नीम करौली बाबा के कैंची धाम में ऐसा क्या खास, दुनिया भर से खिंचे चले आते हैं लोग?

भारत में नीम करोली बाबा को मानने वाले लोगों की संख्या लंबे समय से रही है और उनकी सादगी, सेवा और आध्यात्मिक सोच लोगों को अपनी ओर खींचती है। लेकिन अब इन्हें विदेशों में भी काफी जाना जाता है। बाबा के जीवन और उनकी बातों से प्रभावित होकर देश-विदेश के कई लोग उनके आश्रमों तक पहुंचे। यही वजह है कि उत्तराखंड का कैंची धाम भी आज श्रद्धालुओं और बाबा को जानने वाले लोगों के लिए खास जगह बन चुका है। नीम करोली बाबा से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनके भक्तों में आम लोगों के साथ कई बड़ी विदेशी हस्तियों के नाम भी बताए जाते हैं। बाबा का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों की दिलचस्पी का कारण बनी हुई हैं और उनके आश्रम में पहुंचने वाले लोग उनके विचारों और आध्यात्मिक जीवन के बारे में जानना चाहते हैं।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा पहुंचे कैंची धाम

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और एक्टर-प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा ने नवंबर 2022 में उत्तराखंड के कैंची धाम का दौरा किया था। दोनों ने यहां नीम करोली बाबा के दर्शन किए और आश्रम में कुछ समय बिताया। बाबा की सादगी, शांति और प्रेम से जुड़ी शिक्षाएं आज भी लोगों को अट्रैक्ट करती हैं।

लैरी पेज और जेफरी स्कॉल भी आए

कैंची धाम पहुंचने वाली विदेशी हस्तियों में गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज और ईबे के को-फाउंडर जेफरी स्कॉल भी है। डॉ. लैरी ब्रिलियंट भी कुछ समय आश्रम में रहे थे। बाद में उन्होंने गूगल के परोपकार से जुड़े काम में भी भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, यह जगह लोगों को खुद को समझने और दुनिया को एक अलग नजरिए से देखने का मौका देती है।

स्टीव जॉब्स की आध्यात्मिक यात्राएप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स सिर्फ 19 साल की उम्र में भारत आए थे। साल 1974 में उन्होंने कई महीने भारत में घूमते हुए एक आध्यात्मिक गुरु की तलाश की। इसी दौरान वह नीम करोली बाबा के कैंची धाम आश्रम भी पहुंचे, लेकिन तब तक बाबा का निधन हो चुका था। उनके बायोग्राफर वॉल्टर इसाकसन के अनुसार, भारत और कैंची धाम की इस यात्रा ने जॉब्स की सोच पर गहरा असर डाला।

मार्क जुकरबर्ग ने किये दर्शन

मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने साल 2015 में कैंची धाम का दौरा किया था। उस समय वह फेसबुक के काम को लेकर एक मुश्किल दौर से गुजर रहे थे और कुछ समय रुककर चीजों को समझना चाहते थे। बताया जाता है कि स्टीव जॉब्स ने ही उन्हें भारत और इस आश्रम की यात्रा करने की सलाह दी थी। बाद में जुकरबर्ग ने भी माना कि भारत की इस यात्रा ने उन्हें फेसबुक के असली मकसद को समझने में मदद की।

कैंची धाम की खासियत और वहां का माहौल

उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच बना कैंची धाम चारों तरफ से हरियाली और शांत माहौल से घिरा हुआ है। यहां पहुंचते ही शहर की भागदौड़ से अलग एक सुकून भरा माहौल महसूस होता है। आश्रम में नीम करोली बाबा की याद से जुड़ें मंदिर हैं, जहां भक्त बाबा की शिक्षाओं के बारे में जानने आते हैं। यही कारण है कि कैंची धाम सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों से आने वाले लोगों के बीच भी खास पहचान रखता है।

क्या है कैंची धाम जाने का सही समय और आसान रास्ता?

