टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल की भोटकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने काफी तबाही मचाई है। इस आपदा को लेकर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि तिब्बती क्षेत्र में आए भूकंप की वजह से संभवतः हिमस्खलन हुआ, जिसने आगे चलकर इस विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया। शुरुआती जानकारियों के आधार पर माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों की वजह से पहले हिमस्खलन हुआ और उसके बाद भोटकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया।

तिब्बत में आया था 4.4 तीव्रता का भूकंप

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित तिब्बती क्षेत्र में सुबह करीब 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप, हिमस्खलन और नदी में आई अचानक बाढ़ के बीच के संबंधों को लेकर अब एक्सपर्ट अपनी जांच कर रहे हैं।

बर्फ गिरने से रुका था ल्हेन्दे नदी का प्रवाह

काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ के शुरुआती आकलन के मुताबिक एक बड़े हिमस्खलन की वजह से ल्हेन्दे नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे भारी मात्रा में पानी इकट्ठा होता गया और जैसे ही यह रुकावट या प्राकृतिक बांध टूटा, पानी का एक बहुत बड़ा सैलाब नीचे की ओर बहा और भोटकोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। कायस्थ ने बताया कि नेपाल की ओर से गिरे बर्फ के पहाड़ ने ल्हेन्दे नदी को रोक दिया था जबकि उसी समय के आसपास तिब्बत की तरफ भूकंप भी महसूस किया गया था। अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि क्या भूकंप ने ही इस हिमस्खलन को उकसाया था।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

भोटकोशी नदी में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले 8 जुलाई 2025 को भी नदी में इसी तरह का अचानक उफान आया था। उस समय जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने पुष्टि की थी कि रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेन्दे नदी में हिमनद झील के फटने की वजह से बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी।

31 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता और भारी तबाही

बागमती प्रांत की स्थानीय पुलिस के मुताबिक इस भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 31 हो चुकी है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। पानी के अचानक और तेज बहाव ने भोटकोशी नदी के किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

जलविद्युत परियोजनाओं को पहुंचा बड़ा नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ की वजह से इस क्षेत्र की कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जारी राहत और बचाव कार्यों के बीच इस स्तर की तबाही ने नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों और अहम इंन्फ्रा स्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल में सैलाब के बीच कैलाश मानसरोवर जा रहे 400 लोगों के साथ क्या हुआ?

Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के रसुवा जिले में स्थित भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से सीमावर्ती गांव और बस्तियां पानी के तेज बहाव में बह गईं। इस आपदा में कई लोगों की जान जाने की खबर है जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत की ओर जा रहे करीब 400 श्रद्धालु रसुवागढ़ी क्षेत्र में लापता या संपर्क से बाहर हो गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश में जुट गया है।

93 नेपाली नागरिकों सहित 390 से अधिक यात्री फंसे

काठमांडू स्थित ‘टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स’ के प्रबंध निदेशक बासु कुमार अधिकारी के मुताबिक बुधवार 26 अगस्त को कुल 390 यात्रियों को सीमा पार करना था। इनमें 93 नेपाली नागरिक भी शामिल थे। ये सभी श्रद्धालु अलग-अलग ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे। उन्होंने बताया कि दोपहर 3 बजे तक इनमें से कुछ ही लोगों से संपर्क हो पाया था जबकि अधिकांश श्रद्धालुओं के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

लापता यात्रियों में सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71, लीफ हॉलीडेज के 55, काठमांडू हॉलीडेज के 17, कैलाश जर्नी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के 7, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, रिचा टूर्स के 12, फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और अल्पाइन इको ट्रेक के 16 ग्राहक शामिल हैं। ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने बताया कि लापता श्रद्धालुओं से संपर्क साधने और उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है।

भोटे कोशी नदी में अचानक उछाल से 19 लोगों की मौत

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले ने एएफपी को बताया कि तिब्बत की ओर से अचानक आए पानी के तेज बहाव की वजह से सुबह करीब 9 बजे रसुवा जिले की भोटे कोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में जबरदस्त तबाही मचाई है। पुलिस प्रवक्ता के मुताबित अब तक 19 शव बरामद किए जा चुके हैं। बचाव और राहत के काम चल रहे हैं।

