दिल्ली-NCR से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में लगेगा 60 मिनट? 22 गांवों से होकर गुजरेगा 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) तक का सफर आने वाले कुछ दिनों में और आसान और तेज होने वाला है। एनएचएआई ने नोएडा एयरपोर्ट तक बेहतर और तेज कनेक्टिविटी देने के लिए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम तेज कर दिया गया है। इस योजना में करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस एक्सप्रेसवे परियोजना को 6 लेन में तैयार किया जाएगा। एलिवेटेड एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद जेवर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को नोएडा शहर के ट्रैफिक से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। आइए जानते हैं किन-किन रास्तों से होकर गुजरेगा ये एक्सप्रेसवे

किन जगहों से होकर गुजरेगी एक्सप्रेसवे

एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के लिए नोएडा प्राधिकरण अपने क्षेत्र के 22 गांवों की जमीन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराएगा। इसी जमीन पर एक्सप्रेसवे के लिए बड़े और मजबूत पिलर बनाए जाएंगे। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे सेक्टर-44, 99, 101 और 109 के अलावा वाजिदपुर, झट्टा, बदौली बांगर, कोंडली, गढ़ी और मोमनाथन समेत 22 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा के तीन गांव भी इस परियोजना में शामिल होंगे। एलिवेटेड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 50 किलोमीटर होगी, जिसमें करीब 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा की सीमा में आएगा। 50 किलोमीटर लंबा ये एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। अनुमान है कि एक्सप्रेसवे के चालू होने पर दिल्ली से एयरपोर्ट का सफर करीब एक घंटे से थोड़ा ज्यादा समय में पूरा किया जा सकेगा।

तय रूट में क्यों हुआ बदलाव

एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनने के बाद मयूर विहार, अक्षरधाम, पटपड़गंज, कालिंदी कुंज और सरिता विहार जैसे इलाकों से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना आसान हो जाएगा। वहीं, मंझावली पुल के जरिए फरीदाबाद और हरियाणा को भी सीधा सड़क संपर्क मिलेगा। सिंचाई विभाग की आपत्ति के बाद परियोजना के तय रूट में भी बदलाव किया गया है। सिंचाई विभाग से तटबंध पर एक्सप्रेसवे बनाने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद परियोजना का रास्ता बदल दिया गया है। नए प्लान के मुताबिक एक्सप्रेसवे अब नोएडा की ओर तटबंध से करीब पांच मीटर की दूरी पर बनाया जाएगा। आगे यह सड़क यमुना किनारे बनने वाली 120 मीटर चौड़ी सड़क से जुड़ जाएगी।

जल्द मिलेगी बेहतर सुविधा

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए एनएचएआई को जरूरी जमीन मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को एयरपोर्ट तक जल्द बेहतर सड़क सुविधा मिल सके। प्राधिकरण के मुताबिक रूट तय होने के बाद अब डीपीआर तैयार की जा रही है। निर्माण से पहले मिट्टी की मजबूती जांची जाएगी। इस पूरे एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ-साथ आगे इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी एनएचएआई की होगी।

दिल्ली से नोएडा एयरपोर्ट अब सिर्फ 60-70 मिनट दूर! ₹4,000 करोड़ का 50 KM एलिवेटेड एक्सप्रेसवे मंजूर, जानिए पूरा प्लान

Delhi to Jewar Airport: राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। नोएडा अथॉरिटी ने दिल्ली को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाले करीब 50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को फाइनल मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक का सफर काफी तेज और आसान होने की उम्मीद है।

News24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मेगा प्रोजेक्ट पर करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य दिल्ली, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करना और मौजूदा सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना है।

अक्षरधाम से सीधे जेवर एयरपोर्ट तक बनेगा कॉरिडोर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित एलिवेटेड एक्सप्रेसवे अक्षरधाम मंदिर के आसपास से शुरू होकर सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई करीब 50 किलोमीटर होगी, जिसमें लगभग 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा क्षेत्र में आएगा।

एक्सप्रेसवे का मुख्य हिस्सा छह लेन का होगा। वहीं, जहां से वाहन एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करेंगे, वहां संभावित जाम और ट्रैफिक बॉटलनेक को रोकने के लिए सड़क को आठ लेन तक चौड़ा किया जाएगा।इस परियोजना के निर्माण और आगे लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के पास होगी। फिलहाल, यह प्रोजेक्ट डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के चरण में है।

