दिल्ली से नोएडा एयरपोर्ट अब सिर्फ 60-70 मिनट दूर! ₹4,000 करोड़ का 50 KM एलिवेटेड एक्सप्रेसवे मंजूर, जानिए पूरा प्लान

Delhi to Jewar Airport: राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। नोएडा अथॉरिटी ने दिल्ली को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाले करीब 50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को फाइनल मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक का सफर काफी तेज और आसान होने की उम्मीद है।

News24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मेगा प्रोजेक्ट पर करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य दिल्ली, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करना और मौजूदा सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना है।

अक्षरधाम से सीधे जेवर एयरपोर्ट तक बनेगा कॉरिडोर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित एलिवेटेड एक्सप्रेसवे अक्षरधाम मंदिर के आसपास से शुरू होकर सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई करीब 50 किलोमीटर होगी, जिसमें लगभग 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा क्षेत्र में आएगा।

एक्सप्रेसवे का मुख्य हिस्सा छह लेन का होगा। वहीं, जहां से वाहन एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करेंगे, वहां संभावित जाम और ट्रैफिक बॉटलनेक को रोकने के लिए सड़क को आठ लेन तक चौड़ा किया जाएगा।इस परियोजना के निर्माण और आगे लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के पास होगी। फिलहाल, यह प्रोजेक्ट डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के चरण में है।

पहले यमुना के किनारे था रूट, फिर 5 मीटर बदला गया

इस एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में एक अहम बदलाव भी किया गया है। शुरुआती योजना के तहत सड़क को यमुना नदी के तटबंध के बिल्कुल साथ बनाने का प्रस्ताव था। हालांकि, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने इस एलाइनमेंट को लेकर बाढ़ के खतरे और निर्माण की संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताईं। इसके बाद अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्ग को करीब 5 मीटर नोएडा की तरफ खिसका दिया। एलाइनमेंट में इस बदलाव के बाद संशोधित योजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है।

सेक्टर-94 से मिलेगा प्रमुख कनेक्शन

नोएडा के सेक्टर-94 से करीब 120 मीटर चौड़ी सड़क इस एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के लिए प्रमुख पहुंच मार्ग के रूप में काम करेगी। निर्माण से पहले प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच भी की जाएगी। NHAI यह पता लगाएगा कि जमीन कितने भार को सुरक्षित रूप से सहन कर सकती है। इसके आधार पर आगे निर्माण से जुड़ी तकनीकी योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट का सफर 60-70 मिनट में होगा पूरा!

सबसे बड़ा फायदा यात्रा समय में कमी के रूप में देखने को मिल सकता है। परियोजना के चालू होने के बाद दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक का सफर करीब 60 से 70 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। इसका फायदा पूर्वी दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर मिलेगा। मयूर विहार, पटपड़गंज, आईपी एक्सटेंशन, कालिंदी कुंज और सरिता विहार जैसे इलाकों से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। इसके अलावा यह कॉरिडोर मंझावली पुल के जरिए फरीदाबाद से भी जुड़ सकेगा। इससे दिल्ली-NCR के कई प्रमुख इलाकों के बीच एयरपोर्ट कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

NCR के कई बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा

50 किलोमीटर का यह एलिवेटेड कॉरिडोर अकेले एक सड़क परियोजना नहीं होगा, बल्कि इसे NCR के व्यापक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। मौजूदा सड़क नेटवर्क पर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों का दबाव बढ़ने के साथ यह नया मार्ग भविष्य में ट्रैफिक को अलग-अलग रूट पर बांटने में भी मदद कर सकता है।

गाजियाबाद से जेवर तक रैपिड रेल-मेट्रो भी चलेगी

जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए केवल सड़क नेटवर्क पर ही काम नहीं हो रहा है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक एक नए 72.44 किलोमीटर लंबे ट्रांजिट कॉरिडोर की योजना भी सामने रखी है। इसमें दो तरह की सेवाएं एक ही कॉरिडोर पर प्रस्तावित हैं। यात्रियों के लिए 11 नमो भारत स्टेशन होंगे, जो तेज क्षेत्रीय यात्रा में मदद करेंगे।

इसके अलावा स्थानीय यात्रियों के लिए 18 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह कॉरिडोर गाजियाबाद के दिल्ली-मेरठ नमो भारत स्टेशन से जेवर एयरपोर्ट तक जाएगा। NCRTC के मुताबिक, इसका करीब 71.5 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि लगभग 1.29 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत होगा।

एयरपोर्ट के लिए बदल रहा पूरा कनेक्टिविटी नेटवर्क

कुल मिलाकर जेवर एयरपोर्ट के आसपास सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों स्तरों पर कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़े प्रोजेक्ट सामने आ रहे हैं। अक्षरधाम से जेवर तक प्रस्तावित 50 किलोमीटर का एलिवेटेड एक्सप्रेसवे और गाजियाबाद-जेवर नमो भारत-मेट्रो कॉरिडोर के पूरा होने पर NCR के अलग-अलग हिस्सों से एयरपोर्ट पहुंचना पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकता है। हालांकि, एलिवेटेड एक्सप्रेसवे अभी DPR चरण में है, इसलिए निर्माण शुरू होने और इसके पूरी तरह चालू होने की समयसीमा आगे की परियोजना मंजूरियों और निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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नोएडा एयरपोर्ट के पास एस्कॉर्ट्स कुबोटा बनाएगी ऐसा प्लांट जो बदल देगी ट्रैक्टर इंडस्ट्री का चेहरा! जानिए ₹2000 करोड़ का पूरा प्लान

Noida Airport News: एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में अपने नए विशाल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए भूमि पूजन किया है। 19 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर जिले के सेक्टर-10 में हुए इस शिलान्यास के साथ ही कंपनी ने 2000 करोड़ रुपये से अधिक के शुरुआती इन्वेस्टमेंट का भी ऐलान किया है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह नया प्लांट 154 एकड़ में तैयार होगा। यह कंपनी द्वारा अब तक का सबसे बड़ा कैपिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटमेंट है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ जापानी मूल कंपनी कुबोटा के ग्लोबल एक्सपोर्ट को भी स्पीडअप करना है।

यहां पहले फेज में बनेंगे 60000 ट्रैक्टर

कंपनी इस इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कैंपस को कई फेज में तैयार करेदी। पहले फेज में सालाना 60000 ट्रैक्टर और 15000 कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट यूनिट्स की कैपिसिटी तैयार होगी। इसके साथ सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी फैसिलिटी भी डेवलप की जाएंगी। कंपनी के मुताबिक जब इसके सभी फेज पूरे हो जाएंगे, तो यह दुनिया भर में फैले कुबोटा ग्रुप के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में से एक बन जाएगा।

इस कैंपस में एक ही छत के नीचे ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और इंजन बनाए जाएंगे। यह प्लांट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए काम करेगा और इस क्षेत्र में रोजगार के कई नए अवसर पैदा करेगा।

नोएडा एयरपोर्ट के पास होने का क्या है फायदा?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित इस प्लांट को बेहतरीन लोकेशन एडवांटेज मिलेगा। यह साइट जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के करीब है। यह इलाका आने वाले समय में एक बड़ा रीजनल कार्गो हब बनने जा रहा है। ऐसे में इस प्लांट को देश भर में सामान भेजने के लिए मजबूत रोड कनेक्टिविटी और एक्सपोर्ट के लिए सीधा एयर कार्गो एक्सेस मिलेगा। इसके अलावा NCR में पहले से मौजूद विशाल इंजीनियरिंग और सप्लायर नेटवर्क का फायदा भी कंपनी को मिलेगा।

भारत पर कुबोटा का बड़ा दांव: 2030 का विजन

यह प्रोजेक्ट कुबोटा कॉरपोरेशन के मिड-टर्म बिजनेस प्लान 2030 का हिस्सा है। इसमें भारत को समूह के प्रमुख ग्रोथ मार्केट्स में शामिल किया गया है। कुबोटा कॉरपोरेशन के सीईओ शिंगो हानाडा के मुताबिक नए प्लांट का यह पैमाना कुबोटा की विकास रणनीति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत अब कुबोटा के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग हब बन रहा है।

