क्रिकेट में पहली बार भारत बनाम जापान का एतिहासिक मैच होगा इस तारीख को

जापान क्रिकेट एसोसिएशन (JCA) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों की पुरुष टीमें भारत-जापान डिप्लोमैटिक रिलेशन की 75वीं सालगिरह के जश्न को शुरू करने के लिए एक टी 20 इंटरनेशनल मैच खेलेंगी। सुज़ुकी कप मंगलवार, 22 सितंबर को टोचिगी प्रीफेक्चर के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में होगा।

यह मैच “स्पोर्ट 75” का पहला कदम होगा, यह एक पहल है जो जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक समिट के दौरान हुए समझौते से निकली है और इसका मकसद खेल के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच लोगों के लेन-देन और सहयोग को बढ़ावा देना है।

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने कहा: “बीसीसीआई इस ऐतिहासिक मौके का हिस्सा बनकर बहुत खुश है, जब भारत और जापान की पुरुष टीमें जापान में एक खास टी 20 इंटरनेशनल मैच के लिए एक साथ आ रही हैं।” सैकिया ने कहा, “भारत और जापान के बीच एक मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते और दोस्ती है, और हमें खुशी है कि क्रिकेट दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के 75 साल पूरे होने के जश्न का हिस्सा होगा, और हम इस मैच को मुमकिन बनाने के लिए जापान क्रिकेट एसोसिएशन (जेसीए) को उनकी कोशिशों के लिए धन्यवाद देते हैं।

बीसीसीआई का मानना है कि क्रिकेट की ग्रोथ उसके पारंपरिक इलाकों से आगे बढ़नी चाहिए, और दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बोर्ड के तौर पर, हम उस ग्रोथ में योगदान देने की अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं। बीसीसीआई जापान में क्रिकेट को और मजबूत करने और आने वाले सालों में इस रिश्ते को और मजबूत करने के लिए जेसीए के साथ मिलकर काम करेगा।” जेसीए के सीईओ नाओकी मियाजी ने कहा: “मौजूदा वर्ल्ड चैंपियंस को जापान में बुलाना हमारे एसोसिएशन के लिए एक अहम पल है। यह सच में एक यादगार मौका होगा।”

UP-Japan Meet : जापानी प्रतिनिधिमंडल ने देखी वीमेन पावर लाइन 1090 की कार्यप्रणाली, समझा महिला सुरक्षा मॉडल

UP-Japan Meet : जापानी प्रतिनिधिमंडल ने देखी वीमेन पावर लाइन 1090 की कार्यप्रणाली, समझा महिला सुरक्षा मॉडल

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यूपी–जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत जापानी प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की महिला सुरक्षा के लिए संचालित वीमेन पावर लाइन 1090 का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने यहां महिलाओं की सुरक्षा, शिकायतों पर त्वरित सहायता, काउंसलिंग और जागरूकता से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझा। इस दौरान उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और जापानी प्रतिनिधिमंडल के बीच महिला सुरक्षा, स्कूली स्तर पर जागरूकता, बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से अनुभव साझा किए गए।

 

दौरे के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि वीमेन पावर लाइन 1090 महिलाओं को कठिन, भय या उत्पीड़न की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में कार्य करती है। प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने में रुचि दिखाई कि किसी महिला की ओर से सहायता के लिए संपर्क किए जाने के बाद उसकी समस्या को किस तरह समझा जाता है और कैसे उस तक उचित सहायता पहुंचाई जाती है।

 

शिकायत से काउंसलिंग तक की प्रक्रिया समझी

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने 1090 की कार्यप्रणाली को करीब से समझते हुए कॉल रिसीव करने से लेकर महिला की समस्या को समझने, आवश्यक काउंसलिंग उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार संबंधित सहायता तंत्र से जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं की बात ध्यानपूर्वक सुनना और उन्हें सहज एवं सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेष रूप से काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि कई बार महिलाएं डर, तनाव या झिझक के कारण अपनी बात खुलकर नहीं रख पातीं। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित कर्मी संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और उन्हें उपयुक्त सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करते हैं।

 

