वंदे भारत ने निकाली 180 Kmph की गजब की रफ्तार! मथुरा-नागदा रूट पर 16-कोच ट्रेन के ट्रायल की फुल रिपोर्ट

इंडियन रेलवे की नई वंदे भारत चेयर कार ट्रेन ने मथुरा-नागदा सेक्शन पर 180 km/h की स्पीड से सफल ट्रायल रन पूरा किया। 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन को पंजाब के कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में बनाया गया है। रेल मंत्रालय के अनुसार यह ट्रायल 8 अक्टूबर, 2026 को चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CCRS) की देख रेख में हुआ।

एडवांस्ड प्रोपल्शन सिस्टम से लैस इस ट्रेन की हाई-स्पीड परफॉर्मेंस, ऑपरेशनल क्षमता और सुरक्षा की जांच की गई, जो भारत की आधुनिक रेलवे मैन्युफैक्चरिंग यात्रा में एक अहम पड़ाव है। CCRS इंस्पेक्शन का सफल होना एडवांस्ड वंदे भारत ट्रेनों के विकास में एक बड़ी उपलब्धि है, जो भारत में आधुनिक रेलवे मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमताओं को दिखाता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 180 km/h की स्पीड पर ट्रायल पूरा करने का मतलब यह नहीं है कि रेगुलर पैसेंजर सर्विस के दौरान ट्रेन इसी स्पीड से चलेगी। अभी वंदे भारत ट्रेन 130 से 160 km/h की स्पीड से चलेगी, लेकिन आगे चलकर यह 180 km/h की स्पीड तक पहुंच जाएगी।

वंदे भारत ट्रेन की खासियतें

नई बनी वंदे भारत ट्रेन में आरामदायक और पीछे की ओर झुकने वाली (रिक्लाइनिंग) सीटें हैं, जिनमें पैर फैलाने के लिए काफी जगह है। इसमें बड़ी पैनोरमिक खिड़कियां हैं, जिनसे बाहर का नजारा साफ दिखता है और प्राकृतिक रोशनी आती है। साथ ही इसमें जीरो-डिस्चार्ज बायो-वैक्यूम टॉयलेट हैं, यानी इनसे कोई कचरा बाहर नहीं निकलता।

इस ट्रेन में ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे और एक स्मूथ सस्पेंशन सिस्टम भी है, जिससे झटके और कंपन कम महसूस होते हैं। इसके एयर-कंडीशंड कोच यात्रियों की संख्या के हिसाब से तापमान को एडजस्ट करने और पूरी यात्रा के दौरान आरामदायक तापमान बनाए रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर-फ्रेंडली खास टॉयलेट भी बनाए गए हैं।

RCF कपूरथला ने कोच बनाने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया

फाइनेंशियल ईयर 2025–26 में, RCF कपूरथला ने 2,383 कोच बनाकर अपना अब तक का सबसे ज्यादा सालाना प्रोडक्शन हासिल किया। इस फैक्ट्री ने मॉडर्न रेलवे कोच बनाने के एक अहम केंद्र के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। यह एडवांस्ड ट्रेनसेट के विकास में योगदान दे रही है और वंदे भारत व अमृत भारत जैसी एडवांस्ड ट्रेनों के लिए मॉडर्न कोच बना रही है।

इसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है और इसके बनाए रेलवे कोच एशिया और अफ्रीका के कई देशों में एक्सपोर्ट किए गए हैं। अब तक सभी वंदे भारत ट्रेनें चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में बनाई गई हैं।

Vande Bharat Viral Photos: वंदे भारत ट्रेन में जंग लगे टॉयलेट और गंदगी देखकर भड़का, फिर रेलवे ने दी ये सफाई

अहमदाबाद। वंदे भारत एक्सप्रेस की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ट्रेन की साफ-सफाई और मेंटेनेंस को लेकर सवाल उठने लगे। तस्वीरों में ट्रेन का बाहरी हिस्सा गंदा, कुछ कांच के पैनल टूटे हुए और टॉयलेट के कुछ हिस्सों में जंग लगी दिखाई दे रही थी। जियोलॉजिस्ट हिमांशु मुखर्जी ने 2 अक्टूबर को X (formerly Twitter) पर फोटोज शेयर की थीं।

