देश की पहली बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट! 2027 में खुलेगा सूरत-वापी का 100 किमी का स्ट्रेच, स्क्वीज टेस्ट को लेकर आई ये जानकारी

भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर देशवासियों का इंतजार अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की प्रगति पर एक बड़ा अपडेट साझा करते हुए बताया है कि देश की पहली बुलेट ट्रेन का औपचारिक उद्घाटन साल 2027 में तय किया गया है। इसके तहत सबसे पहले गुजरात के सूरत और वापी के बीच 100 किलोमीटर लंबे सेक्शन की शुरुआत की जाएगी। इस रूट पर निर्माण कार्य बहुत ही तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इस पूरे सेक्शन का काम इस साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

अगले साल मई-जून में पटरी पर उतरेगी ट्रेन, टेस्ट कोच बनकर तैयार

परियोजना के परीक्षण और सुरक्षा पहलुओं की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन का पहला टेस्ट कोच पिछले हफ्ते ही बनकर तैयार हो चुका है। योजना के मुताबिक अगले साल मई-जून तक ट्रेन को औपचारिक टेस्टिंग के लिए पटरी पर उतार दिया जाएगा। ट्रेन को ट्रैक पर उतारने से पहले इसके विभिन्न तकनीकी और यांत्रिक परीक्षण किए जा रहे हैं। ट्रायल और टेस्टिंग की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 2027 में इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन सेवा का उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

क्या होता है स्क्वीज टेस्ट और क्लाइमेट टेस्ट

ट्रेन कोच की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए इसे कई कड़े परीक्षणों से गुजारा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, कोच का सबसे पहला और महत्वपूर्ण परीक्षण स्क्वीज टेस्ट होता है। इस टेस्ट में कोच के ढांचे पर भारी दबाव (प्रेशर) डाला जाता है, जिससे उसकी मैकेनिकल स्ट्रेंथ यानी यांत्रिक मजबूती और संरचनात्मक सहनशक्ति के फीचर्स की बारीकी से जांच की जा सके। स्क्वीज टेस्ट में खरा उतरने के बाद कोच क ‘क्लाइमेट टेस्ट किया जाएगा। इस टेस्ट के दौरान कोच को पानी में रखने के साथ-साथ अत्यधिक उच्च और निम्न तापमान की विपरीत परिस्थितियों में रखकर परखा जाएगा। इन सभी कड़े टेस्ट में सफल होने के बाद ही कोच की इंटीरियर फर्निशिंग और बाकी के अन्य कोचों के निर्माण का काम पूरा किया जाएगा।

508 किलोमीटर लंबा है मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर

आपको बता दें कि भारत की यह पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे इस पूरे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस पूरे रूट पर कुल 12 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों को संबंधित शहर की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर खूबसूरत और आधुनिक रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जहां यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मिलेगी।

2017 में रखी गई थी इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की नींव

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी, जिसे भारत के ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक मील का पत्थर माना गया। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों यानी मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को कई घंटे घटाना ही नहीं है बल्कि भारतीय रेल यात्रियों को विश्वस्तरीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के साथ हाई-स्पीड यात्रा का एक नया और शानदार अनुभव प्रदान करना भी है।

Mumbai Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी! भारत की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन ने मुंबई में शुरू की अंडरग्राउंड टनलिंग

भारत के पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस प्रोजेक्ट के तहत मुंबई में अंडरग्राउंड टनलिंग (भूमिगत सुरंग बनाने) का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। एचटी के मुताबिक 5 जुलाई को देश की सबसे बड़ी रेलवे टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने विक्रोली से बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन की तरफ जमीन को चीरते हुए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए एक औपचारिक लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

इसकी अध्यक्षता केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करने वाले थे। मुंबई में मूसलाधार बारिश के चलते जारी किए गए ‘रेड अलर्ट’ के कारण इस औपचारिक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा लेकिन मशीन ने तय समय पर सुरंग बनाने का अपना काम शुरू कर दिया।