स्कूलों में बचपन से सुरक्षा जागरूकता पर जोर

बैठक के दौरान महिला सुरक्षा को केवल शिकायत निवारण तक सीमित न रखते हुए प्रीवेंटिव अवेयरनेस पर भी चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने स्कूलों में विद्यार्थियों को कम उम्र से ही सुरक्षा, अधिकारों और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के तरीकों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर विचार साझा किए। बच्चों में पांच वर्ष की आयु के बाद सुरक्षा संबंधी जागरूकता विकसित करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसमें बच्चों को अपनी सुरक्षा, संवाद करने और किसी कठिन परिस्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद मांगने के बारे में सहज तरीके से जानकारी देने के दृष्टिकोण पर विचार किया गया।

 

जापान और यूपी के अनुभवों पर हुआ संवाद

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने जापान में महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में अपने अनुभव साझा किए। वहीं उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने प्रदेश में संचालित महिला सुरक्षा और सहायता तंत्र की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने माना कि जापान और उत्तर प्रदेश की सामाजिक एवं संस्थागत परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए किसी भी मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समझना और लागू करना आवश्यक है। इसके बावजूद महिला सुरक्षा, बच्चों में जागरूकता, प्रभावी संवाद, काउंसलिंग और महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में अनुभवों का आदान-प्रदान दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।

 

सुरक्षा से आत्मविश्वास और सशक्तीकरण तक

चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिला सुरक्षा का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित करना भी है। जब महिलाएं यह महसूस करती हैं कि कठिन परिस्थिति में उन्हें समय पर सहायता मिल सकती है, तो वे अपनी समस्याओं को सामने रखने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में अधिक सहज महसूस करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने माना कि महिला सुरक्षा, जागरूकता, काउंसलिंग और सहायता सेवाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन व्यवस्थाओं को मजबूत करने से महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलता है।

 

अनुभवों के आदान-प्रदान से सहयोग की नई संभावनाएं

यूपी–जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत हुआ यह दौरा भारत-जापान संबंधों के सामाजिक आयाम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे विषयों पर दोनों पक्षों के बीच अनुभव साझा होने से भविष्य में जागरूकता, काउंसलिंग, बच्चों की सुरक्षा शिक्षा और महिला सहायता सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं बन सकती हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने वीमेन पावर लाइन 1090 की व्यवस्था को समझते हुए उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए विकसित किए गए संस्थागत तंत्र की जानकारी हासिल की। वहीं इस संवाद से उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को जापान में अपनाई जा रही महिला सुरक्षा और जागरूकता की विभिन्न कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर मिला।

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

जापान और उत्तरप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026' में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की निवेश संभावनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध लंबे समय से विश्वास पर आधारित रहे हैं और उत्तर प्रदेश तथा जापान के बीच बढ़ती साझेदारी इस विश्वास को और मजबूत करेगी।

 

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जापान और उत्तर प्रदेश के बीच इस महत्वपूर्ण पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर तथा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत किया और कहा कि जापान के उद्योग जगत के लिए उत्तर प्रदेश में तेजी से अवसर खुल रहे हैं।

 

भारत की आर्थिक सोच को चार स्तंभों में समझाया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर समझा जा सकता है। इनमें सोशल, डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, समावेशी विकास, मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन और कानूनों तथा नियमों का सरलीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से लगभग 6 से 8 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि के दौर में है। इसके साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। इससे भारत को आने वाले वर्षों में लंबे समय तक टिकाऊ विकास की मजबूत क्षमता मिली है।

 

जापान के निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का संदेश

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में आने वाले वर्षों में 6 से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का लंबा दौर देखने को मिल सकता है। इस विकास यात्रा में रेलवे, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृषि समेत लगभग हर क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जापान के उद्योग जगत से भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज तेजी से बदल रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए मजबूत आधार तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि जापान के निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है- भारत में निवेश करें, उत्तर प्रदेश में निवेश करें। सरकार निवेशकों की सहायता और सुविधा के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेशकों की सफलता ही भारत और उत्तर प्रदेश की सफलता है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान की मजबूत साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