कैंची धाम उत्तराखंड की कुमाऊं पहाड़ियों में है और नैनीताल से करीब 38 किलोमीटर दूर बताया जाता है। यहां सड़क मार्ग से नैनीताल, हल्द्वानी और काठगोदाम से आसानी से पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से आने वालों के लिए काठगोदाम सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी या लोकल ट्रांसपोर्ट लेकर कैंची धाम पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग से आने पर पंतनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीक है, जो करीब 65 किलोमीटर दूर है और वहां से कैब लेकर आश्रम पहुंचा जा सकता है। कैंची धाम जाने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। जुलाई और अगस्त में भारी बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर सफर मुश्किल हो सकता है, इसलिए इस समय यात्रा करने से बचना बेहतर है। जून में होने वाले सालाना भंडारे में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। आश्रम आमतौर पर सुबह जल्दी खुलता है और शाम की आखिरी प्रार्थना के बाद बंद हो जाता है, लेकिन मौसम के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।

Hanuman Ansh Box Office Collection: ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 144 करोड़ रुपये कमाए, फिल्म ने लागत से 50 गुना ज्यादा की कमाई

Hanuman Ansh Box Office Collection: ‘हनुमान अंश’ ने 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ 2026 की सबसे बड़ी ‘स्लीपर हिट’ फिल्मों में से एक बन गई है। लगभग 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने अपनी लागत से 50 गुना ज़्यादा कमाई की है।

‘हनुमान अंश’ अब 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली सबसे छोटे पैमाने की हिंदी फिल्म बन गई है। यह रिकॉर्ड पहले ‘द कश्मीर फाइल्स’ के नाम था। सैकनिलक (Sacnilk) के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ ने सिनेमाघरों में अपने 31वें दिन 22.75 करोड़ रुपये (नेट) कमाए, जिससे भारत में इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 144.40 करोड़ रुपये और कुल नेट कलेक्शन 122.13 करोड़ रुपये हो गया।

पिछले महीने रिलीज़ होने पर बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की शुरुआत धीमी रही थी। हालांकि, दो हफ़्तों के बाद, लोगों की बातचीत (वर्ड ऑफ़ माउथ) और सोशल मीडिया रिव्यूज़ की वजह से इसे ज़बरदस्त लोकप्रियता मिली। ‘टॉक्सिक’ और ‘मिर्ज़ापुर’ जैसी फिल्मों से टक्कर मिलने के बावजूद, ‘हनुमान अंश’ ने अपने लिए काफी चर्चा बटोरी है।

अब, यह 11 सितंबर को दुनिया भर में रिलीज़ होगी। इससे बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में इसे बड़ी बढ़त मिलेगी। फिल्म के सीक्वल की घोषणा भी पहले ही हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगरा के एक मल्टीप्लेक्स में दर्शकों से बात करते हुए डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने ‘हनुमान अंश 2’ की पुष्टि की। विशाल ने बताया कि आने वाली फिल्म नीम करौली बाबा के जन्मस्थान, फिरोज़ाबाद पर केंद्रित होगी और फिर दिखाएगी कि कैसे और क्यों वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए आगरा, मथुरा और अन्य जगहों पर गए।

कौन थे नीम करौली बाबा?

नीम करौली बाबा एक हिंदू आध्यात्मिक गुरु और भगवान हनुमान के परम भक्त थे। उनका जन्म का नाम आमतौर पर लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है, और उनका जन्म 1900 के आसपास मौजूदा उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था। 11 सितंबर, 1973 को वृंदावन में उनका निधन हो गया।

बाबा से जुड़ी कई कहानियां चमत्कारों और असाधारण घटनाओं से भरी हैं, जिनमें से कई उनके भक्तों द्वारा सुनाई गई हैं। क्योंकि ये बातें मुख्य रूप से भक्तों की यादों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्यों के बजाय, उनसे जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाना ज़्यादा सही है।

Hanuman Ansh Box office: 100 करोड़ी फिल्म बनी ‘हनुमान अंश’, 2 करोड़ के बजट में बनकर तैयार हुई मूवी ने रचा इतिहास

Hanuman Ansh Box office: बॉक्स ऑफिस पर लगभग चमत्कारिक वापसी के दो हफ़्ते बाद, भक्ति फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ की नेट कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित यह फ़िल्म, 100-करोड़ क्लब में शामिल होने वाली अब तक की सबसे छोटी हिंदी फ़िल्म (स्केल के मामले में) है। यह फ़िल्म अपने पांचवें हफ़्ते में अब तक का सबसे बड़ा वीकेंड दर्ज करने की राह पर है।

‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ का आंकड़ा छुआ

‘हनुमान अंश’ की शुरुआत बहुत खराब रही; इसने पहले दिन सिर्फ़ ₹10 लाख कमाए और शुरुआती दो हफ़्तों में कुल ₹1.48 करोड़ की नेट कमाई की। सिनेमाघरों में 16वें दिन फ़िल्म की कमाई में ज़बरदस्त उछाल आया। जैसे-जैसे लोगों के बीच इसकी चर्चा बढ़ी, ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर तीसरे और चौथे हफ़्ते में रिकॉर्ड-तोड़ कमाई की।

इसने अकेले चौथे हफ़्ते में ₹61 करोड़ कमाए। यह बढ़त पांचवें वीकेंड में भी जारी रही। फ़िल्म ने शुक्रवार को ₹10 करोड़ और शनिवार को ₹16.50 करोड़ की नेट कमाई की। इससे इसकी घरेलू कमाई ₹99 करोड़ से थोड़ी ज़्यादा हो गई। रविवार सुबह के शो ने ‘हनुमान अंश’ को ₹100 करोड़ के पार पहुंचा दिया। अब यह इस आंकड़े को पार करने वाली 143वीं हिंदी फ़िल्म बन गई है। ₹2 करोड़ के बजट के साथ, ‘हनुमान अंश’ इस मशहूर क्लब में शामिल होने वाली सबसे छोटी हिंदी फ़िल्म है, जिसने ‘द कश्मीर फाइल्स’ (₹15 करोड़) को काफ़ी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है।

‘हनुमान अंश’ ने ‘पुष्पा: द राइज़’ और ‘सिंघम’ को पीछे छोड़ा

रविवार दोपहर 1 बजे तक, फ़िल्म की घरेलू कमाई ₹105 करोड़ से थोड़ी ज़्यादा हो गई है। इससे इस भक्ति फ़िल्म को अपने से कहीं बड़ी कई फ़िल्मों की कुल कमाई को पीछे छोड़ने में मदद मिली है। रविवार को इसने स्पोर्ट्स ड्रामा ’83’ (₹104 करोड़), सलमान खान की ‘सिकंदर’ (₹103 करोड़), अजय देवगन की ‘सिंघम’ (₹100 करोड़) और अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा: द राइज़’ (हिंदी वर्शन – ₹105 करोड़) की कुल कमाई के आंकड़े को पार कर लिया। इस महीने होने वाली इंटरनेशनल रिलीज़ के साथ फ़िल्म के और बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

‘हनुमान अंश’ के बारे में सब कुछ

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘हनुमान अंश’ कहानी है लक्ष्मी नारायण नाम के एक दुखी युवक की, जो अपनी मां की मौत के बाद ईश्वर की खोज में एक आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है। जीवन, मृत्यु और इंसानी दुखों के सवालों के जवाब ढूंढते हुए वह पूरे उत्तर भारत की यात्रा करता है और आखिर में सम्मानित संत नीम करौली बाबा बन जाता है। इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में शोभिनव सत्य हैं, और उनके साथ विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल भी हैं।

IRCTC ने सावन के महीने में दिया भक्तो को नया तोहफा, सिरडी के साई बाबा के दर्शन करे इस सस्ते पैकेज से!

IRCTC ने श्रद्धालुओं के लिए एक खास टूर पैकेज पेश किया है। इस पैकेज के जरिए ट्रैवलर को महाराष्ट्र के तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। यह पैकेज आपके लिए सुविधाजनक है, क्योंकि इसमें यात्रा के दौरान टिकट, होटल और आने-जाने की व्यवस्था को लेकर आपको अलग से ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी होगी। मतलब एक ही पैकेज में यात्रा और दर्शन से जुड़ी कई सुविधाएं मिलेंगी।

 

 