मुखर्जी के अनुसार, ये तस्वीरें ट्रेन नंबर 26901 की हैं, जो साबरमती से वेरावल के बीच चलती है। उन्होंने ट्रेन की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी सफाई और देखभाल ठीक से नहीं हो रही है। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन और रेल मंत्रालय को टैग कर मामले पर ध्यान देने की मांग की।

तस्वीरें सामने आने के बाद ट्रेन की सफाई और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। मुखर्जी ने कहा कि वंदे भारत जैसी ट्रेन की ऐसी हालत देखकर उन्हें अच्छा नहीं लगा। साबरमती-वेरावल वंदे भारत मई 2025 में शुरू हुई थी और यह अहमदाबाद को सौराष्ट्र से जोड़ती है।

ये रहा रेलवे का जवाब

सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद अहमदाबाद के DRM ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टाफ ने ट्रेन के बताए गए हिस्सों की जांच की और जरूरी सफाई व मरम्मत का काम कर दिया।

  • ट्रेन की जांच हुई: लोकल रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के डिब्बों का इंस्पेक्शन किया और दिखने वाली कमियों को ठीक किया।
  • पैसेंजर से अपील: रेलवे ने पैसेंजर से भी सफर के दौरान ट्रेन में सफाई रखने और कचरा सही जगह पर डालने की अपील की।

Vande Bharat Patna: गुड न्यूज! गोरखपुर-पटना के बीच दौड़ेगी ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस! गोपालगंज-मशरख रूट से जोड़ने की मांग, जानें- सबकुछ

Vande Bharat Gorakhpur-Patna News: बिहार में रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करने को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बुधवार (16 सितंबर) को दिल्ली में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बिहार से जुड़ी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ समेत कई ट्रेनों को चलाने को लेकर अपनी मांगों को सामने रखा। इनमें पटना-थावे इंटरसिटी के समय में बदलाव, यात्रा समय कम करने, गोरखपुर-पटना के बीच वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग की। इसके साथ ही गोपालगंज-मशरख के रास्ते नई रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की भी मांग प्रमुख रही।

सुबह 5 बजे पटना से चले इंटरसिटी

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्री ने राजधानी पटना-थावे इंटरसिटी के समय में बदलाव का प्रस्ताव रखा। उन्होंने मांग की है कि इस प्रमुख ट्रेन को पटना जंक्शन से सुबह 5 बजे रवाना किया जाए। जबकि थावे जंक्शन से शाम 7 बजे वापसी के लिए चलाया जाए।

फिलहाल, पटना-थावे इंटरसिटी पटना से दोपहर 12:10 बजे रवाना होती है। जबकि शाम 7 बजे थावे पहुंचती है। वापसी के दौरान ये ट्रेन 8:05 बजे थावे से चलकर सुबह 3:20 बजे पटना पहुंचती है। मंत्री ने ट्रेन की यात्रा अवधि कम करने की भी मांग की है, ताकि यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।

गोरखपुर-पटना के बीच ‘वंदे भारत’ चलाने की मांग

मुलाकात के दौरान मिथिलेश तिवारी ने गोरखपुर से पटना के बीच वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित कनेक्टिविटी में गोरखपुर-गोपालगंज-मशरख होते हुए पटना को जोड़ने की बात कही गई है। इससे इस क्षेत्र के ट्रेन यात्रियों को तेज रेल सेवा मिलने के साथ-साथ गोपालगंज और आसपास के इलाकों की पटना तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

सिधवलिया में ‘ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस’ के ठहराव की मांग

शिक्षा मंत्री ने ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस का सिधवलिया स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित करने की भी मांग की है। इसके अलावा ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत बैकुंठपुर और सिधवलिया रेलवे स्टेशनों के विकास का मुद्दा भी रेल राज्य मंत्री के सामने रखा गया। स्टेशनों के विकास से यात्रियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्र में रेल सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया।

दिघवा दुबौली में ROB-RUB निर्माण तेज करने की मांग

इस बैठक में दिघवा दुबौली में रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण कार्य को भी जल्द पूरा करने की मांग उठाई गई। मंत्री ने इन परियोजनाओं में तेजी लाने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों को आवागमन में राहत मिल सके।

रेल कनेक्टिविटी से जुड़े कई मुद्दे एक साथ उठे

मिथिलेश तिवारी ने बैठक में क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी, ट्रेनों के समय में सुधार, नए रूट्स पर तेज रेल सेवा, स्टेशनों के विकास और जरूरी रेल प्रोजेक्ट्स को और रफ्तार देने से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाया। बताया जा रहा है कि अब इन प्रस्तावों पर रेल मंत्रालय की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर बिहार के लोगों की नजर बनी रहेगी।

