Karwa Chauth 2026: खुशहाल दांपत्य के लिए कब किया जाएगा करवाचौथ का व्रत? जानें सही तारीख, महत्व और पूजा विधि

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं का बेहद महत्वपूर्ण उपवास माना जाता है। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल दांपत्य के लिए करती हैं। इस व्रत में विवाहित मिहलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं, रात को चंद्र दर्शन, पूर्जा और अर्घ्य देने के बाद अपने उपवास का पारण करती हैं। हर साल करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश भगवान की पूजा और कथा सुनी जाती है। आइए जानें इस साल अखंड सौभाग्य का यह व्रत किस तारीख को किया जाएगा?

करवा चौथ 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1 बजकर 7 मिनट से आरंभ होगी और 29 अक्तूबर की रात 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा।

परिधि योग में होगा करवा चौथ का व्रत

इस साल अखंड सौभाग्य के व्रत करवा चौथ पर परिधि योग का निर्माण होगा। साथ ही, चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे और गौरी योग का भी संयोग बनेगा।

करवा चौथ व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक परंपराओं में करवा चौथ को दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य से जुड़ा व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती की आराधना करने से सुहाग की रक्षा और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस अवसर पर करवा माता के साथ भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, कुछ स्थानों पर अविवाहित कन्याओं द्वारा मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखने की परंपरा है।

करवा चौथ व्रत पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
  • कई स्थानों पर सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने की परंपरा है।
  • इसके बाद पूरे दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हुए भगवान का स्मरण करें।
  • शाम के समय पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
  • इसके बाद करवा माता की आराधना करें और दीपक जलाएं।
  • पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा का श्रवण करें।

च्रदोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें

शाम की पूजा पूरी होने के बाद चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा की जाती है। चंद्र दर्शन के समय छलनी के माध्यम से चंद्रमा को देखा जाता है और उन्हें जल अर्पित कर अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद इसी छलनी से पति का चेहरा देखने की परंपरा है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण किया जाता है।

पश्चिमी यूपी के लिए खुशखबरी! मेरठ से खुर्जा और सहारनपुर के बीच शुरू होंगी 2 नई मेमू ट्रेनें, देखें टाइमिंग, रूट चार्ट और पूरा शेड्यूल

20 घंटे की मेहनत, 351 किलो वजन और चार फीट ऊंचाई, बप्पा के लिए तैयार हुआ गणेशोत्सव का खास मोदक

मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता, आस्था और अनोखी भेंटों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार साकिनाका चा महाराजा के दरबार में बप्पा को मिली एक ऐसी भेंट ने सबका ध्यान खींच लिया, जो आकार में विशाल होने के साथ-साथ सोच में भी बेहद खास है। मुंबई के सबसे ऊंचे गणपति के लिए 351 किलो का चीनी-मुक्त मोदक तैयार किया गया, जिसे मशहूर शेफ हर्ष केडिया ने बनाया है।

करीब चार फीट ऊंचे इस विशाल मोदक को देखकर श्रद्धालुओं के लिए यह यकीन करना भी मुश्किल था कि यह वही पारंपरिक मिठाई है, जिसे गणेशोत्सव में भगवान गणेश को सबसे प्रिय भोगों में गिना जाता है।

20 घंटे की मेहनत, भक्ति से जुड़ी कहानी

इस अनोखे मोदक को तैयार करने में शेफ हर्ष केडिया ने करीब 20 घंटे लगाए। हर्ष केडिया को उनके शुगर-कॉन्शस और डायबिटिक-फ्रेंडली व्यंजनों के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस बार उन्होंने अपनी कला को सिर्फ एक विशाल मिठाई बनाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भक्ति और समावेशिता से जोड़ दिया। मोदक को पूरी तरह चीनी-मुक्त रखा गया, ताकि उम्रदराज, डायबिटीज से जूझ रहे और स्वास्थ्य के प्रति सजग श्रद्धालु भी प्रसाद का आनंद ले सकें।