ईरान जंग ने बदला दशकों पुराना तेल कारोबार:खाड़ी देशों का होर्मुज पर भरोसा खत्म हुआ, अब नई पाइपलाइन पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे

छह महीने पहले तक खाड़ी देशों के लिए तेल बेचना बेहद आसान था। सबसे कम लागत में तेल निकालो, होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दुनिया तक पहुंचाओ और सबसे ज्यादा कीमत देने वाले देशों को बेच दो। लेकिन ईरान के साथ जंग के बाद यह मॉडल बदल गया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई लगातार प्रभावित रही। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी तथा बढ़ी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से हर दिन गुजरने वाला कच्चा तेल 2 करोड़ बैरल से घटकर 37 लाख बैरल रह गया। इसी वजह से सऊदी अरब, UAE और कुवैत समेत कई खाड़ी देश अब होर्मुज पर निर्भरता कम करने में जुट गए हैं। नई पाइपलाइन बिछाई जा रही हैं, पुरानी लाइनों की क्षमता बढ़ाई जा रही है और एशिया में ऑयल स्टोरेज तैयार किया जा रहा है। UAE चाहता है, पूरा तेल होर्मुज से गुजरे बिना निर्यात हो इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल UAE है। इस देश का कारोबार काफी हद तक व्यापार और समुद्री रास्तों पर निर्भर है। लेकिन होर्मुज संकट का सबसे ज्यादा असर भी उसी पर पड़ा। इसलिए अब वह ऐसे नए रास्ते तैयार कर रहा है, जहां से व्यापार और तेल निर्यात होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर न रहे। इसके लिए ओमान की खाड़ी के किनारे बसे फुजैरा में दूसरी तेल पाइपलाइन का काम तेजी से चल रहा है। यह पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को सीधे फुजैरा से जोड़ेगी, जिससे टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रोजेक्ट पूरी होने के बाद UAE की होर्मुज स्ट्रेट को बायपास कर तेल निर्यात करने की क्षमता बढ़कर 36 लाख बैरल प्रतिदिन हो जाएगी। यानी कि अबू धाबी के लगभग पूरे ऑनशोर तेल को बिना होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश किए सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकेगा। ऑनशोर तेल का मतलब है जमीन पर स्थित तेल इलाके से निकाला गया कच्चा तेल। इसके उलट ऑफशोर तेल समुद्र के अंदर बने तेल कुओं से निकाला जाता है। UAE सिर्फ तेल ही नहीं, गैस कारोबार को भी सुरक्षित बनाने में जुटा है। उसकी सरकारी कंपनी एडीएनओसी (ADNOC) ने प्राकृतिक गैस परियोजनाओं में 8.2 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है। साथ ही पूर्वी तट पर नया LNG निर्यात टर्मिनल बनाने की योजना है, ताकि भविष्य में गैस निर्यात भी होर्मुज स्ट्रेट पर कम निर्भर रहे। सऊदी ने रेड सी को बनाया नया रास्ता होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के बाद सऊदी अरब ने अपनी 1,201 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा दिया है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान बनी यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों को रेड सी के यानबू पोर्ट से जोड़ती है। अब सऊदी अरब इसी पाइपलाइन के जरिए हर दिन 70 लाख बैरल कच्चा तेल रेड सी के रास्ते दुनिया के बाजारों तक भेज रहा है। सरकार इसकी क्षमता में 10 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन की और बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। साथ ही रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के लिए समानांतर नई पाइपलाइन बनाने पर भी काम चल रहा है। कुवैत और इराक भी नए रास्ते तलाश रहे कुवैत सऊदी अरब और अन्य अरब देशों के साथ ऐसी पाइपलाइन पर चर्चा कर रहा है, जो उसके तेल क्षेत्रों को रेड सी या ओमान के बंदरगाहों से जोड़ सके। वहीं, इराक और जॉर्डन ने कई साल से रुकी पाइपलाइन परियोजना फिर शुरू कर दी है। इसके जरिए हर दिन 10 लाख बैरल तक तेल रेड सी के अकाबा बंदरगाह तक भेजा जा सकेगा। इराक, किरकुक से सीरिया के भूमध्यसागरीय तट तक जाने वाली क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत भी तेज कर रहा है। भारत-जापान-साउथ कोरिया में भी तेल जमा कर रहे खाड़ी देशों की रणनीति सिर्फ नई पाइपलाइन बनाने तक सीमित नहीं है। वे भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अतिरिक्त तेल भंडारण भी तैयार कर रहे हैं। ताकि अगर भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद हो जाए, तो तेल पहले से ही उसके बाहर मौजूद रहे और सप्लाई नहीं रुके। नए रास्ते भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हालांकि, होर्मुज का विकल्प भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। सऊदी का ज्यादा तेल अब रेड सी और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से गुजर रहा है, जहां यमन के हूती विद्रोही लगातार जहाजों पर हमले कर रहे हैं। इसी सप्ताह रेड सी में एक जहाज पर हुए हमले में छह लोगों की मौत हुई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाड़ी देश होर्मुज पर अपनी निर्भरता जरूर कम करेंगे, लेकिन उसे पूरी तरह छोड़ नहीं पाएंगे। क्रिस्टोल एनर्जी की चीफ कैरोल नखले कहती हैं, “होर्मुज स्ट्रेट के फायदे इतने ज्यादा हैं कि उसे पूरी तरह बदला नहीं जा सकता। लेकिन अब केवल उसी पर भरोसा करना भी संभव नहीं है।” —————————— यह खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू की मुश्किल- ट्रम्प को खुश करें या कुर्सी बचाएं:गाजा से सेना हटाने के फैसले पर इजराइल में विरोध, 2 महीने बाद चुनाव हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 30 जुलाई को दावा किया कि गाजा को लेकर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। इसके साथ ही इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हट जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…