ये भी पढ़ें- Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर बिग अपडेट, मंत्रालय को सौंपा गया DPR, सारी डिटेल जानिए

Delhi-Patna Bullet Train Corridor: देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की तैयारियां तेज हो गई हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेल मंत्रालय को सौंप दी है। करीब 1,557 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है> जबकि दूसरे चरण में इसे वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा।

DPR के बाद ग्राउंड सर्वे की तैयारी तेज

DPR सौंपे जाने के बाद दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल लाइन के ग्राउंड सर्वे की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। NHSRCL ने 7 सितंबर को वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की तैनाती को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत तीन ऑफिसर्स ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और तीन एडिशनल जनरल मैनेजर की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रक्रिया अगले 30 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। दिल्ली, नोएडा, नई दिल्ली, आगरा, लखनऊ, वाराणसी और पटना में तैनात अधिकारियों को परियोजना के जमीनी कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक चलेगी ट्रेन

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 813 किलोमीटर बताई गई है। दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होने वाली यह लाइन नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।

दूसरे चरण में वाराणसी से पटना और इसके बाद सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल लाइन का विस्तार प्रस्तावित है। पूरे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की लंबाई करीब 1,557 किलोमीटर होगी।

इन शहरों से होकर गुजरेगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

‘दैनिक जागरण’ के मुताबिक, प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी रूट में दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या के लिए लिंक लाइन, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी को जोड़े जाने की योजना है। इसके आगे वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी सेक्शन के जरिए बिहार और पश्चिम बंगाल को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

सफर का समय होगा काफी कम

प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से विभिन्न रूटों पर यात्रा का अनुमानित समय इस प्रकार बताया गया है:-

  • दिल्ली-वाराणसी का सफर 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा।
  • वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा।
  • पटना-सिलीगुड़ी के बीच करीब 2 घंटे लगेंगे।
  • दिल्ली-पटना के बीच 4 घंटे 41 मिनट का समय लगेगा।
  • दिल्ली-सिलीगुड़ी के बीच 6 घंटे 45 मिनट लगेगा।

इस हिसाब से दिल्ली से पटना की यात्रा करीब 4 घंटे 41 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 6 घंटे 45 मिनट लग सकते हैं।

बिहार के इन शहरों को मिलेगा फायदा

  • हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में बिहार के कई शहरों को जोड़ने की योजना है। संभावित स्टेशनों में बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं।
  • बिहार में इस परियोजना के लिए एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाने की योजना है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 1,900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है।
  • पटना जिले में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए करीब 21 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। स्टेशन के लिए शुरुआती तौर पर फुलवारी शरीफ में AIIMS पटना के पास जमीन का निरीक्षण किया गया था।
  • इसके अलावा NHSRCL की सर्वे टीम ने बिहटा के पास एक वैकल्पिक स्थान का भी सुझाव दिया है।

जमीन अधिग्रहण और सर्वे का काम जारी

उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज और वाराणसी समेत विभिन्न जिलों में जमीन अधिग्रहण से जुड़े प्रस्तावों पर काम चल रहा है। बिहार में ग्राउंड सर्वे और मिट्टी की जांच का काम भी जारी है। फाइनल मंजूरी मिलने के बाद DPR को कैबिनेट के समक्ष पेश करने की तैयारी है। पिछले बजट में सरकार ने वाराणसी कॉरिडोर समेत सात बुलेट ट्रेन रूट को हाई-प्रायोरिटी प्रोजेक्ट के रूप में चिह्नित किया था।

280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें

  • भारत में स्वदेशी तकनीक से बुलेट ट्रेन के कोच तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इसके अलावा जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन के कोच 2029-30 तक भारत में आने की बात कही गई है। इनकी अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।
  • जापान और चीन मैग्लेव ट्रेनों पर भी काम कर रहे हैं, जिनकी रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है।
  • वहीं, रूस ने भारत को ‘Ivolga’ ट्रेन की आपूर्ति की पेशकश की है, जिसकी गति 360 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।