पारंपरिक मोदक में चॉकलेट का मॉडर्न ट्विस्ट

इस विशाल मोदक को खास बनाने वाली एक और चीज थी इसकी अंतिम सजावट। इसके ऊपर भारत में उगाए गए कोको से तैयार चॉकलेट की परत चढ़ाई गई। यानी आकार और परंपरा में भारतीय, लेकिन प्रस्तुति में आधुनिक अंदाज। 351 किलो वजन वाला यह मोदक किसी आम पूजा की थाली में समा जाए, ऐसा तो संभव ही नहीं था। इसे बप्पा के विशाल पंडाल में विशेष भेंट के रूप में रखा गया, जहां श्रद्धालुओं की निगाहें बार-बार इस विशाल मिठाई पर टिकती रहीं।

‘यह मोदक मेरे लिए भावुक पल है’

शेफ हर्ष केडिया ने सोशल मीडिया पर इस भेंट से जुड़ी अपनी भावनाएं साझा करते हुए इसे महज एक पाक-कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि बप्पा के प्रति प्रेम और समर्पण बताया। उनके संदेश का भाव यही था कि यह मोदक उनके हाथों से निकलकर बप्पा के दरबार तक पहुंचा है और इसके पीछे ढेर सारा प्यार है।

जब प्रसाद बना सबके लिए

साकिनाका चा महाराजा की 42 फीट से अधिक ऊंची गणपति प्रतिमा के सामने रखा गया यह मोदक सिर्फ देखने की चीज बनकर नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, बाद में इसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।

Viral Video: सड़क पर अचानक लेट गया 200 किलो का Tiger, 30 Safari Jeeps को करना पड़ा इंतजार

 

लड्डू-मोदक छोड़ बैंकॉक की इस महिला ने गणेश जी को भोग लगाई ये स्पेशल टी! पूजा का अनोखा अंदाज हो रहा वायरल

बैंकॉक की रहने वाली इंस्टाग्राम यूजर पिया पिंग ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो में शहर के मशहूर शॉपिंग सेंटर यूनियन मॉल के बाहर बने भगवान गणेश के मंदिर की झलक दिखाई गई है। पिया पिंग भी भगवान गणेश के लिए प्रसाद लेकर पहुंची थीं।

गणेश जी को लड्डू-मोदक नहीं, चढ़ाई जाती है बबल टी! बैंकॉक की अनोखी भक्ति का VIDEO हुआ वायरल

भारत में भगवान गणेश को लड्डू और मोदक चढ़ाने की परंपरा आम है, लेकिन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भक्ति का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में श्रद्धालु गणेश जी की प्रतिमा के सामने लड्डू-मोदक की जगह बबल टी यानी बोबा मिल्क टी चढ़ाते नजर आए।

यूनियन मॉल के बाहर लगा है गणेश मंदिर

बैंकॉक की कंटेंट क्रिएटर पिया पिंग ने गणेश चतुर्थी के आसपास इंस्टाग्राम पर यह वीडियो शेयर किया। इसमें बैंकॉक के मशहूर यूनियन मॉल के बाहर स्थित गणेश जी के एक श्राइन को दिखाया गया है। प्रतिमा के आसपास बबल टी से भरे कई कप रखे नजर आते हैं।

पिया ने बताया कि थाईलैंड में कुछ श्रद्धालु गणेश जी को अपनी पसंद की चीज चढ़ाते हैं और यहां बबल टी इसी भावना से अर्पित की जाती है।

मनोकामना पूरी हो तो बढ़ा देते हैं चढ़ावा

वीडियो में पिया ने इस स्थानीय मान्यता के बारे में भी बताया। उनके मुताबिक, कुछ श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा गणेश जी के पास आते हैं और पहले से ज्यादा बबल टी चढ़ाते हैं। यानी अगर किसी ने तीन कप चढ़ाए थे, तो अगली बार छह और फिर 12 कप चढ़ाने की मान्यता है। इस तरह चढ़ावे की संख्या बढ़ती जाती है और कुछ मामलों में यह संख्या काफी ज्यादा भी हो सकती है।

‘जो पसंद है, वही भगवान को अर्पित’

पिया ने इस परंपरा को स्थानीय संस्कृति से जुड़ी आस्था बताते हुए कहा कि लोग ऐसी चीज भगवान को अर्पित करते हैं,जिसे वे खुद पसंद करते हैं और अपने लिए खास मानते हैं। यही वजह है कि भारत के लड्डू-मोदक से अलग बैंकॉक में बबल टी का चढ़ावा लोगों का ध्यान खींच रहा है।