बुलेट-ट्रेन प्रोजेक्ट लेट होने से जापान के पूर्व मंत्री नाराज:कहा- हमने पूरी मेहनत की लेकिन भारतीय मंत्री का रवैया खराब, उन्होंने वादा नहीं निभाया

भारत-जापान के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारतीय मंत्री का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं और जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गए। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। ‘प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला’ माकिहारा के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। दरअसल, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी। इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है। माकिहारा ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 100% यकीन है कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है। हालांकि, भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 2017 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी के पूर्व PM शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में इस प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन किया था। दोनों शहरों के बीच 508 किमी का सफर बुलेट ट्रेन तीन घंटे में तय करेगी। अभी नॉर्मल ट्रेन से यह सफर तय करने में सात-आठ घंटे लगते हैं। रूट पर 12 स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार, भोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती हो सकते हैं। इनमें मुंबई स्टेशन अंडरग्राउंड होगा। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में ₹88 हजार करोड़ जापानी निवेश मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की पहले अनुमानित लागत करीब ₹2 लाख करोड़ है। इसमें से लगभग ₹88 हजार करोड़ जापान दे रहा है। यह पैसा जापान की सरकारी एजेंसी JICA बेहद सस्ती शर्तों पर दे रही है। इस कर्ज पर सिर्फ 0.1% सालाना ब्याज लगेगा, इसे चुकाने के लिए 50 साल मिलेंगे और पहले 15 साल तक किस्त नहीं देनी होगी। जापान अब तक इस परियोजना के लिए 1,150 अरब येन (करीब ₹55 हजार करोड़) मंजूर कर चुका है। इसके अलावा वह बुलेट ट्रेन की शिंकानसेन तकनीक, ट्रेनिंग और तकनीकी विशेषज्ञता भी भारत को उपलब्ध करा रहा है। रूट का 7 किमी हिस्सा समुद्र के अंदर होगा 508 किमी के रूट में से 351 किमी हिस्सा गुजरात और 157 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से गुजरेगा। कुल 92% यानी 468 किमी लंबा ट्रैक एलिवेटेड रहेगा। मुंबई में 7 किमी का हिस्सा समुद्र के अंदर होगा। 25 किमी का रूट सुरंग से गुजरेगा। 13 किमी हिस्सा जमीन पर होगा। बुलेट ट्रेन 70 हाईवे, 21 नदियां पार करेगी। 173 बड़े और 201 छोटे ब्रिज बनेंगे। शुरुआत 10 कोच वाली 35 बुलेट ट्रेनों से होगी। ये ट्रेनें रोजाना 70 फेरे लगाएंगी। एक बुलेट ट्रेन में 750 लोग बैठ सकेंगे। बाद में 1200 लोगों के लिए 16 कोच हो जाएंगे। 2050 तक इन ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 105 करने का प्लान है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- सुजुकी दो-तिहाई कारें भारत में बना रही:जापान की मदद से देश में खाद के 1000 कारखाने लगेंगे; PM ताकाइची को बहन कहा भारत और जापान ने आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। भारत-जापान जॉइंट इकोनोमिक फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के लिए ‘जापान बिजनेस वीक’ शुरू करने का ऐलान किया। इसके तहत PMO के सीनियर अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों से बातचीत करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

