Braj Mohan Ram: ‘ओडिशा में भी BJP को मजबूत करूंगा’; शपथ ग्रहण से पहले नए राज्यपाल के बयान पर बवाल, जानिए कौन हैं बृज मोहन राम

Braj Mohan Ram: ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल और झारखंड से तीन बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम पदभार संभालने से पहले ही विवादों में घिर गए हैं। ओडिशा की विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) नेराम के इस कथित बयान पर निराशा जताई है कि ‘पद संभालने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।’ एक और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे BJP का असली चेहरा सामने आ गया है। विपक्षी पार्टियों ने मांग की है कि राम को वापस बुलाया जाए।

BJD ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें राम राज्यपाल का पद संभालने के बाद अपनी आगे की कार्ययोजना के बारे में बात करते हुए नजर आ रहे हैं। BJD ने एक बयान में कहा, “पीटीआई के वीडियो में उनकी बातें सुनकर हमें हैरानी हुई, जिसमें वह फिर से कहते हैं कि वह BJP को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। हम इस टिप्पणी की निंदा करते हैं क्योंकि यह टिप्पणी इस तथ्य को दरकिनार करती है कि राज्यपाल पार्टी की राजनीति से ऊपर होते हैं।”

पूर्व सीएम नवीन पटनायक भड़के

ओडिशा के पूर्व सीएम और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने उम्मीद जताई कि वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे। ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “ओडिशा के लोग पार्टी का काम करने के लिए मनोनीत राज्यपाल के उत्साह को देख रहे हैं। उम्मीद है कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ उन्हें ओडिशा के लोगों की सेवा करने का जोश और शक्ति देंगे, जिससे वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखते हुए निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।” उन्होंने पोस्ट में राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया।

कांग्रेस का भी बीजेपी पर हमला

इस बीच, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने X पर एक पोस्ट में कहा, “राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष रूप से संविधान का पालन करना है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के चुनावी हितों को आगे बढ़ाना।” उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों को दलीय राजनीति से ऊपर रहना चाहिए। BJP नेता और तीन बार सांसद रह चुके राम को सोमवार को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राम के बयान पर ओडिशा BJP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बृज मोहन राम ने क्या कहा?

नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने कहा कि वह गरीबों के लिए काम करेंगे। साथ ही बुनियादी मुद्दों के समाधान पर ध्यान देंगे और लोगों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। राम ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ओडिशा तरक्की करे और लोगों को कोई परेशानी न हो। इस दौरान रिपोर्टर ने उनसे काम करने के तरीके को लेकर एक सवाल किया जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं नहीं देखेंगे… वहां (ओडिशा) भी क्या स्थिति है तो वहां भी हम जोड़ेंगे। वहां भी मोर्चा का अपना संगठन है। उसको एक्टिव करके आप अपने बीजेपी के पास में वोट कैसे आए इस पर चिंता करेंगे।” उनके इसी बयान पर सियासी बवाल मच गया है।

बाद में दी सफाई

ओडिशा में ‘बीजेपी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करूंगा’ वाले कथित बयान पर गुरुवार (15अक्टूबर ) को सफाई देते हुए नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने कहा था कि मैं सबके साथ मिलकर काम करूंगा। अब मैं दलीय राजनीति से ऊपर उठ चुका हूं। लेकिन जिस पार्टी से मैं जुड़ा रहा हूं, वह मेरी पूंजी है। उस पार्टी के लिए मेरे मन में हमेशा लगाव और प्रेम रहेगा। लेकिन मैं किसी खास पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा। हम सबके हैं, सब हमारे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं सबके साथ मिलकर इसे निभाऊंगा। शुरुआत में थोड़ा तालमेल बिठाने में समय लगेगा। लेकिन मैं ऐसा कर लूंगा… मैं संवैधानिक पद की मर्यादा के दायरे में रहकर काम करूंगा। एक राजनेता और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बीच फर्क होता है। इसलिए, मुझे इस बात का ध्यान रखते हुए काम करना होगा।”