ट्रैवल शेड्यूल

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यह टूर कुल 5 दिन और 4 रातों का है। जर्नी हर गुरुवार को शुरू होगी और सोमवार को वापस लौटेंगे। सफर पुष्पक एक्सप्रेस (12533/12534) से होगा। पैसेंजर कानपुर सेंट्रल, उन्नाव, ऐशबाग, बादशाह नगर या गोमती नगर से ट्रेन पकड़ सकते हैं। गुरुवार शाम ट्रेन से निकलने के बाद रातभर सफर रहेगा और शुक्रवार दोपहर करीब 4:15 बजे मनमाड स्टेशन पहुंचेंगे।

 

 

दर्शनीय तीर्थ स्थल

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मनमाड स्टेशन पहुंचने के बाद IRCTC की एसी गाड़ी पैसेंजर को शिरडी के होटल तक लेकर जाएगी। होटल में आराम करने के बाद शाम को साईं बाबा के दर्शन के लिए समय मिलेगा। शनिवार सुबह नाश्ते के बाद त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और शनि शिंगणापुर मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। दर्शन के बाद वापस शिरडी के होटल में लौटकर आराम किया जा सकेगा। लेकिन दोपहर के खाने का खर्च पैसेंजर को खुद उठाना होगा।

 

 

 

पैकेज फैसिलिटीज

पैकेज में 2AC या थर्ड इकोनॉमी में आने-जाने का कन्फर्म ट्रेन टिकट शामिल है। शिरडी में दो रात होटल में ठहरने के साथ दोनों दिन सुबह का नाश्ता भी मिलेगा। स्टेशन से होटल और मंदिरों तक आने-जाने के लिए शेयरिंग बेस पर एसी गाड़ी की सुविधा रहेगी। पैसेंजर की सुरक्षा के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस भी पैकेज में शामिल है। पैकेज की शुरुआती कीमत करीब ₹14,145 से ₹14,910 के बीच है।

 

 

कैंसिलेशन पॉलिसी

यात्रा से 15 दिन पहले टिकट कैंसिल करने पर सिर्फ ₹250 काटे जाएंगे। 8 से 14 दिन पहले कैंसिल करने पर कुल राशि का 25 प्रतिशत और 4 से 7 दिन पहले कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत राशि काटी जाएगी। यदि ट्रिप में 4 दिन से कम समय बचा है, तो कैंसिलेशन पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। बुकिंग के लिए IRCTC Tourism की ऑफिशल वेबसाइट irctctourism.com पर जाकर सीट बुक की जा सकती है।

 

शिरडी, त्र्यंबकेश्वर और शनि शिंगणापुर जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन करने के लिए यह टूर पैकेज परफेक्ट है। ट्रेन यात्रा, होटल, नाश्ता और घूमने की सुविधा एक ही पैकेज में मिलने से यात्रा की प्लानिंग आसान हो जाती है।

चलो बुलावा आया है! सावन में ऐसे बनाएं 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का परफेक्ट प्लान

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए खास माना जाता है। इस महीने में देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग महिमा और धार्मिक महत्व होता है, जहां सावन में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। ऐसे ही है ये ज्योतिर्लिंग जहां सावन में भक्तों की धूम मची होती है:

Somnath Jyotirlinga (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

Somnath Temple:हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - Somnath Temple Facts A Jyotirlinga Full Of Miracles And Mysteries Somnath Temple -

सावन में सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती है। यहां रुद्राभिषेक, शिव आरती और मंत्र जाप के साथ सावन सोमवार का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) – उज्जैन, मध्य प्रदेश

Somnath Temple Shivling Images HD | First Jyotirlinga Wallpapers

सावन में बाबा महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन भक्त करते हैं। हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है।

Kedarnath Jyotirlinga (केदारनाथ ज्योतिर्लिंग) – उत्तराखंड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन में केदारनाथ धाम में शिव भक्त हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूजा करते हैं। मंदिर में अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में सावन में ऊर्जा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।

Kashi Vishwanath Jyotirlinga (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग) – वाराणसी, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए पवित्र यात्रा – Sadhana Shop

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। भक्त गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां आरती और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

Trimbakeshwar Jyotirlinga (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) – नासिक, महाराष्ट्र

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है - A Great Hindu Temple kashi vishvanath temple-Varanasi

सावन में यहां रुद्र पूजा, अभिषेक और मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के कारण सावन में इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Baidyanath Jyotirlinga (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) – देवघर, झारखंड

