दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर बिग अपडेट, मंत्रालय को सौंपा गया DPR, सारी डिटेल जानिए

Delhi-Patna Bullet Train Corridor: देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की तैयारियां तेज हो गई हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेल मंत्रालय को सौंप दी है। करीब 1,557 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है> जबकि दूसरे चरण में इसे वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा।

DPR के बाद ग्राउंड सर्वे की तैयारी तेज

DPR सौंपे जाने के बाद दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल लाइन के ग्राउंड सर्वे की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। NHSRCL ने 7 सितंबर को वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की तैनाती को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत तीन ऑफिसर्स ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और तीन एडिशनल जनरल मैनेजर की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रक्रिया अगले 30 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। दिल्ली, नोएडा, नई दिल्ली, आगरा, लखनऊ, वाराणसी और पटना में तैनात अधिकारियों को परियोजना के जमीनी कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक चलेगी ट्रेन

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 813 किलोमीटर बताई गई है। दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होने वाली यह लाइन नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।

दूसरे चरण में वाराणसी से पटना और इसके बाद सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल लाइन का विस्तार प्रस्तावित है। पूरे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की लंबाई करीब 1,557 किलोमीटर होगी।

इन शहरों से होकर गुजरेगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

‘दैनिक जागरण’ के मुताबिक, प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी रूट में दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या के लिए लिंक लाइन, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी को जोड़े जाने की योजना है। इसके आगे वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी सेक्शन के जरिए बिहार और पश्चिम बंगाल को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

सफर का समय होगा काफी कम

प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से विभिन्न रूटों पर यात्रा का अनुमानित समय इस प्रकार बताया गया है:-

  • दिल्ली-वाराणसी का सफर 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा।
  • वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा।
  • पटना-सिलीगुड़ी के बीच करीब 2 घंटे लगेंगे।
  • दिल्ली-पटना के बीच 4 घंटे 41 मिनट का समय लगेगा।
  • दिल्ली-सिलीगुड़ी के बीच 6 घंटे 45 मिनट लगेगा।

इस हिसाब से दिल्ली से पटना की यात्रा करीब 4 घंटे 41 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 6 घंटे 45 मिनट लग सकते हैं।

बिहार के इन शहरों को मिलेगा फायदा

  • हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में बिहार के कई शहरों को जोड़ने की योजना है। संभावित स्टेशनों में बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं।
  • बिहार में इस परियोजना के लिए एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाने की योजना है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 1,900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है।
  • पटना जिले में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए करीब 21 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। स्टेशन के लिए शुरुआती तौर पर फुलवारी शरीफ में AIIMS पटना के पास जमीन का निरीक्षण किया गया था।
  • इसके अलावा NHSRCL की सर्वे टीम ने बिहटा के पास एक वैकल्पिक स्थान का भी सुझाव दिया है।

जमीन अधिग्रहण और सर्वे का काम जारी

उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज और वाराणसी समेत विभिन्न जिलों में जमीन अधिग्रहण से जुड़े प्रस्तावों पर काम चल रहा है। बिहार में ग्राउंड सर्वे और मिट्टी की जांच का काम भी जारी है। फाइनल मंजूरी मिलने के बाद DPR को कैबिनेट के समक्ष पेश करने की तैयारी है। पिछले बजट में सरकार ने वाराणसी कॉरिडोर समेत सात बुलेट ट्रेन रूट को हाई-प्रायोरिटी प्रोजेक्ट के रूप में चिह्नित किया था।

280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें

  • भारत में स्वदेशी तकनीक से बुलेट ट्रेन के कोच तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इसके अलावा जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन के कोच 2029-30 तक भारत में आने की बात कही गई है। इनकी अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।
  • जापान और चीन मैग्लेव ट्रेनों पर भी काम कर रहे हैं, जिनकी रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है।
  • वहीं, रूस ने भारत को ‘Ivolga’ ट्रेन की आपूर्ति की पेशकश की है, जिसकी गति 360 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।

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Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

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Bullet Train: जेवर से लखनऊ सिर्फ 1 घंटा 40 मिनट में! बुलेट ट्रेन के इस प्लान से यूपी से दिल्ली का डिस्टेंस गजब रफ्तार में होगा तय

Bullet Train: उत्तर प्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली के बीच का सफर आने वाले समय में गजब की रफ्तार से तय होने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जेवर में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बेहद अहम और बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में यात्रा का समय बेहद कम हो जाएगा।

केवल 1 घंटे 40 मिनट में जेवर से लखनऊ का सफर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया कि इस प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह जेवर से लखनऊ का सफर पैसेंजर्स सिर्फ 1 घंटा 40 मिनट में तय कर सकेंगे। परियोजना की रफ्तार और महत्व पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैसे गंगा बहती है, ठीक उसी तरह बुलेट ट्रेन भी दौड़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी की पूरी तस्वीर बदल देगा और राज्य के औद्योगिक व आर्थिक विकास को एक बहुत बड़ा बूस्ट देगा।

जेवर बनेगा उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली और सेमीकंडक्टर हब

आपको बता दें कि जेवर को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यमुना सिटी, जेवर में 6750 करोड़ रुपये के कुल निवेश वाले दो बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स का संयुक्त रूप से शिलान्यास किया। इन प्रोजेक्ट्स से क्षेत्र में करीब 3000 नौकरियां पैदा होंगी।

इन दो बड़ी परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

ASCENT-K Circuit (3250 करोड़ रुपये का निवेश): यह दक्षिण कोरिया की केसीसी (KCC) के साथ एक जॉइंट वेंचर है। यहां आधुनिक हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स का निर्माण किया जाएगा। Amber Enterprises (3500 करोड़ रुपये की फैसिलिटी): इस प्लांट में HVAC कंपोनेंट्स और पीसीबी असेंबली का निर्माण किया जाएगा।

पीसीबी आयात पर घटेगी निर्भरता, मजबूत होगा रुपया

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने भारत की बढ़ती घरेलू विनिर्माण क्षमताओं की तारीफ करते हुए कहा कि देश अब इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की केवल असेम्बलिंग करने से आगे बढ़कर उनके कोर कंपोनेंट्स बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत हर साल लगभग 40000 करोड़ रुपये के पीसीबी का आयात करता रहा है। अब घरेलू उत्पादन से इस आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी। यहां बनाए जाने वाले एडवांस्ड मल्टी-लेयर पीसीबी (कुछ 20 से 22 लेयर वाले) आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। जिसे हम कभी आयात करते थे, अब उसे दुनिया के लिए मेक इन इंडिया करेंगे।

जेवर में बनने वाला हर एक पीसीबी विदेशी मुद्रा की बचत करेगा, रुपये को मजबूत करेगा और भारत के भुगतान संतुलन में सुधार लाएगा। हजारों करोड़ रुपये के इस निवेश के चलते जेवर क्षेत्र उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में उभरने के लिए तैयार है। अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि उनके विजन के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने का सपना उत्तर प्रदेश में साकार हो रहा है।