आपको बता दें कि नवंबर 2025 में YEIDA ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ अगस्त 2024 में हुए एक एमओयू के आधार पर एस्कॉर्ट्स कुबोटा को 4500 करोड़ रुपये के कुल ट्रैक्टर निर्माण यूनिट के लिए लगभग 200 एकड़ जमीन आवंटित की थी। इससे 4000 नौकरियां मिलने का अनुमान था। हाल ही में जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है, वह उसी बड़े विजन का पहला और संशोधित फेज्ड स्कोप है।

2030-31 तक फार्म मेकेनाइजेशन को नई दिशा देने का लक्ष्य

एस्कॉर्ट्स कुबोटा के सीएमडी निखिल नंदा ने कहा कि कंपनी प्रोडक्ट-लीड ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी ने इस साल अपने तीन ब्रांड्स के तहत 42 नए उत्पाद और पिछले दो सालों में 50 से अधिक उत्पाद लॉन्च किए हैं, जिससे धान की खेती, फोर-व्हील-ड्राइव और अन्य सेगमेंट्स में खाली जगहों को भरा गया है।

अप्रैल से जुलाई के दौरान कंपनी ने अपने संयुक्त पैन-इंडिया नेटवर्क के दम पर लगातार अपने मार्केट शेयर में बढ़ोतरी की है। निखिल नंदा ने कहा है कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा भारत में फार्म मेकेनाइजेशन को स्पीडअप करना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य 2030-31 तक एक ऐसा फुल-सॉल्यूशन एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है जो सिर्फ कम कीमतों पर नहीं, बल्कि वैल्यू पर केंद्रित हो। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलाइजेशन की बड़ी भूमिका होगी।

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आपको बता दें कि साल 1944 में स्थापित एस्कॉर्ट्स कुबोटा भारत और वैश्विक बाजारों में फार्मट्रैक, पावरट्रैक और कुबोटा ब्रांड्स के तहत बिक्री करती है। वहीं 1890 में ओसाका (जापान) में शुरू हुई कुबोटा कॉरपोरेशन दुनिया के 120 से अधिक देशों में कृषि, कंस्ट्रक्शन और इंजन वर्टिकल्स में काम करती है और एस्कॉर्ट्स कुबोटा में मेजॉरिटी की हिस्सेदारी रखती है।

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के उद्घाटन एवं दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में जापान और भारत के प्रमुख उद्योग समूहों ने उत्तर प्रदेश को निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ केंद्र बताया। समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन जापान और स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में अपने निवेश, साझेदारी के अनुभव और भविष्य की संभावनाओं को साझा किया।
दोनों उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रदेश में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन, बड़े बाजार, निवेश-अनुकूल नीतियों और सरकार के सहयोग को औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।

 

कुबोटा ने कहा- यूपी में निवेश दीर्घकालिक विश्वास का प्रतीक

समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन, जापान के प्रेसिडेंट एवं सीईओ शिंगो हानाडा ने नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की ग्राउंड ब्रेकिंग को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माइलस्टोन बताते हुए कहा कि इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में कुबोटा की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और साझेदारी को एक नया विस्तार मिल रहा है। उन्होंने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, इन्वेस्ट यूपी और उन सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके समर्थन और सहयोग से यह महत्वपूर्ण पड़ाव संभव हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश में कुबोटा का निवेश प्रदेश की क्षमता में कंपनी के दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की प्रगति और भारत को एक विकसित एवं मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों में उद्योग जगत भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है।

 

135 साल से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के मिशन पर कुबोटा

कुबोटा सीईओ ने कहा कि 135 वर्षों से अधिक समय से कुबोटा लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और समाज में योगदान देने के उद्देश्य से काम कर रहा है। कंपनी की फिलॉसफी के अनुरूप वह बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए लोगों के हित में काम करती रहेगी। उन्होंने भारत में कुबोटा की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कंपनी की मौजूदगी उसकी मजबूत साझेदारियों के कारण लगातार सुदृढ़ हुई है। उन्होंने नंदा परिवार और उनकी संस्था का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस परिवार ने दशकों से भारत की सेवा की है और देश में कृषि के मशीनीकरण में अग्रणी भूमिका निभाई है। नंदा परिवार के नेतृत्व के साथ कुबोटा की साझेदारी आगे भी और मजबूत होती रहेगी। कुबोटा और उसके भारतीय साझेदारों की साझी महत्वाकांक्षा भविष्य के लिए एक मजबूत एक्सपोर्ट बेस तैयार करना है। जापान की विश्वस्तरीय तकनीक और भारतीय साझेदारों की स्थानीय समझ एवं क्षमता मिलकर इस दिशा में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं।

 

स्पार्क मिंडा की यूपी में 40 वर्षों से अधिक की मौजूदगी, अब बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी

समारोह में आकाश मिंडा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश में कंपनी की मौजूदगी और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज संभावनाओं और नए अवसरों का प्रदेश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश उद्योग और निवेश को प्राथमिकता देने वाला राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि निवेशकों और उद्योग जगत के बीच इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस और इंडस्ट्रियल कॉन्फिडेंस भी तैयार कर रहा है।

 

एक्सप्रेसवे, कॉरिडोर और वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक्स ने बदला औद्योगिक परिदृश्य

आकाश मिंडा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में औद्योगिकीकरण के लिए मजबूत फाउंडेशन तैयार हुआ है। प्रदेश में एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल पार्क, स्किल्ड मैनपावर और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने हाल में संचालित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसी कई योजनाओं और परियोजनाओं को हकीकत में बदलते हुए देखा गया है, जो कुछ समय पहले तक केवल एक परिकल्पना मात्र थीं।

 

उत्तर प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार

आकाश मिंडा ने बताया कि वह स्पार्क मिंडा ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कंपनी ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की उत्तर प्रदेश में 40 वर्षों से अधिक समय से मौजूदगी है और वर्तमान में प्रदेश में 9,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्पार्क मिंडा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और कंपनी यहां अपनी मौजूदगी को कहीं बड़े स्तर पर विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

एडवांस टेक्नोलॉजी से ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स तक बढ़ेगा निवेश

आकाश मिंडा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में एडवांस टेक्नोलॉजी, मोटर पार्ट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डिजाइन एवं डेवलपमेंट सेंटर जैसे क्षेत्रों में अपना निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी डीपर लोकलाइजेशन और बैकवर्ड इंटीग्रेशन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके लिए जापानी कंपनियों के साथ साझेदारी काफी महत्वपूर्ण है। निवेश विस्तार के साथ कंपनी प्रदेश में करीब 6,000 से 8,000 अतिरिक्त लोगों को रोजगार देने की दिशा में काम करना चाहती है।

 

जापान की तकनीक और यूपी की क्षमता का संयोजन बनेगा ताकत

स्पार्क मिंडा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने जापान और दुनिया भर के उद्योगों को उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं।।जापान वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी, ग्लोबल क्वालिटी और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग लेकर आता है, जबकि उत्तर प्रदेश स्केल, टैलेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी सपोर्ट, बड़ा मार्केट और बिजनेस फ्रेंडली इनवॉयरमेंट उपलब्ध कराता है। भारतीय कंपनियां स्थानीय क्षमताओं, ग्राहकों की जरूरतों की बेहतर समझ और आगे बढ़ने की इच्छा लेकर आती हैं। इन सभी क्षमताओं का संयोजन उत्तर प्रदेश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।

 

कारोबार के साथ रोजगार और विकसित भारत में योगदान है लक्ष्य

आकाश मिंडा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश का उद्देश्य केवल बिजनेस ग्रोथ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना भी होना चाहिए। कंपनी का लक्ष्य प्रदेश में अपनी औद्योगिक उपस्थिति का विस्तार करने के साथ रोजगार सृजन और विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान देना है।  

Noida Airport: जेवर एयरपोर्ट के पास सेक्टर 23C में बनेगा नया इंटरस्टेट बस टर्मिनल! ताइवान सिटी, यूनिवर्सिटी और मेडिकल हब को लेकर ये है प्लान

