Diwali-Chhath Special Trains: दिवाली-छठ पर घर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत, नवंबर के अंत तक चलेंगी 6 स्पेशल ट्रेनें

Diwali-Chhath Special Trains: दीपावली और छठ पूजा के बाद घर लौटने वाले यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। यात्रियों की सुविधा के लिए मुंबई सेंट्रल से अहमदाबाद और इंदौर के बीच चलने वाली तीन जोड़ी यानी कुल छह स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। भारतीय रेलवे के मुताबिक, इन ट्रेनों का संचालन 25 से 30 नवंबर 2026 तक अलग-अलग निर्धारित तारीखों पर जारी रहेगा। इससे मुंबई से गुजरात और मध्य प्रदेश की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को त्योहारों के बाद भी अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं का फायदा मिलेगा।

मुंबई-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन

  • ट्रेन नंबर 09087 (मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद): यह स्पेशल ट्रेन हर बुधवार चलेगी। इसका संचालन 25 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
  • ट्रेन नंबर 09088 (अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल): वापसी दिशा में यह ट्रेन हर गुरुवार चलेगी और इसका संचालन 26 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा।

मुंबई-इंदौर के बीच दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनें

इंदौर और मुंबई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को दो अलग-अलग स्पेशल ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलेगा:-

  • ट्रेन नंबर 09079 (मुंबई सेंट्रल-इंदौर): यह ट्रेन रविवार और मंगलवार को चलेगी। इसका संचालन 29 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
  • ट्रेन नंबर 09080 (इंदौर-मुंबई सेंट्रल): वापसी दिशा में यह ट्रेन सोमवार और बुधवार को चलेगी। यह सेवा 30 नवंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

इसके अलावा दूसरी जोड़ी में:-

  • ट्रेन नंबर 09085 (मुंबई सेंट्रल-इंदौर): यह ट्रेन सोमवार और शुक्रवार को चलेगी और 27 नवंबर 2026 तक संचालित होगी।
  • ट्रेन नंबर 09086 (इंदौर-मुंबई सेंट्रल): वापसी में यह ट्रेन मंगलवार और शनिवार को चलेगी। इसका संचालन 28 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।

टिकट बुकिंग शुरू, जल्दी करें रिजर्वेशन

पश्चिम रेलवे के अनुसार इन सभी विस्तारित स्पेशल ट्रेनों के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो चुकी है। यात्री अपनी सीट IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए बुक कर सकते हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों पर मौजूद PRS (Passenger Reservation System) काउंटर से भी टिकट लिया जा सकता है। रेलवे ने बताया है कि ये सभी सेवाएं स्पेशल ट्रेन के रूप में चलेंगी और इन पर स्पेशल किराया लागू होगा।

सफर से पहले टाइमिंग और स्टॉपेज जरूर चेक करें

इन ट्रेनों के ठहराव, टाइमटेबल और कोच में बदलाव की जानकारी के लिए यात्रियों को यात्रा से पहले रेलवे के आधिकारिक पूछताछ पोर्टल या NTES ऐप पर जानकारी चेक करने की सलाह दी गई है। त्योहारों के बाद ट्रेनों में भीड़ को देखते हुए यात्रियों के लिए बेहतर यही रहेगा कि वे सीट उपलब्ध रहते ही टिकट बुक कर लें, ताकि आखिरी समय में कन्फर्म टिकट के लिए परेशानी न हो। फिलहाल, इस इस स्पेशल ट्रेनों की वजह से दिवाली-छठ में भीड़ कम होने की उम्मीद है।

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ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका

Indian Railways Reservation System: इंडियन रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए रिजर्वेशन को तेज एवं सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) शुरू करने जा रहा है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित PRS लगभग चार दशकों से रेलवे रिजर्वेशन की रीढ़ रहा है। 1986 में शुरू किए गए इस सिस्टम ने पुराने मैनुअल रिजर्वेशन सिस्टम की जगह ली थी।

तब से यह ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने के लिए विकसित हुआ है। मई में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने घोषणा की थी कि 40 साल पुराने PRS (Passenger Reservation System) सिस्टम को अगस्त से शुरू करके चरणों में अपग्रेड किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग, सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC और यात्रियों की पूछताछ से जुड़ी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि नया PRS मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सकेगा। रेलवे के मुताबिक, नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा।

जबकि मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। इसी सिस्टम के जरिए टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और यात्रियों की पूछताछ जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। अब रेलवे इस पुराने सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले PRS से बदलने की तैयारी कर रहा है।

भारी ट्रैफिक को संभालने की क्षमता

तत्काल टिकट के समय IRCTC वेबसाइट पर अचानक बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम हो सकता है। Indianexpress.com से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पब्लिक रिलेशंस (PR) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि नए सिस्टम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च की गई IRCTC बीटा वेबसाइट इसी बदलाव का हिस्सा है।

अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा। पुराने PRS को पूरी तरह से बदलने से पहले नए सिस्टम का अलग-अलग यूजर लोड स्तरों पर चरणों में टेस्ट किया जाएगा। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नए यूजर-फ्रेंडली लुक और फील को चरण-दर-चरण लागू करने में लोड-आधारित टे्ट शामिल होगा, क्योंकि हम पुराने PRS से नए PRS की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारतीय रेलवे में अभी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम क्या है?