कौन हैं बृज मोहन राम?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के पलामू जिला निवासी बृज मोहन राम को 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया। वह हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे, जिन्होंने तीन जनवरी 2025 को पदभार संभाला था। राम ने अविभाजित बिहार में 1996, 1998 और 1999 में तीन बार पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य के तौर पर सेवाएं दीं। ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था।

लातेहार से राज्यपाल का सफर

यह क्षेत्र अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से संबंधित बीएस कॉलेज, लोहरदगा से ग्रेजुएट की पढ़ाई की। मीडिया रिपोर्ट्स में उनका पेशा कृषि बताया जाता है। उनके राजनीतिक जीवन की खास बात यह है कि उन्होंने ऐसे दौर में राजनीति में अपनी पहचान बनाई, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था। उस समय पलामू और लातेहार जैसे क्षेत्र अविभाजित बिहार का हिस्सा थे।

विधायक से सांसद बनने और फिर लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहने के बाद राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय है। उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन स्थानीय क्षेत्र से जुड़ा रहा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। उस समय बिहार की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों और BJP के विस्तार का दौर चल रहा था।

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ब्रज मोहन राम ने वर्ष 1991 में अविभाजित बिहार की राजनीति में चुनावी सफलता हासिल की। वह भगवा पार्टी के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। फिर 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। राम की राजनीतिक पहचान में सामाजिक प्रतिनिधित्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने 1996 से 1998 के बीच रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। बाद के वर्षों में भी वह BJP के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय करने में अपनी भूमिका का उल्लेख करते रहे। हाल ही में राज्यपाल नियुक्त होने के बाद उन्होंने कहा कि झारखंड में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय बनाने में उनका योगदान रहा है।

Video: होम गार्ड भर्ती में साड़ी पहन नंगे पैर दौड़ने वाली कविता की कहानी! पति नहीं रहे तो बच्चों, ससुराल का बोझ उठाने का ये जज्बा इमोशनल कर देगा

रामगढ़ की सुबह इन दिनों सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हौसले से भी रोशन होती है, जो अपने सपनों के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हीं में 32 वर्षीय कविता कुमारी की कहानी सबसे अलग नजर आती है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता विधवा हैं और दो बच्चों की मां भी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य चुना है, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है। हर सुबह घर के जरूरी काम निपटाने के बाद कविता करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान पहुंचती हैं। उनके पास महंगे रनिंग शूज, ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट नहीं हैं।

ऐसे में साड़ी ही उनका अभ्यास का पहनावा बन गई है। तेज धूप, लंबा रास्ता और सीमित साधन भी उनके कदम नहीं रोक पाए। कविता की कोशिश सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य तैयार करना चाहती हैं।

पहले देखने पहुंचीं, फिर खुद दौड़ने लगीं

कविता शुरुआत में मैदान पर दूसरे अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग करते हुए देखने पहुंची थीं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी दौड़ लगाने का फैसला किया। शुरुआत में 1.6 किलोमीटर की दूरी पूरी करने में उन्हें करीब 8 मिनट लगते थे। अब वह यही दूरी लगभग 7 मिनट में पूरी कर लेती हैं।

भर्ती परीक्षा के दौरान साड़ी पहनकर दौड़ते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खास बात यह है कि कविता को काफी समय तक पता ही नहीं था कि उनका वीडियो इंटरनेट पर चर्चा में आ चुका है।

दो बच्चों की मां, परिवार की जिम्मेदारी भी कंधों पर

कविता के पति का निधन हो चुका है और वह अपने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग ससुरालवालों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने तैयारी का रास्ता नहीं छोड़ा। वह बताती हैं कि उनका मकसद सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं है। वह होमगार्ड बनकर अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करना चाहती हैं।

