Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते में उलझा रहा पाकिस्तान उधर भारत ने चिनाब पर 4870 MW हाइड्रोपावर प्लान पर लगा दिया जोर!

Indus Waters Treaty: 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के करीब 15 महीने बाद भारत ने साफ कर दिया है कि अब यह समझौता अपने पुराने रूप में वापस नहीं लौटेगा। सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि भारत सरकार पाकिस्तान के साथ इस संधि पर फिर से बातचीत करने के लिए तैयार है। लेकिन इसके मौजूदा स्वरूप को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।

वहीं, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान को बड़ा रणनीतिक जवाब देते हुए चिनाब बेसिन में 4870 मेगावाट (MW) की कुल क्षमता वाली 5 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम बेहद तेज कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मौजूदा स्वरूप में सिंधु जल समझौता दोबारा काम नहीं कर सकता। आइए जानते हैं भारत की इन 5 बड़े प्रोजेक्ट का पूरा विस्तृत ब्योरा और उनकी मौजूदा स्थिति।

चिनाब बेसिन पर भारत के 5 बड़े प्रोजेक्ट: जानिए किस प्रोजेक्ट में कितना हुआ काम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की मौजूदा प्राथमिकताओं में सावलकोट (1856 MW), पाकल दुल (1000 MW), रतले (850 MW), किरू (624 MW) और क्वार (540 MW) प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NHPC की 18 मई 2026 की लेटेस्ट फाइनेंशियल और टेक्निकल अर्निंग कॉल्स के मुताबिक ये सभी परियोजनाएं इस समय अलग-अलग चरणों में हैं।

इनमें सबसे पहले पाकल दुल जलविद्युत परियोजना की बात करें तो 1000 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट का मार्च 2026 तक 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और NHPC ने इसे वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2027 के बीच चालू करने का लक्ष्य रखा है। 624 मेगावाट क्षमता वाली किरू परियोजना का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका 82 प्रतिशत निर्माण काम पूरा कर लिया गया है। इसे भी जनवरी से मार्च 2027 के बीच ही शुरू करने की समयसीमा तय की गई है।

तीसरी प्रमुख परियोजना 540 मेगावाट की क्वार हाइड्रोपावर परियोजना है, जिसका अब तक 33 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसे मार्च 2028 तक चालू करने का शेड्यूल निर्धारित किया गया है। चौथे प्रोजेक्ट के रूप में 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना पर काम चल रहा है। इसका मार्च 2026 तक 29 प्रतिशत निर्माण काम पूरा हो चुका है और इससे नवंबर 2028 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

इस पूरी पाइपलाइन में सबसे बड़ी परियोजना 1856 मेगावाट क्षमता वाली सावलकोट परियोजना है। इसका अभी कंस्ट्रक्शन चालू नहीं हो पाया है। NHPC के अनुसार यह प्रोजेक्ट फिलहाल केंद्र सरकार की वित्तीय और पर्यावरणीय मंजूरियों के चरण में है। केंद्र सरकार से औपचारिक निवेश मंजूरी मिलने की तारीख से इसके निर्माण में लगभग 96 महीने यानी 8 साल का समय लगेगा। सावलकोट अकेली परियोजना इस 5-प्रोजेक्ट पाइपलाइन की कुल 4870 मेगावाट क्षमता का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है। बाकी 4 निर्माणाधीन परियोजनाएं मिलकर 3014 मेगावाट क्षमता की हैं।

NHPC मार्च 2026 तक पाकल दुल, किरू, क्वार और रतले परियोजनाओं पर कुल 16024 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है जबकि इन चारों की कुल अनुमानित संयुक्त लागत लगभग 27945 करोड़ रुपये है। जब ये पांचों प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू हो जाएंगे तो इनसे सालाना लगभग 18.61 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा।

भारत का रुख साफ, पहले आतंकवाद खत्म करे पाकिस्तान

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भविष्य में पानी के बंटवारे के प्रावधानों को दोबारा एक्टिव करने के लिए एक संशोधित संधि की आवश्यकता होगी। हालांकि यह इस शर्त पर निर्भर करेगा कि इस्लामाबाद भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को हमेशा के लिए खत्म करे। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ये परियोजनाएं भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, ग्रिड स्थिरता और क्षेत्रीय विकास को सपोर्ट करेंगी। इसके साथ ही सिंधु बेसिन में भारत के अधिकारों का अधिक उपयोग सुनिश्चित करेंगी।

सिंधु जल संधि स्थगित करने से लेकर अब तक की पूरी टाइमलाइन

1960 की संधि के अनुच्छेद III और अनुलग्नक D के तहत भारत को चिनाब और अन्य पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत उत्पन्न करने की अनुमति संधि के दौरान भी प्राप्त थी। लेकिन पाकिस्तान द्वारा पैदा किए गए विवादों और आतंकवाद के कारण हालात बदलते गए-