वर्ल्ड अपडेट्स:जापान के पूर्व मंत्री बोले- भारत के रवैये से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट लेट हुआ; वादे नहीं निभाए, बार-बार फैसला बदला

भारत-जापान के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारतीय पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। X पर की गई पोस्ट में उन्होंने लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारत का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गया। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलता रहा। उन्होंने यह भी लिखा कि इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। माकिहारा के मुताबिक, जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। पूर्व मंत्री ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, ये आरोप हिदेकी माकिहारा की X पोस्ट और उनके साझा किए गए लेख पर आधारित हैं। भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 6 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 3 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,250 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 261.79 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 77,763.91 पर और निफ्टी 95.15 अंक या 0.39 प्रतिशत बढ़कर 24,270.85 पर बंद हुआ। आज लगभग 2182 शेयरों में बढ़त हुई,1879 शेयरों में गिरावट आई और 188 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,मैक्स हेल्थकेयर,बजाज फिनसर्व,अपोलो हॉस्पिटल्स और डॉ.रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि, गिरावट वाले शेयरों में एक्सिस बैंक,M&M, SBI,L&T और टेक महिंद्रा शामिल रहे।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज़्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद निफ्टी IT(1.7 प्रतिशत),निफ्टी फार्मा (1.7 प्रतिशत)और निफ्टी मेटल (0.7 प्रतिशत) की बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर निफ्टी PSU बैंक में सबसे ज़्यादा गिरावट (1.5 प्रतिशत) आई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी (-1.30 प्रतिशत),निफ्टी ऑटो (-0.4 प्रतिशत),निफ्टी मीडिया (-0.4 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.3 प्रतिशत) और निफ्टी बैंक (-0.16 प्रतिशत) का नंबर रहा।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट स्तर पर बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव और प्रॉफ़िट-बुकिंग के बावजूद,घरेलू बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार को अच्छे ग्लोबल संकेतों से मदद मिली। US लेबर मार्केट के नरम आंकड़ों के बाद ब्याज दरों के माहौल में नरमी आने की उम्मीदें बढ़ीं हैं। भारत-जापान समिट के अच्छे नतीजों और IT सेक्टर में लगातार रिकवरी से भी बाजार का मूड बेहतर हुआ। घरेलू मोर्चे पर,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी एक अहम पॉजिटिव फ़ैक्टर है। आगे चलकर बाजार का फोकस वित्त वर्ष 2027 के पहली तिमाही के नतीजों और कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर रहेगा। मॉनसून पर भी बाजार की नजर रहेगी। आगे बाजार में गिरावट पर खरीदारी का रुख बने रहने की संभावना है।

निफ्टी व्यू

कोटक सिक्योरिटीज के VP टेक्निकल रिसर्च,अमोल अठावले का कहना है कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में अच्छी बढ़त रही। निफ्टी 0.89 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ है। जबकि सेंसेक्स में 663 अंकों की तेजी रही। सेक्टरों की बात करें तो रियल्टी इंडेक्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 7.20 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि एनर्जी इंडेक्स में 1.40 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक्निकल नज़रिए से देखें तो शॉर्ट-टर्म करेक्शन के बाद निफ्टी ने एक बार फिर 23,800 के आसपास सपोर्ट लिया और तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा। वीकली चार्ट पर, इसने एक बुलिश कैंडल बनाया है और’हायर बॉटम’फॉर्मेशन भी बनाए रखा है,जो काफी हद तक पॉजिटिव संकेत है।

शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का मिजाज पॉजिटिव है,लेकिन ट्रेडर्स के लिए सबसे अच्छी रणनीति गिरावट पर खरीदारी और तेज़ी पर बिकवाली की होगी। नीचे की तरफ,24,150-24,000 अहम सपोर्ट जोन होंगे। जबकि बुल्स के लिए 24,500-24,700 अहम रेजिस्टेंस एरिया होंगे। हालांकि,24,000 के नीचे जाने पर मार्केट का सेंटीमेंट बदल सकता है। 24,000 के नीचे गिरावट आने पर 23,800-23,750 के लेवल दोबारा टेस्ट हो सकते हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

एलकेपी सिक्योरिटीज में तकनीकी विश्लेषक वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने वीकली चार्ट पर एक छोटी कैंडलस्टिक बनाकर हफ़्ते की क्लोजिंग की। जबकि डेली चार्ट हालिया तेजी के बाद एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (रेंज-बाउंड कंसोलिडेशन) का संकेत दे रहा है। इस कंसोलिडेशन के बावजूद,मार्केट का ओवरऑल रुख बुलिश बना हुआ है। इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। यह बड़ा पॉजिटिव संकेत है।

इंडेक्स के लिए तत्काल सपोर्ट 57,500–57,200 के लेवल पर हैं। जबकि रेजिस्टेंस 58,500–58,800 के आसपास दिख रहा है। अच्छे रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो के लिए ट्रेडर्स सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं। जब इंडेक्स रेजिस्टेंस जोन के पास पहुेचे तो प्रॉफ़िट बुकिंग करने की सलाह होगी।

अमोल अठावले का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए हायर बॉटम सपोर्ट 57,500 के आस-पास है। इस लेवल के ऊपर,पॉजिटिव मोमेंटम 58,700-59,000 की तरफ जारी रह सकता है। इसके विपरीत,57,500 के नीचे गिरावट आने पर अपट्रेंड कमजोर पड़ सकता है। इस लेवल के नीचे,ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजीशन से बाहर निकलना पसंद कर सकते हैं।

 

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बुलेट ट्रेन को लेकर भारत-जापान की बड़ी डील! 2027 की टाइमलाइन और 7000 किमी नेटवर्क पर काम अब दौड़ेगा

भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर कोलैबरेशन को बड़ा पुश देते हुए जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना के प्राथमिकता वाले सेक्शन पर साल 2027 तक कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम साने ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है। इसके मुताबिक यह फ्लैगशिप बुलेट ट्रेन परियोजना दोनों नेताओं के बीच एक व्यापक संयुक्त समझौते का मुख्य आधार है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस नेटवर्क में E10 ट्रेनों को शामिल करने के मील के पत्थर जैसे लक्ष्य को भी स्वीकार किया।

7000 किलोमीटर के नेशनल नेटवर्क के लिए पीएम मोदी का न्यौता

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत के भावी हाई-स्पीड कॉरिडोर में भागीदारी के अवसर तलाशने के लिए स्पष्ट रूप से आमंत्रित किया है। इसका उद्देश्य 7000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के भारत के व्यापक विज़न को हकीकत में बदलना है। इस ट्रांजिट अलाइनमेंट को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक एमओयू साइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जापान की हाइटेक मोबिलिटी तकनीकों को भारत की बाजार क्षमता और मानव संसाधनों के साथ जोड़ना है।

शिंकेन्सन तकनीक से बदल जाएगी भारतीय रेलवे की तस्वीर

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के प्रयासों में एक बड़ा मील का पत्थर है। देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में यह इंटर सिटी मोबिलिटी को पूरी तरह से बदलने और घरेलू रेलवे क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से पूरी की जा रही है। यह पूरा कॉरिडोर जापान की प्रसिद्ध शिंकेन्सन तकनीक और परिचालन मानकों का उपयोग करके डेवलप कियाजा रहा है। इसमें ट्रैक्शन, इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन्स के लिए हाइटेक टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है।