मैदान पर सिर्फ कविता नहीं, सैकड़ों संघर्ष की कहानियां

सिदो-कान्हू मैदान में हर सुबह का नजारा किसी कहानी से कम नहीं। ट्रैकसूट पहने युवतियों के साथ कई महिलाएं साड़ी और चप्पलों में दौड़ती दिखाई देती हैं। इनमें कई ऐसी हैं, जो घर का काम, बच्चों की देखभाल या खेतों का काम निपटाकर सीधे मैदान पहुंचती हैं।

बूढ़ा-खुखरा गांव की 30 वर्षीय सुनीता कुमारी भी साड़ी में दौड़ती हैं। उनका कहना है कि गरीब किसान परिवार से होने के कारण परिवार ट्रैकसूट और जूते नहीं खरीद सका, लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ।

किसी के लिए नौकरी, तो किसी के लिए बच्चों का भविष्य

गोला की मोनिका कुमारी ने 1.6 किलोमीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 4 सेकंड में पूरी की। वहीं कई अन्य महिला अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सिर्फ रोजगार का मौका नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। फिटनेस कोच सिकंदर पांडेय और एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। 2 अक्टूबर को आयोजित एक बड़ी दौड़ में करीब 2,500 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।

284 पदों ने जगाई नई उम्मीद

रामगढ़ में 284 होमगार्ड पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए और अतिरिक्त 5 प्रतिशत सीटें विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भर्ती में 1.6 किलोमीटर की दौड़ के अलावा लंबाई, सीना और अन्य शारीरिक परीक्षण होंगे। प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से योग्यता और फिटनेस के आधार पर चयन की तैयारी की है।

Video: ‘हिंदी सीखो वरना नौकरी छोड़ दो’… Zomato सुपरवाइजर का वीडियो वायरल, अब मांगी माफी

डायन से पद्मश्री तक का सफर | Chhutni Devi Padma Shri Inspirational Story| The Better India Hindi

डायन से पद्मश्री तक का सफर | Chhutni Devi Padma Shri Inspirational Story| The Better India Hindi

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जिसे कभी ‘डायन’ कहकर समाज ने ठुकराया,
उसी ने सैकड़ों महिलाओं के लिए आवाज़ उठाई। ❤️
छुटनी देवी की कहानी सिर्फ़ डायन से पद्मश्री तक पहुंचने की नहीं, बल्कि एक कुप्रथा के खिलाफ अकेले खड़े होने की कहानी है।
आज भी अगर कोई इंसान किसी गलत के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है, तो उसे आपकी आवाज़ की ज़रूरत है।
इस कहानी को शेयर करें, ताकि हिम्मत की ये कहानी और लोगों तक पहुंचे।

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VIDEO: चलती ट्रेन के स्लीपर कोच में बर्थ के नीचे से निकला लंबा सांप, भागने लगे लोग!

Train Snake Incident: चलती ट्रेन के डिब्बे में आराम से सफर कर रहे यात्रियों के पसीने तब छूट गए, जब रात के अंधेरे में साइड लोअर बर्थ के ठीक नीचे से एक लंबा सांप बाहर निकलता दिखाई दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @JharkhandRail द्वारा शेयर किया गया वीडियो कटिहार एक्सप्रेस का बताया जा रहा है, जो कोलकाता जा रही थी।

यूजर ने तंज अंदाज में लिखा कि यात्रियों ने पूरे पैसे देकर स्लीपर क्लास की सीट बुक की थी, लेकिन सफर के दौरान उन्हें सुरक्षा के बजाय ‘सांप का सरप्राइज’ मिल गया। इस नजारे के बाद यात्रियों की सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है।

क्या है पूरा मामला?