पहला औपचारिक नोटिस- 25 जनवरी 2023

भारत ने किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर विवाद के बाद सिंधु जल समझौते में संशोधन की मांग करते हुए पाकिस्तान को पहला औपचारिक नोटिस भेजा।

व्यापक समीक्षा की मांग- 30 अगस्त 2024

भारत ने संधि के अनुच्छेद XII(3) के तहत व्यापक समीक्षा और संशोधन की मांग करते हुए दूसरा नोटिस जारी किया।

पहलगाम हमला और कठोर फैसला- 22-23 अप्रैल 2025

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए। इसके ठीक अगले दिन (23 अप्रैल) सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने फैसला लिया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि को स्थगित रखा जाएगा।

पाकिस्तान का रुख- 02 जुलाई 2026

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में भारत के एकतरफा फैसले को खारिज किया और आतंकवाद के आरोपों को नकारते हुए संधि को बाध्यकारी बताया।

मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज- 15 मई 2026

स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) द्वारा गठित ट्रिब्यूनल ने भारतीय रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं में अधिकतम पॉन्डेज की गणना पर एक फैसला जारी किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थता अदालत को अवैध बताते हुए फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत ने अतीत में युद्धों, सैन्य संकटों और लंबे समय की द्विपक्षीय शत्रुता के बावजूद भी 1960 की इस संधि का पालन किया था। हालांकि सीमा पार आतंकवाद को पाकिस्तान से मिल रहे लगातार समर्थन ने इस संधि को चलाए रखने के लिए जरूरी विश्वास को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसी का नतीजा है कि भारत अब अपने अधिकार क्षेत्र की नदियों के पानी का भरपूर और कुशल उपयोग अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ईरान की ‘फटकार’ के बाद घुटनों पर आए शहबाज शरीफ! ‘बड़बोलेपन’ पर यू-टर्न लेकर अब ट्रंप को ही सिखा रहे पाठ

Pakistan PM Shehbaz Sharif: पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा ही तीर हवा में चलाया, जो सीधा घूमकर उन्हीं को लग गया। हाल ही उन्होंने अपनी संसद में खड़े होकर सीना ठोकते हुए दावा कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के ‘बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम’ को लेकर बातचीत चल रही है।

बस फिर क्या था, ईरान को शहबाज शरीफ का यह ‘ज्ञान’ कतई रास नहीं आया। ईरान ने सरेआम पाकिस्तान को ऐसी फटकार लगाई कि शहबाज शरीफ को तुरंत ‘यू-टर्न’ लेना पड़ा। अब वह कल तक जिस मिसाइल प्रोग्राम पर अमेरिका-ईरान की पंचायत करा रहे थे, आज उसी मिसाइल प्रोग्राम के सबसे बड़े रक्षक बन गए हैं! आइए समझते हैं पाकिस्तान के इस नए कूटनीतिक ब्लंडर की पूरी कहानी।

जब ईरान के राष्ट्रपति के सामने ही खुल गई शहबाज की ‘ज्ञान की पोटली’

ये पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान खुद इस्लामाबाद के दौरे पर थे। मेहमान घर में बैठा था और शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी संसद में खड़े होकर अपनी कूटनीतिक समझ का ढिंढोरा पीट दिया। उन्होंने कह डाला कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान की मिसाइलों को लेकर गुपचुप चर्चा चल रही है।

ईरान का करारा जवाब

ईरान के वार्ताकारों और अधिकारियों को जैसे ही इस ‘अफवाह’ की भनक लगी, उन्होंने तुरंत शहबाज शरीफ के बयान को सरेआम खारिज कर दिया। ईरानी टीम ने दो टूक कहा, ‘पाकिस्तानी पीएम को चल रही राजनयिक प्रक्रियाओं के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, उनका यह दावा पूरी तरह गलत है।’ ईरान ने साफ कर दिया कि उनकी मिसाइलें उनका संप्रभु रक्षा मामला हैं और यह किसी भी टेबल पर बातचीत का हिस्सा नहीं हैं।

फटकार पड़ते ही पलटे शहबाज

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘नो-इंफॉर्मेशन’ का तमगा मिलने के बाद शहबाज शरीफ ने जो यू-टर्न लिया, उसे देखकर गिरगिट भी शरमा जाए। एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक शहबाज शरीफ के सुर बदल गए। अब वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का खुलकर बचाव करने लगे।

शहबाज शरीफ ने उलटे दुनिया से ही सवाल पूछ लिया कि आखिर सिर्फ तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे की ही आलोचना क्यों की जा रही है? उन्होंने यह ज्ञान भी दे डाला कि इस मुद्दे को विवाद बनाना क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों को और उलझा सकता है।

एक तरफ ट्रंप, दूसरी तरफ ईरान; ‘सैंडविच’ बन गया पाकिस्तान!