थाईलैंड में भी लोकप्रिय हैं गणेश जी

भगवान गणेश की लोकप्रियता बैंकॉक तक सीमित नहीं है। थाईलैंड में कई प्रमुख गणेश मंदिर और श्राइन हैं, जहां स्थानीय लोगों के साथ दूसरे देशों से आने वाले श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। खासकर सफलता, करियर और रचनात्मक कार्यों में कामयाबी की इच्छा रखने वाले लोग गणेश जी की पूजा करते हैं।

View this post on Instagram

A post shared by Piya Ping (@piya_pu)

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- भक्ति भावना से होती है

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस अनोखे चढ़ावे पर दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने कहा कि भगवान के लिए चढ़ावे से ज्यादा मायने श्रद्धा और भावना की होती है। एक यूजर ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अमेरिका में गणेश जी को एप्पल डोनट भी चढ़ाया था। बैंकॉक में पले-बढ़े एक भारतीय हिंदू यूजर ने भी थाई लोगों की भक्ति की तारीफ करते हुए कहा कि अलग संस्कृति होने के बावजूद उनकी श्रद्धा का यह तरीका बेहद खूबसूरत है।

Viral Video: महीने के 2 लाख कमाओ और फिर रुक जाओ! शख्स की सलाह ने छेड़ी बहस

Budh Uday 2026: अपनी उच्च राशि कन्या में हुआ बुध का उदय, 4 राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ और करियर भरेगा तरक्की की उड़ान

Budh Uday 2026: ग्रहों के राजकुमार बुध का ज्योतिष शास्त्र में अहम स्थान है। यह ग्रह जातक के जीवन में बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है। कन्या बुध ग्रह की उच्च राशि मानी जाती है। यह ग्रह जब अपनी उच्च राशि में विराजमान होता है, इसका असर बहुत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। पंचांग एवं ज्योतिषीय गणना के अनुसार, बुद्धि, तर्क, वाणी और व्यापार के कारक बुध देव का अपनी उच्च राशि कन्या में उदय हो चुका है। ऐसे में कन्या राशि में बुध का उदय ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। बुध की मजबूत स्थिति का संबंध बुद्धि, विश्लेषण क्षमता, व्यापारिक समझ, वाणी और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि किसी पर इसका वास्तविक प्रभाव उसकी जन्मकुंडली में बुध की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है। बुध के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए भगवान गणेश की पूजा करें, उन्हें दूर्वा अर्पित करें और “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।

बुध उदय की तारीख और समय

पंचांग के अनुसार 14 सितंबर 2026 को बुध ग्रह रात 2 बजकर 52 मिनट पर कन्या राशि में उदय हुए हैं। कन्या राशि बुध की स्वराशि होने के साथ-साथ उनकी उच्च राशि भी मानी जाती है। ऐसे में कन्या राशि में बुध का उदय ज्योतिष की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

कन्या राशि : इस राशि के जातकों के लिए बुध का उदय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में आपकी समझदारी के साथ निर्णय लेने की क्षमता की सराहना हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की या बेहतर अवसर मिलने के योग बन सकते हैं।

मकर राशि : मकर राशि वालों के लिए बुध उदय आर्थिक और पेशेवर मोर्चे पर सकारात्मक बदलाव ला सकता है। लंबे समय से अटके काम गति पकड़ सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना बन सकती है। कारोबारियों को नए संपर्कों का लाभ मिल सकता है और व्यापार विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है।

सिंह राशि : बुध का उदय सिंह राशि के जातकों के लिए करियर में प्रगति के नए रास्ते खोल सकता है। आपकी बातचीत और नेतृत्व क्षमता का फायदा कार्यक्षेत्र में मिल सकता है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापार करने वालों को नए क्लाइंट या लाभदायक डील मिल सकती है।

वृश्चिक राशि : बुध का उदय इनके लिए भी शुभ परिणाम देने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग ला सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। कारोबार में नई रणनीति बनाने और उसे लागू करने का अच्छा समय मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत बन सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Jupiter Transit in Leo 2026: देवगुरु बृहस्पति करेंगे सिंह राशि में प्रवेश और 4 राशियों के लिए खुलेगा खजाने का ताला, जानें कौन सी हैं ये राशियां

Ganesh Chaturthi 2026: काजोल, प्रियंका चोपड़ा से लेकर अनन्या पांडे तक, बॉलीवुड ने दी फैंस को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं

Ganesh Chaturthi 2026: पूरा देश पूरे जोश और श्रद्धा के साथ गणेश चतुर्थी मना रहा है। वहीं बॉलीवुड सेलेब्रिटीज भी इस त्योहार के रंग में रंगे हुए हैं और अपने फैन्स को शुभकामनाएं दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिल से निकले मैसेज शेयर करने से लेकर अपने सेलिब्रेशन की झलकियां दिखाने तक, कई स्टार्स ने भगवान गणेश का आशीर्वाद लेकर और सभी के लिए खुशी और समृद्धि की कामना करते हुए इस शुभ अवसर को मनाया।

इन सेलेब्रिटीज में से अक्षय कुमार ने एक प्यारे नोट के साथ फैन्स को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं दीं। X पर एक्टर ने हिंदी में लिखा- “गणपति बप्पा के आगमन के साथ, हर घर में खुशियां आएं और हर दिल में शांति हो, गणपति बप्पा मोरया।”

करीना कपूर ने इंस्टाग्राम पर अपने सेलिब्रेशन की झलकियां शेयर कीं। हर साल की परंपरा को निभाते हुए एक्ट्रेस ने अपने पति सैफ अली खान और बेटों तैमूर और जेह के साथ मिलकर घर पर ही भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति बनाई। तस्वीरें शेयर करते हुए करीना ने लिखा- “मेरे जेह बाबा ने इसे बनाया है। सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं और शक्ति मिले!”

bollywoodganeshpuja1

बॉलीवुड स्टार और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी प्रशंसकों को अपनी भगवान गणेश की मूर्ति की एक झलक दी और लिखा- “गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।” प्रियंका चोपड़ा भले ही अभी लॉस एंजिल्स में हों, लेकिन वह त्योहार के जोश को अपनाना नहीं भूलीं। इस शुभ अवसर पर, एक्ट्रेस ने भगवान गणेश की एक तस्वीर शेयर की और अपने फ़ैन्स को “हैप्पी गणेश चतुर्थी” की बधाई दी।

नीतू कपूर ने पुरानी यादें ताज़ा करते हुए RK स्टूडियो में गणेश चतुर्थी के जश्न की एक पुरानी तस्वीर शेयर की। प्रोडक्शन हाउस के सदस्यों के साथ भगवान गणेश की ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीर शेयर करते हुए नीतू ने लिखा, “एक दुर्लभ तस्वीर… 60 के दशक के आखिर में RK स्टूडियो में गणेश चतुर्थी।”

View this post on Instagram

A post shared by Ananya (@ananyapanday)

View this post on Instagram

A post shared by Kajol Devgan (@kajol)

अनिल कपूर ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर भगवान गणेश की एक सुंदर पेंटिंग पोस्ट करके शुभकामनाएं दीं और लिखा, “सभी को गणेश चतुर्थी की बहुत-बहुत बधाई।” काजोल, अनन्या पांडे, अर्पिता खान, सिद्धार्थ मल्होत्रा समेत पूरा बॉलीवुड धूमधाम से गणेश उत्सव मना रहा है। पिछले कुछ सालों में, बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के बीच गणेश चतुर्थी का खास महत्व रहा है। हर साल, कई सितारे गणपति बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और दोस्तों और परिवार के साथ यह त्योहार मनाते हैं।

अगर भगवान गणेश नौकरी के लिए Resume बनाते तो क्या लिखते? देखें बप्पा का अनोखा CV

सोचिए, अगर भगवान गणेश का भी कोई Resume होता तो उसमें क्या-क्या लिखा होता? शायद सबसे ऊपर उनकी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर बुद्धि और ज्ञान का जिक्र होता। मुश्किल परिस्थितियों में रास्ता निकालने की क्षमता, नेतृत्व, धैर्य और विवेक जैसी खूबियां उनकी ‘स्किल्स’ में शामिल होतीं। और अगर बात पसंदीदा चीजों की आती, तो मोदक का नाम सबसे ऊपर होना तय है।

गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश के इन्हीं गुणों को एक रचनात्मक Resume के जरिए समझने की कोशिश की गई है। बप्पा के भक्तों के लिए उनका स्वरूप सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि वे बुद्धि, शुभता, समृद्धि और नई शुरुआत के प्रतीक भी माने जाते हैं।

आज घर-घर होगा बप्पा का स्वागत

सोमवार, 14 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। इस खास मौके पर भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित कर उनका स्वागत करते हैं। कई जगह बप्पा की भव्य झांकियां और पंडाल सजाए जाते हैं, वहीं घरों में परिवार के लोग मिलकर पूजा की तैयारियां करते हैं। गणपति स्थापना के बाद पूजा, आरती और प्रसाद का दौर शुरू होता है। भक्त भगवान गणेश को फूल, दूर्वा घास, मिठाइयां और विशेष रूप से मोदक अर्पित करते हैं।

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?