Noida Airport News: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) तक पहुंचने और वहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं आसपास के राज्यों के विभिन्न शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एयरपोर्ट के नजदीक एक इंटरसिटी बस टर्मिनल बनाने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही क्षेत्र में सिटी बसों की संख्या बढ़ाने समेत स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और औद्योगिक विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्टों को भी हरी झंडी दी गई है।

सेक्टर-23 में बनेगा इंटरसिटी बस टर्मिनल

YEIDA के फैसले के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सेक्टर-23 में ‘इंटरसिटी बस टर्मिनल’ विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आसपास के शहरों और कस्बों से बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा के जरिए जोड़ना है।

इस टर्मिनल के बनने के बाद यात्रियों को निजी गाड़ियों या कैब पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के विभिन्न शहरों तक बस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से अपने गंतव्य तक जाने में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

100 से बढ़ाकर 500 की जाएगी सिटी बसों की संख्या

YEIDA बोर्ड ने इस एरिया में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आने वाले दिनों में क्षेत्र में चलने वाली सिटी बसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 500 करने की मंजूरी दी गई है। इस कदम से एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे रिहायशी, कमर्शियल और औद्योगिक इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। जैसे-जैसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, सार्वजनिक परिवहन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।

एयरपोर्ट से आसपास के इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी

YEIDA के CEO आरके सिंह के अनुसार, प्रस्तावित बस टर्मिनल एयरपोर्ट को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका मकसद यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे वे एयरपोर्ट से सीधे विभिन्न शहरों और कस्बों तक आसानी से यात्रा कर सकें।

फिलहाल,नोएडा एयरपोर्ट के आसपास तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने के साथ परिवहन व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में इंटरसिटी बस टर्मिनल और सिटी बसों की संख्या बढ़ाने का फैसला क्षेत्र के भविष्य के यातायात ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

एयरपोर्ट के आसपास बनेगा 500 एकड़ का मेडिकल हब

YEIDA बोर्ड के फैसले सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं हैं। प्राधिकरण ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के बड़े विस्तार का भी रास्ता साफ कर दिया है।बोर्ड ने सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में करीब 500 एकड़ क्षेत्र में मेडिकल हब बनाने को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट से आने वाले समय में बड़े अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सेक्टर-34 में 40 एकड़ का यूनिवर्सिटी टाउनशिप

शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। सेक्टर-34 में 40 एकड़ जमीन पर यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना को मंजूरी मिली है। इससे यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिल सकती है। एयरपोर्ट के आसपास शैक्षणिक संस्थानों और आधुनिक टाउनशिप के विकास से क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

50 एकड़ में बनेगा इंटरनेशनल स्टेडियम

इस एरिया में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। YEIDA बोर्ड ने 50 एकड़ में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के लिए जमीन मंजूर की है। इसके अलावा अन्य सार्वजनिक और व्यावसायिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी जमीन को मंजूरी दी गई है। इससे एयरपोर्ट के आसपास का पूरा क्षेत्र केवल एक ट्रांसपोर्ट हब के बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

सेक्टर-6 में 300 एकड़ में बनेगी ‘ताइवान सिटी’

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए YEIDA ने सेक्टर-6 में 300 एकड़ जमीन ‘ताइवान सिटी’ के लिए आरक्षित करने का भी फैसला किया है। इसका उद्देश्य ताइवान की कंपनियों और उद्योगों को आकर्षित करना है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को। यदि इस योजना को बड़े स्तर पर उद्योगों का समर्थन मिलता है तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी विनिर्माण का एक नया औद्योगिक केंद्र विकसित हो सकता है।

तेजी से बदलने जा रहा है एयरपोर्ट के आसपास का इलाका

YEIDA के इन फैसलों से साफ है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास केवल हवाई यात्रा से जुड़ा ढांचा ही नहीं, बल्कि एक बड़े और आधुनिक शहरी क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इंटरसिटी बस टर्मिनल, 500 सिटी बसों की योजना, 500 एकड़ का मेडिकल हब, यूनिवर्सिटी टाउनशिप, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और ताइवान सिटी जैसे प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।

जेवर में जलभराव पर सियासत तेज, विधायक धीरेन्द्र सिंह बोले- जिन्हें विकास नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं

जेवर में जलभराव पर सियासत तेज, विधायक धीरेन्द्र सिंह बोले- जिन्हें विकास नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट पार्किंग स्थल पर बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जिन्हें जेवर का अभूतपूर्व विकास नहीं दिखाई देता, उन्हें केवल गड्ढे और जलभराव नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर कमियों को दूर करने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसे प्रदेश में हो रहे विकास से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीति बताया।

 

धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि बारिश के बाद विपक्ष को यहां गड्ढे और जलभराव दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसी धरती पर खड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, विश्वस्तरीय सड़कें, औद्योगिक निवेश और हजारों युवाओं के लिए पैदा हो रहे रोजगार के अवसर नजर नहीं आ रहे। विधायक ने कहा कि एक समय जेवर क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आज यह उत्तर प्रदेश के बदलते औद्योगिक और आर्थिक स्वरूप का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जेवर को देश-दुनिया के मानचित्र पर नई पहचान दी है।

 

उन्होंने कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में एयरपोर्ट वर्षों तक चर्चा और कागजों तक सीमित रहा, आज वे इसके आसपास बारिश के पानी को लेकर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें जेवर में हुआ विकास और उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर स्वीकार नहीं हो रही है।

 

विपक्ष तस्वीरों में गड्ढे खोजता रहे, हम जेवर में विकास की नई इबारत लिखते रहेंगे

 

धीरेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जलभराव या किसी तकनीकी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों से जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने को कहा गया है। उन्होंने कहा, विपक्ष तस्वीरों में गड्ढे खोजता रहे, हम जेवर में विकास की नई इबारत लिखते रहेंगे। कमी जहां होगी, उसे ठीक कराया जाएगा, लेकिन कुछ समय के जलभराव को जेवर और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक विकास पर पर्दा डालने का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा।

Noida Plot Scheme: नोएडा एयरपोर्ट के पास घर बनाने का सुनहरा मौका! YEIDA ला रहा 2 नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम, जानिए सबकुछ

YEIDA Residential Plot Schemes: उत्तर प्रदेश के जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रेजिडेंशियल प्लॉट की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) नवरात्रि के दौरान दो नई रिहायशी प्लॉट योजनाएं लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। नई योजनाओं में पहली स्कीम कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इन दोनों योजनाओं की घोषणा अक्टूबर में होने की संभावना है।

आपके बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 जून को फ्लाइट ऑपरेशन शुरू हुए थे। इसके दो दिन बाद कार्गो टर्मिनल भी खुल गया था। YEIDA के एडिशनल CEO शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि अथॉरिटी अभी स्कीम की बारीकियों पर काम कर रही है। जल्द ही प्लॉट की सही संख्या और अन्य जानकारी की घोषणा की जाएगी।

40 वर्गमीटर के प्लॉट वाली होगी LIG स्कीम

हाल ही में YEIDA ने अक्टूबर में नवरात्रि के दौरान दो नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम लॉन्च करने की घोषणा की है। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, इनमें से एक स्कीम कम आय वाले ग्रुप के लिए होगी। इसमें 40 वर्ग मीटर के प्लॉट मिलेंगे। दूसरी स्कीम आम जनता के लिए होगी। इसमें प्लॉट का साइज़ 162 से 300 वर्ग मीटर के बीच होगा।

दोनों स्कीम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के पास सेक्टर 5-A में शुरू की जाएंगी। यानी अलग-अलग जरूरत और बजट वाले लोग अपनी पसंद के आकार का प्लॉट हासिल करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे सीमित बजट वाले लोगों को एयरपोर्ट के आसपास अपना घर बनाने का मौका मिल सकेगा।

पहले प्लॉट मिल चुका है तो नहीं कर पाएंगे अप्लाई

YEIDA ने योजनाओं में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा नए लोगों को मौका देने के लिए एक अहम शर्त रखी है। जिन लोगों को पहले नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी या YEIDA की किसी पिछली रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम में प्लॉट मिल चुका है, वे इन नई स्कीम के लिए अप्लाई नहीं कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन लोगों को दोबारा लाभ लेने से रोकना है, जिन्हें पहले ही किसी प्राधिकरण की योजना के तहत रिहायशी प्लॉट आवंटित किया जा चुका है।