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सावन में बैद्यनाथ धाम में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में शिव भक्तों की आस्था और भक्ति का अनोखा रूप दिखाई देता है।

Rameshwaram Jyotirlinga (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) – तमिलनाडु

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सावन में रामेश्वरम मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक होते हैं। भक्त पवित्र कुंडों में स्नान कर शिव आराधना करते हैं। समुद्र किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सावन में धार्मिक आस्था और शांति का खास केंद्र बन जाता है।

Nageshwar Jyotirlinga (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर - स्थान, वास्तुकला, तस्वीरें

सावन में मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेते है और प्रार्थना करते हैं। सावन में यहां भक्तों की भीड़ और शिव भक्ति की धूम देखने लायक होता है।

Bhimashankar Jyotirlinga (भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

Gallery - Jyotirlinga Bhimashankar

सावन में यहां शिव भक्तों की लंबी लाइन लगती हैं। पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। हरियाली से घिरे इस धाम में सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में नजर आते हैं।

Grishneshwar Jyotirlinga (घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, संभाजीनगर (Maharashtra) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन के महीने में मंदिर को सजाया जाता है और भक्त जलाभिषेक व पूजा करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां दर्शन और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Omkareshwar Jyotirlinga (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग) – मध्य प्रदेश

सावन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विशेष! उत्तम स्वास्थ्य, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सावन में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त नर्मदा जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली शिव आरती भक्तों को आध्यात्म की अनुभूति देती है।

Mallikarjuna Jyotirlinga (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग) – आंध्र प्रदेश

ऋग्वेद में आया सोमनाथ मंदिर का जिक्र, चंद्रमा से सीधा कनेक्शन; जानें कैसे बना ज्योतिर्लिंग

सावन में मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। भक्त शिव-पार्वती की आराधना कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सावन के दौरान यह धाम भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।

पहाड़ों की चोटियों पर बसे भारत के वो मंदिर जहां सिर्फ कदम चलते है!

भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है, जहां कई प्राचीन मंदिर पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर बने हुए हैं। इन मंदिरों तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन भक्त कठिन रास्तों को पार करके भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ों की शांति और सुंदर वातावरण इन मंदिरों की खासियत को और बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिरों के बारे में, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है:

आदि बद्री मंदिर – शांत वातावरण में बसा प्राचीन धाम

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उत्तराखंड में स्थित आदि बद्री मंदिर प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर सरस्वती नदी के उद्गम क्षेत्र के पास स्थित है। यहां पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है और भक्तों को कुछ दूरी पैदल चलकर तय करनी पड़ती है। पहाड़ों के बीच बसे इस मंदिर की यात्रा श्रद्धा, धैर्य और प्रकृति के करीब जाने का अनुभव देती है। यहां का शांत वातावरण मन को सुकून और आध्यात्मिक शांति का एहसास कराता है।

 

मध्यमहेश्वर मंदिर – कठिन रास्तों के बीच आस्था का केंद्र

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित मध्यमहेश्वर मंदिर पंच केदारों में से एक है। यह मंदिर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों और सुंदर घाटियों के बीच स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है, क्योंकि सड़क मार्ग सीधे मंदिर तक नहीं पहुंचता। कठिन चढ़ाई के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। यह यात्रा धैर्य, भक्ति और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल मानी जाती है।

 

तुंगनाथ मंदिर – दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

तुंगनाथ मंदिर - विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

 

उत्तराखंड में स्थित तुंगनाथ मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर चंद्रशिला पर्वत के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को ऊबड़-खाबड़ और चढ़ाई वाले रास्तों से गुजरना पड़ता है। बादलों और पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। तुंगनाथ की यात्रा भक्तों को धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देती है।

 

वैष्णो देवी मंदिर – आस्था और विश्वास की कठिन यात्रा

Vaishno Devi Shrine: Where Spirituality, History, and Devotion Converge - माता वैष्णो देवी मंदिर की गुफा कितनी पुरानी है? जानिए इसका इतिहास | Jansatta