रात के समय जब ट्रेन कोलकाता की ओर बढ़ रही थी, तभी स्लीपर कोच के साइड लोअर बर्थ के नीचे से अचानक एक लंबा सांप रेंगता हुआ बाहर आया। चलती ट्रेन के में सांप को देखते ही यात्रियों में हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

यात्री अपनी बर्थ छोड़कर दूर हट गए। गनीमत यह रही कि समय रहते सांप पर नजर पड़ गई, वरना किसी यात्री को डसने पर रात के समय चलती ट्रेन में बड़ा हादसा हो सकता था।

सोशल मीडिया पर तंज और लोगों का फूटा गुस्सा

@JharkhandRail ने इस घटना का विवरण साझा करते हुए रेलवे पर तीखा तंज कसा है। यूजर ने लिखा, ‘स्लीपर कोच या सांपों का अभयारण्य? पूरा किराया देकर स्लीपर बर्थ बुक की… और साथ में मुफ्त में सांप से मुलाकात! मजाक से हटकर, यात्रियों को चलती ट्रेन के अंदर खतरनाक जीवों से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। यात्रियों को एक सुरक्षित यात्रा चाहिए, न कि कोई जंगल सफारी।

यूजर्स के रिएक्शन्स

कई यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि ट्रेन यार्ड में खड़ी रहने के दौरान प्रॉपर चेकिंग और सफाई नहीं होती, जिसके कारण ऐसे जहरीले जीव डिब्बों में घुस जाते हैं। X पर लोगों ने रेल मंत्री और ईस्टर्न/नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे को टैग करते हुए कहा कि जब यात्री पूरा किराया देते हैं, तो उन्हें जंगल सफारी जैसा खौफनाक अनुभव क्यों दिया जा रहा है?

कुछ यूजर्स का कहना था कि आउटर या डिपो में गाड़ियां खड़ी रहने के दौरान खिड़कियां और दरवाजे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे सांप और चूहे आसानी से अंदर दाखिला पा लेते हैं।

भारतीय रेलवे का मेगा प्लान आया सामने, इन 5 राज्यों में बिछेगी 656 किमी नई पटरी, 10783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाएं मंजूर

Indian Railways Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के विस्तार को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने देश के 5 राज्यों में कनेक्टिविटी सुधारने और ट्रेनों की भीड़कम करने के लिए ₹10,783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मंजूर की गई इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा मिलेगा। इसके तहत कुल 656 किलोमीटर लंबी नई रेल पटरियां बिछाई जाएंगी, जिन्हें साल 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जानिए इस मेगा प्लान की 5 सबसे बड़ी बातें।

किन 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी?

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने जिन तीन रेल लाइनों के विस्तार को मंजूरी दी है, वे निम्नलिखित हैं:

  • खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागडीही): चौथी नई रेल लाइन।
  • कटनी से पेंड्रा रोड: चौथी नई रेल लाइन।
  • बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड: तीसरी नई रेल लाइन।

2. 14 जिलों के 4,790 गांवों को सीधा फायदा

यह रेल विस्तार 5 राज्यों के 14 जिलों में फैले लगभग 4,790 गांवों को भारतीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगा। इससे क्षेत्र की लगभग 56 लाख आबादी को आवागमन में सीधी राहत मिलेगी और यात्रा का समय घटेगा।

3. धार्मिक और पर्यटन स्थलों का सफर होगा आसान

इन नई रेल पटरियों के बिछने से कई प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्व और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंचना काफी सुगम हो जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश)
  • अमरकंटक मंदिर (मध्य प्रदेश)
  • अचानकमार टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़)
  • भगवान जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा)
  • रतनपुर महामाया मंदिर (छत्तीसगढ़)

4. माल ढुलाई में तेजी और कम होगी लॉजिस्टिक्स लागत

यह पूरा रूट औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से कोयला, सीमेंट, लोहा और स्टील जैसी भारी औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति होती है। इन नई लाइनों के शुरू होने से रेलवे सालाना 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई करने में सक्षम होगी। पटरियों की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे ट्रकों पर निर्भरता घटेगी और रसद/लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी।