गणेश चतुर्थी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इस दिन को गणपति बप्पा के आगमन के पर्व के तौर पर बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर में गणेश प्रतिमा लाकर विधि-विधान से गणपति स्थापना की जाती है। इसके बाद भक्त बप्पा की आरती करते हैं और उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाते हैं।

बप्पा के आने से पहले घर में होती है खास तैयारी

गणेश चतुर्थी कई परिवारों के लिए भावनाओं से जुड़ा त्योहार है। बप्पा के स्वागत से पहले घर की सफाई की जाती है और पूजा के लिए एक विशेष स्थान तैयार किया जाता है। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा चुनी जाती है और पूजा की जरूरी सामग्री जुटाई जाती है। कई परिवार अपने घर को फूलों और सजावटी सामान से सजाते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई बप्पा के स्वागत की तैयारियों में उत्साह से शामिल होता है।

चतुर्थी पर चांद देखने की क्यों है मनाही?

गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक खास धार्मिक मान्यता चंद्र दर्शन को लेकर भी है। मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि के निर्धारित समय में चांद देखने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष या मिथ्या कलंक लग सकता है। धार्मिक मान्यता में मिथ्या कलंक का संबंध झूठे आरोप या बिना गलती के बदनामी से जोड़ा जाता है। इसलिए कई श्रद्धालु इस अवधि में चंद्र दर्शन से बचते हैं।

2026 में कब तक चांद देखने से बचें?

गणेश चतुर्थी 2026 के लिए चंद्र दर्शन से बचने का निर्धारित समय सुबह 9:01 बजे से रात 8:08 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले श्रद्धालु इस अवधि के दौरान चंद्रमा देखने से परहेज करते हैं।

trends (69)

बप्पा का Resume सबसे खास क्यों होगा?

अगर सच में भगवान गणेश का Resume बनाया जाए तो उसमें डिग्री या नौकरी के अनुभव से ज्यादा उनके गुणों की लंबी सूची होगी। बुद्धि, विवेक, धैर्य, नेतृत्व और बाधाओं को दूर करने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी खूबियां होंगी। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी सिर्फ बप्पा के स्वागत का पर्व नहीं, बल्कि उनसे प्रेरणा लेने का भी अवसर है। घर में गणपति का आगमन कई परिवारों के लिए नई उम्मीद, सकारात्मकता और शुभ शुरुआत का प्रतीक बन जाता है।

X पर भड़काऊ पोस्ट से कमाए 76 लाख रुपये! क्रिएटर ने बताया कैसे बना वायरल कंटेंट कमाई का जरिया

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश जी के आगमन पर मोदक के साथ-साथ इन चीजों का लगाएं भोग, बप्पा को हैं बेहद प्रिय

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। गणेशोत्सव बप्पा की पूजा के साथ ही उनकी पसंदीदा चीजों के भोग के बिना बिल्कुल अधूरा है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 तक मनाया जाने वाला है। इस खास मौके पर आप भी बप्पा के पसंदीदा प्रसाद का भोग लगाना मत भूलिएगा।

भोग में शामिल करें ये चीजें

मोदक

भगवान गणेश जी को सबसे ज्यादा प्रिय भोग मोदक है। चावल के आटे में गुड़ और नारियल की स्टफिंग से बने मोदक बप्पा को अर्पित करें। मावे से तैयार मोदक भी भोग की थाली में रख सकते हैं।

बेसन लड्डू

गणपति पूजा में लड्डू का भी विशेष महत्व होता है। शुद्ध घी से तैयार बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।

हलवा

सूजी, घी और ड्राई फ्रूट्स से तैयार हलवा भी बप्पा को बेहद प्रिय है। इसका भी भोग आप लगा सकते हैं।