PRS एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसका उपयोग भारतीय रेलवे रिजर्व-टिकटों के मैनेज के लिए करता है। यह यात्रियों को टिकट बुक करने, बदलने और रद्द करने की सुविधा देता है। साथ ही सीट आवंटन, वेटलिस्ट, RAC स्टेटस, रिजर्वेशन चार्ट और यात्री पूछताछ को भी संभालता है। यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन सेंटरों को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इससे टिकट रिजर्वेशन की प्रक्रिया आसान और अधिक कुशल हो जाती है।

PRS ने रेलवे टिकट बुकिंग को कैसे बदला?

PRS ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ले लिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ। यह एक राष्ट्रव्यापी रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म बन गया। इससे यात्री कंट्री-वाइड नेटवर्क फॉर कंप्यूटराइज्ड एन्हांस्ड रिजर्वेशन एंड टिकटिंग (CONCERT) के माध्यम से देश भर में अलग-अलग जगहों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।

फिलहाल यात्री रेलवे रिजर्वेशन काउंटर, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से रिजर्वेशन कर सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ-साथ RailOne ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इससे यात्री कहीं से भी टिकट बुक कर सकते हैं।

अगस्त से शुरू हुआ बदलाव, धीरे-धीरे होगा पूरा माइग्रेशन

रेलवे ने मई में घोषणा की थी कि करीब चार दशक पुराने PRS को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। इसका काम अगस्त से शुरू किया जाएगा। धर्मेंद्र तिवारी के मुताबिक, नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू हो चुका है। रेलवे इसे एक साथ पूरी तरह बदलने के बजाय धीरे-धीरे और अलग-अलग चरणों में लागू कर रहा है।

पहले नए सिस्टम को अलग-अलग स्तर के यूजर लोड पर टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जैसे-जैसे सिस्टम स्थिर और सक्षम साबित होगा। फिर पुराने PRS से नए PRS की ओर माइग्रेशन बढ़ाया जाएगा। रेलवे के मुताबिक, नए सिस्टम के यूजर इंटरफेस और सुविधाओं को भी धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा रहा है।

तत्काल टिकट वालों को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग को लेकर होती है। टिकट विंडो खुलते ही लाखों लोग एक साथ बुकिंग की कोशिश करते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट या ऐप पर दबाव बढ़ जाता है। IRCTC के अनुसार, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला।

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल टिकट बुकिंग में 5 प्रतशित से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

प्रति मिनट 1.5 लाख की होगी बुकिंग

रेल मंत्रालय के अनुसार, अपग्रेड किया गया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। जबकि मौजूदा सिस्टम में यह क्षमता लगभग 32,000 टिकट की है। यह प्रति मिनट 40 लाख से ज्यादा पूछताछ को भी प्रोसेस करेगा। जबकि अभी यह संख्या लगभग 4 लाख है। नए सिस्टम में टिकट बुकिंग और पूछताछ के लिए कई भाषाओं वाला और इस्तेमाल में आसान इंटरफेस होगा। इसे रेलवे रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा स्केलेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता होगी

रेल मंत्रालय के अनुसार:-

मौजूदा PRS: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट क्षमता है।

नया PRS: 1.5 लाख से ज्यादा टिकट काटने की प्रति मिनट क्षमता होगी।

मौजूदा पूछताछ क्षमता: करीब 4 लाख प्रति मिनट होगी।

नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से ज्यादा प्रति मिनट होगी।

इसका मतलब है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन, सीट और रिजर्वेशन से जुड़ी बड़ी संख्या में यात्रियों की पूछताछ भी एक साथ संभाल सकेगा।

देशभर में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का दबाव कितना बढ़ गया है?

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए गए। इससे साफ है कि रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में पुराने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

नई व्यवस्था में मिलेगा ज्यादा आसान और मल्टी-लैंग्वेज इंटरफेस

नए PRS में यात्रियों के लिए ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस देने की तैयारी है। यानी टिकट बुकिंग और पूछताछ को ज्यादा आसान बनाने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। नए सिस्टम को ज्यादा स्केलेबल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ने पर भी सिस्टम पर अचानक अत्यधिक दबाव न पड़े।

सिर्फ PRS ही नहीं, रेलवे का पूरा डिजिटल नेटवर्क हो रहा आधुनिक

CRIS ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें UTS, NTES, IRCTC Rail Connect, RailOne, RailMadad, CoachMitra, Rail Sugam और Rail Rajbhasha शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और रेलवे से जुड़ी कई अन्य रेलवे से जुड़ी सर्विस मिलती हैं। नए PRS और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर टेक्नोलॉजी के तालमेल से रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

40 साल पुराने सिस्टम से Next-Generation PRS तक

भारतीय रेलवे का PRS चार दशक पहले मैनुअल रिजर्वेशन की जगह इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग व्यवस्था लेकर आया था। अब वही सिस्टम एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अगर चरणबद्ध तरीके से हो रहा यह माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में ट्रेन टिकट बुकिंग ज्यादा तेज, ज्यादा स्थिर और ज्यादा डिजिटल हो सकती है। यानी रेलवे के इस बदलाव का असली असर सिर्फ वेबसाइट की स्पीड पर नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के टिकट बुकिंग अनुभव पर दिखाई दे सकता है।

रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों ने जून 2025 और जून 2026 के बीच PRS के ज़रिए 65.08 करोड़ रिजर्व्ड टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (यानी 89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। IRCTC ने कहा कि 15 जुलाई को अपनी बीटा वेबसाइट लॉन्च करने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार हुआ है।

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महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े (15-15 दिन के समय) की तुलना करने पर पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। पांच मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।