5. पर्यावरण को बंपर फायदा: 12 करोड़ लीटर तेल की बचत

सरकार के अनुमान के मुताबिक, सड़कों के बजाय रेलवे से माल ढुलाई बढ़ने से पर्यावरण को बहुत बड़ा फायदा होगा। हर साल लगभग 12 करोड़ लीटर तेल की खपत कम होगी। पर्यावरण में 62 करोड़ किलोग्राम (CO2) कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटेगा। यह लाभ लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा।

 

4 बार Gold जीतकर भी खिलाड़ी सब्ज़ी बेचने को मजबूर |Amardeep Kumar | Throwball Player |Gold Medalist

4 बार Gold जीतकर भी खिलाड़ी सब्ज़ी बेचने को मजबूर |Amardeep Kumar |  Throwball Player |Gold Medalist

देश के लिए International level पर 4 Gold Medal जीत चुके झारखंड के Amardeep Kumar आज अपनी practice और घर का खर्च चलाने के लिए कभी Cab चलाते हैं, तो कभी परिवार के साथ सब्ज़ियाँ बेचते हैं। रात में Cab चलाकर सुबह Practice करने वाले Amardeep की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है जो कई प्रतिभाशाली athletes को अपने सपने के साथ करना पड़ता है।
अगर आप Amardeep के इस संघर्ष को आसान बनाने में किसी भी तरह मदद करना चाहते हैं, तो इस Email ID पर संपर्क करें: Ad22784amar@gmail.com

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Delhi SIR List: दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कटे 47 लाख नाम! अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं तो जानिए 30 सितंबर तक कैसे करें आवेदन

Delhi SIR List: दिल्ली के मतदाताओं के लिए वोटर लिस्ट से जुड़ी यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप दिल्ली में मतदाता हैं तो सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम दर्ज है या नहीं। इसके लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO Delhi) की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम मिल जाता है तो फिलहाल आपको कोई दूसरा कदम उठाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर नाम लिस्ट में नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर अप्लाई करना होगा।

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत सोमवार (31 अगस्त) को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 1.45 करोड़ वोटरों में से 47 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवाने का अनुरोध कर सकते हैं। फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी।

वोटर अपना नाम कैसे चेक कर सकते हैं?

वोटर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और चुनाव आयोग के पोर्टल के जरिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकते हैं:-

EPIC (वोटर ID) नंबर से खोजें: राज्य के तौर पर दिल्ली चुनकर और EPIC नंबर एवं कैप्चा कोड डालकर नाम खोजा जा सकता है।

मोबाइल नंबर से खोजें: दिल्ली और अपनी पसंद की भाषा चुनने के बाद, चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालकर नाम देखा जा सकता है।

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न हो तो क्या करें?

अगर किसी वोटर या निवासी का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। योग्य लोग 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें तय डिक्लेरेशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा। जिन लोगों ने अपना घर स्थायी रूप से बदल लिया है और अपना नाम नए निर्वाचन क्षेत्र में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, वे अपने नए पते वाले इलाके में फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

सबसे पहले ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर लिस्ट में नाम चेक करने के लिए दिल्ली के चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाना होगा। वहां नाम देखने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:-

विकल्प 1: EPIC नंबर से करें सर्च

अगर आपके पास वोटर आईडी का EPIC नंबर है तो उसके जरिए अपना नाम खोज सकते हैं। इसके लिए संबंधित जानकारी भरनी होगी और दिल्ली का राज्य/क्षेत्र चुनकर अपना EPIC नंबर दर्ज करना होगा। इसके अलावा मतदाता अपने व्यक्तिगत विवरण के जरिए भी नाम खोज सकता है। इसके लिए सामान्य तौर पर ये जानकारियां मांगी जा सकती हैं:-

नाम

वोटर आईडी में दर्ज रिश्तेदार का नाम

जन्म तिथि

उम्र

लिंग

विधानसभा क्षेत्र

मोबाइल नंबर के जरिए भी रजिस्टर्ड मतदाता की जानकारी खोजने का विकल्प दिया गया है। सर्च करने के बाद सिस्टम पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाता के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी वाला पेज दिखाई देगा, जिसे प्रिंट भी किया जा सकता है।