जम्मू-कश्मीर के कटरा में मां वैष्णो देवी मंदिर त्रिकूट पर्वत पर करीब 5,200 फीट की ऊंचाई पर बना है। माता रानी के दर्शन के लिए भक्तों को कठिन चढ़ाई और लंबी यात्रा पूरी करनी पड़ती है। रास्ते में कई मुश्किलों के बावजूद श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ आगे बढ़ते हैं। मान्यता है कि मां वैष्णो देवी के दर्शन करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

 

केदारनाथ मंदिर – हिमालय की गोद में शिव का पवित्र धाम

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच स्थित है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, क्योंकि मंदिर तक सीधा सड़क मार्ग नहीं है। खराब मौसम और कठिन रास्तों के बावजूद भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। केदारनाथ की यात्रा धैर्य, विश्वास और अटूट भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

 

जहां शोर नहीं सिर्फ श्लोक सुनाई देते है, भारत के इन 7 शांत पहाड़ी इलाकों में करें अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत!

भारत में कई ऐसी आध्यात्मिक और शांत जगहें हैं जो बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ से दूर हैं और जहां जाकर मन को गहरी शांति मिलती है। ये जगहें सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक और मानसिक सुकून के लिए भी बेहद खास मानी जाती हैं। आइए जानते है भारत की 8 ऐसी शांत और कम भीड़ वाली आध्यात्मिक जगहों के बारे में जहां की खूबसूरती आपका मन को शांति और सुकून देती है:

1. तवांग मठ (अरुणाचल प्रदेश)

Tawang Monastery India | Luxury Trails

भारत का सबसे बड़ा मठ है, जो 400 साल पुराण और तिब्बती बौद्ध धर्म से गहराई से जुड़ा हुआ है। अक्टूबर से अप्रैल सबसे अच्छा समय होता है। यहां बर्फ से ढके हिमालय के बीच 500 से अधिक भिक्षुओं की सुबह की प्रार्थनाएं और बौद्ध मंत्रों का एक्सपीरियंस मिलता है। तवांग मठ जाने के लिए तवांग टाउन में ₹1200–₹3000 तक के होटल और गेस्ट हाउस आसानी से मिल जाते हैं, जबकि खाना मोमोज, थुकपा और लोकल नॉर्थ-ईस्ट डिशेज के रूप में मिलता है। यहां पहुंचने के लिए गुवाहाटी से लंबा रोड ट्रिप करना पड़ता है और परमिट भी जरूरी होता है, जिससे जर्नी थोड़ी एडवेंचरस हो जाती है।

2.ऋषिकेश, उत्तराखंड(नीलकंठ महादेव एवं वशिष्ठ गुफा की ओर)

नीलकंठ महादेव मंदिर

ऋषिकेश का यह एरिया टूरिस्ट हब हो गया है, लेकिन ऊपरी तरफ जैसा नीलकंठ महादेव और वशिष्ठ गुफा अभी भी काफी शांतिपूर्ण है। सुबह 4 बजे गंगा आरती सिर्फ कम लोगों के साथ होती है, जहां सिर्फ घंटी और गंगा की आवाज सुनाई देती है। 2026 में सप्ताहांत वाहन जाना मना के बाद ये और भी चुप हो गया है। ऋषिकेश में रहने के लिए आश्रम और बजट होटल ₹500–₹3000 में मिल जाते हैं, और यहां का सात्विक भोजन बहुत सस्ता और शुद्ध शाकाहारी होता है। दिल्ली से यहां पहुंचना बहुत आसान है क्योंकि ट्रेन और बस दोनों सुविधाएं उपलब्ध हैं।

3. हम्पी,कर्नाटक (हेमकुटा पहाड़ी की ओर)

हंपी - विकिपीडिया

हम्पी का मुख्य मंदिर क्षेत्र बहुत भीड़भाड़ वाला है, लेकिन हेमकुटा हिल और अच्युतराय मंदिर के किनारे बिल्कुल शांत हैं। यहां 14वीं सदी के खंडहरों के बीच सूर्योदय ध्यान और तुंगभद्रा नदी की प्राकृतिक ध्वनि का एक्सपीरियंस मिलता है। रिवरसाइड होमस्टे ₹1500 में उपलब्ध हैं और यहां शोर-मुक्त नियमों का पालन होता है। हम्पी में रिवर साइड होमस्टे ₹800–₹2000 में मिल जाते हैं और यहां साउथ इंडियन खाना जैसे डोसा, इडली और स्थानीय थाली आसानी से उपलब्ध है। हुबली या होस्पेट से बस और ट्रेन के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है।