इस पूरे वाकये ने इस्लामाबाद को सांप-छछूंदर वाली स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार आंखें लाल किए रहते हैं। दूसरी तरफ पड़ोसी देश ईरान है, जिससे पाकिस्तान को अपनी सीमाएं और संबंध बचाकर रखने हैं।

अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

शहबाज शरीफ का यह यू-टर्न अब कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेहरान से मिली सीधी और तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद शहबाज शरीफ केवल अपनी गलती को सुधारने और ईरान के गुस्से को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

Explosion in Qatar: कतर की LNG फैक्ट्री में बड़ा धमाक! 54 लोग घायल, 18 लापता

Explosion in Qatar: कतर के मुख्य नैचुरल गैस एक्सपोर्ट हब में एक जबरदस्त धमाका हुआ है। इसमें कम से कम 54 लोग घायल हो गए और 18 लोग अभी भी लापता हैं। यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के दौरान हुई है। तब हुई जब हालिया संघर्ष के दौरान ईरान के हमले के बाद कर्मचारी वहां काम फिर से शुरू कर रहे थे। सरकारी कंपनी ‘कतरएनर्जी’ के मुताबिक, धमाका रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ, जब एक्सपोर्ट फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। धमाके के बाद आग लग गई। हालांकि नुकसान का सही अंदाजा अभी नहीं लग पाया है।

अधिकारियों ने बताया है कि कतर की मुख्य लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्रोसेसिंग फैसिलिटी में हुए धमाके में 54 लोग घायल हो गए हैं और 18 लोग लापता हैं। कतर के गृह मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए अंदरूनी धमाके के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए कतरी इंटरनेशनल सर्च एंड रेस्क्यू ग्रुप को तैनात किया गया था।

वायरल वीडियो में क्या है?

ऑनलाइन वायरल हो रहे वीडियो में अंधेरे आसमान के सामने दूर तक तेज़ लपटें उठती दिख रही हैं। आसमान में धुआं फैलता हुआ दिख रहा है और ऊपर एक छोटी सी चमकदार चीज भी दिखाई दे रही है। युद्ध के दौरान ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना कंट्रोल मजबूत करने के बाद कतर ने गैस का उत्पादन रोक दिया था। इससे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को होने वाली सप्लाई में रुकावट आई थी।

जब संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत जारी रही और रणनीतिक जलमार्ग पर पाबंदियां कम हुईं, तो अधिकारियों ने एक्सपोर्ट टर्मिनल पर गतिविधियां फिर से शुरू करने का फैसला किया। हालांकि, रविवार रात काम फिर से शुरू करने की कोशिश एक हादसे में बदल गई, जब फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई।

अधिकारियों ने शुरू में बताया था कि बहुत कम लोग घायल हुए हैं। लेकिन कई घंटों बाद, कतर के गृह मंत्रालय ने आंकड़ों में बदलाव करते हुए कहा कि कम से कम 54 लोग घायल हुए हैं और 18 लोगों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है। इस घटना से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ सकती है, क्योंकि कतर नैचुरल गैस के दुनिया के प्रमुख एक्सपोर्टर्स में से एक है।

अधिकारियों ने पहले कहा था कि मौके पर पहुंची सिविल डिफेंस टीमों ने किसी के घायल होने की जानकारी नहीं दी है। मिनिस्ट्री ने कहा कि फैसिलिटी से कोई लीकेज नहीं हुआ जिससे पब्लिक सेफ्टी को खतरा हो।

इंडस्ट्रियल हब को मैनेज करने वाली कतरएनर्जी ने कहा कि बरजान फैक्ट्री में धमाके के तुरंत बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को तैनात किया गया और फैसिलिटी में लगी आग पर काबू पा लिया गया। रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी दोहा से लगभग 80km (50 मील) उत्तर में है।  यह दुनिया की सबसे बड़ी LNG एक्सपोर्ट फैसिलिटी का घर है, जो ग्लोबल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा बनाती है।

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मार्च में कतर सरकार ने घोषणा की थी कि ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनने के बाद इंडस्ट्रियल हब को काफी नुकसान हुआ है। कतरएनर्जी ने हमलों के बाद अपनी सप्लाई की जिम्मेदारियों से खुद को आजाद करने के लिए अपने कुछ कॉन्ट्रैक्ट में फोर्स मेज्योर क्लॉज का इस्तेमाल किया। इससे इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों के कस्टमर प्रभावित हुए।