से शुरू होने वाले संकटों का सामना करते आ रहे हैं जबकि हम उनकी सभी जरूरतों और अनावश्यक-आवश्यक चिंताओं को पूरा करते रहते हैं। आखिर इस एकतरफा प्यार की कीमत अकेले नेपाल को ही क्यों चुकानी पड़े?’

सीमा पर भारी तबाही, भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब बुधवार सुबह तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। तिब्बती क्षेत्र से अचानक पानी के भारी सैलाब ने करीब सुबह 9 बजे नेपाल की भोटेकोशी नदी में प्रवेश किया। इस जल प्रलय के चलते सीमावर्ती टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में तबाही देखने को मिली। नदी के तेज बहाव ने कई रिहायशी बस्तियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, गाड़ियों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया और भारी नुकसान पहुंचाया।

सेना और पुलिस के साथ युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत कार्य चलाने और खोज अभियान को गति देने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक बयानों के मुताबिक प्रभावित बस्तियों में राहत पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है और हताहतों व मौतों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट होना बाकी है।

क्रॉस-बॉर्डर अर्ली वार्निंग सिस्टम पर उठे सवाल

इस भीषण बाढ़ ने दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा पार सूचना साझा करने के तंत्रकी पोल खोलकर रख दी है। संवेदनशील और आपदा-संभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी आपदाओं की जानकारी साझा करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस घटना ने काठमांडू और बीजिंग के बीच कूटनीतिक और सामरिक विश्वास पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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