प्लॉट की कीमत समेत अन्य जानकारी

फिलहाल, यमुना प्राधिकरण के मुताबिक इस एरिया में रेजिडेंशियल प्लॉट का आवंटन रेट 36,260 रुपये प्रति वर्गमीटर है। हालांकि, नई योजनाओं में प्लॉट की अंतिम कीमत और अन्य शुल्क से जुड़ी जानकारी प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। यह कदम यमुना अथॉरिटी द्वारा जून में एयरपोर्ट के पास ही लकी ड्रॉ के जरिए भारी संख्या में रेजिडेंशियल प्लॉट अलॉट करने के ठीक बाद उठाया गया है। अप्रैल में घोषित उस स्कीम को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

जून में 973 प्लॉट के लिए आए थे 1.1 लाख आवेदन

नई योजनाओं की घोषणा ऐसे समय में हो रही है जब YEIDA की पिछली रिहायशी प्लॉट योजना को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। इतने ही प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज़्यादा वैलिड एप्लीकेशन आए थे। बेहतर एयर कनेक्टिविटी, शानदार लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और इलाके में बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्रोथ की संभावनाओं ने इस क्षेत्र को घर खरीदारों के लिए एक आकर्षक जगह बना दिया है। यह स्कीम अप्रैल में घोषित की गई थी। इसमें 973 प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोएडा एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी जमीन को लेकर लोगों में कितनी मजबूत दिलचस्पी है।

नोएडा एयरपोर्ट के कारण बढ़ी इलाके की डिमांड

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तेजी से विकास हो रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद इस इलाके में कनेक्टिविटी एवं निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। बेहतर हवाई संपर्क के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों की उम्मीद ने यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को घर खरीदारों और निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। यही वजह है कि एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी प्लॉट की योजनाओं में बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर रहे हैं। अब नवरात्रि के दौरान प्रस्तावित इन दो नई स्कीमों पर भी हजारों-लाखों लोगों की नजर रहने की उम्मीद है।

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YEIDA New Plan: जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी के बाद YEIDA का नया धमाका, अब बनेगा एनिमेशन और गेमिंंग पार्क

YEIDA AVGC XR Park Near Jewar Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी के बाद अब यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एक और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को डिजिटल मीडिया और क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का बड़ा हब बनाने की तैयारी में है।

इसी कड़ी में, YEIDA ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आगामी फिल्म सिटी के पास एक अत्याधुनिक AVGC-XR (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियल्टी) पार्क विकसित करने की योजना बनाई है।

हाई-टेक सुविधाओं से लैस होगा AVGC-XR पार्क

YEIDA अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्तावित पार्क में आधुनिक और अगली पीढ़ी के कंटेंट निर्माण से जुड़ी तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:

एनिमेशन और VFX स्टूडियो: फिल्मों और शो के लिए हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स लैब।

गेम डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर्स: वीडियो गेमिंग और डिजाइनिंग के लिए एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर।

मोशन कैप्चर और वर्चुअल प्रोडक्शन: फिल्मों और विजुअल मीडिया के लिए आधुनिक शूटिंग तकनीक।

AI और VR/AR लैब्स: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-पावर्ड कंटेंट निर्माण, एक्सटेंडेड रियल्टी (XR), वर्चुअल रियल्टी (VR) और ऑगमेंटेड रियल्टी (AR) लैब्स।

सेक्टर-21 की फिल्म सिटी के साथ मिलकर करेगा काम

यह AVGC-XR पार्क सेक्टर-21 में बन रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बिल्कुल नजदीक स्थित है।

YEIDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह पार्क एक ऐसा एकीकृत इकोसिस्टम बनाएगा जहां फिल्म निर्माण, एनिमेशन, गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स एक ही जगह उपलब्ध होंगे। इससे भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स को विदेशी प्रोडक्शन हाउस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और यह पार्क घरेलू व वैश्विक स्टूडियोज को भारत की ओर आकर्षित करेगा।’

केंद्र सरकार के विजन के अनुकूल है प्रोजेक्ट

यह परियोजना भारत सरकार की उस नीति से भी मेल खाती है, जिसके तहत देश को एनिमेशन, गेमिंग और विजुअल मीडिया (AVGC-XR) के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल कंटेंट, मोबाइल गेमिंग और AI क्रिएशन टूल्स की बढ़ती मांग के कारण भारत में AVGC-XR सेक्टर मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा बन चुका है।

युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से जेवर और आसपास के इलाकों का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा:

रोजगार के मौके: एनिमेशन, गेम डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX), एआई और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में युवाओं के लिए हजारों नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

इन्वेस्टमेंट हब: यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पहले से ही सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल डिवाइसेज, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट का बड़ा केंद्र बन रहा है। इस पार्क के जुड़ने से यहां वैश्विक स्तर का टेक-क्रिएटिव इकोसिस्टम तैयार होगा।

डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री पर योगी सरकार का फोकस, जेवर में बनेगा अत्याधुनिक एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क

CM Yogi Adityanath

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी के पास विकसित होगा हाईटेक हब
  • एनिमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, एआई और एक्सआर तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा

 

लखनऊ/नोएडा, 3 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में राज्य सरकार अब डिजिटल क्रिएटिव और उभरती प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों पर भी विशेष फोकस कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट अत्याधुनिक एवीजीएक्स-एक्सआर (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics एवं Extended Reality) पार्क विकसित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार, निवेश और नवाचार को भी नई गति मिलेगी।

 

इंडस्ट्री फोकस सेक्टर के रूप में विकसित होगा एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क

योगी सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX), गेमिंग, कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) को प्रदेश के फोकस सेक्टर (Focus Sector) के रूप में चिह्नित किया है। इसी रणनीति के तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट यह पार्क विकसित कर रहा है। सरकार का उद्देश्य इस उभरते उद्योग को अत्याधुनिक अवसंरचना उपलब्ध कराकर घरेलू और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाना तथा युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर सृजित करना है।

 

डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री का नया केंद्र बनेगा उत्तर प्रदेश

प्रस्तावित एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क को आधुनिक तकनीकों से लैस एकीकृत डिजिटल क्रिएटिव इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां देश-विदेश की कंपनियों, स्टार्टअप्स, कंटेंट क्रिएटर्स और तकनीकी विशेषज्ञों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उत्तर प्रदेश में डिजिटल मनोरंजन उद्योग, मीडिया एवं कंटेंट उत्पादन को नई ऊंचाई मिलेगी।

 

इन अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा लैस पार्क

प्रस्तावित पार्क में कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें प्रमुख रूप से एनिमेशन स्टूडियो, विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) स्टूडियो, गेम डेवलपमेंट एवं गेम डिजाइन सेंटर, मोशन कैप्चर स्टूडियो, वर्चुअल प्रोडक्शन सुविधाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कंटेंट निर्माण केंद्र, एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर) व ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) लैब, डिजिटल मीडिया एवं इमर्सिव कंटेंट डेवलपमेंट सेंटर शामिल होंगे। इन सुविधाओं के माध्यम से एनिमेशन फिल्म, वेब सीरीज, गेमिंग, विज्ञापन, डिजिटल शिक्षा, वर्चुअल ट्रेनिंग और इमर्सिव मीडिया जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

 

जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी का मिलेगा लाभ

यह पार्क नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट विकसित किया जाएगा। इससे देश-विदेश के निवेशकों, स्टूडियो, प्रोडक्शन हाउस और तकनीकी कंपनियों को बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण मिलेगा। एयर कार्गो, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और लॉजिस्टिक सुविधाओं का लाभ भी इस परियोजना को मिलेगा। एवीजीएक्स-एक्सआर पार्क के विकसित होने से हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। एनिमेशन, गेमिंग, ग्राफिक्स, विजुअल इफेक्ट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ेगी। इससे स्टार्टअप संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू व विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