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का रणनीतिक विकास

रेलवे के बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर दोनों नेताओं ने ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक लचीले भारत-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया है। जापान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क नेटवर्क, पुलों और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए मजबूत समर्थन का संकल्प लिया। दोनों देशों ने इस क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी और बिम्सटेक भागीदारों से जोड़ने वाली औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं को विकसित करने की भी प्रतिबद्धता जताई।

इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी हो रही है तेज प्रगति

दोनों देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए जापानी विकास सहायता से जुड़े चार अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी लगातार प्रगति हो रही है:

  • मुंबई मेट्रो लाइन 11
  • बेंगलुरु मेट्रो फेज 3
  • महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा का बुनियादी ढांचा
  • पंजाब में सस्टेनेबल हॉर्टिकल्चर
  • पर्यटन, संस्कृति और जापानी भाषा को बढ़ावा

इन आर्थिक और ढांचागत समझौतों को मजबूती देने के लिए दोनों देश लोगों के बीच आपसी संपर्क और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ा रहे हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि साल 2025 में दोनों देशों के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों की संख्या 540000 को पार कर गई है। उन्होंने द्विपक्षीय पर्यटन को बढ़ावा देने और कांसुलर मामलों पर बातचीत का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत में निहंगो पार्टनर्स कार्यक्रम के माध्यम से जापानी भाषा की शिक्षा को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। साथ ही युवाओं के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने में एनिमे, मंगा, गेमिंग और फिल्मों जैसे रचनात्मक उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

भारत के राज्यों और जापानी प्रांतों के बीच दोस्ती का नया नेटवर्क

इस रिश्ते को जमीनी स्तर पर और ठोस बनाने के लिए सब-नेशनल डिप्लोमेसी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्थानीय आर्थिक नेटवर्क बनाने में भारतीय राज्यों और जापानी प्रान्तों और नगर पालिकाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच इंडिया-जापान गवर्नर्स नेटवर्क फॉर फ्रेंडशिप एंड एक्सचेंज की स्थापना का स्वागत किया गया। वर्तमान में इन क्षेत्रीय जोड़ियों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग सक्रिय है-

  • उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रान्त
  • आंध्र प्रदेश और टोयामा प्रान्त
  • गुजरात और शिज़ुओका प्रान्त
  • अहमदाबाद और हमामात्सू शहर
  • महाराष्ट्र और वाकायामा प्रान्त
  • केरल और सैन’इन क्षेत्र
  • तमिलनाडु और एहिमे प्रान्त
  • दिल्ली और फुकुओका प्रान्त
  • तेलंगाना और किताक्युशु शहर

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Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

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India-Japan trade: AI से लेकर नेक्स्ट-जेन मोबिलिटी तक… भारत-जापान संबंधों का नया अध्याय, जानिए बड़ी बातें

India-Japan trade: भारत और जापान के रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची अपने पहले भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें अपनी ‘छोटी बहन’ बताया। दोनों नेताओं के बीच नई दिल्ली में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति भवन में जापान की प्रधानमंत्री तकाइची का भव्य स्वागत किया गया। उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इसके बाद नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी और तकाइची के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

भारत और जापान ने गुरुवार को कई अहम पहलों की घोषणा की। इसमें एक इकोनॉमिक पार्टनरशिप फ्रेमवर्क और मिलिट्री इक्विपमेंट को मिलकर डेवलप करने के लिए एक डिफेंस एग्रीमेंट शामिल है। इन पहलों की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापान की अपनी समकक्ष सनाए तकाइची के बीच समिट बातचीत के बाद की गई। मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए, जिसमें इकोनॉमिक सिक्योरिटी पर एक घोषणा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग पर एक जॉइंट स्टेटमेंट और एनर्जी सप्लाई चेन में सहयोग को मजबूत करने का एक एग्रीमेंट शामिल है।

कल्चरल वैल्यू से लेकर मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक 

प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को जारी एक बयान में कहा, “भारत और जापान की इकोनॉमी एक-दूसरे की पूरक हैं। कल्चरल वैल्यू से लेकर मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक, हम अपनी सोच और कामों में भी समानताएं शेयर करते हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते की नींव अटूट आपसी भरोसे पर टिकी है।” PM मोदी ने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने इकोनॉमिक सिक्योरिटी के लिए एक जॉइंट रोडमैप बनाया है।