मावा पेड़ा

आप केसर और इलायची के साथ बने हुए मावे के पेड़े को भी बप्पा को चढ़ा सकते हैं।

पूरण पोली

महाराष्ट्र की फेमस पूरण पोली भी गणेश उत्सव के भोग में खास जगह रकती है। चने की दाल और गुड़ से तैयार यह डिश स्वाद के साथ त्योहार की खासियत को बढ़ाती है।

नारियल

नारियल से बने प्रसाद भगवान गणेश को बेहद पसंद आते हैं। ताजा या फिर सूखे नारियल से बने लड्डू बप्पा के भोग में जरूर शामिल करें।

खीर

दूध, चावल या मखाने और ड्राई फ्रूट्स से बनी खीर भी बप्पा की प्रिय है। आप इसे भोग की थाली में शामिल कर सकते हैं।

मालपुआ

आटे या मैदा से तैयार मालपुआ भी गणपति पूजा में भोग के रूप में शामिल किए जाते हैं। इसे भी बप्पा का पसंदीदा भोग माना गया है।

विधि विधान से करें पूजा

ध्यान रहे भोग लगाते समय दूर्वा यानी दूब घास थाली में जरूर रखें। गणेश जी की पूजा में तुलसी नहीं प्रयोग की जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक गणेश पूजा में दूर्वा का बहुत महत्व होता है। अगर आप पूरा नैवेद्य तैयार करते हैं तो घर के बने सात्विक भोजन को ही थाली में शामिल करें। पूरी, सब्जी, दाल, चावल, खीर और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाएं। भोग बनाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

Ganesh Chaturthi 2026: जानें क्यों गणेश पूजा में वर्जित है तुलसी, इन चीजों को भी भूलकर न करें शामिल

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का त्योहार सोमनार 14 सितंबर को मनाया जाने वाला है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस दिन भक्त धूमधाम से अपने-अपने घरों में बप्पा का स्वागत करते हैं। ऐसे में पूजा के समय कुछ चीजों का बहुत ध्यान रखना होता है।

पूजा में शामिल न करें तुलसी

गणेश जी की पूजा में तुलसी वर्जित होती है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव के साथ-साथ गणेशजी की पूजा में भी तुलसी के पत्तों को मान्यता नहीं दी गई है। कथा में बताया गया है कि एक बार तुलसी को गणेशजी ने श्राप दिया था कि उनकी पूजा में तुलसी दल प्रयोग नहीं किया जाएगा। ऐसे में बप्पा की पूजा के दौरान इस का ध्यान जरूर रखें। गणेशजी को दूर्वा बेहद प्रिय है।

टूटे हुए अक्षत (चावल)

हिंदू धर्म में पूजा के दौरान अक्षत प्रयोग शुभ माना जाता है। अक्षत का मतलब होता है, जिसका क्षय न हो यानी टूटा न हो। ऐसे में भगवान गणेश को भूलकर भी टूटे हुए चावल न चढ़ाएं। उनकी पूजा में हमेशा अक्षत का यूज फलकारी होता है। इसके अलावा चावल पूजा में प्रयोग करने से पहले उन्हें गीला भी करें, सूखे चावल का प्रयोग शुभ नहीं माना गया है।

केतकी के फूल

भगवान शिव और गणेश जी की पूजा में केतकी के फूलों का प्रयोग वर्जित माना गया है। कथा और मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव ने केतकी के फूल को श्राप दिया है। यही कारण है कि उनके पुत्र की पूजा में भी इनका प्रयोग शुभ नहीं माना जाता है।

सफेद रंग की वस्तु

कथा के अनुसार इस तिथि पर ही एक बार चंद्रमा ने गणेशजी के रंग रूप का मजाक बनाया था। इससे क्रोधित होकर भगवान गणेश ने चंद्रदेव को श्राप दे दिया था। तब से गणेशजी और चंद्रदेव के संबंध अच्छे नहीं माने गए हैं। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर सफेद रंग की चीजें खासकर जो चंद्रमा से संबंधित होती हैं उन्हें अर्पित नहीं किया जाता है। इसके स्थान पर आप पीली वस्तुओं का प्रयोग कर सकते हैं।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश स्थापना तिथि से लेकर विसर्जन तक, जानें शुभ मुहूर्त, चंद दोष सब कुछ

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार 14 सितंबर को शुरू होगी, जब भगवान गणेश 11 दिनों के लिए पधारेंगे। भक्त गणेश जी की मूर्तियां घर लाएंगे, पारंपरिक पूजा करेंगे और बुद्धि, समृद्धि और बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद मांगेंगे।

