Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।

उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध

महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।

महतो ने अपना अनशन तोड़ा

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”

इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”

महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।

महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

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उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।

झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।

इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

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इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

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Viral Video: टूटने वाला था नर्स बनने का सपना, फिर मसीहा बन आया ये शख्स, सोशल मीडिया पर छाई ये इमोशनल स्टोरी

झारखंड के एक छोटे से गांव की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 14 साल की सोनाली थुडू की कहानी लोगों को काफी पंसद आ रही है। आर्थिक तंगी की वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई और नर्स बनने का सपना अधूरा छोड़ने की नौबत आ गई थी। इसी बीच शिक्षक अलख पांडे ने उसकी मदद का हाथ बढ़ाया, जिससे उसकी पढ़ाई फिर से शुरू हो गई। इस क्लिप को इंस्टाग्राम पर 16 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया है। लोगों को ये कहानी काफी पसंद आ रही है। लोग अलख पांडे के इस कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

आर्थिक वजह से छुटने वाली थी पढ़ाई

सोनाली का सपना नर्स बनकर लोगों की सेवा करना था, लेकिन घर की आर्थिक परेशानियों ने उसके रास्ते में बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी। पिता की तबीयत खराब होने के बाद उनकी नौकरी छूट गई और उन्हें वापस गांव लौटना पड़ा। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसकी मां पर आ गई, जो पशुपालन करके किसी तरह घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रही हैं। परिवार एक कच्चे मकान में रहता है और गांव में मोबाइल नेटवर्क व इंटरनेट की सुविधा भी बहुत सीमित है। ऐसे हालात में सोनाली के लिए पढ़ाई जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया था।

 

अलख पांडे ने करवाया एडमिशन

वायरल वीडियो में सोनाली अलख पांडे से कहती हैं, “सर, मेरा सपना है कि मैं पढ़-लिखकर नर्स बनूं।” यह सुनकर अलख पांडे उनसे पूछते हैं, “बताइए, आपका एडमिशन किस स्कूल में कराना है? आप कहां पढ़ना चाहती हैं?” इस पर सोनाली बताती हैं कि वह सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाई करना चाहती हैं। वीडियो में बताया गया कि अलख पांडे ने उसी दिन स्कूल पहुंचकर सोनाली का दाखिला कराया और उसकी पूरे साल की फीस भी जमा कर दी। इसके बाद सोनाली ने कक्षा 9 में अपनी पढ़ाई शुरू की।

लोगों ने किए कमेंट

वीडियो के आखिर में वह नई स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर खुशी-खुशी अपनी कक्षा की ओर जाती नजर आती है, जो उसके सपनों की नई शुरुआत को दिखाता है। इस भावुक वीडियो को इंस्टाग्राम पर 1.6 करोड़ (16 मिलियन) से ज्यादा बार देखा जा चुका है और सोशल मीडिया पर लोग अलख पांडे के इस कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, “इस तरह किसी जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई में मदद करना सबसे बड़ा नेक काम है।” दूसरे यूजर ने लिखा, “अगर ऐसे ही बच्चों को पढ़ाई का मौका मिलता रहा, तो वे आगे चलकर डॉक्टर, आईएएस और बड़े अधिकारी बन सकते हैं। ऐसे काम करने वाले लोगों की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है।”

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