Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: आज सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर भद्रा का साया, जानें कब से कब तक रहेगी भद्रा और पूजा कैसे करें

Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ मां पार्वती का आशीष पाने के लिए भी सबसे उत्तम समय माना जाता है। इसमें सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक और उपवास किया जाता है। वहीं, इस माह के सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत भी करते हैं। इस साल सावन माह के दूसरे मंगलवार को मंगला गौरी व्रत के साथ बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। सावन का दूसरा मंगला गौर व्रत इस माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रहा है, जिससे इस दिन सावन शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। मंगला गौरी व्रत के साथ शिवरात्रि का संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। लेकिन चिंता की बात ये है इस दिन भद्रा भी रहेगी। इसलिए आइए जानें, आज भद्रा का क्या समय है और पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा ?

सावन चतुर्दशी तिथि और समय

सावन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को सुबह 4.55 मिनट से लेकर रात में 1.52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि में सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त को रखा जाएगा। सावन शिवरात्रि पर इस दिन भद्रा भी लग रही है। सावन शिवरात्रि पर पूजा और व्रत संकल्प करने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त होगा, जो सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक रहेगा। इस दिन इसके बाद भद्रा काल शुरू हो जाएगा।

कब से कब तक भद्रा का प्रभाव?

12 अगस्त के दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। भद्रा का पृथ्वी पर निवास चंद्रमा से देखा जाता है। जब भी चंद्र ग्रह कर्क राशि में होते हैं तो पृथ्वी पर भद्रा निवास करती है। इस दिन भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा और यह सुबह 5:48 बजे सूर्योदय से लेकर दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। सावन शिवरात्रि, मंगला गौरी व्रत पर 9 घंटे से भी ज्यादा देर तक भद्रा रहेगी।

सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर शुभ योग

इस दिन शाम 6.51 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। सुबह 10:09 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, फिर पुष्य नक्षत्र रहेगा।

पूजा के उत्तम मुहूर्त

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:04 से 07:26 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:04 से 08:09 बजे तक

निशिता काल : रात 12:05 से 12:48 बजे तक

कैसे करें पूजा?

स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा करें। अगर व्रत रखना है तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर संध्या के समय घर के मंदिर में गोधूलि बेला में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर में भगवान शिव का अभिषेक करें। शिव, गौरी सहित शिव परिवार की विधिवत पूजा करें। अब सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें। फिर आरती करें। अंत में ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।

आज ये उपाय होंगे शुभ फलदायी

सावन शिवरात्रि पर 11 बेलपत्र पर सफेद चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखें और अपनी मनोकामना कहें। फिर शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

मंगला गौरी व्रत पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने से लिए शृंगार का सामान चढ़ाएं। शिव और गौरी चालीसा का पाठ करें।

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के महीने में सोमवार व्रत के साथ ही मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। कल यानी 11 अगस्त को इस साल का दूसरा मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना शिव भक्ति के साथ मां पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें आने वाले हर मंगलवार को महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुखी दांपत्य और जीवन में खुशहाली के लिए 5 खास उपाय विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक

विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक

संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक

पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें।

एक साफ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।

माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें: “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”

इसके बाद मां का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

मां मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। मां को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारियां, 16 इलायची, 16 चूड़ियां, सुहाग की 16 सामग्रियां, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।

व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।

भाग्य बदलने वाले 5 अचूक उपाय

16 श्रृंगार का दान : विवाह में रही बाधाएं दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं इस दिन मां मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दें।

लाल पुष्प और शहद : यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो मां मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

16 बत्तियों का दीपक : इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।

अन्न व वस्त्र दान : पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।

मंगल दोष शांत करने का उपाय : यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय मां को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बांट दें।

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Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा इस दिन, जानें सूतक काल का समय और प्रभाव

