Hartalika Teej puja samagri list: 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत करने से पहले पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटा लें, इनके बिना अधूरा है अटल सुहाग का व्रत

Hartalika Teej puja samagri list: हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने के लिए निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल का उपवास) रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता हिमालय किसी और के साथ उनका विवाह न कर पाएं। यहां उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

हिंदू धर्म के इस प्रमुख व्रत में पूजा के लिए जरूरी समाग्री का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं इस उपवास की सभी सामग्री बहुत ध्यान से अर्जित करती हैं। आप भी यह व्रत करने जा रही हैं, तो सोमवार को व्रत शुरू करने से पहले एक बार यहां दी जा रही सामग्री सूची से अपनी सूची का मिलान कर लें। ताकि पूजा करते समय आपको कोई असुविधा न हो। आइए जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट और पूजा विधि

हरतालिका व्रत 2026 तारीख और समय

वर्ष 2026 में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक

हरतालिका तीज पूजन सामग्री लिस्ट

बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं

सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं)

रोली, चावल, कपूर, रुई, माचिस, मौली, हल्दी, चंदन, घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती, फल और मिठाइयां, खीर और हलवा, भिगोए हुए चने, पूजा के लिए कलश, जल और गंगाजल, पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी, 1 नारियल, दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें, गेहूं या चावल, एक चौकी या आसन, मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते, फूलों की माला और फूल, पान के पत्ते और सुपारी, कच्चा सूत

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि

प्रतिमा निर्माण : प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।

शृंगार व अर्पण : भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, चुनरी आदि) चढ़ाएं।

कथा व आरती : हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

रात का जागरण : इस व्रत में रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है।

पारण : अगले दिन सुबह विधिवत पूजा के बाद पंडित या बुजुर्गों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

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Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म के अत्यंत कठिन और प्रभावशाली उपवासों में से एक है हरतालिका तीज का व्रत। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पर्व के साथ किया जाएगा। इसे हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है। इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए शास्त्र सम्मत नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस व्रत के कुछ ऐसे नियम हैं, जिनकी अनदेखी अखंड सौभाग्य के लिए होने वाले इस व्रत को खंडित कर सकती है। आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए:

कथा सुनना न भूलें : हरतालिका तीज की पूजा बिना कथा सुने अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें, जिससे व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके।

काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें : हरतालिका तीज के व्रत में महिलाओं के शुभ रंगों के वस्त्र पहनने चाहिए। इस दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। तीज के पावन पर्व पर हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही सुहाग की सभी वस्तुएं पूरी निष्ठा के साथ मां पार्वती को अर्पित करें।

अन्न और जल का सेवन न करें : हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से निर्जला किया जाता है। एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद दिनभर जल या अन्न ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। हालांकि, यदि स्वास्थ्य कारणों से या गर्भावस्था की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से फलाहार का विकल्प चुना जा सकता है, लेकिन सामान्य स्थिति में अन्न-जल का त्याग ही नियम है।

क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी : व्रत के दिन मन, वाणी और कर्म से पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है। किसी पर भी गुस्सा न करें, अपशब्द न बोलें। घर में वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहें। इस दिन पूरी तरह से सात्विक आचरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए।

दिन में सोना वर्जित : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। इस पूरे दिन और रात के समय भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन व जागरण का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत के दौरान सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है।

Hartalika Teej Kab Hai 2026: 13 या 14 सितंबर, कब हरतालिका तीज व्रत करना होगा सही? जानिए तिथि के कंफ्यूजन पर क्या है शास्त्रानुसार समाधान