वाटर ग्रिड और रिवर ड्रेजिंग का फॉर्मूला… नितिन गडकरी लेकर आए वो प्लान जिससे खत्म हो जाएगी बिहार की बाढ़?

बिहार में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से राज्य को बचाने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वाटर ग्रिड और रिवर ड्रेजिंग का फॉमूला पेश किया है। उन्होंने गुरुवार को पटना में ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026: भारत का उभरता हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि राज्य की बाढ़ की समस्या को कम खर्च में हल करने के लिए टेक्नोलॉजी को नई नीतियों और भविष्य के नजरिए के साथ जोड़ने की जरूरत है।

समिट के उद्घाटन के बाद केंद्रीय मंत्री ने बिहार को बाढ़-मुक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जल प्रबंधन, नदी की खुदाई, सुरक्षा दीवार बनाने और वॉटर ग्रिड की जरूरत पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि गडकरी ने कहा, “नेशनल हाईवे और पावर ग्रिड की तरह, वॉटर ग्रिड सिस्टम लागू करने और एक बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी ट्रांसफर करने से राज्य में ज्यादा पानी के बहाव को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।” उन्होंने बाढ़ के खतरे को कम करने के उपाय के तौर पर नदी की खुदाई पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “मैंने एनएचएआई के अधिकारियों से बात की। हम खुदाई करने और गाद को मुफ्त में हटाने को तैयार हैं। गाद का इस्तेमाल हाईवे बनाने के लिए मटीरियल के तौर पर किया जा सकता है। अगर बिहार सरकार ऐसी योजना की इजाजत देती है, तो मैं भरोसा दिला सकता हूं कि बाढ़ की समस्या को कम खर्च में अच्छे से हल किया जा सकता है।”

गडकरी ने कहा कि तटबंधों और सुरक्षात्मक दीवारों के निर्माण के जरिए गहरे जलमार्ग विकसित करने से जल परिवहन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे परिवहन लागत कम होगी और उद्योग, व्यापार तथा निवेश पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम तीन मीटर गहरा जलमार्ग बनाते हैं तो वाराणसी से बांग्लादेश के ढाका तक 3,000 टन क्षमता वाला बजरा ले जाया जा सकता है। भारत का कंटेनर बांग्लादेश जाने के लिए जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) और कोलंबो के रास्ते जाता है। प्रस्तावित मार्ग से लॉजिस्टिक्स लागत में काफी कमी आएगी। अगर आप उद्योग, व्यापार और कारोबार बढ़ाना चाहते हैं तो लॉजिस्टिक्स लागत कम करनी होगी।’’

गडकरी ने अपने कार्यकाल के दौरान नेपाल में कोसी नदी पर बांध परियोजना पूरी नहीं हो पाने पर अफसोस जताया।

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दिल्ली-NCR से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में लगेगा 60 मिनट? 22 गांवों से होकर गुजरेगा 6 लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) तक का सफर आने वाले कुछ दिनों में और आसान और तेज होने वाला है। एनएचएआई ने नोएडा एयरपोर्ट तक बेहतर और तेज कनेक्टिविटी देने के लिए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम तेज कर दिया गया है। इस योजना में करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस एक्सप्रेसवे परियोजना को 6 लेन में तैयार किया जाएगा। एलिवेटेड एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद जेवर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को नोएडा शहर के ट्रैफिक से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। आइए जानते हैं किन-किन रास्तों से होकर गुजरेगा ये एक्सप्रेसवे

किन जगहों से होकर गुजरेगी एक्सप्रेसवे

एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के लिए नोएडा प्राधिकरण अपने क्षेत्र के 22 गांवों की जमीन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराएगा। इसी जमीन पर एक्सप्रेसवे के लिए बड़े और मजबूत पिलर बनाए जाएंगे। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे सेक्टर-44, 99, 101 और 109 के अलावा वाजिदपुर, झट्टा, बदौली बांगर, कोंडली, गढ़ी और मोमनाथन समेत 22 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा के तीन गांव भी इस परियोजना में शामिल होंगे। एलिवेटेड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 50 किलोमीटर होगी, जिसमें करीब 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा की सीमा में आएगा। 50 किलोमीटर लंबा ये एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। अनुमान है कि एक्सप्रेसवे के चालू होने पर दिल्ली से एयरपोर्ट का सफर करीब एक घंटे से थोड़ा ज्यादा समय में पूरा किया जा सकेगा।

तय रूट में क्यों हुआ बदलाव

एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनने के बाद मयूर विहार, अक्षरधाम, पटपड़गंज, कालिंदी कुंज और सरिता विहार जैसे इलाकों से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना आसान हो जाएगा। वहीं, मंझावली पुल के जरिए फरीदाबाद और हरियाणा को भी सीधा सड़क संपर्क मिलेगा। सिंचाई विभाग की आपत्ति के बाद परियोजना के तय रूट में भी बदलाव किया गया है। सिंचाई विभाग से तटबंध पर एक्सप्रेसवे बनाने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद परियोजना का रास्ता बदल दिया गया है। नए प्लान के मुताबिक एक्सप्रेसवे अब नोएडा की ओर तटबंध से करीब पांच मीटर की दूरी पर बनाया जाएगा। आगे यह सड़क यमुना किनारे बनने वाली 120 मीटर चौड़ी सड़क से जुड़ जाएगी।

जल्द मिलेगी बेहतर सुविधा

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए एनएचएआई को जरूरी जमीन मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को एयरपोर्ट तक जल्द बेहतर सड़क सुविधा मिल सके। प्राधिकरण के मुताबिक रूट तय होने के बाद अब डीपीआर तैयार की जा रही है। निर्माण से पहले मिट्टी की मजबूती जांची जाएगी। इस पूरे एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ-साथ आगे इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी एनएचएआई की होगी।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को ₹80 करोड़ का टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Highway Infrastructure को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से ₹80.17 करोड़ का नया टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी को तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza पर यूजर फीस कलेक्शन के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) जारी हुआ है।

कॉन्ट्रैक्ट 90 दिन का है

यह कॉन्ट्रैक्ट NH-44 पर कृष्णागिरि से थुंबीपाड़ी (Km 94 से Km 180) सेक्शन के लिए मिला है। Palayam Fee Plaza Km 154+500 पर स्थित है। यह प्रोजेक्ट Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल के तहत 90 दिनों के लिए चलेगा।

कंपनी के मुताबिक, यह हाईवे बेंगलुरु, होसुर और धर्मपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक इलाकों को जोड़ता है। इस वजह से इस रूट पर यात्री यातायात, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। इससे टोल कलेक्शन की अच्छी संभावना बनती है।

इस साल लगातार मिल रहे हैं बड़े ऑर्डर

Highway Infrastructure को इस साल NHAI से कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल चुके हैं। फरवरी में कंपनी को गुजरात के Moti Naroli Fee Plaza समेत वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के कई टोल प्लाजा के संचालन के लिए ₹154.6 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसके अलावा हाल ही में कंपनी ने आंध्र प्रदेश में ₹329 करोड़ का टोलिंग कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया था।

मंगलवार को Highway Infrastructure का शेयर 4.06% चढ़कर ₹46.40 पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.01% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह लगभग 60% टूट चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 331.71 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।