मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन...

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Kiren Rijiju on Abhijit Deepke: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर बड़ा बयान दिया है। रिजिजू ने दीपके को 'अपना ही लड़का' बताते हुए उनकी छात्र पहचान पर सवाल खड़े कर दिए और आरोप लगाया कि इस पूरे जेन-जी आंदोलन को राजनीतिक दलों ने हाईजैक कर लिया।

किरेन रिजिजू का राजनीतिक 'ट्विस्ट'

राजनीति में कब कौन 'अपना' हो जाए और कब 'पराया', यह कहना मुश्किल है! कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एएनआई से बातचीत के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवाओं के बीच तेजी से उभरते चेहरे अभिजीत दीपके पर खुलकर अपनी राय रखी। ALSO READ: CJP कार्यकर्ता के पिता की पीट-पीटकर जान ली, बंगाल में सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाना पड़ा भारी, दीपके ने साधा निशाना

 

रिजिजू से जेन-जी आंदोलन और छात्रों की शिक्षा सुधार संबंधी मांगों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। रिजिजू ने कहा कि यह जो अभिजीत दीपके है, वह हमारे अपने ही लड़के हैं, महाराष्ट्र से बौद्ध हैं…' लेकिन रिजिजू का यह प्यार यहीं नहीं रुका, उन्होंने तुरंत ही इस पर एक राजनीतिक 'ट्विस्ट' दे दिया।

वो स्टूडेंट कैसे हो गया?

नरम रुख दिखाने के तुरंत बाद रिजिजू ने दीपके की स्वतंत्र छात्र पहचान पर सीधा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि लेकिन वो तो आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, वो तो आप भी जानते हैं, सब जानते हैं… वो स्टूडेंट कैसे हो गया? रिजिजू ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी पार्टियां छात्रों के पीछे छिपकर अपनी 'राजनीतिक रोटियां' सेकने में जुट जाती हैं। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरी तरह शांति बनाए रखी और किसी को खरोंच तक नहीं आने दी, फिर भी सरकार पर दमन का झूठा नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि रिजिजू ने माना की छात्रों की चिंता जायज है। 

कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों मचा है बवाल?

अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी (Gen-Z) के बीच जबरदस्त पैठ बनाई है। CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद इसका तगड़ा सियासी असर देखने को मिला था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था। यह मूवमेंट NEET-UG 2026 पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद मुखर रहा है। 15 अगस्त 2026 से दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने के लिए देशभर में 'सोशल ऑडिट' अभियान शुरू किया है।

NDA से भी मिल चुका है न्योता!

दिलचस्प बात यह है कि रिजिजू से पहले केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास आठवले भी अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे चुके हैं। आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने और समाज को मजबूत करने के लिए दीपके को RPI (A) यानी NDA के कुनबे में शामिल हो जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 'अपना लड़का' कहे जाने और आप (AAP) का कार्यकर्ता बताए जाने के इस सियासी घेराबंदी पर अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या रुख अपनाती है?

अभिजीत दिपके ने लॉन्च किया ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान, कहा- शिक्षा कमाई का जरिया नहीं

Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से देशभर में एक जन-संपर्क अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद नागरिकों से सीधे जुड़ना और उनकी परेशानियों व मुद्दों को करीब से समझना है। इस दौरान दिपके ने स्कूल-कॉलेजों में बढ़ती फीस को लेकर भी चिंता जताई।

अभियान की शुरुआत की घोषणा करते हुए दिपके ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार इस अभियान की पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग की बढ़ती फीस के कारण आम परिवारों के लिए अच्छी शिक्षा पाना मुश्किल होता जा रहा है।

शिक्षा में सुधार पहला मुद्दा होगा

उन्होंने कहा कि “शिक्षा में सुधार हमारा पहला मुद्दा होगा जिस पर हम काम करेंगे। दिपके ने कहा, हमारा मानना ​​है कि देश में शिक्षा महंगी हो गई है। पहली कक्षा के लिए सालाना फीस 1 लाख से 2 लाख रुपये के बीच है, और इसके अलावा डोनेशन भी देना पड़ता है।”

मध्यम और कम आय वाले परिवारों के लिए इतनी महंगी शिक्षा का खर्च उठाना कितना मुश्किल है, इस पर सवाल उठाते हुए दिपके ने कहा कि कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जिन परिवारों की आमदनी इतनी नहीं है, वे इतना पैसा कहां से लाएंगे?”

माता-पिता कर्ज लेने को मजबूर

दिपके ने यह भी दावा किया कि कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती फीस के कारण कई माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “कॉलेज और कोचिंग की फीस भी लगातार बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। हम परिवारों को इस बोझ से मुक्त करना चाहते हैं। अगर माता-पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं, तो उन पर बोझ नहीं पड़ना चाहिए।”

दिपके ने अंबेडकर का किया जिक्र

डॉ. बी.आर. अंबेडकर का जिक्र करते हुए, दिपके ने तर्क दिया कि शिक्षा को एक व्यावसायिक गतिविधि के बजाय एक मौलिक अधिकार बने रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, “डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार यह एक मौलिक अधिकार है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह मुनाफा कमाने का एक व्यापार बन गया है।”

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