विकल्प 2: वोटर लिस्ट की PDF में नाम खोजें

दूसरे विकल्प के तहत जारी वोटर लिस्ट की PDF डाउनलोड करके उसमें अपना नाम खोजा जा सकता है। इसके लिए राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और लिस्ट की भाषा जैसी जानकारी चुननी होगी। इसके बाद संबंधित बूथ की वोटर लिस्ट की PDF तैयार होगी। इस PDF में अपना नाम और अन्य डिटेल्स खोजे जा सकते हैं।

अगर ड्राफ्ट लिस्ट में नाम मिल गया तो?

अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद है तो फिलहाल किसी और कार्रवाई की जरूरत नहीं है। हालांकि अपने नाम के साथ दर्ज डिटेल्स जैसे नाम, पता और अन्य मतदाता संबंधी जानकारी को ध्यान से जांच लेना बेहतर है।

अगर नाम नहीं है तो घबराएं नहीं

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं दिखाई देता है तो आपके पास उसे शामिल कराने का मौका है। दी गई जानकारी के अनुसार ऐसे मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच नाम शामिल कराने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए अपने स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करना होगा।

नाम जोड़ने के लिए Form 6 भरना होगा

अगर किसी पात्र वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो उसे फॉर्म- 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा। Form 6 के साथ निर्धारित घोषणा पत्र (Declaration Form) और जरूरी सहायक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। यानी केवल अप्लाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पता बदल गया है तो Form 8

अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में है लेकिन आपने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो इसके लिए Form 8 का इस्तेमाल किया जाएगा। Form 8 के जरिए विधानसभा क्षेत्र के अंदर या किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में निवास स्थान बदलने की स्थिति में आवश्यक बदलाव कराया जा सकता है। इसी फॉर्म के जरिए मतदाता डिटेल्स में सुधार के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

गलत जानकारी होने पर भी ध्यान दें

अगर वोटर लिस्ट में नाम तो है लेकिन नाम, व्यक्तिगत डिटेल्स या अन्य जानकारी में किसी तरह की गड़बड़ी है, तो उसे भी नजरअंदाज न करें। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत संबंधित सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। बताई गई प्रक्रिया के मुताबिक, नाम या अन्य डिटेल्स में गलतियां पाए जाने पर निर्वाचन आयोग संबंधित लोगों को नोटिस भी भेज सकता है।

ये भी पढ़ें- Bihar-Jharkhand MoU: अमित शाह की मौजूदगी में बिहार और झारखंड के बीच खत्म हुआ 25 साल पुराना सोन जल विवाद, क्या था ये विवाद और क्या हुआ समझौता?

एक नजर में पूरी प्रक्रिया

  • नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है तो फिलहाल कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाएं।
  • अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो स्थानीय BLO से संपर्क करें और निर्धारित अवधि में दावा करें।
  • नया नाम जोड़ना है तो Form 6 जमा करें और उसके साथ जरूरी दस्तावेज लगाएं।
  • पता बदलना/डिटेल्स में सुधार करना है तो Form 8 के जरिए आवेदन करें।
  • फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी किया जाएगा।

झारखंड में 2014 के बाद से अबतक की ये 44 भर्ती परीक्षाएं एक झटके में रद्द! जज-साइंटिस्ट, लेक्चरर तक की नौकरी गई! पूरी लिस्ट यहां देखिए

