Mumbai Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी! भारत की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन ने मुंबई में शुरू की अंडरग्राउंड टनलिंग

भारत के पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस प्रोजेक्ट के तहत मुंबई में अंडरग्राउंड टनलिंग (भूमिगत सुरंग बनाने) का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। एचटी के मुताबिक 5 जुलाई को देश की सबसे बड़ी रेलवे टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने विक्रोली से बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन की तरफ जमीन को चीरते हुए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए एक औपचारिक लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

इसकी अध्यक्षता केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करने वाले थे। मुंबई में मूसलाधार बारिश के चलते जारी किए गए ‘रेड अलर्ट’ के कारण इस औपचारिक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा लेकिन मशीन ने तय समय पर सुरंग बनाने का अपना काम शुरू कर दिया।

13.6 मीटर व्यास वाली देश की सबसे बड़ी रेलवे TBM

सुरंग बनाने के इस बेहद जटिल काम में 13.6 मीटर व्यास वाली एक विशाल मिक्सशील्ड टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भारत में किसी भी रेलवे टनलिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में से एक है। इस महाकाय मशीन का कुल वजन लगभग 3100 टन है और इसकी लंबाई 96 मीटर है। यह मशीन एक 6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग खोदेगी। इसके भीतर से ही बुलेट ट्रेन की अप और डाउन दोनों लाइनें गुजरेंगी। यह टनल बुलेट ट्रेन रूट के मुंबई में बनाए कुल 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा है।

जमीन से 56 मीटर नीचे से हुआ लॉन्च, दो तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल

रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड में से 16 किलोमीटर का हिस्सा घनसोली के सांवली से लेकर बीकेसी) के बीच का है। इसे टनल बोरिंग मशीनों के जरिए खोदा जा रहा है। बाकी 5 किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक के जरिए पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस नई टीबीएम को विक्रोली में जमीन की सतह से 56 मीटर नीचे बनाए गए एक विशाल शाफ्ट से लॉन्च किया गया है। इसने अब बीकेसी की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है।

क्या है मिक्सशील्ड तकनीक और इसकी खासियतें?

इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जा रही मिक्सशील्ड टेक्नोलॉजी को विशेष रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक मिश्रित मिट्टी की स्थिति और उन इलाकों में जहां भूजल का दबाव बहुत अधिक होता है, वहां पूरी सुरक्षा के साथ काम करने में सक्षम है। टनलिंग के दौरान जमीन धंसने या जमीन के ऊपर होने वाली हलचल और व्यवधान को यह तकनीक बिल्कुल न्यूनतम रखती है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक तरफ सुरंग की खुदाई करती जाती है और साथ ही साथ प्रीकास्ट कंक्रीट लाइनिंग सेगमेंट्स को अपनी जगह पर फिट भी करती जाती है। इससे निर्माण की गति काफी तेज हो जाती है और सुरक्षा के मानक भी बेहतर होते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और महापे में बना कास्टिंग यार्ड

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस पूरे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा लॉन्च शाफ्ट तैयार किया है। इसके साथ ही वहां स्लरी और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, एक समर्पित पावर सबस्टेशन और अन्य आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। सुरंग की खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बेहद संवेदनशील निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। इनमें सेटलमेंट मार्कर्स, टिल्ट मीटर्स, सीस्मोग्राफ और 3D मॉनिटरिंग टारगेट शामिल हैं, जो पल-पल की रिपोर्ट दर्ज कर रहे हैं। सुरंग की दीवारों को मजबूती देने के लिए जरूरी करीब 77000 प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट्स का निर्माण करने के लिए महापे में 11.17 हेक्टेयर का एक विशाल कास्टिंग यार्ड स्थापित किया गया है।

क्या है इस टनलिंग प्रोजेक्ट की डेडलाइन?

रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई समयसीमा के अनुसार, इस अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विक्रोली से बीकेसी साल 2027 की शुरुआत तक और विक्रोली से घनसोली को मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा।

Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

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Bullet train in Noida: गौतमबुद्ध नगर में बनेंगे बुलेट ट्रेन के 3 स्टेशन! दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट में बिग डेवलपमेंट

Bullet train in Noida: दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना को लेकर गौतमबुद्ध नगर (NOIDA) में तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में तीन बुलेट ट्रेन स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इनमें सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन के सामने बनने वाला स्टेशन अंडरग्राउंड होगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने अलाइनमेंट पर यूटिलिटी सर्वे का निरीक्षण पूरा कर लिया है। इसके बाद निर्माण की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी शुरू हो गई है।

कहां-कहां बनेंगे स्टेशन?