ये भी पढ़ें- India Net Zero Portal: क्लाइमेट चेंज पर भारत का बड़ा एक्शन, अब नेट जीरो टारगेट्स की होगी सार्वजनिक निगरानी! जानें कैसे काम करेगा नया पोर्टल

रेलवे बोर्ड ने सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन को दी मंजूरी, 9 स्टॉपेज के साथ जानें टाइमिंग और रूट

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: रेल मंत्रालय ने गुजरात को राजस्थान से जोड़ने वाली एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को मंज़ूरी दे दी है। यह नई सेमी-हाई स्पीड ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच चलेगी। इस ट्रेन का रखरखाव और संचालन वेस्टर्न रेलवे (WR) जोन करेगा।

वेस्टर्न रेलवे और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर (ऑपरेटिंग) को 31 अगस्त को लिखे एक पत्र में, रेलवे बोर्ड ने बताया कि उसने 26903/26904 सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने को मंजूरी दे दी है।

इंडियन रेलवे एक वंदे भारत ट्रेन बंद करेगा

रेलवे बोर्ड ने ट्रेन नंबर 26963/26964 उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत एक्सप्रेस को बंद करने की भी मंजूरी दी है। उदयपुर सिटी-असारवा (अहमदाबाद) वंदे भारत एक्सप्रेस फरवरी 2026 में शुरू की गई थी। अभी यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन चलती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन: दूरी और यात्रा का समय

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन लगभग 690 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे 30 मिनट में तय करती है। यह अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस: ​​स्टॉपेज और फ्रीक्वेंसी

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में 6 दिन चलेगी। सूरत और उदयपुर सिटी के बीच अपनी यात्रा के दौरान, यह ट्रेन 9 रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। ये स्टेशन हैं: भरूच, वडोदरा, आणंद, मणिनगर, असरवा, हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर।

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत: कोच की संख्या और समय

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस में 8 कोच होंगे। ट्रेन नंबर 26903 सूरत से सुबह 06:10 बजे चलेगी और दोपहर 13:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन नंबर 26904 उदयपुर सिटी से दोपहर 15:35 बजे चलेगी और रात 23:00 बजे सूरत पहुंचेगी।

स्क्रीनशॉट 2026-09-02 210246

स्क्रीनशॉट 2026-09-02 210340

Mumbai Local Train update: मुंबईकरों के लिए खुशखबरी! अब दौड़ेगी वंदे मेट्रो AC लोकल ट्रेन, जानें कब तक तैयार हो जाएगी ये पूरी फ्लीट

Mumbai Local Train update: मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई को जल्द ही 238 नई वंदे मेट्रो एसी लोकल ट्रेनें (2856 कोच) मिलने जा रही हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन ने ऐलान किया है कि इन नई एसी लोकल ट्रेनों को भारतीय रेलवे की ही तीन अलग-अलग प्रोडक्शन यूनिट में तैयार किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एमआरवीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विलास वाडेकर ने बताया है कि रेलवे की तीन मैन्युफैक्चरिंग सर्विस में बनने वाली पहली 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेन 2027 में मिल जाएगी जबकि 238 ट्रेनों की पूरी फ्लीट 2030 तक उपलब्ध करा दी जाएगी।

19,293 करोड़ रुपये की लागत आएगी

एमआरवीसी के मुताबिक मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MUTP) 3 के तहत खरीदी जा रही इन 238 वंदे मेट्रो उपनगरीय ट्रेनों (2,856 कोच) के रोलिंग-स्टॉक की अनुमानित लागत 19293 करोड़ रुपये है। इन 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेनों का निर्माण रेलवे की तीन प्रमुख इकाइयों इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में किया जाएगा।

पहले इन ट्रेनों को निजी या विदेशी कंपनियों के माध्यम से खरीदने और उनके जीवनकाल के रखरखाव के लिए इंटरनेशनल टेंडर मंगाए गए। इसे लेकर मन लायक रिस्पॉन्स नहीं मिलने की वजह से सरकार ने इसे अपने कारखानों में बनाने का फैसला लिया है।