4. स्पीति घाटी, हिमाचल प्रदेश (की, धनकर, ताबो मठ)

स्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश) एक बार जरूर जाए - Tripoto

स्पीति के मठ जैसे की, धनकर और ताबो 1000 साल पुराने हैं और बेहद शांतिपूर्ण हैं। तबो मठ को “हिमालय का अजंता” भी कहा जाता है। यहां दिन में भी सिर्फ 10-15 लोग मिलते हैं। गर्मियों में नई शिमला-काजा रोड तक पहुंच आसान हो गई है, लेकिन सर्दियों में -20 डिग्री सेल्सियस के कारण पूरा सन्नाटा मिलता है। स्पीति घाटी में होमस्टे और बेसिक लॉज ₹1000–₹2500 में मिलते हैं, लेकिन यहां खाने के विकल्प सीमित होते हैं जैसे दाल, चावल और मैगी। मनाली या शिमला से रोड ट्रिप के जरिए यहां पहुंचना सबसे आसान तरीका है।

5. ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश

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ये ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच द्वीप पर बना है और उज्जैन जैसा भीड़भाड़ वाला नहीं है। सुबह की 7 किलोमीटर की परिक्रमा और मंदिर की घंटियों के साथ सिर्फ प्राकृतिक नदी की ध्वनि सुनाई देती है। 2026 में नया आध्यात्मिक गलियारा बना है, फिर भी ये जगह अभी भी काफी शांत है। ओंकारेश्वर में धर्मशालाएं ₹300–₹1000 में और होटल ₹1000–₹2000 में मिल जाते हैं, जबकि मंदिर के आसपास सस्ता शुद्ध शाकाहारी भोजन मिलता है। इंदौर से बस या टैक्सी के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है।

6. वेलानकन्नी चर्च,तमिलनाडु (समुद्रतट के पीछे का क्षेत्र)

वेलानकन्नी चर्च और समुद्र तट, उत्तान, भयंदर

चर्च क्षेत्र व्यस्त होता है, लेकिन 1 किमी का दरवाज़ा समुद्र तट के किनारे बिल्कुल शांत और शांतिपूर्ण है। लहरें और चर्च की घंटियों का मिश्रण एक आध्यात्मिक शांति का एहसास देता है। फरवरी-मार्च का समय सबसे अच्छा होता है जब त्योहार में भीड़ कम हो जाती है। वेलंकन्नी चर्च के आसपास ₹1200–₹3000 तक के होटल उपलब्ध हैं और यहां साउथ इंडियन खाना और कुछ जगहों पर सीफूड भी मिलता है। चेन्नई या तंजावुर से ट्रेन और बस द्वारा यहां पहुंचना आसान है।

7. माजुली द्वीप, असम

माजुली द्वीप में करने लायक चीज़ें: भारत का सबसे बड़ा नदी द्वीप - फुटलूज़ देव

दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, जहां वैष्णव सत्रों में भिक्षु भजन और रास-लीला करते हैं। यहां बांस की झोपड़ी, ब्रह्मपुत्र नदी और शाम के नाम-कीर्तन का शुद्ध मौन अनुभव मिलता है। गाड़ियाँ लगभग नहीं के बराबर हैं, इसलिए प्राकृतिक शांति मिलती है। माजुली द्वीप में बांस के बने इको-होमस्टे ₹800–₹2000 में मिल जाते हैं और यहां असमिया थाली, चावल, दाल और मछली का खाना मिलता है। जोरहाट से फेरी के जरिए इस शांत द्वीप पर पहुंचा जाता है, जो पूरी तरह प्राकृतिक और शांत अनुभव देता है।

भारत की ये सभी आध्यात्मिक जगहें सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि आत्मिक शांति और मानसिक सुकून पाने के बेहतरीन स्थान हैं। पहाड़ों से लेकर नदी द्वीप और प्राचीन मंदिरों तक, हर जगह एक अलग आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती है। अगर आप शहर की भागदौड़ और तनाव से दूर शांति चाहते हैं, तो ये जगहें 2026 में आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकती हैं।