गणेश चतुर्थी की मुख्य पूजा का मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। यह त्योहार शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होगा, जब भक्त भगवान गणेश को विदा करेंगे और मूर्तियों का विसर्जन करेंगे।

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

गणेश चतुर्थी सोमवार 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू महीने भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसे भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिनकी पूजा बुद्धि, समृद्धि, सौभाग्य और बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में की जाती है। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की शुरुआत और विसर्जन की तारीख

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को शुरू होगी। इस दिन भक्त तय ‘मुहूर्त’ समय में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। यह त्योहार पारंपरिक रूप से 11 दिनों तक चलता है। इसका समापन अनंत चतुर्दशी को होता है, जो शुक्रवार 25 सितंबर, 2026 को है। इस दिन गणेश विसर्जन किया जाता है, जिसमें मूर्तियों को जुलूस के साथ ले जाकर पानी में विसर्जित किया जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में 14 सितंबर को गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। यह शुभ समय लगभग 2 घंटे 28 मिनट का होता है। गणेश पूजा के लिए मध्याह्न का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि पारंपरिक रूप से माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म दिन के इसी समय हुआ था। जो भक्त घर पर यह त्योहार मनाते हैं, वे आमतौर पर इसी शुभ समय में मूर्ति स्थापना और पूजा करते हैं।

चतुर्थी तिथि कब शुरू और खत्म होती है?

चतुर्थी तिथि 14 सितंबर, 2026 को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। हालांकि यह तिथि अगली सुबह तक रहती है, लेकिन गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी। त्योहार का समय प्रचलित चंद्र तिथि और तय मध्याह्न समय के अनुसार तय किया जाता है।

गणेश विसर्जन 2026 कब है?

गणेश विसर्जन शुक्रवार, 25 सितंबर, 2026 को होगा। कई दिनों की पूजा और उत्सव के बाद, भक्त गणेश जी की मूर्तियों को जुलूस के साथ ले जाते हैं और फिर उन्हें पानी में विसर्जित करते हैं। यह रस्म भगवान गणेश की विदाई का प्रतीक है। हालांकि कई भक्त अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करते हैं, लेकिन कुछ परिवार और समुदाय छोटी परंपराओं का पालन करते हैं और एक, तीन, पांच या सात दिनों के बाद मूर्ति का विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से कब बचना चाहिए?

पारंपरिक मान्यता के अनुसार, नई दिल्ली में 14 सितंबर, 2026 को सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे के बीच भक्तों को चांद देखने से बचना चाहिए। यह मान्यता इस विश्वास से जुड़ी है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चांद देखने से ‘मिथ्या दोष’ लग सकता है, जिसका संबंध पारंपरिक रूप से झूठे आरोपों या लांछन से है।

यह रोक भगवान कृष्ण से जुड़ी एक पौराणिक कथा पर आधारित है। कथा के अनुसार, चतुर्थी के दिन चांद देखने के बाद कृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था। पारंपरिक रूप से इसी कहानी का हवाला दिया जाता है कि भक्त गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से क्यों बचते हैं।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

पूरे भारत में भक्तों के लिए गणेश चतुर्थी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। कई भक्त किसी भी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत गणेश जी का आशीर्वाद लेकर करते हैं, क्योंकि उन्हें ‘विघ्नहर्ता’ यानी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।

इस त्योहार के दौरान पूजा-अर्चना, मूर्ति स्थापना, सांस्कृतिक कार्यक्रम, परिवार का मिलना-जुलना और सामूहिक उत्सव जैसे आयोजन होते हैं। देश के कई हिस्सों में, खासकर महाराष्ट्र में, बड़े पैमाने पर सार्वजनिक उत्सव और शोभायात्राएं इस त्योहार का अहम हिस्सा होती हैं।

गणेश चतुर्थी 2026 में धार्मिक रीति-रिवाज, पारिवारिक परंपराएं और सार्वजनिक उत्सव एक साथ देखने को मिलेंगे, जब भक्त भगवान गणेश का अपने घरों और समुदायों में स्वागत करेंगे। जो लोग यह त्योहार मना रहे हैं, उनके लिए 14 सितंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रमा को न देखने की पाबंदी जैसी बातें ध्यान में रखना ज़रूरी है।