प्रोजेक्ट के तहत गौतमबुद्ध नगर जिले में कुल तीन स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें पहला स्टेशन दिल्ली के मयूर विहार से सटे क्षेत्र में होगा। जबकि दूसरा सेक्टर-96 में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन के सामने बनेगा। इसके अलावा तीसरा गौतमबुद्ध नगर (नॉलेज पार्क/विश्वविद्यालय क्षेत्र) के पास प्रस्तावित है। आगे चलकर बुलेट ट्रेन की यह लाइन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचेगी।

राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने प्रस्तावित रूट पर यूटिलिटी का फिजिकल इंस्पेक्शन पूरा कर लिया है। अब डिजिटल मैपिंग और विस्तृत सर्वे के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि निर्माण के दौरान जल, सीवर, बिजली, गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर और अन्य अंडरग्राउंड सेवाओं को किस प्रकार सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया जाएगा।

सेक्टर 96 में अंडरग्राउंड बनेगा स्टेशन

परियोजना के अनुसार दिल्ली से नोएडा के सेक्टर-96 तक का हिस्सा अंडरग्राउंड रहेगा। इस अंडरग्राउंड सेक्शन की कुल लंबाई लगभग 8.8 किलोमीटर होगी। सेक्टर-96 में बनने वाला स्टेशन भी भूमिगत होगा, जबकि आगे का ट्रैक एलिवेटेड स्वरूप में विकसित किया जाएगा।

मयूर विहार से बुलेट ट्रेन की शुरुआत

रिपोर्ट के अनुसार, मयूर विहार से बुलेट ट्रेन की शुरुआत होगी। इसके बाद पहला प्रमुख स्टेशन सेक्टर-96 में बनाया जाएगा। यहां स्टेशन के लिए पहले प्रस्तावित स्थान को वर्टिकल गार्डन के पास से कुछ आगे शिफ्ट किया गया है ताकि पर्याप्त जमीन उपलब्ध हो सके। इसके बाद दूसरा स्टेशन गौतमबुद्ध नगर विश्वविद्यालय एरिया के पास विकसित होगा। अंतिम चरण में लाइन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचेगी, जिससे एयरपोर्ट को हाईस्पीड रेल नेटवर्क से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार

बुलेट ट्रेन की अधिकतम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा और औसत रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा प्रस्तावित है। इसके संचालन के बाद दिल्ली से जेवर की यात्रा करीब 21 मिनट, जेवर से लखनऊ 1 घंटा 40 मिनट, जबकि दिल्ली से लखनऊ की दूरी लगभग 2 घंटे 10 मिनट में पूरी की जा सकेगी। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा भी घटकर लगभग 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी।

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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र में कनेक्टिविटी के साथ औद्योगिक, व्यावसायिक और निवेश गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। एक्सपर्ट का मानना है कि बुलेट ट्रेन स्टेशन और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच बेहतर संपर्क बनने से क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख ट्रांजिट और आर्थिक हब के रूप में उभर सकता है।

भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, जेवर एयरपोर्ट से सूरत-वडोदरा तक बदलेगी विकास की तस्वीर

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) ने करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इन परियोजनाओं के लिए पुल, सुरंग, एलिवेटेड ट्रैक और स्टेशनों का एक समान डिजाइन तैयार किया जाएगा। खास बात ये है कि नई बुलेट ट्रेन लाइनें भारतीय इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित होंगी और इन्हें 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप विकसित किया जाएगा। सरकार इसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सात प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में से चार की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी है। वहीं बाकी तीन मार्गों पर सर्वे का काम जारी है। इसके साथ ही रूट की जांच और जमीन की तकनीकी पड़ताल का काम भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि परियोजनाओं को तय समय पर आगे बढ़ाया जा सके। प्रस्तावित सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल मार्ग भी शामिल है। इस परियोजना की सबसे खास बात नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के नीचे बनने वाला भूमिगत स्टेशन होगा। इस स्टेशन को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए करीब 9.4 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसे इस परियोजना की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 508 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर 12 स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इस हाई-स्पीड रेल लाइन से महाराष्ट्र और गुजरात के कई प्रमुख शहर आपस में जुड़ेंगे। माना जा रहा है कि इस परियोजना से स्टेशनों के आसपास तेजी से शहरी विकास होगा और निवेश के नए अवसर बढ़ेंगे। खासकर सूरत और वडोदरा जैसे शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी के कारण रियल एस्टेट बाजार को बड़ा फायदा मिल सकता है और आने वाले समय में यहां संपत्तियों की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