13.6 मीटर व्यास वाली देश की सबसे बड़ी रेलवे TBM

सुरंग बनाने के इस बेहद जटिल काम में 13.6 मीटर व्यास वाली एक विशाल मिक्सशील्ड टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भारत में किसी भी रेलवे टनलिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में से एक है। इस महाकाय मशीन का कुल वजन लगभग 3100 टन है और इसकी लंबाई 96 मीटर है। यह मशीन एक 6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग खोदेगी। इसके भीतर से ही बुलेट ट्रेन की अप और डाउन दोनों लाइनें गुजरेंगी। यह टनल बुलेट ट्रेन रूट के मुंबई में बनाए कुल 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा है।

जमीन से 56 मीटर नीचे से हुआ लॉन्च, दो तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल

रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड में से 16 किलोमीटर का हिस्सा घनसोली के सांवली से लेकर बीकेसी) के बीच का है। इसे टनल बोरिंग मशीनों के जरिए खोदा जा रहा है। बाकी 5 किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक के जरिए पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस नई टीबीएम को विक्रोली में जमीन की सतह से 56 मीटर नीचे बनाए गए एक विशाल शाफ्ट से लॉन्च किया गया है। इसने अब बीकेसी की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है।

क्या है मिक्सशील्ड तकनीक और इसकी खासियतें?

इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जा रही मिक्सशील्ड टेक्नोलॉजी को विशेष रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक मिश्रित मिट्टी की स्थिति और उन इलाकों में जहां भूजल का दबाव बहुत अधिक होता है, वहां पूरी सुरक्षा के साथ काम करने में सक्षम है। टनलिंग के दौरान जमीन धंसने या जमीन के ऊपर होने वाली हलचल और व्यवधान को यह तकनीक बिल्कुल न्यूनतम रखती है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक तरफ सुरंग की खुदाई करती जाती है और साथ ही साथ प्रीकास्ट कंक्रीट लाइनिंग सेगमेंट्स को अपनी जगह पर फिट भी करती जाती है। इससे निर्माण की गति काफी तेज हो जाती है और सुरक्षा के मानक भी बेहतर होते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और महापे में बना कास्टिंग यार्ड

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस पूरे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा लॉन्च शाफ्ट तैयार किया है। इसके साथ ही वहां स्लरी और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, एक समर्पित पावर सबस्टेशन और अन्य आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। सुरंग की खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बेहद संवेदनशील निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। इनमें सेटलमेंट मार्कर्स, टिल्ट मीटर्स, सीस्मोग्राफ और 3D मॉनिटरिंग टारगेट शामिल हैं, जो पल-पल की रिपोर्ट दर्ज कर रहे हैं। सुरंग की दीवारों को मजबूती देने के लिए जरूरी करीब 77000 प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट्स का निर्माण करने के लिए महापे में 11.17 हेक्टेयर का एक विशाल कास्टिंग यार्ड स्थापित किया गया है।

क्या है इस टनलिंग प्रोजेक्ट की डेडलाइन?

रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई समयसीमा के अनुसार, इस अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विक्रोली से बीकेसी साल 2027 की शुरुआत तक और विक्रोली से घनसोली को मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा।

बुलेट ट्रेन को लेकर भारत-जापान की बड़ी डील! 2027 की टाइमलाइन और 7000 किमी नेटवर्क पर काम अब दौड़ेगा

भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर कोलैबरेशन को बड़ा पुश देते हुए जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना के प्राथमिकता वाले सेक्शन पर साल 2027 तक कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम साने ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है। इसके मुताबिक यह फ्लैगशिप बुलेट ट्रेन परियोजना दोनों नेताओं के बीच एक व्यापक संयुक्त समझौते का मुख्य आधार है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस नेटवर्क में E10 ट्रेनों को शामिल करने के मील के पत्थर जैसे लक्ष्य को भी स्वीकार किया।