बाढ़ के असर के कारण पुलिस बल के कई जवान भी संपर्क से बाहर हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंत्रिपरिषद के साथ एक अहम बैठक की अध्यक्षता की और प्रभावित क्षेत्रों में खोज व बचाव अभियानों में तेजी लाने के निर्देश जारी किए।

भारत ने जताया दुख, हर संभव मदद का दिया आश्वासन

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर इस त्रासदी में हुई जनहानि पर संवेदना प्रकट की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की है और भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है और दोनों देशों की टीमें राहत व बचाव कार्यों में आपस में गहरा समन्वय बना रही हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ चीन से किए गए एकतरफा प्यार का नतीजा! लोकल पत्रकार ने किया सनसनीखेज दावा

Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तिब्बत की तरफ से आई इस अचानक बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती गांवों में भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा के बीच नेपाल के एक प्रमुख पत्रकार ने बीजिंग पर समय रहते अर्ली वार्निंग न देने का आरोप लगाते हुए कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर काठमांडू को चीन के साथ अपने संबंधों में इस एकतरफा प्यार का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है।

नेपाली पत्रकार का बीजिंग पर सीधा निशाना

विदेश और सामरिक मामलों के वरिष्ठ नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने बीजिंग द्वारा पूर्व चेतावनी न दिए जाने पर अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना उसे नेपाल का उत्तरी पड़ोसी कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि समय पर अलर्ट न भेजकर उसने नेपाल की स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए काफ्ले ने लिखा कि ‘नेपाल अपने पड़ोसियों की जायज सुरक्षा चिंताओं का लगातार समाधान करता रहा है। हालांकि बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे उत्तरी पड़ोसी ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। इतनी बड़ी आपदा की समय पर पूर्व चेतावनी न देकर उन्होंने हमारे यहां बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि की वजह तैयार की।’

एकतरफा प्यार की कीमत अकेला नेपाल क्यों चुकाए?

अपनी पोस्ट में काफ्ले ने नेपाल और चीन के बीच के इस द्विपक्षीय रिश्ते के स्वरूप पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीनी क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले संकटों का सामना नेपाल को बार-बार करना पड़ता है जबकि काठमांडू बीजिंग की हर छोटी-बड़ी मांग और चिंताओं का ख्याल रखता है। काफ्ले ने आगे लिखा कि ‘हम लगातार उनके क्षेत्र (चीन) से शुरू होने वाले संकटों का सामना करते आ रहे हैं जबकि हम उनकी सभी जरूरतों और अनावश्यक-आवश्यक चिंताओं को पूरा करते रहते हैं। आखिर इस एकतरफा प्यार की कीमत अकेले नेपाल को ही क्यों चुकानी पड़े?’

सीमा पर भारी तबाही, भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब बुधवार सुबह तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। तिब्बती क्षेत्र से अचानक पानी के भारी सैलाब ने करीब सुबह 9 बजे नेपाल की भोटेकोशी नदी में प्रवेश किया। इस जल प्रलय के चलते सीमावर्ती टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में तबाही देखने को मिली। नदी के तेज बहाव ने कई रिहायशी बस्तियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, गाड़ियों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया और भारी नुकसान पहुंचाया।

सेना और पुलिस के साथ युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत कार्य चलाने और खोज अभियान को गति देने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक बयानों के मुताबिक प्रभावित बस्तियों में राहत पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है और हताहतों व मौतों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट होना बाकी है।

क्रॉस-बॉर्डर अर्ली वार्निंग सिस्टम पर उठे सवाल

इस भीषण बाढ़ ने दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा पार सूचना साझा करने के तंत्रकी पोल खोलकर रख दी है। संवेदनशील और आपदा-संभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी आपदाओं की जानकारी साझा करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस घटना ने काठमांडू और बीजिंग के बीच कूटनीतिक और सामरिक विश्वास पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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