हिमालय की 4 खतरनाक ग्लेशियर झीलों का पानी सुखाएगा नेपाल! क्या है पूरी तैयारी डिटेल में जानिए

काठमांडू। नेपाल में ग्लेशियल झीलों से आने वाली बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार ऊंचे पहाड़ी इलाकों की चार खतरनाक झीलों का पानी कम करने की तैयारी कर रही है। इससे झीलों का प्राकृतिक बांध टूटने और अचानक नीचे के इलाकों में बाढ़ आने का खतरा कम करने में मदद मिलेगी।

इन चार झीलों का पानी कम किया जायेगा

रिपोर्टर गोपाल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल इस योजना में थुलागी, लोअर बरुन, लुमडिंग त्सो और होंगू-2 झीलों को शामिल कर रहा है। ये झीलें करीब 4,050 से 5,483 मीटर की ऊंचाई पर हैं और इन्हें नेपाल की ज्यादा खतरे वाली ग्लेशियल झीलों में गिना जाता है।

इन झीलों का पानी कंट्रोल करके पास की नदियों में छोड़ा जाएगा। इसके लिए नहरों और खास गेट वाले स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन असली काम शुरू करने से पहले इन झीलों की जांच और डिजाइन तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोसेस में छह साल तक लग सकते हैं।

50 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट है

इस पूरे काम पर करीब 50 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसमें झीलों का पानी कम करने के साथ बाढ़ की निगरानी और लोगों को समय पर चेतावनी भी मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट में सेंसर लगाए जाएंगे और बाढ़ आने से पहले इसकी जानकारी दी जाएगी। नीचे रहने वाले लोगों को समय पर खतरे के बारे में बताया जाएगा, ताकि वे पहले से सावधान हो सकें। इस काम में ग्रीन क्लाइमेट फंड, UNDP और नेपाल सरकार मदद कर रहे हैं।

ग्लेशियल झीलों से क्यों बढ़ रहा खतरा?

ग्लेशियर पिघलने से पहाड़ों में बनी झीलों में पानी बढ़ रहा है। यदि इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार टूट जाए, तो बहुत सारा पानी अचानक नीचे आ सकता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है। भूकंप, हिमस्खलन और खराब मौसम से भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

नेपाल पहले भी त्सो रोल्पा और इमजा जैसी ग्लेशियल झीलों का पानी कम कर चुका है। अब हाल की बाढ़ के बाद ऐसी झीलों से होने वाले खतरे को कम करने की जरूरत पर और ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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