बुलेट ट्रेन परियोजना से बोइसर, वापी और अहमदाबाद जैसे क्षेत्रों के विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इन इलाकों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस और नए आवासीय प्रोजेक्ट तेजी से बढ़ सकते हैं। वहीं अहमदाबाद का साबरमती स्टेशन बुलेट ट्रेन, मेट्रो और रेलवे को जोड़ने वाला बड़ा ट्रांसपोर्ट हब बनेगा, जिससे आसपास के क्षेत्र में व्यापार, होटल और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Railway Stocks: पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि अगले 4-5 साल में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें लाई जाएंगी। इसके साथ ही दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन घोषणाओं के बाद रेलवे सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं।

Titagarh Rail

अगर कोलकाता मेट्रो के विस्तार की बात करें तो टीटागढ़ रेल का नाम सबसे आगे नजर आता है। कंपनी मेट्रो कोच और रेलवे रोलिंग स्टॉक बनाने में माहिर है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी पश्चिम बंगाल में हैं। अभी तक नए ऑर्डर का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मेट्रो के लिए बड़ी संख्या में नई ट्रेनें खरीदी जानी हैं। इसलिए टीटागढ़ को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

कंपनी पहले अहमदाबाद मेट्रो के लिए स्टेनलेस स्टील मेट्रो कोच बना चुकी है। इस प्रोजेक्ट की वैल्यू करीब 350 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा पुणे मेट्रो के लिए 34 ट्रेनसेट की डिलीवरी पूरी करने के बाद उसे 12 और एल्युमीनियम ट्रेनसेट का 430 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी मिला था। FY26 में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 27,540 करोड़ रुपये रही, जिसमें 10,600 करोड़ रुपये का हिस्सा पैसेंजर रेल बिजनेस से जुड़ा है।

RVNL

रेलवे की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तभी हकीकत बनती हैं जब जमीन पर काम शुरू होता है। यही काम सरकारी रेल कंपनी RVNL करती है। कंपनी ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग, स्टेशन री-डेवलपमेंट और दूसरी रेलवे परियोजनाओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है।

पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, RVNL को नए काम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कंपनी की ऑर्डर बुक फिलहाल करीब 1 लाख करोड़ रुपये की है। FY26 में उसका रेवेन्यू 20,412 करोड़ रुपये रहा। हालांकि बढ़ती लागत की वजह से मुनाफा 32.6% घटकर 871 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कंपनी ने FY27 में 15-20% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है और हाल में कई नए कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किए हैं।

IRFC

सरकारी कंपनी IRFC रेलवे सेक्टर की फाइनेंसिंग करने वाली सबसे अहम सरकारी कंपनी है। रेलवे जितना ज्यादा खर्च करेगा, उतनी ही ज्यादा फंडिंग की जरूरत होगी और इसका फायदा IRFC को मिल सकता है।

FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 7.8% बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कंपनी ने 35,000 करोड़ रुपये के लोन वितरित किए, जो उसके लक्ष्य से ज्यादा थे। इसका AUM बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। फरवरी 2026 में सरकार ने OFS के जरिए अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेची थी। वहीं कंपनी के बोर्ड ने FY27 में 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी भी दी है, जिससे रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग जारी रखी जा सके।

IRCON

दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के बाद IRCON भी चर्चा में है। कंपनी रेलवे, हाईवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण का लंबा अनुभव रखती है। अगर यह हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो बड़े पैमाने पर पुल, वायाडक्ट और स्टेशन बनाने का काम होगा। इसमें IRCON जैसी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं।

कंपनी की ऑर्डर बुक 24,984 करोड़ रुपये की है, जिसमें रेलवे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा सबसे बड़ा है। FY26 में उसका रेवेन्यू 9,071 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध लाभ 592 करोड़ रुपये था। खास बात यह है कि कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त है। इससे उसे भविष्य की बड़ी परियोजनाओं में भाग लेने की वित्तीय ताकत मिलती है।

आपको इन शेयरों पर क्यों रखनी चाहिए नजर

अगर आप रेलवे सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो इन शेयरों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार, स्टेशन पुनर्विकास और हाई-स्पीड रेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं से रेलवे वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि अभी ज्यादातर परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं। इसलिए ऑर्डर और कमाई पर असर दिखने में समय लग सकता है। ऐसे में Titagarh Rail, RVNL, IRFC और IRCON जैसे शेयरों पर आगे होने वाले घटनाक्रमों के साथ नजर रखना बेहतर हो सकता है।

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