पहले यमुना के किनारे था रूट, फिर 5 मीटर बदला गया

इस एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में एक अहम बदलाव भी किया गया है। शुरुआती योजना के तहत सड़क को यमुना नदी के तटबंध के बिल्कुल साथ बनाने का प्रस्ताव था। हालांकि, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने इस एलाइनमेंट को लेकर बाढ़ के खतरे और निर्माण की संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताईं। इसके बाद अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्ग को करीब 5 मीटर नोएडा की तरफ खिसका दिया। एलाइनमेंट में इस बदलाव के बाद संशोधित योजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है।

सेक्टर-94 से मिलेगा प्रमुख कनेक्शन

नोएडा के सेक्टर-94 से करीब 120 मीटर चौड़ी सड़क इस एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के लिए प्रमुख पहुंच मार्ग के रूप में काम करेगी। निर्माण से पहले प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच भी की जाएगी। NHAI यह पता लगाएगा कि जमीन कितने भार को सुरक्षित रूप से सहन कर सकती है। इसके आधार पर आगे निर्माण से जुड़ी तकनीकी योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट का सफर 60-70 मिनट में होगा पूरा!

सबसे बड़ा फायदा यात्रा समय में कमी के रूप में देखने को मिल सकता है। परियोजना के चालू होने के बाद दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक का सफर करीब 60 से 70 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। इसका फायदा पूर्वी दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर मिलेगा। मयूर विहार, पटपड़गंज, आईपी एक्सटेंशन, कालिंदी कुंज और सरिता विहार जैसे इलाकों से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। इसके अलावा यह कॉरिडोर मंझावली पुल के जरिए फरीदाबाद से भी जुड़ सकेगा। इससे दिल्ली-NCR के कई प्रमुख इलाकों के बीच एयरपोर्ट कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

NCR के कई बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा

50 किलोमीटर का यह एलिवेटेड कॉरिडोर अकेले एक सड़क परियोजना नहीं होगा, बल्कि इसे NCR के व्यापक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। मौजूदा सड़क नेटवर्क पर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों का दबाव बढ़ने के साथ यह नया मार्ग भविष्य में ट्रैफिक को अलग-अलग रूट पर बांटने में भी मदद कर सकता है।

गाजियाबाद से जेवर तक रैपिड रेल-मेट्रो भी चलेगी

जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए केवल सड़क नेटवर्क पर ही काम नहीं हो रहा है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक एक नए 72.44 किलोमीटर लंबे ट्रांजिट कॉरिडोर की योजना भी सामने रखी है। इसमें दो तरह की सेवाएं एक ही कॉरिडोर पर प्रस्तावित हैं। यात्रियों के लिए 11 नमो भारत स्टेशन होंगे, जो तेज क्षेत्रीय यात्रा में मदद करेंगे।

इसके अलावा स्थानीय यात्रियों के लिए 18 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह कॉरिडोर गाजियाबाद के दिल्ली-मेरठ नमो भारत स्टेशन से जेवर एयरपोर्ट तक जाएगा। NCRTC के मुताबिक, इसका करीब 71.5 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि लगभग 1.29 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत होगा।

एयरपोर्ट के लिए बदल रहा पूरा कनेक्टिविटी नेटवर्क

कुल मिलाकर जेवर एयरपोर्ट के आसपास सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों स्तरों पर कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़े प्रोजेक्ट सामने आ रहे हैं। अक्षरधाम से जेवर तक प्रस्तावित 50 किलोमीटर का एलिवेटेड एक्सप्रेसवे और गाजियाबाद-जेवर नमो भारत-मेट्रो कॉरिडोर के पूरा होने पर NCR के अलग-अलग हिस्सों से एयरपोर्ट पहुंचना पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकता है। हालांकि, एलिवेटेड एक्सप्रेसवे अभी DPR चरण में है, इसलिए निर्माण शुरू होने और इसके पूरी तरह चालू होने की समयसीमा आगे की परियोजना मंजूरियों और निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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