Sun Transit 2026: सूर्य इस दिन करने वाले हैं स्वराशि सिंह में गोचर, 4 राशियों के करियर और कारोबार में लगाएंगे चार चांद

Sun Transit 2026: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को यश, पिता और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति विशेष रूप से देखी जाती है। यह ग्रह जब राशि या नक्षत्र परिवर्तन करता है, तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। हर माह राशि परिवर्तन करने वाले इस ग्रह के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। अगस्त माह में सूर्य की सिंह संक्रांति होगी यानी सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि 17 अगस्त 2026 को सूर्य कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह गोचार विशेष रूप से चार राशि के जातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे उनके करियर और कारोबार में जबरदस्त उछाल आ सकता है। आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता पर पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने और आय के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

चार राशियों को होगा लाभ

मिथुन राशि : इस राशि के जातकों को यह परिवर्तन बड़ा ही शुभ परिणाम देने वाला रहेगा। इस दौरान व्यक्तित्व में निखार, आकर्षण और आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरीपेशा जातकों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, साथ ही प्रमोशन और वेतनवृद्धि के अवसर बनेंगे। व्यापारियों के लिए नई योजनाएं लाभदायक साबित हो सकती हैं।

सिंह राशि : ग्रहों के राजा सूर्य का यह परिवर्तन इस राशि के जातकों के लिए बड़ा शुभ परिणाम लेकर आया है। आय के नए स्रोत खुलने की संभावना है और लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आ सकती है। अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं, जिससे आर्थिक मजबूती मिलेगी।

तुला राशि : इस राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रह का यह गोचर सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान मानसिक तनाव कम होगा और शांति और संतुलन बना रहेगा। किस्मत का साथ मिलने के संकेत हैं। कार्य आसानी से पूरे हो सकते हैं। अविवाहित लोगों के रिश्तों में शुभ प्रगति होने की संभावना बन सकती है।

वृश्चिक राशि : इस राशि के जातकों के लिए आने वाला समय शुभ संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां दूर होने के योग बन रहे हैं और कार्यक्षेत्र में पदोन्नति के अवसर भी मिल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय बदलाव और प्रगति का साबित हो सकता है।

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दशकों बाद गंगा में हुआ बड़ा चमत्कार! लौटी सबसे कीमती हिल्सा मछली, जानिए क्यों है ये शुभ संकेत

उत्तर प्रदेश के चंदौली से एक अच्छी खबर सामने आई है। करीब तीन दशक बाद उत्तर प्रदेश के चंदौली में हिल्सा मछली दोबारा दिखाई दी है। पिछले कई सालों से इन इलाकों में नजर न आने वाली हिल्सा मछली अब गंगा नदी के मध्य और ऊपरी हिस्सों में फिर से दिखाई देने लगी है। हिल्सा की ये प्रजाति करीब 30 साल पहले गंगा के ऊपरी इलाकों से गायब हो गई थी और अब यहां दोबारा दिखाई दी है।अधिकारियों के मुताबिक, हिल्सा की वापसी नदी के बेहतर होते पर्यावरण और जलीय जीवों की बढ़ती बायोडायवर्सिटी का संकेत है। इसे गंगा नदी को फिर से स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-CIFRI) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में मार्कंडेय महादेव मंदिर के पास गंगा नदी से दो हिल्सा मछलियां मिली हैं। दोनों मछलियों का कुल वजन करीब 740 ग्राम था।

1975 में बैराज के बाद रुक गया रास्ता

पहले हिल्सा मछली बंगाल की खाड़ी से गंगा नदी के रास्ते वाराणसी, प्रयागराज और ऊपरी इलाकों तक पहुंचती थी। लेकिन 1975 में फरक्का बैराज बनने के बाद हिल्सा के नदी में आगे बढ़ने का रास्ता काफी हद तक रुक गया। इसके कारण मध्य और ऊपरी गंगा में हिल्सा की संख्या तेजी से घट गई और इस मछली पर निर्भर नदी किनारे रहने वाले मछुआरों को भी काफी नुकसान हुआ।

ICAR-CIFRI ने शुरु किया प्रोगाम

हिल्सा मछली का पर्यावरण और मछुआरों की कमाई में खास महत्व है। इसे देखते हुए ICAR-CIFRI, बैरकपुर और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने हिल्सा को गंगा में फिर से बढ़ाने के लिए लंबे समय का वैज्ञानिक कार्यक्रम शुरू किया। इसका मकसद हिल्सा के लिए बेहतर माहौल बनाना और नदी में इसकी संख्या बढ़ाना था। संस्थान के अनुसार, 2019 से जून 2026 के बीच हिल्सा की संख्या बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया। ICAR-CIFRI ने नदी में हिल्सा के पालन-पोषण और संख्या बढ़ाने, कृत्रिम प्रजनन, तैयार अंडों और स्पॉन को नदी में छोड़ने के साथ मछलियों की टैगिंग और उनकी निगरानी की। इस पूरी प्रक्रिया में नदी से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल किया गया।