सप्लाई चेन को और मजबूत और लचीला बनाएंगे

पीएम मोदी ने कहा, “इसके जरिए हम सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटीरियल जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में सप्लाई चेन को और मजबूत और लचीला बनाएंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान ने एनर्जी सिक्योरिटी के क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा, “इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के ज़रिए, हम इंडिया में 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र प्लांट लगाएंगे। इससे इंडियन गांवों में खुशहाली आएगी और गांव की रोजी-रोटी और मजबूत होगी।”

भारत-जापान में कई अहम करार

PM मोदी और तकाइची की मौजूदगी में इकोनॉमिक सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी, जरूरी टेक्नोलॉजी और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के एरिया में कोऑपरेशन से जुड़े जरूरी मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) एक्सचेंज किए गए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इंडिया और जापान डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू होने की 75वीं एनिवर्सरी के मौके पर ऑर्गनाइज़ किए जाने वाले इवेंट्स की एक लिस्ट पर भी सहमत हुए।

पीएम मोदी ने इंडिया-जापान रिलेशन की मजबूती और इंपॉर्टेंस पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ ही दिन पहले, G7 समिट में मैंने कहा था कि आज के ग्लोबल उथल-पुथल के माहौल में आपसी भरोसा हमारा सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक रिसोर्स है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे गर्व है कि इंडिया-जापान पार्टनरशिप इस टेस्ट में पूरी तरह खरी उतरी है।”

PM मोदी ने कहा कि जापान की सटीक टेक्नोलॉजी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमताओं का मेल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नई तेजी और ताकत देगा। उन्होंने कहा, “डिफेंस सेक्टर में हमने भारत और जापान के बीच पहले जॉइंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर एक एग्रीमेंट साइन किया है।” जापानी प्रधानमंत्री तीन दिन के भारत दौरे पर हैं।

जापानी पीएम ने क्या कहा?

इस दौरान तकाइची ने कहा कि दोनों पक्ष इन्वेस्टमेंट और इनोवेशन कोऑपरेशन के जरिए इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक मजबूत इकोनॉमी बनाने के लिए कमिटेड हूं और 17 स्ट्रेटेजिक सेक्टर में इन्वेस्टमेंट के जरिए जापान की सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजिकल क्षमताओं को बढ़ाने का लक्ष्य रखती हूं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘डेवलप्ड इंडिया’ लॉन्च किया, जो 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनाने का एक नेशनल लक्ष्य है और वह भारत के डेवलपमेंट प्रोसेस को जोर-शोर से आगे बढ़ा रहे हैं।” जापानी प्रधानमंत्री ने कहा, “इस तरह हम भविष्य में इन्वेस्टमेंट के ज़रिए अपने देशों को मज़बूत और खुशहाल बनाने के लक्ष्य को शेयर करते हैं।”

हाल के सालों में भारत और जापान के रिश्ते मजबूत हुए हैं। 2014 में दोनों देशों को स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। दोनों देश 2027 में डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू होने की 75वीं सालगिरह मनाएंगे। सिक्योरिटी, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट, इकोनॉमिक सिक्योरिटी, साइंस और टेक्नोलॉजी, कल्चर और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई एरिया में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इस बाइलेटरल फ्रेमवर्क में अब 70 से ज्यादा डायलॉग मैकेनिज्म शामिल हैं।

स्ट्रेटेजिक एजेंडा को आगे बढ़ाने का मुख्य फोरम

प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल अगस्त में टोक्यो में हुए 15वें सालाना समिट के लिए जापान गए थे। सालाना समिट दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप के स्ट्रेटेजिक एजेंडा को आगे बढ़ाने का मुख्य फोरम है। PM मोदी ने जापानी PM के साथ विस्तृत बातचीत की।

इस बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते बढ़ाने, सेमीकंडक्टर्स के लिए एक मजबूत और लचीली सप्लाई चेन बनाने और जरूरी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर फोकस किया गया। बातचीत के बाद, दोनों पक्षों के आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर एक जॉइंट डिक्लेरेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग पर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है।

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