 

भारत को वैश्विक एवीजीएक्स-एक्सआर हब बनाने की दिशा में अहम कदम

यीडा का यह पार्क भारत को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स तथा एक्सटेंडेड रियलिटी तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, तकनीकी और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नई पहचान देने के साथ-साथ राज्य को डिजिटल कंटेंट और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।

बम बनवाने वालों को होती थी शिवभक्तों की ‘बम-बम’ से तकलीफ : योगी

Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गाजियाबाद में कहा कि कांग्रेस व सपा के मुंह से आस्था की बात हास्यास्पद लगती है। इन लोगों ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई थी। इन्हें व्यापारी पर बम फेंकने और कट्टा/बम बनाने पर आपत्ति नहीं होती थी, लेकिन हर-हर, बम-बम बोलकर चलने वाले शिवभक्तों पर आपत्ति होती थी। सीएम ने अपना कुर्ता दिखाया और कहा कि इन्हें इस केसरिया रंग से चिढ़ होती थी। यह वही लोग हैं, जिन्होंने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी की शोभायात्रा और दुर्गा पूजा के पंडालों पर रोक लगाई थी। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में मुरादनगर व मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र के लिए 868 करोड़ की 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल के बारे में जानकारी ली। सीएम ने कई बच्चों का अन्नप्राशन कराया। 

2017 के पहले शासनादेश में था कि कांवड़ यात्रा से हो सकते हैं दंगे, इसे रोका जाए

सीएम ने 2017 में कांवड़ यात्रा की बैठक का जिक्र किया, कहा कि पुराने शासनादेश में था कि कांवड़ यात्रा से दंगे हो सकते हैं, इसलिए इसे रोका जाना चाहिए। यदि कुछ लोग यह यात्रा निकालते हैं तो उन्हें घंट-घड़ियाल, शंख आदि बजाने से रोका जाना चाहिए। मैंने अधिकारियों से इसकी तैयारी के बारे में पूछा तो पता चला कि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से निकल जाएगी। मैंने कहा कि यह देवाधिदेव महादेव के प्रति समर्पण रखने वाले शिवभक्तों की यात्रा है। दलित, वंचित, पिछड़ी जाति समेत हर तबके का व्यक्ति भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर इस यात्रा में जाता है। हम उन्हें सुरक्षा व सुविधा देंगे, कोई प्रतिबंध नहीं होगा। दंगा न होने की गारंटी मैंने ली, क्योंकि सच्चा भक्त कभी अनुशासनहीनता नहीं करता। वह मर्यादा में चलता है क्योंकि समरसता उसके जीवन का हिस्सा है। 

कांवड़ यात्रा की मर्यादा व अनुशासन को बनाए रखना है

सीएम ने कहा कि अब देश के अंदर सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा हरिद्वार से गाजियाबाद तक की निकलती है। देश और विदेश से लोग इसे देखने आते हैं, क्योंकि यह भारत में ही संभव है। आस्था को न समझने वाले राम मंदिर, कांवड़ यात्रा व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक लगाते थे। अब कांवड़ यात्रा को कोई रोक नहीं सकता है। बहुत शीघ्र फिर से कांवड़ यात्रा आने वाली है। सभी कांवड़ संघों व शिवभक्तों से अपील की कि इस आयोजन की मर्यादा, अनुशासन को बनाए रखना है। किसी विरोधी को अवसर नहीं देना है। प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बनाएं, सरकार भव्य कांवड़ यात्रा निकालने का प्रबंध कराएगी। अब तो गाजियाबाद से हरिद्वार तक कांवड़ मार्ग भी बन गया है। 

आस्था को वोटबैंक के लिए भुनाना चाहते हैं सपाई व कांग्रेसी 

सीएम ने आस्था के सम्मान का जिक्र कर कहा कि दुग्धेश्वर नाथ मंदिर कॉरिडोर, पुरा महादेव में आदियोगी की भव्य प्रतिमा-कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ ही नई अयोध्या, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंध्यवासिनी धाम आदि पवित्र तीर्थ स्थल फिर से जगमगा रहे हैं। सपा व कांग्रेस वाले आस्था को वोटबैंक के लिए भुनाना चाहते हैं। 

10 साल पहले गाजियाबाद में होता था गैंगवार, अब सुशासन यहां की पहचान 

सीएम ने कहा कि गाजियाबाद अपनी खुद की पहचान रखने वाला, भगवान दुग्धेश्वर नाथ का पावन जनपद है। हस्तशिल्प के लिए जगविख्यात गाजियाबाद की स्थिति एक दशक पहले क्या थी। यह दिल्ली का प्रवेश द्वार था, लेकिन इसका नाम लेने से लोग भयभीत होते थे। यहां आने का साहस नहीं करते थे। गंदगी पहचान थी और यहां की गुंडागर्दी पर फिल्में बनती थीं। 10 वर्ष पहले यहां की अराजकता, गुंडागर्दी और गैंगवार को आपने देखा है परंतु अब गाजियाबाद सुशासन के मॉडल के तहत पहचान बना रहा है। अब गाजियाबाद पर फिल्में नहीं बनतीं, बल्कि यहां हरिनंदीपुरम कॉलोनी आती है। अब स्वच्छता रैंकिंग में भी गाजियाबाद का स्थान होता है। 

सीएम ने गाजियाबाद में किए विकास कार्यों को गिनाया

सीएम ने कहा कि जिस दूरी को तय करने में घंटों लगते थे, आज मात्र कुछ मिनट में वह दूरी तय होती है। गाजियाबाद में बेहतरीन सड़कें हैं। नगर निगम ने साफ-सफाई की शानदार व्यवस्था की है। दिल्ली-मेरठ के बीच पहली रैपिड रेल चल रही है। यह प्रस्ताव मेरे मुख्यमंत्री बनने से पहले से चल रहा था, लेकिन सपा सरकार ने नकार दिया था कि हमें रैपिड रेल नहीं चाहिए। बतौर मुख्यमंत्री मैंने पूछा कि पिछली सरकारों ने क्या निर्णय किया है तो पता चला कि उन्होंने इस पर नकारात्मक रूप से लिखा है। मैंने इसकी आवश्यकता पर जोर दिया तो अधिकारियों ने बताया कि इसमें 32 हजार करोड़ रुपये लगेगा और इसमें राज्य व केंद्र सरकार बराबर पैसा देगी। सब सशंकित थे, लेकिन मैंने कहा कि राज्य सरकार पैसा देगी। आज लगता है कि 2017 में निर्णय लेकर हमने अच्छा किया। मेरठ से दिल्ली की तीन घंटे की दूरी अब 40 मिनट में तय हो रही है। मोदीनगर व मुरादनगर की दूरी और भी कम हुई है। 

एनसीआर व दिल्ली के ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा गाजियाबाद

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 12 वर्ष में देश को सुशासन का मॉडल दिया है। जब कानून का राज होता है, तब सुशासन आता है। कानून के राज के लिए अपराध व अपराधियों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति कारगर होती है। जहां सुरक्षा होगी, वहां सुशासन आएगा, जहां सुशासन होगा, वहां समृद्धि आएगी, जहां समृद्धि आएगी, वहां विकास, निवेश, रोजगार का सृजन होगा, जिससे नौजवानों के हाथों को काम मिलेगा। गाजियाबाद एनसीआर व दिल्ली के ग्रोथ इंजन के रूप में भूमिका का निर्वाह कर रहा है। 

2017 के पहले शासन करने वालों के यहां देर रात तक सजती थी मंडली

सीएम ने कहा कि जब आपने अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुना तो परिणाम सामने है। आज की नई योजनाएं यहां की गति को और बढ़ाएगी। सीएम ने कहा कि 2017 के पहले शासन करने वाले लोग 12 बजे सोकर उठते थे। 2 बजे तैयार होते थे, खाने-पीने के बाद उनके जिम जाने का समय हो जाता था। वहां से आते ही उनकी मंडली देर रात तक सजी रहती थी। तब प्रदेश में दंगा, कर्फ्यू लगता था। सरकार की नीति-नीयत न होने से निवेश और रोजगार नहीं आ पाता था। 