7000 किलोमीटर के नेशनल नेटवर्क के लिए पीएम मोदी का न्यौता

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत के भावी हाई-स्पीड कॉरिडोर में भागीदारी के अवसर तलाशने के लिए स्पष्ट रूप से आमंत्रित किया है। इसका उद्देश्य 7000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के भारत के व्यापक विज़न को हकीकत में बदलना है। इस ट्रांजिट अलाइनमेंट को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक एमओयू साइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जापान की हाइटेक मोबिलिटी तकनीकों को भारत की बाजार क्षमता और मानव संसाधनों के साथ जोड़ना है।

शिंकेन्सन तकनीक से बदल जाएगी भारतीय रेलवे की तस्वीर

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के प्रयासों में एक बड़ा मील का पत्थर है। देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में यह इंटर सिटी मोबिलिटी को पूरी तरह से बदलने और घरेलू रेलवे क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से पूरी की जा रही है। यह पूरा कॉरिडोर जापान की प्रसिद्ध शिंकेन्सन तकनीक और परिचालन मानकों का उपयोग करके डेवलप कियाजा रहा है। इसमें ट्रैक्शन, इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन्स के लिए हाइटेक टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है।

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का रणनीतिक विकास

रेलवे के बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर दोनों नेताओं ने ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक लचीले भारत-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया है। जापान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क नेटवर्क, पुलों और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए मजबूत समर्थन का संकल्प लिया। दोनों देशों ने इस क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी और बिम्सटेक भागीदारों से जोड़ने वाली औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं को विकसित करने की भी प्रतिबद्धता जताई।

इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी हो रही है तेज प्रगति

दोनों देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए जापानी विकास सहायता से जुड़े चार अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी लगातार प्रगति हो रही है:

  • मुंबई मेट्रो लाइन 11
  • बेंगलुरु मेट्रो फेज 3
  • महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा का बुनियादी ढांचा
  • पंजाब में सस्टेनेबल हॉर्टिकल्चर
  • पर्यटन, संस्कृति और जापानी भाषा को बढ़ावा

इन आर्थिक और ढांचागत समझौतों को मजबूती देने के लिए दोनों देश लोगों के बीच आपसी संपर्क और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ा रहे हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि साल 2025 में दोनों देशों के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों की संख्या 540000 को पार कर गई है। उन्होंने द्विपक्षीय पर्यटन को बढ़ावा देने और कांसुलर मामलों पर बातचीत का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत में निहंगो पार्टनर्स कार्यक्रम के माध्यम से जापानी भाषा की शिक्षा को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। साथ ही युवाओं के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने में एनिमे, मंगा, गेमिंग और फिल्मों जैसे रचनात्मक उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

भारत के राज्यों और जापानी प्रांतों के बीच दोस्ती का नया नेटवर्क

इस रिश्ते को जमीनी स्तर पर और ठोस बनाने के लिए सब-नेशनल डिप्लोमेसी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्थानीय आर्थिक नेटवर्क बनाने में भारतीय राज्यों और जापानी प्रान्तों और नगर पालिकाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच इंडिया-जापान गवर्नर्स नेटवर्क फॉर फ्रेंडशिप एंड एक्सचेंज की स्थापना का स्वागत किया गया। वर्तमान में इन क्षेत्रीय जोड़ियों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग सक्रिय है-

  • उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रान्त
  • आंध्र प्रदेश और टोयामा प्रान्त
  • गुजरात और शिज़ुओका प्रान्त
  • अहमदाबाद और हमामात्सू शहर
  • महाराष्ट्र और वाकायामा प्रान्त
  • केरल और सैन’इन क्षेत्र
  • तमिलनाडु और एहिमे प्रान्त
  • दिल्ली और फुकुओका प्रान्त
  • तेलंगाना और किताक्युशु शहर

यह भी पढ़ें: Delhi Electricity Cut 4 July: शनिवार को दिल्ली के इन इलाकों में रहेगी बिजली कटौती की समस्या, देखें पूरा शेड्यूल

Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

PNB Q1 Update: सरकारी बैंक का ग्लोबल बिजनेस 10% बढ़ा, डिपॉजिट और लोन में भी उछाल