अंतरराष्ट्रीय टेंडर में आ रही थीं दिक्कतें, रेल मंत्री ने बताया नया प्लान

प्रक्रिया में हुए बदलाव को लेकर बुधवार शाम जारी एक वीडियो संदेश में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पुरानी खरीद प्रक्रिया में कई समस्याएं थीं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने अब इन ट्रेनों का निर्माण अपनी खुद की तीन उत्पादन इकाइयों में करने का निर्णय लिया है। रेल मंत्री ने कहा कि पुरानी योजना के तहत पूरी खरीद 2030 में जाकर पूरी होने वाली थी, जो हमें कतई स्वीकार्य नहीं थी। इसीलिए आज यह नया फैसला लिया गया है कि इनका उत्पादन भारत सरकार की तीन उत्पादन इकाइयों ICF, RCF और MCF में किया जाएगा, ताकि पहली लोकल ट्रेन 2027 तक हर हाल में पटरी पर आ जाए।

एमआरवीसी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, पुरानी खरीद प्रक्रिया के तहत अगर काम होता तो सीरीज प्रोडक्शन शुरू होने में ही करीब तीन साल लग जाते। इस वजह से पहली ट्रेन 2030 में मिलती और पूरी फ्लीट 2034 तक जाकर तैयार हो पाती। जून 2023 में एमआरवीसी ने 238 एसी लोकल ट्रेनों की खरीद और उनके 35 वर्षों के रखरखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय बोलियां आमंत्रित की थीं। मई 2023 में रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी इस टेंडर में दो साल का समय प्रोटोटाइप ट्रेन बनाने के लिए और उसके बाद औसतन 50 ट्रेनें प्रति वर्ष की दर से पांच साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

सफल बोलीदाता को पालघर जिले के वणगांव और रायगढ़ जिले के भिवपुरी में नए रखरखाव डिपो स्थापित करने, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और 35 वर्षों के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने की शर्त रखी गई थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर 22000 करोड़ का निवेश, सफर होगा आरामदायक

एमआरवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए संशोधित विनिर्माण कार्यक्रम से इन एसी ट्रेनों को मुंबई रेल नेटवर्क के नए कॉरिडोर और क्षमता विस्तार कार्यों के शुरू होने के साथ ही पटरी पर उतारा जा सकेगा। क्षमता विस्तार कार्यों में लगभग ₹22,000 करोड़ का भारी निवेश किया जा रहा है। इसमें नए कॉरिडोर बनाना, अतिरिक्त रेलवे लाइनें बिछाना, 15-कोच वाली ट्रेनों को चलाने के लिए प्लेटफॉर्मों की लंबाई बढ़ाना, यार्डों का पुनर्गठन करना और नेटवर्क को मजबूत करने वाले कई काम शामिल हैं।

ये भी पढे़ं- Explainer: क्या इस्तीफा देकर बच निकले पूर्व जज यशवंत वर्मा? जानें संसद में रिपोर्ट पेश होने के बाद अब क्या होगी कार्रवाई

IRCON Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी का मुनाफा 44% घटा, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़ा

IRCON Q1 Results: रेलवे सेक्टर की सरकारी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी IRCON International Ltd ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 43.6% घटकर ₹92.74 करोड़ रह गया।

पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹164.5 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में बढ़ोतरी हुई।

IRCON का रेवेन्यू 9.5% बढ़ा

IRCON का कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से रेवेन्यू 9.5% बढ़कर ₹1,955.8 करोड़ हो गया। पिछले साल की जून तिमाही में यह ₹1,786.3 करोड़ था। EBITDA भी 2.6% बढ़कर ₹205.17 करोड़ रहा। एक साल पहले यह करीब ₹200 करोड़ था।

हालांकि, EBITDA मार्जिन में गिरावट आई। यह पिछले साल के 11.19% से घटकर 10.49% रह गया।

ISTPL का टोल कलेक्शन अधिकार खत्म

IRCON ने बताया कि उसकी ज्वाइंट वेंचर कंपनी Ircon-Soma Tollway Pvt. Ltd. (ISTPL) का टोल कलेक्शन अधिकार 14 मई को खत्म हो गया। यह अधिकार बढ़ाई गई कंसेशन अवधि पूरी होने के बाद खत्म हुआ। ISTPL में IRCON की 50% हिस्सेदारी है। अब हाईवे से जुड़े एसेट्स नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को सौंपे जा रहे हैं।

30 जून तक ISTPL की नेटवर्थ करीब ₹216.17 करोड़ थी। इसमें IRCON का हिस्सा करीब ₹108.09 करोड़ है। कंपनी ने कहा कि उसे ज्वाइंट वेंचर में अपने निवेश की वैल्यू में किसी तरह की कमी यानी इम्पेयरमेंट की उम्मीद नहीं है।

दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी अपडेट

रेल मंत्रालय ने Bastar Railway Pvt. Ltd. को बंद करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। कंपनी के मुताबिक, इससे जुड़ी कानूनी और दूसरी प्रक्रियाएं चल रही हैं। IRCON ने यह भी बताया कि उसने MCL प्रोजेक्ट के फेज I और फेज II को रेल मंत्रालय को सौंपने का फैसला किया है।

इसके अलावा, 23 जून को IRCON ने बताया था कि Badri Rai & Company के साथ उसके ज्वाइंट वेंचर को ₹763.1 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ऑर्डर त्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन ने अगरतला में स्मार्ट-ग्रिड प्रोजेक्ट के लिए दिया है।

शेयर में 1.32% की गिरावट

पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.14% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 24.34% नीचे आया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.87 हजार करोड़ रुपये है।

Gland Pharma के शेयर बन सकते हैं रॉकेट, नोमुरा ने दिया ₹3330 का टारगेट प्राइस

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ट्रेन को टेम्पो बना दिया! परिवार को चढ़ाने के लिए क्रॉसिंग पर रुकी ट्रेन? वायरल वीडियो देखकर इंटरनेट यूजर्स ने रेलवे से मांगा जवाब

बिहार के पश्चिम चंपारण में रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वजह है वहां दिखाई देने वाला एक ऐसा नजारा, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की होगी। जहां आमतौर पर लोग ट्रेन के गुजरने तक इंतजार करते हैं, वहीं इस घटना में एक परिवार अचानक ट्रेन की तरफ बढ़ता नजर आया। देखते ही देखते परिवार के चार सदस्य ट्रेन के करीब पहुंचे और उसमें सवार हो गए। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह पूरा घटनाक्रम काफी हैरान करने वाला था। किसी ने इस पल को कैमरे में कैद कर लिया और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।

वीडियो सामने आने के बाद लोग तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं और इस असामान्य घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि पूरा मामला किसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर नहीं, बल्कि रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ।

क्रॉसिंग पर इंतजार कर रहा था परिवार

बताया जा रहा है कि यह घटना 8 अगस्त को कुमारबाग रेलवे स्टेशन के पास हुई। वीडियो में रेलवे क्रॉसिंग बंद दिखाई दे रही है और दूसरी तरफ कई वाहन ट्रेन के निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इसी दौरान चार लोगों का एक परिवार क्रॉसिंग के पास खड़ा नजर आता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले शख्स ने दावा किया कि परिवार काफी देर से वहीं मौजूद था और करीब एक घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रहा था।

फोन के बाद कुछ ऐसा हुआ कि सब चौंक गए

वीडियो में परिवार के एक सदस्य को फोन पर बातचीत करते हुए भी देखा गया। रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति को लगा कि शायद वह किसी परिचित से बात कर रहा था और उसी संपर्क के जरिए ट्रेन को वहां रुकवाने की व्यवस्था की गई। कुछ ही देर बाद मुजफ्फरनगर-नरकटियागंज DEMU ट्रेन वहां पहुंची। ट्रेन पहले धीमी हुई और फिर रेलवे क्रॉसिंग के पास पूरी तरह रुक गई। बस फिर क्या था, परिवार के चारों सदस्य तुरंत ट्रेन के एक कोच के दरवाजे की तरफ बढ़े और उसमें चढ़ गए।

गेटमैन भी देखता रह गया पूरा नजारा

वीडियो में रेलवे क्रॉसिंग पर मौजूद गेटमैन भी इस पूरी घटना को देखते हुए दिखाई देता है। ट्रेन के रुकते ही परिवार के लोगों का तेजी से कोच में चढ़ना वहां मौजूद लोगों के लिए भी असामान्य दृश्य था। वीडियो बनाने वाले शख्स ने इसी बात को लेकर रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या इस तरह रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन रोककर यात्रियों को सवार करने की अनुमति है।

‘ट्रेन को टेंपो बना दिया’

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने घटना पर हैरानी जताई, तो कुछ ने पूरे मामले पर मजेदार अंदाज में टिप्पणी की। एक यूजर ने लिखा, “ट्रेन को टेंपो बना दिया।” वहीं दूसरे ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि यहां कुछ भी हो सकता है। कुछ यूजर्स ने सीधे लोको पायलट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। एक कमेंट में तो लोको पायलट को निलंबित करने तक की बात कही गई।