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक सामान्य लेकिन दिलचस्प खगोलीय घटना है। निश्चित अंतराल पर जब भी धरती, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आते हैं, तब सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते हैं। ग्रहण विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का आधार भी बनते हैं, तो तीनों खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का मौका भी देते हैं। विज्ञान के साथ-साथ इसके गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव माने जाते हैं।

हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी रहती हैं, इसलिए इस समय कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। इनमें से पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी-मार्च में हो चुका है। इसके अब दूसरा और अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा। इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन कर्क राशि में लगेगा।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त हरियाली अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा। भारतीय समयानुसार, ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।

कर्क राशि वाले रहें सतर्क

यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगने जा रहा है। इसलिए इस राशि पर इसका सबसे ज्यादा फर्क पड़ेगा। इस राशि के जातकों को सेहत, मानसिक तनाव और धन से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कर्क राशि पर 12 अगस्त से 15 दिन पहले और 15 दिन बाद तक बना रहेगा। सभी 12 राशियों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा।

किन-किन देशों में दिखाई देगा ग्रहण?

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन में देखा जाएगा। साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, इटली सहित यूरोप के कई देशों में भी यह आंशिक रूप से नजर आने वाला है।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।

ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

Mangala Gauri Vrat 2026: 3 शुभ योगों में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Mangala Gauri Vrat 2026: 3 शुभ योगों में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं जाना जाता है। इस माह में जहां सोमवार का विशेष महत्व है, उसी तरह मंगलवार के दिन का भी विशेष स्थान है। सावन माह में आने वाले सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मंगला गौरी व्रत से वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है और रिश्तों में मधुरता आती है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है।

यह व्रत माता पार्वती की कृपा पाने और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। अविवाहित कन्याएं मंगला गौरी व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। साल 2026 में सावन माह का पहला मंगलवार आज है, इसलिए आज मंगला गौरी व्रत किया जा रहा है। पंचांग के अनुसार सावन के पहले मंगला गौरी व्रत में तीन शुभ योग बनने से यह दिन और भी पावन हो गया है।

3 शुभ योगों का संयोग

पंचांग के अनुसार, सावन का पहला मंगला गौरी व्रत कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाएगा, जो रात 10:03 बजे तक रहेगी। सावन के पहले मंगल गौरी व्रत पर एक साथ तीन शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। ये तीनों शुभ योग 4 अगस्त की रात 9:54 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे संयोग में पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुबह से शाम 7:33 बजे तक धृति योग रहेगा और इसके बाद शूल योग शुरू होगा। वहीं रेवती नक्षत्र रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा।

मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त

मंगल गौरी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है, जबकि सामान्य पूजा का समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक माना गया है। जो लोग प्रदोष काल में पूजा करते हैं, वे शाम 7:10 बजे के बाद पूजा शुरू कर सकते हैं।

भद्रा और पंचक का रखें ध्यान

पहले मंगल गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक दोनों का संयोग भी बन रहा है। भद्रा 4 अगस्त रात 10:03 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी, इसलिए इसका शुभ कामों पर नकारात्मक असर नहीं माना जाता। वहीं, चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा। परंपरा के अनुसार, इस दौरान कीमती सामान का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

5 साल मंगला गौरी व्रत करने की परंपरा

मंगल गौरी व्रत विवाहित कन्याएं शादी के बाद 5 साल तक यह व्रत करती हैं। इस व्रत से जुड़ी पुरानी परंपरा के अनुसार, शादी के बाद जब पहला सावन आता है, तो महिला को पहला मंगल गौरी व्रत अपने मायके में रखना चाहिए। इसके बाद अगले चार साल तक यह व्रत ससुराल में रखा जाता है। यानी शादी के बाद लगातार पांच साल तक इस व्रत को करने की परंपरा बताई जाती है।