कांग्रेस सरकार में 85 पैसे पर पड़ती थी डकैती, हम उस पैसे को विकास में लगाते हैं 

सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री राजीव गांधी कहते थे कि 100 में से 15 पैसा ही नीचे पहुंचता था। सीएम ने कहा कि शेष 85 पैसा वही था, जिसे जनता ने टैक्स के रूप में दिया था। इससे छात्रवृत्ति, पेंशन, गरीबों का मकान, स्वास्थ्य बीमा कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती थी। यह लोग यदि उस पैसे को जमीन पर उतारते तो हाईवे, मेट्रो, एयरपोर्ट बन सकता था, लेकिन धऱातल पर उतरने से पहले ही कांग्रेस व सपा के लोग इस 85 पैसे पर डकैती डालते थे, जिससे गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था। 

एनसीआर बता रहा है कि कैसे होता है विकास

सीएम ने कहा कि एनसीआर बता रहा है कि विकास कैसे होता है। पहली रैपिड रेल, 12 लेन का एक्सप्रेसवे चल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे को जल्द ही मेरठ से हरिद्वार के बीच जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद वालों को अब हिंडन में ही वायुसेवा प्राप्त है। ईस्टर्न-वेस्टर्न पेरिफेरलवे का निर्माण हो चुका है। पीएम मोदी ने यूपी के पांचवें (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर) का लोकार्पण किया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भी पहचान दिला रहा है। विकास की यह कड़ी भावी पीढ़ी के लिए ग्रोथ इंजन के रूप में नई पहचान बनने जा रही है। यहां से कुछ दूरी पर यमुना अथॉरिटी में फिल्म सिटी, अपरैल पार्क, ट्वाय पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक सिटी के निर्माण कर युवाओं के लिए रोजगार लेकर आ रहे हैं। 

 

इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कुमार कश्यप, सांसद अतुल गर्ग, बागपत के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, महापौर सुनीता दयाल, विधायक नंदकिशोर गुर्जर, संजीव शर्मा, डॉ. मंजू शिवाच, धर्मेश सिंह तोमर, जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी, पूर्व सांसद अनिल अग्रवाल, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, जिलाध्यक्ष चैनपाल सिंह, महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल आदि मौजूद रहे। 

आदर्श राजनेता थे स्व. राजपाल त्यागी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति जब जनता की सेवा का माध्यम बनती है तो राजनेता को लोकप्रियता के चरम पर पहुंचाती है। राजपाल त्यागी जनता के दिल में स्थान बनाने वाले राजनेता थे। आदर्श राजनेता स्व. राजपाल त्यागी छह बार (दो बार निर्दल) विधायक रहे। वे दो बार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व दो बार कैबिनेट मंत्री रहे। यह उनकी लोकप्रियता व जनता के मन में उनके प्रति अगाध प्रेम को दर्शाता है। सीएम ने कहा कि माता-पिता की साधना और त्याग पुत्रों के कार्यों में झलकती है। तपस्या, साधना, लोककल्याण के प्रति समर्पण के भाव का परिणाम है कि अजीत पाल लगातार विधायक बनकर पिता के कार्यों को निरंतरता प्रदान कर रहे हैं। जनता का उत्साह उनके प्रेम और सेवा को प्रस्तुत कर रहा है। विधायक अजीत पाल त्यागी ने अतिथियों का स्वागत किया।

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में बनाई मजबूत पहचान : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that over past nine years Uttar Pradesh has established strong identity among country's leading economies

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का राज स्थापित होने से निवेश और विकास को मिली नई रफ्तार 

– सपा सरकार पर सीएम का तीखा हमला, बोले- सरकारी खजाने की हुई लूट और विकास रहा अधूरा

– यूपी में तीसरी बार बनेगी एनडीए की सरकार, भाजपा के नेतृत्व में लगेगी हैट्रिक

– उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई, सवा तीन करोड़ लोगों को मिला रोजगार

– नौ सालों में दंगा, कर्फ्यू और माफिया संस्कृति से मुक्त हुआ उत्तर प्रदेश

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों के कार्यों, कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कृषि, निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने में सफल रही है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान, सुरक्षा और विकास के संकट से जूझ रहा था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में राज्य ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कहा कि यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट होगी। एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी। मुख्यमंत्री बुधवार को लखनऊ में 'आज तक' न्यूज चैनल के विशेष कॉन्क्लेव 'पंचायत आज तक उत्तर प्रदेश' को संबोधित कर रहे थे। 
 

सीएम ने कहा कि 9 वर्षों की कार्यपद्धति और रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने है। जनता जनार्दन फैसला करने को तैयार है। 2003 से 2017 तक सपा और अन्य सरकारों की कार्यपद्धतियां भी सबके सामने है। हम लोगों ने पीएम मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में विकसित भारत को आगे बढ़ाने का काम किया।

डबल इंजन सरकार का लाभ हमने लिया है। इसमें यूपी सफल हुआ है। विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को केवल डबल इंजन की भाजपा की सरकार ही पूरा कर सकती है। गत वर्ष एक रिकॉर्ड टूटा था, इस बार एक नया टूटने वाला है। यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट करेगी। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

 

सपा सरकार में लूटा गया सरकारी खजाना

सीएम ने कहा कि सपा का विकास का मॉडल होता तो यूपी कबका डूब गया होता। सैफई खानदान यूपी को तबाह कर रहा था, उसका नमूना जेपीएनआईसी बिल्डिंग है। सपा ने जेपीएनआईसी को बनाने के लिए 200 करोड़ का डीपीआर बनाया था, लेकिन 800 करोड़ रुपए खर्च हो जाने के बाद भी अधूरा है। आदि गंगा की मान्यता वाली गोमती के रिवर फ्रंट के नाम पर 166 करोड़ रुपए का डीपीआर किया था लेकिन 1400 करोड़ रुपए खर्च हो गए। साथ ही कार्य भी अधूरा है। सपा सरकार में केवल सरकारी खजाना लूटा जा रहा था।

 

सीएम ने कहा कि 2016 दिसंबर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया। इसके बाद 15,200 करोड़ की लागत तय की गई। सरकार बदलने के बाद मई 2017 में उसकी समीक्षा की तो जमीन ही न होने का पता चला। इसमें बड़ी बेइमानी का पता चला तो टेंडर को रद्द किया गया। दो वर्ष जमीन खरीदने में लगे। 2018 में हमारे पास 90 प्रतिशत जमीन आ गई। इसके बाद 15,200 करोड़ का टेंडर मात्र 11,800 करोड़ रुपए का हो गया। इसी बजट में सपा सरकार से बेहतर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया गया। 

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सीएम ने कहा कि यूपी की एक्साइस पॉलिसी में भी डैकती डाली जाती थी। पहले मात्र 12 हजार करोड़ रुपए की एक्साइस ड्यूटी आती थी। हमारी सरकार के लिए कठिन था, लेकिन पॉलिसी की बदल दी। आज पांच गुना ज्यादा 63,000 करोड़ रुपए एक्साइस ड्यूटी के रूप में सरकार को मिल रहे हैं।

 

विपक्ष ने राम मंदिर के विरोध में अधिवक्ता खड़े किए

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले जब यूपी में सुरक्षा नहीं थी तो त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था, उपद्रव शुरू हो जाता है। आज हर समुदाय का पर्व व त्योहार शांतिपूर्ण ढ़ंग से पूरा हो रहा है। जिन लोगों ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई, वह आस्था की बात कर रहे हैं। साथ ही पवित्र हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई। देश के उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर रहे थे कि भगवान श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर के विरोध में अपने अधिवक्ता खड़े किए। जिन लोगों ने देश के खजाने को लूटा और पहचान का संकट खड़ा किया, आज उनको अयोध्या की चोरी दिख रही है लेकिन अपनी डकैती नहीं दिखती। 

 

अयोध्या चढ़ावा मामले में की गई कार्रवाई, हिंदू आस्था पर प्रहार करना न्याय संगत नहीं