Jharkhand Exam Cancelled: झारखंड में छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और गड़बड़ियों के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार देर रात झारखंड सरकार ने कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की सूची जारी कर दी। देर रात जारी किए गए आठ अलग-अलग नोटिफिकेशंस के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट किया कि रद्द की गई परीक्षाओं में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और आउटसोर्स एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा साल 2014 से आयोजित की गई परीक्षाएं शामिल हैं।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को हुई चार घंटे की आपात कैबिनेट बैठक के फैसलों के बाद आई है। गौरतलब है कि सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक JSSC-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा को रद्द कर दिया था। साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा प्रकाशित परिणामों को भी रद्द कर दिया गया।

रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल प्रमुख पद

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार रद्द की गई 44 परीक्षाओं में प्रशासनिक, न्यायिक, शैक्षणिक और तकनीकी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, सहायक अभियंता, सिविल जज, अपर लोक अभियोजक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक वन संरक्षक और इसके दूसरे प्रशासनिक एवं तकनीकी पद शामिल हैं।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट और इंटरनल विजिलेंस सेल का प्रस्ताव

सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए झारखंड उच्च न्यायालय से फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा JPSC और JSSC में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोनों आयोगों के भीतर एक इंटरनल विजिलेंस सेल बनाने का भी फैसला लिया गया है।

IAS अमिताभ कौशल समिति 2 महीने में सौंपेगी रिपोर्ट

JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में सुधार और सिफारिशें देने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस सुधार समिति को 2 महीने के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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झारखंड प्रदर्शन: छात्र नेता देवेंद्र महतो ने खत्म की भूख हड़ताल! JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से TDPL की सभी परीक्षाओं की होगी जांच

Jharkhand students protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड में अहम परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद लिया गया। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया।

सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, “सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।”

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है। सीएम ने कहा कि उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है।

सीएम ने बड़ा आरोप

सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल पास करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।

क्या है मांग?

सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।

अब आगे क्या होगा?

झारखंड सरकार के फैसले के बाद अब JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाएं जांच के घेरे में हैं। सबसे अहम बात यह है कि जांच का दायरा केवल हाल की परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। CID 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं की पड़ताल करेगी। जबकि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली अलग समिति कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

JMM सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य छात्रों की शिकायतों का समाधान करना और झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। अब जांच के नतीजों पर नजर रहेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।

छात्र प्रोटेस्ट के बीच सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, रद्द होगा JSSC-CGL एग्जाम

Hemant Soren: झारखंड में पिछले 24 दिनों से जारी छात्रों के प्रोटेस्ट के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कैबिनेट ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार केंद्र के नए परीक्षा कानून को राज्य में लागू करने पर भी विचार कर रही है। इस कानून में संगठित नकल और परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवार लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

परीक्षा में धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई

हेमंत सोरेन ने कहा कि, झारखंड में केंद्र के नए परीक्षा कानून को लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें नकल और परीक्षा में धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का यह कदम भर्ती परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए अहम माना जा रहा है।

सीएम ने क्या कहा

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा, “आज, कैबिनेट ने JSSC-CGL परीक्षाएं भी रद्द करने का फैसला किया। इसके अलावा, 2014 से हुई सभी छोटी या बड़ी गलतियों की पूरी जांच की जाएगी। हम जल्द ही केंद्र सरकार द्वारा MMDR एक्ट में किए गए बदलावों पर चर्चा करने के लिए भी बैठक करेंगे, अगर जरूरत पड़ी, तो हम इस खास मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक स्पेशल सेशन भी बुला सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “इस मामले के सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए, हमने TDPL से जुड़ी हर चीज को कैंसिल करने का फैसला किया है—जिसमें आयोजित परीक्षाएं, जारी हुए नतीजे, चुने गए या भाग लेने वाले उम्मीदवार और TDPL द्वारा की जाने वाली दूसरी सभी गतिविधियां शामिल हैं।”

24 दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवार पिछले 24 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग सितंबर 2024 में हुई JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की है। उम्मीदवारों का आरोप है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था और 135 में से 120 सवाल लीक होने का दावा किया गया है। प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवार झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की CBI से जांच कराने की भी मांग कर रहे हैं।