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Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। भगवान शिव के इस महीने में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त के दिन किया जाएगा। यह तिथि और यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और सभी परेशानियों व दोषों से मुक्ति मिलती है। जीवन में संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत विशेष अहमियत रखता है। कई विवाहित जोड़े सावन पुत्रदा एकादशी व्रत को बड़ी श्रद्धा और विध-विधान के साथ रखते हैं। वे भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी से संतान सुख के लिए आशीर्वाद, स्वास्थ्य और परिवार की खुशी की प्रार्थना करते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि प्रारंभ : 23 अगस्त 2026 को दोपहर 03:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 24 अगस्त 2026 को शाम 05:48 बजे तक

व्रत पारण का समय (अगले दिन): 24 अगस्त के व्रत का पारण 25 अगस्त को किया जाएगा

संतान प्राप्ति के लिए पूजा विधि

  • सावन पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा स्थल पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रखें।
  • तुलसी के पत्ते, फल, धूप, दीया और पानी चढ़ाएं।
  • पूजा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते रहें।
  • दंपत्ति इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं और सावन पुत्रदा एकादशी व्रत कथा भी सुन सकते हैं।
  • इस दिन चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन या शराब से पूरी तरह दूर रहें।

सावन पुत्रदा एकादशी के नियम

  • प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर दिनभर सात्विकता और संयम का पालन करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और फल अर्पित करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
  • दंपति एक साथ भगवान विष्णु से स्वस्थ, संस्कारी और सुखी संतान की कामना करें।

सावन पुत्रदा एकादशी पर क्या ना करें?

  • इस दिन तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन ना करें।
  • क्रोध, कटु वचन, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें।
  • व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों और विवाद से दूर रहें।
  • बिना कारण किसी जीव को कष्ट ना पहुंचाएं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए।

Gauri Vrat 2026 Date: आषाढ़ माह में कब किया जाएगा गौरी व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और समापन की तिथि

Gauri Vrat 2026 Date: आषाढ़ माह में कब किया जाएगा गौरी व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और समापन की तिथि

Gauri Vrat 2026 Date: आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सिर्फ देवशयनी एकादशी व्रत के लिए ही नहीं जानी जाती है। इसी दिन से 5 दिनों तक चलने वाला महिलाओं का एक कठिन व्रत भी शुरू होता है। इस व्रत को गौरी व्रत, जया पार्वती व्रत या मोरकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं दोनों के लिए बड़ा खास होता है। यह कठिन व्रत भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस व्रत के दिन विधि-विधान से माता पार्वती का पूजन किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि जया पार्वती का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर सुहागिन महिलाओं को पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य का वरदान प्राप्त होता है। यह व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, जया पार्वती व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू हो कर आषाढ़ पूर्णिमा तक किया जाता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत भी किया जाता है।

गौरी व्रत 2026 की महत्वपूर्ण तारीखें

व्रत का प्रारंभ (पहला दिन): 25 जुलाई 2026, शनिवार

व्रत का समापन (अंतिम दिन): 29 जुलाई 2026 (बुधवार)

पूजा के शुभ मुहूर्त

25 जुलाई 2026: पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं :

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:16 बजे से 04:57 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक

सुबह का शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 07:21 बजे से 09:03 बजे तक

प्रदोष काल (लाभ-उन्नति मुहूर्त): शाम 07:17 बजे से रात 08:34 बजे तक

गौरी व्रत का महत्व

योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी कन्याएं इस व्रत को नियम और श्रद्धा से रखकर माता गौरी और भगवान शिव से मनचाहा और योग्य वर पाने का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

सुखी वैवाहिक जीवन : विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में सुख, शांति, आपसी प्रेम और समृद्धि बनाए रखने के लिए यह व्रत करती हैं।

पूजा विधि की विशेषता : इस पांच दिवसीय व्रत के दौरान महिलाएं पवित्र मिट्टी से माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की प्रतिमा बनाती हैं, जवारे (अंकुर) बोती हैं और पांच दिनों तक सुबह-शाम नियमपूर्वक आरती और पूजा-अर्चना करती हैं।

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: इस साल सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत? तरीख सहित जानें पूजा विधि और उद्यापन के नियम