रेलवे से जांच की मांग

मामले को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने रेलवे और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए जांच की मांग की। एक यूजर ने रेल मंत्रालय से सवाल किया कि आखिर सड़क वाले रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन को यात्रियों के चढ़ने के लिए कैसे रोका गया। एक अन्य व्यक्ति ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह आम लोगों का समय बर्बाद करना उचित नहीं है।

वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल

फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है कि ट्रेन वहां किस कारण रुकी थी और परिवार के सदस्यों को चढ़ने की अनुमति किस परिस्थिति में मिली। हालांकि, इस वीडियो ने रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के अचानक रुकने और यात्रियों के इस तरह सवार होने को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग अब पूरे मामले की जांच और स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहे हैं।

Video: घर से काम करना इतना भी आसान नहीं! महिला ने बताया WFH का वो नुकसान, जिसकी कोई बात नहीं करता

ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका

Indian Railways Reservation System: इंडियन रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए रिजर्वेशन को तेज एवं सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) शुरू करने जा रहा है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित PRS लगभग चार दशकों से रेलवे रिजर्वेशन की रीढ़ रहा है। 1986 में शुरू किए गए इस सिस्टम ने पुराने मैनुअल रिजर्वेशन सिस्टम की जगह ली थी।

तब से यह ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने के लिए विकसित हुआ है। मई में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने घोषणा की थी कि 40 साल पुराने PRS (Passenger Reservation System) सिस्टम को अगस्त से शुरू करके चरणों में अपग्रेड किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग, सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC और यात्रियों की पूछताछ से जुड़ी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि नया PRS मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सकेगा। रेलवे के मुताबिक, नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा।

जबकि मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। इसी सिस्टम के जरिए टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और यात्रियों की पूछताछ जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। अब रेलवे इस पुराने सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले PRS से बदलने की तैयारी कर रहा है।

भारी ट्रैफिक को संभालने की क्षमता

तत्काल टिकट के समय IRCTC वेबसाइट पर अचानक बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम हो सकता है। Indianexpress.com से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पब्लिक रिलेशंस (PR) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि नए सिस्टम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च की गई IRCTC बीटा वेबसाइट इसी बदलाव का हिस्सा है।

अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा। पुराने PRS को पूरी तरह से बदलने से पहले नए सिस्टम का अलग-अलग यूजर लोड स्तरों पर चरणों में टेस्ट किया जाएगा। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नए यूजर-फ्रेंडली लुक और फील को चरण-दर-चरण लागू करने में लोड-आधारित टे्ट शामिल होगा, क्योंकि हम पुराने PRS से नए PRS की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारतीय रेलवे में अभी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम क्या है?

PRS एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसका उपयोग भारतीय रेलवे रिजर्व-टिकटों के मैनेज के लिए करता है। यह यात्रियों को टिकट बुक करने, बदलने और रद्द करने की सुविधा देता है। साथ ही सीट आवंटन, वेटलिस्ट, RAC स्टेटस, रिजर्वेशन चार्ट और यात्री पूछताछ को भी संभालता है। यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन सेंटरों को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इससे टिकट रिजर्वेशन की प्रक्रिया आसान और अधिक कुशल हो जाती है।

PRS ने रेलवे टिकट बुकिंग को कैसे बदला?

PRS ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ले लिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ। यह एक राष्ट्रव्यापी रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म बन गया। इससे यात्री कंट्री-वाइड नेटवर्क फॉर कंप्यूटराइज्ड एन्हांस्ड रिजर्वेशन एंड टिकटिंग (CONCERT) के माध्यम से देश भर में अलग-अलग जगहों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।

फिलहाल यात्री रेलवे रिजर्वेशन काउंटर, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से रिजर्वेशन कर सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ-साथ RailOne ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इससे यात्री कहीं से भी टिकट बुक कर सकते हैं।

अगस्त से शुरू हुआ बदलाव, धीरे-धीरे होगा पूरा माइग्रेशन

रेलवे ने मई में घोषणा की थी कि करीब चार दशक पुराने PRS को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। इसका काम अगस्त से शुरू किया जाएगा। धर्मेंद्र तिवारी के मुताबिक, नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू हो चुका है। रेलवे इसे एक साथ पूरी तरह बदलने के बजाय धीरे-धीरे और अलग-अलग चरणों में लागू कर रहा है।