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की घटना निश्चित ही सभी रामभक्तों को आहत करती है। वह एक इंडिपेंडेंट ट्रस्ट है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही ट्रस्ट ने कार्रवाई शुरू की, जो लोग चोरी करते हुए पकड़े गए उनकी व सहयोगियों की गिरफ्तारी हुई। नैतिक आधार पर भी दो इस्तीफे हुए, लेकिन उसके नाम पर अयोध्या को, श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करना अथवा हिंदू आस्था पर प्रहार करना, ये न्याय संगत नहीं है।

यूपी में जब यह आस्था के केंद्र देश के लिए मॉडल बन रहे और यूपी पहचान में आगे बढ़ रहा हैं तो सपा को पीड़ा हो सकती है। आस्था के केंद्रों से अर्थव्यवस्था को गति मिली है। इससे फूल बेचने वाले, रिक्शा चलाने वाले, होटल व टैक्सी संचालकों की भी आर्थिक स्थिति सुधरी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान एक नाविक ने 30 करोड़ रुपए की कमाई की थी, लेकिन ये उनको अच्छा नहीं लगाता है।

 

दोनों युवराजों को चांदी के चम्मच से खाने की आदत

सीएम ने कहा कि समृद्धि केवल दो खानदानों ने अपने नाम पर पेटेंट करा लिया है। ये एक गरीब की पीड़ा को नहीं समझ सकते। दोनों राजकुमारों ने जहां जन्म लिया है, वहां चांदी के चम्मच से खाने की आदत रही है। देर से सोकर उठने की आदत रही है। गर्मी, बरसात की पीड़ा कैसी होती है, इन्हें नहीं पता है। दोनों फीफा कप का आनंद लेने ऑस्ट्रेलिया और टूरिस्ट वीजा पर यूएस की यात्रा पर गए हैं। ये किसके पैसे से विदेश की यात्रा कर रहे हैं। यहां समाज को बांटने का काम करते है, लेकिन जनता सारी करतूतों को जानती है।

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मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम नहीं आई

सीएम ने कहा कि मुझे एक लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने से पहले एक सांसद के रूप में उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र से देश की संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ था। विभिन्न मुद्दों के लिए जूझता था और संसद में उठाने का प्रयास करता था। कभी-कभी निराशा भी होती थी। लगता था कि बीमारी व भूख से मरना, माफिया के सामने लोगों का नतमस्तक होना, बिजली व सामान्य जनसुविधाओं के लिए लोगों को तरसना, युवाओं के सामने पहचान का संकट, किसानों की आत्महत्या उत्तर प्रदेश की नियति बन गई है। पीड़ा के साथ लगता था कि क्या इन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है।

जब पार्टी ने मुझे शासन-सत्ता का संचालन करने का अवसर दिया और अब उसके सकारात्मक परिणाम को देखता हूं। ऐसा नहीं की मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम आई हो। मेरे साथ कोई भी व्यक्ति नहीं आया। गोरखपुर से पांच बार से सांसद रहा, वहां से भी एक व्यक्ति नहीं आया। जो टीम लखनऊ में मुझे मिली, उन्हीं के साथ काम करने का प्रयास किया। उसके परिणाम सबके सामने है। 

 

सीएम ने कहा कि यूपी को इन 9 वर्षों में पहचान के संकट से उबारा है। यूपी की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। महिला कर्मचारियों की उपस्थिति तीन गुना बढ़ी है। बीमारू राज्य की श्रेणी में रहने वाला उत्तर प्रदेश 9 वर्षों में देश के टॉप तीन अर्थव्य़वस्था के रूप में स्थापित हुआ है। ऐसे कौन से कारण थे, जो यूपी में नहीं हो सकते थे।

 

2014 के पहले भी थी एक डबल इंजन सरकार 

सीएम ने कहा कि 2014 के पहले भी एक प्रकार की डबल इंजन की सरकार थी। केंद्र में कांग्रेस व यूपीए की सरकार थी और यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दोनों मिलकर काम कर रहे थे लेकिन जनता में विश्वास नहीं था। इन दोनों की स्थिति एक तरफ कुआं और खाई जैसी थी। आज ये लोग जो उपदेश देते हैं, वह 2014 से पहले अंगीकार किया होता तो हाशिए पर नहीं गए होते।

 

यूपी का नौजवान अपनी पहचान छिपाता था, उसे नौकरी नहीं मिलती थी। उसने आवेदन किया तो योग्यता के बाद भी वो चयनित नहीं होता था। क्योंकि नौकरी पर कुछ चंद जनपदों और लोगों का कब्जा था। 2017 के पहले सुरक्षा की स्थिति बदलहाल थी, बेटी और व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। सत्ता के समानांतर माफियाओं की सरकारें चलती थीं। मीडिया, आम आदमी, व्यापारी, बेटी, उद्यमी कोई भी सुरक्षित नहीं था। व्यापारी और आम नागरिक भी घर से निकलता था तो ईश्वर से प्रार्थना करता था कि मुझे शाम को वापस परिवार का मुंह देखने का अवसर मिले।

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माफियाओं के साथ आज भी उन लोगों की सहानुभूति

सीएम ने कहा कि उद्यमी निवेश नहीं करना चाहता था। न सरकार की नीति थी और न नीयत थी। अराजकता चरम पर थी, माफिया के सामने सरकारें नाक रगड़ती हुई दिखाई देती थी। आज भी उनके भाषण सुनते होंगे, वे बोलते हैं कि सत्ता में आ गए तो जांच कराएंगे कि माफिया मारे क्यों जा रहे हैं। आज भी उन लोगों की सहानुभूति उन माफिया और उनके गुर्गों के प्रति है, जो जेल में है या जहन्नुम की यात्रा पर जा चुके हैं। उनकी सहानुभूति आज भी यूपी के नागरिकों के प्रति नहीं दिखती है।

 

23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच ले जाएं

सीएम ने कहा कि 2003 से 2026 के 23 वर्षों के रिपोर्ट कार्ड को लेकर जनता के बीच लेकर जाइए। पहले पांच साल मुलायम सिंह के, अगले पांच साल मायावती के व अगले पांच वर्ष अखिलेश के और पिछले 9 वर्षों के हमारे कार्यकाल के, जनता से उनकी संतुष्टि के बारे में पूछिए। आपको स्वर्गीय राजीव गांधी का वह वाक्य याद आज जाएगा जिसमें निराश होकर कहा था कि हम 100 रुपए भेजते है, लेकिन नीचे 15 रुपए ही पहुंचता है। आखिर 85 रुपए कौन खा जा रहा था।

ये किसी छात्र-छात्रा की छात्रवृत्ति, युवा की नौकरी, बुर्जुग-निराश्रित महिला की पेंशन, गरीब का अनाज, बहन-बेटी के लिए बनने वाले शौचालय का पैसा था। जिस 85 प्रतिशत पैसे पर पिछली सरकारें डकैती डालने का काम करती थीं। आज डीबीटी के माध्यम से 100 रुपए दिल्ली या लखनऊ से भेजने पर सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है। सभी तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंच रहा है। सीएम योगी ने कहा कि संकल्प और इच्छाशक्ति के दम पर देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य दंगा मुक्त, उपद्रव मुक्त, कर्फ्यू मुक्त और अपनी परांपरागत पहचान से युक्त हो सकता है, यह यूपी ने पिछले 9 वर्षों में करके दिखाया है।

 

अब इंसेफेलाइटिस से मौतें नहीं होतीं

सीएम ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष इसी सीजन में इंसेफेलाइटिस से मौतें होती थीं। हर परिवार सशंकित रहता था कि पता नहीं कौन सा बच्चा इसकी चपेट में आ जाए। हर वर्ष 1200 से 1500 मौतें होती थीं। आज इंसेफेलाइटिस से होनी वाली मौतें शून्य पर पहुंच चुकी हैं। भूख से मौतें अलग से होते थीं, आज उन्हें 100 प्रतिशत सैचुरेट कर चुके हैं। उन्हें जमीन के पट्टे मिले, उनका आवास बना, आयुष्मान कार्ड, रसोई गैस के सिलेंडर और रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

 