मछलियों की हुई टैगिंग

इस अभियान के दौरान 3.85 लाख से ज्यादा छोटी और बड़ी हिल्सा मछलियों को नदी में छोड़ा गया। इसके अलावा, 40 लाख से अधिक निषेचित अंडे और करीब 9.4 लाख छोटे स्पॉन भी फरक्का बैराज के ऊपर नदी में छोड़े गए। मछलियों की टैगिंग और लगातार निगरानी से उनकी आवाजाही, जीवित रहने और एक जगह से दूसरी जगह जाने की जानकारी जुटाई गई। 2023 से 2025 के बीच निगरानी में हिल्सा की आवाजाही मिर्जापुर तक देखी गई, जिससे पता चला कि यह मछली धीरे-धीरे अपने पुराने इलाकों में वापस लौट रही है।

हिल्सा एक संवेदनशील प्रवासी मछली

विशेषज्ञों के मुताबिक, हिल्सा एक संवेदनशील प्रवासी मछली है और इसका नदी में दोबारा दिखना गंगा के पानी और उसके आसपास के वातावरण के बेहतर होने का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, ICAR-CIFRI और NMCG की साझेदारी में वैज्ञानिक शोध, नदी संरक्षण, मैदानी स्तर पर किए गए काम और स्थानीय लोगों की भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया। इस पहल से पता चलता है कि लगातार वैज्ञानिक प्रयास, संस्थाओं की जिम्मेदारी और मिलकर बनाई गई योजनाओं के जरिए नदी और उसके जलीय जीवन को बेहतर बनाने में सकारात्मक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।

हिल्सा की गंगा में दोबारा वापसी से दूसरी स्थानीय और प्रवासी मछलियों को भी नदी में फिर से बसाने की उम्मीद बढ़ी है। संस्थान के मुताबिक, इससे यह बात भी सामने आती है कि नदियों को केवल पानी के इस्तेमाल और प्रबंधन के साधन के रूप में नहीं, बल्कि एक पूरे जीवित पर्यावरण के तौर पर बचाना और संभालना जरूरी है।

पैसे टिकते नहीं तो हो रही है ये गलती, आपकी रसोई बना देगी अमीर! बस ये काम कभी न करें

रोटी हर भारतीय रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा है। कई लोग आटा बर्बाद न हो, इसलिए पहले से तय करके गिनती के हिसाब से रोटियां बनाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोटी या अन्न का इस तरह हिसाब लगाना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि रसोई में अपनाई गई छोटी-छोटी आदतें भी घर की सुख-समृद्धि, बरकत और सकारात्मक ऊर्जा पर असर डाल सकती हैं। रोटियां गिनकर बनाने से जुड़ी मान्यताएं और रसोई के कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम।

 

रोटियां गिनकर बनाना

सनातन परंपरा में अन्न को भगवान का स्वरूप और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद माना गया है। इसलिए भोजन को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना या परोसना अन्न का हिसाब लगाने जैसा माना जाता है। कहा जाता है कि इससे मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं, इसलिए भोजन का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

 

बरकत पर असर

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर की ऊर्जा पूरे घर को प्रभावित करती है। मान्यता है कि हर चीज का जरूरत से ज्यादा हिसाब रखा जाए, भोजन का, तो घर की बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे आर्थिक परेशानियां, धन की कमी और खर्च बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए रोटियां बनाते समय थोड़ा ज्यादा भोजन रखना शुभ माना जाता है।

 

सूर्य ग्रह का संबंध

ज्योतिष शास्त्र में गेहूं का संबंध सूर्य ग्रह से माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भोजन को गिनकर बनाने की आदत सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर सकती है। इसके कारण घर में तनाव, मनमुटाव और पारिवारिक मतभेद बढ़ने की संभावना बताई जाती है। हालांकि यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है।

 

पहली और आखिरी रोटी

वास्तु और धार्मिक परंपरा के अनुसार रोटी बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। लेकिन आखिर में बनने वाली रोटी कुत्ते, पक्षियों या अन्य जीवों के लिए अलग रखने की परंपरा भी है। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा व सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।

 

रोटी बनाने का तरीका

रोटी बनाने से पहले गर्म तवे पर पानी या दूध की कुछ बूंदें छिड़कना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही रोटियां बनाते समय साफ-सफाई, शांत मन और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसे वातावरण में बना भोजन परिवार के लिए शुभ फल देता है और घर का माहौल भी अच्छा बना रहता है।

 

आटा स्टोर करना

अगर घर के लिए आटा गूंधना हो, तो रोटियों की गिनती तय करने के बजाय परिवार के सदस्यों की जरूरत का अंदाजा लगाकर आटा निकालना बेहतर माना जाता है। साथ ही 2–3 रोटियां ज्यादा बनाना भी शुभ माना जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मेहमान, जरूरतमंद या पशु-पक्षी के लिए भोजन मिल सके।

 

बचे हुए आटे का नियम

वास्तु शास्त्र में गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक फ्रिज में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि बासी आटा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। इसलिए जितनी जरूरत हो उतना ही आटा गूंधें और ताजा भोजन बनाने की कोशिश करें। यह धार्मिक मान्यता होने के साथ-साथ ताजा भोजन खाने की अच्छी आदत भी मानी जाती है।