पहले नए सिस्टम को अलग-अलग स्तर के यूजर लोड पर टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जैसे-जैसे सिस्टम स्थिर और सक्षम साबित होगा। फिर पुराने PRS से नए PRS की ओर माइग्रेशन बढ़ाया जाएगा। रेलवे के मुताबिक, नए सिस्टम के यूजर इंटरफेस और सुविधाओं को भी धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा रहा है।

तत्काल टिकट वालों को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग को लेकर होती है। टिकट विंडो खुलते ही लाखों लोग एक साथ बुकिंग की कोशिश करते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट या ऐप पर दबाव बढ़ जाता है। IRCTC के अनुसार, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला।

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल टिकट बुकिंग में 5 प्रतशित से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

प्रति मिनट 1.5 लाख की होगी बुकिंग

रेल मंत्रालय के अनुसार, अपग्रेड किया गया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। जबकि मौजूदा सिस्टम में यह क्षमता लगभग 32,000 टिकट की है। यह प्रति मिनट 40 लाख से ज्यादा पूछताछ को भी प्रोसेस करेगा। जबकि अभी यह संख्या लगभग 4 लाख है। नए सिस्टम में टिकट बुकिंग और पूछताछ के लिए कई भाषाओं वाला और इस्तेमाल में आसान इंटरफेस होगा। इसे रेलवे रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा स्केलेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता होगी

रेल मंत्रालय के अनुसार:-

मौजूदा PRS: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट क्षमता है।

नया PRS: 1.5 लाख से ज्यादा टिकट काटने की प्रति मिनट क्षमता होगी।

मौजूदा पूछताछ क्षमता: करीब 4 लाख प्रति मिनट होगी।

नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से ज्यादा प्रति मिनट होगी।

इसका मतलब है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन, सीट और रिजर्वेशन से जुड़ी बड़ी संख्या में यात्रियों की पूछताछ भी एक साथ संभाल सकेगा।

देशभर में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का दबाव कितना बढ़ गया है?

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए गए। इससे साफ है कि रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में पुराने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

नई व्यवस्था में मिलेगा ज्यादा आसान और मल्टी-लैंग्वेज इंटरफेस

नए PRS में यात्रियों के लिए ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस देने की तैयारी है। यानी टिकट बुकिंग और पूछताछ को ज्यादा आसान बनाने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। नए सिस्टम को ज्यादा स्केलेबल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ने पर भी सिस्टम पर अचानक अत्यधिक दबाव न पड़े।

सिर्फ PRS ही नहीं, रेलवे का पूरा डिजिटल नेटवर्क हो रहा आधुनिक

CRIS ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें UTS, NTES, IRCTC Rail Connect, RailOne, RailMadad, CoachMitra, Rail Sugam और Rail Rajbhasha शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और रेलवे से जुड़ी कई अन्य रेलवे से जुड़ी सर्विस मिलती हैं। नए PRS और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर टेक्नोलॉजी के तालमेल से रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

40 साल पुराने सिस्टम से Next-Generation PRS तक

भारतीय रेलवे का PRS चार दशक पहले मैनुअल रिजर्वेशन की जगह इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग व्यवस्था लेकर आया था। अब वही सिस्टम एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अगर चरणबद्ध तरीके से हो रहा यह माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में ट्रेन टिकट बुकिंग ज्यादा तेज, ज्यादा स्थिर और ज्यादा डिजिटल हो सकती है। यानी रेलवे के इस बदलाव का असली असर सिर्फ वेबसाइट की स्पीड पर नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के टिकट बुकिंग अनुभव पर दिखाई दे सकता है।

रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों ने जून 2025 और जून 2026 के बीच PRS के ज़रिए 65.08 करोड़ रिजर्व्ड टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (यानी 89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। IRCTC ने कहा कि 15 जुलाई को अपनी बीटा वेबसाइट लॉन्च करने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार हुआ है।

ये भी पढ़ें- अब होर्मुज की टेंशन खत्म! रूस ने चली ऐसी चाल कि भारत तक बिना समुद्र पार किए पहुंचेगा माल, मॉस्को से नई दिल्ली तक बनेगी रेल लाइन?

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े (15-15 दिन के समय) की तुलना करने पर पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। पांच मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।