परंपरागत उद्यम फिर जीवित हुए

सीएम ने कहा कि परंपरागत उद्यम फिर से जीवित हो चुके हैं, जिन्हों कभी यूपी को पहचान दिलाई थी। आजादी के तत्काल बाद 1950 में देश की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 14 प्रतिशत था, जो 2017 से पहले घटकर मात्र 7 प्रतिशत के आस-पास रह गया था। यूपी अवनति की ओर था। तब अन्नदाता को पानी, बीज, बिजली नहीं मिलती थी। किसान खेत में जाने से डरता था। वहीं पैदावार फसल का दाम किसानों को नहीं मिलता था, क्योंकि इसका फायदा बिचौलिए उठाते थे। कृषि यूपी का आधार है लेकिन सरकार के स्तर पर कोई प्रोत्साहन नहीं था।

मैन्युफैक्चरिंग पावर जब परंपरागत उद्यम के साथ जुड़ती है, तब अर्थव्यवस्था को तेज करती है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए हमारे पास एमएसएमई का बेहतरीन नेटर्वक था लेकिन पिछली सरकारों के इंस्पेक्टर राज ने उसे तबाह कर दिया था। लोग विभागीय उत्पीड़न के शिकार होते थे। उस समय उद्यमी, कारीगर बन गया और किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया था। ऐसे में यूपी की अर्थव्यवस्था को डूबना ही था।

 

कृषि विकास दर को 18 प्रतिशत तक पहुंचाया

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। अमेरिका-ईरान व रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, उर्वरक की कमी स्वाभाविक रूप से हो जानी चाहिए थी, लेकिन यूपी में किसान को फर्टिलाइजर, बीज, कीटनाशक समय पर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के अंदर 10 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने 24 लाख हेक्टेयर जमीन को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में अप्रूव हुई सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को यूपी में डबल इंजन की सरकार ने पूरा कराया। उन्होंने बुंदेलखंड की अर्जुन सहायक परियोजना का भी जिक्र किया। बताया कि पहले महोबा के किसानों को प्रति बीघा 5 हजार रुपए मिलता था, आज उन्हीं अन्नदाता किसानों को 50 हजार रुपए मिल रहा है। उन्होंने बाणसागर परियोजना की सफलता की भी चर्चा की।

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बिचौलियों को हटाकर किसानों को दिलाया फायदा

सीएम ने कहा कि यूपी के किसानों को 10 घंटे बिजली खेती के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही बिजली उनके लिए मुफ्त है। प्रदेश में 16 लाख प्राइवेट ट्यूबवेल हैं, सबकी बिजली मुफ्त कर दी गई है। 2017 में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य का भुगतान बाकी था। गन्ना किसानों को अब तक 3.23 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का दाम किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम ने कहा कि आज 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है। 105 चीनी मिलें ऐसी हैं, जहां से 4 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को हो रहा है।

शेष में प्रयास किया जा रहा है कि वह 15 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान कर दें। आज किसान की किसी भी उपज को बिचौलियों की जगह उन्हीं से सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है। अगर बाजार में अच्छा दाम है तो किसान स्वतंत्र रूप से वहां बेच सकता है। अगर बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहा है तो एमएसपी में लागत के डेढ़ गुना दाम पर सरकार किसान से खरीदेगी और फिर उसे अपने स्तर पर बाजार तक पहुंचाने का काम करेगी।

आज किसान के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना समेत हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। खेती में जो विकास दर बढ़ी है, उस विकास दर के पीछे डबल इंजन सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का परिणाम देखने को मिल रहा है।

 

सीएम ने कहा कि पहले एमएसएमई दम तोड़ चुका था, कारीगर पलायन कर चुके थे, अब वह फिर से प्रगति कर रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी संचालित कर रहा है। सरकार हर यूनिट को 5 लाख रुपए की सामाजिक बीमा का कवर भी उपलब्ध करा रही है। सवा तीन करोड़ रुपए इसके साथ रोजगार से जुड़ चुके हैं। 

 

सुशासन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए कानून का राज जरूरी

सीएम ने कहा कि यूपी जैसे राज्य में सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कानून का राज स्थापित कर दीजिए। सुरक्षा का बेहतरीन माहौल दे दीजिए। अपने आप सुशासन के लक्ष्य प्राप्त होते दिखाई देंगे। यूपी सरकार ने प्रभावी ढ़ग से इसे बढ़ाने का काम किया। आज यह सुनना अच्छा लगता है, जब कहा जाता है कि यूपी के मॉडल को सुरक्षा के मायने में अन्य राज्यों ने स्वीकार किया है। 

 

हर योजना में शीर्ष पर यूपी

सीएम ने कहा कि पहले दिल्ली में सरकारी योजनाओं को लागू करने में टॉप राज्यों की सूची देखता था। यूपी का कहीं पता नहीं होता था, वह बाटम 3 में दिखता था। तब सरकारों की मानसिकता भी ऐसी ही थी। पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी जी के नेतृत्व में 100 से ज्यादा जनकल्याण की स्कीमें निकली हैं। आज हर एक स्कीम में यूपी का नाम टॉप में आता है। यूपी में योजना की सफलता का मतलब है कि वह देश के अंदर सफल हो गई। साथ ही दुनिया के लिए मॉडल बन गई। सीएम ने कहा कि आज गरीब को मकान, शौचालय मिला है। हर गरीब को सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं, जिसके लिए दशकों से लालायित था। अब कोई शिकायत लेकर नहीं आता। 

 

ई-पॉस मशीन से आई पारदर्शिता

सीएम ने कहा कि पूर्वी जनपदों में 2017 से पहले भूख से मौत होती थी। इस सरकार ने ई-पॉश मशीनें लगाईं। आज के दिन 16 करोड़ लोगों को यूपी में मुफ्त राशन दिया जा रहा है। ई-पॉस मशीन से 80 हजार उचित मूल्य की दुकानों को जोड़ा गया है। किसी गांव में उचित मूल्य की दुकान में थोड़ी भी घटतौली होने पर अलर्ट आ जाता है, जिसके बाद टीम फौरन छापा मारकर कार्रवाई करती है।

 

यूपी में बिजली खपत 35 हजार मेगावाट तक पहुंची

सीएम ने कहा कि यूपी के सभी 75 जनपदों में सामान्य रूप से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। 2017 के पहले पीक आवर में कुल बिजली आपूर्ति 15-16 हजार मेगावाट ही होती थी, आज आपूर्ति 33 से 35 हजार मेगावाट हो रही है। ये यूपी की नई स्थिति है।

 

यूपी में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव

सीएम ने कहा कि यूपी ने 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गईं हैं, जिससे निवेश बढ़ा है। 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 15 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और 7.50 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग की तैयारी चल रही है। ये नया यूपी है, जिसके तहत 65 लाख युवाओं को नौकरी दी गई है।

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सीएम ने कहा कि देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अच्छी सड़कें यूपी में मिलेंगी। देश के एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत यूपी का योगदान है। सबसे ज्यादा एयरपोर्ट यूपी में हैं। 2017 से पहले यूपी में केवल दो एयरपोर्ट संचालित थे, आज 17 हैं। इनमें पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। जिसमें पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम भी शामिल है। इसके पास 14 हजार एकड़ जमीन है, देश में किसी भी एयरपोर्ट के पास इतनी जमीन नहीं है। नए एयरक्राफ्ट आने पर सभी एयरपोर्ट से हवाई सुविधा और बढ़ेगी। प्रदेश सरकार पांच नए एयरपोर्ट पर भी काम कर रही है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि पहले कोई सोचता भी नहीं था कि आजमगढ़ में एयरपोर्ट होगा, लेकिन यह भी संभव हुआ। श्रावस्ती, अलीगढ़, मुरादाबाद, सोनभद्र में कोई एयरपोर्ट की कल्पना नहीं करता था, लेकिन वहां भी सपना पूरा किया गया। दिल्ली से मेरठ के बीच 12 लेन का एक्सप्रेसवे भी बन चुका है और रैपिड रेल भी आ चुकी है। देश की पहली इनलैंड वाटरवे वाराणसी-हल्दिया के बीच संचालित हो रही है। साथ ही यूपी के अंदर सबसे ज्यादा सात सिटी में मेट्रो सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।